Bhojshala पर हाईकोर्ट की मुहर: VHP बोली- यह फैसला सनातन विरासत और सांस्कृतिक न्याय की बड़ी जीत

Madhya Pradesh High Court के भोजशाला मामले में आए फैसले के बाद Vishwa Hindu Parishad ने इसे ऐतिहासिक निर्णय बताया है। परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष Alok Kumar ने कहा कि यह फैसला भारत की सांस्कृतिक विरासत, सनातन परंपरा और ऐतिहासिक सच्चाई की पुष्टि करता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अब भोजशाला केवल पूजा का स्थान ही नहीं, बल्कि संस्कृत और धर्मशास्त्रों के अध्ययन का बड़ा केंद्र भी बनेगी।

यह फैसला किसी जल्दबाजी में नहीं बल्कि पूरी न्यायिक प्रक्रिया और वैज्ञानिक जांच के बाद आया है... बोले - VHP के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष Alok Kumar
यह फैसला किसी जल्दबाजी में नहीं बल्कि पूरी न्यायिक प्रक्रिया और वैज्ञानिक जांच के बाद आया है... बोले - VHP के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष Alok Kumar

नई दिल्ली: विश्व हिन्दू परिषद की ओर से जारी बयान में कहा गया कि हाईकोर्ट ने अपने फैसले में माना है कि धार स्थित भोजशाला का मूल स्वरूप हिन्दू मंदिर का रहा है और यहां लगातार पूजा की परंपरा बनी रही। अदालत ने हिंदुओं को पूरे परिसर में पूजा का अधिकार देने की बात कही है। वहीं मुस्लिम पक्ष के लिए अलग स्थान की मांग सरकार से करने का रास्ता खुला रखा गया है।

आलोक कुमार ने कहा कि यह फैसला किसी जल्दबाजी में नहीं बल्कि पूरी न्यायिक प्रक्रिया और वैज्ञानिक जांच के बाद आया है। उन्होंने बताया कि अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई की रिपोर्ट, ऐतिहासिक दस्तावेजों और पुरातात्विक साक्ष्यों का अध्ययन किया। दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया गया और न्यायाधीशों ने खुद मौके पर जाकर निरीक्षण भी किया। उनके मुताबिक इसी आधार पर अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि भोजशाला प्राचीन समय में देवी वाग्देवी मां सरस्वती का मंदिर और संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र था।

वीएचपी ने यह भी कहा कि भोजशाला केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह भारत की ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा हुआ मुद्दा है। संगठन ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार, राज्य सरकार और एएसआई मिलकर इस स्थल के संरक्षण और संस्कृत अध्ययन की पुरानी परंपरा को फिर से जीवित करने की दिशा में काम करेंगे।

बयान में लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मां सरस्वती की प्रतिमा को भारत वापस लाने की मांग का भी समर्थन किया गया। आलोक कुमार ने कहा कि यह प्रतिमा भारत की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक है और इसे भोजशाला में दोबारा स्थापित किया जाना चाहिए।

अंत में वीएचपी ने सभी पक्षों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की। संगठन का कहना है कि यह फैसला किसी की हार या जीत नहीं, बल्कि ऐतिहासिक सत्य और सांस्कृतिक न्याय की पुनर्स्थापना के रूप में देखा जाना चाहिए।