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भारत-कनाडा रिश्तों की नई शुरुआत, यूरेनियम समझौते से बढ़ी दोस्ती

बैठक के बाद दोनों नेताओं ने साझा प्रेस बयान में कहा कि भारत और कनाडा के रिश्ते अब नए सिरे से आगे बढ़ेंगे। मार्क कार्नी ने बताया कि दोनों देश इस साल के अंत तक आर्थिक साझेदारी समझौते (Economic Partnership Agreement) को अंतिम रूप देने पर सहमत हुए हैं। इससे व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

पिछले कुछ वर्षों से भारत-कनाडा संबंधों में तनाव रहा है। 2023 में कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत पर सिख अलगाववादी नेता की हत्या से जुड़े आरोप लगाए थे, जिसके बाद रिश्तों में खटास आ गई थी। अब नई सरकार के साथ कनाडा ने भारत से फिर से संवाद और सहयोग बढ़ाने की पहल की है।

इस मुलाकात में दोनों देशों ने सिर्फ यूरेनियम ही नहीं, बल्कि कई और अहम क्षेत्रों में साथ काम करने पर सहमति जताई। इनमें क्रिटिकल मिनरल्स, स्वच्छ ऊर्जा (क्लीन एनर्जी), अंतरिक्ष क्षेत्र, नवाचार और उच्च शिक्षा शामिल हैं। पीएम मोदी ने कहा कि “कनाडा-भारत इनोवेशन पार्टनरशिप” के जरिए दोनों देश मिलकर वैश्विक समस्याओं के समाधान पर काम करेंगे।

यूरेनियम सप्लाई डील को खास तौर पर भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। इससे भारत को परमाणु ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी और स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्य को हासिल करने में मजबूती मिलेगी। वहीं कनाडा को भी भारत जैसे बड़े बाजार से आर्थिक फायदा होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौते दोनों देशों के बीच भरोसा बहाल करने की दिशा में बड़ा कदम हैं। साथ ही अमेरिका के साथ व्यापारिक दबाव के बीच कनाडा भारत को एक मजबूत साझेदार के रूप में देख रहा है।

शांति हम सबकी जिम्मेदारी… बोले एलजी मनोज सिन्हा, जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा पर बड़ा मंथन

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर में मौजूदा सुरक्षा हालात को लेकर उपराज्यपाल Manoj Sinha ने जम्मू में एक अहम समीक्षा बैठक की। इस बैठक में मुख्य सचिव, डीजीपी और केंद्र शासित प्रदेश के सभी जिलों के उपायुक्त (DC) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) मौजूद रहे। बैठक का मकसद पूरे जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति की गहराई से समीक्षा करना और आगे की रणनीति तय करना था।

बैठक के दौरान एलजी मनोज सिन्हा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में शांति बनाए रखना केवल सरकार या पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी समुदायों से अपील की कि वे शांति और भाईचारे को बनाए रखें और किसी भी अफवाह या तनाव फैलाने वाली बातों से दूर रहें।

एलजी ने जम्मू-कश्मीर पुलिस, सुरक्षा बलों और नागरिक प्रशासन की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि जिस तरह से सभी एजेंसियां मिलकर कानून-व्यवस्था बनाए रखने में जुटी हैं, वह काबिले-तारीफ है। उन्होंने इसे “एकजुट और मजबूत प्रयास” बताया और कहा कि यही वजह है कि प्रदेश में हालात नियंत्रण में हैं।

बैठक में पश्चिम एशिया (West Asia) की मौजूदा स्थिति पर भी चर्चा हुई। एलजी ने बताया कि सरकार वहां के हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन, विदेश मंत्रालय के साथ समन्वय में काम कर रहा है ताकि पश्चिम एशिया में रह रहे जम्मू-कश्मीर के लोगों और छात्रों की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित की जा सके।

एलजी मनोज सिन्हा ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि यह समय एकजुट रहने का है। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की अफवाहों पर भरोसा न करें और प्रशासन द्वारा जारी की जाने वाली आधिकारिक सूचनाओं पर ही ध्यान दें।

अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे अपने-अपने जिलों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करें और किसी भी संवेदनशील स्थिति से तुरंत निपटने के लिए तैयार रहें। साथ ही सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर फैलने वाली गलत सूचनाओं पर भी कड़ी नजर रखने को कहा गया।

दिल्ली के स्कूलों को फिर बम की धमकी, पुलिस और दमकल विभाग अलर्ट मोड पर

दिल्ली के स्कूलों को फिर बम की धमकी
दिल्ली के स्कूलों को फिर बम की धमकी

नई दिल्ली:दिल्ली के स्कूलों में एक बार फिर बम से उड़ाने की धमकी मिलने से हड़कंप मच गया है। सोमवार सुबह राजधानी के कई नामी स्कूलों को ईमेल के जरिए धमकी भेजी गई, जिसके बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां तुरंत हरकत में आ गईं। इस बार आर्मी पब्लिक स्कूल दिल्ली कैंट, सलवान पब्लिक स्कूल और मीरा पब्लिक स्कूल जनकपुरी को निशाना बनाया गया है।

जानकारी के मुताबिक, सुबह करीब 8 बजे स्कूल प्रशासन ने धमकी भरे ईमेल देखे और तुरंत दिल्ली पुलिस व दमकल विभाग को सूचना दी। अलर्ट मिलते ही पुलिस, बम निरोधक दस्ता और स्निफर डॉग टीम स्कूल परिसरों में पहुंच गई। सुरक्षा के लिहाज से स्कूलों के आसपास के इलाके को सील कर दिया गया और बच्चों व स्टाफ को सुरक्षित स्थानों पर रखा गया।

दमकल विभाग की टीम ने भी स्कूल की इमारतों की बारीकी से जांच की। हर क्लासरूम, कॉरिडोर और खुले मैदान को खंगाला गया ताकि किसी भी तरह की संदिग्ध वस्तु को समय रहते पकड़ा जा सके। राहत की बात यह रही कि शुरुआती जांच में अब तक कोई विस्फोटक या संदिग्ध सामान बरामद नहीं हुआ है।

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह धमकी भरा ईमेल किसने और कहां से भेजा। साइबर सेल ईमेल की ट्रेसिंग कर रही है ताकि आरोपी तक पहुंचा जा सके। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की धमकियों को हल्के में नहीं लिया जा सकता और हर सूचना पर पूरी गंभीरता से जांच की जा रही है।

यह पहली बार नहीं है जब दिल्ली के स्कूलों को इस तरह की धमकी मिली हो। पिछले हफ्ते भी धौला कुआं स्थित आर्मी पब्लिक स्कूल और लोधी रोड के एयर फोर्स बाल भारती स्कूल को बम की धमकी मिली थी। उस समय भी जांच के बाद कुछ नहीं मिला था, लेकिन बच्चों और अभिभावकों में डर का माहौल बन गया था।

इतना ही नहीं, इससे पहले दिल्ली सचिवालय, विधानसभा और लाल किले को भी धमकी मिल चुकी है। लगातार मिल रही ऐसी सूचनाओं से सुरक्षा एजेंसियां और ज्यादा सतर्क हो गई हैं।

ईरान-इजरायल जंग में हिज़्बुल्लाह की एंट्री, मिडिल ईस्ट में हालात और भड़के

Hezbollah also attacked Israel
Hezbollah also attacked Israel

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में चल रहा ईरान और इजरायल के बीच का संघर्ष अब और गंभीर होता दिख रहा है। ताजा घटनाक्रम में लेबनान के लड़ाकू संगठन हिज़्बुल्लाह के युद्ध में कूदने की खबर सामने आई है। इससे यह साफ हो गया है कि यह जंग अब सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे इलाके में फैलने का खतरा बढ़ गया है।

इजरायल की सेना ने दावा किया है कि लेबनान की ओर से उसके नउत्तरी शहरों की तरफ रॉकेट दागे गए, जिन्हें एयर डिफेंस सिस्टम ने रोक लिया। इन हमलों के बाद इजरायल में सायरन बजने लगे और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी गई। माना जा रहा है कि यह हमला हिज़्बुल्लाह की ओर से किया गया है, जो लंबे समय से ईरान का करीबी सहयोगी रहा है।

ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हालिया हवाई हमलों के बाद वहां हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। कई शहरों में धमाकों की खबरें आई हैं और सैन्य ठिकानों के साथ-साथ कुछ नागरिक इलाकों को भी नुकसान पहुंचा है। ईरान ने इन हमलों को सीधी आक्रामक कार्रवाई बताते हुए बदला लेने की चेतावनी दी है।

हिज़्बुल्लाह को ईरान का रणनीतिक साथी माना जाता है। कहा जाता है कि ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei के मार्गदर्शन में यह संगठन वर्षों से मजबूत हुआ है। अब जब ईरान पर सीधा हमला हुआ है, तो हिज़्बुल्लाह की सक्रियता से जंग और व्यापक रूप ले सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह टकराव यूं ही बढ़ता रहा, तो इसमें खाड़ी देशों और अमेरिका के सैन्य ठिकाने भी सीधे प्रभावित हो सकते हैं। पहले ही कुछ इलाकों में विस्फोटों की खबरें आई हैं, जिससे आम लोगों में डर का माहौल बन गया है।

इस पूरे घटनाक्रम ने दुनिया भर की चिंता बढ़ा दी है। संयुक्त राष्ट्र और कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। लेकिन जमीनी हालात बताते हैं कि फिलहाल तनाव कम होने के बजाय और तेज हो रहा है।

कतर में भारतीय नागरिक रहें सतर्क, दूतावास ने जारी की अहम एडवाइजरी

दूतावास की ओर से जारी एडवाइजरी में साफ कहा गया है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन हालात को देखते हुए एहतियात बेहद जरूरी है। भारतीय नागरिकों से अपील की गई है कि वे अनावश्यक रूप से बाहर न निकलें और सुरक्षित स्थानों पर ही रहें। खासतौर पर सैन्य ठिकानों और संवेदनशील इलाकों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है।

दूतावास ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसका कामकाज सामान्य रूप से जारी है और भारतीय नागरिकों की मदद के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं सक्रिय हैं। लोगों से कहा गया है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें। किसी भी आपात स्थिति में तुरंत दूतावास या स्थानीय अधिकारियों से संपर्क करें।

एडवाइजरी में यह भी कहा गया है कि अगर बहुत जरूरी न हो तो घर से बाहर निकलने से बचें। यात्रा करते समय सतर्क रहें और सार्वजनिक स्थानों पर भीड़ से दूर रहें। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है।

भारतीय दूतावास ने कतर में रह रहे नागरिकों के लिए 24 घंटे की हेल्पलाइन भी जारी की है। किसी भी परेशानी या आपात स्थिति में लोग हेल्पलाइन नंबर +00974-55647502 पर संपर्क कर सकते हैं या ईमेल के जरिए cons.doha@mea.gov.in पर जानकारी भेज सकते हैं।

भारत सरकार की यह सलाह केवल एहतियात के तौर पर जारी की गई है ताकि किसी भी संभावित खतरे से भारतीय नागरिकों को सुरक्षित रखा जा सके। दूतावास ने भरोसा दिलाया है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर आगे भी दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।

‘नारी से नारायणी’ राष्ट्रीय सम्मेलन, महिला नेतृत्व पर होगा राष्ट्रीय मंथन

Naveen Bansal
Naveen Bansal


अंजलि भाटिया नई दिल्ली, 28 फरवरी: भारतीय नारी की शक्ति, नेतृत्व और समाज निर्माण में उसकी निर्णायक भूमिका को केंद्र में रखते हुए 7 और 8 मार्च को दिल्ली में नारी से नारायणी राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। यह दो दिवसीय सम्मेलन देशभर की महिला विचारकों, शिक्षाविदों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को एक मंच पर लाएगा, जहां महिला सशक्तिकरण को सांस्कृतिक और राष्ट्रीय दृष्टि से नए आयाम देने पर व्यापक चर्चा होगी।

यह कार्यक्रम विज्ञान भवन में आयोजित किया जाएगा। उद्घाटन दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता करेंगी, जबकि समापन समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी।


आयोजन की जानकारी राष्ट्र सेविका समिति, शरण्या और भारतीय विद्वत परिषद के पदाधिकारियों ने दी। समिति की प्रमुख कार्यवाहिका सीता गायत्री अनायदानम ने कहा कि यह सम्मेलन भारतीय नारी की सकारात्मक शक्ति को संगठित करने का एक ठोस प्रयास है। भारतीय दृष्टि में महिला और पुरुष समान शक्ति के दो रूप हैं, जो मिलकर समाज के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करते हैं।


इस अवसर पर राष्ट्र सेविका समिति की दिल्ली प्रांत प्रमुख रचना वाजपेयी ने बताया कि सम्मेलन में प्रमुख संचालिका शांता अनायदानम, साध्वी ऋतंभरा, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह, धर्मेंद्र प्रधान, तथा अन्नपूर्णा देवी सहित अनेक प्रमुख अतिथि भाग लेंगे। आयोजन से प्राप्त सुझावों को संबंधित सरकारी विभागों तक भेजा जाएगा, ताकि महिला नेतृत्व को नीति स्तर पर भी मजबूती मिल सके।

ईरान पर अमेरिका-इज़रायल का बड़ा हमला, मिडिल ईस्ट में युद्ध जैसे हालात

तेहरान में यूनिवर्सिटी स्ट्रीट और जोम्हूरी इलाके में मिसाइलें गिरने की पुष्टि हुई है। शहर के कई हिस्सों में धुएं के गुबार देखे गए। ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि हमलों में सैन्य ठिकानों के साथ-साथ कुछ नागरिक ढांचों को भी नुकसान पहुंचा है। ईरानी अधिकारियों ने साफ कहा है कि यह हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसका “कड़ा जवाब” दिया जाएगा।

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि यह कार्रवाई ईरान से आने वाले “तत्काल खतरे” को खत्म करने के लिए की गई है। वहीं इज़रायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने इसे देश की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बताया और इसे “संयुक्त कार्रवाई” करार दिया।

हमले के बाद इज़रायल में सायरन बजने लगे और आपातकाल घोषित कर दिया गया। कई मिसाइलें इज़रायल की ओर बढ़ीं, जिन्हें एयर डिफेंस सिस्टम से रोकने की कोशिश की गई। इसके साथ ही कतर, बहरीन, कुवैत और यूएई जैसे खाड़ी देशों में भी धमाकों की खबर आई है। ईरान का दावा है कि उसने इन देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।

कतर के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसने अपने इलाके में होने वाले कई हमलों को नाकाम कर दिया है। वहीं यूएई की राजधानी अबू धाबी में मिसाइल रोकने के दौरान एक व्यक्ति की मौत की खबर सामने आई है। सऊदी अरब की राजधानी रियाद में भी विस्फोटों की आवाज सुनी गई।

तेहरान में संचार सेवाएं बाधित हो गई हैं और कई इलाकों में मोबाइल नेटवर्क बंद बताया जा रहा है। इज़रायल ने अपना हवाई क्षेत्र नागरिक उड़ानों के लिए बंद कर दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह टकराव केवल ईरान और इज़रायल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट को अपनी चपेट में ले सकता है। दोनों देशों के तीखे बयानों और लगातार हो रहे हमलों से साफ है कि हालात बेहद गंभीर हो चुके हैं और दुनिया की नजरें अब इस संघर्ष पर टिकी हुई हैं।

केजरीवाल-सिसोदिया को मिली राहत पर CBI का पलटवार, हाईकोर्ट में अपील तय

नई दिल्ली: आबकारी नीति मामले को लेकर एक बार फिर सियासी और कानूनी हलचल तेज हो गई है। अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत 21 आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ अब CBI ने दिल्ली हाईकोर्ट में तुरंत अपील करने का फैसला किया है। अधिकारियों के मुताबिक, एजेंसी का मानना है कि निचली अदालत ने जांच के कई अहम पहलुओं को नजरअंदाज कर दिया है।

CBI के प्रवक्ता ने कहा कि अदालत के फैसले में जांच से जुड़े कई जरूरी तथ्यों पर ठीक से विचार नहीं किया गया। इसी वजह से इस मामले को उच्च न्यायालय में चुनौती देना जरूरी हो गया है। एजेंसी का दावा है कि उसके पास ऐसे सबूत और दस्तावेज हैं, जिन पर दोबारा गौर किया जाना चाहिए।

शुक्रवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शराब नीति से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और के. कविता सहित सभी 21 आरोपियों को आरोपों से मुक्त कर दिया था। कोर्ट ने चार्जशीट को संज्ञान लेने से इनकार करते हुए कहा था कि आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद नहीं है।

विशेष न्यायाधीश ने अपने फैसले में यह भी कहा था कि केजरीवाल के खिलाफ कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया और सिसोदिया व अन्य आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता। कोर्ट ने जांच में खामियों को लेकर CBI पर नाराजगी भी जताई थी।

CBI इस फैसले से संतुष्ट नहीं है और अब वह Delhi High Court का रुख करेगी। एजेंसी का कहना है कि शराब नीति के निर्माण और लागू करने की प्रक्रिया में गड़बड़ियों की गहराई से जांच की गई थी और कई बिंदु ऐसे हैं, जिन पर पुनर्विचार जरूरी है।

‘किसान सारथी’ ऐप से घर बैठे मिलेगी खेती की सलाह, सीधे एक्सपर्ट से जुड़ेंगे किसान

नई दिल्ली: किसानों के लिए राहत और तकनीक का नया रास्ता खुल गया है। अब खेती से जुड़ी किसी भी समस्या के समाधान के लिए उन्हें दफ्तरों या कृषि केंद्रों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। Indian Council of Agricultural Research (आईसीएआर) ने किसानों की मदद के लिए ‘किसान सारथी’ मोबाइल ऐप लॉन्च किया है, जिसके जरिए किसान सीधे कृषि और पशु विज्ञान के विशेषज्ञों से जुड़ सकेंगे।

इस ऐप की सबसे खास बात यह है कि किसान अपने मोबाइल से ही सवाल भेज सकते हैं। अगर फसल में कोई बीमारी लग गई हो, कीटों का प्रकोप हो या पशुओं से जुड़ी कोई परेशानी हो, तो किसान उसकी जानकारी लिखकर भेज सकते हैं। चाहें तो खेत या फसल की फोटो भी अपलोड कर सकते हैं, जिससे वैज्ञानिक सही तरीके से समस्या को समझ सकें।

किसान द्वारा भेजा गया सवाल संबंधित जिले के कृषि विज्ञान केंद्र या आईसीएआर के विशेषज्ञों तक पहुंचेगा। वहां से वैज्ञानिक समस्या का विश्लेषण कर समाधान बताएंगे। जरूरत पड़ने पर किसानों को फोन या मैसेज के जरिए भी मार्गदर्शन दिया जाएगा। इससे किसानों को समय पर सही सलाह मिल सकेगी और फसल खराब होने से बचाई जा सकेगी।

कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों का कहना है कि यह ऐप किसानों और वैज्ञानिकों के बीच सीधा संवाद स्थापित करेगा। इससे पौध रोग प्रबंधन, कीट नियंत्रण, मिट्टी की जांच, पशु देखभाल और आधुनिक खेती की तकनीकों की जानकारी एक ही जगह मिल सकेगी। किसानों को अब अलग-अलग दफ्तरों में जाकर पूछताछ करने की जरूरत नहीं होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म से खेती को वैज्ञानिक आधार मिलेगा। सही समय पर सलाह मिलने से उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आमदनी में भी सुधार होगा। खासकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह ऐप बहुत उपयोगी साबित हो सकता है, जो दूर-दराज के इलाकों में रहते हैं।

शराब नीति केस में बड़ी राहत: केजरीवाल-सिसोदिया बरी, CBI को कोर्ट की फटकार

विशेष न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि चार्जशीट में कई गंभीर खामियां हैं और लगाए गए आरोप किसी गवाह या ठोस बयान से साबित नहीं हो पा रहे हैं। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि बिना पुख्ता साक्ष्य के नेताओं को इस मामले में घसीटा गया। इसी आधार पर केजरीवाल और सिसोदिया समेत कुल 23 आरोपियों को डिस्चार्ज कर दिया गया।

कोर्ट ने कहा कि मनीष सिसोदिया के खिलाफ प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता और अरविंद केजरीवाल को भी बिना ठोस प्रमाण के आरोपी बनाया गया। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि निष्पक्ष सुनवाई के लिए निष्पक्ष जांच जरूरी होती है, लेकिन इस केस में जांच एजेंसी अपने आरोप साबित करने में असफल रही।

दरअसल, यह मामला 2022 में सामने आया था, जब दिल्ली सरकार की नई शराब नीति को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे। सीबीआई ने दावा किया था कि नीति में बदलाव के बदले कुछ लोगों ने लगभग 100 करोड़ रुपये की रिश्वत दी थी और इसे एक “साजिश” के तहत अंजाम दिया गया। इसके बाद कई नेताओं और कारोबारियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।

इस केस में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को पहले गिरफ्तार भी किया गया था। लंबे समय तक यह मामला राजनीतिक और कानूनी बहस का केंद्र बना रहा। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने बार-बार कहा कि आरोप सिर्फ अंदाजों पर आधारित हैं और कोई सीधा सबूत मौजूद नहीं है।

अब कोर्ट के फैसले के बाद आम आदमी पार्टी ने इसे सच्चाई की जीत बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह फैसला साबित करता है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप राजनीति से प्रेरित थे।

दूसरी ओर, सीबीआई की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। कोर्ट की सख्त टिप्पणियों से यह साफ हो गया है कि जांच में कई कमियां रहीं। आने वाले दिनों में यह फैसला देश की राजनीति और कानूनी व्यवस्था में एक अहम उदाहरण माना जाएगा।

फिलहाल, केजरीवाल और सिसोदिया दोनों के लिए यह फैसला बड़ी राहत लेकर आया है और लंबे समय से चल रहे इस हाई-प्रोफाइल केस का एक अध्याय खत्म हो गया है।