तहलका ब्यूरो
गणेशोत्सव की तैयारियों के बीच गोवा की राजनीति में एक नई शुरुआत का ऐलान हुआ। अरविंद केजरीवाल
और विजय सरदेसाई ने कंधे से कंधा मिलाकर घोषणा की 2027 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) और गोवा फॉरवर्ड पार्टी (जीएफपी) गठबंधन कर लड़ेंगी, और इस गठबंधन का नाम है ‘गोवा फर्स्ट’। स्टेज पर आप की गोवा इनचार्ज अतिशी, प्रदेश अध्यक्ष वाल्मीकि नाइक और दोनों विधायक वेंजी विएगस और क्रूज सिल्वा भी मौजूद थे।
केजरीवाल ने कहा कि गोवा के मतदाता के पास अब तक सीमित विकल्प थे भाजपा या कांग्रेस, जो ‘चुनाव में आपस में लड़ती हैं, लेकिन पर्दे के पीछे साथ मिलकर सरकारें बनाती हैं।’ ‘गोवा फर्स्ट’ इसी बीच का तीसरा विकल्प बनेगा। उन्होंने दावा किया कि सत्तारूढ़ भाजपा 2027 में बहुमत नहीं बना पाएगी और यह गठबंधन सरकार बनाएगी।
दोनों नेताओं की जुबान एक थी, लेकिन दोनों के पीछे की कहानी अलग-अलग है। एक ओर देशभर में संकट से गुजर रही आम आदमी पार्टी , जिससे दिल्ली का गढ़ छिन चुका है और राज्यसभा के सात सांसद भाजपा में ‘मर्ज’ हो चुके हैं। दूसरी ओर विजय सरदेसाई की गोवा फॉरवर्ड पार्टी (जीएफपी) है, जो तीन सीटों से सिमटकर एक सीट रह गई है। यानी यह गठबंधन दो घायल खिलाड़ियों की जोड़ी है और शायद इसीलिए दोनों के पास अब हारने के लिए बहुत कम और जीतने के लिए बहुत कुछ बचा है।
चार साल पहले का सितंबर, जब जनादेश टूटा था
‘गोवा फर्स्ट’ का ऐलान जिस महीने में हुआ, उसी महीने की 14 तारीख को चार साल पहले गोवा की राजनीति का सबसे बड़ा उलटफेर हुआ था। फरवरी 2022 के चुनाव में भाजपा ने 40 सदस्यीय सदन में 20 सीटें जीती थीं, बहुमत से 1 कम। कांग्रेस ने 11 सीटें जीतीं और उम्मीद जताई कि विपक्ष के साथ मिलकर सरकार बनाएगी।
लेकिन 14 सितंबर 2022 को कांग्रेस के 11 में से 8 विधायक भाजपा में शामिल हो गए। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री दिगंबर कामत और माइकल लोबो शामिल थे। तमिलनाडु के मंदिर, चैपल और मस्जिद की यात्रा कर औपचारिक रूप से कागज पर हस्ताक्षर कर चुके ये विधायक कहने लगे कि उन्होंने ‘भगवान से बात की’ और उन्हें ‘उचित निर्णय’ लेने की सलाह मिली। भाजपा की संख्या 20 से बढ़कर 28 हो गई।
इसी दौर की एक और कहानी गोवा की राजनीति की क्रूरता बताती है। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के बेटे उत्पल पर्रिकर चाहते थे कि भाजपा उन्हें पणजी से टिकट दे अपने पिता की परंपरागत सीट से। पार्टी ने मना कर दिया और दूसरी सीट की पेशकश की। उत्पल ने भाजपा छोड़ दी और निर्दलीय रूप से पणजी से चुनाव लड़ा। नतीजा भाजपा के अतानासियो मोंसेराटे ने उन्हें मात्र 674 वोटों से हराया। उत्पल को 5,857 वोट मिले, मोंसेराटे को 6,531।
इसीलिए जब गठबंधन के ऐलान से एक दिन पहले गोवा की हाईवेज पर ‘आप और जीएफपी के चिह्नों वाले होर्डिंग्स दिखे, जिन पर लिखा था ‘तीसरी बार धोखा नहीं खाएंगे’ तो संदेश साफ था। यह नारा सिर्फ भाजपा के लिए नहीं था, बल्कि गोवा की उस पूरी राजनीतिक संस्कृति के लिए था जिसमें जीते हुए विधायक सरकार बनने के बाद पार्टी बदलते रहे हैं।
आप का हाल: दिल्ली छिनी, राज्यसभा छिनी, पंजाब में सांसों की लड़ाई
‘गोवा फर्स्ट’ को समझने के लिए आम आदमी पार्टी के संकट को समझना ज़रूरी है। फरवरी 2025 में आप दिल्ली में करारी हार के साथ सत्ता से बाहर हो गई खुद केजरीवाल नई दिल्ली सीट से हार गए और ‘शीश महल’ विवाद उनकी साख पर हमला बन गया।
फिर आया 24 अप्रैल 2026 का दिन। राज्यसभा में आप के 10 में से 7 सांसदों ने राघव चड्ढा की अगुवाई में संविधान के दसवीं अनुसूची के ‘दो-तिहाई मर्ज’ प्रावधान का इस्तेमाल करते हुए भाजपा में शामिल होने का ऐलान किया। स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, विक्रमजीत साहनी और राजिंदर गुप्ता भी इस सूची में थे। आप की राज्यसभा ताकत 10 से घटकर 3 रह गई और पार्टी ने इसे ‘विश्वासघात’ तथा ‘आॅपरेशन कमल’ का नया अध्याय बताया।
सबसे दर्दनाक बात इन सात में से छह सांसद पंजाब से निर्वाचित थे, वह राज्य जहां फरवरी-मार्च 2027 में आप की भगवंत मान सरकार की परीक्षा है। पंजाब में आप पहले से ही कर्ज संकट, ‘सैक्रिलेज वीडियो’ विवाद झेल रही है, और राज्य की सात में से छह राज्यसभा सीटें अब भाजपा के पास हैं।
गोवा में भी आप का हाल अच्छा नहीं है। 2022 में पार्टी ने अकेले चुनाव लड़कर दक्षिण गोवा की बेनौलिम और वेलिम सीटें जीतीं थीं दोनों पारंपरिक कांग्रेस-बहुल इलाके। लेकिन दिसंबर 2025 के जिला पंचायत चुनावों में शर्मनाक हार के बाद प्रदेश अध्यक्ष अमित पालेकर और कई वरिष्ठ नेता इस्तीफे कर बैठे कांग्रेस में शामिल होने की अफवाहों के बीच।
इसी तूफान के बीच 11 जनवरी 2026 को आप ने गोवा की कमान पार्टी के संस्थापक सदस्य वाल्मीकि नाइक को सौंपी। नाइक इंडिया अगेंस्ट करप्शन आंदोलन से जुड़े रहे हैं, राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं और पहले उत्तर गोवा के कार्यकारी अध्यक्ष रह चुके हैं। गर्सन गोम्स को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया। यानी ‘गोवा फर्स्ट’ असल में वाल्मीकि नाइक की टीम का पहला बड़ा दांव भी है।
दिलचस्प बात यह कि पणजी में खुद केजरीवाल ने स्वीकार किया कि राज्यसभा सांसदों की ‘मर्ज’ के बाद पार्टी ‘उम्मीदवारों को 100 बार जांचेगी।’ यह कबूलनामा बताता है कि आप गोवा में जिस दल-बदल के खिलाफ अभियान चला रही है, उसके घाव उसे खुद भी गहरे तक हैं।
सरदेसाई का सफर: युवा कांग्रेस से भाजपा सहयोगी, अब आप के साथ
गठबंधन के दूसरे खंभे विजय सरदेसाई की कहानी गोवा की राजनीति का खुला पाठ है। युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे सरदेसाई पहले भाजपा के सहयोगी बने (2017 में मनोहर पर्रिकर सरकार में उपमुख्यमंत्री बने), फिर 2022 में कांग्रेस के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा, और अब आप के साथ हाथ मिलाए बैठे हैं।
गोवा फॉरवर्ड पार्टी की हालत भी आप से ज्यादा अच्छी नहीं। 2017 में पार्टी के पास तीन सीटें थीं, 2022 में रह गई सिर्फ एक सरदेसाई की अपनी फतोर्डा। वहां भी जीत आसान नहीं थी 45.81% वोट हासिल कर उन्होंने भाजपा के दामू नाइक को मात्र 1,527 वोटों से हराया था। मायेम और माँद्रेम में उतारे गए जीएफपी उम्मीदवार हार गए। पार्टी का समग्र वोट शेयर नाममात्र का रह गया।६्र‘्रस्री्िरं+1
यानी ‘गोवा फर्स्ट’ जिस वक्त का गठबंधन है, उस वक्त आप के पास गोवा में दो विधायक हैं और जीएफपी के पास एक। दोनों मिलकर भी 40 में से 3। ऐसे में यह गठबंधन संख्याबल से नहीं, बयानबल से लड़ने की कोशिश है और इसका सबसे बड़ा औजार है दल-बदल के खिलाफ जनाक्रोश, जिसे दोनों पार्टियां सीधे भाजपा और अप्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस पर भी तानती हैं।
कितनी सीटें जीत सकता है ‘गोवा फर्स्ट’?
अगर सीधे गणित देखें तो रास्ता दुर्गम है। मौजूदा सदन में भाजपा 29 सीटों पर बैठी है (मूल 20 + दल-बदल कर आए विधायक), कांग्रेस तीन पर सिमटी है, आप और एमजीपी के पास दो-दो, जीएफपी के पास एक, और तीन निर्दलीय भाजपा का समर्थन करते हैं। भाजपा ने तो गठबंधन को पहले ही ‘मौकापरस्त’ बता दिया है।
फिर भी ‘गोवा फर्स्ट’ के पास तीन ठोस संभावनाएं हैं। पहली दक्षिण गोवा में आप की जड़ें और सरदेसाई की फतोर्डा बेल्ट मिलकर एक कॉम्पैक्ट साउथ गोवा ब्लॉक बना सकती है; यथार्थवादी आकलन में 4-8 सीटों का दायरा बनता है, जो सरकार से दूर लेकिन ‘किंगमेकर’ की स्थिति तक पहुंच सकता है। दूसरी अगर भाजपा पर दीर्घ शासन का थकावट और विपक्ष के बंटने का गुस्सा एक साथ चला, तो दो अंक से ऊपर उतरकर यह गठबंधन 10-12 सीटों की स्थिति में पहुंच सकता है। तीसरी और सबसे खतरनाक संभावना यह कि कांग्रेस-आरजी और ‘गोवा फर्स्ट’ में विपक्षी वोट बंटे, और भाजपा प्रचंड लाभ के साथ लौटे वही परिणाम, जो 2022 में दिखा था।




