राघवेंद्र द्विवेदी

नई दिल्ली : आखिरकार धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफ़ा दे ही दिया। जंतर मंतर पर चल रहा धरना प्रदर्शन सरकार पर दबाव बनाने में कामयाब रहा। पिछले 12 साल में ये पहला मौक़ा है जब किसी आंदोलन और विरोध प्रदर्शन के दबाव में मोदी मंत्रिमंडल के किसी मंत्री ने इस्तीफ़ा दिया हो। हालांकि 2018 में “मी टू” मूवमेंट की ज़द में आने से पूर्व पत्रकार और तत्कालीन मंत्री एमजे अकबर ने इस्तीफ़ा दिया था। उन पर पत्रकार रहते हुए महिला से बदसलूकी के आरोप लगा था।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़ा को आंदोलनकारी अपनी बड़ी जीत मान रहे हैं। इस्तीफ़ा देने की ख़बर मिलते ही जंतर मंतर पर जश्न शुरू हो गया। बड़ी संख्या में लोग जंतर मंतर पर बैठे आंदोलनकारियों के साथ जीत का जश्न मनाने पहुंचे। हाथों में तिरंगा, ज़ुबान पर भारत माता की जय के नारे और चेहरों पर चमक किसी युद्ध जीतने जैसी ख़ुशी से कम नहीं थी। प्रधान ने पीएम नरेंद्र मोदी को इस्तीफ़ा भेजने के बाद आंदोलनकारी युवा साथियों के नाम भावुक पत्र अपने सोशल मीडिया हैंडल X पर पोस्ट किया। प्रधान ने लिखा कि “मैं पिछले 4 दशकों से ज़्यादा समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहा। मैं देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और न्यायोचित अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता हूँ”
उन्होंने आगे लिखा “जंतर मंतर पर और देश में जो स्थिति बनी हुई है। इस स्थिति का राष्ट्र विरोधी ताकतें लाभ न उठा लें, देश की एकता बनी रहे। इसी बात पर विचार करते हुए मैंने अपना त्यागपत्र माननीय प्रधानमंत्री जी को भेज दिया है” इस्तीफ़ा का ऐलान होते ही कॉकरोच जनता पार्टी के मुखिया अभिजीत दीपके ने अपने सभी साथियों और आंदोलनकारियों को जीत की बधाई दी। लोकतंत्र की जीत बताते हुए कहा कि वो कहते थे कि इस्तीफ़ा नहीं होता। झुकती है दुनिया झुकाने वाला चाहिए। उन्होंने सोनम वांगचुक के आमरण अनशन को भी देश को जगाने में मददगार बताया। दो दिन पहले आमरण अनशन तोड़ने वाले सोनम वांगचुक ने भी विक्ट्री का साइन दिखाते हुए अपनी तस्वीर पोस्ट की और कहा कि ये लोकतंत्र की जीत है।
मंत्री प्रधान के इस्तीफे को आंदोलनकारी अपने आंदोलन का असर बता रहे हैं लेकिन एक और थ्योरी चल रही है। सूत्र बता रहे हैं कि RSS प्रमुख मोहन भागवत के कहने से धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफ़ा दिया है। संघ प्रमुख भागवत ने शनिवार सुबह दिल्ली में एक कार्यक्रम में कहा था, ‘हम मनमानी करेंगे, शक्ति से सबके मालिक बनेंगे, ऐसा नहीं हो सकता।’
भागवत ने आगे ये भी कहा था- आज की नई पीढ़ी बहुत सारे सवाल पूछती है। हमें आदेश देने की बजाय उनसे बातचीत करनी चाहिए। उन्हें हर बात के पीछे का तर्क समझाना चाहिए, न कि आदेश देना चाहिए। संवाद के जरिए ही उन्हें सही दिशा दिखाई जा सकती है।
माना जा रहा है कि भागवत के इसी बयान ने सरकार पर असली दबाव बनाने का काम किया। केंद्र सरकार ने आंदोलनकारियों की बाक़ी शर्तों को भी मान लिया। पेपर लीक होने का बाद जिन छात्रों में आत्महत्या की थी उनके परिजनों को अधिकतम मुआवजा दिया जाएगा। सीजेपी ने प्रत्येक पीड़ित परिवार को 1 करोड़ रुपए देने की मांग की थी। इसके अलावा 20 जुलाई को हुई पुलिसिया कार्रवाई के बाद जिनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हुए थे वो सभी वापस लिए जाएंगे।
तीनों माँगें पूरी होने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने आंदोलन ख़त्म करने का ऐलान किया। इस फैसले से सरकार, दिल्ली पुलिस, सुरक्षा एजेंसियां, आम इंसान और आंदोलनकारी सभी को बड़ी राहत मिली है।
