का प्रधानमंत्री इंदिरा मर गइली?

indira2014 लोकसभा चुनाव के दौरान पत्रकारों की एक टीम बनारस जिले के एक गांव में पहुंची. ये टीम बनारस संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आनेवाले गांवों में घूमकर चुनावी सर्वेक्षण का काम कर रही थी. उस टीम के पास प्रश्नों की एक पूरी सूची थी जिसके आधार पर वो गांव-गांव घूमकर लोगों से सवाल पूछते और फिर उनके जवाब नोट करते जाते.

उस गांव में पहुंचने के बाद टीम के लोगों ने बाकी जगहों की तरह ही गांववालों से सवाल पूछने का काम शुरू किया. इसी प्रक्रिया में टीम गांव की 80 साल की एक बुजुर्ग महिला से मिली. महिला से उन्होंने पहला सवाल पूछा- ‘क्या वो नरेंद्र मोदी को वोट देंगी?’ सवाल सुनकर 80 वर्षीय महिला चौंक गईं? उसने पलटकर सवाल दागा- ‘क्या मोदी?’ पत्रकार ने फिर अपना सवाल दुहराया- ‘हां मोदी. वो प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हैं. बनारस से लड़ रहे हैं. क्या आप मोदी को वोट देंगी?’ महिला इस बार पहले से ज्यादा चौंकते हुए बोली, ‘का कहत बाड़ बचवा. का प्रधानमंत्री इंदिरा मर गइली?’ महिला के इस सवाल के बाद पत्रकारों का सिर घूम गया. सिर घूमकर जब दोबारा अपनी जगह वापस आया तब उन्हें माजरा समझ आया. 80 वर्षीय उस बुजुर्ग महिला के लिए भारतीय राजनीति इंदिरा गांधी के टाइम मशीन में ही अटकी हुई थी. तब तक वह इसी भरोसे में थी कि देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ही हैं. यह घटना इंदिरा गांधी के राजनीतिक कद को स्थापित करने के साथ इस बात को भी रेखांकित करती है कि कैसे इंदिरा गांधी के बाद देश के राजनीतिक व्यक्तित्व के क्षेत्र में एक शून्य पैदा हुआ है. इससे यह भी पता चलता है कि कैसे सरकारें इतने सालों तक आम आदमी के जीवन से बिल्कुल दूर रही हैं. इस कहानी का एक राजनीतिक संदेश यह भी है कि इंदिरा गांधी के बाद कोई भी प्रधानमंत्री ऐसा नहीं हुआ जो लोगों के जेहन में अपनी जगह बना सके.

ये कहानी बस उस महिला की नहीं है. एनडीटीवी इंडिया के कार्यक्रम ‘जायका इंडिया का’ के सिलसिले में विनोद दुआ असम गए हुए थे. वहां ब्रह्मपुत्र नदी के कछार में बसे कुछ गांवों में जाकर उन्होंने लोगों से बात की. दुआ ने वहां लोगों से देश के प्रधानमंत्री का नाम पूछा? कई लोगों ने ना में अपना सिर हिलाया. यानी लोगों को नहीं पता था कि जिस देश के वो नागरिक हैं उसका प्रधानमंत्री कौन है. लोगों ने दुआ को बताया कि उन तक सरकार की कोई योजना आज तक नहीं पहुंची है. ये घटना भी बताती है कि सरकार एक समाज या क्षेत्र के बीच से कैसे गायब है. लोगों तक न सरकार पहुंची है न उसकी योजनाएं. कहीं समय इंदिरा गांधी पर अटका हुआ है तो कहीं वो शुरु ही नहीं हुआ है.