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सरकरी दफ्तरों में अब 2 दिन की घर से हाजिरी, साल भर तक मंत्री नहीं कर सकेंगे विदेश यात्रा

Delhi cm announce Delhi economic plan
Delhi cm announce Delhi economic plan

14 मई 2026, नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने गुरुवार को कई बड़े ऐलान किए. इसमें उन्होंने बताया कि दिल्ली के सभी सरकारी दफ्तरों में हफ्ते में दो दिन वर्क फ्रॉम होम रहेगा. उन्होंने कहा कि प्राइवेट ऑफिसेस से भी वर्क फ्रॉम होम अपनाने की अपील की जाएगी. साथ ही उन्होनें कोर्ट से भी ये निवेदन किया है कि ऑन लाइन हियरिंग पर जोर दें। रेखा गुप्ता ने कहा है कि दिल्ली सरकार के कोई भी मंत्री 1 साल तक सरकारी काम काज के लिए विदेश यात्रा पर नहीं जायेंगें।

प्रधानमंत्री की ईंधन बचाने की अपील के बाद, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की जनता से अपील।

रेखा गुप्ता ने ये सारे ऐलान तब किए जब पीएम मोदी ने इस हफ्ते दो बार देशवासियों से पेट्रोल-डीजल बचाने और सोना न खरीदने की अपील की थी. इसके साथ ही पीएम मोदी ने वर्क फ्रॉम होम करने और मेट्रो से सफर करने की भी अपील की थी. पीएम मोदी ने भी अपने काफिले को छोटा कर दिया है.

पीएम मोदी के इस जनआग्रह के बाद देशभर में कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अपने काफिले से गाड़ियां कम कर दी हैं, जिस्से पेट्रोल बचाया जा सके. दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के काफिले में भी अब सिर्फ 4 ही गाड़ियां होंगी। जिनमें से दो फिलहाल ईवी हैं.

गुरुवार को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि दिल्ली के सभी लोग हफ्ते में एक दिन ‘नो व्हीकल डे’ मनाएं.  

रेखा गुप्ता के एलान के मुख्य बिन्दु-

. सभी सरकारी दफ्तों में हर हफ्ते दो दिन वर्क फ्रॉम होम लागू होगा. प्राइवेट कंपनियों के लिए भी इसी तरह की गाइडलाइन्स जारी की जाएगी.

.  हर ​​सोमवार को ‘मंडे मेट्रो’ के तौर पर मनाया जाएगा. सभी मंत्री, अधिकारी और कर्मचारी मेट्रो से सफर करेंगे. सरकारी अधिकारियों की कॉलोनी के बाहर 58 बसें खड़ी होंगी, जो कर्मचारियों को उनकी कॉलोनी से मेट्रो तक छोड़ेगी.

. सरकारी अधिकारियों के लिए पेट्रोल और डीजल की सीमा में 20% की कटौती की गई है. हालांकि, कर्मचारियों के लिए परिवहन भत्ते में 10% की बढ़ोतरी की जाएगी.

.  दिल्ली सरकार का कोई भी मंत्री या अधिकारी अगले एक साल तक किसी भी आधिकारिक विदेश यात्रा पर नहीं जाएगा. 

. सरकार अगले तीन महीनों तक कोई भी बड़ा सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित नहीं करेगी. जिसमें गाडियों की आवाजाही ज्यादा होती है।

. दिल्ली सरकार अगले 6 महीनों तक कोई भी नया पेट्रोल, डीजल या इलेक्ट्रिक वाहन नहीं खरीदेगी.

.  कुल बैठकों में से 50% बैठकें ऑनलाइन होंगी. विश्वविद्यालयों,इन्सट्यूट,और स्कूलों से अपील है कि वे नॉन-प्रैक्टिकल कक्षाएं ऑनलाइन आयोजित करें. अदालतों से भी निवेदन किया गया है कि ज्यादातर मामलों की सुनवाई ऑनलाइन करें.

. बिजली की बर्बादी रोकने के लिए सरकारी दफ्तरों में ‘मास्टर स्विच’ लगाए जाएंगे. सभी सरकारी दफ्तों में एयर कंडीशनर का तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच निर्धारित किया जाएगा.

.  90 दिनों का एक अभियान चलाया जाएगा.जिसमें नागरिकों को बचत को बढ़ावा देने और राष्ट्र के निर्माण में योगदान देने की शपथ दिलाई जाएगी.जिससे जागरूकता फैले और लोग स्वेच्छा से योगदान दें।

. दिल्ली सरकार केवल 100% ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों का ही इस्तेमाल करेगी. सभी शांपिंग मॉल्स में विशेष ‘मेड इन इंडिया’ स्टॉल बनाए जाएंगे. सरकारी खरीद में स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दी जाएगी.

.दिल्ली सरकार के दफ्तरों की टाइमिंग भी बदली गई है जैसे अब 10:30 से 7 बजे शाम तक दिल्ली सरकार के दफ्तर काम करेंगे। और एमसीडी के द्फ्तर 8:30 से 5 बजे शाम तक काम करेगें।

.अगर सरकारी अधिकारी पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ज्यादा उपयोग करते हैं तो उनके मासिक पेट्रोल के अलाउंस को 10 प्रतिशत बढाया भी जा सकता है।

तपती दिल्ली, बरसता देश: कहीं हीटवेव का कहर तो कहीं बारिश का अलर्ट, मानसून भी बढ़ा आगे

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नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर की बात करें तो 14 मई की शाम और रात में हल्की बारिश, गरज-चमक और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। इसके बाद 15 से 17 मई तक आसमान ज्यादातर साफ रहेगा और तापमान 40 से 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। मौसम विभाग ने साफ किया है कि 16 से 20 मई के बीच दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और आसपास के इलाकों में हीटवेव चल सकती है।

उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में इस बार मई की गर्मी काफी तेज रहने के आसार हैं। राजस्थान के जैसलमेर में तापमान 46.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो देश में सबसे ज्यादा रहा। पश्चिमी राजस्थान में 17 से 19 मई के दौरान भीषण लू की चेतावनी जारी की गई है। वहीं मध्य प्रदेश, विदर्भ, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में भी गर्म हवाओं का असर देखने को मिलेगा।

दूसरी तरफ पूर्वोत्तर भारत में मौसम पूरी तरह बदला हुआ नजर आएगा। असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम में अगले कई दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। तेज हवाओं और बिजली गिरने का भी खतरा बना रहेगा। मौसम विभाग ने निचले इलाकों में जलभराव और भूस्खलन की आशंका जताई है।

दक्षिण भारत में भी बारिश का दौर जारी रहने वाला है। तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल, माहे और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 4 से 5 दिनों तक भारी बारिश हो सकती है। कई इलाकों में तेज हवाएं और ओलावृष्टि की संभावना भी जताई गई है।

मौसम विभाग ने मछुआरों को भी समुद्र में न जाने की सलाह दी है, क्योंकि बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर में मौसम खराब रह सकता है। साथ ही लोगों से गर्मी के दौरान ज्यादा पानी पीने, धूप में निकलने से बचने और मौसम अपडेट पर नजर बनाए रखने की अपील की गई है।

पेट्रोल बचाने के लिए बाइक पर निकले सीएम फडणवीस, मंत्रियों को भी खर्च घटाने का संदेश

पेट्रोल बचाने के लिए बाइक पर निकले सीएम फडणवीस। | Image Source: NDTV.in
पेट्रोल बचाने के लिए बाइक पर निकले सीएम फडणवीस। | Image Source: NDTV.in

नई दिल्ली: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने गुरुवार को एक अलग अंदाज में सबका ध्यान खींचा। आमतौर पर बड़े काफिले के साथ चलने वाले मुख्यमंत्री इस बार मोटरसाइकिल पर सवार होकर विधान भवन पहुंचे। वह विधान परिषद के नए सदस्यों के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने जा रहे थे।

मुख्यमंत्री अपने सरकारी आवास ‘वर्षा’ से दक्षिण मुंबई स्थित विधान भवन तक बाइक से पहुंचे। इस दौरान उनके साथ भाजपा नेता और मंत्री Ashish Shelar भी मौजूद थे। इस कदम को प्रधानमंत्री Narendra Modi की ईंधन बचाने की अपील के बाद उठाए गए प्रतीकात्मक लेकिन अहम कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

दरअसल, हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों और सरकारी विभागों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने और खर्च में कटौती करने की अपील की थी। इसी के बाद महाराष्ट्र सरकार ने भी कई बड़े फैसले लिए हैं। मुख्यमंत्री फडणवीस ने अपने मंत्रियों के काफिले में चलने वाली गाड़ियों की संख्या आधी करने का फैसला किया है। साथ ही मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के विदेशी दौरों पर भी रोक लगाने की घोषणा की गई है।

सरकार ने साफ कहा है कि अब किसी भी बाहरी दौरे में मंत्रियों के काफिले में तय सीमा से ज्यादा वाहन नहीं होंगे। इसकी निगरानी स्थानीय पुलिस अधिकारी करेंगे। इसके अलावा अलग-अलग विभागों को दिए गए सरकारी वाहनों की भी समीक्षा की जाएगी, ताकि अनावश्यक खर्च रोका जा सके।

ईंधन बचाने की इस मुहिम में अन्य मंत्री भी हिस्सा लेते दिखे। राज्य के मंत्री Nitesh Rane ने मंत्रिमंडल की बैठक में शामिल होने के लिए मंत्रालय तक पैदल जाना चुना। सरकार का कहना है कि यह सिर्फ प्रतीकात्मक कदम नहीं, बल्कि संसाधनों के जिम्मेदार इस्तेमाल की शुरुआत है।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव की वजह से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसका असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ सकता है। ऐसे में महाराष्ट्र सरकार का यह संदेश साफ है—बचत की शुरुआत ऊपर से होगी, ताकि आम लोगों को भी प्रेरणा मिल सके।

बंगाल के स्कूलों में अब गूंजेगा ‘वंदे मातरम’, सरकार ने जारी किया नया आदेश

West Bengal Chief Minister Suvendu Adhikari | Image Source: X/@BJP4Bengal
West Bengal Chief Minister Suvendu Adhikari | Image Source: X/@BJP4Bengal

नई दिल्ली: West Bengal सरकार ने स्कूलों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। राज्य के सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में अब सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान ‘वंदे मातरम’ गाना जरूरी होगा। स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि हर छात्र को इस राष्ट्रगीत के गायन में हिस्सा लेना होगा और स्कूल प्रमुखों को इसका सख्ती से पालन सुनिश्चित करना होगा।

जानकारी के मुताबिक, यह आदेश 13 मई को जारी किया गया। इसमें कहा गया कि स्कूल शुरू होने से पहले होने वाली मॉर्निंग असेंबली में ‘वंदे मातरम’ का सामूहिक गायन कराया जाए। अधिकारियों का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य छात्रों में देशभक्ति और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान की भावना मजबूत करना है।

राज्य सरकार के इस फैसले को लेकर राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। विधानसभा परिसर में मीडिया से बात करते हुए West Bengal के मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने कहा कि अगले सोमवार से राज्य के सभी स्कूलों में ‘वंदे मातरम’ को प्रार्थना गीत के रूप में शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस संबंध में सचिवालय को भी जानकारी दी जाएगी।

सरकार ने स्कूल प्रशासन से यह भी कहा है कि इस पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड रखा जाए। इसके लिए वीडियो रिकॉर्डिंग सहित सभी गतिविधियों का दस्तावेजीकरण करने के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि सरकार इस फैसले को सख्ती से लागू करना चाहती है।

हालांकि इस आदेश के बाद कुछ शिक्षकों और संगठनों ने सवाल भी उठाए हैं। उनका कहना है कि पहले से स्कूलों में राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और राज्य गीत ‘बांग्लार माटी बांग्लार जल’ गाया जाता है। ऐसे में अब ‘वंदे मातरम’ जोड़ने के बाद मॉर्निंग असेंबली के समय और गीतों के क्रम को लेकर स्पष्टता जरूरी है।

वहीं केंद्र सरकार भी राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को लेकर कानून में बदलाव की तैयारी कर रही है। इसी बीच पश्चिम बंगाल सरकार का यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है। अब देखने वाली बात होगी कि स्कूलों में यह व्यवस्था किस तरह लागू होती है और इसे लेकर आगे कैसी प्रतिक्रिया सामने आती है।

दो मैचों में जीरो पर आउट होने के बाद बेचैन थे विराट, शतक लगाकर किया जोरदार कमबैक

Virat Kohli | Image Source: PTI
Virat Kohli | Image Source: PTI

नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज Virat Kohli ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बड़े खिलाड़ी मुश्किल वक्त में ही अपनी असली पहचान दिखाते हैं। आईपीएल में लगातार दो मैचों में शून्य पर आउट होने के बाद कोहली दबाव में थे, लेकिन रायपुर में उन्होंने शानदार शतक लगाकर आलोचकों को जवाब दे दिया।

Royal Challengers Bengaluru और Kolkata Knight Riders के बीच खेले गए मुकाबले में कोहली ने 60 गेंदों में नाबाद 105 रन बनाए। उनकी इस शानदार पारी की बदौलत आरसीबी ने मुकाबला छह विकेट से जीत लिया और टीम अंक तालिका में टॉप पर पहुंच गई।

मैच के बाद कोहली ने माना कि लगातार दो मैचों में रन नहीं बना पाने से वह काफी परेशान थे। उन्होंने कहा कि जब खिलाड़ी टीम के लिए योगदान नहीं दे पाता, तो अंदर से बेचैनी बढ़ जाती है। कोहली ने कहा कि उनका हमेशा यही लक्ष्य रहता है कि वह टीम के लिए बेहतर प्रदर्शन करें और जीत में अहम भूमिका निभाएं।

कोहली ने यह भी स्वीकार किया कि दो बार लगातार जीरो पर आउट होने के बाद वह नर्वस महसूस कर रहे थे। हालांकि उन्होंने कहा कि असफलता भी खिलाड़ी को मजबूत बनाती है। उनके मुताबिक दबाव कई बार खेल को और बेहतर करने में मदद करता है और यही चीज उन्हें वापसी के लिए प्रेरित करती है।

इस मुकाबले में कोहली ने आईपीएल करियर का नौवां शतक लगाया। इसके साथ ही उन्होंने एक और बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। वह अब आईपीएल में सबसे ज्यादा मैच खेलने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। इस मामले में उन्होंने MS Dhoni और Rohit Sharma को पीछे छोड़ दिया।

हालांकि शतक लगाने के बाद भी कोहली का जश्न ज्यादा बड़ा नहीं दिखा। उन्होंने कहा कि टीम के लिए अंक ज्यादा महत्वपूर्ण हैं और सभी खिलाड़ी सिर्फ जीत के लिए खेलते हैं। कोहली के इस बयान ने यह भी दिखाया कि इतने सालों बाद भी उनके अंदर खेल को लेकर वही जुनून और जिम्मेदारी बनी हुई है।

पीएम मोदी की अपील का असर, गोवा सीएम प्रमोद सावंत ने आधा किया काफिला

CM Pramod Sawant | photo source : motoringworld.in
CM Pramod Sawant | photo source : motoringworld.in

14 मई 2026, नई दिल्ली/पणजी: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी  की ईंधन बचत और संसाधनों के विवेकपूर्ण इस्तेमाल की अपील के बाद प्रमोद सावंत  ने अपने काफिले में शामिल वाहनों की संख्या आधी कर दी है।

मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों के मुताबिक, पहले मुख्यमंत्री के काफिले में छह वाहन शामिल रहते थे, लेकिन अब उनकी आधिकारिक कार समेत केवल तीन वाहन ही रह गए हैं। यह फैसला ईंधन की खपत कम करने और सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।

सीएमओ के एक अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा मितव्ययिता अपनाने की अपील के बाद मुख्यमंत्री सावंत ने तुरंत अपने काफिले में वाहनों की संख्या घटाने का निर्देश दिया। दरअसल, पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में ईंधन बचाने और संसाधनों के जिम्मेदार इस्तेमाल पर जोर दिया था। इसके बाद उन्होंने खुद भी अपने काफिले में वाहनों की संख्या कम कर उदाहरण पेश किया।

प्रधानमंत्री की इस पहल के बाद कई भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और अन्य नेताओं ने भी इसी तरह के कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। माना जा रहा है कि इससे सरकारी खर्च में कमी आने के साथ-साथ ऊर्जा संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

चीनी निर्यात पर सरकार की रोक, महंगाई काबू करने की बड़ी तैयारी

चीनी निर्यात पर सरकार की रोक... | Image Source: (Image Source: Pixabay)
चीनी निर्यात पर सरकार की रोक... | Image Source: (Image Source: Pixabay)

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने चीनी के निर्यात को लेकर बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने तत्काल प्रभाव से 30 सितंबर 2026 तक चीनी के निर्यात पर रोक लगा दी है। माना जा रहा है कि यह फैसला देश में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करने के लिए लिया गया है।

विदेश व्यापार महानिदेशालय यानी DGFT की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि अब कच्ची चीनी, सफेद चीनी और रिफाइंड चीनी का निर्यात “प्रतिबंधित” श्रेणी से हटाकर “निषिद्ध” श्रेणी में डाल दिया गया है। यानी अब सामान्य परिस्थितियों में चीनी का निर्यात नहीं किया जा सकेगा।

हालांकि सरकार ने कुछ मामलों में छूट भी दी है। यूरोपीय संघ और अमेरिका को विशेष कोटा व्यवस्था के तहत भेजी जाने वाली चीनी इस फैसले से बाहर रहेगी। इसके अलावा सरकार-से-सरकार समझौते और पहले से प्रक्रिया में चल रही खेपों पर भी यह आदेश लागू नहीं होगा।

सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब दुनिया भर में पश्चिम एशिया के तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे हालात में खाद्य पदार्थों की कीमतों को नियंत्रित रखना सरकार के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यात रोकने से देश के अंदर चीनी की सप्लाई बढ़ेगी और कीमतों में तेजी आने से रोका जा सकेगा।

दरअसल, भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है। भारतीय चीनी एवं Bioenergy Manufacturers Association यानी ISMA के मुताबिक, 2025-26 सत्र में देश का चीनी उत्पादन बढ़ा है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में बेहतर उत्पादन के चलते अप्रैल तक चीनी उत्पादन में सात प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

सरकार ने पहले इस सत्र में चीनी निर्यात के लिए कोटा भी जारी किया था, लेकिन अब बदलते हालात को देखते हुए पूरी तरह रोक लगाने का फैसला लिया गया है। इससे पहले भी भारत अक्टूबर 2022 से समय-समय पर चीनी निर्यात पर नियंत्रण लगाता रहा है।

अब इस फैसले के बाद घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों पर क्या असर पड़ता है और चीनी उद्योग किस तरह प्रतिक्रिया देता है, इस पर सबकी नजर बनी रहेगी।

आपदा प्रबंधन में ‘विश्वसनीय भारतीय पहचान’ बनी NDRF : अमित शाह

'प्रेसिडेंट कलर'अवार्ड सेरेमनी: गाजियाबाद में 8वीं वाहिनी NDRF को उत्कृष्ट सेवा के लिए मिला राष्ट्रपति का विशेष सम्मान, गृहमंत्री अमित शाह ने बढ़ाया जवानों का उत्साह…Pic Credit : DD News
'प्रेसिडेंट कलर'अवार्ड सेरेमनी: गाजियाबाद में 8वीं वाहिनी NDRF को उत्कृष्ट सेवा के लिए मिला राष्ट्रपति का विशेष सम्मान, गृहमंत्री अमित शाह ने बढ़ाया जवानों का उत्साह…Pic Credit : DD News

तहलका डेस्क।

नई दिल्ली। भारत अब आपदाओं के बाद जागने के बजाय उनसे पहले ही सुरक्षा कवच तैयार करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया है कि सरकार का लक्ष्य अगले कुछ वर्षों में देश के भीतर ऊष्ण लहर (हीटवेव) के कारण होने वाली जनहानि को पूरी तरह समाप्त करना है। गाजियाबाद में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के एक विशेष कार्यक्रम के दौरान उन्होंने देश की बदलती आपदा प्रबंधन नीति का खाका पेश किया। सरकार का स्पष्ट मानना है कि हमारा दृष्टिकोण केवल संकट आने पर ‘प्रतिक्रिया’ देने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि हमें ‘सक्रिय’ और ‘पूर्व तैयारी’ वाली कार्यप्रणाली को अपनाना होगा।

यह महत्वपूर्ण अवसर NDRF की 8वीं बटालियन के लिए ऐतिहासिक रहा, जिसे उसकी दो दशकों की उत्कृष्ट सेवाओं के लिए ‘प्रेसिडेंट्स कलर’ से सम्मानित किया गया। 2006 में गठित यह बल आज प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदाओं के समय देश की सबसे भरोसेमंद ढाल बन चुका है। गृह मंत्री के अनुसार, यह सम्मान केवल एक इकाई का नहीं, बल्कि राज्य आपदा बलों, एनसीसी, एनएसएस और ‘आपदा मित्रों’ जैसे हजारों स्वयंसेवकों के सामूहिक समर्पण का प्रतीक है।

वर्तमान परिदृश्य में चक्रवात, भूकंप और बाढ़ जैसी विभीषिकाओं के दौरान ‘शून्य जनहानि और न्यूनतम संपत्ति नुकसान’ ही शासन का प्राथमिक लक्ष्य है। विशेष रूप से हीटवेव जैसी उभरती गंभीर चुनौती से निपटने के लिए गृह मंत्रालय ने एक सुव्यवस्थित ढांचा तैयार किया है। शाह ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से लू के कारण होने वाली मौतों को शून्य पर लाया जा सकेगा।

भारत ने वैश्विक स्तर पर भी आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ के रूप में अपनी धाक जमाई है। जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ते खतरों को देखते हुए NDRF को भविष्य की चुनौतियों के लिए निरंतर तैयार रहने का आह्वान किया गया है। वर्तमान में 18,000 से अधिक कर्मियों और 16 बटालियनों के साथ यह बल अब तक 12,000 से अधिक सफल अभियानों को अंजाम दे चुका है, जो इसकी सक्षमता का प्रमाण है।

UP में आंधी-तूफान का कहर: 56 लोगों की मौत, सीएम योगी ने 24 घंटे में राहत देने के दिए निर्देश

UP में आंधी-तूफान, बिजली से 56 मौतें | Photo source : tv9 भारतवर्ष
UP में आंधी-तूफान, बिजली से 56 मौतें | Photo source : tv9 भारतवर्ष

14 मई 2026,नई दिल्ली/लखनऊ : उत्तर प्रदेश में बुधवार को अचानक बदले मौसम ने भारी तबाही मचाई। तेज आंधी-तूफान, बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं में प्रदेश के विभिन्न जिलों में कम से कम 56 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। सबसे ज्यादा नुकसान प्रयागराज और भदोही जिलों में हुआ है।

प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार प्रयागराज में 17 लोगों की मौत हुई। इनमें हंडिया क्षेत्र में सात, फूलपुर में चार, सोरांव में तीन, मेजा में दो और सदर क्षेत्र में एक व्यक्ति की जान गई। वहीं भदोही में आंधी-तूफान के कारण हुई अलग-अलग दुर्घटनाओं में 16 लोगों की मौत हो गई। कई जगह पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए तथा मकानों को भी नुकसान पहुंचा।

फतेहपुर में तूफान जनित हादसों में नौ लोगों की मौत और 16 लोग घायल हुए हैं। प्रतापगढ़ में दीवार और शेड गिरने तथा बिजली गिरने की घटनाओं में चार लोगों की जान चली गई। कानपुर देहात, देवरिया और सोनभद्र में भी बिजली गिरने और पेड़ गिरने की घटनाओं में लोगों की मौत हुई है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेमौसम बारिश और आकाशीय बिजली से हुई जनहानि का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर पीड़ित परिवारों को राहत राशि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जिलाधिकारियों को मौके पर पहुंचकर राहत कार्य तेज करने और घायलों को समुचित उपचार उपलब्ध कराने का आदेश दिया है।

मुख्यमंत्री ने राजस्व और कृषि विभाग के अधिकारियों को फसलों और संपत्ति के नुकसान का सर्वे कराने तथा रिपोर्ट शासन को भेजने के निर्देश भी दिए हैं।

WB हिंसा के खिलाफ Mamta की हुंकार: खुद जिरह करने पहुंचीं High Court

न्याय की दहलीज पर ममता: चुनावी हिंसा के खिलाफ खुद संभाली कानूनी कमान… Photo: ANI/File
न्याय की दहलीज पर ममता: चुनावी हिंसा के खिलाफ खुद संभाली कानूनी कमान… Photo: ANI/File

तहलका डेस्क।

नई दिल्ली/ कोलकाता। कलकत्ता उच्च न्यायालय के गलियारों में गुरुवार को उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की कमान संभालने वाली ममता बनर्जी खुद वकील की भूमिका में नजर आईं।

राज्य में विधानसभा चुनाव के उपरांत भड़की कथित हिंसा और पार्टी कार्यालयों को निशाना बनाए जाने के गंभीर मामलों पर अपना पक्ष रखने के लिए वे व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हुईं। पारंपरिक वकील के लिबास में पहुंचीं बनर्जी के साथ पार्टी के वरिष्ठ चेहरे चंद्रिमा भट्टाचार्य और कल्याण बनर्जी भी मौजूद रहे।

यह पूरी कानूनी लड़ाई वकील शीर्षन्या बंद्योपाध्याय द्वारा दायर उस जनहित याचिका के इर्द-गिर्द सिमटी है, जिसमें 2026 के चुनावी नतीजों के बाद टीएमसी कार्यकर्ताओं और दफ्तरों पर हुए हमलों का मुद्दा उठाया गया है। याचिका में बेहद संगीन दावे किए गए हैं; इसमें कहा गया है कि तृणमूल से जुड़ाव होने के कारण कई कार्यकर्ताओं को न केवल शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी, बल्कि उन्हें अपना घर-बार छोड़कर पलायन करने के लिए भी विवश किया गया। 12 मई को दाखिल की गई इस अर्जी पर मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थसारथी सेन की खंडपीठ सुनवाई कर रही है।

तृणमूल कांग्रेस ने इस कदम को अपनी नेता की प्रतिबद्धता से जोड़ते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किया कि उनकी अध्यक्ष भाजपा की बंगाल इकाई द्वारा फैलाई गई कथित हिंसा के खिलाफ मोर्चा लेने खुद अदालत पहुंची हैं। पार्टी के आधिकारिक बयान में उनके इस रुख को साहस और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के प्रति अटूट निष्ठा का परिचायक बताया गया है। टीएमसी का तर्क है कि मुश्किल घड़ी में अपने लोगों का साथ न छोड़ने की उनकी प्रवृत्ति ही उन्हें देश के अन्य राजनेताओं से अलग खड़ा करती है। भाजपा के कथित अड़ियल रवैये और अन्याय के विरुद्ध ममता बनर्जी का यह ‘लीगल अवतार’ अब प्रदेश की राजनीति में एक नई चर्चा का केंद्र बन गया है।