
संसद सत्र के बाद दो समानांतर राजनीतिक लड़ाइयों की तैयारी
संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को खत्म हो रहा है, ऐसे में कांग्रेस दो समानांतर राजनीतिक लड़ाइयों की तैयारी कर रही है: 2027 में होने वाले सात राज्यों के विधानसभा चुनाव और भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा परिसीमन बिल पास करने की संभावित नई कोशिश।
परिसीमन और महिला आरक्षण कानून फिर लाने की संभावना
सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े कानून को फिर से लाने की संभावना पर विचार कर रही है। हालांकि, विशेष सत्र के बारे में कोई पक्की घोषणा नहीं हुई है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने पहले ही अगस्त में अलग सत्र की संभावना को खारिज कर दिया था, जबकि ऐसी खबरें थीं कि सरकार विपक्षी दलों के साथ बातचीत कर रही है।
महिला आरक्षण का समर्थन, जनसंख्या-आधारित परिसीमन पर आपत्ति
उम्मीद है कि कांग्रेस मौजूदा रूप में परिसीमन बिल का विरोध करेगी, लेकिन पार्टी को अपना रुख बहुत सोच-समझकर तय करना होगा। वह महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के संवैधानिक वादे का विरोध करने वाली नहीं दिखना चाहेगी। उसका संभावित तर्क यह होगा कि महिला आरक्षण को लागू किया जाना चाहिए, लेकिन इसके लिए जनसंख्या-आधारित परिसीमन की ऐसी प्रक्रिया नहीं अपनाई जानी चाहिए जिससे दक्षिणी राज्यों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम हो जाए। संभावना है कि पार्टी किसी भी बिल को पेश करने से पहले सर्वदलीय बैठक की मांग करेगी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पहले ही व्यापक बातचीत की मांग कर चुके हैं और कह चुके हैं कि विपक्षी दलों को इस मुद्दे पर सामूहिक रुख अपनाना चाहिए।
डीएमके समेत विपक्षी दलों को साथ लाने की कोशिश
कांग्रेस अब डीएमके, तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, वामपंथी दलों और अन्य क्षेत्रीय ताकतों को शामिल करते हुए एक व्यापक विपक्षी गठबंधन बनाने की कोशिश करेगी। डीएमके विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगी क्योंकि दक्षिणी राज्यों को डर है कि मुख्य रूप से जनसंख्या पर आधारित फॉर्मूले से उत्तरी राज्यों का प्रतिनिधित्व बढ़ सकता है और संसद में उनका प्रभाव कम हो सकता है।
संघवाद और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व का सवाल
कांग्रेस के लिए यह मुद्दा न केवल संवैधानिक है बल्कि चुनावी भी है। पार्टी परिसीमन को संघवाद, लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और सफल जनसंख्या नियंत्रण के परिणामों के सवाल के तौर पर पेश कर सकती है। वह तर्क देगी कि स्वास्थ्य, शिक्षा और जनसंख्या स्थिरीकरण में बेहतर प्रदर्शन के लिए राज्यों को राजनीतिक रूप से दंडित नहीं किया जाना चाहिए।
सात राज्यों के विधानसभा चुनावों की चुनौती
साथ ही, पार्टी को उत्तर प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनावों की भी तैयारी करनी होगी।
कांग्रेस के सामने राजनीतिक चुनौती
पार्टी के लिए खतरा यह है कि अगर सिर्फ नकारात्मक प्रचार किया गया, तो बीजेपी कांग्रेस को सुधार-विरोधी और महिला-विरोधी के तौर पर पेश कर सकती है। पार्टी के लिए सबसे बेहतर रुख यह होगा कि वह महिला आरक्षण का समर्थन करे, राज्यों के प्रतिनिधित्व के लिए सुरक्षा की मांग करे और इस बात पर जोर दे कि परिसीमन की कोई भी प्रक्रिया पारदर्शी, बातचीत पर आधारित और संवैधानिक रूप से सही सिद्धांतों पर हो।


