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कांग्रेस का कल ”भारत बंद”

सोमवार को आपको दफ्तर जाना है या अपने किसी भी काम पर जाना है तो अपनी गाड़ी में आज ही कल सुबह जल्दी पेट्रोल भरवा लें। तेल की बढ़ती कीमतों और डॉलर के मुकाबले भारतीता रूपये की घटनी कीमत के खिलाफ कांग्रेस ने सोमवार को भारत बंद बंद की अप्पील की है। इस बंद के लिए कांग्रेस को २१ दलों का समर्थन मिला है।

तेल की कीमतों में रविवार को भी लगातार बढ़ोतरी जारी रही। आम व्यक्ति में इसे लेकर गुस्सा बढ़ रहा है क्योंकि इसका असर दुसरी चीजों की कीमतों पर भी दिखने लगा है। रूपये की कीमत भी डालर के मुकाबले लगातार घट रही है। लोगों में इसके खिलाफ बढ़ रहे गुस्से को भुनाने के लिए ही कांग्रेस और अन्य विरोधी दलों ने बंद की काल दी है। इस बंद के बहाने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को मोदी सरकार को घेरने का अवसर मिला है।

कांग्रेस ने रविवार को दावा किया कि उसके ”भारत बंद” को समाजवादी पार्टी , बहुजन समाज पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, डीएमके, राष्ट्रीय जनता दल, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, जनता दल सेक्युलर, राष्ट्रीय लोकदल, झारखंड मुक्ति मोर्चा, एमएनएस और कई अन्य दलों का समर्थन मिला है। हालाँकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार को कहा कि उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस महंगाई और पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों के विरोध में है लेकिन वह बंद के समर्थन में नहीं क्योंकि इससे आम जनता को ही ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ती है।

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने रविवार को कहा –  ”कांग्रेस ने बंद का समय इसी आधार पर तय किया है, जिससे की आमलोगों को किसी भी तरह की दिक्कत का सामना ना करना पड़े”। कांग्रेस के मुताबिक यह बंद सुबह 9 बजे से दिन में तीन बजे तक होगा। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं का  आह्वान किया है कि बंद के दौरान किसी प्रकार की हिंसा न हो। ”कांग्रेस महात्मा गांधी के आदर्शों पर चलने वाली पार्टी है और आम आदमी को कोई तकलीफ न हो”।

इस बीच दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन ने बताया कि इस बंद के लिए कांग्रेस को 21 पार्टियों द्वारा समर्थन मिला है। कांग्रेस के पूर्व सांसद अजय माकन ने कहा कि कांग्रेस ने सोमवार को भारत बंद बुलाया है। माकन ने व्यापारियों से भी बंद को सफल बनाने की अपील की । उन्होंने बताया कि इस बंद के दौरान कोई हिंसा नहीं होगी। पार्टी ने अन्य विपक्षी दलों से भी बंद को सफल बनाने के लिए समर्थन देने की अपील की है।

जहाँ भाजपा दिल्ली में अपनी राष्ट्रीय कार्यकारणी के जरिये २०१९ के चुनाव की तैयारी कर रही है उसी तरह कांग्रेस और उसके साथी विपक्ष ने भी सरकार की नाकामियों को जनता के सामने उजागर कर अपने ढंग से चुनाव की तैयारी की शुरुआत की है। कांग्रेस अध्यक्ष इस समय कैलाश मानसरोवर यात्रा पर हैं।

भीड़ हत्या मामलों में लिप्त लोग राष्ट्रवादी नहीं: उपराष्ट्रपति

घृणा और भीड़ हत्या जैसे मामलों में लिप्त लोग खुद को राष्ट्रवादी नहीं कह सकते हैं, ये बात उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा।

उन्होंने ये भी कहा कि ऐसे मामलों को रोकने के लिये सिर्फ कानून पर्याप्त नहीं है बल्कि सामाजिक व्यवहार में बदलाव लाना भी बहुत जरूरी है।

भाषा की एक रिपोर्ट कके मुताबिक़ उपराष्ट्रपति ने भीड़ हत्या जैसी घटनाओं के राजनीतिकरण पर नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं को राजनीतिक दलों से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘सामाजिक बदलाव (की जरूरत है)। यह (भीड़ हत्या) इस पार्टी या उस पार्टी की वजह से नहीं है। जैसे ही आप इन्हें दलों से जोड़ते हैं, मुद्दा खत्म हो जाता है। बेहद स्पष्ट तरीके से बता दूं कि यही हो रहा है।’’

घृणा और भीड़ हत्या की घटनाओं के बारे में सवाल करने पर उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह कोई नया चलन नहीं है, पहले भी ऐसी घटनाएं हुई हैं।

पीटीआई को दिये गए एक साक्षात्कार में नायडू ने कहा, ‘‘इसके लिए सामाजिक व्यवहार को बदलना होगा… जब आप किसी दूसरे की हत्या कर रहे हैं, तो खुद को राष्ट्रवादी कैसे कह सकते हैं। धर्म, जाति, रंग और लिंग के आधार पर आप भेदभाव करते हैं। राष्ट्रवाद, भारत माता की जय का अर्थ बहुत व्यापक है।’’

उन्होंने कहा कि इनमें से कुछ चीजों से सिर्फ कानून के माध्यम से नहीं निपटा जा सकता। इनपर लगाम लगाने के लिए सामाजिक बदलाव जरूरी है।

पिछले कुछ वर्षों में देश के विभिन्न भागों में हुई भीड़ हत्या की घटनाओं को लेकर सरकार कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दलों के निशाने पर है।

केन्द्रीय गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में नौ राज्यों में भीड़ हत्या की घटनाओं में 40 लोगों की जान गई है।

उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘‘मेरे अनुसार राष्ट्रवाद या भारत माता की जय का अर्थ 130 करोड़ लोगों की जय है। जाति, पंथ, लिंग, धर्म या क्षेत्र के आधार पर कोई भी भेदभाव राष्ट्रवाद के खिलाफ है।’’

कोर्ट ने कहा, वेतन न देना सभ्य समाज की भावना के खिलाफ

कोइ भी व्यक्ति जब कोइ काम करता है तो इसके पीछे उसकी ज़रुरत धन की ही होती है ताकि वह अपना और परिवार का भरणपोषण कर सके। लेकिन यदि काम करके भी किसी को वेतन न मिले तो ? कुछ इसी तरह के एक मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने अहम् टिप्पणी की है।

मामला दिल्ली के एक निजी स्कूल के सात शिक्षकों का है। इन शिक्षकों ने आरोप लगाया कि उन्हें इस साल अप्रैल से वेतन ही नहीं मिला है जिससे उन्हें अपना खर्च चलने में दिक्कत आ रही है। इस पर दिल्ली उच्च न्यायालय में मामला विचाराधीन है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी की कि बिना वेतन किसी भी व्यक्ति (कर्मचारी) से काम लेना सभ्य समाज की भावना के खिलाफ है। इन शिक्षिकों की याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट की यह अहम् टिप्पणी सामने आई।

रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला लोनी रोड स्थित निजी सिद्धार्थ इंटरनेशनल स्कूल से जुड़ा है। इस स्कूल के सात शिक्षकों ने आरोप लगाया है कि उन्हें अप्रैल २०१८ से वेतन ही नहीं दिया गया है। इस मामले की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश सी हरि शंकर ने नाराजगी जाहिर की। साथ ही कोर्ट ने सिद्धार्थ इंटरनेशनल स्कूल को नोटिस जारी कर दो हफ्ते के भीतर इस मामले पर जवाब दायर करने को कहा है। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई एक अक्टूबर को तय की है।

इस शिक्षिकों ने अपने वकील के जरिये अदालत में याचिका दायर कर वेतन दिलाने की गुहार की हुई  है। सातों शिक्षकों का आरोप है कि स्कूल प्रशासन ने छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू ही नहीं किया है। यही नहीं स्कूल के करीब ६० कर्मचारियों का पांच महीने से वेतन रोक कर रखा गया है। स्कूल के कुल ६० कर्मियों में से ४५ अकेले शिक्षक हैं जबकि १५ अन्य विभागों से जुड़े कर्मी हैं। शिक्षकों का कहना है छात्रों से तो मोटी फीस ली जाती है लेकिन कर्मियों की तनख्बाह नहीं दी जाती। ऐसा दूसरे स्कूल में भी किया जाता है।

क्या तमाशा बन जायेंगे जम्मू कश्मीर के चुनाव !

जम्मू कश्मीर में जिन पंचायत, शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव इसी साल नवंबर और दिसंबर के बीच आठ चरणों में करवाने की घोषणा सरकार ने की है, वे संकट में पड़ते दिख रहे हैं। अलगाववादियों और कुछ मुख्य धारा की पार्टियों के इन चुनावों के बॉयकाट के ऐलान के बाद अब सवाल उठने लगा है कि क्या आखिर में सिर्फ भाजपा ही चुनाव मैदान में रह जाएगी ?
घाटी में आम तौर पर यह माना जाता है कि हुर्रियत की चुनावों के बहिष्कार की घोषणा के बाद जनता चुनावों में वोट डालने से कतराती है। उसे हिंसा का डर रहता है। अब तो मुख्य धारा की नैशनल कांफ्रेंस (एनसी) ने भी चुनावों के बहिष्कार का ऐलान कर दिया है। ऊपर से जम्मू कश्मीर में पीडीपी-भाजपा सरकार टूटने के बाद आतंकवादी घटनाओं में पिछले दो महीने में बहुत ज्यादा बढ़ौतरी हुई है। ऐसे में नए राज्यपाल सत्यपाल मलिक के सामने यह बड़ी चुनौती है कि इन चुनावों को कैसे सबकी भागीदारी से सफलता और शांति से करवाया जाये।
पीडीपी की सोमवार को चुनाव के फैसले को लेकर बैठक है। अभी कहना मुश्किल है कि पीडीपी का क्या फैसला होगा। गठबंधन से अलग होने के बाद पीडीपी पर कुछ हलकों में यह आरोप लगा था कि बीजीपी और पीडीपी ने ऐसा मिलीभगत से किया है ताकि चुनाव तक अपने वोट बैंक की नाराजगी दूर कर अपनी हालत सुधारी जा सके। यह अलग बात है कि दो महीने में कश्मीर में हालात ज्यादा खराब हो गए हैं।
नैशनल कांफ्रेंस अपनी कोर ग्रुप की बैठक के बाद पहले ही इन चुनावों के बॉयकाट की घोषणा कर चुकी है। पार्टी के नेता फारूक अब्दुल्लाह ३५-ए को लेकर भाजपा-केंद्र के रुख का भी विरोध कर चुकी है। उसने विधानसभा के चुनाव के बॉयकाट तक का ऐलान किया है। ऐसे में चुनाव को लेकर सवाल उठने लाजिमी हैं।
शनिवार को हुर्रियत ने श्रीनगर में पंचायत और स्थानीय शहरी निकाय के चुनावों के बॉयकाट की काल के साथ बड़ा जुलूस निकाला। सूबे में राज्यपाल का शासन है लेकिन कहीं भी हुर्रियत की इस बॉयकाट काल वाले जुलूस को रोकने की कोशिश प्रशासन ने नहीं की। इस पर राजनीतिक दल हैरानी जाता रहे हैं। उनमें से कुछ को लग रहा है नई दिल्ली चुनाव के बॉयकाट की काल को ताकत देकर चाल चल रही है। इन नेताओं को लगता है कि भाजपा की चाल है कि वह खुद आखिर में चुनाव में रहकर अपनी जीत का ढिंढोरा देश में पीटेगी।
कांग्रेस ने अभी चुनाव को लेकर कोइ फैसला नहीं किया है। कश्मीर के अलावा जम्मू में उसका बड़ा वोट बैंक रहा है जिसपर  पिछले चुनाव में भाजपा ने कब्ज़ा कर लिया था। इस बार भाजपा की हालत पतली दिख रही है। यदि कांग्रेस भी चुनाव में नहीं उतरती है तो भाजपा का रास्ता खुद-व-खुद साफ़ हो  जाएगा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रविंद्र शर्मा ने कहा कि कांग्रेस हमेशा लोक तांत्रिक प्रक्रिया के सक्रिय रहने की पक्षधर रही है। ”भाजपा को न तो लोक तंत्र की चिंता है न जनता की। वो तो बस चुनाव जीतना चाहती है चाहे लोगों और लोक तंत्र को इसकी कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़े।”
मुख्य धारा की पार्टियां आरोप लगा रही हैं कि गवर्नर का ”इस्तेमाल” कर नई दिल्ली (भाजपा) सूबे में अपनी मनमर्जी करना चाहती है। सरकार पहले ही ८ नवम्बर से लेकर ४ दिसंबर के बीच आठ चरणों में पंचयता और शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव करवाने की घोषणा कर चुकी है। गौरतलब है कि २०११ में यह चुनाव १६ चरणों में हुए थे।
लोगों को लगता है कि भाजपा कोशिश कर रही है कि मुख्य दलों के बाहर रहने और कम मतदाम वाले चुनाव में वह अपनी जीत दिखा सके ताकि देश में इसका प्रचार कर अपने पक्ष में माहौल किया जा सके। पिछले चुनाव के वक्त सूबे में सूबे में ४०९८ पंचायतें थीं जबकि डीलिमिटेशन के बाद इनमें २८० नई पंचायतें जुड़ जाने से इनकी कुल संख्या अब ४३७८ हो गयी है। इसी तरह ४००० नए पंच पद जुड़ने से इनकी तादाद भी बढ़कर ३३,४०२ हो गयी है।
कुछ रोज पहले ही लद्दाख की ऑटोनोमस हिल डेवलपमेंट कौंसिल (एलएएचडीसी) के चुनाव में भी भाजपा और तीन साल तक उसकी साथी रही पीडीपी को तगड़ा झटका लगा था। इन चुनावों में एनसी और कांग्रेस को बड़ी जीत मिली है। चार साल पहले ही लद्दाख से लोगों ने बड़ी उम्मीद से भाजपा को अपनी संसद की सीट दी थी लेकिन अब उनका मोह भांग हो गया जो नतीजों से साफ़ जाहिर हो जाता है।
कुलमिलाकर जम्मू कश्मीर के पंचायत और शहरी स्थानीय निकाय चुनाव सवालों के घेरें में आ रहे हैं। यह सम्भावना बन रही है कि वर्तमान हालात में यह चुनाव हों ही नहीं जबकि भाजपा हर हालत में यह चुनाव करवाना चाहती है।

हरियाणा : हादसे में ६ की मौत

हरियाणा के रेवाड़ी में रविवार तड़के एक सड़क हादसे में छह लोगों की मौत हो गयी। हादसा एक कार और ट्रक के बीच टक्कर हो जाने से हुआ। हादसे में एक महिला घायल हुई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना राष्ट्रीय राजमार्ग -८ पर खेड़ा के बार्डर के पास की है।  दोनों वाहनों में टक्कर इतनी जोर की थी कि सभी ६ लोगों की मौके पर ही मौत हो गयी। मिली जानकारी के मुताबिक हादसे का शिकार सभी छह लोग अपनी असेंट कार में जयपुर से दिल्ली जा रहे थे। हाईवे पर उनकी कार की सामने से आ रहे ट्रक से जोरदार भिड़ंत हो गयी।
हादसे में कार में सवार इन सभी की मौके पर ही मौत हो गयी। एक महिला हादसे में घायल हुई है जिसे अस्पताल में भर्ती किया गया है। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने शव कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी।
पुलिस ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि रेवाड़ी जिले के खेड़ा बार्डर के एनएच 8 पर यह सड़क हादसा हुआ। एक ट्रक और कार के बीच जोरदार भिड़ंत हो गई और हादसा इतना भयानक था कि मौके पर ही 6 लोग की मौत हो गई। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए हैं और मामले की जांच कर रही है।

कटे-फटे नोट बदलने के नियमों में हुआ संशोधन

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने  नोट रिफंड रूल्स २००९ में कई महत्वपूर्ण संशोधन किये हैं और उन्हें तत्काल लागू भी कर दिया है।
अब कोई भी बैंक 200 और 2000 रुपये के गंदे और कटे-फटे नोट बदलने से मना नहीं कर सकता है।
आपको याद होगा इससे पहले नियमों के अनुसार सिर्फ 1, 2, 5, 10, 20, 50, 100, 500, 1000 रुपये के नोट बदलने का ही प्रावधान था।
आरबीआई के मुताबिक, 50 रुपये और उससे अधिक मूल्य के नोट के मामले में पूर्ण मूल्य के भुगतान के लिए नोट के न्यूनतम क्षेत्र की जरूरत को लेकर भी नियम में बदलाव किए गए हैं.
रिजर्व बैंक ने कहा, “50 रुपये से कम मूल्यवर्ग के कटे-फटे नोट के पूर्ण मूल्य का भुगतान तभी किया जा सकता है जब नोट के कुल क्षेत्र का कम से कम 40 फीसदी हो।”
नए नियम के अनुसार रिजर्व बैंक के देश भर में कार्यालयों या मनोनीत बैंक शाखाओं में कटे-फटे नोट बदले जा सकते हैं।
नोट बदलने का कानून आरबीआई एक्ट की धारा 28 के अंतर्गत आता है। इसमें नोटबंदी के पहले जैसे ही कटे फटे या गंदे नोट बदलने की इजाजत थी। नोटबंदी के बाद रिजर्व बैंक ने अब तक इसमें कोई भी संशोधन नहीं किया था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक़ संशोधित नियमों में 200 और 2000 रुपये के नोट बदलने के प्रावधान को जोड़ दिया गया है। साथ ही 1000 रुपए के नोट को बदलने का प्रावधान हटा दिया गया है।
आप को याद होगा कि नवंबर 2016 को नोटबंदी के बाद 2000 रुपये के नोट जारी किए गए थे। जबकि 200 रुपये का नोट सितंबर 2017 के बाद जारी हुआ था ।

पति के बाद पत्नी की भी पीट-पीट कर हत्या

बिहार में हिंसा की वारदातें थमने का नाम नहीं ले रहीं। वहां बुधवार को डेहरी (रोहतास) में बच्चों के मामले में एक पुरुष की हत्या कर दी गयी थी। अब शनिवार को पीट-पीट कर उसकी पत्नी की भी बेरहमी से हत्या कर दी गयी। पुलिस और प्रशासन कुछ नहीं कर पाया।
पुरुष की पीट-पीटकर हत्या का मामला शनिवार को एक और खूनी संघर्ष में तब्दील हो गया। दो विरोधी पक्षों में जमकर मारपीट हुई जिसमें बुधवार को जान गवाने वाले विश्वनाथ राम की पत्नी की भी डंडों-पथरों से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। आंबेडकर चौक के पास की इस घटना में एक व्यक्ति गंभीर घायल हो गया। पुलिस ने महिला समेत तीन लोगों को हिरासत में लिया है। घटना के बाद इलाके में रविवार को भी तनाव देखते हुए पुलिस आरोपियों की खोज कर रही है।
हिंसा में जान गवाने वाली महिला माला देवी (५०) के पुत्र ने पुलिस में जो एफआईआर दर्ज करवाई है उसमें मान की मौत के लिए उसे डायन बताकर मारने का आरोप लगाया गया है। माला वर्षों से आंबेडकर चौक के समीप झोपड़ी में रह रही थी और बांस का सूप-दौरा बेचने का काम करती थी। बुधवार को माला और बच्चों के विवाद में पड़ोसी हीरामुनी देवी से उसका झगड़ा हुआ था। परिजनों का आरोप है कि हीरामुनि देवी ने अपने लोगों के साथ माला देवी के पति विश्वनाथ राम की पिटाई की थी, जिससे उसकी मौत हो गई। हालांकि, इसकी शिकायत पुलिस से नहीं कर शव का दाह संस्कार आनन-फानन में सोन नद के तट पर कर दिया गया था।
विश्वनाथ और उसकी पत्नी की पीट-पीट कर हत्या करने के बाद परिजनों में गुस्सा फ़ैल गया। गुस्साए परिजनों ने पड़ोसियों से मारपीट की जो जल्दी ही हिंसा में बदल गयी। लाठी-डंडों के साथ सड़क पर दोनों गुटों में जमकर मारपीट हुई। लोगों का आरोप है कि सूचना के बावजूद पुलिस घटनास्थल पर नहीं पहुंची। बाद में पुलिस ने मौके से हीरामुनी देवी, रंगबहादुर और रामअवतार को गिरफ्तार जरूर किया।

भाजपा का ”शाह-मात” खेल

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की कैलाश मानसरोवर यात्रा के बीच भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी  २०१९ के चुनाव के लिए देश की राजधानी में मंथन कर रही है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, जिनका कार्यकाल अगले साल जनवरी में – यानी लोक सभा चुनाव से दो-चार महीने पहले – ख़त्म होना है को लेकर संकेत यह है कि भाजपा संगठन के राष्ट्रीय और प्रादेशिक दोनों चुनाव कुछ माह के लिए टालकर शाह के ही नेतृत्व में चुनाव में उतरेगी। यानी कांग्रेस (राहुल गांधी) को मात देने के लिए भाजपा शाह की चतुर रणनीति से चुनाव तक वंचित नहीं होना चाहती !

इस चुनाव के लिए भाजपा ने दो नारे तैयार किये हैं।  एक – ”अजय भाजपा” और दूसरा – ”हमारे पास दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता मोदी”। भाजपा के एक बड़े नेता के मुताबिक पार्टी चुनाव में मोदी को दोबारा अपने ”ब्रांड लीडर” के रूप में सामने कर और बूथ स्तर तक मजबूत टीम बनाकर मैदान में उतरेगी। रविवार को पीएम नरेंद्र मोदी कार्यकारिणी में भाषण देंगे। वे सरकार की उपलब्धियों पर बात कर सकते हैं लेकिन इसके बावजूद पार्टी अपनी नैया पार करने के लिए ”मोदी की व्यक्तिगत छवि” को उभार कर कार्यकर्ताओं में जोश भरेगी।

भाजपा की अंदरूनी स्थिति का आकलन करने से साफ़ जाहिर हो जाता है कि आम रैलियों में जिस तरह कांग्रेस पांच साल विकास की बात करते-करते चुनावों में पूरी तरह इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की व्यक्तिगत छवि पर निर्भर होकर मैदान में जाती थी, भाजपा भी वही करने जा रही है। भाजपा ने २००४ में ऐसा अटल बिहारी वाजपेयी की छवि को लेकर भी किया था।

दिलचस्प समानता यह दिख रही है कि २००४ में जिस तरह भाजपा ने ”इंडिया शाइनिंग” का नारा भी अटल की छवि के साथ उछाला था, उसी तरह इस समय भी भाजपा ”न्यू इंडिया” की बात कर रही है जिसमें वह यह सन्देश देने की कोशिश कर रही है कि मोदी के नेतृत्व में देश में ”आशातीत” विकास हुआ है और देश ”शाइन” कर रहा है। सच तो यह है की भाजपा पिछले चार-साढ़े चार साल में यही कहती रही है कि कांग्रेस के राज में देश ”डूब” गया था और पीएम मोदी ने इसे उससे ”बाहर निकाल दिया” है।

भाजपा नेता भले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का उनकी कैलाश मानसरोवर यात्रा से लेकर दूसरी हर बात के लिए मखौल उड़ाने में लगे हों, पार्टी के भीतर इसके विपरीत सोच है। एक बड़े भाजपा नेता ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर बताया कि पार्टी मानती है कि राहुल धीरे-धीरे मोदी के सामने एक चुनौती के रूप में खड़े हो रहे हैं।

दरअसल राहुल का मजाक उड़ाना भाजपा की रणनीति का बड़ा हिस्सा हैं। भाजपा ”थिंक टैंक” का मानना है कि राहुल की छवि देश की जनता के सामने एक ”कमजोर नेता” के रूप में पेश करना भाजपा के लिए ज़रूरी है। भाजपा देश में यह सन्देश देते रहना चाहती है कि मोदी देश की ज़रुरत हैं क्योंकि उनके मुकाबले कोई नहीं – राहुल गांधी भी नहीं। इस नेता ने स्वीकार किया कि जिस दिन जनता के मन में यह बैठ जाएगा कि राहुल वास्तव में वैसे कमजोर नहीं जैसा भाजपा प्रचारित करती है, उसी दिन राहुल मोदी के सामने एक बड़ी चुनौती के रूप में होंगे। भाजपा इससे हर हालत में बचना चाहती है।

कांग्रेस में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सक्रियता और कमोवेश नियमित रूप से मोदी सरकार के खिलाफ उनकी बयानबाजी भी दिलचस्पी पैदा करती है। चुनाव के ऐन मौके पर या नतीजे आने पर किसी ज़रुरत में कांग्रेस मनमोहन का नाम आगे कर सकती है। गठबंधन उनके नाम से अस्वीकार नहीं कर पायेगा। कांग्रेस के भीतर कुछ जानकार यह मानते हैं कि राहुल वास्तव में २०१९ नहीं २०२४ के लिए कांग्रेस को तैयार कर रहे हैं !

भाजपा २००४ में मिली हार को भी सबक के रूप में रखना चाहती है जब चीजें भाजपा के खिलाफ ज्यादा नहीं थीं। अटल जैसा नेतृत्व उसके पास था। सरकार का काम भी बुरा नहीं रहा था। पोखरण विस्फोट करके देशभक्ति को भुनाने की कोशिश भी भाजपा ने की थी। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना भी सफल थी। महंगाई पर भी कमोवेश अंकुश रहा था। लेकिन भाजपा हार गयी थी और सोनिया गांधी के अघोषित नेतृत्व में कांग्रेस २०६ सीटें जीत गयी थी।

भाजपा के लिए चिंता दूसरी भी है। बतौर अध्यक्ष और भाजपा रणनीतिकार अमित शाह अपराजेय नहीं रहे हैं। कर्नाटक में मिली हार और गुजरात के विधानसभा चुनाव में मुश्किल से मिली जीत इसका सबूत हैं। इसी तरह मोदी का चेहरा ”हर चुनाव जीता सकता है” इसकी गारंटी उत्तर प्रदेश और बिहार आदि के उपचुनावों में छिन-भिन्न हुई है। वहां झटका योगी आदित्यनाथ को भी लगा है जिन्हें मीडिया का एक वर्ग मोदी के उत्तराधिकारी के रूप में कभी-कभी पेश करने की कोशिश करता रहा है।

भाजपा २०१९ के चुनाव पास आते-आते मुद्दों की दिशा से भटकती भी दिख रही है। राम मंदिर, हिन्दू-मुसलमान फिर इसके नेताओं के भाषणों के केंद्र में आ चुके हैं। यह इस बात का संकेत है कि किसी एक छवि या मुद्दे के सहारे वह खुद को बहुत मजबूत धरातल पर खड़ा नहीं महसूस करती। आने वाले महीनों में भाजपा को राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़, तेलंगाना आदि के विधानसभा चुनाव झेलने हैं जहाँ अपनी स्थिति खुद भाजपा के नेता मजबूत नहीं मान रहे। भाजपा का बस चलता तो वह इन चुनावों को लोक सभा चुनाव के साथ ही करवाना चाहती ताकि २०१९ के लोक सभा के चुनाव से पहले ”हार” का मनोविज्ञानिक दवाब लेकर मैदान में न उतरना पड़े।

अब बात भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की दो दिन की इस मंथन बैठक में भाजपा फिलहाल कार्यकर्ताओं और प्रादेशिक नेताओं में जोश भरने की कोशिश कर रही है। भाजपा का चुनाव के लिए चेहरा मोदी के रूप में सामने है ही। गठबंधन के लिए उसके सहयोगी भी कमोवेश सामने ही हैं। हो सकता है लोक सभा चुनाव से पहले एक-दो उससे छिटकें। लिहाजा भाजपा की इस बैठक का मकसद एक ही है – कार्यकर्ताओं के दिल में यह बैठाये रखना कि २०१९ में पार्टी ही जीतकर सरकार बनाने वाली है। शाह ने बैठक के पहले दिन इसी मनोविज्ञानिक तरीके का सहारा लिया और कहा – ”भाजपा लोक सभा चुनाव प्रचंड बहुमत से जीतेगी”।

शनिवार को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी ने उद्घाटन सत्र में पांच राज्यों के विधानसभा  चुनाव के लिए डटने का संकल्प लिया। शाह ने एससी-एसटी क़ानून को लेकर विपकस्ग के हमलों को  ”भ्रम फैलाने की साजिश” बताकर वर्कर्स को इसका मुकाबला करने की घुट्टी पिलाई। यह मुद्दा भाजपा के लिए चिंता का सबब बना हुआ है। शाह ने ”जीत के संकल्प” को मन में रखने की सलाह कार्यकर्ताओं को दी। तेलंगाना, ओडिशा, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों पर फोकस और साल के अंत तक मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान सहित पांच सूबों के विधानसभा चुनाव में जीत के लिए पूरी ताकत झौंक देने को कहा।

राफेल डील, पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल और रूपये के लगातार चिंताजनक स्तर पर अवमूल्यन जैसे मुद्दी भाजपा के लिए बड़ी चिंता के रूप में सामने हैं। जम्मू कश्मीर में पीडीपी से रिश्ता तोड़कर भाजपा ने जिस अच्छे की उम्मीद की थी हुआ उसके बिलकुल विपरीत है। वहां हालात बहुत खराब हैं। यह भाजपा के लिए बहुत चिंता की बात है। रविवार को पीएम मोदी का भाषण है। जाहिर है भाजपा इसे पार्टी के बीच बड़ा जोश भरने के रूप में इस्तेमाल करेगी।

नेपाल हेलीकॉप्टर हादसे में ६ की मौत

नेपाल में एक हेलीकप्टर हादसे में छह लोगों की मौत हो गयी है। हेलीकप्टर में कुल सात लोग सवार थे जिनमें से एक महिला चमत्कारी रूप से बच गयी। रिपोर्ट्स के मुताबिक हेलीकप्टर धाडिंग और नुवाकोट जिलों से सटे जंगल के पास क्रैश लैंडिंग के वक्त हादसे का शिकार हो गया।
बताया गया है कि दुर्घटनाग्रस्त हेलिकॉप्टर में आग नहीं लगी है। मौसम खराब होने और वहां दुर्गम इलाका होने के कारण बचाव कार्य में कठिनाई आ रही है। नेपाली सेना का एक हेलिकॉप्टर और एक निजी हेलिकॉप्टर दुर्घटनास्थल पर राहत कार्य के लिए भेजे गए हैं। हादसे में जिन ६ लोगों की जान गयी है उनमें एक विदेशी भी शामिल है।
मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया है कि एल्टीट्यूड एयर का हेलीकॉप्टर सुबह से लापता था और  धाडिंग और नुवाकोट क्षेत्र के जंगल में उसे क्रैश लैंडिंग करनी पड़ी। त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के अधिकारियों ने कहा हेलिकॉप्टर गोरखा के समागांव से एक मरीज और अन्य यात्रियों को लेकर काठमांडो के लिए उड़ा था। करीब 32 किलोमीटर की उड़ान के बाद नेपाल के समयानुसार सुबह करीब ८.११ पर काठमांडो टावर से उसका संपर्क टूट गया था।
हेलिकॉप्टर में एक जापानी पर्वतारोही समेत 6 यात्री सवार थे। इसमें एक महिला हे जीवित बची है।
शनिवार को नुवाकोट जिले के सुरचेत में 7 लोगों को लेकर उड़ रहा हेलीकॉप्टर ऊंची चोटी के ऊपर दुर्घटनाग्रस्त होकर घने जंगल में गिर गया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक हेलिकॉप्टर को गोरखा को एक मरीज को काठमांडू में ले जाने के लिए भेजा गया था। एल्टीट्यूड एयर प्राइवेट लि. के एमडी नीमा नुरू शेरपा ने कहा कि स्थानीय लोगों ने नुवाकोट जिले के सुदूरवर्ती इलाके में हेलिकॉप्टर का मलबा देखा है। इस हेलीकॉप्टर के पायलट वरिष्ठ कैप्टन निश्छल केसी थे।
कहा गया है कि राहतकर्मियों ने छह शव बरामद किए हैं जिनमें वरिष्ठ कैप्टन निश्छल केसी का शव भी शामिल बताया गया हैं। हादसे में जान गंवाने वाले विदेशी की पहचान हीरोमी कोमात्सू (६८) के तौर पर की गई है। खबर में कहा गया कि जीवित बची महिला के शरीर पर कुछ जगह चोट के निशान हैं और उसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया है।

संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव ने सराहा दिल्ली मोहल्ला क्लिनिक

संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव बान की मून नॉर्वे की पूर्व प्रधानमंत्री ग्रो हार्लेम ब्रंटलान ने दिल्ली में आप सरकार द्वारा शुरु किए गए मोहल्ला क्लीनिकों का दौरा किया।

इस दौरान दिल्ली के मुख्य मंत्री अरविन्द केजरीवाल के अलावा वहां दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन और कई अन्य अधिकारी मौजूद थे।

दौरे के बाद बान की मून ने कहा कि “मैं दुनिया के कई अलग अलग हिस्सों में गया लेकिन आज जो मैंने देखा वह स्वास्थ सेवा का सबसे बेहतरीन और व्यवस्थित रूप था. यह मोहल्ला क्लीनिक और पॉलीक्लीनिक था। ”

इन क्लिनिकों का दौरा करने वाले प्रतिनिधिमंडल में मानवाधिकारों और शांति के लिए काम करने वाले एक स्वतंत्र संगठन ‘द एल्डर्स’ के सदस्य भी शामिल थे।

दिल्ली सरकार द्वारा संचालित मोहल्ला क्लीनिकों में दवाइयां एवं उनकी बीमारियों की जांच के साथ ही डॉक्टरों के परामर्श बिलकुल मुफ्त होता है।

हाल ही में एक कार्यक्रम में मोहल्ला क्लीनिक के अधिकारियों को झाड़ लगाते हुए केजरीवाल ने कहा था कि अगर वे लोग ठीक से काम नहीं कर सकते तो दिल्ली के मुख्य मंत्री उनके खिलाफ आपराधिक मामले चलाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।