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शोपियां में एक और युवक का अपहरण

कश्मीर में रविवार सुबह आतंकवादियों ने एक और लड़के का अपरहण कर लिया है। सुबह शोपियां में मुठभेड़ में सुरक्षा बालों ने दो आतंकियों को ढेर कर दिया जिसके बाद बोखलाए आतंकियों ने एक और लड़के का अपहरण कर लिया।
शोपियां में सुरक्षाबलों ने रविवार सुबह मुठभेड़ में दो आतंकियों को मार गिराया। पुलिस को रिबन इलाके में आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली जिसके बाद शनिवार रात को ही सुरक्षाबलों और पुलिस ने तलाशी अभियान शुरू कर दिया। आतंकियों ने पहले जवानों पर फायरिंग की। इसके बाद शुरू हुई मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने दो आतंकियों को मार गिराया। मौके से हथियार और गोला-बारूद भी पुलिस को मिला है।
इस बीच कश्मीर में आतंकियों ने रविवार को शोपियां के एक और युवक को अगवा कर लिया। पहले अपहृत दो युवा अभी भी लापता हैं। पिछले तीन दिन में आतंकी दो युवाओं को क्रूर तरीके से मार चुके हैं।

भारत आईसीसी महिला क्रिकेट ग्रुप बी में टॉप पर

स्मृति मंधाना और हरमनप्रीत कौर की शानदार बल्लेबाजी की बदौलत भारत बड़ा स्कोर बनाने के बाद ऑस्ट्रेलिया को सस्ते में समेटकर आईसीसी वूमन वर्ल्ड टी-२० टूर्नामेंट के ग्रुप बी में टॉप पर रहा।  भारत ने यह मैच ऑस्ट्रेलिया से ४८ रन से जीता। भारत के लिए अनुजा ने ३ विकेट लिए।
पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत की महिला टीम ने निर्धारित २० ओवर में आठ विकेट खोकर १६७ रन का बड़ा स्कोर खड़ा कर लिया।  इस तरह यह मैच जीतने के लिए ऑस्ट्रेलिया को १६८ का लक्ष्ये मिला।  भारत की तरफ से समरीति मंधाना ने ५५ गेंदों में शानदार ८३ रन बनाये जबकि कप्तान हरमनप्रीत कौर ने ४३ रन की शानदार पारी खेली।
दोनों के बीच ६८ रन की साझेदारी रही। ऑस्ट्रेलिया के लिया एलिस पेरी ने १६ रन देकर ३ विकेट लिए। जब ऑस्ट्रेलिया बल्लेबाजी करने उतरी तो उनकी रणनीति तेज रन बनाकर भारत पर दबाव बनाने के थी।  शुरू के तीन ओवर में वे इसमें सफल भी दिखे।  लेकिन फिर भारत ने लगातार दो विकेट लेकर ऑस्ट्रेलिया की लय खराब कर दी।
ऑस्ट्रेलिया ने थोड़े-थोड़े अंतराल के बाद विकेट गँवाए और टीम ९ विकेट पर ११९ (१९.४ ओवर) ही बना सकी। इस तरह भारत ने यह मैच ४८ रन से जीत लिया और ग्रुप ”बी” में टॉप पर रहा।

जेके में अपहृत एक लड़के की हत्या, दो छोड़े

जम्मू कश्मीर में हिज्बुल आतंकियों ने सुबह अगवा किये गए तीन लड़कों में से एक की गला रेत कर हत्या कर दी है। उन्हें शोपियां के सैदपुरा के सुबह अपहृत किया गया था। अन्य दो को आतंकवादियों ने छोड़ दिया है।
”तहलका” की जानकारी के मुताबिक पुलिस ने कुलगाम के मंझगांव के रहने वाले हुज़ैफ़ का शव एक बाग़ से बरामद किया है। सुरक्षा बालों ने तीनों की खोज के लिए बड़ा अभियान शुरू किया था। गौरतलब है की पिछले कल ही आतंकवादियों ने एक और लड़के को अपहृत कर बेरहमी से मार डाला था। और इसकी दिल दहला देने वाली वीडियो फुटेज भी जारी की थी। उसका नाम नदीम मंजूरर था और वो सिर्फ १७ साल का था। हिज्बुल के ऑपरेशन कमांडर रियाज़ नैकु ने इस हत्या की जिम्मेवारी ली थी।
यह कहा जा रहा है कि इन लड़कों का अपहरण इस आशंका में किया गया के सुरक्षा बालों को उनकी जानकारियां देते हैं। इसे लेकर स्थानीय स्तर पर
आतंकियों की तरफ से लोगों को धमकियाँ भी दी जा रही थी।

हिमाचल में बड़ा बजीफा घोटाला, एफआईआर दर्ज

हिमाचल प्रदेश में प्रदेश शिक्षा विभाग में कथित तौर पर करोड़ों रूपये के बजीफा घोटाले में शिक्षा विभाग ने एफआईआर दर्ज कर दी है। यह मामला प्रदेश से बाहर पढ़ने वाले हिमाचल के उन एससी/एसटी/ओबीसी छात्रों (जिनकी सालाना आमदन २.५० लाख से काम थी) के बजीफे में धोखाधड़ी से जुड़ा है, जिन्होंने अपना आधार से लिंक अकाऊंट नंबर सम्बंधित शिक्षण संस्थाओं को तो दिया लेकिन उनके बजीफे के पैसे उसमें जमा नहीं हुए।
इस सम्बन्ध में शिमला पूर्व पुलिस थाना में भादंसं की धाराओं ४१९, ४६५ और ४७१ के तहत मामला एसआईआर दर्ज की गयी है। इसकी शिकायत शक्ति भूषण जो कि एसपीएम और एनयूआई में प्रोजेक्ट अधिकारी हैं, की तरफ से हुई है। उनकी एफआईआर के मुताबिक उन्हें प्रदेश सरकार के शिक्षा सचिव की तरफ से स्कालरशिप में कथित गड़बड़ की जांच के लिए नियुक्त किया गया था। जुलाई में इसकी जांच शुरू हुई थी और अगस्त में पूरी हुई थी।
अपनी एफआईआर में शक्ति भूषण ने कहा है कि मामले की जांच के दौरान उन्होंने पाया कि काँगड़ा जिले के करीब २५० छात्रों ने कर्नाटक और लवली यूनिवर्सिटी के फतेहपुर और बडूखर केंद्रों में दाखिला लिया था। फ़ार्म भरवाते समय उपरोक्त यूनिवर्सिटी प्रवंधन ने घोषणा की थी की ऐसे एससी/एसटी (अनुसूचित जाति, ओवीसी और अनुसूचित जनजाति) छात्रों जिन्होंने अपना आधार नंबर बैंक अकाऊंट से लिंक कर दिया है को, स्कालरशिप दी जाएगी। हालाँकि जाँच में सामने आया की इन संस्थानों ने छात्रों को स्कॉलरशिप दी ही नहीं। जांच में चौंकाने वाली बात सामने यह आई क़ि स्कॉलरशिप का यह पैसा इन छात्रों के अकॉउंट में जमा न करवाकर उनकी आधार नंबर का दुरूपयोग कर फ़र्ज़ी खातों में जमा कर गोल कर दिया गया। एफआईआर दर्ज होने के बाद इस मामले की जांच का जिम्मा एसआई अश्वनी को सौंपा गया है।
अब सम्भावना जताई जा रही है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद इस बड़े घोतके का पूरा सच सामने आ पायेगा। करोड़ों के भ्रष्टाचार वाले इस  मामले की जांच का जिम्मा प्रदेश सरकार ने हाल ही में सीबीआई को सौंपा था। बाद में सीबीआई ने यह कह कर फाइल लौटा दी कि पहले सरकार अपने स्तर पर एफआईआर दर्ज करे।
सूत्रों के मुताबिक यह मामला २५० करोड़ से भी ज्यादा की स्कॉलरशिप का है और इसमें जांच होने के बाद और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

वसुंधरा के खिलाफ भाजपा दिग्गज के बेटे को कांग्रेस टिकट

कांग्रेस ने जबरदस्त दांव चलते हुए भाजपा के दिग्गज नेता जसवंत सिंह के बेटे मानवेन्द्र सिंह को मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ मैदान में उतार दिया है। उधर भाजपा ने भी तीसरी सूची जारी कर दी है। राजस्थान में सोमवार को नामांकन का अंतिम दिन है।

कांग्रेस ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के दिग्गज नेता रहे जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह को झालरापाटन से टिकट दिया है और वे मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे। मानवेंद्र इससे पहले शिव सीट से भाजपा विधायक थे और दो महीने पहले ही भाजपा से खफा होकर कांग्रेस में आये हैं।

कांग्रेस ने शनिवार को ३२ प्रत्याशियों की दूसरी सूची जारी के जिसमें मानवेन्द्र का नाम शामिल  है। भाजपा ने भी तीसरी सूची जारी की है जिसमें आठ उम्मीदवारों के नाम है। कांग्रेस को अभी १६ और सीटों पर नाम फाइनल करने हैं। माना जाता है वहां अभी पेंच फंसा हुआ है और इसका कारण यह है कि आवेदन बड़ी संख्या में आये हैं।

जानकारों के मुताबिक राजस्थान में पार्टी की जीत की प्रवाल संभावनाएं देखते हुए वहां कांग्रेस में  टिकटों की जबरदस्त मारामारी है लिहाजा आलाकमान को भी दिक्कत आ रही है। इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट अपने-अपने समर्थकों को ज्यादा से ज्यादा टिकट दिलाने की कोशिश में जुटे हैं।

तीसरी सूची में भाजपा ने सवाई माधोपुर सीट से विधायक और जयपुर राजघराने की दीया कुमारी का टिकट काट दिया है। उनकी जगह आशा कुमारी मीणा उम्मीदवार बनाई गईं हैं। उधर शुक्रवार को ही भाजपा में आये रामकिशोर सैनी को बांदीकुई से टिकट थमाया गया है। भाजपा के अब तक १७० उम्मीदवार घोषित हो चुके हैं, जबकि कांग्रेस के १८४ प्रत्याशी। राजस्थान में २०० सीटें हैं और वहां  दिसंबर को मतदान है।

मौत से हार गया ‘बार्डर’ का हीरो

महावीर चक्र से सम्मानित १९७१ के भारत-पाकिस्तान युद्ध के हीरो ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह चांदपुरी का निधन हो गया है। उनकी बहादुरी से प्रेरित होकर ही जेपी दत्ता ने १९९७ में ब्लॉकबस्टर ”बार्डर” बनाई थी और अपने हीरो का करेक्टर चांदपुरी को केंद्र में बना कर रखा था।

चांदपुरी को राजस्थान की लोंगेवाला पोस्ट पर लाजवाब बहादुरी के लिए याद किया जाता है।  उनका निधन मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में हुआ। बे ७७ साल के थे। फोर्टिस अस्पताल में उनका कैंसर का इलाज चल रहा था। राजस्थान के लोंगेवाला में भारत-पाक बॉर्डर पर बहादुरी के लिए चांदपुरी को महावीर चक्र से भी सम्मानित किया गया।

गौरतलब है कि दत्ता की बॉर्डर मूवी  लोंगेवाला की लड़ाई पर ही आधारित थी। इसमें सनी देओल ने ब्रिगेडियर चांदपुरी का रोल निभाया था। जंग के समय चांदपुरी मेजर के रैंक पर थे। लोंगेवाला में ब्रिगेडियर चांदपुरी ने करीब ९० जवानों की मदद से पाकिस्‍तान के २१०० सैनिकों और दुश्मन के ३८  टैंकों को रोके रखा था और यही पकिस्तान की हार का कारण बना था।

चांदपुरी का जन्म अविभाजित पंजाब में २२ नवंबर, १९४० को हुआ था हालांकि विभाजन के बाद उनका परिवार चांदपुर रुड़की (बलाचौर) आ गया। चांदपुरी माता-पिता की इकलौती संतान थे और उन्होंने  साल १९६२ में होशियारपुर के सरकारी कॉलेज से ग्रेजुएशन की। वे एनसीसी में सक्रिय थे और यही जज्बा उन्हें सेना में ले गया। वे १९६२ में सेना में भर्ती हो गए और चेन्‍नई के ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी से कमीशन हासिल करने के बाद पंजाब रेजीमेंट की २३वीं बटालियन का हिस्सा बने।

उन्होंने १९६५ और १९७१ के युद्धों में हिस्सा लिया और वीरता के प्रयाय बने।  यही नहीं वे संयुक्त राष्ट्र संघ  (तब यूएनओ) की इमरजेंसी फ़ोर्स में एक साल से ज्यादा तक रहे और गाजा पट्टी में मोर्चे पर रहे। दो बार मध्‍यप्रदेश के महू इन्फैंट्री स्कूल में इन्स्ट्रक्टर भी रहे।

राममंदिर निर्माण से सबरीमाला मंदिर तक विवाद ही विवाद

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण अर्से से चली आ रही एक मंाग है। बहुसंख्यकों की आस्था इससे जुड़ी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रामजन्म भूमि विवाद को तीन पक्षों में बांटने का फैसला लिया था जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपीलें हैं। 28 अक्तूबर से इस मुद्दे पर सुनवाई होनी थी। पर उस पर जनवरी से सुनवाई एक उपयुक्त बेंच द्वारा कराने का फैसला आया। इस पर संत समाज और राजनेता काफी मुखर हो उठे। संतो ने दो दिन की बैठक नई दिल्ली में की और धर्मादेश दिया कि केंद्र सरकार राम मंदिर निर्माण के संबंध में एक आर्डिनेस लाए। आरएसएस ने चेतावनी दी कि 1992 की तरह फिर आंदोलन शुरू कर सकते हैं। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि 2019 चुनावों व राज्यों के चुनाव में भावनाएं जगाई  जा रही हैं। राज्य सभा में भाजपा सांसद राकेश सिन्हा निजी सदस्य के बिल बतौर यह मुद्दा सदन में लाना चाहते हैं।

उधर सुदूर केरल में सबरीमाला मंदिर में दस से पचास साल तक की महिलाओं  के भी मंदिर प्रवेश पर खासी सरगरमी है। सुप्रीमकोर्ट ने इस भेदभाव के खिलाफ 28 सितंबर को एक आदेश दिया था। आदेश के बावजूद उग्र श्रद्धालुओं ने महिलाओं को मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया। पूरे राज्य में पक्ष और विपक्ष में खूब आंदोलन चले। राज्य सरकार और संघ परिवार में खासी तनातनी जारी है। विभिन्न पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने अपने पिछले आदेश को दरकिनार तो किया लेकिन उसे जारी रखते हुए पुनर्विचार की बात कही। इसके बाद से आंदोलन का नया दौर शुरू हो गया है।

सवाल उठता है कि यदि अदालत का आदेश  नहीं मानना है तो अदालतों में अपील ही क्यों? लेकिन यह भी साफ है कि देश की बहुसंख्यक जनता की न्याय पर आस्था है और वह चाहती है कि न्याय ही हो। न्याय में दबे पांव राजनीति हावी न हो।

एक गौरवपूर्ण देश में विविध धर्म-संप्रदाय हैं जिसके कारण भारत की पूरी दुनिया में अनोखी शान रही है। लेकिन अब वह आजादी शायद नहीं है।

राम मंदिर निर्माण तो होगा

अयोध्या में रामजी चाहेंगे तो ही मंदिर निर्माण होगा। सुप्रीम कोर्ट के सुनवाई टालने, मोदी सरकार के अध्यादेश लाने और बहुमत में राज कर रही भाजपा के नेतृत्व की एनडीए सरकार के प्रस्ताव सदन में लाने पर भी राम मंदिर निर्माण शुरू नहीं होगा।’ ऋषिकेश में लक्ष्मण झूला के पास स्वर्गाश्रम में एक बाबा ने गंगा की तेज लहरों को देखते हुए कहा।

संतों की अखिल भारतीय संत समिति के तीन-चार नवंबर को दिल्ली में हुए सम्मेलन में भी ये बाबा गए थे। लेकिन उन्हें आयोजकों में प्रमुखता नहीं दी। वे लौट गए। संत समिति ने अयोध्या में बैठक के बाद अब छह दिसंबर से मंदिर निर्माण पर मुहिम पूरे देश में छेडऩे का संकेत दिया है। उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री ने भी कहा है जो राम का नहीं, हमारे काम का नहीं। अपनी दो दिन की बैठक में सरकार से अपील की ‘सरकार जमीन अपने हाथ में ले और मंदिर बनाने की राह प्रशस्त करे।’ भाजपा की पिछली सरकार में केंद्रीय मंत्री स्वामी चिन्मयानंद ने कहा कि विरोधी पार्टियों से किसी भी तरह के संवाद की गुंजायश अब नहीं है। भाजपा के पूर्व सांसद और राम जन्मभूमि न्यास के सदस्य राम विलास वेदांती ने कहा कि मंदिर किसी अध्यादेश या कानून से नहीं, सिर्फ आपसी सहमति से ही बन सकता है।

उधर भाजपा के महासचिव राम माधव ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की तारीख जनवरी करके हिंदू समाज और हिंदू समर्थकों को खासा निराश कर दिया है। पहले अक्तूबर में 29 को सुनवाई होनी थी लेकिन बाद में इस मामले को जनवरी तक टाल दिया। इससे लगता है कि अदालती देर से मंदिर के बारे में हालात फिर 1992 जैसे हो गए हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी ज़रूरत पडऩे पर पूरे देश में आंदोलन की घोषणा की है। यानी पूरी तैयारी है कि अदालत की सुनवाई का इंतजार किए बिना सरकार से अध्यादेश या सदन में प्रस्ताव पास न होने पर राम भक्तों की फिर जन आंदोलन की तैयारी।

उत्तरप्रदेश से आए स्वामी प्रज्ञानंद ने कहा कि गुजरात में जिस तरह सोमनाथ मंदिर बना था उसे ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार को राम जन्मभूमि में राम मंदिर ज़रूर  बनाना चाहिए।

स्वामी विवेकानंद का कहना था कि आज जैसी अच्छी स्थिति कभी संभव ही नहीं थी। राम भक्त नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री हैं और दूसरे राम भक्त योगी आदित्यनाथ उत्तरप्रदेश के मुख्य मंत्री हैं। मोदी भगवान राम के ही एक अवतार पुरुष हैं। यदि राम मंदिर नहीं बना तो इसे ज्य़ादा चकित करने वाला कुछ और नहीं।

अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महा सचिव स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती जो वृंदावन से आए थे, उन्होंने कहा कि यदि मुस्लिम समाज श़रिया अदालतें रखते रहेंगे तो संत समिति भी केसरिया अदालतें शुरू करेगी। यह सिर्फ हिंदुओं की जिम्मेदारी नहीं है कि वे संविधान का पालन करें। सरस्वती ने कहा कि जज से मंदिर के मुद्दे पर यह पूछना जायज है कि वह जज के रूप में काम कर रहा है और उसे तनख्वाह के रूप में जनता का धन मिलता है।

स्वामी चिन्मयानंद ने कहा, भाजपा को 2014 में मिला जनादेश गंवा नहीं देना चाहिए। अदालत शायद फैसला लेना ही नहीं चाहती। प्रधानमंत्री के पचपन इंच के सीने ने जो कमाल सर्जिकल स्ट्राइक और विमुद्रीकरण (नोटबंदी) पर दिखाया वह अब अयोध्या का फैसला कर दिखाना चाहिए।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के महासचिव सुरेश भैय्या जी जोशी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने रामजन्मभूमि बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामलों की सुनवाई की जो तारीख बढ़ा कर जनवरी कर दी है उससे हिंदू जनमानस बहुत दुखी है। इस मामले को प्रमुखता से लिया जाना चाहिए था। हिंदू इससे खुद को अपमानित महसूस कर रहे हैं। संभव है कि यदि ज़रूरत हुई तो फिर 1992 के रामजन्मभूमि आंदोलन जैसी शुरूआत करनी पड़े।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने मुंबई के बाहरी इलाके में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की  तीन दिन की बैठक के बाद दो नवंबर को प्रेस में बातचीत में यह जानकारी दी। इस बैठक में पूरे देश से आए संघ के बड़े-बड़े नेता और पदाधिकारी थे। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी इसमें शामिल हुए।

आरएसएस के महासचिव सुरेश भैय्या जी जोशी ने कहा कि यदि ज़रूरत हुई तो हम राम मंदिर निर्माण में कतई नहीं हिचकेंगे। आरएसएस सरकार पर कतई दबाव नहीं डाल रहा है क्योंकि हम कानून और संविधान की इज्ज़त करते हैं। उन्होंने कहा कि इस मसले पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष से भी चर्चा हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के इंतज़ार में काफी समय निकल गया है। पहले इस पर सुनवाई की तारीख 29 अक्तूबर तय की गई थी। हम सब दीवाली से पहले अच्छी खबर का इंतजार कर रहे थे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की तारीख  ही और आगे बढ़ा दी।

आरएसएस के नेता ने यह ज़रूर माना कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए कानूनी विधान ज़रूरी है।

राम मंदिर जल्द न बना तो आत्मदाह

हरिद्वार  के साधु, संत महात्मा अयोध्या में राममंदिर निर्माण को लेकर कुछ ज्य़ादा ही बयानबाजी में लगे है। बाबा रामदेव आश्रम चेरिटेबल समिति के संस्थायक सीताशरण दास का कहना है कि केंद्र सरकार जल्द अध्यादेश जारी कर मंदिर का निर्माण करे। कोई समयाविधि न बता कर वे चेतावनी देते हैं कि हर की पौड़ी पर आत्मदाह करेंगे। उन्होंने कहा कि श्रीराम मंदिर का निर्माण कराने का वादा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिंदू संतों और समाज से किया। लेकिन चार साल में से वे मंदिर नहीं बनवा सके। वे गंगा की शुद्धता, अविरलता और निर्मलता पर भी कम बात करते हैं। शहर में सड़कों, पेयजल की बर्बादी पर नहीं के बराबर बोलते हैं। वे तीर्थयात्रियों की परेशानियों पर भी कुछ नहीं बोलते।

सबरीमाला मंदिर में सवाल आस्था का

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (13 नवंबर) को सबरीमाला मंदिर में महिलाओं (दस से पचास साल) के प्रवेश के अपने फैसले को दरकिनार किया। लेकिन इस पर रोक नहीं लगाई। इस पर पुनर्विचार की बात कही।

पांच सदस्यों की इस बेंच की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने की। सुप्रीम कोर्ट के ही 28 सितंबर के फैसले को फिलहाल रद्द किया गया है। लेकिन इस पर कोई रोक नहीं है। यानी यह अमल में रहेगा। सिर्फ फैसले पर पुनर्विचार होगा जिसके लिए उनचास अपीलें आई हैं।

मंदिर में समान स्त्री-पुरूष में भेद के खिलाफ आस्था और मान्यताओं के आधार पर एकरूपता बरतने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई थी। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने हर पक्ष को सुना। लेकिन जब 28 सितंबर को फैसला दिया तो उसमें कहा कि दस से 50 साल तक की महिलाओं को भी समान तौर पर मंदिर में प्रवेश दिया जाए।

देव अयय्पा के श्रद्धालुओं ने उन महिलाओं श्रद्धालुओं को आस्था, परंपरा के नाम पर मंदिर में नहीं जाने दिया। पुलिस की तैनातगी के बावजूद महिलाओं को मंदिर की सीढिय़ों तक भी पहुुंचने नहीं दिया गया। पूरे केरल मे ंपक्ष और विपक्ष में खूब आंदोलन चले और पूरा आंदोलन संघ परिवार बनाम राज्य सरकार के रूप में बदल गया।

इसकी एक वजह यह भी थी कि केरल सरकार चाहती थी कि एपेक्स कोर्ट के फैसले पर अमल किया जाए। लेकिन राज्य सरकार का पुलिस प्रशासन इसमें कामयाब नहीं हुआ।

मुख्य पुजारी ने तो यह भी धमकी दे दी कि यदि महिलाएं (10 से 50 साल) मंदिर में आए, तो वे मंदिर के दरवाजे बंद कर देंगे। पांच दिन तक कुछ महिलाओं ने कोशिश की लेकिन उन्हें गाली-गलौच कर रहे भक्तों ने दर्शन पाने में कामयाब नहीं होने दिया।

बेंच ने कहा है कि समीक्षा की अपीलों का खुली अदालत में स्वागत है। समीक्षा की सभी आवेदनों पर 22 जनवरी को सुनवाई होगी। लेकिन हम यह साफ करना चाहेंगे कि इस अदालत के फैसले और आदेश जो 28 सितंबर 2018 को जारी हुआ उस पर कोई रोक नहीं है।

राम के जरिए अयोध्या का विकास

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार (छह नवंबर) को राम के जरिए अयोध्या में विकास का एक भव्य खाका खींचा। सरयू तीरे हुए भव्य आयोजन में दक्षिण कोरिया की प्रथम महिला किम जुंग सूक भी मौजूद थी। इस मौके पर सरयू घाट पर तीन लाख दीप जला कर विश्व रिकार्ड भी बना। देश के सभी मीडिया चैनेल को उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री राम की सबसे बड़ी और ऊँची मूर्ति के निर्माण की घोषणा करेंगे, लेकिन उन्होंने अपने पन्ने नहीं खोले। उन्होंने सदियों पहले से एशियाई देशों में राम कथा की लोकप्रियता का उल्लेख किया।

योगी आदित्यनाथ ने जो पहली घोषणा की वह थी कि जनपद फैजाबाद अब अयोध्या जनपद के नाम से जाना जाएगा। पहले से अयोध्या फैजाबाद जिले में हैं उन्होंने राम के पिता दशरथ के नाम पर अयोध्या में चिकित्सा कॉलेज खोलने की घोषणा की। इसके अलावा प्रस्तावित हवाई अड्डे का नाम भी राम पर ही रखने की बात कही। मुख्यमंत्री ने इसके अलावा सत्तरह सौ छह करोड़ की विकास योजनाओं से संबंधित शिलान्यास भी किया।

मुख्यमंत्री ने यह बात ज़रूर साफ कर दी कि राज्य व देश में अगले ही साल लोकसभा चुनाव होने को हैं, इसलिए राम न केवल प्रदेश बल्कि देश में भी महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा, मैं डेढ़ साल में यहां छह बार आया हूं। इस दौरान सड़कों को चौड़ा कराया। बिजली के लटकते तारों को अंडर ग्राउंड कराया। घाटों को सुंदर बनाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को याद करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने नेपाल, भारत और श्रीलंका को आपस में जोड़ा । अब तक अयोध्या विकास के लिए तड़प रही थी। आज यह विकसित रूप में जगमगाती दिख रही है। अभी विकास के और आयाम स्थापित किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री की इलाहाबाद को प्रयागराज और फैजाबाद को अयोध्या मंडल करने पर मुख्यमंत्री आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार  13 नवंबर को हुई कैबिनेट बैठक में आम सहमति से मंजूर किया गया। राज्य सरकार ने धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण दोनों मंडलों इलाहाबाद और फैजाबाद का नाम बदला साथ ही फैजाबाद जिले का नाम अयोध्या करने के फैसले पर मुहर लगा दी। अयोध्या मंडल में पांच जिले अयोध्या, अंबेडकर नगर, बाराबंकी, सुल्तानपुर और अमेठी रहेंगे। इसी तरह  इलाहाबाद मंडल में प्रयागराज, फतेहपुर, कौशांबी और प्रतापगढ़ जिले रहेंगे।

भूमि विवाद पर क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या भूमि विवाद पर जल्दी सुनवाई की अपीलों को खारिज कर दिया। सोमवार (12 नवंबर) को सुप्रीम कोर्ट ने रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर जल्दी सुनवाई कराने की अपीलों को अस्वीकार कर दिया।

मुख्य  न्यायाधीश रंजन गोगोई और जस्टिस एसके कौल पहले ही एक उपयुक्त बेंच के जरिए जनवरी में इस मामले की सुनवई की बात कह चुके हैं। बेंच ने कहा कि हमने पहले ही इस संबंध में आदेश दिया है। जो अपीलें आ रही हैं उन्हें इस कारण खारिज किया जाता है।

अखिल भारत हिंदू महासभा की ओर से वकील बरुण कुमार सिन्हा की अपील पर अदालत ने यह फैसला लिया। सर्वोच्च अदालत ने रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले पर एक उपयुक्त बेंच के जरिए जनवरी के पहले सप्ताह में सुनवाई का आदेश दिया है। यह बेंच ही  सुनवाई का कार्यक्रम बनाएगी।

सालिसिटर जनरल तुषार मेहता और वरिष्ठ वकील सीएल वैद्यनाथ उत्तरप्रदेश सरकार की ओर से और रामलला मूर्ति की ओर से अदालत में पेश हुए। इन्होंने जल्द सुनवाई के लिए अपील की थी।

इसके पहले तीन जज की बेंच ने दो:एक बहुलता से इंकार कर दिया था कि इसे पांच जज की बेंच को भेजा जाए जो 1994 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार करे कि एक मस्जिद इस्लाम से जुड़ी नहीं होती। यह मामला अयोध्या भूमि विवाद की सुनवाई के दौरान उठा था। एपेक्स  कोर्ट की तब अध्यक्षता  कर रहे थे तब के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस  दीपक मिश्रा। उन्होंने कहा कि साक्ष्य के आधार पर सिविल सूट का निपटारा होना चाहिए।

हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ 14 अपील फाइल हुई थी। जिन्हें चार सिविल सूट में दायर किया गया था कि 2.77 एकड़ भूमि को तीन पार्टियों  सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा, और रामलला के बीच बांट दिया जाए।

नाम के बदलाव में है शहरी राजनीति

नाम में क्या है? यदि हम गुलाब को कोई और नाम दे दें तो क्या वह पहले की ही तरह नहीं महकेगा? लेकिन आज की राजनीतिक सोच शायद विलियम शेक्सपियर की उस सोच से मेल नहीं खाती जिसे उन्होंने रोमियो जूलियट के जरिए बताया था।

कुछ ही सप्ताह पहले यूपी मंत्रिमंडल ने इलाहाबाद का नाम बदल कर प्रयागराज करने का प्रस्ताव पास किया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नाम के इस बदलाव को इस आधार पर उचित ठहराया क्योंकि मुगल शहंशाह अकबर ने 1575 में नाम बदला था।

इसके पहले ऐतिहासिक मुगल सराय रेलवे स्टेशन जो सबसे ज्य़ादा व्यस्त रेलवे स्टेशन है उसका नाम दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन कर दिया गया। इतना ही नहीं, बतौर दिवाली उपहार, फैज़ाबाद जिले का नाम फिर श्री अयोध्या कर दिया गया। एक मेडिकल कॉलेज जो अयोध्या में बनेगा उसका नाम राम के पिता राजा दशरथ के नाम पर रखा जाएगा। यह घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या हमारी आन, बान और शान है।

गुजरात के उपमुख्यमंत्री नितीन पटेल ने कहा, राज्य सरकार अहमदाबाद का नाम फिर कर्णावती करना चाहती है। यानी अहमदाबाद का नाम कर्णावती हो जाएगा। हैदराबाद का नाम भाग्यनगर, औंरंगाबाद का नाम संभाजी नगर और ताज का भी नाम बदला जा सकता है। हरियाणा सरकार ने गुडग़ाँव का नाम बदल कर गुरुग्राम कर ही दिया है।

नक्शा देखते हुए शहर पहचानना और उसके बदले हुए नाम को समझने की कोशिश कोई बात स्पष्ट नहीं करती। इससे सिर्फ इतिहास का पीलियाग्रस्त रूप ही दिखेगा। साथ ही हमारी बहुल पहचान के प्रति असम्मान बढ़ेगा। अगला साल 2019 है जब देश में आम चुनाव होंगे। यही वह उपयुक्त समय भी होगा फैसला लेने का।

शहरों और सड़कों का नाम बदलने का ब्रिटिश राजशाही का अनोखा अंदाज था। यह इसलिए उपयुक्त है क्योंकि वे उच्चारण के हिसाब से शब्द को लिखने और बोलने की कोशिश करते थे। उनका कौनपुर आज भी कानपुर ही है। लेकिन आज जो फेरबदल नाम में किए जा रहे हैं उनके पीछे गहरी राजनीति है। यह एकदम अलग है।

यह कोशिश है देश को धर्मनिरपेक्षता से बेहद दूर कर देने की। आज महत्वपूर्ण सवाल यह है कि भारत क्या धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बना रहेगा? दरअसल ऐसे प्रयास होने चाहिए जिनसे धर्मनिरपेक्षता की रक्षा हो। यह इतना मजबूत हो कि लोग इस देश पर गर्व कर सकें।

आज ज़रूरत इस बात की है कि व्यक्तिगत आज़ादी और बढ़े। सरकार को गोश्त पर पाबंदी और मद्यनिषेध की अपनी योजना पर रोक लगानी चाहिए। कोई क्या खाता है और क्या पीता है यह उसकी निजी रु चि और खानपान है। उसे बदलने की कोशिश किसी प्रगतिशील सरकार की पहचान नहीं। ऐसी पहलकदमियों से आपसी फूट बढ़ती है और समुदायों में अलगाव बढ़ता है।

यह बात साफ है कि इन फैसलों के पीछे कोई न्यायसंगत तर्क नहीं बल्कि पूर्वाग्रह ही हैं। ये दुनिया में हमारा कद और भी छोटा करते हैं। यह सब भारत के प्राचीन इतिहास की गौरव गाथा नहीं बल्कि पिछड़ा हुआ प्रतिगामी प्रयास हैं।