नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और वैश्विक तेल सप्लाई पर बढ़ते दबाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा फैसला लिया है। ट्रंप प्रशासन ने दुनिया के कई देशों को 30 दिनों के लिए रूसी कच्चा तेल खरीदने की अस्थायी छूट दे दी है। माना जा रहा है कि इस फैसले का मकसद वैश्विक बाजार में तेल की कमी को कुछ हद तक कम करना और बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण पाना है।
दरअसल, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष का असर सीधे तेल बाजार पर पड़ रहा है। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से स्थिति और गंभीर हो गई है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक माना जाता है और आमतौर पर दुनिया की करीब 20 से 25 प्रतिशत तेल आपूर्ति इसी रास्ते से गुजरती है। इस रास्ते पर तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं।
इसके साथ ही अमेरिका ने अपने रणनीतिक तेल भंडार से भी कच्चा तेल जारी करने का फैसला किया है। अमेरिकी ऊर्जा विभाग के अनुसार करीब 172 मिलियन बैरल तेल बाजार में लाया जाएगा, ताकि ईंधन की कीमतों को नियंत्रित किया जा सके। यह कदम अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के साथ मिलकर उठाया जा रहा है, जिसमें सदस्य देश मिलकर करीब 400 मिलियन बैरल तेल बाजार में जारी करने की योजना बना रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि युद्ध शुरू होने से पहले कच्चे तेल की कीमत करीब 70 से 75 डॉलर प्रति बैरल थी, लेकिन खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और जहाजों पर हमलों के बाद कीमतों में तेजी आई है। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि मिडिल ईस्ट में तनाव कब कम होगा और तेल सप्लाई कब सामान्य हो पाएगी।
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और गैस सप्लाई को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच देश में कई लोग एहतियात के तौर पर LPG सिलेंडर बुक करने की कोशिश कर रहे हैं। इसी वजह से कई जगहों पर गैस एजेंसियों के फोन लगातार व्यस्त मिल रहे हैं और कॉल के जरिए बुकिंग करना मुश्किल हो गया है। कई उपभोक्ताओं को सिलेंडर बुक कराने में दिक्कत आ रही है, जिससे गैस एजेंसियों के बाहर भी भीड़ देखने को मिल रही है।
सबसे आसान तरीका व्हाट्सऐप के जरिए बुकिंग करना है। अगर आप इंडेन गैस के ग्राहक हैं तो अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से 7588888824 पर ‘REFILL’ लिखकर व्हाट्सऐप मैसेज भेज सकते हैं। एचपी गैस के ग्राहक 9222201122 नंबर पर ‘Hi’ या ‘Book’ लिखकर मैसेज कर सकते हैं, जबकि भारत गैस के ग्राहक 1800224344 नंबर पर मैसेज भेजकर सिलेंडर बुक कर सकते हैं।
इसके अलावा SMS के जरिए भी बुकिंग की जा सकती है। इंडेन गैस के ग्राहक अपने रजिस्टर्ड नंबर से 7718955555 पर ‘REFILL’ लिखकर मैसेज भेज सकते हैं। वहीं भारत गैस के ग्राहक 7715012345 या 7718012345 नंबर पर ‘LPG’ लिखकर SMS भेज सकते हैं।
अगर आप मैसेज या व्हाट्सऐप का इस्तेमाल नहीं करना चाहते तो मिस्ड कॉल का विकल्प भी मौजूद है। इंडेन गैस के ग्राहक 8454955555 नंबर पर मिस्ड कॉल देकर सिलेंडर बुक कर सकते हैं, जबकि एचपी गैस के ग्राहक 9493602222 नंबर पर मिस्ड कॉल देकर बुकिंग कर सकते हैं।
इसके अलावा UMANG, Paytm, PhonePe और Amazon Pay जैसे मोबाइल ऐप्स के जरिए भी LPG सिलेंडर बुक किया जा सकता है। इन ऐप्स पर गैस एजेंसी का विकल्प चुनकर आप आसानी से रिफिल बुक कर सकते हैं।
नई दिल्ली: इराक में अमेरिकी सेना का एक सैन्य विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया है। यह हादसा पश्चिमी इराक के एयरस्पेस में हुआ, जहां अमेरिकी वायुसेना का केसी-135 रीफ्यूलिंग टैंकर विमान क्रैश हो गया। इस घटना के बाद इलाके में राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया गया है। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि विमान में कितने लोग सवार थे और इस हादसे में किसी की मौत या घायल होने की खबर है या नहीं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, इस घटना में दो विमान शामिल थे। इनमें से एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जबकि दूसरा सुरक्षित तरीके से उतर गया। शुरुआती जानकारी के अनुसार यह विमान हवा में लड़ाकू विमानों को ईंधन भरने का काम करता है। ऐसे टैंकर विमान युद्ध के दौरान बेहद अहम भूमिका निभाते हैं, क्योंकि इनके जरिए फाइटर जेट लंबी दूरी तक उड़ान भर सकते हैं।
हादसे को लेकर अलग-अलग दावे भी सामने आ रहे हैं। इराक में सक्रिय ‘इस्लामिक रेज़िस्टेंस’ नाम के एक संगठन ने दावा किया है कि उसने इस अमेरिकी विमान को निशाना बनाया। इस संगठन को ईरान समर्थित माना जाता है। वहीं अमेरिकी सेना ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि विमान दुश्मन के हमले या अपने ही बलों की गोलीबारी की वजह से नहीं गिरा।
फिलहाल दुर्घटना की असली वजह साफ नहीं है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि हवा में रीफ्यूलिंग के दौरान दोनों विमानों के बेहद करीब उड़ने की वजह से तकनीकी गड़बड़ी या टक्कर जैसी स्थिति भी बन सकती है। इस प्रक्रिया में टैंकर विमान से एक पाइप के जरिए दूसरे विमान में ईंधन भरा जाता है और उस दौरान दोनों विमान कुछ ही फीट की दूरी पर उड़ते हैं।
घटना ऐसे समय पर हुई है जब पश्चिम एशिया में पहले से ही तनाव बढ़ा हुआ है। अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच चल रहे टकराव की वजह से पूरे क्षेत्र में सुरक्षा हालात संवेदनशील बने हुए हैं। इसी कारण इस दुर्घटना को लेकर कई तरह की आशंकाएं भी जताई जा रही हैं।
डिजाइन शिक्षा और रचनात्मक नवाचार में लगभग दो दशकों की उत्कृष्ट उपलब्धियों को आगे बढ़ाते हुए, सत्यम फैशन इंस्टीट्यूट (SFI), नोएडा, जो कि दिल्ली-एनसीआर के प्रतिष्ठित डिजाइन संस्थानों में से एक है और एसएनडीटी महिला विश्वविद्यालय, मुंबई से संबद्ध है, ने अपने प्रमुख वार्षिक ग्रेजुएशन डिजाइन शो “सत्यम्स तृप्तिक 2026” का भव्य आयोजन किया। यह बहुप्रतीक्षित कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के उत्सव के साथ आयोजित किया गया, जिसमें संस्थान के स्नातक हो रहे डिजाइन छात्रों की रचनात्मक यात्रा का उत्सव मनाया गया और फैशन व डिजाइन क्षेत्र के भावी नेतृत्व को प्रोत्साहित करने की संस्थान की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया गया।
पिछले वर्षों में सत्यम फैशन इंस्टीट्यूट, जो AICTE द्वारा अनुमोदित बी.डिज़ाइन और एम.डिज़ाइन कार्यक्रमों के साथ NAAC से ‘A’ ग्रेड (CGPA 3.8) तथा NEP के अनुरूप पाठ्यक्रमों के माध्यम से संचालित हो रहा है, ने शैक्षणिक उत्कृष्टता और उद्योग से मजबूत जुड़ाव के लिए अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। संस्थान ने इस वर्ष 19वें ग्रेजुएशन डिजाइन शो का सफल आयोजन करते हुए उभरते डिजाइनरों को अपने कार्य को उद्योग के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए एक सशक्त मंच प्रदान किया। हाल ही में संस्थान को कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ भी प्राप्त हुई हैं, जिनमें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2025 के अवसर पर दिल्ली की माननीय मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता द्वारा सम्मानित किया जाना, उत्तर प्रदेश सरकार की विभिन्न परियोजनाओं के साथ सफल सहयोग, इंडिया हैंडमेड एक्सपो 2026 में सहभागिता, तथा हाल ही में केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह द्वारा NAEC वार्षिक पुरस्कार 2026 के दौरान सम्मानित किया जाना शामिल है। ये उपलब्धियाँ शिक्षा, उद्योग और नीति-निर्माण के बीच संस्थान की सशक्त भूमिका को दर्शाती हैं।
सत्यम्स तृप्तिक 2026 कल्पना, शिल्पकला और समकालीन डिजाइन सोच का अद्भुत संगम बनकर उभरा, जिसमें स्नातक हो रहे छात्रों की रचनात्मक यात्राओं का प्रभावशाली प्रदर्शन हुआ। रैम्प एक जीवंत मंच में परिवर्तित हो गया, जहाँ वस्त्र, सिल्हूट, रंग और बनावट के माध्यम से विरासत, स्थिरता और आधुनिक आकांक्षाओं से प्रेरित कहानियाँ प्रस्तुत की गईं।
इस कार्यक्रम में बी.डिज़ाइन (फैशन डिजाइन, टेक्सटाइल डिजाइन, लाइफस्टाइल एक्सेसरी डिजाइन और फैशन कम्युनिकेशन) तथा पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन फैशन डिजाइन के विद्यार्थियों ने अपनी विविध और प्रभावशाली डिजाइन कलेक्शन्स प्रस्तुत कीं। प्रत्येक प्रस्तुति में महीनों के गहन शोध, प्रयोग और सूक्ष्म शिल्पकला का उत्कृष्ट प्रदर्शन देखने को मिला।
संस्थान की नेतृत्व टीम— अध्यक्षा डॉ. स्नेह सिंह, सचिव सीए डॉ. प्रदीप गुप्ता और प्राचार्य डॉ. नीतू मल्होत्रा—ने इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए स्नातक छात्रों की रचनात्मकता और समर्पण की सराहना की।
डॉ. स्नेह सिंह, अध्यक्षा, ने कहा, “सत्यम फैशन इंस्टीट्यूट, नोएडा में हम ऐसे डिजाइनरों को तैयार करने में विश्वास रखते हैं जो परंपरा का सम्मान करते हुए नवाचार और रचनात्मकता के साथ डिजाइन के भविष्य को आकार देते हैं।”
सीए डॉ. प्रदीप गुप्ता, सचिव, ने कहा, “सत्यम्स तृप्तिक 2026 नवाचार, समर्पण और दृढ़ता की उस भावना को दर्शाता है जो सत्यम फैशन इंस्टीट्यूट के प्रत्येक डिजाइन छात्र की यात्रा को परिभाषित करती है।”
डॉ. नीतू मल्होत्रा, प्राचार्या, ने कहा, “हमारे डिजाइन छात्रों ने असाधारण रचनात्मकता और पेशेवर दृष्टिकोण का प्रदर्शन किया है, और हमें विश्वास है कि वे वैश्विक डिजाइन उद्योग में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।”
इस वर्ष के शो में लगभग 20 विशिष्ट कलेक्शन्स प्रस्तुत की गईं, जिनमें मॉडर्न रिवायत, रॉयल फिलिग्री, स्वास – द ब्रीथ ऑफ चेंज, लिविंग लेयर्स – नेचर’s क्वाइट स्ट्रेंथ, अंतर्द्वंद्व, गुलाल – टोन्स ऑफ सेलिब्रेशन, शिनसेई – रीबर्थ इन ब्लूम, लैटिस्ड होराइज़न, फ्रॉम लूम टू लीडरशिप, इकोज़ ऑफ द कॉसमॉस, काइनेटिक मोशन, चित्र सूत्रम, इनवर्ड ड्रेप्स, रंग रेखा, बिनीथ द सरफेस, ब्लूमिंग ब्रिलियंस, एंचांटेड अडॉर्नमेंट, रॉयल ओपुलेंस, ब्लूम इन द डार्क, ट्रेंडी फीलिंग्स और ऐज़ इट वॉज़। शामिल हैं। इन कलेक्शन्स में स्थिरता, पारंपरिक शिल्प के पुनरुद्धार, भविष्यवादी सौंदर्यशास्त्र, भावनात्मक कथाओं और संरचनात्मक प्रयोग जैसे विविध विषयों की झलक देखने को मिली।
कार्यक्रम का कलात्मक निर्देशन शो डायरेक्टर एवं कोरियोग्राफर श्री अनुप बनर्जी तथा क्रिएटिव डायरेक्टर श्री शोमेन बनर्जी ने किया, जिनकी रचनात्मक दृष्टि ने पूरे शो को एक आकर्षक नाटकीय अनुभव में परिवर्तित कर दिया। प्रोफेशनल मॉडल्स ने प्रत्येक डिजाइन अवधारणा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया, जिससे रैम्प पर कहानी कहने का प्रभाव और भी सशक्त हुआ।
इस अवसर पर फैशन और डिजाइन जगत की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियाँ भी उपस्थित रहीं, जिनमें श्री ललित ठुकराल, सुश्री निम्मी ठुकराल, डॉ. नीतू सिंह, श्री रवि कुमार पासी, श्री आर. के. श्रीवास्तव, प्रो. शशि नांगिया, श्री राजीव बंसल, श्री ग्रीस चंद्रा, श्री मुकेश शर्मा, सुश्री किरण शर्मा, श्री डी. के. सिंह, श्री मनीष त्रिपाठी, सुश्री तनमया द्विवेदी, सुश्री दीपा सोंधी, सुश्री सोनिया जेटली, सुश्री वारिजा बजाज सहित अनेक गणमान्य अतिथि शामिल रहे। उनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया तथा शिक्षा और उद्योग के बीच संबंधों को मजबूत किया।
कई उद्योग सहयोगियों ने भी छात्राओं को मार्गदर्शन, संसाधन, सामग्री और तकनीकी सहयोग प्रदान कर उनकी रचनात्मक अवधारणाओं को वास्तविक डिजाइन कलेक्शन्स में परिवर्तित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
बेहतरीन प्रस्तुति, कलात्मक उत्कृष्टता और दर्शकों की उत्साही सराहना के साथ सत्यम्स तृप्तिक 2026 ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि सत्यम फैशन इंस्टीट्यूट, नोएडा नवाचार, शोध-आधारित रचनात्मकता और डिजाइन उत्कृष्टता का एक प्रमुख केंद्र है। यह प्रेरणादायी शाम भारतीय फैशन शिक्षा में नए मानक स्थापित करते हुए यादगार बन गई।
नई दिल्ली: आज ईरान और इज़राइल एक-दूसरे के कट्टर विरोधी माने जाते हैं। लेकिन इतिहास का एक दिलचस्प अध्याय बताता है कि कभी दोनों देश चुपचाप तेल के कारोबार में साझेदार भी रहे थे। यह साझेदारी इतनी गुप्त थी कि कई साल तक दुनिया को इसकी भनक तक नहीं लगी।
यह कहानी 1960 के दशक के आखिर की है। उस समय पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बदल रहे थे। जून 1967 में इजराइल और कई अरब देशों के बीच युद्ध हुआ। इस संघर्ष के बाद मिस्र ने स्वेज नहर को बंद कर दिया। यह नहर यूरोप और एशिया के बीच सबसे छोटा समुद्री रास्ता मानी जाती है। इसके बंद होने से क्षेत्र के कई देशों के लिए तेल और व्यापार के रास्ते मुश्किल हो गए।
स्वेज नहर बंद होने का असर इज़राइल पर भी पड़ा। देश के सामने तेल आयात का संकट खड़ा हो गया। दूसरी ओर ईरान, जो उस समय बड़ा तेल निर्यातक था, उसे भी अपने तेल को यूरोप तक पहुंचाने के लिए नया रास्ता चाहिए था। इसी जरूरत ने दोनों देशों को एक साथ आने पर मजबूर कर दिया।
1968 में एक गुप्त समझौते के तहत लाल सागर के इलात बंदरगाह को भूमध्य सागर के अश्केलोन बंदरगाह से जोड़ने के लिए एक पाइपलाइन बनाई गई। करीब 254 किलोमीटर लंबी इस पाइपलाइन के जरिए तेल को लाल सागर से सीधे भूमध्य सागर तक पहुंचाया जाने लगा। इससे जहाज़ों को अफ्रीका के लंबे समुद्री रास्ते से घूमकर जाने की जरूरत नहीं पड़ती थी।
इस पूरे कारोबार को दुनिया से छिपाने के लिए अलग-अलग विदेशी कंपनियों का सहारा लिया गया। तेल टैंकर अक्सर अपने गंतव्य के बारे में गलत जानकारी देते थे और चुपचाप इलात बंदरगाह पर पहुंचकर तेल उतार देते थे। वहां से पाइपलाइन के जरिए तेल अश्केलोन पहुंचाया जाता और फिर यूरोप के बाजारों तक भेज दिया जाता।
हालांकि इतना बड़ा ऑपरेशन ज्यादा समय तक पूरी तरह गुप्त नहीं रह सका। बाद में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए की रिपोर्टों और शोधकर्ताओं की किताबों में इस परियोजना का जिक्र सामने आया।
नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी ने एक बार फिर भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतों में अचानक उछाल और आपूर्ति में रुकावट से यह साफ हो जाता है कि भारत अभी भी आयातित कच्चे तेल पर काफी हद तक निर्भर है। ऐसे में देश को धीरे-धीरे ऐसे विकल्पों की ओर बढ़ना होगा जिससे इस निर्भरता को कम किया जा सके।
ऊर्जा और पर्यावरण से जुड़े विशेषज्ञ कार्तिक गणेसन, जो काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (CEEW) में फेलो और डायरेक्टर – स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप हैं, का कहना है कि कच्चे तेल के दाम बढ़ने की स्थिति भारत के लिए एक चेतावनी की तरह है। उनका मानना है कि यह समय है जब देश को आयातित तेल पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
उनके अनुसार भारत की बड़ी चुनौती यह है कि परिवहन और घरेलू जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में तेल आधारित ईंधन का इस्तेमाल होता है। खासकर निजी वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण पेट्रोल और डीजल की मांग लगातार बढ़ रही है। यदि इस मांग को संतुलित करने के लिए सही मूल्य निर्धारण और नीतिगत कदम उठाए जाएं तो तेल की खपत को धीरे-धीरे कम किया जा सकता है।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों के मुताबिक, भारत जैसे बड़े देश के लिए ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ना स्वाभाविक है। इसलिए सरकार और नीति-निर्माताओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखते हुए आयात पर निर्भरता को कम करने के रास्ते तलाशें।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अभी से नीतिगत बदलाव और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर ध्यान दिया जाए, तो आने वाले समय में भारत तेल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव के असर से काफी हद तक खुद को बचा सकता है।
नयी दिल्ली: मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से वन्यजीव संरक्षण के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। यहां मादा चीता ‘ज्वाला’ ने पांच शावकों को जन्म दिया है। इसके साथ ही भारत में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 53 हो गई है। खास बात यह है कि इनमें से 33 शावक भारत में ही जन्मे हैं, जो प्रोजेक्ट चीता की सफलता का संकेत माना जा रहा है।
इसी बीच कूनो से जुड़े दो चीतों की गतिविधियों ने भी ध्यान खींचा है। जानकारी के मुताबिक KP-2 और KP-3 नाम के दो चीते कूनो से निकलकर राजस्थान के बारां जिले की तरफ पहुंच गए हैं। इस पर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने स्थिति पर नजर रखते हुए जानकारी साझा की है।
अधिकारियों के अनुसार KP-2 बारां जिले के मंगरोल क्षेत्र में ट्रैक किया गया है, जबकि KP-3 करीब 60 से 70 किलोमीटर का सफर तय कर बंज अमली कंजरवेशन रिजर्व तक पहुंच गया है। दोनों चीते फिलहाल पार्वती नदी के अलग-अलग किनारों पर करीब 6 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद हैं।
वन विभाग की टीमें दोनों चीतों की 24 घंटे जीपीएस और रेडियो कॉलर के जरिए निगरानी कर रही हैं। मध्य प्रदेश और राजस्थान के वन विभाग की संयुक्त टीमें भी इलाके में तैनात हैं, ताकि चीतों की सुरक्षा और गतिविधियों पर नजर रखी जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि चीतों का इस तरह लंबी दूरी तय करना कोई असामान्य बात नहीं है। जंगली जानवर अक्सर अपना नया इलाका तलाशने के लिए दूर तक घूमते हैं। प्रोजेक्ट चीता की योजना में भी इस तरह के राज्य सीमाओं के पार मूवमेंट की संभावना पहले से शामिल की गई थी।
इन घटनाओं ने कूनो–गांधी सागर वन्यजीव कॉरिडोर की जरूरत को भी फिर से चर्चा में ला दिया है। करीब 17,000 वर्ग किलोमीटर के इस प्रस्तावित कॉरिडोर में राजस्थान के सात और मध्य प्रदेश के आठ जिले शामिल होंगे। इसका मकसद चीतों और अन्य वन्यजीवों को सुरक्षित तरीके से बड़े इलाके में घूमने और बसने का मौका देना है।
वन विभाग का कहना है कि फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और दोनों राज्यों के अधिकारी लगातार समन्वय बनाए हुए हैं। वहीं कूनो में नए शावकों के जन्म से वन्यजीव संरक्षण की उम्मीदें और मजबूत हो गई हैं।
स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा आज
नई दिल्ली: लोकसभा में आज एक दिलचस्प और संवैधानिक रूप से अहम स्थिति देखने को मिल सकती है। सदन के स्पीकर ओम बिरला संसद में मौजूद तो रहेंगे, लेकिन अपनी पारंपरिक अध्यक्ष की कुर्सी पर नहीं बैठेंगे। इसकी वजह विपक्ष की ओर से लाया गया वह प्रस्ताव है, जिसमें उन्हें स्पीकर पद से हटाने की मांग की गई है।
संसदीय नियमों के मुताबिक जब किसी स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव सदन में चर्चा के लिए आता है, तब वह खुद उस कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं कर सकते। ऐसे में लोकसभा की कार्यवाही किसी दूसरे सदस्य द्वारा संचालित की जाती है। इसी कारण ओम बिरला उस समय सामान्य सांसद की तरह सदन की अग्रिम पंक्तियों में बैठकर बहस सुनेंगे।
संविधान के अनुच्छेद 96 में यह साफ व्यवस्था की गई है कि स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव आने पर निष्पक्षता बनाए रखने के लिए वे उस प्रक्रिया को संचालित नहीं करेंगे। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि जिस मुद्दे पर चर्चा हो रही है, उसमें किसी तरह का पक्षपात न दिखे।
इस दौरान स्पीकर की भूमिका भी बदल जाती है। वे सदन में मौजूद रह सकते हैं, अपने खिलाफ चल रही बहस सुन सकते हैं और चाहें तो अपने बचाव में बोल भी सकते हैं। इसके अलावा वे एक सामान्य सांसद की तरह चर्चा में हिस्सा ले सकते हैं और मतदान भी कर सकते हैं। हालांकि इस स्थिति में उनके पास स्पीकर के तौर पर मिलने वाला कास्टिंग वोट का अधिकार नहीं रहता।
दूसरी ओर सरकार का कहना है कि वह इस मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है और विपक्ष को अपनी बात खुलकर रखनी चाहिए। संसदीय मामलों से जुड़े नेताओं का कहना है कि ऐसी बहस लोकतंत्र की प्रक्रिया का हिस्सा है।
हालांकि मौजूदा राजनीतिक स्थिति को देखते हुए इस प्रस्ताव के पास होने की संभावना कम मानी जा रही है, क्योंकि लोकसभा में सत्तारूढ़ गठबंधन के पास बहुमत है। फिर भी यह पूरा घटनाक्रम संसद की कार्यप्रणाली और संवैधानिक नियमों को समझने के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नई दिल्ली: आधुनिक युद्ध में तकनीक तेजी से बदल रही है और अब ऐसे हथियार सामने आ रहे हैं जो बिना इंसानी आदेश के खुद फैसला लेकर हमला कर सकते हैं। इन्हें लेथल ऑटोनॉमस वेपन सिस्टम (LAWS) या आम भाषा में AI किलर ड्रोन कहा जाता है। यही वजह है कि दुनिया के 30 से ज्यादा देश इन हथियारों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे हैं।
ये किलर ड्रोन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक सेंसर तकनीक से लैस होते हैं। इनकी खासियत यह है कि ये खुद ही लक्ष्य ढूंढ सकते हैं, उसे पहचान सकते हैं और उस पर हमला भी कर सकते हैं। कई मामलों में इंसान सिर्फ इन्हें एक्टिवेट करता है, उसके बाद पूरा नियंत्रण मशीन के एल्गोरिद्म के पास चला जाता है।
इन ड्रोन में अलग-अलग तरह के सेंसर लगे होते हैं, जो आसपास के इलाके को लगातार स्कैन करते रहते हैं। थर्मल कैमरे अंधेरे में भी इंसानों की गर्मी पहचान सकते हैं, जबकि रडार और अन्य तकनीकें दूर तक हो रही गतिविधियों पर नजर रखती हैं। इन सभी जानकारियों को AI सिस्टम कुछ ही सेकंड में विश्लेषण कर तय करता है कि सामने दिख रहा लक्ष्य सैनिक है या कोई आम व्यक्ति।
सबसे ज्यादा विवाद इसी बात को लेकर है कि अंतिम फैसला मशीन खुद लेती है। यानी यह तय करने का अधिकार भी उसी के पास होता है कि हमला करना है या नहीं। आलोचकों का कहना है कि किसी मशीन को इंसानों की जान लेने का फैसला करने का अधिकार देना नैतिक रूप से गलत है।
दुनिया में ऐसे कई ड्रोन पहले से मौजूद हैं। इजराइल का हारोप ड्रोन, रूस की कंपनी द्वारा विकसित ZALA KYB, और तुर्की का कार्गु-2 ड्रोन इसी तकनीक के उदाहरण माने जाते हैं। कुछ ड्रोन तो लंबे समय तक आसमान में मंडराते रहते हैं और लक्ष्य मिलते ही सीधे उस पर टकराकर विस्फोट कर देते हैं।
संयुक्त राष्ट्र में कई देश इन हथियारों पर बैन की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि AI भी गलती कर सकता है और अगर किसी आम नागरिक को सैनिक समझ लिया गया तो बड़ा नुकसान हो सकता है। इसके अलावा साइबर हमले का खतरा भी है, क्योंकि अगर इन ड्रोन को हैक कर लिया गया तो वे उल्टा अपने ही सैनिकों के खिलाफ इस्तेमाल हो सकते हैं।
अमेरिका, रूस, चीन और इजराइल जैसे बड़े सैन्य देश इस प्रतिबंध के खिलाफ हैं। उनका मानना है कि भविष्य के युद्ध में यह तकनीक बड़ी रणनीतिक बढ़त दे सकती है। यही वजह है कि किलर ड्रोन को लेकर दुनिया में बहस लगातार तेज होती जा रही है।
नई दिल्ली: अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए टी-20 वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर खिताब अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ ही भारत टी-20 वर्ल्ड कप को तीसरी बार जीतने वाला पहला देश बन गया है। इससे पहले टीम इंडिया 2007 और 2024 में यह ट्रॉफी जीत चुकी है।
फाइनल मुकाबले में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 255 रन का बड़ा स्कोर खड़ा किया। जवाब में न्यूजीलैंड की टीम दबाव में नजर आई और पूरी टीम 19 ओवर में 159 रन पर ऑलआउट हो गई। इस तरह भारत ने एकतरफा अंदाज में मुकाबला जीत लिया।
भारत की जीत में बल्लेबाजों और गेंदबाजों दोनों का अहम योगदान रहा। तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ने शानदार गेंदबाजी करते हुए चार ओवर में सिर्फ 15 रन देकर चार विकेट लिए और उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। वहीं अक्षर पटेल ने भी तीन विकेट लेकर न्यूजीलैंड की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
इससे पहले भारत की शुरुआत भी काफी धमाकेदार रही। ओपनर अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन ने तेज शुरुआत दी। अभिषेक शर्मा ने सिर्फ 21 गेंदों में 52 रन बनाकर टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। इसके बाद संजू सैमसन और ईशान किशन ने पारी को और तेज कर दिया।
संजू सैमसन ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 89 रन बनाए, जबकि ईशान किशन ने 54 रन की तेज पारी खेली। दोनों के बीच दूसरे विकेट के लिए तेज साझेदारी हुई, जिससे भारत का स्कोर तेजी से 200 के पार पहुंच गया। आखिर के ओवरों में शिवम दुबे ने भी तेजी से रन जोड़ते हुए टीम का स्कोर 255 तक पहुंचा दिया।
न्यूजीलैंड की ओर से टिम साइफर्ट ने कुछ देर तक संघर्ष किया, लेकिन दूसरे छोर से लगातार विकेट गिरते रहे। भारतीय गेंदबाजों ने नियमित अंतराल पर विकेट लेकर न्यूजीलैंड को वापसी का मौका नहीं दिया।