नशा विरोधी कार्यकर्ता की हत्या के बाद पंजाब के मानसा में तनाव; आरोपी की दुकान को किया आग के हवाले

परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार करने से किया इनकार

पंजाब के मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या किए जाने के एक दिन बाद बुधवार को तनाव बढ़ गया। गुस्साई भीड़, जिसमें कुछ निहंग भी शामिल थे, ने शहर के मुख्य रेलवे क्रॉसिंग के पास स्थित आरोपी की मेडिकल स्टोर को तोड़फोड़ कर ध्वस्त कर दिया और बाद में उसमें आग लगा दी। इस बीच, जिला प्रशासन ने वीर नगर स्थित आरोपी अश्वनी कुमार के मकान का अगला हिस्सा भी गिरा दिया।

बुधवार को इलाके में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक एक्सकेवेटर की मदद से अश्वनी कुमार के मकान का अगला हिस्सा ढहा दिया गया। इसी दौरान मेडिकल स्टोर के बाहर जमा भीड़ ने लाठियों और पत्थरों से दुकान पर हमला कर दिया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद भीड़ ने आरोपी के खिलाफ नारेबाजी की और दुकान को ईंट-दर-ईंट तोड़ दिया। इसके बाद दुकान में आग लगा दी गई। मौके पर मौजूद कई लोग अपने मोबाइल फोन से पूरी घटना का वीडियो बनाते रहे।

इलाके में तनाव बना रहा और पुलिसकर्मी कानून-व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश करते रहे। कुछ निहंगों और पुलिस के बीच मामूली झड़प होने की भी खबर है। सूत्रों के मुताबिक, प्रशासन की कार्रवाई से पहले पास की एक दुकान को कथित तौर पर खाली करा लिया गया था।

मानसा के एसएसपी वैभव चौधरी ने कहा कि कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने से रोकने के लिए पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। उन्होंने बताया कि आरोपी के मकान के खिलाफ सिविल प्रशासन की ओर से कार्रवाई की जा रही है। इस संबंध में पहले अवैध निर्माण की शिकायत मिली थी।

मकान और मेडिकल स्टोर पर हुई कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब झोटा की हत्या को लेकर लोगों में भारी आक्रोश है। घटना के विरोध में प्रदर्शन जारी हैं और शहर में लगातार दूसरे दिन बंद का माहौल बना हुआ है।

आरोपी राजस्थान से गिरफ्तार

पुलिस के मुताबिक, अश्वनी कुमार को मंगलवार देर रात राजस्थान से गिरफ्तार किया गया। गोलीबारी के बाद पुलिस उसकी तलाश में जुटी थी। बताया जा रहा है कि उसे सालासर से हिरासत में लिया गया।

पुलिस ने मंगलवार को कुमार के एक सहयोगी को भी गिरफ्तार किया था। आरोप है कि उसने वारदात के बाद मुख्य आरोपी को फरार होने में मदद की थी।

गोलीबारी मंगलवार को मानसा के एक व्यस्त बाजार में स्थित कुमार की मेडिकल स्टोर पर हुई थी। झोटा नशे के खिलाफ अभियान चलाने और मेडिकल स्टोरों के माध्यम से नशीले पदार्थों की कथित बिक्री को उजागर करने के लिए जाने जाते थे।

बताया जाता है कि झोटा ने एक बुजुर्ग व्यक्ति को कथित तौर पर नशीली दवाइयां बेचे जाने को लेकर दुकानदार से सवाल-जवाब किए थे। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच विवाद हो गया।

आरोप है कि कुमार ने झोटा और उनके साथियों पर गोली चला दी। इस घटना में झोटा की मौत हो गई, जबकि चार अन्य लोग घायल हो गए। गोलीबारी के दौरान झोटा फेसबुक पर लाइव प्रसारण कर रहे थे। इस प्रसारण में कार्यकर्ता और मेडिकल स्टोर संचालक के बीच हुई कथित बहस के दृश्य सामने आए हैं।

परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार करने से किया इनकार

झोटा की हत्या के बाद उनके समर्थकों और नशा विरोधी कार्यकर्ताओं में भारी रोष है। वे आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं, झोटा के परिजनों ने विरोधस्वरूप उनके शव का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया है।

शव अभी भी मानसा के सिविल अस्पताल में रखा हुआ है और परिजनों के विरोध के बीच पोस्टमार्टम की प्रक्रिया लंबित है।

इस हत्याकांड ने राजनीतिक विवाद भी खड़ा कर दिया है। विपक्षी नेताओं ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने में विफल रहने का आरोप लगाया है। उन्होंने राज्य में बिगड़ती सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा भी गंभीर चिंता का विषय बन गई है।

झोटा नशे के खिलाफ अभियान चलाने और मेडिकल स्टोरों के माध्यम से नशीले पदार्थों की कथित बिक्री का विरोध करने वाले एक प्रमुख कार्यकर्ता के रूप में पहचाने जाते थे। उनकी हत्या ने जमीनी स्तर पर नशे के कारोबार के खिलाफ संघर्ष कर रहे कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

लगातार जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच पुलिस और जिला प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इलाके में दोबारा हिंसा भड़कने से रोकना और सामान्य स्थिति बहाल करना है।