अंशिका गौड़, नई दिल्ली: दो परंपराओं के अनूठे Fusion से बने ‘पद्मा डोरी’ (Padma Doree) नाम के नए टेक्सटाइल प्लेटफॉर्म की आधिकारिक शुरुआत नई दिल्ली के Travancore House में की गई। उम्मीद जताई जा रही है कि यह पहल मध्य प्रदेश और पूर्वोत्तर भारत के बीच एक सांस्कृतिक सेतु का कार्य करेगी। ‘डोनर (DoNER) मंत्रालय’ के तहत नॉर्थ ईस्टर्न हैंडीक्राफ्ट्स एंड हैंडलूम कॉर्पोरेशन (NEHHDC) की यह पहल भौगोलिक दूरियों को समेटते हुए पूर्वोत्तर के अनमोल ‘Eri Silk’ और Madhya Pradesh की विश्वप्रसिद्ध ‘Chanderi’ को एक ही ताने-बाने में पिरोने का साहसिक प्रयोग है।
सबसे खास बात यह है कि ‘Padma Doree’ केवल एक ब्रांड नहीं, बल्कि एक हाइब्रिड इकोसिस्टम है। यह प्लेटफॉर्म पारंपरिक बुनकरों की सदियों पुरानी तकनीक को आधुनिक फैशन की मांग के साथ संरेखित करता है। इस पहल की सबसे बड़ी शक्ति इसकी पारदर्शिता और शिल्प प्रक्रिया है, जिसे प्रदर्शनी में ‘फाइबर से फैब्रिक’ तक के सजीव चित्रण के जरिए पेश किया गया। जब डिजाइनर्स, नीति निर्माता और उद्योग विशेषज्ञ एक मंच पर आए, तो विमर्श का केंद्र केवल घरेलू बाजार नहीं, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारतीय कपड़ों को वैश्विक लग्जरी सेगमेंट में स्थापित करना रहा।
तीन दिवसीय प्रदर्शनी के आयोजन के पहले दिन NEHHDC के प्रबंध निदेशक मारा कोचा ने बताया कि आज के दौर में ग्राहकों की पसंद तेजी से बदल रही है, और ऐसे नवाचार पारंपरिक शिल्प को नई पहचान देने में अहम भूमिका निभाते हैं।

सिर्फ धागे नहीं, परंपराओं का गठबंधन है ‘Padma Doree’; बुनकरों के लिए वैश्विक बाजार का खुला द्वार…
कार्यक्रम के दौरान एक खास प्रदर्शनी और फैशन शो का आयोजन किया गया, जिसमें इस नए टेक्सटाइल को अलग-अलग रूपों में पेश किया गया। यहां डिजाइनर्स, पॉलिसी मेकर्स, इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स और कारीगरों ने हिस्सा लिया और इस पहल के जरिए भारतीय टेक्सटाइल को वैश्विक स्तर पर ले जाने पर चर्चा की।

मेक इन इंडिया को नई धार: NEHHDC की पहल से टेक्सटाइल जगत में उतरी ‘हाइब्रिड’ कारीगरी…
इस दौरान कारीगरों ने भी अपने अनुभव साझा किए और बताया कि कैसे यह पहल उनके काम को नई दिशा दे सकती है। प्रदर्शनी में लोगों को कपड़े बनने की पूरी प्रक्रिया, फाइबर से लेकर तैयार फैब्रिक तक करीब से देखने का मौका मिला।
कार्यक्रम में सांस्कृतिक गतिविधियां और फूड एक्सपीरियंस भी शामिल किए गए, जिससे अलग-अलग राज्यों की परंपराओं को एक साथ महसूस किया जा सके। आयोजकों का मानना है कि यह पहल न सिर्फ टेक्सटाइल सेक्टर को बढ़ावा देगी, बल्कि ‘Make in India’ को भी मजबूती देगी।

‘Padma Doree’ का आगाज़: एरी सिल्क और चंदेरी के मेल से बुना गया भारतीय वस्त्र शिल्प का नया भविष्य…
बहरहाल, इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब एरी की मजबूती और चंदेरी की चमक मिलती है, तो वह न केवल एक नया वस्त्र पैदा करती है, बल्कि सांस्कृतिक एकीकरण को भी बढ़ावा देती है। कार्यक्रम में शामिल फैशन शो और सांस्कृतिक गतिविधियों ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि बुनकरों का कौशल अब हाशिए पर नहीं, बल्कि मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था का हिस्सा है। अंततः, यह संगम भारत की विविध बुनाई परंपराओं को एक साझा मंच प्रदान कर आत्मनिर्भरता की दिशा में एक निर्णायक कदम है, जो आगामी वर्षों में टेक्सटाइल एक्सपोर्ट के समीकरणों को बदलने की क्षमता रखता है।




