रिपोर्टों के मुताबिक, तेहरान के ट्रैफिक कैमरे और मोबाइल नेटवर्क लंबे समय से हैक किए गए थे। इन कैमरों से मिलने वाली लाइव फुटेज को एन्क्रिप्ट कर बाहर भेजा जा रहा था, जिससे खामेनेई और उनकी सुरक्षा टीम की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी। खासतौर पर Pasteur Street इलाके पर ज्यादा फोकस था, जहां सरकारी इमारतें और उच्च अधिकारियों की आवाजाही रहती है।
बताया जा रहा है कि इस निगरानी से यह समझा गया कि खामेनेई कब निकलते हैं, कौन-सी गाड़ी इस्तेमाल होती है, सुरक्षा गार्ड किस समय ड्यूटी पर रहते हैं और उनका रोज़ का रूट क्या होता है। इस पूरी जानकारी को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और खास एल्गोरिदम से जोड़कर एक पूरा सुरक्षा पैटर्न तैयार किया गया, जिसे खुफिया भाषा में “पैटर्न ऑफ लाइफ” कहा जाता है।
इतना ही नहीं, रिपोर्टों में यह भी दावा है कि जिस समय हमला किया गया, उस इलाके के कई मोबाइल टावर अस्थायी रूप से बाधित कर दिए गए थे। इससे सुरक्षा एजेंसियों को समय पर चेतावनी नहीं मिल पाई। एक मानव स्रोत ने अंतिम समय पर बैठक के स्थान और समय की पुष्टि की, जिससे हमले को हरी झंडी मिली।
कहा जा रहा है कि यह ऑपरेशन वर्षों की तैयारी का नतीजा था, लेकिन हमला केवल 60 सेकंड के भीतर पूरा कर लिया गया। कई प्रिसिजन हथियारों का इस्तेमाल कर बेहद सीमित समय में लक्ष्य को निशाना बनाया गया।




