अग्निवीरों का रिटायरमेंट बंद, सेना में मिलेगी परमानेंट जॉब

केंद्रीय कैबिनेट का बड़ा फैसला

सुजीत ठाकुर, नई दिल्ली
सेना में भर्ती होने वाले अग्निवीरों को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। चार साल की सेवा के बाद रिटायर होने की बाध्यता खत्म कर दी गई है। अग्निवीर के रूप में उनकी सेवा को दो साल के लिए और बढ़ा दिया गया है जिसके बाद उन्हे सेना में स्थायी कर दिया जाएगा। पहले बैच में भर्ती हुए सभी अग्निवीरों पर यह व्यवस्था लागू होगी। इससे तीन लाख अग्निवीरों को लाभ मिलेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इसका फैसला लिया गया है। फैसले की जानकारी देते हुए सूचना और प्रसारण मंत्री अश्वनी वैष्णव तथा सीडीएस (एन.एस.राजा सुब्रमणि) ने फैसले की जानकारी दी। एक तरह से यह दिवाली से पहले अग्निवीरों और उनके परिवार के लोगों को केंद्र सरकार का तोहफा है।

सीडीएस ने बताया कि चार साल पहले (2022) में अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीरों की भर्ती हुई थी। उस समय सेवा शर्तों के मुताबिक उन्हे चार साल सेवा में रखा जाएगा। इसके बाद 25 फीसदी अग्निवीरों को सेना में स्थायी किया जाएगा। बांकी 75 फीसदी को लगभग 10.90 हजार रूपए देने के बाद उनकी सेवा समाप्त हो जाएगी। वह किसी अन्य जगह अपनी सेवा दे सकेंगे। उसी समय और कुछ दिनों के बाद सरकार के विभिन्न मंत्रालय की तरफ से अग्निवीरों को भर्ती में आरक्षण देने का नियम बनाया गया। खासकर अर्ध सैनिक बलों में भर्ती के लिए अग्निवीरों के लिए आरक्षण तय किया गया।

आज के कैबिनेट के फैसले के बाद यह तय हो गया है कि अग्निवीरों का जो पहला बैच भर्ती हुआ था वह अब नियमित सैनिक के रूप में सेना में स्थायी नौकरी में रखे जाएंगे। 25 फीसदी को पहले ही स्थायी होने की व्यवस्था थी। बांकी के 75 फीसदी अग्निवीरों को दो साल का एक्शटेंशन मिलेगा। इसके बाद यदि उनकी इच्छा हुई तो सेना अपनी जरूरतों के हिसाब से उन्हे स्थायी करेगी। इसके लगभग तीन लाख अग्निवीरों को लाभ मिलेगा।

सीडीएस ने तहलका के एक प्रश्न का उत्तर देते हुए बताया कि, आज जो कैबिनेट का फैसला हुआ है वह मौजूदा अग्निवीरों पर लागू होगा। भविष्य में जो अग्निवीर भर्ती होगें उनको लेकर अभी इस तरह का कोई फैसला नहीं लिया गया है। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में सीडीए ने बताया कि पहले जो अर्ध सैनिक बलों में भर्ती के लिए अग्निवीरों के लिए आरक्षण की व्यवस्था थी वह अब लागू नहीं रहेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि सभी अग्निवीर को सेना में समाहित कर लिया जाएगा इसलिए अन्य सरकारी नौकरी या अर्ध सैनिक बलों में उन्हे प्राथमिकता देने की स्थिति नहीं बनेगी।