तहलका ब्यूरो।
नई दिल्ली/हैदराबाद। तमिलनाडु की सियासत इस वक्त अनिश्चितता के भंवर में फंसी हुई है। राज्य में सत्ता के समीकरण सुलझने के बजाय और उलझते नजर आ रहे हैं, जिसका सीधा असर अब पड़ोसी राज्य तेलंगाना में दिखाई दे रहा है। ताजा घटनाक्रम में, कांग्रेस के पांच विधायकों ने शनिवार को हैदराबाद में डेरा डाल दिया है।
पार्टी के गलियारों में चर्चा है कि यह कवायद किसी भी संभावित ‘जोड़-तोड़’ या खरीद-फरोख्त की कोशिशों को विफल करने के लिए की गई है। विधायकों की इस सुरक्षित घेराबंदी का नेतृत्व मेलूर से विधायक पी. विश्वनाथन कर रहे हैं, जो पूर्व में तेलंगाना कांग्रेस के प्रभारी के रूप में अपनी सांगठनिक क्षमता का लोहा मनवा चुके हैं।
इस राजनीतिक हलचल के केंद्र में अभिनेता विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कषगम’ (TVK) है। हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में टीवीके 108 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है, हालांकि वह बहुमत के जादुई आंकड़े (118) से महज 10 कदम दूर रह गई। सत्ता की इस चाबी को हासिल करने के लिए विजय ने द्रमुक (DMK) के पुराने सहयोगियों—कांग्रेस, भाकपा, माकपा और वीसीके का दरवाजा खटखटाया है।
कांग्रेस पहले ही टीवीके को समर्थन देने का ऐलान कर चुकी है। सूत्रों की मानें तो यदि गठबंधन की सरकार अस्तित्व में आती है, तो पी. विश्वनाथन का कैबिनेट मंत्री बनना लगभग तय है। फिलहाल, सभी की नजरें राजभवन और विपक्षी खेमे की अगली चाल पर टिकी हैं।
विधायकों को हैदराबाद स्थानांतरित करना यह साफ दर्शाता है कि कांग्रेस किसी भी कीमत पर अपने कुनबे को एकजुट रखकर राज्य में एक नई वैकल्पिक सरकार का हिस्सा बनने की तैयारी में है। तमिलनाडु का यह सत्ता संघर्ष अब एक ऐसे मोड़ पर है, जहां हर एक विधायक की निष्ठा सरकार बनने या बिगड़ने की पटकथा लिख रही है।




