हरियाणा के बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों ने बिजली वितरण के प्रस्तावित निजीकरण तथा हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) द्वारा गुरुग्राम और नूंह जिलों में इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को 25 साल का समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने के फैसले के विरोध में 22 से 24 अक्टूबर तक राज्यव्यापी हड़ताल की घोषणा की है।
आयोग के इस फैसले के बाद राज्यभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। बिजली कर्मचारी लाइसेंस तत्काल रद्द करने की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि इस फैसले से सरकारी बिजली वितरण कंपनियों की स्थिति कमजोर होगी, कर्मचारियों के हित प्रभावित होंगे और उपभोक्ताओं को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने सोमवार शाम करनाल में हुई आपात बैठक के बाद आंदोलन की घोषणा की। मोर्चा का कहना है कि 10 अगस्त को बिजली मंत्री के साथ हुई बैठक में आश्वासन दिए जाने के बावजूद उसकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसके अलावा, पहले दिए गए हड़ताल के नोटिस को भी नज़रअंदाज़ किया गया है।
मंगलवार को बिजली कर्मचारियों ने प्रदेश के विभिन्न जिला मुख्यालयों और बिजली सर्कल कार्यालयों पर प्रदर्शन किए। इस दौरान केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और एचईआरसी के चेयरमैन मुकेश गर्ग के पुतले फूंके गए। ऑल हरियाणा पावर कॉरपोरेशन वर्कर्स यूनियन ने भी विरोध प्रदर्शनों में भाग लिया।
संयुक्त संघर्ष मोर्चा के प्रवक्ता बलजीत बेनीवाल ने एचईआरसी के आदेश को “काला आदेश” करार देते हुए कहा कि यह हरियाणा के बिजली क्षेत्र के अप्रत्यक्ष निजीकरण की दिशा में उठाया गया कदम है। उन्होंने आरोप लगाया कि गुरुग्राम और नूंह जैसे अधिक राजस्व वाले औद्योगिक एवं व्यावसायिक क्षेत्रों को निजी कंपनी के हवाले करने से राज्य की सरकारी बिजली वितरण कंपनी दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) कमजोर होगी।
आंदोलन के अगले चरण के तहत कर्मचारी 21 अक्टूबर को प्रदेश के 300 से अधिक बिजली उपमंडलों में एचईआरसी के आदेश और प्रस्तावित लाइसेंस की प्रतियां जलाएंगे। मोर्चा ने कहा कि हड़ताल के अंतिम दिन, 24 अक्टूबर को आंदोलन के अगले चरण की घोषणा की जाएगी।
कर्मचारी संगठन ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने पहले दिए गए आश्वासनों के बावजूद बिजली वितरण क्षेत्र को निजी कंपनियों के हवाले करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। मोर्चा ने चेतावनी दी कि यदि हड़ताल शुरू होने से पहले लाइसेंस रद्द करने और अन्य मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया गया, तो भविष्य में उत्पन्न होने वाली औद्योगिक अशांति के लिए सरकार जिम्मेदार होगी।
मोर्चा ने कहा कि उसके पहले के हड़ताल नोटिस में स्पष्ट किया गया था कि यदि निजीकरण की नीतियों को लागू किया गया, तो उस नोटिस को अनिश्चितकालीन हड़ताल की अग्रिम सूचना माना जाएगा और इसके लिए अलग से कोई नोटिस देने की आवश्यकता नहीं होगी। संगठन का कहना है कि एचईआरसी के ताजा फैसले के बाद कर्मचारियों और इंजीनियरों के पास हड़ताल तेज करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
इलेवन पावर, जिसके अध्यक्ष सुनील सचदेवा हैं, हरियाणा में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस प्राप्त करने वाली पहली निजी कंपनी है। बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 14 के तहत कंपनी अगले पांच वर्षों में 4,716 करोड़ रुपये का निवेश कर समानांतर वितरण नेटवर्क स्थापित करने की योजना बना रही है। इससे गुरुग्राम और नूंह के 8.3 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को निजी कंपनी और डीएचबीवीएन में से किसी एक से बिजली आपूर्ति का विकल्प मिल सकता है।
एचईआरसी ने लंबित बिजली कनेक्शन आवेदनों का हवाला देते हुए 25 वर्षों के लिए इस लाइसेंस को मंजूरी दी। आयोग ने बिजली वितरण कंपनियों की ओर से निवेश संबंधी चिंताओं और निजी कंपनियों द्वारा अधिक लाभ देने वाले उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने की आशंकाओं को खारिज कर दिया।
इस फैसले की कर्मचारी संगठनों और अन्य हितधारकों ने आलोचना की है। उनका कहना है कि व्यावसायिक रूप से लाभदायक क्षेत्रों में निजी बिजली वितरण शुरू होने से सरकारी कंपनियां कमजोर हो सकती हैं और उपभोक्ताओं के हित प्रभावित हो सकते हैं। संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने राज्यव्यापी हड़ताल शुरू होने से पहले लाइसेंस रद्द करने और अपनी मांगों पर ठोस निर्णय लेने की मांग की है।




