Iran की War खत्म करने की 14 सूत्रीय शर्त, Trump को नहीं हो रहा विश्वास… 

खाड़ी के रणक्षेत्र में ईरान ने 30 दिनों के भीतर युद्ध खत्म करने का प्रस्ताव रख कर कूटनीतिक हलचल तेज कर दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर मंथन तो शुरू किया है, लेकिन वे ईरान की मंशा को लेकर गहरे संदेह में हैं…

होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की दोटूक: संप्रभुता से समझौता नहीं, ट्रंप की घेराबंदी होगी विफल… (Pic Credit : Public Times)
होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की दोटूक: संप्रभुता से समझौता नहीं, ट्रंप की घेराबंदी होगी विफल… (Pic Credit : Public Times)

तहलका डेस्क।

दुबई/नई दिल्ली। खाड़ी देशों में जारी तनाव के बीच ईरान ने एक आक्रामक कूटनीतिक कार्ड खेलते हुए अमेरिका के सामने 30 दिनों के भीतर युद्ध समाप्त करने का 14 सूत्रीय प्रस्ताव रखा है। यह प्रस्ताव केवल युद्धविराम को खींचने की कवायद नहीं, बल्कि संघर्ष को जड़ से खत्म करने का दावा करता है।

ईरान की एक न्यूज एजेंसी के मानें तो  तेहरान ने पाकिस्तान के जरिए भेजे इस प्रस्ताव में अमेरिका से अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने, प्रतिबंधों को खत्म करने और लेबनान में इजरायल के सैन्य अभियानों सहित सभी शत्रुतापूर्ण गतिविधियों पर पूर्ण विराम लगाने की मांग की है।

हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करने की बात तो कही है, लेकिन उनके स्वर में संदेह साफ झलकता है। ट्रंप की नौ सूत्री योजना और ईरान की शर्तों के बीच एक गहरी खाई नजर आ रही है। विशेषकर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव चरम पर है।

जहां ट्रंप इसे फिर से खोलने की नई योजना पेश कर रहे हैं, वहीं ईरानी संसद के उपाध्यक्ष अली निकजाद ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान अपनी संप्रभुता से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने दोटूक कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान का है और ट्रंप की नाकेबंदी की योजना विफल होना तय है।

इस भारी तनाव के बीच मानवीय चिंताएं भी वैश्विक पटल पर हैं। नॉर्वे की नोबेल समिति ने जेल में बंद नोबेल विजेता नरगिस मोहम्मदी की बिगड़ती सेहत पर गंभीर चेतावनी दी है। हाल ही में उन्हें जेल में दिल का दौरा पड़ने और बेहोश होने की खबरें आई हैं।

समिति ने तेहरान से उन्हें तत्काल उचित चिकित्सा उपचार देने की मांग की है। एक तरफ जहां खाड़ी में नई विश्व व्यवस्था के लिए कूटनीतिक रस्साकशी जारी है, वहीं ईरान के भीतर मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय दबाव के मोर्चे पर भी तेहरान की कड़ी परीक्षा हो रही है।