तहलका डेस्क।
जकार्ता। इंडोनेशिया के सुदूर उत्तर हलमाहेरा द्वीप पर स्थित माउंट डुकोनो ज्वालामुखी में हुए अचानक विस्फोट ने साहसिक पर्यटन की सुरक्षा व्यवस्था और नियमों की अवहेलना पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बृहस्पतिवार सुबह करीब 07:41 बजे जब यह 1,355 मीटर ऊंचा ज्वालामुखी धधक उठा, उस समय शिखर के निकट लगभग 20 पर्वतारोही मौजूद थे। प्रशासनिक प्रतिबंधों और सुरक्षा चेतावनियों के बावजूद की गई यह चढ़ाई उस वक्त त्रासदी में बदल गई जब राख और मलबे के गुबार ने पर्वतारोहियों को अपनी चपेट में ले लिया।
पुलिस प्रमुख एर्लिचसन पासारिबू के बयानों से स्पष्ट है कि यह हादसा केवल प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि स्पष्ट रूप से सुरक्षा मानकों के उल्लंघन का परिणाम था।
इस भीषण घटना में तीन लोगों की दर्दनाक मौत हुई है, जिनमें सिंगापुर के दो नागरिक और इंडोनेशिया का एक नागरिक शामिल है। शुक्रवार को राहत और बचाव कार्य के दौरान 14 लोगों को सुरक्षित निकाला गया, जिनमें 7 विदेशी नागरिक शामिल हैं। बचाए गए लोगों में से पांच गंभीर रूप से घायल हैं, जिनका उपचार किया जा रहा है।
ज्वालामुखी की सक्रियता को देखते हुए प्रशासन ने इस क्षेत्र में प्रवेश को कड़ा कर दिया था, लेकिन पर्वतारोहियों के समूह ने इन निर्देशों को दरकिनार किया।
वर्तमान स्थिति में बचाव दल अभी भी उन शेष पर्वतारोहियों की तलाश कर रहे हैं जो विस्फोट के बाद नीचे उतरने के प्रयास में कहीं भटक गए या फंस गए हैं। माउंट डुकोनो इंडोनेशिया के सबसे सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है, और विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे अस्थिर क्षेत्रों में जरा सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
यह घटना वैश्विक पर्वतारोहण समुदाय के लिए एक सख्त चेतावनी है कि प्रकृति के संकेतों और स्थानीय प्रशासन की गाइडलाइंस का पालन करना जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर तय करता है।




