
वडनगर से अरविंद चतुर्वेदी की रिपोर्ट
यह सापेक्ष सत्य है कि कुछ घटनाएं इतिहास को बदल देती हैं। भारत में नरेंद्र मोदी का तीसरी
बार प्रधानमंत्री बनना भी कुछ ऐसा ही था। वैसे ऐसा बमुश्किल ही होता है कि किसी मुल्क का मुकद्दर उसके मुखिया के साथ गहराई से जोड़कर देखा जाए। हाल तक देश की उन सबसे बड़ी महान राजनैतिक हस्तियों की फेहरिस्त, जिसमें महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी तक सीमित हुआ करती थी। कुछ अन्य नेता जो इस त्रिमूर्ति के करीब पहुंचे, वे… थे… अटल बिहारी बाजपेयी, राजीव गांधी, नरसिम्हा राव और कुछ वक्त के लिए मनमोहन सिंह भी, जब वे दूसरी बार प्रधानमंत्री चुने गए, लेकिन ये लोगों के दिलों में पूजनीय का दर्जा नहीं पा सके। हालांकि अब उस परम सत्ता के नए दावेदार का उभार हो चुका है… उनका नाम है। नरेंद्र दामोदर दास मोदी।
हम अपने नेताओं को जिस आकार के स्क्रीन पर देखते आए हैं, उसमें बहुत बदलाव हुए हैं। मोबाइल पर उभरतीं लाल-भूरी आभा वाली गांधी और नेहरू की तस्वीरें और इंदिरा की चंचल काली-सफेद छवियों से बात काफी आगे निकल गई है। अब हम अपने नेताओं को हथेली के आकार वाली स्क्रीन पर देखते हैं। उनके तीखे ट्वीट के जरिए हम उन पर नज़र रखते हैं। इंस्टाग्राम के जरिए कही हुई आवाज़ अब सब जगह गूंजती है। अब हम उनसे पहले से कहीं अधिक करीब और नजदीक से जुड़े हैं। मोदी ने जिस प्रकार लोगों से जुड़ने में महारत दिखाई है… ऐसा आज तक कोई दूसरा भारतीय नेता नहीं कर सका है। हाल में जंतर-मंतर पर हुए जेन जी आंदोलन के बाद नरेंद्र मोदी ने अपनी स्टाइल बदलने में जरा भी देर नहीं की। इन सबका इसका परिणाम यह हुआ कि पच्चीस साल की लंबी राजनीति में ही उनका व्यक्तित्व हमारी सामूहिक चेतना में सत्तर मिमी की फिल्म स्क्रीन से भी बड़ा हो चुका है। पौराणिक जर्मन देवता थार की तरह मोदी। अब वह माने जा रहे हैं। जो बादलों की गड़गड़ाहट और बिजली की चमक पैदा कर सकते हैं… वे ऐसे तूफान ला सकते हैं… मोदी के पास जनता रूपी ‘म्योलनीर’, यानी ताकत है, जिससे वह हर किसी को प्रभावित करते हैं। मोदी मतदाताओं के पैरों और नज़रों, दोनों का अपने मनचाहा तरीके से इस्तेमाल कर लेते हैं। अब वे महज मंच के केंद्र में नहीं हैं, बल्कि खुद मंच बन गए हैं। मोदी के पास जनता को पहचानने का जो हुनर है, वैसा हाल के इतिहास में किसी और नेता के पास नहीं है। इसके साथ ही मोदी का जबरदस्त आत्मविश्वास, गहरी प्रतिबद्धता, कड़ी मेहनत, बड़ा सोचने की क्षमता और उससे भी बढ़कर… जोखिम लेने का कौशल। कार्यों को बड़े नाटकीय अंदाज में कराने के कारण उन्हें मौजूदा समय में शिखर पर स्थापित कर दिया है। लोगों को लगता है कि मोदी जनता और देश के खिलाफ कोई गलत काम कर ही नहीं सकते। समय के साथ चलना, समय के साथ खुद में बदलाव करना भी उनकी अनेक विशेषताओं में से एक है। नरेंद्र मोदी को कुछ सीखना होता है तो वह देश और दुनिया में हर उस व्यक्ति से बात करना चाहते हैं, जिसमें वह हुनर हो। उन्हें इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि वह कौन है? वडनगर को आज देश और दुनिया में नरेंद्र मोदी के नाम से जाना और पहचाना जाता है। इस समय दुनिया में कई गाँव चर्चा में होंगे, पर नरेंद्र मोदी का वडनगर सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी के लिए वड़नगर की मिट्टी अनमोल है। हो भी क्यों न? इसी मिट्टी में कर्मठ माँ हीरा बा और धर्मभीरू पिता के संतान नरेंद्र ने जन्म लिया। वड़नगर की मिट्टी ने उन्हें चलना और लड़ना सिखाया। घर से थोड़ी ही दूर स्थित प्राइमरी पाठशाला में पढ़ाई के बाद खेल मंडली मैदान में उतर जाती और दोस्तों के साथ खेल जम जाया करता था। दिन भर में जब तक शरीर से चार बार पसीना न बहे तो फिर कैसा खेल, खेलों में दोस्तों के साथ कुश्ती, तैराकी, पतंगबाजी, कबड्डी, खो-खो में हर दिन एक टीम की दूसरे टीम के साथ हार-जीत लगी रहती थी। पूरे दिन खेल में जीत के लिए रणनीति बनाना, टीम में नए लोगों शामिल करना ये बालक नरेंद्र का हर दिन का मानो काम था। वह अपने कौशल से लोगों को जोड़ना सीख गए थे। यानी बालक नरेंद्र को इस बात का एहसास हो गया था कि एकता में ही शक्ति है। आप किसी भी लड़ाई को तभी जीत सकतीं जब आप समूह में है। वड़नगर की मिट्टी भी अपने नरेंद्र को बढ़ते हुए देख रही थी। अब नरेंद्र यानी एनडी प्राइमरी पाठशाला छोड़कर इठ ऌकॠऌ रउऌडडछ में पहुंच गए थे। नरेंद्र बड़े हो रहे थे तो उनकी उत्सुकता भी बढ़ती जा रही थी। अपनी व्यूह रचना से अब नरेंद्र अपने से बड़ी उम्र के खिलाड़ियों को भी मात दे रहे थे। नरेंद्र हर खेल में माहिर थे, चाहे क्रिकेट का खेल हो या फिर कोई अन्य।
क्रिकेट के खेल उनकी टीम का नाम आजाद था। जीवन में खेल हर किसी को लड़ने की प्रेरणा देता है। वड़नगर की मिट्टी ने नरेंद्र को इतना मजबूत बना दिया था कि वो जीवन के लक्ष्य को देखते हुए आगे बढ़ रहे थे। अगर कोई वड़नगर में प्रवेश करता है तो महादेव के मंदिर में बज रही घंटी उसे अपना आशीर्वाद देती है। वहीं शर्मिष्ठा तालाब का पानी उसे हर चुनौतियों को साधने का जज्बा प्रदान करता है। जबकि नरेंद्र के घर के पास मस्जिद से आने वाली अजान की आवाज़ धर्मनिरपेक्षता का पाठ पढ़ाती थी है तो वहीं वड़नगर की धरती पर कई महीने रहने वाला चीनी यात्री हेव्गसांग पूरी दुनिया में यहां की गौरव गाथा सुनाता। वड़नगर की मिट्टी का ये पराक्रम था कि नरेंद्र के वड़नगर स्थित घर पर आने वाला जानवर हो या मनुष्य, कभी भूखा नहीं गया होगा। वडनगर में हाल ही में जाने का मौका मिला। वडनगर अब पूरी तरह से बदल गया है। अहमदाबाद से वडनगर जाने के लिए शानदार सड़क आपका स्वागत करती है। जगह-जगह पर बना हुआ चिन्ह आपको वडनगर जाने का रास्ता बताते है। वडनगर में गलियों से होता हुआ जब मैं आगे बढ़ा तो जहां कभी नरेंद्र मोदी की प्राइमरी पाठशाला हुआ करती थी, उसके सामने की मस्जिद का पूरी तरह से रिनोवेशन हो चुका है, पर उसका स्वरूप वही है। अब वडनगर में दो मस्जिद, एक दरगाह और दो मंदिरों को पूरी तरह से नया बना दिया गया है। नरेंद्र मोदी की जन्मस्थली वडनगर में बिना किसी विवाद के मंदिर, मस्जिद और दरगाह अपने पुराने स्वरूप में वापस आ गए हैं। इसको लेकर ना तो हिंदू-मुसलमानों के बीच कोई तकरार हुई, ना ही झगड़ा। यह एक नया समीकरण है जो… नए भारत के नए स्वरूप को बता रहा है।
इस वक्त मैं जहां खड़ा हूं उसके चारों तरफ अभिभूत करने वाला नजारा है। यह कोई महानगर नहीं है। न ही रूपहले पर्दे वाली मायानगरी का दृश्य। यह हकीकत है। कहें तो 2047 में विकसित भारत एक एक गाँव या कस्बा कैसा हो, वडनगर को उसका प्रोटोटाइप समझिए।
लगभग 41 हजार जनसंख्या वाले इस टाउन में बहुतायत तो हिंदुओं की है, लेकिन मुस्लिम, जैन, सिख और अन्य समुदाय के लोग भी यहां रहते हैं। पंथनिरपेक्ष भारत के मूल स्वरूप सरीखा। वडनगर गुजरात के मेहसाणा जिले का हिस्सा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृहनगर है। मोदी का जिस घर में जहां जन्म हुआ है, अब वहां घर का नामोनिशान तक नहीं है। याद के तौर पर बस जमीन बची है। मैंने देखा कि अब वडनगर आने वाले लोग उस जमीन की मिट्टी को अपने माथे पर लगाते हैं, मानों उससे प्रेरणा या आशीर्वाद ले रहे हों। नरेंद्र मोदी का पूरा परिवार यही रहा है। यही माँ हीरा बा ने बच्चों को संस्कार दिया। आज वडनगर में नरेंद्र मोदी की जन्मस्थली के बगल में प्रजापति परिवार रहता है। वडनगर में नरेंद्र मोदी के घर से थोड़ा आगे बढ़े तो तीसरे मकान में एक पटेल परिवार रहता है, जिनके पास मोदी परिवार से जुड़ी ढेर सारी यादें आज भी मौजूद हैं।
नरेंद्र मोदी मोदी का 76वें जन्मदिन पर यहां चहल-पहल काफी है और किसी भव्य कार्यक्रम की तैयारी चल रही है। पूरा वडनगर सज रहा है और तैयार हो रहा है, अपने धरतीपुत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन सेलिब्रेट करने के लिए। मेरे सामने शर्मिष्ठा तालाब है। पास ही हाटकेश्वर महादेव का मंदिर है। इन दोनों का जिक्र यहां इसलिए ज़रूरी है, क्योंकि दोनों ही पीएम मोदी के बचपन से जुड़ा हुआ है। तालाब के बीच में एक मंदिर है, जहां स्कूल के दिनों में पीएम रोजाना तैर कर इस मंदिर के पास जाते थे। यहां बातचीत में पता चला कि देश के कोने-कोने से कार्यकर्ता और आम लोग नरेंद्र मोदी का जन्मदिन मनाने वडनगर पहुंच रहे हैं। वडनगर में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम में आम लोग गृह मंत्री अमित शाह, राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के साथ शामिल होंगे। पूरे वडनगर और इसके आसपास के इलाकों को दीए से सजाने की तैयारी चल रही है। दीप श्रृंखला, आरती, मंत्रोच्चारण, मंगलगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम का साक्षी पूरा वडनगर बनेगा। साधु-संतों का आना भी शुरू हो गया है।
इसके बाद मैंने पूरा वडनगर भ्रमण करने का फैसला किया। फिर मैं वडनगर की गलियों और मुहल्लों में लोगों से मिलने लगा, फिर मेरी बात नीलेश भाई से हुई तो उन्होंने वडनगर में गाँव को आधुनिक बनाने के लिए क्या-क्या किया गया, उसकी लिस्ट भेज दी। नगर के एक सिरे से दूसरे सिरे तक पहुंचते-पहुंचते यह भरोसा मजबूत हो गया कि एक विजन, फिर उसकी प्लानिंग और फिर उसे जमीन पर उतारने का माद्दा और वह भी आम लोगों तक को साथ लेकर होता है। वडनगर इसका उदाहरण है, इसका वडनगर में आपको केस स्टडी प्रमाण के तौर पर मौजूद है।
पूरे वडनगर में जो वर्षों पुराने घर हैं उनके मूल डिजाइन को छेड़े बिना मरम्मत और नया बनाया जा रहा है। इसमें खर्च होने वाली राशि का 80 फीसदी सरकार दे रही है और 20 फीसदी भवन के मालिक। 20 फीसदी रकम भी बिना इंटरेस्ट के बैंकों से मिल रहा है और किश्तों में उसे भरने की सुविधा है। स्थानीय निवासी मयंक भाई कहते हैं कि उन्होंने अपने पुराने घर को नया बनाया है। इसमें 20 लाख का खर्च आया। 16 लाख सरकार ने दिए। 4 लाख उन्होंने बिना किसी कागजाती झंझट से लोन मिला। उन्हें हर महीने सिर्फ 2 हजार का किश्त भरना है। घर को नया बनाने के लिए क्या करना पड़ा? मयंक भाई कहते हैं कि, कोई दिक्कत नहीं हुई। सिर्फ नगरपालिका में जाकर फॉर्म भरा और फिर सब हो गया। अभी तक 177 से ज्यादा मकान नए बन गए हैं। मकान के अलावा दो मंदिर और दो मस्जिद भी इसी योजना के तहत नए सिरे से बनाया या संवारे गए हैं।
वडनगर घूमते वक्त मुझे जितने भी मकान दिखे उनमें ज्यादातर के छत पर बिजली के लिए सोलर पैनल लगे दिखे। बातचीत में पता चला कि 3300 घर सोलर से चल रहे हैं। सुनकर अच्छा लगा तो सोचा जरा यह भी पता करता चलूं कि सरकार की फ्लैगशिप पीएम आवास योजना की प्रधानमंत्री के गृह नगर में स्थिति क्या है? पता चला कि पीएम आवास योजना 1.0 (2018-23) 1299 घर स्वीकृत हुए थे। 1256 बन कर तैयार हो गए और 40 घरों का निर्माण कार्य चल रहा है। इस योजन के तहत सिर्फ 3 घर शुरू नहीं हुए, शायद इसके लिए स्वीकृत राशि में कुछ फेरबदल की ज़रूरत है। पीएम आवास योजना 2.0 (2024-26) में 512 घर स्वीकृत हुए थे। 208 का निर्माण शुरू हो चुका है और 304 का काम अभी शुरू नहीं हो सका है। आवास योजना के अलावा वडनगर में अभी तक 6750 शौचालय भी बनाए जा चुके हैं।
दोपहर का भोजन करने के बाद मैं चल पड़ा उस स्कूल की तरफ जहां कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पढ़ते थे। अब यह स्कूल प्रेरणा स्थल के रूप में जाना जाता है। यहां देश भर के बच्चों को संस्कृति और संस्कार की शिक्षा दी जाती है। अभी तक 2076 बच्चे यहां से संस्कृति और संस्कार सीख चुके हैं। यहां से आगे बढ़ने पर आर्ट गैलरी दिखा। यह मेन बाजार में है। यहां पीएम मोदी से जुड़े सामनों को रखा गया है। शाम ढलते-ढलते जीईएमईआरएस जेनरल हॉस्पिटल, मेडिकल कॉलेज, तोरान होटल, ताना रिरि गार्डन आदि नज़र से गुजरता गया और 2047 के विकसित भारत की धुंधली तस्वीर साफ होने लगी। अचानक से ढोल, नगाड़ों, शंख की ध्वनि और आरती के मंत्रोच्चारण से ध्यान खुला तो सामने दिखा हाटकेश्वर महादेव। भगवान शिव के आगे सिर झुकाया और मैं बढ़ गया अपने होटल की तरफ।
वडनगर रेलवे स्टेशन – वड़नगर रेलवे स्टेशन की पहचान भी नरेंद्र मोदी के नाम से होती है। मैं सुबह वडनगर रेलवे स्टेशन पर पहुंचा। यह स्टेशन बेहद साफ-सुथरा नज़र आ रहा था। वडनगर रेलवे स्टेशन और यहां ट्रेन चलने का इतिहास 19वीं सदी से जुड़ा हुआ है।
वडनगर में रेलवे की शुरूआत ब्रिटिश काल के दौरान गायकवाड़ राजवंश (बड़ौदा स्टेट रेलवे) द्वारा की गई थी। ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, मेहसाणा से वडनगर के बीच की मीटर गेज रेलवे लाइन को 21 मार्च 1887 को जनता के लिए खोला गया था। इसके बाद, 12 दिसंबर 1888 को इस लाइन को वडनगर से खेरालू तक आगे बढ़ाया गया था।
गायकवाड़ शासनकाल के आधिकारिक रेलवे अभिलेखों में 1887 से ही इस रूट पर ट्रेनों के चलने का पूरा विवरण मिलता है। ब्रिटिश काल के दौरान छपने वाले ‘इंडियन ब्रैडशॉ’ (कल्ल्िरंल्ल इ१ं२िँं६) और अन्य रेलवे समय सारणियों में वडनगर स्टेशन का जिक्र मिलता है। स्थानीय रिकॉर्ड बताते हैं कि 19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी की शुरूआत में वडनगर गुड़, तंबाकू और लकड़ी के व्यापार का एक बड़ा केंद्र बन गया था, और यहां से माल की आवाज़ाही के लिए पूरी तरह रेलवे का उपयोग किया जाता था।
2014 के बाद से गुजरात के ऐतिहासिक वडनगर रेलवे स्टेशन का पूरी तरह से कायाकल्प किया गया है। चूंकि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मस्थान है और उनके बचपन की यादें इससे जुड़ी हैं, इसे एक प्रमुख हेरिटेज और पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया है।
जुलाई 2021 में इसके पुनर्विकसित स्वरूप का उद्घाटन किया गया था। रेलवे स्टेशन की पुरानी इमारत को पारंपरिक और भव्य हेरिटेज लुक दिया गया है। स्टेशन की नई इमारतों और दीवारों पर आकर्षक पत्थरों की नक्काशी (र३ङ्मल्ली उं१५्रल्लॅ२) की गई है, जो यहां की प्राचीन संस्कृति को दशार्ती है।
वह ऐतिहासिक चाय की दुकान, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने बचपन में अपने पिता के साथ चाय बेचा करते थे, उसे विशेष रूप से सहेजा गया है। इस मूल चाय स्टॉल को एक हेरिटेज स्पॉट/कैफे के रूप में विकसित किया गया है, जो पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र है। वडनगर में स्थित फुड स्टाल के अन्दर पीएम नरेंद्र मोदी के ढेरों पुरानी तस्वीरें लगी है, जिसे आप ने पहले देखा नहीं होगा।
वडनगर रेलवे स्टेशन को ब्रॉड गेज रेलवे लाइन से जोड़ दिया गया है। इसके जुड़ने से यह स्टेशन वडनगर-मोढेरा-पाटन हेरिटेज सर्किट का हिस्सा बन गया है और देश के बाकी हिस्सों से बेहतर तरीके से रेल मार्ग द्वारा जुड़ गया है। स्टेशन के सकुर्लेटिंग एरिया में सुंदर लैंडस्केपिंग और आधुनिक पानी के फव्वारे लगाए गए हैं। यात्रियों और पर्यटकों की सुविधा के लिए यहां आधुनिक कैफे और बैठने की बेहतर व्यवस्था की गई है। वडनगर में लोगों के पास मोदी से डुडी ढेर सारी बातें हैं। ये लोग मोदी के बारे में बात करने में थकते नहीं हैं। सारा गाँव मोदी से के साथ एक अनोखे रिश्ते में बंधा है। यही कारण है कि वडनगर में वो सब सुविधाएं हैं, जो एक महानगर में होना चाहिए।




