विपक्ष में रहते हुए भाजपा ने भी सार्वजनिक मंचों पर बहस की चुनौती दी थी पीएम को

भारत में संसद ही बहस का एक मात्र प्लेटफॉर्म

सुजीत ठाकुर, नई दिल्ली
एसआईआर को लेकर लोकसभा में नेता  प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पीएम और गृह मंत्री को सार्वजनिक मंचों से खुली बहस की चुनौती दी है। गृह मंत्री ने बहस की चुनौती स्वीकार तो की है लेकिन सार्वजनिक मंच की जगह संसदीय मंच पर आकर बहस करने की बात की है। इसके लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने के लिए भी गृह मंत्री ने हामी भरी है।

यह पहला मौका नहीं है  जब विपक्ष की तरफ से इस तरह की चुनौती दी गई है।

2013 में पीएम मोदी (तत्कालीन मुख्यमंत्री गुजरात) ने उस समय के पीएम मनमोहन सिंह को विकास के मुद्दे पर खुली बहस की चुनौती दी थी। भाजपा के वरिष्ठ नेता और तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष लाल कृष्ण आडवाणी ने भी उस समय पीएम मनमोहन सिंह की 2जी घोटाला सहति भ्रष्टाराच के अन्य मुद्दों पर खुली बहस की चुनौती दी थी। राज्य सभा में भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे वेंकैया नायडु ने भी इसी तरह की बहस की चुनौती दी थी।

यह बात अलग है कि उस समय के केंद्र सरकार ने इसे राजनीतिक नौटंकी बताते हुए मांग खारिज कर दी थी। सरकार की तरफ से दो टूक कहा गया था कि बहस के लिए संसद ही एक मात्र प्लेटफॉर्म है। लाल कृष्ण आडवाणी ने 2009 के लोकसभा चुनाव से पहले यह सुझाव रखा था कि पीएम पद के दोनों प्रत्याशी सार्वजनिक मंचों से बहस करें। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में यह परिपाटी अपनाई जाती है। हालांकि, भारतीय लोकतंत्र में इस तरह की सार्वजनिक बहस की परिपाटी नहीं है। चूंकि भारत में दो दलीय नहीं बल्कि बहुदलीय व्यवस्था है इसलिए यहां व्यवहारिक रूप से यह संभव नहीं है।

ऐसा नहीं है कि भारत में राजनीतिक दल यह नहीं जानते हैं कि इस तरह का सार्वजनिक बहस नहीं हो सकता है। इसका एक मात्र प्लटेफॉर्म संसद है। बावजूद इसके विपक्ष ही नहीं सरकार और सत्तारूढ़ पार्टी की तरफ से भी इस तरह के बहस की चुनती अपने विरोधी दलों को दी जाती है। 2024 में नागपुर में तत्कालीन मंत्री स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी को चुनौती दी थी कि वह 100 साल बनाम 10 साल (यूपीए बनाम एडीए) के कार्यकाल पर खुले मंच पर बहस की चुनौती दी थी। उन्होने कहा था कि राहुल गांधी वक्त और जगह तय कर लें भाजपा का एक सामान्य कार्यकर्ता भी उन्हे बहस में हरा देगा।

राहुल गांधी की तरफ से मौजूदा बहस की चुनौती के बाद भाजपा की तरफ से काफी आक्रामक रूख अपनाया गया और उन्हे फेल नेता तक बताया गया। इन सब के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने रायपुर में सीधी लाइन खींच दी। उन्होंने राहुल गांधी की बहस की चुनौती तो स्वीकार कर ली साथ ही साफ कर दिया कि संसद में बहस के लिए वह तैयार हैं। इसके लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने के लिए सरकार तैयार है।

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