राघवेंद्र द्विवेदी
चक्रवात की तीव्रता में लगातार कमी आई है। IMD के नवीनतम उपलब्ध बुलेटिन और आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के 4 नवंबर तड़के के अपडेट के अनुसार, मुरासु अब ‘डीप डिप्रेशन’ में बदल चुका है। राहत यह है कि मुरासु की तीव्रता काफी कम हो चुकी है। हालांकि, भारी बारिश और जलभराव के खतरे को देखते हुए तटीय एवं निचले इलाकों में प्रशासन की सतर्कता अब भी जरूरी है क्योंकि बारिश और खराब मौसम की आशंका पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।
मुरासु के कमजोर पड़ने के बावजूद प्रशासन के सामने अब तीन प्रमुख चुनौतियां हैं:
1- निचले इलाकों में जमा पानी की निकासी और संभावित बाढ़ से बचाव।
2- क्षतिग्रस्त मकानों, सड़कों और अन्य बुनियादी सुविधाओं की मरम्मत।
3- किसानों की फसलों को हुए नुकसान का विस्तृत आकलन और प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना।
आंध्र प्रदेश सरकार की ओर से नुकसान का विस्तृत आकलन किया जाना अभी बाकी है। आने वाले दिनों में फसल, मकान और सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान की वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।
मुरासु का प्रभाव केवल आंध्र प्रदेश तक सीमित नहीं रहा। तमिलनाडु और पुडुचेरी में भी भारी बारिश और तेज हवाओं का असर देखा गया। चेन्नई में समुद्र की लहरें तेज रहीं और कई इलाकों में लगातार बारिश हुई। चक्रवात की आशंका के चलते चेन्नई एयरपोर्ट की 11 और विजयवाड़ा एयरपोर्ट की 19 उड़ानें रद्द किए जाने की खबर सामने आई। कुछ रेल सेवाओं को भी प्रभावित क्षेत्रों में एहतियातन रोका गया। ओडिशा में भी प्रशासन ने सतर्कता बरती। राज्य के दक्षिणी जिलों में एक लाख 65 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। 592 अस्थायी और स्थायी राहत केंद्र संचालित किए गए।
आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में भारी तबाही मचाने वाला ‘मुरासु’ तूफान बंगाल की खाड़ी से उठा और मंगलवार, 3 नवंबर की सुबह राज्य के दक्षिणी तट से टकराया। तूफान के प्रभाव से तेज हवाओं, मूसलाधार बारिश, जलभराव और पेड़ों के उखड़ने की घटनाएं सामने आई हैं। शुरुआती सरकारी आकलन के मुताबिक, चक्रवात से संबंधित घटनाओं में अब तक दो लोगों की मौत हुई है, जबकि राज्य को करीब 350 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है।
मौसम विभाग के अनुसार, तट से टकराते समय तूफान की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा थी। हवा के झोंके 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचे। हालांकि, जमीन पर पहुंचने के बाद इसकी तीव्रता में लगातार कमी आई है। इसके बावजूद राज्य के कई जिलों में भारी बारिश का खतरा बना हुआ है। प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्यों के साथ-साथ निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का अभियान जारी रखा है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, मुरासु ने 3 नवंबर की सुबह करीब 3:30 से 5:30 बजे के बीच नेल्लोर और नरसापुर के मध्य दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तट को पार किया। इसका लैंडफॉल ओंगोल के नजदीक प्रकाशम जिले में हुआ। तट से टकराने के दौरान तूफान की अधिकतम निरंतर हवा की गति 100-110 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई, जबकि झोंकों की रफ्तार 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंची। इसके साथ ही समुद्र में ऊंची लहरें उठीं और तटीय इलाकों में भारी बारिश हुई।
चक्रवात के आगे बढ़ने के साथ प्रकाशम, बापटला, नेल्लोर और एनटीआर जिलों में इसका व्यापक असर देखने को मिला। कई स्थानों पर सड़कें पानी में डूब गईं और सैकड़ों पेड़ उखड़ गए। बिजली के खंभों और अन्य बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा। बापटला और आसपास के इलाकों में तेज हवाओं और बारिश के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ।
आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (APSDMA) के प्रबंध निदेशक प्रखर जैन के अनुसार, चक्रवात से संबंधित घटनाओं में कम से कम दो लोगों की मौत हुई है। नुकसान का शुरुआती आकलन लगभग 344 करोड़ रुपये किया गया है। प्रशासन की ओर से सामने आए शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक:
– करीब 52,459 हेक्टेयर में खड़ी फसलें भारी बारिश से प्रभावित हुई हैं।
– 312 मकानों को नुकसान पहुंचा है।
– 814 छोटे सिंचाई जलाशयों की स्थिति पर निगरानी रखी जा रही है।
– इनमें से 776 जलाशयों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
– 12,230 लोगों को राहत एवं पुनर्वास केंद्रों में पहुंचाया गया है।
ये आंकड़े शुरुआती आकलन पर आधारित हैं। बारिश और जलभराव के बाद वास्तविक नुकसान का आंकड़ा बढ़ सकता है।
चक्रवात की आशंका को देखते हुए आंध्र प्रदेश सरकार ने पहले ही तटीय और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी शुरू कर दी थी। संवेदनशील क्षेत्रों से हजारों लोगों को निकालकर राहत शिविरों में रखा गया।
बापटला और एनटीआर जिलों में संभावित बाढ़ और भूस्खलन जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विशेष सतर्कता बरती गई। कम से कम 150 गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को अस्पतालों तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्थानांतरित किया गया, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें तत्काल चिकित्सा सुविधा मिल सके। NDRF और SDRF की टीमें राहत एवं बचाव कार्यों में लगाई गईं। प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखना, सड़कों से गिरे पेड़ों को हटाना और आवश्यक सेवाओं को बहाल करना है।
चक्रवात के प्रभाव का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सोमवार सुबह 8:30 बजे से मंगलवार सुबह 8:30 बजे तक बापटला में 222.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इसी अवधि में नरसापुर में 198.6 मिलीमीटर और ओंगोल में 120.2 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। लगातार बारिश के कारण कई निचले इलाकों में पानी भर गया। नेल्लोर, प्रकाशम और बापटला जिलों में सैकड़ों पेड़ उखड़ने की खबरें भी सामने आईं।
चक्रवात के प्रभाव को देखते हुए आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने प्रशासनिक तैयारियों और राहत कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने मंगलवार तड़के करीब 3:30 बजे जिला कलेक्टरों और संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ टेलीकॉन्फ्रेंस की। मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति, लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, राहत शिविरों की व्यवस्था और नुकसान के आकलन की जानकारी ली। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी चक्रवात के प्रभाव और राज्य में चल रहे राहत कार्यों से अवगत कराया।
आंध्र प्रदेश के लिए मुरासु इसलिए भी चुनौतीपूर्ण साबित हुआ क्योंकि राज्य हाल ही में चक्रवात ‘अर्नब’ के प्रभाव से उबरने की कोशिश कर रहा था। पिछले सप्ताह आए अर्नब के कारण भी राज्य में जान-माल का नुकसान हुआ था। इस तूफान में कम से कम पांच लोगों की मौत हुई थी। ऐसे में मुरासु के आगमन ने प्रशासन के सामने राहत, पुनर्वास और बुनियादी सुविधाओं को बहाल करने की दोहरी चुनौती खड़ी कर दी। पहले चक्रवात से प्रभावित क्षेत्रों में दूसरे तूफान की बारिश ने मुश्किलें और बढ़ा दीं।




