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मॉब लिंचिंग पर रिपोर्ट पेश न करने पर पड़ी कई राज्यों को फटकार

उच्च न्यायलय ने मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर रोक लगाने से संबंधित अपनी रिपोर्ट न सौंपने पर कई राज्यों की खिंचाई करते हुए एक हफ्ते की आखिरी मोहलत दी है।
याद रहे जुलाई १७ को मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए शीर्ष न्यायालय ने राज्यों को अपने यहां एक व्यवस्था बनाने का आदेश दिया था  लेकिन अब तक 29 राज्यों और सात केंद्र शासित प्रदेशों में से सिर्फ 11 ने इन्हें लागू किए जाने की रिपोर्ट पेश की है।
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुआई वाली तीन जजों की बेंच ने कहा, “अगर रिपोर्ट पेश नहीं की गई तो संबंधित राज्यों के गृह सचिवों को खुद अदालत में उपस्थिति देनी होगी।”
इस मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र ने कोर्ट को सूचित किया कि अदालत के फैसले के बाद भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या करने के बारे में कानून बनाने पर विचार के लिए मंत्रियों के समूह का गठन किया गया है। कोर्ट कांग्रेस नेता तहसीन पूनावाला की याचिका पर सुनवाई कर रहा था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक़ मॉब लिंचिंग मामले में उत्तर प्रदेश की सरकार ने कोर्ट को बताया कि उनकी सरकार ने 17 जुलाई 2018 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अनुपालन किया है. मॉब लिंचिंग की घटना को रोकने के लिए सभी जिलों के SP को नोडल ऑफिसर बनाया गया है.
आज तक की एक रिपोर्ट के अनुसार यूपी सरकार की ओर से कहा गया है कि नोडल ऑफिसर टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जो उन लोगों पर नजर रखेगी जो हिंसा को भड़काते हैं या अफ़वाह के जरिए माहौल बनाने की कोशिश करते हैं.
नोडल ऑफिसर लोकल इंटेलिजेंस यूनिट के साथ हर महीने में कम से एक बार मीटिंग करेगा. नेशनल हाई-वे पर पुलिस की पेट्रोलिंग शुरू की जा चुकी है. उन इलाकों में भी पेट्रोलिंग की जा रही है जहां लिंचिंग की घटनाएं हुई हैं.
कोर्ट को सरकार के द्वारा बताया गया है कि अगर कोई लिंचिंग की घटना में शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ FIR दर्ज की जाएगी और कानून के मुताबिक आगे की कार्रवाई की जाएगी. इसके अलावा पीड़ित परिवार को पुलिस पूरी सुरक्षा मुहैया कराएगी.
उच्च न्यायलय ने राजस्थान सरकार को भी रकबर खान की हत्या के मामले में की गई कार्रवाई पर एक हफ्ते में रिपोर्ट पेश करने को कहा। किसान रकबर की 20 जुलाई को अलवर में कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी।
इससे पहले कोर्ट ने पूनावाला की याचिका पर राजस्थान सरकार को नोटिस जारी किया था। याचिका में अदालत के फैसले के कथित उल्लंघन का हवाला देते हुए प्रदेश के पुलिस प्रमुख, मुख्य सचिव समेत अन्य अफसरों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई करने की मांग की गई थी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक़ कोर्ट ने निर्देश दिया है कि समाज में शांति-सद्भाव हर हाल में बनाए रखना होगा। कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपनी आधिकारिक वेबसाइटों पर मॉब लिंचिंग के खिलाफ दिशा-निर्देश जारी करने को कहा। मामले की अगली सुनवाई 13 सितंबर को होगी।

पीयू में पहली बार महिला छात्र अध्यक्ष

पंजाब यूनिवर्सिटी के इलेक्शन में पहली बार लड़कियों ने बाजी मारने का रेकार्ड बना दिया है। स्टूडेंट फेडरेशन फॉर सोसाइटी पार्टी की कनुप्रिया ने प्रमुख राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों को पछाड़कर अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक कनुप्रिया ने एबीवीपी के उम्मीदवार को हराया। पंजाब यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स इलेक्शन में पहली बार कोई महिला ने बाजी मारी है। स्टूडेंट फेडरेशन फॉर सोसाइटी पार्टी की कनुप्रिया  को 2802 वोट मिले जबकि आशीष 2083 वोट ही जुटा पाए।
पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के स्टूडेंट्स इलेक्शन में अध्यक्ष पद पर इस बार स्टूडेंट फॉर सोसाइटी ने कब्जा जमाया है। यहां पढ़ने वाले ज्यादातर छात्र पंजाब, हरियाणा, हिमाचल जैसे राज्यों के हैं। इस बार यहां नया इतिहास रचा गया है। कनुप्रिया ने अपनी जीत पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह मेरी नहीं स्टूडेंट्स की जीत है। एसएफएस लंबे समय से स्टूडेंट्स के राइट्स के लिए लड़ता रहा है।
अभी तक यहां कांग्रेस की एनएसयूआई, एबीवीपी और अकाली दल की सोई और हरियाणा के लोकदल की इनसो पार्टियों का ही दबदबा रहा है। लेकिन इस बार स्टूडेंट फॉर सोसाइटी (एसएफएस) की उम्मीदवार जियोलॉजी विभाग की स्टूडेंट कनुप्रिया ने अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की है। कनुर्पिया ने सोई-इनसो-आइएसए-हिमासू पैनल के प्रत्याशी इकबाल प्रीत सिंह को हराया। पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में करीब चार साल पहले स्टूडेंट फॉर सोसाइटी छात्र संगठन का गठन किया गया।

कैलाश यात्रा में १३ किलोमीटर पैदल चले राहुल

भले भाजपा ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की कैलाश मानसरोवर की यात्रा को लेकर सवाल उठाने की कोशिश की है, गांधी ने यात्रा का अपना एक वीडियो अपलोड कर भाजपा के इस प्रचार की हवा निकालने की कोशिश की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक राहुल गांधी ने शिव धाम की यात्रा के दौरान करीब १३ किलोमीटर की कठिन चढ़ाई चढ़ी।
इससे पहले राहुल ने कैलाश यात्रा की प्राकृतिक नजारों की तस्वीरें जब अपलोड की थीं तो भाजपा ने इन्हें ”फेक” बता दिया था लेकिन राहुल ने अब अपना वीडियो अपलोड किया है। कांग्रेस के नेताओं ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि वो झूठ फैलाकर राहुल को बदनाम करने की हर संभव कोशिश करती है लेकिन जनता समझ रही है कि भाजपा राहुल से घबरा कर यह सब कर रही है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक ”गुरुवार को राहुल गांधी ने 13 घंटे तक पैदल चढ़ाई की और इस दौरान 34 किलोमीटर की यात्रा पूरी की। आमतौर पर कैलाश मानसरोवर जाने वाले श्रद्धालु इस दूरी को खच्चरों के जरिए पूरी करते हैं, लेकिन राहुल गांधी ने ये यात्रा पैदल पूरी की। शुक्रवार को आई राहुल की इस तस्वीर में टोपी, चश्मा, जींस, जैकेट पहने दिख रहे हैं। राहुल के साथ एक शख्स और भी है”।
रिपोर्ट्स में बताया गया है कि राहुल की ये तस्वीर सोशल मीडिया पर लेखक साध्वी खोसला ने साझा की है। यह तस्वीर सामने आने के बाद राहुल गांधी ने खुद एक वीडियो साझा की जिसमें वे कुछ लोगों के साथ बातचीत करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसमें उन्होंने जैकेट सहित गर्म वस्त्र और कैप पहनी हुई है। गांधी कैलाश मानसरोवर यात्रा पर अपने कैंप में दिख रहे हैं। राहुल यहां कई अन्य श्रद्धालुओं के साथ खड़े हैं। ये वीडियो भी लेखक साध्वी खोसला ने ही ट्विटर पर साझा की।
वहीं ट्विटर और इंस्टाग्राम पर शेयर की उनकी तस्वीरों को भाजपा नेता झुठलाने में लगे हैं। शुक्रवार को राहुल गांधी की पहली तस्वीर शेयर होने पर भाजपा नेताओं ने बयानबाजी तेज की है। राहुल की कैलाश यात्रा की वीडियो और तस्वीरें सामने आती रही हैं। पहले राहुल गांधी ने कैलाश मानसरोवर झील और कैलाश पर्वत की वीडियो शेयर की थी। उसे लेकर बीजेपी के कुछ नेताओं ने तस्वीरों को ”फोटोशॉप्ड” बताते हुए कहा था कि कांग्रेस अध्यक्ष झूठ बोल रहे हें। वे यात्रा पर गए ही नहीं। कुछ ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी इंटरनेट से तस्वीरें डाउनलोड कर तस्वीरें साझा कर रहे हैं। इसके बाद ही राहुल ने अपनी तस्वीरों को साझा करना शुरू किया है।

गुजरात कांग्रेस भी करेगी हार्दिक के साथ उपवास

दो हफ्ते से अनशन पर बैठे पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने कहा है कि अगर उनकी मौत भी हो जाएगी तो बीजेपी को कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

हार्दिक ने एक ट्वीट में कहा है कि अब तक बीजेपी की तरफ से कोई बात नहीं की गई है। कोई बात नहीं, चुनाव भी आ रहा है।

इधर गुजरात कांग्रेस ने कहा कि अगर हार्दिक पटेल से बातचीत नहीं की जाती है तो शुक्रवार को उनके समर्थन में कांग्रेस 24 घंटे का उपवास करेगी।

हार्दिक के अनशन का आज १४ वां दिन है और वह व्हीलचेयर में बहुत ही कमजोर नजर आ रहे हैं।

उन्होंने अहमदाबाद के समीप अपने फार्महाऊस पर 25 अगस्त को उपवास शुरु किया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ प्रदेश अध्यक्ष अमित चावड़ा और विपक्ष के नेता परेश धनानी एवं करीब 25 विधायकों समेत प्रदेश कांग्रेस के तीस नेताओं ने गुरुवार को पटेल के उपवास के सिलसिले में मुख्यमंत्री विजय रुपाणी से मुलाकात की थी।

कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि राज्य सरकार पटेल से बातचीत शुरू करे और कृषि ऋण माफी से संबंधित उनकी मांग मान ले।

याद रहे कि हार्दिक पटेल नौकरियों और शिक्षा में पाटीदार के लिए आरक्षण तथा किसानों के ऋण माफ करने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन उपवास पर हैं।

होटल के पंखे से लटकी मिली टीवी अभिनेत्री पायल की लाश

उत्तरी बंगाल के सिलीगुड़ी में होटल के एक कमरे में टेलीविजन अभिनेत्री पायल चक्रवर्ती को रहस्यमय परिस्थितियों में फांसी पर लटकता हुआ पाया गया.
शुरुआती जांच में  ये मामला आत्महत्या का लग रहा है मगर  पुलिस अन्य पहलुओं पर भी छानबीन कर रही है।
शव को पोस्टमार्टम के लिए उत्तरी बंगाल मेडिकल कॉलेज और अस्पताल भेज दिया गया है।
एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक़  पायल का शव बुधवार को सुबह होटल के कमरे में पंखे पर लटकता हुआ पाया गया।  वह एक दिन पहले होटल में आयी थीं।
होटल स्टाफ ने बताया कि पायल को बुधवार सुबह गंगटोक के लिए निकलना था, लेकिन शाम तक उसके कमरे का दरवाजा नहीं खुला। इसके बाद कर्मचारियों ने पुलिस को इसकी सूचना दी।
अभिनेत्री के पिता प्रबीर गुहा ने बताया कि पिछले दिनों पायल का तलाक हो गया था। इसके बाद वह मानसिक तौर पर परेशान रहने लगी थी। पायल का दो साल का एक बेटा है।
याद रहे कि दक्षिण कोलकाता की निवासी पायल ने कई टेलीविजन सीरियलों और वेब सीरिज में अभिनय किया था।

तेलंगाना विधानसभा भंग

सरकार की पूर्ण अवधि से नौ महीने पहलेhe तेलंगाना विधानसभा भंग कर दी गयी है। मुख्यमंत्री के  चंद्रशेखर राव  ने गुरूवार सुबह ६.४५ पर मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई जिसमें राज्य विधानसभा को समयपूर्व भंग कराने का फैसला किया गया। बैठक के बाद मुख्यमंत्री केसीआर ने राज्यपाल इएसएल नरसिम्हन से मुलाकात की और उन्हें विधानसभा भंग करने के मंत्रिमंडल के फैसले का प्रस्ताव सौंपा।  राज्यपाल ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है लिहाजा तेलंगाना विधानसभा भांग कर दी गयी है।
गौरतलब है कि विधानसभा की अवधि पूर्ण होने में अभी नौ महीने का समय था। विधानसभा भांग करने के प्रस्ताव को मंजूरी देने के साथ ही राज्यपाल ने मुख्यमंत्री केसीआर को कामचलाऊ मुख्यमंत्री के रूप में काम करने को कहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक मुख्यमंत्री केसीआर के पार्टी कार्यालय तेलंगाना भवन में प्रेस कांफ्रेंस को जाते बक्त रास्ते में सीएम को कुछ प्रदर्शनकारियों के विरोध का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री कार्यालय के सामने धरना दे रहे हैं। प्रदर्शनकारी नौकरियों में नियमित किए जाने की मांग कर रहे हैं।
इस तरह यह पूरी सम्भावना बन गयी है कि तेलंगाना में कुछ और राज्यों जिनमें राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ शामिल हैं, के साथ विधानसभा के चुनाव करवाए जा सकते हैं।
दो-तीन दिन से यह कयास राजनीतिक हलकों में लगाए जा रहे थे कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री विधानसभा भांग करने की सिफारिश कर सकते हैं। बुधवार को जब केबिनेट की बैठक गुरुवार सुबह बुलाने की बात पोख्ता हुई तो तभी यह साफ़ हो गया था कि इसमें विधानसभा भंग करने का फैसला किया जा सकता है और इसकी सिफारिश गुरूवार को ही राज्यपाल से की जा सकती है।

सवर्णों का भारत बंद

मोदी सरकार के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटते हुए एससी/एसटी क़ानून  में संशोधन के खिलाफ  गुरुवार को सवर्णों के भारत बंद का असर देखने को मिल रहा है। बंद के दौरान हिंसा की भी ख़बरें हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक हिंसा का ज्यादा असर मध्य प्रदेश और बिहार में है। मध्य प्रदश के ग्वालियर, भिंड, मुरैना सहित दस जिलों में धारा-144 लागू की गयी है। बिहार के आरा में बंद समर्थकों ने बाजारों को बंद कराने के साथ ही ट्रेनें भी रोकी हैं। आरा के अलावा दरभंगा और पटना में बड़े पैमाने पर विरोध हो रहा है।
सवर्ण समाज का कहना है कि वो किसी खास समुदाय के खिलाफ नहीं है। लेकिन केंद्र सरकार को सवर्ण समाज की भावना का भी सम्मान करना चाहिए। एमपी सरकार ने राज्य के कई हिस्सों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। यहां 10 जिलों में धारा 144 लागू कर दी गई है और एहतियातन हालातों को काबू में रखने के लिए 10 बजे से 4 बजे तक पेट्रोल पंपों को बंद रखा गया है।
मध्य प्रदेश के कुछ शहरों में शिक्षण संस्थान और इंटरनेट सेवा बंद है। एससी-एसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट के बदलाव करने के बाद 2 अप्रैल को आरक्षण पाने वाले समाज ने आंदोलन किया था। इस दौरान ग्वालियर, चंबल-संभाग में सबसे ज्यादा हिंसा देखने को मिली थी। चार लोगों की मौत हुई थी और इस बार सरकार ऐसी घटनाओं को लेकर सतर्क है।
उधर राजस्थान में क़ानून में संशोधन लाए जाने के खिलाफ अगड़ी जातियों ने सड़क पर उतरने का ऐलान किया है। गुरुवार सुबह भारत बंद का असर यहां भी दिखना शुरू हुआ और जयपुर के स्कूल, कॉलेज और मॉल सब बंद नज़र आए। इसी तरह महाराष्ट्र : महाराष्ट्र के ठाणे में भी सवर्ण समुदाय के लोग एक्ट मन संसोधन का विरोध करने सड़क पर उतरे हैं।

समलैंगिकता अब अपराध नहीं

समलैंगिकता अब अपराध नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को अपराध बताने वाली धारा ३७७ को निरस्त कर दिया है। गौरतलब है इस मसले पर कोर्ट ने जुलाई में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और इसपर अपना निर्णय सुनाया।
मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय खंडपीठ ने समलैंगिकता को अपराध बतानेवाली धारा को खत्म करने का गुरूवार को फैसला सुनाया है। इस फैसले के बाद अब समलैंगिकता अपराध नहीं रहेगी।  देश भर इस मसले पर चर्चा रही है।  जहाँ कुछ लोग इसे अनैतिक बताते रहे हैं वहीं कुछ इसे लोगों की मर्जी पर छोड़ देने के हक़ में रहे थे।  अब कोर्ट का फैसला आने के बाद साफ़ हो गया है कि कानूनन सलैंगिकता अपराध नहीं माना जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने धारा 377 पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते कहा कि एकांत में सहमति से बने संबंध अपराध नहीं है, लेकिन धारा 377 के अंतर्गत पशु से संभोग अपराध बना रहेगा। सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने संमलैंगिकता को अपराध करार देने वाली धारा 377 को अपराधमुक्त करार दिया। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने फैसला सुनाते हुए कहा कि हर किसी को अपनी जिंदगी अपनी मर्जी से जीने का अधिरकार है।
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने अपना और जस्टिस खानविलकर का फैसला पढ़ा। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने फैसला सुनाते हुए कहा, ”मैं जैसा हूँ, उसे वैसा ही स्वीकार किया जाए, आभिव्यक्ति और अपने बारे में फैसले लेने का अधिकार सबको है।” चीफ जस्टिस ने कहा, ”समय के साथ बदलाव ज़रूरी है, संविधान में बदलाव करने की ज़रूरत इस वजह से भी है जिससे कि समाज मे बदलाव लाया जा सके। नैतिकता का सिद्धांत कई बार बहुमतवाद से प्रभावित होता है लेकिन छोटे तबके को बहुमत के तरीके से जीने को विवश नहीं किया जा सकता।”
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ”हर व्यक्ति को गरिमा से जीने का हक है, सेक्सुअल रुझान प्राकृतिक है। इस आधार पर भेद भाव नहीं हो सकता। हर व्यक्ति को गरिमा से जीने का हक है। सेक्सुअल रुझान प्राकृतिक है। इस आधार पर भेद भाव नहीं हो सकतानिजता का अधिकार मौलिक अधिकार है, 377 इसका हनन करता है।”
चीफ जस्टिस ने कहा, ”देश में सबको समानता और सम्मान से जीने का अधिकार सबको हासिल है। कुछ लोग समाज से बहिष्कार की स्थिति झेलते हैं। पहले हुई गलती को सुधारना ज़रूरी है। जो प्राकृतिक है उसको गलत कैसे ठहराया जा सकता है। समाज की सोच बदलने की ज़रूरत है।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए धारा 377 को बहाल कर दिया था। हाईकोर्ट ने 2009 में नाज फाउंडेशन की याचिका पर धारा 377 को हल्का कर दिया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले के खिलाफ कई समीक्षा याचिकाएं दायर की गईं, जिन्हें बाद में रिट याचिकाओं में तब्दील कर दिया गया और मामला संविधान पीठ को सौंप दिया गया था।
पांच जजों की संविधान पीठ यह तय करेगी कि सहमति से दो व्यस्कों के बीच बने यौन संबंध अपराध की श्रेणी में आएंगे या नहीं। संविधान पीठ में मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस रोहिंटन नरीमन, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा शामिल हैं।
शुरुआत में संविधान पीठ ने कहा था कि वो जांच करेंगे कि क्या जीने के मौलिक अधिकार में ‘यौन आजादी का अधिकार’ शामिल है, विशेष रूप से 9-न्यायाधीश बेंच के फैसले के बाद कि ‘निजता का अधिकार’ एक मौलिक अधिकार है।
इससे पहले 17 जुलाई को मुख्या न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान ने धारा-377 की वैधता को चुनौती वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए यह साफ किया था कि इस कानून को पूरी तरह से निरस्त नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने कहा था कि यह दो समलैंगिक वयस्कों द्वारा सहमति से बनाए गए यौन संबंध तक ही सीमित रहेगा। पीठ ने कहा कि अगर धारा-377 को पूरी तरह निरस्त कर दिया जाएगा तो आरजकता की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। हम सिर्फ दो समलैंगिक वयस्कों द्वारा सहमति से बनाए गए यौन संबंध पर विचार कर रहे हैं. यहां सहमति ही अहम बिन्दु है।
पीठ ने कहा था कि आप बिना दूसरे की सहमति से अपने यौन झुकाव को नहीं थोप सकते। पीठ ने यह भी कहा कि अगर कोई भी कानून मौलिक अधिकारों को हनन करता है तो हम कानून को संशोधित या निरस्त करने के लिए बहुमत वाली सरकार के निर्णय का इंतजार नहीं कर सकते। पीठ ने कहा, ‘मौलिक अधिकारों का पूरा उद्देश्य है कि यह अदालत को निरस्त करने का अधिकार देता है। हम बहुमत वाली सरकार द्वारा कानून को निरस्त करने का इंतजार नहीं कर सकते. अगर कानून असंवैधानिक है तो उस कानून को निरस्त करना अदालत का कर्तव्य है।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 11 दिसंबर 2013 को सुरेश कुमार कौशल बनाम नाज फाउंडेशन मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए समलैंगिकता को अपराध माना था। दो जुलाई, २००९ को दिल्ली हाईकोर्ट ने धारा 377 को अंसवैधानिक करार दिया था। इस मामले में पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी थी और फिलहाल पांच जजों के सामने क्यूरेटिव बेंच में मामला लंबित है। अब इस पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से समलैंगिकता को अपराध नहीं माना जाएगा।

दिल्ली मेट्रो दुनिया में दूसरी सबसे महंगी: रिपोर्ट

दिल्ली मेट्रो दुनिया में दूसरी सबसे महंगी मेट्रो सेवा है, ऐसा एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है।

सीएसई की ताज़ी रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल किराया बढ़ाए जाने के बाद दिल्ली मेट्रो दुनिया भर के शहरों में दूसरी सबसे महंगी सेवा हो गई है, जो एक ट्रिप के लिए आधा डॉलर से कम किराया लेती है.

इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कहा कि परिवहन के एक महत्वपूर्ण साधन का आम आदमी की पहुंच से दूर होना ‘बेहद दुखद’ है।

केजरीवाल ने अपने ट्वीट में कहा, ‘‘दिल्ली का मुख्यमंत्री होने के नाते मैं बहुत दुखी हूं कि परिवहन का इतना महत्वपूर्ण साधन आम लोगों की पहुंच से दूर हो गया है। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘वे सभी लोग जिन्होंने मेट्रो को त्याग दिया है, वे अब सड़क परिवहन का इस्तेमाल करके दिल्ली के प्रदूषण में योगदान दे रहे हैं। “

इसी से जुड़ी एक और खबर के अनुसार दिल्ली मेट्रो के यात्रियों को अब अपने पुराने अपठनीय मेट्रो कार्ड को बदलने के लिये परेशान नहीं होना पड़ेगा और स्टेशनों पर यात्री अपने ऐसे कार्डों को ग्राहक सेवा अधिकारी से तत्काल बदलवा सकेंगे।

एक अधिकारी ने बताया है कि पहले ऐसे पुराने कार्ड को बदलवाकर नया कार्ड लेने में पांच या ज्यादा दिनों का इंतजार करना पड़ता था।

डीएमआरसी अधिकारियों ने यह भी कहा कि जिन कार्ड को बदलवाया जाना है उनको सही स्थिति में होना चाहिए।

अस्पताल में बुजुर्ग को खाती रहीं चींटियां; डॉक्टर के फ़ोन ने ली नवजात की जान

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के अस्पतालों से दो ऐसी चौकाने वाली लापरवाही की खबरें आई हैं कि यक़ीन करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन सा हो रहा है।

पहली शर्मनाक घटना शाहजहांपुर के जिला हॉस्पिटल की है जहां एक बुजुर्ग मरीज के घावों को तीन दिन तक चींटियां खाती रहीं । इस दौरान मरीज ऐसे ही फर्श पर पड़ा रहा ।

उस मरीज़ की ग़लती सिर्फ इतनी थी कि इस संसार में शायद उसका कोई अपना नहीं था।

इस बुज़ुर्ग को अस्पताल में बिस्तर और तवज्जह तब मिलना शुरू हुई जब ये मामला मीडिया जनता के सामने लाई। बताया जा रहा है कि अब हॉस्पिटल प्रबंधन मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

दूसरा मामला शाहजहांपुर के जिला महिला अस्पताल का है। यहाँ एक गर्भवती महिला के प्रसव के दौरान डॉक्टर अपने मोबाइल में इतनी व्यस्त हो गई कि प्रसव होने पर नवजात महिला के गर्भ से निकलकर डस्टबिन में जा गिरा।

इससे बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया। हालत बिगड़ने पर सीएमएस ने बच्चे को एसएनसीयू में भर्ती कराया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ डस्टबिन में गिरने की वजह से कुछ ही देर में बच्चे की मौत हो गई। थोड़ी देर बाद मरीज़ मुन्नी देवी ने भी दम तोड़ दिया।

इस हादसे के बाद परिजनों में काफी आक्रोश है। वे जिम्मेदार डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

आरोप है कि डॉक्टर और स्टाफ की लापरवाही से नवजात और उसकी पुत्रवधु की मौत हो गई।