बंगला साहिब विवाद ने पकड़ा राजनीतिक तूल, पुलिस कार्रवाई पर आमने-सामने सियासी दल

पंजाब के मुख्यमंत्री ने पुलिस के कथित रवैये को “तालिबानी मानसिकता” करार देते हुए कहा कि सिख समुदाय गुरु के घर की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली ऐसी कार्रवाई को कभी माफ नहीं करेगा।

नई दिल्ली स्थित गुरुद्वारा बंगला साहिब पुलिस कार्रवाई को लेकर उपजे विवाद के बाद एक बड़े राजनीतिक और धार्मिक टकराव का केंद्र बन गया है। राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था के बीच गुरुद्वारे के परिसर में शरण लेने वाले प्रदर्शनकारियों और दिल्ली पुलिस के जवानों के बीच हुई घटना ने सिख धार्मिक मर्यादा, कानून-व्यवस्था और धार्मिक स्थलों के राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

गुरुद्वारे में पुलिसकर्मियों के कथित प्रवेश और प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाए जाने की घटना पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं, शिरोमणि अकाली दल के प्रतिनिधियों और सिख समुदाय की कई प्रमुख हस्तियों ने तीखी प्रतिक्रियाएं दी हैं। जहां आप ने पुलिस पर सिख धार्मिक परंपराओं का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है, वहीं दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने पुलिस कार्रवाई का बचाव करते हुए दावा किया है कि प्रदर्शनकारी धार्मिक स्थल को राजनीतिक मंच में बदलने की कोशिश कर रहे थे। यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब दिल्ली पुलिस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और उससे जुड़े संगठनों के प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर रखी थी। शनिवार को जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश के दौरान दिल्ली पुलिस ने 7,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।

भगवंत मान का भाजपा पर तीखा हमला

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक तीखी पोस्ट के जरिए गुरुद्वारा बंगला साहिब में पुलिस की कथित कार्रवाई की निंदा की। उन्होंने भाजपा के नेतृत्व वाली व्यवस्था पर ऐतिहासिक सिख धर्मस्थल की गरिमा को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया।

मान ने कहा कि गुरुद्वारे हमेशा से जरूरतमंदों को आश्रय देने के लिए अपने दरवाजे खुले रखते आए हैं। किसी व्यक्ति की पहचान या राजनीतिक विचारधारा चाहे जो भी हो, गुरु के घर में उसे शरण देना सिख परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रदर्शन कर रहे युवाओं को गुरुद्वारे में आश्रय देने के बजाय वहां से हटाने की जरूरत क्यों पड़ी।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस के जवान नंगे सिर और जूते पहनकर गुरुद्वारा परिसर में दाखिल हुए। उन्होंने पुलिस के कथित रवैये को “तालिबानी मानसिकता” करार देते हुए कहा कि सिख समुदाय गुरु के घर की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली ऐसी कार्रवाई को कभी माफ नहीं करेगा।

मान के बयान के बाद राजनीतिक टकराव और तेज हो गया। आप के कई अन्य नेताओं ने भी पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की। पार्टी ने अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज से आग्रह किया है कि वह सिख धार्मिक परंपराओं के कथित उल्लंघन का मामला केंद्र सरकार के समक्ष उठाएं।

आप ने अमित शाह से मांगा इस्तीफा

पंजाब आप के महासचिव और मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से नैतिक आधार पर इस्तीफा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन काम करती है, इसलिए इस कार्रवाई की जिम्मेदारी केंद्र सरकार को लेनी चाहिए।

मीडिया से बातचीत में पन्नू ने कहा कि बंगला साहिब में हुई घटना से सिख समुदाय की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है। उन्होंने सवाल उठाया कि गुरुद्वारे में शरण लेने वाले प्रदर्शनकारियों को कथित तौर पर घसीटकर बाहर निकालने की जरूरत क्यों पड़ी।

उन्होंने सवाल किया, “क्या यह इमरजेंसी 2.0 थी?”

पन्नू ने कहा कि गुरुद्वारे हमेशा से जरूरतमंदों और संकट में फंसे लोगों के लिए शरणस्थली रहे हैं, जहां हर व्यक्ति को आश्रय और लंगर मिलता है। उन्होंने सवाल किया कि क्या प्रदर्शनकारी इतने खतरनाक थे कि पुलिस को सिख मर्यादा की अनदेखी करते हुए कार्रवाई करनी पड़ी।

AAP नेता ने शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और अकाली दल के बीच संभावित राजनीतिक समझौते की उम्मीद उनकी प्रतिक्रिया को प्रभावित कर रही हो सकती है।

हरसिमरत बादल ने भी की कार्रवाई की निंदा

पूर्व केंद्रीय मंत्री और शिरोमणि अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर बादल ने भी दिल्ली पुलिस की कथित कार्रवाई की कड़ी आलोचना की।

एक्स पर अपनी पोस्ट में उन्होंने कहा कि पवित्र गुरुद्वारा बंगला साहिब में पुलिस का प्रवेश और वहां शरण लेने वाली महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार पूरी तरह अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि किसी धार्मिक स्थल की पवित्रता का सम्मान किया जाना चाहिए और प्रदर्शन के दौरान महिलाओं के साथ कथित तौर पर की गई बदसलूकी के लिए दिल्ली पुलिस को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

आप पर गुरुद्वारे के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप

गुरुद्वारा बंगला साहिब का प्रबंधन करने वाली दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना को खारिज करते हुए उसका बचाव किया है। कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका और महासचिव जगदीप सिंह कहलोन ने आप पर धार्मिक स्थल को राजनीतिक विवाद में घसीटने का आरोप लगाया।

दोनों पदाधिकारियों का दावा है कि कुछ प्रदर्शनकारी तख्तियां लेकर गुरुद्वारे के परिसर में दाखिल हुए और वहां नारेबाजी तथा भाषणबाजी करने लगे। उनके अनुसार, इस तरह धार्मिक स्थल को राजनीतिक लामबंदी के मंच के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश की गई।

DSGMC नेतृत्व ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को शुरुआत में सिख परंपराओं के अनुरूप ठहरने की जगह दी गई और संभावित पुलिस कार्रवाई से बचाने के लिए उन्हें आश्रय तथा लंगर भी उपलब्ध कराया गया। हालांकि, कमेटी ने आरोप लगाया कि बाद में प्रदर्शनकारी आप के इशारे पर राजनीतिक एजेंडे के तहत काम करने लगे।

कालका ने कहा कि परिसर के भीतर स्थिति पैदा होने के बाद प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के लिए पुलिस ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने दावा किया कि DSGMC कर्मचारियों ने पुलिसकर्मियों को मुख्य दरबार साहिब की ओर बढ़ने से रोक दिया था।

कहलोन ने भी कहा कि कमेटी ने यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए कि पुलिस कार्रवाई के दौरान धार्मिक गतिविधियां बाधित न हों और मुख्य धार्मिक स्थल की मर्यादा बरकरार रहे।

कमेटी के इस रुख ने उसे उन सिख राजनीतिक नेताओं के आमने-सामने ला खड़ा किया है, जिनका कहना है कि गुरुद्वारे के भीतर वर्दीधारी पुलिसकर्मियों की मौजूदगी और उनके आचरण से धार्मिक नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं।

भाजपा का भगवंत मान पर पलटवार

भाजपा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा पुलिस कार्रवाई को “तालिबानी” बताए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। पंजाब भाजपा के प्रवक्ता सरचंद सिंह खियाला ने दिल्ली पुलिस से मान के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पर विचार करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने भ्रामक जानकारी साझा कर धार्मिक भावनाएं भड़काने की कोशिश की।

खियाला ने कहा कि पुलिस के आचरण को लेकर गंभीर आरोप लगाने से पहले तथ्यों की पुष्टि करना जरूरी है। उन्होंने पंजाब सरकार और सिख धार्मिक संस्थानों से जुड़े पुराने विवादों का हवाला देते हुए मान पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप भी लगाया।

भाजपा की प्रतिक्रिया ने इस विवाद को एक व्यापक राजनीतिक लड़ाई में बदल दिया है। अब मामला केवल पुलिस की कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धार्मिक भावनाओं, सार्वजनिक व्यवस्था और AAP तथा भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव का मुद्दा भी बन गया है।

स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाने की मांग की

शिरोमणि अकाली दल (दिल्ली) के अध्यक्ष और DSGMC के पूर्व प्रमुख परमजीत सिंह सरना ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मांग की कि गुरुद्वारों में पुलिस और सुरक्षा बलों के प्रवेश को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।

सरना ने कहा कि ये नियम ऐतिहासिक गुरुद्वारों के साथ-साथ स्थानीय सिंह सभा गुरुद्वारों पर भी लागू होने चाहिए। प्रदर्शनकारियों को कथित तौर पर हटाने के तरीके की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि धार्मिक परिसरों में कानून-व्यवस्था से जुड़ी परिस्थितियों से निपटने के लिए एक स्पष्ट और निर्धारित प्रक्रिया होनी चाहिए।

उन्होंने जोर दिया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई करते समय भी धार्मिक स्थलों की पवित्रता और मर्यादा का सम्मान किया जाना चाहिए।

DSGMC के पूर्व अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके ने भी पुलिस कार्रवाई का बचाव करने के लिए कमेटी नेतृत्व पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या पुलिस ने गुरुद्वारा परिसर को औपचारिक रूप से हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को रखने का स्थान माना था।

जीके ने पुलिस कार्रवाई के कानूनी और प्रक्रियागत पहलुओं पर सवाल उठाते हुए यह भी पूछा कि क्या भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत जारी किए जाने वाले निषेधात्मक आदेशों का इस मामले में कोई प्रभाव था। यह प्रावधान संभावित खतरे या सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका को रोकने से संबंधित है।

वरिष्ठ अधिवक्ता और भाजपा नेता एचएस फूलका ने भी आप पर गुरुद्वारा बंगला साहिब का राजनीतिक इस्तेमाल करने की कोशिश का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सिख समुदाय की भोजन और आश्रय उपलब्ध कराने की परंपरा का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

फूलका ने आरोप लगाया कि AAP समर्थित समूह ने धार्मिक परिसर में बैनर और तख्तियां लेकर प्रवेश किया तथा नारेबाजी और भाषण दिए, जो उनके अनुसार धार्मिक स्थल के अनुचित इस्तेमाल का मामला है।

दिल्ली पुलिस ने वीडियो को बताया दुर्भावनापूर्ण

दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो की व्याख्या को चुनौती दी है। इस वीडियो को लेकर आरोप लगाया जा रहा है कि पुलिसकर्मियों ने सिख धार्मिक परंपराओं का उल्लंघन करते हुए गुरुद्वारे में प्रवेश किया।

नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि वीडियो में दिखाई दे रहे पुलिसकर्मी उस सामान्य रास्ते से गुजर रहे थे, जिसका इस्तेमाल श्रद्धालु गुरुद्वारे में प्रवेश से पहले जूते उतारने वाले स्थान तक पहुंचने के लिए करते हैं।

शर्मा ने आरोप लगाया कि वीडियो को जानबूझकर दुर्भावनापूर्ण इरादे से प्रसारित किया गया, ताकि एक सम्मानित धार्मिक समुदाय की भावनाएं भड़काई जा सकें और धार्मिक सौहार्द को नुकसान पहुंचे। उन्होंने कहा कि पुलिस इस मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू करेगी।

हालांकि, पुलिस के स्पष्टीकरण के बावजूद विवाद थमा नहीं है। राजनीतिक नेता अब भी प्रदर्शनकारियों को हटाने के तरीके और गुरुद्वारा परिसर में पुलिसकर्मियों की मौजूदगी की परिस्थितियों पर सवाल उठा रहे हैं।

धार्मिक मर्यादा और कानून-व्यवस्था के बीच बहस

इस घटना ने धार्मिक संस्थानों और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के बीच संबंधों को लेकर एक संवेदनशील बहस फिर शुरू कर दी है। खासकर उस स्थिति में, जब राजनीतिक प्रदर्शन के दौरान धार्मिक स्थल लोगों के लिए अस्थायी आश्रय बन जाते हैं।

विवाद के केंद्र में दो अलग-अलग दावे हैं। आप और कई सिख राजनीतिक नेताओं का कहना है कि पुलिस कार्रवाई से बंगला साहिब की पवित्रता और सिख मर्यादा का उल्लंघन हुआ। दूसरी ओर, DSGMC का तर्क है कि प्रदर्शनकारी धार्मिक स्थल को राजनीतिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल कर रहे थे और पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेने के लिए हस्तक्षेप किया।

इस विवाद ने सिख धार्मिक परंपराओं को आप, भाजपा और अकाली दल के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान के केंद्र में ला दिया है। कार्रवाई की जवाबदेही तय करने की मांग, पुलिस के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाने की अपील और धार्मिक स्थलों के कथित राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर लगाए जा रहे आरोपों के बीच यह मामला देश के प्रमुख सिख धार्मिक स्थलों में से एक की गरिमा और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन की गंभीर परीक्षा बन गया है।