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जीएसटी की केवल दो दरें अधिक लाभदायक: आईएमएफ

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने माल एवं सेवा कर (जीएसटी) को भारत का “महत्वपूर्ण सुधार” सुधार बताया पर साथ में यह भी कहा कि जीएसटी के ढांचे को और सरल बना कर इसमें कर की केवल दो दरें रखना अधिक लाभदायक होगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक़आईएमएफ ने कहा है कि इसमें कर की दरों की संख्या ज्यादा रहने से अनुपालन और कर प्रशासन की लगात बढ़ती है।

आईएमएफ ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा कि जीएसटी में दो दरों वाली कर संचरना (दो कर स्लैब) होनी चाहिये, जिसमें एक मानक दर हो जिसका स्तर कम हो तथा दूसरी दर चुनिंदा वस्तुओं के लिए हो जो ऊंची हो। इससे जीएसटी प्रणाली प्रगतिशील होगी और इसमें राजस्व निरपेक्षता भी बनी रहेगी।

मुद्रा कोष ने कहा कि भारत की कर नीति में जीएसटी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इसने केंद्र और राज्यों के विभिन्न अप्रत्यक्ष करों को एकीकृत करने और उनमें सामंजस्य बठाने का काम किया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ऐसे पांच देशों के समूह में शुमार है, जहां चार या उससे अधिक जीएसटी दरें हैं। अधिक दरों और अन्य सुविधाओं की वजह से भारत के जीएसटी प्रणाली में उच्च अनुपालन और अधिक प्रशासनिक लागत आ रही है।

पीटीआई भाषा की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत के आईएमएफ मिशन प्रमुख रानिल सलगादो ने कहा कि जीएसटी ने व्यापार के लिये आंतरिक बाधाओं को कम करके पहली बार एक एकीकृत राष्ट्रीय बाजार बनाया है। जिससे 1.3 अरब से अधिक आबादी वाले बाजार में एक मुक्त व्यापार समझौता स्थापित हुआ है।

जीएसटी में इस समय चार दरें , पांच, 12, 18 और 28 प्रतिशत लागू है। सरकार और जीएसटी परिषद के सदस्यों ने संकेत दिया है कि दरों की संख्या आगे चल कर घटायी जा सकती है।

मुंबई रिफाइनरी में लगी आग अब काबू में

चेंबूर माहुल गांव स्थित भारत पेट्रोलियम हाइड्रो पॉवर प्लांट में लगी आग पर अब नियंत्रण पा लिया गया है।
फायर ब्रिगेड के अनुसार 70 प्रतिशत आग पर काबू पाने में उन्हें सफलता मिली है।
आग को बुझाने के लिए फॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है। फायर ब्रिगेड ने 2 फॉर्म टेंडर भेजे हैं।
भारत पेट्रोलियम प्लांट में लगी आग पर काबू पाना बहुत ही आवश्यक था क्योंकि भारत पेट्रोलियम के बगल में न सिर्फ हिंदुस्तान पेट्रोलियम है बल्कि माहुल गांव के इलाके में तेल के अनेक टैंक्स हैं।
इसी इलाके में गवाणपाड़ा और विष्णु नगर जैसे स्लम एरिया भी है।  ऐसे में यदि इस आग पर काबू नहीं पाया जाता तो एक बड़ी दुर्घटना हो सकती थी ।
आई विटनेस के अनुसार इस विस्फोट की तीव्रता इतनी तेज थी कि कई किलोमीटर दूर सायन  तक इस विस्फोट की आवाज सुनाई दी।
BPCL से मिली सूचना के  अनुसार रिफाइनरी के हाइड्रो कक्कर प्लांट के कंप्रेसर में 3:00 बजे के करीब आग लगी।
इस दुर्घटना में 2 कर्मचारी मामूली रूप में जख्मी हुए हैं।
रिफाइनरी के मेडिकल सेंटर में प्राथमिक उपचार  के बाद अस्पताल भेज दिया गया है।
सूत्रों के अनुसार प्लांट के कर्मचारियों को  दुर्घटनास्थल से सुरक्षित  बाहर निकाल दिया गया है।

पंचतत्व में देह और अमर हो के नारे

तिरंगे में लिपटी करूणानिधि की पार्थिव देह जब मरीना बीच पहुँची वहां उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देने पहुँची हर आँख नाम थी। समर्थक दूर खड़े रो रहे थे। तमिल राजनीति के पितामह करूणानिधि के तमाम परिजन, जिनमें एमके स्टालिन भी हैं, वहां मौजूद थे। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, फ़ारूक़ अब्दुल्ला, गुलाम नबी आज़ाद सहित कई मुख्यमंत्री और बड़े नेता वहां मौजूद थे। दफ़नाने से पहले करूणानिधि के शव पर फूल चढ़ाकर उन्हें नेताओं ने अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्हें २१ तोपों की सलामी दी गयी। ठीक 7.03 बजे करूणानिधि की पार्थिव देह को मातमी धुन के बीच पास में बनी कबर में पूरे राजकीय सम्मान के साथ दफना दिया गया।

इस तरह तमिलनाडु की राजनीति में एक लम्बे युग का अंत हो गया। पिछले डेढ़ साल में प्रदेश की राजनीति के दो बड़े नाम जय जयललिता और अब करूणानिधि परिदृश्य से गायब हो गए हैं। स्टालिन के अलावा एआईडीएमके और फिल्मों से राजनीति में आये रजनीकांत, कमल हासन जैसे नेता अब तमिल राजनीति के नए चेहरों के तौर पर सामने हैं।

इससे पहले राजाजी हॉल, जहाँ करूणानिधि का शव मरीना बीच ले जाने से पहले अंतिम दर्शन के लिओए रखा गया था, में भारी भीड़ ले चलते भगदड़ मचने से 2 लोगों की मौत हो गई है। इस भगदड़ में चार दर्जन लोग घायल हो गए। इस बीच करूणानिधि का शव मरीना बीच ले जाने की तैयारी कर ली गयी हैं उन्हें चार बजे के करीब दफनाया जाएगा। इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राजाजी हाल पहुंचकर वरिष्ठ नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की।

श्रद्धांजलि देने के लिए राजाजी हॉल में लाखों लोग उमड़ पड़े है। इस दौरान पुलिस और भीड़ के बीच धक्कामुक्की होने से वहां भड़दड मच गयी। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज भी किया। इसमें कई लोगों के घायल होने की रिपोर्ट है।

सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अभिनेता रजनीकांत और कमल हासन ने भी दिवगंत नेता को अंतिम विदाई दी। वहां बढ़ती भीड़ को देखकर पुलिस ने राजाजी हॉल में प्रवेश पर रोक लगा दी जिससे खफा डीएमके समर्थक दीवार फांदकर अंदर घुसने की कोशिश करने लगे। इसी बीच पुलिस ने लाठीचार्ज किया।

इससे पहले मद्रास हाईकोर्ट ने कुछ घंटे की कोर्ट में चली लड़ाई में करूणानिधि को मरीना बीच पर पर दफ़न करने की हरी झंडी दे दी। इस मसले को लेकर सूबे में तनाव की स्थिति बन गयी थी क्योंकि एआईडीएमके सरकार ने करूणानिधि को मरीना बीच पर दफ़न करने का कुछ कारण देकर विरोध किया था। हालाँकि कोर्ट ने बुधवार को कुछ घंटे की सुनवाई के बाद डीएमके की अप्पील को मंजूर करते हुए करूणानिधि को मरीना बीच पर दफ़न करने की इज़ाज़त दे दी। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी करूणानिधि के अंतिम दर्शन के लिए कुछ देर पहले चेनेई पहुँच गए हैं जबकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी अंतिम संस्कार में शामिल होंगे।

मद्रास हाई कोर्ट ने इसकी मंजूरी दी है। इस तरह तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और दिवंगत डीएमके नेता एम करुणानिधि के पार्थिव शरीर को मरीना बीच पर ही दफ़नाया जाएगा। मद्रास हाईकोर्ट में मंगलवार और बुधवार सुबह कुछ घंटे चली सुनवाई के बाद करुणानिधि को अन्नादुरई की समाधि के बगल में दफनाने की अनुमति मिल गयी।

करूणानिधि को दफ़नाने के स्थान को लेकर मंगलवार रात हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के घर पर सुनवाई शुरू हुई थी, जिसे सुबह तक के लिए स्थगित कर दिया गया था। अदालत ने राज्य सरकार से इस पर जवाब मांगा था। डीएमके चाहती थी कि उनके नेता के शव को मरीना बीच पर जगह मिले, जहां तमिलनाडु की राजनीति के दिग्गजों के शव दफ़नाए गए थे हालांकि प्रदेश की एआईएडीएमके सरकार ने इसकी अनुमति नहीं दी थी जिसके बाद डीएमके कोर्ट में गयी थी। पूर्व मुख्यमंत्री एम जी रामचंद्रन और उनकी बेहद करीबी जे जयललिता मरीना बीच पर ही दफन किए गए थे और वहीं उनके स्मारक बनाए गए। ये दोनों राजनीति में करुणानिधि के कट्टर विरोधी थे।

एक की मौत, सौ से ज्यादा श्रद्धालु फंसे

हिमाचल की राजधानी शिमला में पहुँची रिपोर्ट्स के मुताबिक किन्नर कैलाश यात्रा पर गए एक और श्रद्धालु की गुफा नामक स्थान पर मौत हो गई है। यही नहीं सौ से ज्यादा श्रद्धालु वहां फंसे हुए हैं जिन्हें सेना, आईटीबीपी, पुलिस और होमगार्ड जवानों की मदद से रेस्क्यू किया जा रहा है। खराब मौसम के चलते यात्रा को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया गया है।

मिली जानकारी के मुताबिक किन्नर कैलाश यात्रा में जिस श्रद्धालु की जान गयी है उसकी पहचान संजय (60), निवासी मुजफ्फरपुर के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि मौत हाईफ़ोथर्मिया से हुई है। शव को घटनास्थल से लाने का प्रयास किया जा रहा है। शव को रेस्क्यू टीम सड़क मार्ग तक पहुंचाने का प्रयास करेगी कि किन्नौर ज़िला मुख्यालय के समीप पोवारी से पैदल यात्रा आरंभ होती है। किन्नौर प्रशासन ने 2 से 11 अगस्त तक के लिए आधिकारिक तौर से यात्रा शुरू की थी। किन्नौर जिला मुख्यालय रिकांगपिओ के ठीक सामने से हो कर गुजरती है।

किन्नर कैलाश की ऊंचाई 19850 फीट है। खड़ी चढ़ाई होने के कारण यहां पहुंचना काफी कठिन होता है। प्रशासन ने विकट मौसम की स्थिति में किसी भी समय यात्रा रोकने की चेतावनी दी थी। क्षेत्र में लगातार हो रही भारी बारिश को देखते हुए डीसी किन्नौर ने यात्रा को स्थगित करने के निर्देश दिए हैं। बताया जा रहा है कि यात्रा मार्ग में लगातार तेज बारिश हो रही है जिस से ठंड अधिक हो गई है। और यात्रा करना मुश्किल हो रहा है। किन्नौर ज़िला प्रशासन के प्रवक्ता ने बताया कि यात्रा को पूर्ण रूप से रोक दिया गया है। रास्ते मे फंसे श्रद्धालुओं को निकालने के लिए सेना और अर्द्ध सैनिक बलों के जवानों की टीम बना कर रेस्क्यू के लिए रवाना कर दी है।

दिल्ली के मोतीनगर में कांवडियों का उत्पात

विलम्ब से मिली जानकारी के मुताबिक नई दिल्ली के मोतीनगर इलाके में कांवडियों ने जमकर उत्पात मचाया। उन्होंने सड़क से गुजरते हुए सड़क पर खड़े वाहनों में तोड़ फोड़ की। दिलचस्प बात यह है कि उस समय वहां पुलिस मौजूद थी लेकिन वह मूकदर्शक बनी रही।

रिपोर्ट्स के मुताबिक भगवान शिव में आस्था रखने वाले कांवडियों ने नई दिल्ली के मोती नगर मेट्रो स्टेशन के पास यह सब किया। वहां कावड़ियों का काफिला सड़क से गुजर रहा था। इस बीच अचानक एक कार किसी कावड़िए को छू गई और उसके हाथ में पकडे लोटे से थोड़ा जल बाहर गिर गया। इसी बात से वो आग बबूला हो उठे। फिर क्या था कावड़िए का गुस्सा फूट पड़ा और देखते ही देखते कार पर उन्होंने डंडे बरसाने शुरू कर दिए। कार के शीशे तोड़ने के बाद गुस्साए कावड़ियों ने कार की खिड़कियां तक तोड़ डाली।

कुछ लोगों ने कार भी ज़मीन पर पलट दी। गनीमत यह रही कि कार चला रहा व्यक्ति सुरक्षित उतर गया था। शिव भक्त जब यह तांडव कर रहे थे उस समय दिल्ली पुलिस के कर्मी मूक दर्शक बन कर चुपचाप देख रहे थे। उत्पात करने वालों को नहीं रोका। कांवड़ियों के उत्पात से वहां दहशत का माहौल बन गया। पुलिस का कहना है कि इस सम्बन्ध में कोइ मामला दर्ज नहीं क्योंकि पीड़ितों की तरफ से शिकायत ही दर्ज नहीं करवाई गयी है।

बिहार की मंत्री मंजू वर्मा का इस्तीफ़ा

विपक्ष की लगातार मांग के बाद आखिर बिहार की समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा ने अपने पद से बुधवार शाम इस्तीफा दे दिया। बालिका गृह यौनशोषण मामले में उनका और पति चंद्रेश्वर वर्मा का नाम आने के बाद विपक्ष जोरदार तरीके से उनके इस्तीफे की मांग कर रहा था।

मंजू वर्मा ने बुधवार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलकर उन्हें इस्तीफा सौंप दिया है। सीबीआइ की चल रही जांच में मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर के कॉल डिटेल्स खंगालने के बाद ये सामने आया था कि मंजू वर्मा की ब्रजेश से बात होती थी। मंत्री ने खुद मंगलवार को ये स्वीकार किया था कि उनकी बालिका गृह मामले के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर से बात होती थी हालांकि उनका दावा था कि उनकी बात सिर्फ विभागीय मामलों से सम्बंधित होती थी। मंजू ने कहा था कि कभी कभार उनके पति भी कॉल रिसीव कर लिया करते थे।

गौरतलब है कि ब्रजेश ठाकुर के मोबाइल फोन के सीडीआर से खुलासा हुआ था कि जनवरी से अब तक मंजू वर्मा से ब्रजेश ठाकुर की 17 बार बात हुई है। इस बीच जेडीयू ने मंजू के इस्तीफे पर कहा है कि उनने आधार पर इस्तीफा दिया है। खुलासे के बाद से ही मुजफ्फरपुर बालिका गृह मामले को लेकर बिहार की समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा पर इस्तीफे का दवाब बन रहा था और विपक्ष लगातार इसकी मांग कर रहा था।

मुख्यमंत्री नीतीश ने सोमवार को कहा था कि किसी को अकारण जिम्मेदार ठहराकर इस्तीफ़ा कैसे लिया जा सकता है। हालांकि इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा था कि अगर कुछ भी साक्ष्य सामने आता है तो वो इस्तीफ़ा लेने में देर नहीं करेंगे। अब आखिर मंजू का इस्तीफा हो ही गया।

दिल्ली में अब भीख मांगना हुआ अपराध की श्रेणी से बाहर

अब राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भीख मांगने को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस कृत्य को दंडित करने के प्रावधान असंवैधानिक बताया और उन्हें रद्द करने को कहा।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरि शंकर की एक पीठ ने कहा कि इस फैसले का अपरिहार्य नतीजा यह होगा कि इस अपराध के कथित आरोपी के खिलाफ बंबई के भीख मांगना रोकथाम कानून के तहत लंबित मुकदमा रद्द किया जा सकेगा।

अदालत ने कहा कि इस मामले के सामाजिक और आर्थिक पहलू पर अनुभव आधारित विचार करने के बाद दिल्ली सरकार भीख के लिए मजबूर करने वाले गिरोहों पर काबू के लिए वैकल्पिक कानून लाने को स्वतंत्र है।

अदालत ने 16 मई को पूछा था कि ऐसे देश में भीख मांगना अपराध कैसे हो सकता है जहां सरकार भोजन या नौकरियां प्रदान करने में असमर्थ है।

उच्च न्यायालय भीख को अपराध की श्रेणी से हटाने की मांग वाली दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था।

पीटीआई भाषा की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ केंद्र सरकार ने कहा था कि बंबई के भीख मांगने पर रोकथाम कानून में पर्याप्त संतुलन है। इस कानून के तहत भीख मांगना अपराध की श्रेणी में है।

हर्ष मंडर और कर्णिका साहनी की जनहित याचिकाओं में राष्ट्रीय राजधानी में भिखारियों के लिए मूलभूत मानवीय और मौलिक अधिकार मुहैया कराए जाने का अनुरोध किया गया था।

याचिकाकर्ताओं ने बंबई के भीख मांगने पर रोकथाम कानून को भी चुनौती दी है।

राजाजी हाल में भगदड़, २ की मौत

करूणानिधि की मौत के बाद पूरे तमिलनाडु से लाखों की तादाद में लोग अपने प्रिय नेता को अंतिम विदाई देने चेन्नई पहुँच रहे हैं। इसी दौरान बुधवार को राजाजी हॉल, जहाँ करूणानिधि का शव मरीना बीच ले जाने से पहले अंतिम दर्शन के लिओए रखा गया था, में भारी भीड़ ले चलते भगदड़ मचने से 2 लोगों की मौत हो गई है। इस भगदड़ में चार दर्जन लोग घायल हो गए। इस बीच करूणानिधि का शव मरीना बीच ले जाने की तैयारी कर ली गयी हैं उन्हें चार बजे के करीब दफनाया जाएगा। इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राजाजी हाल पहुंचकर वरिष्ठ नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की।
श्रद्धांजलि देने के लिए राजाजी हॉल में लाखों लोग उमड़ पड़े है। इस दौरान पुलिस और भीड़ के बीच धक्कामुक्की होने से वहां भड़दड मच गयी। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज भी किया। इसमें कई लोगों के घायल होने की रिपोर्ट है।

सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अभिनेता रजनीकांत और कमल हासन ने भी दिवगंत नेता को अंतिम विदाई दी। वहां बढ़ती भीड़ को देखकर पुलिस ने राजाजी हॉल में प्रवेश पर रोक लगा दी जिससे खफा डीएमके समर्थक दीवार फांदकर अंदर घुसने की कोशिश करने लगे। इसी बीच पुलिस ने लाठीचार्ज किया।

इससे पहले मद्रास हाईकोर्ट ने कुछ घंटे की कोर्ट में चली लड़ाई में करूणानिधि को मरीना बीच पर पर दफ़न करने की हरी झंडी दे दी। इस मसले को लेकर सूबे में तनाव की स्थिति बन गयी थी क्योंकि एआईडीएमके सरकार ने करूणानिधि को मरीना बीच पर दफ़न करने का कुछ कारण देकर विरोध किया था। हालाँकि कोर्ट ने बुधवार को कुछ घंटे की सुनवाई के बाद डीएमके की अप्पील को मंजूर करते हुए करूणानिधि को मरीना बीच पर दफ़न करने की इज़ाज़त दे दी। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी करूणानिधि के अंतिम दर्शन के लिए कुछ देर पहले चेनेई पहुँच गए हैं जबकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी अंतिम संस्कार में शामिल होंगे।

मद्रास हाई कोर्ट ने इसकी मंजूरी दी है। इस तरह तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और दिवंगत डीएमके नेता एम करुणानिधि के पार्थिव शरीर को मरीना बीच पर ही दफ़नाया जाएगा। मद्रास हाईकोर्ट में मंगलवार और बुधवार सुबह कुछ घंटे चली सुनवाई के बाद करुणानिधि को अन्नादुरई की समाधि के बगल में दफनाने की अनुमति मिल गयी।

करूणानिधि को दफ़नाने के स्थान को लेकर मंगलवार रात हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के घर पर सुनवाई शुरू हुई थी, जिसे सुबह तक के लिए स्थगित कर दिया गया था। अदालत ने राज्य सरकार से इस पर जवाब मांगा था। डीएमके चाहती थी कि उनके नेता के शव को मरीना बीच पर जगह मिले, जहां तमिलनाडु की राजनीति के दिग्गजों के शव दफ़नाए गए थे हालांकि प्रदेश की एआईएडीएमके सरकार ने इसकी अनुमति नहीं दी थी जिसके बाद डीएमके कोर्ट में गयी थी। पूर्व मुख्यमंत्री एम जी रामचंद्रन और उनकी बेहद करीबी जे जयललिता मरीना बीच पर ही दफन किए गए थे और वहीं उनके स्मारक बनाए गए। ये दोनों राजनीति में करुणानिधि के कट्टर विरोधी थे।

दक्षिण भारत की राजनीति के पितामह कहे जाने वाले करुणानिधि की मंगलवार को हुई मृत्यु के बाद से ही इस मसले पर सामाजिक और राजनीतिक हलकों में कोहराम मचा हुआ था। डीएमके ने तमिलनाडु के मरीना बीच पर करुणानिधि को दफनाने के लिए जमीन की मांग की है। तमिलनाडु सरकार ने विपक्षी द्रमुक को उसके दिवंगत नेता पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि को दफनाने के लिए मरीना बीच पर जगह देने से इनकार कर दिया। हालांकि कल देर रात इस मामले की सुनवाई शरू तो हुई थी लेकिन अदालत सरकार की मनाही के तर्कों से संतुष्ट नहीं हुई थी।

तमिलनाडु सरकार ने उसे इसके लिए पूर्व मुख्यमंत्री सी राजगोपालचारी और के कामराज के स्मारकों के समीप जगह देने की पेशकश की। सरकार के इस कदम पर विवाद पैदा हो गया । इसके बाद डीएमके तमिलनाडु सरकार के खिलाफ मद्रास उच्च न्यायालय गयी। द्रमुक के कार्यकारी अध्यक्ष एम के स्टालिन ने करुणानिधि के लंबे सार्वजनिक जीवन को याद करते हुए मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी को पत्र लिखा था और उनसे मरीना बीच पर दिवंगत नेता के मार्गदर्शक सी एन अन्नादुरई के समाधि परिसर में जगह देने की मांग की थी।

स्टालिन ने अपने पिता के निधन से महज कुछ ही घंटे पहले इस संबंध में मुख्यमंत्री से भेंट भी की थी। सरकार ने एक बयान जारी कर कहा कि वह मद्रास उच्च न्यायालय में लंबित कई मामलों और कानूनी जटिलताओं के कारण मरीना बीच पर जगह देने में असमर्थ है। अतएव सरकार राजाजी और कामराज के स्मारकों के समीप सरदार पटेल रोड पर दो एकड़ जगह देने के लिए तैयार है।

मरीना बीच पर दो गज ज़मीन

आखिर कुछ घंटे की कोर्ट में चली लड़ाई में करूणानिधि को मरीना बीच पर दफ़न करने की हरी झंडी मिल गयी इस मसले को लेकर सूबे में तनाव की स्थिति बन गयी थी क्योंकि एआईडीएमके सरकार ने करूणानिधि को मरीना बीच पर दफ़न करने का कुछ कारण देकर विरोध किया था। हालाँकि कोर्ट ने बुधवार को कुछ घंटे की सुनवाई के बाद डीएमके की अप्पील को मंजूर करते हुए करूणानिधि को मरीना बीच पर दफ़न करने की इज़ाज़त दे दी। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी करूणानिधि के अंतिम दर्शन के लिए कुछ देर पहले चेनेई पहुँच गए हैं जबकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी अंतिम संस्कार में शामिल होंगे।

मद्रास हाई कोर्ट ने इसकी मंजूरी दी है। इस तरह तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और दिवंगत डीएमके नेता एम करुणानिधि के पार्थिव शरीर को मरीना बीच पर ही दफ़नाया जाएगा। मद्रास हाईकोर्ट में मंगलवार और बुधवार सुबह कुछ घंटे चली सुनवाई के बाद करुणानिधि को अन्नादुरई की समाधि के बगल में दफनाने की अनुमति मिल गयी।

करूणानिधि को दफ़नाने के स्थान को लेकर मंगलवार रात हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के घर पर सुनवाई शुरू हुई थी, जिसे सुबह तक के लिए स्थगित कर दिया गया था। अदालत ने राज्य सरकार से इस पर जवाब मांगा था। डीएमके चाहती थी कि उनके नेता के शव को मरीना बीच पर जगह मिले, जहां तमिलनाडु की राजनीति के दिग्गजों के शव दफ़नाए गए थे हालांकि प्रदेश की एआईएडीएमके सरकार ने इसकी अनुमति नहीं दी थी जिसके बाद डीएमके कोर्ट में गयी थी। पूर्व मुख्यमंत्री एम जी रामचंद्रन और उनकी बेहद करीबी जे जयललिता मरीना बीच पर ही दफन किए गए थे और वहीं उनके स्मारक बनाए गए। ये दोनों राजनीति में करुणानिधि के कट्टर विरोधी थे।

दक्षिण भारत की राजनीति के पितामह कहे जाने वाले करुणानिधि की मंगलवार को हुई मृत्यु के बाद से ही इस मसले पर सामाजिक और राजनीतिक हलकों में कोहराम मचा हुआ था। डीएमके ने तमिलनाडु के मरीना बीच पर करुणानिधि को दफनाने के लिए जमीन की मांग की है। तमिलनाडु सरकार ने विपक्षी द्रमुक को उसके दिवंगत नेता पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि को दफनाने के लिए मरीना बीच पर जगह देने से इनकार कर दिया। हालांकि कल देर रात इस मामले की सुनवाई शरू तो हुई थी लेकिन अदालत सरकार की मनाही के तर्कों से संतुष्ट नहीं हुई थी।

तमिलनाडु सरकार ने उसे इसके लिए पूर्व मुख्यमंत्री सी राजगोपालचारी और के कामराज के स्मारकों के समीप जगह देने की पेशकश की। सरकार के इस कदम पर विवाद पैदा हो गया । इसके बाद डीएमके तमिलनाडु सरकार के खिलाफ मद्रास उच्च न्यायालय गयी। द्रमुक के कार्यकारी अध्यक्ष एम के स्टालिन ने करुणानिधि के लंबे सार्वजनिक जीवन को याद करते हुए मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी को पत्र लिखा था और उनसे मरीना बीच पर दिवंगत नेता के मार्गदर्शक सी एन अन्नादुरई के समाधि परिसर में जगह देने की मांग की थी।

स्टालिन ने अपने पिता के निधन से महज कुछ ही घंटे पहले इस संबंध में मुख्यमंत्री से भेंट भी की थी। सरकार ने एक बयान जारी कर कहा कि वह मद्रास उच्च न्यायालय में लंबित कई मामलों और कानूनी जटिलताओं के कारण मरीना बीच पर जगह देने में असमर्थ है। अतएव सरकार राजाजी और कामराज के स्मारकों के समीप सरदार पटेल रोड पर दो एकड़ जगह देने के लिए तैयार है।

मुत्तुवेल करुणानिधि का निधन

कलाईनार। प्यार से उनके समर्थक और तमिलनाडु के लोग उन्हें इसी नाम से बुलाते थे। राजनीति और उससे पहले तमिल सिनेमा जगत के एक नाटककार और पटकथा लेखक के रूप में मुत्तुवेल करुणानिधि का अपना मुकाम था। ९४ साल के करुणानिधि करीब ७८ साल तक तमिल राजनीति में रहे और बाद के सालों में देश की राजनीति का भी बड़ा चेहरा बने। किसी समय कांग्रेस विरोध की धुरी रहे करूणानिधि बाद में कांग्रेस और यूपीए के साथ भी रहे। पिछले कुछ दिन से बीमार चल रहे करुणानिधि आखिर मंगलवार को उसी कावेरी अस्पताल में अपने हज़ारों समर्थकों की दुआओं के बीच शाम ६.१० पर इस संसार को विदा कह गए, जिसमें वे कुछ दिन से भर्ती थे।

अस्पताल ने शाम पोन सात बजे प्रेस रिलीज में बताया की काफी कोशिशों के बाबजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, पीएम नरेंद्र मोदी, उप राष्ट्रपति वैंकया नायडू, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, सोनिया गांधी सहित देश के तमाम बड़े नेताओं, विभिन्न प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों ने उनके निधन पर गहरा दुःख जताते हुए इस देश की राजनीति के लिए बड़ा नुक्सान बताया है।

यदि उनके जीवन पर नजर दौड़ाई जाए तो पता चलता है कि जब वे १४ साल के थे ”हिन्दी-विरोधी” आंदोलन के जरिये करुणा ने अपने राजनीतिक जीवन का आगाज़ किया। उनका जन्म ३ जून सन 1924 को मुत्तुबेल और अंजुगम के यहां भारत के नागपट्टिनम के तिरुक्कुवलइ में दक्षिणमूर्ति के रूप में हुआ था। सन १९६९ में डीएमके के संस्थापक सीएन अन्नादुरई की मौत के बाद करुणा को तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बना दिया गया। और ये पांच बार (1969 -71, 1971 -761989 -91, 1996 -2001 ,2006 -2011 ) तक तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रह चुके है। करूणानिधि ने अपने 60 साल के राजनीति के कॅरिअर में अपनी भागीदारी बाले हर किसी चुनाब में अपनी सीट जीतने का रिकॉर्ड बनाया है। 2004 के लोकसभा चुनाब में उन्होंने तमिलनाडु और पुदुचेरी में डीएमके के नेतृत्व बाली डीपीए का नेतृत्व किया और लोकसभा की 40 सीटों को जीत लिया। इसके बाद उन्होंने 2009 के लोकसभा चुनाब में उन्होंने डीएमके के जरिये जीती गई सीटों की संख्या 16 से बढ़ाकर 18 कर दिया। और तमिलनाडु और पुदुचेरी में यूपीए का नेतृत्व कर बहुत छोटे से गठबंधन के बाबजूद उन्होंने बहा पर 28 सीटों पर जीत प्राप्त की।

एम करूणानिधि तमिल सिनेमा जगत के एक नाटककार और पटकथा लेखक भी थे। उनके समर्थक उन्हें कलाईनार कहकर बुलाते थे।

करुणानिधि ने तमिल फिल्म उद्योग में एक पटकथा लेखक के रूप में अपने करियर का शुभारंभ किया। अपनी बुद्धि और भाषण कौशल के माध्यम से वे बहुत जल्द एक राजनेता बन गए। वे द्रविड़ आंदोलन से जुड़े थे और उसके समाजवादी और बुद्धिवादी आदर्शों को बढ़ावा देने वाली ऐतिहासिक और सामाजिक (सुधारवादी) कहानियां लिखने के लिए मशहूर थे। उन्होंने तमिल सिनेमा जगत का इस्तेमाल करके पराशक्ति नामक फिल्म के माध्यम से अपने राजनीतिक विचारों का प्रचार करना शुरू किया।[10] पराशक्ति तमिल सिनेमा जगत के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई क्योंकि इसने द्रविड़ आंदोलन की विचारधाराओं का समर्थन किया और इसने तमिल फिल्म जगत के दो प्रमुख अभिनेताओं शिवाजी गणेशन और एस. एस. राजेन्द्रन से दुनिया को परिचित करवाया। शुरू में इस फिल्म पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया था लेकिन अंत में इसे 1952 में रिलीज कर दिया गया। यह बॉक्स ऑफिस पर एक बहुत बड़ी हिट फिल्म साबित हुई लेकिन इसकी रिलीज विवादों से घिरी था। रूढ़िवादी हिंदूओं ने इस फिल्म का विरोध किया क्योंकि इसमें कुछ ऐसे तत्व शामिल थे जिसने ब्राह्मणवाद की आलोचना की थी। इस तरह के संदेशों वाली करूणानिधि की दो अन्य फ़िल्में पनाम और थंगारथनम थीं। इन फिल्मों में विधवा पुनर्विवाह, अस्पृश्यता का उन्मूलन, आत्मसम्मान विवाह, ज़मींदारी का उन्मूलन और धार्मिक पाखंड का उन्मूलन जैसे विषय शामिल थे। जैसे-जैसे उनकी सुदृढ़ सामाजिक संदेशों वाली फ़िल्में और नाटक लोकप्रिय होते गए, वैसे-वैसे उन्हें अत्यधिक सेंसशिप का सामना करना पड़ा; 1950 के दशक में उनके दो नाटकों को प्रतिबंधित कर दिया गया।

जस्टिस पार्टी के अलगिरिस्वामी के एक भाषण से प्रेरित होकर करुणानिधि ने 14 साल की उम्र में राजनीति में प्रवेश किया और हिंदी विरोधी आंदोलन में भाग लिया। उन्होंने अपने इलाके के स्थानीय युवाओं के लिए एक संगठन की स्थापना की। उन्होंने इसके सदस्यों को मनावर नेसन नामक एक हस्तलिखित अखबार परिचालित किया। बाद में उन्होंने तमिलनाडु तमिल मनावर मंद्रम नामक एक छात्र संगठन की स्थापना की जो द्रविड़ आन्दोलन का पहला छात्र विंग था। करूणानिधि ने अन्य सदस्यों के साथ छात्र समुदाय और खुद को भी सामाजिक कार्य में शामिल कर लिया। यहां उन्होंने इसके सदस्यों के लिए एक अखबार चालू किया जो डीएमके दल के आधिकारिक अखबार मुरासोली के रूप में सामने आया।

कल्लाकुडी में हिंदी विरोधी विरोध प्रदर्शन में उनकी भागीदारी, तमिल राजनीति में अपनी जड़ मजबूत करने में करूणानिधि के लिए मददगार साबित होने वाला पहला प्रमुख कदम था। इस औद्योगिक नगर को उस समय उत्तर भारत के एक शक्तिशाली मुग़ल के नाम पर डालमियापुरम कहा जाता था। विरोध प्रदर्शन में करूणानिधि और उनके साथियों ने रेलवे स्टेशन से हिंदी नाम को मिटा दिया और रेलगाड़ियों के मार्ग को अवरुद्ध करने के लिए पटरी पर लेट गए। इस विरोध प्रदर्शन में दो लोगों की मौत हो गई और करूणानिधि को गिरफ्तार कर लिया गया। करूणानिधि को तिरुचिरापल्ली जिले के कुलिथालाई विधानसभा से 1957 में तमिलनाडु विधानसभा के लिए पहली बार चुना गया।

प्रदेश सरकार ने बुधवार को प्रदेश में करूणानिधि के निधन पर छुट्टी घोषित की है। करीब डेढ़ साल पहले तमिलनाडु की एक और बड़ी नेता जयललिता का भी लम्बी बीमारी के बाद निधन हो गया था।

इस बीच प्रधानमंत्री मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांघी बुधवार को चेन्नई में अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित करने जा रहे हैं।

अस्पताल और करूणानिधि के घर के बाहर जमा समर्थकों में शोक की लहर है। कईयों का रो-रोकर बुरा हाल है। हाथों में करुणानिधि की तस्वीर लिए वे रो रहे हैं। उनके गंभीर बीमार होने की खबर के बाद कुछ लोगों के आत्महत्या करने की भी खबर है।