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पेट्रोल-डीजल के दाम तीन-तीन रूपये बढे, बांडेड डीजल की कीमत दूसरी बार बढी

Petrol Diesel Price Hike :14 may 2026 | Photo Source : IBC 24
Petrol Diesel Price Hike :14 may 2026 | Photo Source : IBC 24

15 मई 2026, नई दिल्ली : तेल विपणन कंपनियों ने देशभर में शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तीन-तीन रूपये प्रति लीटर की बढोत्तरी कर दी है। राज्यों के हिसाब से पेट्रोल और डीजल की कीमतें अलग अलग हैं जेसे दिल्लीमें पेट्रोल की कीमत 97.77 रूपये और डीजल की कीमत 90.67 रूपये हो गयी है वैसे ही कोलकाता में 108.74 रूपये का पेट्रोल और 95.13 का डीजल हो गया है। साथ ही मुंबई में 106.6 रूपये का पेट्रोल और 93.14 का डीजल हो गया है।

सबसे महंगा दाम

लेकिन अगर बात करें सबसे महंगे राज्यकी तो वो हैं हैदराबाद जहां पर पेट्रोल का दाम 110.85 रूपये औऱ डीजल 98.96 रूपये हैं।

सबसे सस्ता दाम

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में पेट्रोल की कीमत 96.25 रूपये है जबकि डीजल की कीमत 91.35 रूपये है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पेट्रोल 97.55 रुपये और डीजल 90.82 रुपये लीटर मिल रहा है। दिल्ली से सटे नोएडा में पेट्रोल की कीमत 97.78 रुपये, गुरुग्राम में 98.64 रुपये और गाजियाबाद में 97.54 रुपये है। जयपुर में पेट्रोल की कीमत 107.99 रुपये और भोपाल में 109.82 रुपये है।

पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के चलते कच्चे तेल की कीमत 50 प्रतिशत तक बढ चुकी है। इसका दबाव सीधा तेल कंपनियों के मार्जीन पर आ रहा है।  जिसका उन्हें हर महीने 30 हजार करोड़ का नुकसान झेलना पड़ रहा है। जिसका सीधा असर भविष्य में बढने वाली महंगाई पर भी पडने की उम्मीद है।

भारत की आयात समस्याओं का समाधान बन सकता है डिजिटल गोल्ड

विवेक गुप्ता

भारत में सोने से जुड़े बार-बार उभरने वाले संकट केवल उपभोक्ताओं की सोने के प्रति दीवानगी का परिणाम नहीं हैं। असल समस्या नीतिगत विफलता है। सोने पर शुल्क बढ़ाकर और प्रतिबंध लगाकर स्वामित्व को दंडित करने के बजाय, नीति निर्माताओं को डिजिटल गोल्ड को सस्ता, सुरक्षित और अपनाने में आसान बनाना चाहिए, ताकि घरेलू सोने के भंडार को औपचारिक वित्तीय प्रणाली में लाया जा सके।

भारत में बार-बार आने वाला स्वर्ण संकट केवल पीली धातु के प्रति उपभोक्ताओं के आकर्षण का परिणाम नहीं है। यह मूल रूप से नीतिगत विफलता है। दशकों से नीति निर्माता आयात शुल्क बढ़ाकर और विभिन्न प्रतिबंध लगाकर सोने के आयात को नियंत्रित करने की कोशिश करते रहे हैं, लेकिन भारतीय परिवार अब भी भौतिक सोना जमा करते जा रहे हैं, क्योंकि वित्तीय प्रणाली एक विश्वसनीय और कम लागत वाला डिजिटल विकल्प देने में असफल रही है। यदि भारत वास्तव में आयात और चालू खाते के घाटे पर दबाव कम करना चाहता है, तो समाधान सोने के स्वामित्व को दंडित करने में नहीं, बल्कि सोना रखने के तरीके को बदलने में है।

पहला सुधार क्रांतिकारी होने के साथ-साथ सरल भी होना चाहिए: डिजिटल गोल्ड और सॉवरेन गोल्ड साधनों पर डीमैट होल्डिंग शुल्क को लगभग शून्य कर दिया जाए, ठीक वैसे ही जैसे यूपीआई ने डिजिटल भुगतान को बिना बाधा वाला बना दिया। अनुमान है कि भारत में निजी हाथों में लगभग 25,000 टन सोना मौजूद है, जिसका बड़ा हिस्सा लॉकरों में निष्क्रिय पड़ा है। यदि परिवार आसानी से भौतिक सोने को कम लागत वाले डिजिटल निवेश में बदल सकें, जिसमें तरलता और भरोसा दोनों हों, तो यह निष्क्रिय सोना औपचारिक वित्तीय प्रणाली में आ सकता है।

सरकार को सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड व्यवस्था को फिर से शुरू कर उसका पुनर्गठन करना चाहिए। पिछली योजनाओं में संभावनाएं थीं, लेकिन जटिलता और कमजोर भागीदारी के कारण वे सफल नहीं हो सकीं। यदि नई योजना में केवल 1% वार्षिक रिटर्न भी दिया जाए, तो निवेशक भौतिक सोने से हटकर डिजिटल विकल्पों की ओर आकर्षित हो सकते हैं। भारतीय निवेशक सोने से अत्यधिक लाभ नहीं, बल्कि सुरक्षा, तरलता और परिचित व्यवस्था चाहते हैं।

कर नीति में भी रणनीतिक बदलाव की आवश्यकता है। सीमित अवधि के लिए डिजिटल गोल्ड लेनदेन पर पूंजीगत लाभ कर को समाप्त या भौतिक सोने की तुलना में काफी कम किया जाना चाहिए। इसी तरह डिजिटल गोल्ड साधनों पर जीएसटी को अस्थायी रूप से शून्य किया जा सकता है। उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए — आयातित भौतिक सोने की तुलना में पेपर और डिजिटल गोल्ड को स्पष्ट नीतिगत बढ़ावा देना।

एक अन्य अनदेखा मुद्दा आभूषण और मुद्रीकृत सोने के बीच उच्च रूपांतरण लागत है। जब एमएमटीसी जैसी एजेंसियां या रिफाइनर भौतिक सोने को पेपर-आधारित साधनों में बदलते हैं, तो गलन हानि और प्रोसेसिंग शुल्क लोगों को हतोत्साहित करते हैं। नीतिगत प्रोत्साहनों या मानकीकरण के माध्यम से इन लागतों को कम करने से डिजिटल गोल्ड अपनाने में काफी सुधार हो सकता है।

भारत को सोने के पुनर्चक्रण को भी प्रोत्साहित करना चाहिए। परिवार अक्सर पुराने आभूषणों को दोबारा बनवाने से बचते हैं, क्योंकि इस प्रक्रिया में अतिरिक्त कर देनदारियां और मूल्यांकन विवाद उत्पन्न हो सकते हैं। यदि पुराने आभूषणों के पुनर्निर्माण या पुनर्चक्रण पर पूंजीगत लाभ कर समाप्त कर दिया जाए, तो परिवार निष्क्रिय सोने को फिर से बाजार में लाने के लिए प्रेरित होंगे, बजाय नया आयातित सोना खरीदने के।

साथ ही नियामकों को उन गैर-व्यक्तिगत संस्थाओं की भी जांच करनी चाहिए जो केवल निवेश के उद्देश्य से सोना जमा कर रही हैं। ईटीएफ और इसी तरह के माध्यमों से संस्थागत निवेश सोने के आयात और विदेशी मुद्रा की मांग पर अतिरिक्त दबाव डालता है। सट्टा आधारित संस्थागत स्वर्ण निवेश पर अलग कर व्यवस्था अत्यधिक संचय को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है, बिना घरेलू बचतकर्ताओं को नुकसान पहुंचाए।

अंततः भारत को एक बार की “गोल्ड एमनेस्टी और मोनेटाइजेशन योजना” पर विचार करना चाहिए। इस ढांचे के तहत लोग पांच वर्षों के लिए अपना भौतिक सोना जमा कर सकते हैं और पिछले अधिग्रहण की जांच से पूरी छूट पा सकते हैं। लॉक-इन अवधि के दौरान कोई ब्याज या मूल्य वृद्धि नहीं मिलेगी, लेकिन धारक अपने सोने को गिरवी रखने या बेचने का अधिकार बनाए रखेंगे। परिपक्वता पर उन्हें मूल मूल्य या उस समय का मूल्य — जो भी कम हो — वापस मिलेगा। इसी तरह की व्यवस्था चांदी पर भी लागू की जा सकती है।

भारत सोने पर निर्भरता से बाहर निकलने के लिए केवल कराधान का सहारा नहीं ले सकता। उसे नवाचार का रास्ता अपनाना होगा। भविष्य इसी में है कि डिजिटल गोल्ड को भौतिक सोने से अधिक सस्ता, सरल और भरोसेमंद बनाया जाए।

अमेरिका के पतन वाले बयान पर ट्रंप ने बाइडन को घेरा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शी जिनपिंग से गर्मजोशी से हाथ मिलाया। Image Source : AP
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शी जिनपिंग से गर्मजोशी से हाथ मिलाया। Image Source : AP

15 मई 2026,नई दिल्ली/ वाशिंगटन: डॉनल्ड ट्रंप  ने अमेरिका के “पतन” को लेकर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की टिप्पणी का समर्थन करते हुए कहा कि उनका इशारा मौजूदा अमेरिका नहीं, बल्कि पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल की ओर था।

ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि बाइडन प्रशासन के चार वर्षों में अमेरिका को भारी नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने खुली सीमाओं, ऊंचे करों, ट्रांसजेंडर नीतियों, महिलाओं के खेलों में पुरुष खिलाड़ियों की भागीदारी, डीईआई (विविधता, समानता और समावेशन) कार्यक्रमों, खराब व्यापार समझौतों और बढ़ते अपराध को इसके लिए जिम्मेदार बताया। ट्रंप ने बोला कि “16 महीनों में अमेरिका ने दिखाई जबरदस्त प्रगति”

ट्रंप ने दावा किया कि उनके प्रशासन के शुरुआती 16 महीनों में अमेरिका ने तेज आर्थिक और रणनीतिक प्रगति की है। उन्होंने रिकॉर्ड शेयर बाजार, मजबूत होती अर्थव्यवस्था, तेजी से बढ़ते रोजगार बाजार और सैन्य सफलताओं का उल्लेख किया।उन्होंने कहा कि अब अमेरिका दुनिया का सबसे शक्तिशाली राष्ट्र बन चुका है और चीन के साथ संबंध पहले से अधिक मजबूत होने की उम्मीद है। डीईआई कार्यक्रम खत्म करने को अपने लिए बड़ी उपलब्धि बताया।

ट्रंप ने अपने प्रशासन द्वारा डीईआई कार्यक्रमों को वापस लेने और अमेरिका में बढ़ते विदेशी निवेश को भी बड़ी सफलता बताया। उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने भी उनकी सरकार की “जबरदस्त उपलब्धियों” के लिए उन्हें बधाई दी है। ट्रंप ने कहा, “दो साल पहले अमेरिका वास्तव में पतन की ओर बढ़ रहा था और इस पर मैं राष्ट्रपति शी से पूरी तरह सहमत हूं, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है।”

सरकरी दफ्तरों में अब 2 दिन की घर से हाजिरी, साल भर तक मंत्री नहीं कर सकेंगे विदेश यात्रा

Delhi cm announce Delhi economic plan
Delhi cm announce Delhi economic plan

14 मई 2026, नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने गुरुवार को कई बड़े ऐलान किए. इसमें उन्होंने बताया कि दिल्ली के सभी सरकारी दफ्तरों में हफ्ते में दो दिन वर्क फ्रॉम होम रहेगा. उन्होंने कहा कि प्राइवेट ऑफिसेस से भी वर्क फ्रॉम होम अपनाने की अपील की जाएगी. साथ ही उन्होनें कोर्ट से भी ये निवेदन किया है कि ऑन लाइन हियरिंग पर जोर दें। रेखा गुप्ता ने कहा है कि दिल्ली सरकार के कोई भी मंत्री 1 साल तक सरकारी काम काज के लिए विदेश यात्रा पर नहीं जायेंगें।

प्रधानमंत्री की ईंधन बचाने की अपील के बाद, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की जनता से अपील।

रेखा गुप्ता ने ये सारे ऐलान तब किए जब पीएम मोदी ने इस हफ्ते दो बार देशवासियों से पेट्रोल-डीजल बचाने और सोना न खरीदने की अपील की थी. इसके साथ ही पीएम मोदी ने वर्क फ्रॉम होम करने और मेट्रो से सफर करने की भी अपील की थी. पीएम मोदी ने भी अपने काफिले को छोटा कर दिया है.

पीएम मोदी के इस जनआग्रह के बाद देशभर में कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अपने काफिले से गाड़ियां कम कर दी हैं, जिस्से पेट्रोल बचाया जा सके. दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के काफिले में भी अब सिर्फ 4 ही गाड़ियां होंगी। जिनमें से दो फिलहाल ईवी हैं.

गुरुवार को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि दिल्ली के सभी लोग हफ्ते में एक दिन ‘नो व्हीकल डे’ मनाएं.  

रेखा गुप्ता के एलान के मुख्य बिन्दु-

. सभी सरकारी दफ्तों में हर हफ्ते दो दिन वर्क फ्रॉम होम लागू होगा. प्राइवेट कंपनियों के लिए भी इसी तरह की गाइडलाइन्स जारी की जाएगी.

.  हर ​​सोमवार को ‘मंडे मेट्रो’ के तौर पर मनाया जाएगा. सभी मंत्री, अधिकारी और कर्मचारी मेट्रो से सफर करेंगे. सरकारी अधिकारियों की कॉलोनी के बाहर 58 बसें खड़ी होंगी, जो कर्मचारियों को उनकी कॉलोनी से मेट्रो तक छोड़ेगी.

. सरकारी अधिकारियों के लिए पेट्रोल और डीजल की सीमा में 20% की कटौती की गई है. हालांकि, कर्मचारियों के लिए परिवहन भत्ते में 10% की बढ़ोतरी की जाएगी.

.  दिल्ली सरकार का कोई भी मंत्री या अधिकारी अगले एक साल तक किसी भी आधिकारिक विदेश यात्रा पर नहीं जाएगा. 

. सरकार अगले तीन महीनों तक कोई भी बड़ा सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित नहीं करेगी. जिसमें गाडियों की आवाजाही ज्यादा होती है।

. दिल्ली सरकार अगले 6 महीनों तक कोई भी नया पेट्रोल, डीजल या इलेक्ट्रिक वाहन नहीं खरीदेगी.

.  कुल बैठकों में से 50% बैठकें ऑनलाइन होंगी. विश्वविद्यालयों,इन्सट्यूट,और स्कूलों से अपील है कि वे नॉन-प्रैक्टिकल कक्षाएं ऑनलाइन आयोजित करें. अदालतों से भी निवेदन किया गया है कि ज्यादातर मामलों की सुनवाई ऑनलाइन करें.

. बिजली की बर्बादी रोकने के लिए सरकारी दफ्तरों में ‘मास्टर स्विच’ लगाए जाएंगे. सभी सरकारी दफ्तों में एयर कंडीशनर का तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच निर्धारित किया जाएगा.

.  90 दिनों का एक अभियान चलाया जाएगा.जिसमें नागरिकों को बचत को बढ़ावा देने और राष्ट्र के निर्माण में योगदान देने की शपथ दिलाई जाएगी.जिससे जागरूकता फैले और लोग स्वेच्छा से योगदान दें।

. दिल्ली सरकार केवल 100% ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों का ही इस्तेमाल करेगी. सभी शांपिंग मॉल्स में विशेष ‘मेड इन इंडिया’ स्टॉल बनाए जाएंगे. सरकारी खरीद में स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दी जाएगी.

.दिल्ली सरकार के दफ्तरों की टाइमिंग भी बदली गई है जैसे अब 10:30 से 7 बजे शाम तक दिल्ली सरकार के दफ्तर काम करेंगे। और एमसीडी के द्फ्तर 8:30 से 5 बजे शाम तक काम करेगें।

.अगर सरकारी अधिकारी पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ज्यादा उपयोग करते हैं तो उनके मासिक पेट्रोल के अलाउंस को 10 प्रतिशत बढाया भी जा सकता है।

तपती दिल्ली, बरसता देश: कहीं हीटवेव का कहर तो कहीं बारिश का अलर्ट, मानसून भी बढ़ा आगे

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नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर की बात करें तो 14 मई की शाम और रात में हल्की बारिश, गरज-चमक और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। इसके बाद 15 से 17 मई तक आसमान ज्यादातर साफ रहेगा और तापमान 40 से 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। मौसम विभाग ने साफ किया है कि 16 से 20 मई के बीच दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और आसपास के इलाकों में हीटवेव चल सकती है।

उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में इस बार मई की गर्मी काफी तेज रहने के आसार हैं। राजस्थान के जैसलमेर में तापमान 46.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो देश में सबसे ज्यादा रहा। पश्चिमी राजस्थान में 17 से 19 मई के दौरान भीषण लू की चेतावनी जारी की गई है। वहीं मध्य प्रदेश, विदर्भ, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में भी गर्म हवाओं का असर देखने को मिलेगा।

दूसरी तरफ पूर्वोत्तर भारत में मौसम पूरी तरह बदला हुआ नजर आएगा। असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम में अगले कई दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। तेज हवाओं और बिजली गिरने का भी खतरा बना रहेगा। मौसम विभाग ने निचले इलाकों में जलभराव और भूस्खलन की आशंका जताई है।

दक्षिण भारत में भी बारिश का दौर जारी रहने वाला है। तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल, माहे और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 4 से 5 दिनों तक भारी बारिश हो सकती है। कई इलाकों में तेज हवाएं और ओलावृष्टि की संभावना भी जताई गई है।

मौसम विभाग ने मछुआरों को भी समुद्र में न जाने की सलाह दी है, क्योंकि बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर में मौसम खराब रह सकता है। साथ ही लोगों से गर्मी के दौरान ज्यादा पानी पीने, धूप में निकलने से बचने और मौसम अपडेट पर नजर बनाए रखने की अपील की गई है।

पेट्रोल बचाने के लिए बाइक पर निकले सीएम फडणवीस, मंत्रियों को भी खर्च घटाने का संदेश

पेट्रोल बचाने के लिए बाइक पर निकले सीएम फडणवीस। | Image Source: NDTV.in
पेट्रोल बचाने के लिए बाइक पर निकले सीएम फडणवीस। | Image Source: NDTV.in

नई दिल्ली: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने गुरुवार को एक अलग अंदाज में सबका ध्यान खींचा। आमतौर पर बड़े काफिले के साथ चलने वाले मुख्यमंत्री इस बार मोटरसाइकिल पर सवार होकर विधान भवन पहुंचे। वह विधान परिषद के नए सदस्यों के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने जा रहे थे।

मुख्यमंत्री अपने सरकारी आवास ‘वर्षा’ से दक्षिण मुंबई स्थित विधान भवन तक बाइक से पहुंचे। इस दौरान उनके साथ भाजपा नेता और मंत्री Ashish Shelar भी मौजूद थे। इस कदम को प्रधानमंत्री Narendra Modi की ईंधन बचाने की अपील के बाद उठाए गए प्रतीकात्मक लेकिन अहम कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

दरअसल, हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों और सरकारी विभागों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने और खर्च में कटौती करने की अपील की थी। इसी के बाद महाराष्ट्र सरकार ने भी कई बड़े फैसले लिए हैं। मुख्यमंत्री फडणवीस ने अपने मंत्रियों के काफिले में चलने वाली गाड़ियों की संख्या आधी करने का फैसला किया है। साथ ही मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के विदेशी दौरों पर भी रोक लगाने की घोषणा की गई है।

सरकार ने साफ कहा है कि अब किसी भी बाहरी दौरे में मंत्रियों के काफिले में तय सीमा से ज्यादा वाहन नहीं होंगे। इसकी निगरानी स्थानीय पुलिस अधिकारी करेंगे। इसके अलावा अलग-अलग विभागों को दिए गए सरकारी वाहनों की भी समीक्षा की जाएगी, ताकि अनावश्यक खर्च रोका जा सके।

ईंधन बचाने की इस मुहिम में अन्य मंत्री भी हिस्सा लेते दिखे। राज्य के मंत्री Nitesh Rane ने मंत्रिमंडल की बैठक में शामिल होने के लिए मंत्रालय तक पैदल जाना चुना। सरकार का कहना है कि यह सिर्फ प्रतीकात्मक कदम नहीं, बल्कि संसाधनों के जिम्मेदार इस्तेमाल की शुरुआत है।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव की वजह से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसका असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ सकता है। ऐसे में महाराष्ट्र सरकार का यह संदेश साफ है—बचत की शुरुआत ऊपर से होगी, ताकि आम लोगों को भी प्रेरणा मिल सके।

बंगाल के स्कूलों में अब गूंजेगा ‘वंदे मातरम’, सरकार ने जारी किया नया आदेश

West Bengal Chief Minister Suvendu Adhikari | Image Source: X/@BJP4Bengal
West Bengal Chief Minister Suvendu Adhikari | Image Source: X/@BJP4Bengal

नई दिल्ली: West Bengal सरकार ने स्कूलों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। राज्य के सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में अब सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान ‘वंदे मातरम’ गाना जरूरी होगा। स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि हर छात्र को इस राष्ट्रगीत के गायन में हिस्सा लेना होगा और स्कूल प्रमुखों को इसका सख्ती से पालन सुनिश्चित करना होगा।

जानकारी के मुताबिक, यह आदेश 13 मई को जारी किया गया। इसमें कहा गया कि स्कूल शुरू होने से पहले होने वाली मॉर्निंग असेंबली में ‘वंदे मातरम’ का सामूहिक गायन कराया जाए। अधिकारियों का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य छात्रों में देशभक्ति और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान की भावना मजबूत करना है।

राज्य सरकार के इस फैसले को लेकर राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। विधानसभा परिसर में मीडिया से बात करते हुए West Bengal के मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने कहा कि अगले सोमवार से राज्य के सभी स्कूलों में ‘वंदे मातरम’ को प्रार्थना गीत के रूप में शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस संबंध में सचिवालय को भी जानकारी दी जाएगी।

सरकार ने स्कूल प्रशासन से यह भी कहा है कि इस पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड रखा जाए। इसके लिए वीडियो रिकॉर्डिंग सहित सभी गतिविधियों का दस्तावेजीकरण करने के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि सरकार इस फैसले को सख्ती से लागू करना चाहती है।

हालांकि इस आदेश के बाद कुछ शिक्षकों और संगठनों ने सवाल भी उठाए हैं। उनका कहना है कि पहले से स्कूलों में राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और राज्य गीत ‘बांग्लार माटी बांग्लार जल’ गाया जाता है। ऐसे में अब ‘वंदे मातरम’ जोड़ने के बाद मॉर्निंग असेंबली के समय और गीतों के क्रम को लेकर स्पष्टता जरूरी है।

वहीं केंद्र सरकार भी राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को लेकर कानून में बदलाव की तैयारी कर रही है। इसी बीच पश्चिम बंगाल सरकार का यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है। अब देखने वाली बात होगी कि स्कूलों में यह व्यवस्था किस तरह लागू होती है और इसे लेकर आगे कैसी प्रतिक्रिया सामने आती है।

दो मैचों में जीरो पर आउट होने के बाद बेचैन थे विराट, शतक लगाकर किया जोरदार कमबैक

Virat Kohli | Image Source: PTI
Virat Kohli | Image Source: PTI

नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज Virat Kohli ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बड़े खिलाड़ी मुश्किल वक्त में ही अपनी असली पहचान दिखाते हैं। आईपीएल में लगातार दो मैचों में शून्य पर आउट होने के बाद कोहली दबाव में थे, लेकिन रायपुर में उन्होंने शानदार शतक लगाकर आलोचकों को जवाब दे दिया।

Royal Challengers Bengaluru और Kolkata Knight Riders के बीच खेले गए मुकाबले में कोहली ने 60 गेंदों में नाबाद 105 रन बनाए। उनकी इस शानदार पारी की बदौलत आरसीबी ने मुकाबला छह विकेट से जीत लिया और टीम अंक तालिका में टॉप पर पहुंच गई।

मैच के बाद कोहली ने माना कि लगातार दो मैचों में रन नहीं बना पाने से वह काफी परेशान थे। उन्होंने कहा कि जब खिलाड़ी टीम के लिए योगदान नहीं दे पाता, तो अंदर से बेचैनी बढ़ जाती है। कोहली ने कहा कि उनका हमेशा यही लक्ष्य रहता है कि वह टीम के लिए बेहतर प्रदर्शन करें और जीत में अहम भूमिका निभाएं।

कोहली ने यह भी स्वीकार किया कि दो बार लगातार जीरो पर आउट होने के बाद वह नर्वस महसूस कर रहे थे। हालांकि उन्होंने कहा कि असफलता भी खिलाड़ी को मजबूत बनाती है। उनके मुताबिक दबाव कई बार खेल को और बेहतर करने में मदद करता है और यही चीज उन्हें वापसी के लिए प्रेरित करती है।

इस मुकाबले में कोहली ने आईपीएल करियर का नौवां शतक लगाया। इसके साथ ही उन्होंने एक और बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। वह अब आईपीएल में सबसे ज्यादा मैच खेलने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। इस मामले में उन्होंने MS Dhoni और Rohit Sharma को पीछे छोड़ दिया।

हालांकि शतक लगाने के बाद भी कोहली का जश्न ज्यादा बड़ा नहीं दिखा। उन्होंने कहा कि टीम के लिए अंक ज्यादा महत्वपूर्ण हैं और सभी खिलाड़ी सिर्फ जीत के लिए खेलते हैं। कोहली के इस बयान ने यह भी दिखाया कि इतने सालों बाद भी उनके अंदर खेल को लेकर वही जुनून और जिम्मेदारी बनी हुई है।

पीएम मोदी की अपील का असर, गोवा सीएम प्रमोद सावंत ने आधा किया काफिला

CM Pramod Sawant | photo source : motoringworld.in
CM Pramod Sawant | photo source : motoringworld.in

14 मई 2026, नई दिल्ली/पणजी: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी  की ईंधन बचत और संसाधनों के विवेकपूर्ण इस्तेमाल की अपील के बाद प्रमोद सावंत  ने अपने काफिले में शामिल वाहनों की संख्या आधी कर दी है।

मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों के मुताबिक, पहले मुख्यमंत्री के काफिले में छह वाहन शामिल रहते थे, लेकिन अब उनकी आधिकारिक कार समेत केवल तीन वाहन ही रह गए हैं। यह फैसला ईंधन की खपत कम करने और सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।

सीएमओ के एक अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा मितव्ययिता अपनाने की अपील के बाद मुख्यमंत्री सावंत ने तुरंत अपने काफिले में वाहनों की संख्या घटाने का निर्देश दिया। दरअसल, पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में ईंधन बचाने और संसाधनों के जिम्मेदार इस्तेमाल पर जोर दिया था। इसके बाद उन्होंने खुद भी अपने काफिले में वाहनों की संख्या कम कर उदाहरण पेश किया।

प्रधानमंत्री की इस पहल के बाद कई भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और अन्य नेताओं ने भी इसी तरह के कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। माना जा रहा है कि इससे सरकारी खर्च में कमी आने के साथ-साथ ऊर्जा संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

चीनी निर्यात पर सरकार की रोक, महंगाई काबू करने की बड़ी तैयारी

चीनी निर्यात पर सरकार की रोक... | Image Source: (Image Source: Pixabay)
चीनी निर्यात पर सरकार की रोक... | Image Source: (Image Source: Pixabay)

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने चीनी के निर्यात को लेकर बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने तत्काल प्रभाव से 30 सितंबर 2026 तक चीनी के निर्यात पर रोक लगा दी है। माना जा रहा है कि यह फैसला देश में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करने के लिए लिया गया है।

विदेश व्यापार महानिदेशालय यानी DGFT की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि अब कच्ची चीनी, सफेद चीनी और रिफाइंड चीनी का निर्यात “प्रतिबंधित” श्रेणी से हटाकर “निषिद्ध” श्रेणी में डाल दिया गया है। यानी अब सामान्य परिस्थितियों में चीनी का निर्यात नहीं किया जा सकेगा।

हालांकि सरकार ने कुछ मामलों में छूट भी दी है। यूरोपीय संघ और अमेरिका को विशेष कोटा व्यवस्था के तहत भेजी जाने वाली चीनी इस फैसले से बाहर रहेगी। इसके अलावा सरकार-से-सरकार समझौते और पहले से प्रक्रिया में चल रही खेपों पर भी यह आदेश लागू नहीं होगा।

सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब दुनिया भर में पश्चिम एशिया के तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे हालात में खाद्य पदार्थों की कीमतों को नियंत्रित रखना सरकार के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यात रोकने से देश के अंदर चीनी की सप्लाई बढ़ेगी और कीमतों में तेजी आने से रोका जा सकेगा।

दरअसल, भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है। भारतीय चीनी एवं Bioenergy Manufacturers Association यानी ISMA के मुताबिक, 2025-26 सत्र में देश का चीनी उत्पादन बढ़ा है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में बेहतर उत्पादन के चलते अप्रैल तक चीनी उत्पादन में सात प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

सरकार ने पहले इस सत्र में चीनी निर्यात के लिए कोटा भी जारी किया था, लेकिन अब बदलते हालात को देखते हुए पूरी तरह रोक लगाने का फैसला लिया गया है। इससे पहले भी भारत अक्टूबर 2022 से समय-समय पर चीनी निर्यात पर नियंत्रण लगाता रहा है।

अब इस फैसले के बाद घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों पर क्या असर पड़ता है और चीनी उद्योग किस तरह प्रतिक्रिया देता है, इस पर सबकी नजर बनी रहेगी।