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न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग तेज, 9 मार्च को जंतर-मंतर पर पेंशनधारकों का बड़ा प्रदर्शन

लाखों पेंशनधारक पेंशन बढ़ाने की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर होंगे एकजुट
लाखों पेंशनधारक पेंशन बढ़ाने की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर होंगे एकजुट

नई दिल्ली: देशभर के लाखों पेंशनधारक अब अपनी पेंशन बढ़ाने की मांग को लेकर एकजुट हो रहे हैं। कर्मचारी पेंशन योजना EPS-95 से जुड़े पेंशनधारक 9 से 11 मार्च तक दिल्ली के जंतर-मंतर पर तीन दिवसीय प्रदर्शन करने जा रहे हैं। इस आंदोलन का नेतृत्व EPS-95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति (NAC) के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमांडर अशोक राउत करेंगे।

समिति का कहना है कि देश के करीब 81 लाख पेंशनधारक EPFO की EPS-95 योजना पर निर्भर हैं। इनमें सरकारी उपक्रमों, सहकारी संस्थाओं, निजी कंपनियों, मिलों और मीडिया संस्थानों से सेवानिवृत्त कर्मचारी शामिल हैं। इन लोगों ने अपने कार्यकाल के दौरान करीब 30 से 35 साल तक पेंशन फंड में योगदान दिया, लेकिन आज उन्हें औसतन सिर्फ करीब 1,171 रुपये मासिक पेंशन मिल रही है।

पेंशनधारकों का कहना है कि मौजूदा महंगाई के दौर में इतनी कम राशि से रोजमर्रा की जरूरतें भी पूरी करना मुश्किल हो गया है। इसी वजह से वे लंबे समय से पेंशन में सुधार और न्यूनतम राशि बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

राष्ट्रीय संघर्ष समिति का कहना है कि पिछले करीब नौ वर्षों से वे इस मुद्दे को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं। इस दौरान प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों और कई सांसदों को ज्ञापन भी दिए गए, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।

कमांडर अशोक राउत के मुताबिक, यह प्रदर्शन संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के दौरान किया जा रहा है, ताकि सरकार और सांसदों का ध्यान पेंशनधारकों की समस्याओं की ओर आकर्षित किया जा सके। उनका कहना है कि जिन लोगों ने जीवन भर काम करके देश की अर्थव्यवस्था में योगदान दिया, उन्हें सम्मानजनक पेंशन मिलनी चाहिए।

पेंशनधारकों की मुख्य मांगों में न्यूनतम पेंशन 7,500 रुपये प्रति माह करने और इसके साथ महंगाई भत्ता देने की मांग शामिल है। इसके अलावा वे पेंशनधारकों और उनके जीवनसाथियों के लिए मुफ्त चिकित्सा सुविधा भी चाहते हैं।

समिति ने यह भी मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट के 4 नवंबर 2022 के फैसले के अनुसार सभी पात्र लोगों को उच्च पेंशन का लाभ दिया जाए। वहीं जो लोग EPS-95 योजना से किसी कारण वंचित रह गए हैं, उन्हें कम से कम 5,000 रुपये मासिक पेंशन दी जाए।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं के स्वास्थ्य पर जागरूकता सत्र आयोजित 

जमशेद
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सेक्टर-110, नोएडा स्थित यथार्थ सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में महिलाओं के स्वास्थ्य और बाल विकास पर केंद्रित एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस सत्र में चिकित्सा विशेषज्ञों ने महिलाओं के लिए निवारक स्वास्थ्य देखभाल और स्वस्थ भविष्य के निर्माण में माताओं की भूमिका पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अस्पताल ने ‘ “स्त्री आरोग्यम पिंक कार्ड’” की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य महिलाओं को नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए प्रोत्साहित करना और उनके स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

कार्यक्रम में डॉ. प्रगति जैन, सीनियर कंसल्टेंट – ऑब्स्टेट्रिक्स एवं गायनेकोलॉजी, और डॉ. रोली मुंशी, सीनियर कंसल्टेंट – पीडियाट्रिक्स एवं नियोनेटोलॉजी ने विशेषज्ञ व्याख्यान दिए।

“हर उम्र में महिलाओं का स्वास्थ्य – किशोरावस्था से मातृत्व और उससे आगे” विषय पर बोलते हुए, डॉ. प्रगति जैन, सीनियर कंसल्टेंट – ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी, यथार्थ हॉस्पिटल नोएडा 110 यूनिट, ने शुरुआती जागरूकता, सही पोषण और नियमित स्वास्थ्य जांच के महत्व पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा, “आज के क्लिनिकल प्रैक्टिस में हम देख रहे हैं कि विभिन्न आयु वर्गों में महिलाओं की स्वास्थ्य समस्याओं का स्वरूप बदल रहा है। किशोरियों में अनियमित पीरियड्स, दर्दनाक मासिक धर्म और एनीमिया जैसी समस्याएं आम हैं, जो अक्सर मासिक धर्म से जुड़ी जागरूकता की कमी के कारण बढ़ जाती हैं। वहीं 20 से 30 वर्ष की महिलाओं में पीसीओएस, मासिक धर्म की अनियमितता, थायरॉइड की समस्या और प्रजनन से जुड़ी चिंताएं बढ़ रही हैं, जिन पर बैठने वाली जीवनशैली, तनाव और असंतुलित खान-पान का बड़ा असर है। वास्तव में ओपीडी में आने वाली लगभग हर तीन में से एक युवा महिला में पीसीओएस या हार्मोनल असंतुलन के लक्षण देखे जा रहे हैं। 40 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं में फाइब्रॉयड, अत्यधिक रक्तस्राव और पेरिमेनोपॉज से जुड़े लक्षण अक्सर सामने आते हैं। एक दशक पहले की तुलना में आज कई हार्मोनल और प्रजनन संबंधी समस्याएं कम उम्र में ही दिखाई देने लगी हैं, इसलिए जागरूकता, नियमित जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना बहुत जरूरी है।”

उन्होंने आगे कहा, “अक्सर महिलाएं अपने परिवार की देखभाल में इतनी व्यस्त हो जाती हैं कि अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर देती हैं। स्वस्थ जीवन के लिए नियमित जांच और समय पर चिकित्सा परामर्श बेहद आवश्यक है।”

इस अवसर पर डॉ. रोली मुंशी, सीनियर कंसल्टेंट – पीडियाट्रिक्स एवं नियोनेटोलॉजी यथार्थ हॉस्पिटल नोएडा 110 यूनिट, ने “हर बच्चे की स्वस्थ शुरुआत – बच्चों के विकास और प्रतिरक्षा में माताओं की भूमिका” विषय पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने बच्चों के लिए स्तनपान, संतुलित पोषण और समय पर टीकाकरण के महत्व पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, “बच्चे के जीवन के शुरुआती वर्ष उसकी मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली और स्वस्थ विकास की नींव रखते हैं।”

यह इंटरएक्टिव सत्र प्रतिभागियों के लिए काफी उपयोगी रहा, जहां उन्होंने डॉक्टरों से सीधे संवाद कर निवारक स्वास्थ्य देखभाल से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम का समापन प्रतिभागियों के लिए आयोजित लंच के साथ हुआ।

International Women’s Day 2026: सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए भारत की खास पहलें

“अधिकार, न्याय और कार्रवाई – सभी महिलाओं और लड़कियों के लिए”
“अधिकार, न्याय और कार्रवाई – सभी महिलाओं और लड़कियों के लिए”

नई दिल्ली: हर साल 8 मार्च को दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। इस दिन का मकसद महिलाओं की उपलब्धियों को सम्मान देना और समाज में बराबरी का अधिकार सुनिश्चित करना है। साल 2026 में महिला दिवस की थीम “अधिकार, न्याय और कार्रवाई – सभी महिलाओं और लड़कियों के लिए” रखी गई है। भारत में भी महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण को मजबूत करने के लिए कई योजनाएं और पहलें शुरू की गई हैं।

महिलाओं की सुरक्षा के लिए भारतीय रेलवे ने ‘ऑपरेशन मेरी सहेली’ नाम की खास पहल शुरू की है। इसके तहत महिला आरपीएफ कर्मियों की टीमें ट्रेन में सफर करने वाली महिलाओं, खासकर अकेले यात्रा करने वाली यात्रियों पर नजर रखती हैं। ये टीमें यात्रा के दौरान उनसे संपर्क में रहती हैं और जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद भी करती हैं। देशभर में ऐसी सैकड़ों टीमें काम कर रही हैं।

शहरों में सुरक्षित यात्रा के लिए कई जगह महिला कैब और ऑटो सेवाएं भी शुरू की गई हैं। इन सेवाओं में महिला ड्राइवर ही वाहन चलाती हैं, जिससे महिला यात्रियों को ज्यादा सुरक्षित महसूस होता है। कुछ राइड-हेलिंग कंपनियों ने ऐसे फीचर भी शुरू किए हैं जिनमें महिला यात्री महिला ड्राइवर को प्राथमिकता दे सकती हैं।

सार्वजनिक परिवहन में भी महिलाओं के लिए अलग व्यवस्था की गई है। दिल्ली मेट्रो में पहला कोच महिलाओं के लिए आरक्षित होता है। वहीं मुंबई की लोकल ट्रेनों में भी महिलाओं के लिए अलग डिब्बे होते हैं, ताकि भीड़भाड़ के समय उन्हें सुरक्षित और आरामदायक यात्रा मिल सके।

महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए केंद्र सरकार ने ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान भी शुरू किया है। इस योजना का उद्देश्य लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देना और समाज में उनके साथ होने वाले भेदभाव को कम करना है। इसके साथ ही सुकन्या समृद्धि योजना के तहत माता-पिता अपनी बेटी के नाम बचत खाता खोल सकते हैं।

इसके अलावा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जाती है, जबकि किशोरी शक्ति योजना के जरिए किशोरियों के स्वास्थ्य, पोषण और कौशल विकास पर ध्यान दिया जाता है।

इन सभी योजनाओं का मकसद महिलाओं को सुरक्षित माहौल देना और उन्हें हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए मजबूत बनाना। महिला दिवस के मौके पर यह याद दिलाता है कि समाज की तरक्की तभी संभव है, जब महिलाएं सुरक्षित और सशक्त हों।

UPSC रैंक 301 पर मचा घमासान, एक नाम, दो दावेदार… असली आकांक्षा कौन?

UPSC Rank 301 Controversy: यूपीएससी रैंक 301 का असली दावेदार कौन?
यूपीएससी रैंक 301 का असली दावेदार कौन?

नई दिल्ली: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 के नतीजे आने के बाद एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। मेरिट लिस्ट में ऑल इंडिया रैंक 301 पर ‘आकांक्षा सिंह’ नाम दर्ज है, लेकिन इस एक रैंक पर दो अलग-अलग राज्यों की युवतियों ने दावा कर दिया है। एक आकांक्षा सिंह बिहार से हैं, जबकि दूसरी उत्तर प्रदेश की रहने वाली बताई जा रही हैं। दोनों ही खुद को रैंक 301 का असली हकदार बता रही हैं।

नतीजा घोषित होने के बाद दोनों के घरों में जश्न का माहौल बन गया। परिवार वालों ने मिठाइयां बांटी, रिश्तेदारों और स्थानीय लोगों ने बधाई देना शुरू कर दिया। मीडिया में भी दोनों के नाम की चर्चा होने लगी। लेकिन जल्द ही सवाल उठने लगे कि आखिर असली उम्मीदवार कौन है।

जब दोनों के एडमिट कार्ड सोशल मीडिया पर सामने आए और उनके QR कोड स्कैन किए गए तो मामला और उलझ गया। स्कैन करने पर दोनों के रोल नंबर अलग-अलग दिखाई दिए। इससे शक पैदा हुआ कि किसी एक दस्तावेज में रोल नंबर के साथ छेड़छाड़ की गई हो सकती है।

बिहार के भोजपुर की रहने वाली आकांक्षा सिंह के परिवार ने सबसे पहले उनकी सफलता का ऐलान किया था। स्थानीय मीडिया में उनकी खबरें भी चलीं। लेकिन जब उनके एडमिट कार्ड के डेटा का मिलान किया गया तो पता चला कि उनका असली रोल नंबर मेरिट लिस्ट में दर्ज रोल नंबर से मेल नहीं खा रहा है।

Akanksha Singh Bihar Admit Card: बिहार वाली आकांक्षा सिंह के क्यूआर कोड पर अलग रोल नंबर है।

वहीं उत्तर प्रदेश की आकांक्षा सिंह ने भी सोशल मीडिया पर अपने दस्तावेज साझा किए हैं। उनके एडमिट कार्ड पर वही रोल नंबर दिख रहा है जो मेरिट लिस्ट में दर्ज है। बताया जा रहा है कि वे वाराणसी की रहने वाली हैं और फिलहाल एक अस्पताल में जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर के रूप में काम कर रही हैं।

Akanksha Singh UP Admit Card: यूपी वाली आकांक्षा सिंह के एडमिट कार्ड और क्यूआर कोड पर एक ही रोल नंबर है।

इस पूरे विवाद ने एक बार फिर दिखा दिया है कि केवल नाम के आधार पर किसी भी रिजल्ट की पुष्टि करना सही नहीं होता। UPSC जैसी बड़ी परीक्षा में असली पहचान हमेशा रोल नंबर और आधिकारिक डेटा से ही तय होती है।

अब इस मामले का अंतिम फैसला केवल UPSC के आधिकारिक सत्यापन के बाद ही हो पाएगा। अगर किसी ने जानबूझकर दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की है तो उस पर कड़ी कार्रवाई भी हो सकती है। फिलहाल सबकी नजर आयोग के अगले कदम पर टिकी हुई है।

दुबई की उड़ानों पर ब्रेक, एमिरेट्स ने सभी फ्लाइट्स फिलहाल के लिए रोकीं

दुबई की उड़ाने फिलहाल के लिए रद्द
दुबई की उड़ाने फिलहाल के लिए रद्द

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब हवाई यात्राओं पर भी दिखने लगा है। दुबई की बड़ी एयरलाइन एमिरेट्स ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए दुबई से आने-जाने वाली अपनी सभी फ्लाइट्स को अगली सूचना तक अस्थायी रूप से रोक दिया है। इस फैसले से हजारों अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की यात्रा योजनाएं प्रभावित हुई हैं।

एयरलाइन ने साफ कहा है कि फिलहाल यात्री एयरपोर्ट न पहुंचें, क्योंकि उड़ानों का संचालन अस्थायी तौर पर बंद कर दिया गया है। कंपनी के अनुसार यह फैसला यात्रियों और क्रू मेंबर्स की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। हालात सामान्य होने के बाद ही उड़ानों को दोबारा शुरू किया जाएगा।

हालांकि जिन यात्रियों की फ्लाइट 28 फरवरी से 31 मार्च 2026 के बीच बुक थी, उनके लिए एयरलाइन ने कुछ विकल्प भी दिए हैं। सबसे पहले, यात्री चाहें तो अपनी टिकट को किसी दूसरी उपलब्ध फ्लाइट पर रीबुक कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें 30 अप्रैल 2026 तक का समय दिया गया है। रीबुकिंग करते समय कुछ नियम और शर्तें लागू हो सकती हैं।

दूसरा विकल्प यह है कि अगर यात्री फिलहाल यात्रा नहीं करना चाहते, तो वे अपने टिकट का पूरा रिफंड भी ले सकते हैं। जिन लोगों ने टिकट सीधे एमिरेट्स की वेबसाइट या ऑफिस से खरीदी है, वे ऑनलाइन रिफंड के लिए आवेदन कर सकते हैं। वहीं जिन यात्रियों ने ट्रैवल एजेंट के जरिए टिकट बुक कराई है, उन्हें अपने एजेंट से संपर्क करना होगा।

एयरलाइन ने यात्रियों से यह भी अपील की है कि वे अपनी संपर्क जानकारी जैसे मोबाइल नंबर और ई-मेल अपडेट रखें, ताकि फ्लाइट से जुड़े नए अपडेट उन्हें समय पर मिल सकें।

इसके अलावा दुबई में मौजूद एमिरेट्स के सभी सिटी चेक-इन सेंटर भी फिलहाल बंद कर दिए गए हैं। आम तौर पर यात्री एयरपोर्ट जाने से पहले यहां से चेक-इन कर लेते थे, लेकिन फिलहाल यह सुविधा उपलब्ध नहीं रहेगी।

एविएशन विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय हवाई सेवाओं पर साफ दिखाई दे रहा है और कई एयरलाइंस अपने संचालन में बदलाव कर रही हैं। फिलहाल यात्रियों को हालात सामान्य होने का इंतजार करना होगा।

गौ-रक्षा के लिए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ‘धर्मयुद्ध यात्रा’ शुरू, सरकार पर साधा निशाना

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती

नई दिल्ली: गौ-रक्षा के मुद्दे को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपनी ‘गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध यात्रा’ की शुरुआत कर दी है। यह यात्रा वाराणसी से शुरू होकर लखनऊ तक जाएगी। यात्रा के पहले पड़ाव के तौर पर वे जौनपुर पहुंचे, जहां उन्होंने आश्रम में दर्शन किए और लोगों को संबोधित किया।

यात्रा शुरू करते समय शंकराचार्य पालकी में बैठे और वहीं से उन्होंने अपने संदेश में कहा कि अब गौ माता की रक्षा के लिए संघर्ष करना मजबूरी बन गया है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज में गाय का विशेष स्थान है, लेकिन मौजूदा हालात ऐसे बन गए हैं कि लोगों को अपनी ही चुनी हुई सरकारों के सामने गौ-रक्षा के लिए आवाज उठानी पड़ रही है।

शंकराचार्य ने कहा कि उनकी यह यात्रा किसी राजनीतिक मकसद से नहीं बल्कि धार्मिक भावना से शुरू की गई है। उनका कहना है कि इसका उद्देश्य समाज को जागरूक करना और लोगों को गौ-रक्षा के मुद्दे पर एकजुट करना है। उन्होंने कहा कि हर हिंदू चाहता है कि देश में गौ-हत्या पर सख्ती से रोक लगे।

यात्रा शुरू करने से पहले शंकराचार्य ने वाराणसी में चिंतामणि गणेश मंदिर में दर्शन किए और गौ-पूजन भी किया। इसके बाद सुबह करीब साढ़े आठ बजे यात्रा औपचारिक रूप से शुरू हुई। इस दौरान विद्यामठ के बाहर सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल भी तैनात रहा।

यात्रा का कार्यक्रम कई जिलों से होकर गुजरने वाला है। 7 मार्च को जौनपुर, सुल्तानपुर और रायबरेली में सभाएं होंगी। 8 मार्च को मोहनलालगंज, लालगंज और उन्नाव में कार्यक्रम होंगे। इसके बाद 9 मार्च को नैमिषारण्य में सभा रखी गई है और 10 मार्च को यात्रा लखनऊ पहुंचेगी।

11 मार्च को लखनऊ के कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल पर एक बड़ी सभा का आयोजन किया जाएगा, जहां शंकराचार्य गौ-रक्षा को लेकर आगे की रणनीति का ऐलान करेंगे। शंकराचार्य ने यह भी कहा कि अगर प्रशासन यात्रा को रोकने की कोशिश करेगा तो वे रुक जाएंगे, लेकिन उनका सवाल है कि आखिर इस यात्रा को रोका क्यों जाना चाहिए।

ईरानी जहाज को भारत ने दिया सहारा, मानवीय आधार पर की मदद… बोले एस. जयशंकर

भारत ने मानवीय आधार पर की मदद
भारत ने मानवीय आधार पर की मदद

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने एक बार फिर मानवीय आधार पर बड़ा कदम उठाया है। ईरान के युद्धपोत IRIS Lavan को तकनीकी समस्या के चलते भारतीय बंदरगाह में शरण दी गई, जिससे जहाज और उस पर सवार कैडेट सुरक्षित बच गए। इस पूरे मामले का खुलासा विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने किया है।

जयशंकर ने बताया कि ईरान की ओर से भारत को संदेश मिला था कि उनका एक जहाज तकनीकी दिक्कत का सामना कर रहा है और भारतीय बंदरगाह में आने की अनुमति चाहता है। यह संदेश फरवरी के आखिर में मिला था। स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने मानवीय आधार पर जहाज को भारत आने की इजाजत दे दी।

सरकार की अनुमति मिलने के बाद यह ईरानी युद्धपोत केरल के कोच्चि बंदरगाह पहुंचा, जहां फिलहाल वह सुरक्षित खड़ा है। जहाज पर मौजूद कई युवा कैडेट को भी सुरक्षित उतार लिया गया है और उन्हें पास के सुरक्षित स्थान पर रखा गया है।

विदेश मंत्री के अनुसार, यह जहाज पहले एक अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू में हिस्सा लेने के लिए इस क्षेत्र में आया था। लेकिन पश्चिम एशिया में अचानक बढ़े तनाव और समुद्र में बिगड़ते हालात के कारण जहाज मुश्किल स्थिति में फंस गया था। ऐसे में भारत ने परिस्थिति को समझते हुए मदद का हाथ बढ़ाया।

बताया जा रहा है कि उस समय ईरान के तीन जहाज इस क्षेत्र में मौजूद थे। इनमें से एक जहाज श्रीलंका के त्रिंकोमाली बंदरगाह पहुंच गया, जबकि एक अन्य जहाज रास्ते में ही हादसे का शिकार हो गया। ऐसे हालात में IRIS Lavan को भारत में शरण मिलना उसके लिए बड़ी राहत साबित हुआ।

जयशंकर ने बताया कि खाड़ी देशों में करीब 90 लाख से एक करोड़ भारतीय रहते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा भारत की विदेश नीति का अहम हिस्सा है। भारत लगातार समुद्री रास्तों को सुरक्षित बनाए रखने और अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहा है।

‘रूसी तेल पर 30 दिन की छूट’ वाले वयान पर अमेरिका ने दी सफाई, ईरान जंग के बीच क्यों लिया यह फैसला?

भारत को रूसी तेल ख़रीदने वाली छूट पर अमेरिका की 'सफ़ाई
भारत को रूसी तेल ख़रीदने वाली छूट पर अमेरिका की 'सफ़ाई

नई दिल्ली: ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब पूरी दुनिया के तेल बाज़ार पर साफ दिखाई देने लगा है। इसी बीच अमेरिका ने भारत को 30 दिनों तक रूस से तेल खरीदने की अस्थायी छूट दे दी है। इस फैसले के बाद कई सवाल उठने लगे थे, जिस पर अब अमेरिका की ओर से सफाई दी गई है।

अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने एक इंटरव्यू में बताया कि यह कदम सिर्फ अस्थायी है और इसका मकसद वैश्विक तेल बाजार में बढ़ते दबाव को कम करना है। उनका कहना है कि ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण तेल की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। ऐसे में बाजार में तुरंत ज्यादा तेल उपलब्ध कराना जरूरी हो गया था।

ऊर्जा मंत्री के मुताबिक, यह फैसला रूस के प्रति अमेरिकी नीति में किसी बदलाव का संकेत नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि यह केवल एक व्यावहारिक कदम है, ताकि अल्प समय के लिए तेल की सप्लाई बनी रहे और कीमतों में ज्यादा उछाल न आए। अमेरिका का मानना है कि इससे भारतीय रिफाइनरियों को तुरंत कच्चा तेल मिल सकेगा और वैश्विक बाजार में भी दबाव कुछ कम होगा।

दरअसल, हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में युद्ध जैसे हालात बनने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक युद्ध से पहले जहां कच्चे तेल की कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल थी, वहीं अब यह 90 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच चुकी है। इसका सीधा असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है।

जानकारों का कहना है कि समुद्र में पहले से ही बड़ी मात्रा में रूसी तेल टैंकरों में लदा हुआ है। अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और सिंगापुर के पास लाखों बैरल तेल जहाजों में मौजूद है, जो जल्द ही भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच सकता है। इसी वजह से अमेरिका ने भारत से इस तेल को खरीदने की अपील की, ताकि बाजार में सप्लाई बनी रहे।

नेपाल चुनाव में बालेन शाह की लहर, RSP को मिल रही जबरदस्त बढ़त

बालेन शाह की RSP को मिल रही जबरदस्त बढ़त
बालेन शाह की RSP को मिल रही जबरदस्त बढ़त

नई दिल्ली: नेपाल में हुए आम चुनाव की मतगणना जारी है और शुरुआती रुझानों में बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिल रहा है। काठमांडू के पूर्व मेयर और रैपर से नेता बने बालेंद्र ‘बालेन’ शाह की पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) को कई सीटों पर मजबूत बढ़त मिलती दिखाई दे रही है।

नेपाल की 275 सीटों वाली प्रतिनिधि सभा के लिए हुए चुनाव में अब तक 165 सीटों के रुझान सामने आ चुके हैं। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, RSP ने अब तक 20 सीटों पर जीत दर्ज कर ली है और करीब 98 सीटों पर आगे चल रही है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि इस बार नेपाल की राजनीति में नई ताकत उभर सकती है।

राजधानी क्षेत्र काठमांडू घाटी से भी बड़ी खबर सामने आई है। यहां की सभी सीटों पर RSP उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है या मजबूत बढ़त बनाई है। इसे पार्टी के लिए बड़ी राजनीतिक सफलता माना जा रहा है।

सबसे दिलचस्प मुकाबला झापा-5 सीट पर देखने को मिल रहा है। यहां बालेन शाह खुद मैदान में हैं और उनका मुकाबला चार बार के प्रधानमंत्री और CPN-UML के नेता केपी शर्मा ओली से है। ताजा मतगणना के अनुसार बालेन शाह को 39,284 वोट मिले हैं, जबकि ओली को 10,293 वोट मिले हैं। इस सीट पर बालेन शाह की बढ़त लगातार बढ़ती नजर आ रही है।

दूसरी तरफ पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ ने रुकुम ईस्ट-1 सीट से जीत दर्ज कर ली है। उन्हें 10,240 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी CPN-UML के लीलामणि गौतम को 3,462 वोट मिले।

चुनाव आयोग के अधिकारियों का कहना है कि इस बार चुनाव में युवाओं की भागीदारी काफी ज्यादा रही है। खासकर जेनरेशन Z के मतदाताओं और उम्मीदवारों ने चुनाव में सक्रिय भूमिका निभाई है।

दरअसल, सितंबर में हुए बड़े जनप्रदर्शनों के बाद नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला था। इन प्रदर्शनों के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा और संसद भंग कर दी गई थी। इसके बाद नए चुनाव कराए गए।

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव पर चर्चा के आसार, 9–10 मार्च के लिए बीजेपी का व्हिप

9–10 मार्च को बीजेपी ने अपने सांसदो के लिए जारी किया व्हिप
9–10 मार्च को बीजेपी ने अपने सांसदो के लिए जारी किया व्हिप

नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होने जा रहा है और इसी के साथ राजनीतिक माहौल भी गरमाने के संकेत मिल रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपने लोकसभा सांसदों को 9 और 10 मार्च के लिए व्हिप जारी किया है। माना जा रहा है कि इन दिनों लोकसभा स्पीकर को हटाने से जुड़े विपक्ष के प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है, इसलिए पार्टी ने अपने सभी सांसदों को सदन में मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं।

दरअसल, संसद का बजट सत्र 28 जनवरी को राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ शुरू हुआ था। यह सत्र कुल 65 दिनों तक चलेगा और इसमें करीब 30 बैठकें प्रस्तावित हैं। पहला चरण 13 फरवरी को समाप्त हुआ था, जबकि दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगा। बजट सत्र के पहले चरण में भी कई मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और हंगामा देखने को मिला था।

पहले चरण में मुख्य रूप से केंद्रीय बजट 2026-27 और राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को लेकर चर्चा हुई थी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को लोकसभा में लगातार नौवीं बार बजट पेश किया था। इस दौरान सरकार की आर्थिक नीति और आने वाले वर्षों की वित्तीय रणनीति पर भी विस्तृत चर्चा हुई।

इसी बीच विपक्ष ने कई मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की। खासतौर पर ग्रामीण रोजगार से जुड़ी योजनाओं और चुनावी सूची के पुनरीक्षण जैसे विषयों पर विपक्ष ने सवाल उठाए। इसके अलावा पूर्व सेना प्रमुख की एक अप्रकाशित किताब का जिक्र किए जाने को लेकर भी संसद में विवाद हुआ था।

सत्र के दौरान राहुल गांधी द्वारा चीन और पूर्वी लद्दाख से जुड़े मुद्दे उठाने पर भी सदन में काफी हंगामा हुआ। इस दौरान नियमों के उल्लंघन के आरोप में कुछ विपक्षी सांसदों को निलंबित भी किया गया था।