बुद्धम शरणम गच्छामि…: Leh की वादियों में गूंजी तथागत की शिक्षा, Amit Shah ने टेका मत्था

लेह में आध्यात्मिक महाकुंभ: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लेह के जीवेत्सल में तथागत बुद्ध के पवित्र अवशेषों को दर्शनार्थ रखने के समारोह और 2569वें बुद्ध पूर्णिमा उत्सव का भव्य उद्घाटन किया। उत्तर प्रदेश के पिपरहवा से लाए गए ये अवशेष केवल धार्मिक प्रतीक मात्र नहीं हैं, बल्कि लद्दाख की सांस्कृतिक विरासत और बौद्ध धर्म के वैश्विक केंद्र के रूप में इसकी पहचान को गहरा करने वाला एक ऐतिहासिक क्षण है...शाह ने फोटांग-चोगलमसर क्षेत्र में पारंपरिक अनुष्ठानों, 'मंडल' और 'सुंबा' अर्पण के माध्यम से बुद्ध की शिक्षाओं, वाणी और मन के प्रतीकों को नमन किया।

लद्दाख का नया अध्याय: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दी कई सौगात, सांस्कृतिक विरासत को सम्मान और डेयरी संयंत्र से आत्मनिर्भरता का संकल्प...Pic Credit : Amit Shah FaceBook Page
लद्दाख का नया अध्याय: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दी कई सौगात, सांस्कृतिक विरासत को सम्मान और डेयरी संयंत्र से आत्मनिर्भरता का संकल्प...Pic Credit : Amit Shah FaceBook Page

तहलका ब्यूरो।

नई दिल्ली। लद्दाख की पावन धरा शुक्रवार को उस समय आध्यात्मिक और रणनीतिक ऊर्जा से भर गई, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लेह के जीवेत्सल में तथागत बुद्ध के पवित्र अवशेषों को दर्शनार्थ रखने के समारोह और 2569वें बुद्ध पूर्णिमा उत्सव का भव्य उद्घाटन किया। उत्तर प्रदेश के पिपरहवा से लाए गए ये अवशेष केवल धार्मिक प्रतीक मात्र नहीं हैं, बल्कि लद्दाख की सांस्कृतिक विरासत और बौद्ध धर्म के वैश्विक केंद्र के रूप में इसकी पहचान को गहरा करने वाला एक ऐतिहासिक क्षण है। शाह ने फोटांग-चोगलमसर क्षेत्र में पारंपरिक अनुष्ठानों, ‘मंडल’ और ‘सुंबा’ अर्पण के माध्यम से बुद्ध की शिक्षाओं, वाणी और मन के प्रतीकों को नमन किया। 

लेह की सड़कों पर बिखरी उत्सव की रंगत और वायुसेना के विशेष विमान से दिल्ली से लाए गए इन अवशेषों की सुरक्षा, लद्दाख के प्रति केंद्र सरकार की गंभीर प्रतिबद्धता को दर्शाती है। 10 मई तक लेह और उसके बाद जांस्कर एवं अन्य केंद्रों में श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रखे जाने वाले ये अवशेष हिमालयी क्षेत्र में पर्यटन और शांति के नए द्वार खोलेंगे। गृह मंत्री की यह यात्रा केवल आस्था तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने केंद्रीय बौद्ध अध्ययन संस्थान से कारगिल में प्रतिदिन 10,000 लीटर क्षमता वाले डेयरी संयंत्र की आधारशिला रखकर लद्दाख के आर्थिक ढांचे में ‘श्वेत क्रांति’ का सूत्रपात भी कर दिया।

दुग्ध उत्पादन में आत्मनिर्भरता और स्थानीय डेयरी विकास की ये पहलें दर्शाती हैं कि केंद्र सरकार लद्दाख के दुर्गम क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कृतसंकल्प है। एक ओर जहाँ बुद्ध के अवशेषों के समक्ष जलता दीप आध्यात्मिक प्रकाश फैला रहा है, वहीं दूसरी ओर डेयरी संयंत्र जैसी परियोजनाएं लद्दाख के युवाओं और किसानों के जीवन में समृद्धि का नया संचार करेंगी। आस्था और आधुनिक विकास के इस बेजोड़ संगम ने लद्दाख के दो दिवसीय दौरे को न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान बना दिया है, बल्कि यह इस केंद्रशासित प्रदेश की प्रगतिशील आत्मनिर्भरता का एक नया घोषणापत्र भी बनकर उभरा है।