
पुणे: कहते हैं कि मां का दिल कभी झूठ नहीं बोलता। शायद यही वजह थी कि जब पूरे सिस्टम ने केतन अग्रवाल की मौत को एक हादसा मान लिया, तब उसकी मां का दिल बार-बार कह रहा था कि कुछ तो गलत है। अगर उस मां ने अपने बेटे की मौत पर सवाल न उठाए होते, तो शायद यह मामला एक साधारण दुर्घटना मानकर हमेशा के लिए बंद हो जाता।
18 जून को पुणे के व्यवसायी केतन अग्रवाल की लोहागढ़ किले से गिरकर मौत हो गई थी। शुरुआती जांच में इसे ट्रेकिंग के दौरान हुआ हादसा माना गया। लेकिन केतन के परिवार, खासकर उसकी मां को यह बात स्वीकार नहीं हुई। परिवार का कहना था कि केतन एक अनुभवी ट्रेकर था और वह वर्षों से ट्रेकिंग कर रहा था। ऐसे में उसका यूं अचानक खाई में गिर जाना उन्हें असंभव लग रहा था।
परिवार की लगातार शंकाओं और सवालों के बाद पुलिस ने मामले की दोबारा गहन जांच शुरू की। इसी दौरान पुलिस ने लोहागढ़ किले के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में एक शख्स हुडी पहनकर केतन और उसकी मंगेतर सिया गोयल के पीछे चलता दिखाई दिया। जून की गर्मी में करीब 33 डिग्री तापमान के बीच किसी का हुडी पहनना पुलिस को संदिग्ध लगा। यही सुराग आगे चलकर पूरे मामले की कड़ी बन गया।
जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को तकनीकी साक्ष्यों, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल सबूतों से पता चला कि सिया गोयल और चेतन चौधरी के बीच लगातार संपर्क था। पुलिस का आरोप है कि दोनों ने मिलकर केतन की हत्या की साजिश रची थी। मामले में दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि केतन की मौत से पहले भी उसे नुकसान पहुंचाने की कोशिशें की गई थीं। हालांकि, अंतिम और घातक प्रयास 18 जून को हुआ, जब केतन की मौत हो गई। पुलिस अब इस पूरे मामले को पूर्व नियोजित हत्या मानकर जांच कर रही है।
आज जब यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है, तब एक बात सबसे ज्यादा लोगों को भावुक कर रही है—अगर एक मां ने अपने बेटे की मौत को सिर्फ किस्मत मानकर स्वीकार कर लिया होता, तो शायद सच कभी सामने नहीं आता। एक मां के शक, उसके विश्वास और न्याय की जिद ने ही इस कथित हत्या की परतें खोलने में सबसे अहम भूमिका निभाई।


