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WB हिंसा के खिलाफ Mamta की हुंकार: खुद जिरह करने पहुंचीं High Court

न्याय की दहलीज पर ममता: चुनावी हिंसा के खिलाफ खुद संभाली कानूनी कमान… Photo: ANI/File
न्याय की दहलीज पर ममता: चुनावी हिंसा के खिलाफ खुद संभाली कानूनी कमान… Photo: ANI/File

तहलका डेस्क।

नई दिल्ली/ कोलकाता। कलकत्ता उच्च न्यायालय के गलियारों में गुरुवार को उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की कमान संभालने वाली ममता बनर्जी खुद वकील की भूमिका में नजर आईं।

राज्य में विधानसभा चुनाव के उपरांत भड़की कथित हिंसा और पार्टी कार्यालयों को निशाना बनाए जाने के गंभीर मामलों पर अपना पक्ष रखने के लिए वे व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हुईं। पारंपरिक वकील के लिबास में पहुंचीं बनर्जी के साथ पार्टी के वरिष्ठ चेहरे चंद्रिमा भट्टाचार्य और कल्याण बनर्जी भी मौजूद रहे।

यह पूरी कानूनी लड़ाई वकील शीर्षन्या बंद्योपाध्याय द्वारा दायर उस जनहित याचिका के इर्द-गिर्द सिमटी है, जिसमें 2026 के चुनावी नतीजों के बाद टीएमसी कार्यकर्ताओं और दफ्तरों पर हुए हमलों का मुद्दा उठाया गया है। याचिका में बेहद संगीन दावे किए गए हैं; इसमें कहा गया है कि तृणमूल से जुड़ाव होने के कारण कई कार्यकर्ताओं को न केवल शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी, बल्कि उन्हें अपना घर-बार छोड़कर पलायन करने के लिए भी विवश किया गया। 12 मई को दाखिल की गई इस अर्जी पर मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थसारथी सेन की खंडपीठ सुनवाई कर रही है।

तृणमूल कांग्रेस ने इस कदम को अपनी नेता की प्रतिबद्धता से जोड़ते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किया कि उनकी अध्यक्ष भाजपा की बंगाल इकाई द्वारा फैलाई गई कथित हिंसा के खिलाफ मोर्चा लेने खुद अदालत पहुंची हैं। पार्टी के आधिकारिक बयान में उनके इस रुख को साहस और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के प्रति अटूट निष्ठा का परिचायक बताया गया है। टीएमसी का तर्क है कि मुश्किल घड़ी में अपने लोगों का साथ न छोड़ने की उनकी प्रवृत्ति ही उन्हें देश के अन्य राजनेताओं से अलग खड़ा करती है। भाजपा के कथित अड़ियल रवैये और अन्याय के विरुद्ध ममता बनर्जी का यह ‘लीगल अवतार’ अब प्रदेश की राजनीति में एक नई चर्चा का केंद्र बन गया है।

बंगाल में महिलाओं की सुरक्षा पर मंत्री अग्निमित्रा का बड़ा बयान, बोलीं- रात में भी बेखौफ निकलें महिलाएं

Agnimitra Paul | Image Source : PTI
Agnimitra Paul | Image Source : PTI

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की मंत्री Agnimitra Paul ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बड़ा भरोसा दिलाया है। विधानसभा में शपथ लेने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार चाहती है कि महिलाएं किसी भी समय बिना डर और झिझक के बाहर निकल सकें। उन्होंने कहा कि किसी महिला से यह पूछना कि वह रात में बाहर क्यों निकली, गलत सोच को दिखाता है।

अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि हर महिला को अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीने का अधिकार है। अगर कोई महिला किसी भी समय कहीं जाना चाहती है, तो उसे रोका नहीं जाना चाहिए। उन्होंने पुलिस को भी साफ संदेश देते हुए कहा कि महिलाओं की शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर दर्ज किया जाए और तुरंत कार्रवाई हो। उन्होंने ‘Zero FIR’ व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि महिलाएं किसी भी थाने में शिकायत दर्ज करा सकती हैं।

मंत्री ने राज्य में पारदर्शिता बढ़ाने और भ्रष्टाचार रोकने को लेकर भी बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि जल्द ही सभी नगर निकायों में सीसीटीवी निगरानी शुरू की जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे भ्रष्टाचार पर रोक लगाने और व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

इसके अलावा अग्निमित्रा पॉल ने अवैध गतिविधियों पर भी सख्त रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि राज्य में अवैध टोल प्लाजा चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उनका आरोप था कि पहले कुछ जगहों पर बांस लगाकर अवैध तरीके से वसूली की जा रही थी, लेकिन अब ऐसे अवरोध हटाए जा रहे हैं।

मंत्री ने यह भी कहा कि नदियों से अवैध रेत खनन और कोयला क्षेत्रों में गैरकानूनी खनन जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए सरकार ने जरूरी निर्देश जारी कर दिए हैं। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में इन मामलों पर सख्ती से कार्रवाई होगी।

साथ ही उन्होंने संकेत दिए कि हावड़ा और दुर्गापुर नगर निगम चुनाव जल्द कराए जा सकते हैं। महिलाओं की सुरक्षा, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण और अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सरकार अब ज्यादा सक्रिय नजर आ रही है।

वीडी सतीशन होंगे केरल के नए CM

Kerala New CM: केरल में मुख्यमंत्री के तौर पर कांग्रेस ने वीडी सतीशन के नाम का ऐलान कर दिया है. पिछले पांच सालों में सतीशन ने लेफ्ट फ्रंट के खिलाफ जमकर विधानसभा चुनाव प्रचार किया था…Pic Credit :PTI
Kerala New CM: केरल में मुख्यमंत्री के तौर पर कांग्रेस ने वीडी सतीशन के नाम का ऐलान कर दिया है. पिछले पांच सालों में सतीशन ने लेफ्ट फ्रंट के खिलाफ जमकर विधानसभा चुनाव प्रचार किया था…Pic Credit :PTI

नयी दिल्ली। केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नीत यूडीएफ (UDF) की शानदार जीत (140 में से 102 सीटें) के बाद, कांग्रेस आलाकमान ने वी.डी. सतीशन को राज्य का अगला मुख्यमंत्री नियुक्त करने का फैसला किया है।

लंबी मंत्रणा और पर्यवेक्षकों (अजय माकन, मुकुल वासनिक और दीपा दासमुंशी) की रिपोर्ट के आधार पर सतीशन के नाम पर मुहर लगी। उन्होंने मुख्यमंत्री पद की दौड़ में के.सी. वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला जैसे दिग्गजों को पीछे छोड़ते हुए पार्टी का भरोसा जीता है। यह निर्णय केरल कांग्रेस में एक नए नेतृत्व और ऊर्जा के संचार का प्रतीक माना जा रहा है।

सतीशन के अलावा कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल थे। बीते सात मई को कांग्रेस विधायक दल की बैठक में एक प्रस्ताव पारित कर पार्टी आलाकमान को विधायक दल के नेता के चयन के लिए अधिकृत किया गया था। केरल में हाल में संपन्न विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ने राज्य की कुल 140 सीट में से 102 पर जीत दर्ज की।

ताइवान पर शी जिनपिंग की ट्रंप को दो टूक, बोले- बढ़ा तनाव तो हो सकता है बड़ा संघर्ष

ताइवान पर शी जिनपिंग की ट्रंप को दो टूक... | Image Source: The Indian Express (file photo)
ताइवान पर शी जिनपिंग की ट्रंप को दो टूक... | Image Source: The Indian Express (file photo)

नई दिल्ली: बीजिंग में हुई अहम बैठक के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका को ताइवान मुद्दे पर गंभीर संदेश दिया। सरकारी मीडिया के मुताबिक, शी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कहा कि ताइवान को लेकर बढ़ते मतभेद दोनों देशों के रिश्तों को खतरनाक मोड़ तक ले जा सकते हैं।

करीब दो घंटे चली इस बंद कमरे की बैठक में दोनों नेताओं ने कई अहम मुद्दों पर चर्चा की। लेकिन सबसे ज्यादा ध्यान ताइवान को लेकर हुई बातचीत पर रहा। चीन लंबे समय से ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि अमेरिका ताइवान को लेकर लगातार समर्थन जताता रहा है। यही वजह है कि यह मुद्दा दोनों देशों के बीच तनाव की सबसे बड़ी वजह बन चुका है।

बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने कहा कि अगर ताइवान के मामले को समझदारी और संतुलन के साथ संभाला गया, तो अमेरिका और चीन के रिश्ते स्थिर रह सकते हैं। लेकिन अगर हालात बिगड़े, तो दोनों देशों के बीच टकराव और यहां तक कि संघर्ष की नौबत भी आ सकती है। चीन की तरफ से आया यह बयान काफी सख्त माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ताइवान केवल एक द्वीप का मामला नहीं है, बल्कि यह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शक्ति संतुलन से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। अमेरिका इस इलाके में अपने प्रभाव को बनाए रखना चाहता है, जबकि चीन ताइवान पर अपना दावा मजबूत करने में लगा है।

हाल के महीनों में चीन ने ताइवान के आसपास सैन्य गतिविधियां भी बढ़ाई हैं। दूसरी तरफ अमेरिका लगातार ताइवान को समर्थन और रक्षा सहयोग देता रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के बजाय बढ़ता नजर आ रहा है।

हालांकि बैठक के बाद दोनों देशों की तरफ से बातचीत जारी रखने की बात कही गई है, लेकिन शी जिनपिंग की चेतावनी ने साफ कर दिया है कि ताइवान का मुद्दा आने वाले समय में अमेरिका और चीन के रिश्तों के लिए सबसे बड़ा चुनौतीपूर्ण विषय बना रह सकता है।

निर्भया जैसे कांड की पुनरावृत्ति पर फिर दहली दिल्ली, 30 वर्षीय युवती से गैंगरेप

पुलिस द्वारा जब्त की गई बस | (फोटो- नईदुनिया प्रतिनिधि)
पुलिस द्वारा जब्त की गई बस | (फोटो- नईदुनिया प्रतिनिधि)

14 मई 2026, नई दिल्ली:   राजधानी दिल्ली के रानी बाग इलाके में बीते सोमवार की रात को 30 वर्षिय महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्मं की वारदात ने दिल्ली में महिलाओ की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगा दिये हैं।

 घटना की सच्चाई क्या है?

पुलिस में हुई शिकायत के अनुसार सोमवार रात को काम से लौटते वक्त पीडिता सरस्वती बिहार बस स्टांप के पास पहुंची.. इसी दौरान वहां खडी एक स्लीपर बस पर मौजूद व्यक्ति ने समय पूछने के बहाने उसे बुलाया और बस में खींच लिया। उसके बाद आरोपी बस को नांगलोई की ओर ले गए, जहां पर उस महिला के साथ दुष्कर्म किया गया । पीडिता पीतमपुरा के एक झुग्गी की रहने वाली है।वो मंगोलपुरी की एक फैक्ट्री में काम करती है। वो शादीशुदा है और उसके तीन बच्चे हैं।

पुलिस ने इस मामले में दोनों आरोपियो (ड्राइवर और कंडक्टर) को गिरफ्तार कर लिया है। जिस बस में वारदात हुई थी उसे जब्त कर लिया है। महिला की शिकायत पर महिला का मेडिकल हो गया है। और शिकायत पर पुलिस ने एफ आईआर दर्ज कर ली है। फिलहाल दिल्ली पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वारदात कैसे और किन परिस्थितियों में हुई।

शी जिनपिंग की चौखट पर Trump : ‘महाचर्चा’ पर टिकी दुनिया की निगाहें

ईरान संकट पर ट्रंप का मिशन बीजिंग: क्या रोक पाएंगे युद्ध? Pic Source : AP
ईरान संकट पर ट्रंप का मिशन बीजिंग: क्या रोक पाएंगे युद्ध? Pic Source : AP

तहलका डेस्क।

नई दिल्ली। बीजिंग की धरती पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आगमन चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ केवल एक कूटनीतिक वार्ता नहीं, बल्कि पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों को छांटने की एक बड़ी कवायद है।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस यात्रा के निहितार्थ स्पष्ट करते हुए संकेत दिया है कि वॉशिंगटन अब ईरान संकट के समाधान के लिए चीन से महज मूकदर्शक बने रहने के बजाय एक ‘सक्रिय भूमिका’ की उम्मीद कर रहा है। रुबियो का मानना है कि ट्रंप और शी चिनफिंग की मुलाकात इस दिशा में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है।

इस यात्रा की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग ने खुद हवाई अड्डे पर ट्रंप की अगवानी की, जो सामान्य प्रोटोकॉल से हटकर एक दुर्लभ सम्मान है।

बीजिंग की ओर बढ़ते हुए रुबियो ने स्पष्ट किया कि ईरान का वर्तमान रुख न केवल वैश्विक अस्थिरता का केंद्र है, बल्कि ऊर्जा के लिए समुद्री रास्तों पर निर्भर रहने वाले एशियाई देशों की अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ा खतरा है। अमेरिका का तर्क सीधा है: अगर फारस की खाड़ी में अशांति फैलती है, तो इसका सबसे बड़ा खामियाजा चीन जैसे ऊर्जा-आश्रित देशों को भुगतना होगा।

हालांकि, कूटनीति के इस मंच पर विरोधाभास भी साफ दिखे। जहाँ रुबियो चीन को सक्रिय करने की बात कह रहे हैं, वहीं ट्रंप ने अपने चिरपरिचित अंदाज में कहा कि उन्हें ईरान मामले में किसी की मदद की अनिवार्य जरूरत नहीं है और अमेरिका अपनी राह खुद बनाना जानता है।

फिर भी, रुबियो ने चीन को अमेरिका की सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती मानते हुए इस रिश्ते को दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण संबंध करार दिया। उन्होंने साफ किया कि अमेरिका चीन के उत्थान का विरोधी नहीं है, बशर्ते वह अमेरिकी हितों की कीमत पर न हो।

अब देखना यह है कि क्या बीजिंग अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर ईरान को पीछे हटने के लिए मजबूर करेगा, या यह शिखर वार्ता महज कूटनीतिक शिष्टाचार तक सीमित रह जाएगी।

NEET पेपर लीक पर दिल्ली में बवाल, युवा कांग्रेस ने सरकार को घेरा तो ABVP ने NTA पर उठाए सवाल

NEET पेपर लीक मामले पर युवा कांग्रेस ने सरकार को घेरा... | PC: Naveen Bansal
NEET पेपर लीक मामले पर युवा कांग्रेस ने सरकार को घेरा... | PC: Naveen Bansal

नई दिल्ली: दिल्ली में NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) ने केंद्र सरकार के खिलाफ बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। युवा कांग्रेस कार्यकर्ता दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष Akshay Lakra के नेतृत्व में पार्टी कार्यालय से रायसीना रोड की ओर मार्च निकाल रहे थे, लेकिन रास्ते में पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और NTA के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

PC: Naveen Bansal

प्रदर्शन के दौरान युवा कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि लगातार हो रहे पेपर लीक से छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ गया है। दिल्ली प्रदेश युवा कांग्रेस अध्यक्ष Akshay Lakra ने कहा कि जब से NTA बनी है, तब से परीक्षा प्रणाली पर सवाल लगातार बढ़ते जा रहे हैं। उनका कहना था कि लाखों छात्र सालों मेहनत करते हैं, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाएं उनकी उम्मीदों पर पानी फेर देती हैं।

Akshay Lakra ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि NEET का पेपर रद्द कर देना ही समाधान नहीं है। उन्होंने दावा किया कि पिछले कई वर्षों में कई बड़े पेपर लीक हुए हैं और इससे छात्रों में भारी निराशा फैली है। युवा कांग्रेस ने मांग की कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan इस्तीफा दें, छात्रों को मुआवजा मिले और पूरे मामले की संयुक्त संसदीय समिति (JPC) से जांच कराई जाए। साथ ही NTA की जगह किसी दूसरी सरकारी एजेंसी से परीक्षा कराने की मांग भी उठाई गई।

इस दौरान प्रदर्शन में राष्ट्रीय सचिव और दिल्ली सह प्रभारी Havran Kansana, राष्ट्रीय सचिव Ehsaan Ahmed, समेत अनेकों युवा कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

वहीं दूसरी ओर, Akhil Bhartiya Vidyarthi Parishad (ABVP) ने भी दिल्ली स्थित NTA मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। ABVP कार्यकर्ताओं ने कहा कि NEET जैसी राष्ट्रीय परीक्षा में पेपर लीक होना बेहद गंभीर मामला है और इससे लाखों छात्रों की मेहनत पर असर पड़ा है। संगठन ने पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच की मांग की।

ABVP ने यह भी कहा कि परीक्षा प्रबंधन में निजी एजेंसियों पर निर्भरता चिंता का विषय है। संगठन का मानना है कि संवेदनशील परीक्षाओं की जिम्मेदारी पूरी तरह सुरक्षित और जवाबदेह व्यवस्था के तहत होनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

तेल संकट के बीच PM मोदी का बड़ा फैसला, आधा हुआ काफिला; सरकारी खर्च पर भी लगेगी लगाम

तेल संकट के बीच PM मोदी का काफिला हुआ आधा... | Image Source: PTI
तेल संकट के बीच PM मोदी का काफिला हुआ आधा... | Image Source: PTI

नई दिल्ली: देश में बढ़ती महंगाई और वैश्विक संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईंधन बचत और खर्च में कटौती को लेकर बड़ा संदेश दिया है। सूत्रों के मुताबिक पीएम मोदी ने अपने काफिले में इस्तेमाल होने वाली गाड़ियों की संख्या आधी करने का निर्देश दिया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण दुनियाभर में तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है और भारत भी इसका असर महसूस कर रहा है।

जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री ने विशेष सुरक्षा दल यानी SPG को निर्देश दिया है कि सुरक्षा मानकों से समझौता किए बिना काफिले में कम गाड़ियों का इस्तेमाल किया जाए। साथ ही जहां संभव हो, नई गाड़ियां खरीदने के बजाय इलेक्ट्रिक वाहनों को शामिल करने पर जोर दिया गया है। बताया जा रहा है कि गुजरात और असम के हालिया दौरों में पीएम के काफिले में वाहनों की संख्या पहले ही कम की जा चुकी है।

सरकार के अंदर भी अब खर्च घटाने को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई मंत्रालय और विभाग आने वाले दिनों में कर्मचारियों को मेट्रो इस्तेमाल करने, कार पूलिंग अपनाने और बड़े सरकारी आयोजनों से बचने की सलाह दे सकते हैं। इसके अलावा ऑनलाइन बैठकों और वर्क फ्रॉम होम जैसे विकल्पों को भी बढ़ावा देने की तैयारी है।

प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में अपने संबोधन में लोगों से ईंधन का सीमित उपयोग करने और गैर-जरूरी सोने की खरीद से बचने की अपील की थी। उनका कहना था कि मौजूदा वैश्विक हालात में देश को आर्थिक रूप से मजबूत बनाए रखने के लिए हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने लोगों से स्थानीय और Made in India उत्पादों को अपनाने की भी बात कही।

कृषि क्षेत्र को लेकर भी प्रधानमंत्री ने किसानों से रासायनिक खाद का कम इस्तेमाल करने और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने का आग्रह किया। साथ ही डीजल पंपों की जगह सोलर पंप अपनाने पर भी जोर दिया गया।

सरकार का मानना है कि छोटे-छोटे स्तर पर की गई बचत आने वाले समय में देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में मदद कर सकती है।

नीट पेपर लीक: Kejriwal ने जवाबदेही पर घेरी सरकार

नई दिल्ली: पेपर लीक मामले में प्रेस वार्ता करते आप राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल…Pic Credit : Naveen Bansal
नई दिल्ली: पेपर लीक मामले में प्रेस वार्ता करते आप राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल…Pic Credit : Naveen Bansal

तहलका ब्यूरो।

नयी दिल्लीनीट परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने की गंभीर घटनाओं ने देश के लाखों अभ्यर्थियों के भरोसे को झकझोर कर रख दिया है। इस संवेदनशील मुद्दे पर अपनी आवाज बुलंद करते हुए आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने देश की नई पीढ़ी यानी ‘जेन जेड’ से व्यवस्था को चुनौती देने की अपील की है।

केजरीवाल का मानना है कि यदि हमारे पड़ोसी राष्ट्रों, बांग्लादेश और नेपाल के युवा अपनी राजनीतिक दिशा बदल सकते हैं और सत्ता की चूलें हिला सकते हैं, तो भारतीय युवाओं में भी यह क्षमता है कि वे इस भ्रष्टाचार के खिलाफ जवाबदेही तय करवा सकें।

केजरीवाल ने एक प्रेस वार्ता के दौरान बार-बार होने वाले पेपर लीक पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने तर्क दिया कि सिस्टम की इन खामियों ने न केवल छात्रों की मेहनत पर पानी फेरा है, बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी गहरी चोट पहुंचाई है। सीबीआई की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि अतीत की जांचों का कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है।

उन्होंने सीधे तौर पर आशंका जताई कि नीट मामले में भी सीबीआई की जांच केवल एक औपचारिकता बनकर रह जाएगी, क्योंकि इससे पहले हुए प्रश्नपत्र लीक मामलों में भी जांच एजेंसियां किसी निर्णायक निष्कर्ष तक पहुंचने या दोषियों को कठोर दंड दिलाने में विफल रही हैं।

वर्ष 2014 के बाद से हुई पेपर लीक की श्रृंखला का उल्लेख करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्यों में ऐसी घटनाएं प्रमुखता से देखी गई हैं, जिससे करोड़ों युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है।

तकनीक और सोशल मीडिया के दौर में पली-बढ़ी यह डिजिटल पीढ़ी, जिसे ‘जेन जेड’ कहा जाता है, अब चुप नहीं बैठ सकती। केजरीवाल के अनुसार, अब समय आ गया है कि यह युवा वर्ग सोशल मीडिया और जमीनी स्तर पर सक्रिय होकर सरकार पर पारदर्शिता और न्याय के लिए दबाव बनाए।

अचानक बिगड़ी तबीयत और चली गई जान, प्रतीक यादव की मौत पर बड़ा खुलासा

New Update on Prateek Yadav's sudden demise | Image Source: Rediff-TV
New Update on Prateek Yadav's sudden demise | Image Source: Rediff-TV

नई दिल्ली: प्रतीक यादव के अचानक निधन से राजनीतिक और सामाजिक हलकों में शोक की लहर है। परिवार के करीबी लोगों के मुताबिक उनकी तबीयत पिछले कुछ समय से ठीक नहीं चल रही थी। हाल ही में उन्हें मुंबई के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां फेफड़ों में क्लॉट की जांच और इलाज किया गया। इसके अलावा गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भी उनका उपचार हुआ था।

जानकारी के अनुसार, मौत के बाद जब उनका शव अस्पताल पहुंचा तो नाखूनों का रंग नीला पड़ा हुआ था। इसके बाद जहर जैसी आशंकाएं भी उठीं, लेकिन पोस्टमार्टम की शुरुआती रिपोर्ट में किसी तरह की संदिग्ध चीज सामने नहीं आई। अब डॉक्टरों का मानना है कि ऑक्सीजन की कमी और फेफड़ों में क्लॉट बनने की वजह से यह स्थिति हो सकती है।

फेफड़ों में क्लॉट बनने की बीमारी को मेडिकल भाषा में काफी गंभीर माना जाता है। डॉक्टरों के अनुसार, यह बीमारी अचानक जानलेवा रूप ले सकती है। कई बार शरीर के दूसरे हिस्सों में बना क्लॉट खून के जरिए फेफड़ों तक पहुंच जाता है और सांस लेने में दिक्कत पैदा करता है। अगर समय पर इलाज न मिले तो मरीज की हालत तेजी से बिगड़ सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने, क्लॉटिंग डिसऑर्डर या कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण यह बीमारी हो सकती है। हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं हुआ है कि प्रतीक यादव की मौत की असली वजह यही थी या नहीं। डॉक्टरों और जांच एजेंसियों की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी तस्वीर साफ हो पाएगी।

प्रतीक यादव राजनीति में ज्यादा सक्रिय नहीं थे, लेकिन सामाजिक और कारोबारी दुनिया में उनकी पहचान थी। उनके निधन के बाद परिवार और समर्थकों में गहरा दुख है।