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सुजीत ठाकुर, नई दिल्ली
भारत में बड़े धार्मिक आयोजनों और मंदिरों में उमड़ने वाली भीड़ के बीच भगदड़ का खतरा लगातार बना हुआ है। पिछले करीब पांच वर्षों में वैष्णो देवी से लेकर हाथरस, महाकुंभ, तिरुपति, पुरी, श्रीकाकुलम और लखीसराय तक ऐसी कई घटनाएं हुईं, जिनमें सैकड़ों श्रद्धालुओं की जान गई। उपलब्ध सरकारी और सरकारी संस्थानों के रिकॉर्ड के आधार पर केवल सात प्रमुख घटनाओं में 188 लोगों की मौत हुई। इन मृतकों के परिवारों के लिए केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों ने घोषित दरों के हिसाब से करीब 18.70 करोड़ रुपये के मुआवजे की घोषणा हुई थी।
1 जनवरी 2022 को जम्मू-कश्मीर के कटरा स्थित माता वैष्णो देवी भवन में भगदड़ हुई। इसमें 12 श्रद्धालुओं की मौत हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रत्येक मृतक के परिजन को दो लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये देने की घोषणा की थी। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने भी प्रत्येक मृतक परिवार को 10 लाख रुपये देने का ऐलान किया था।
2 जुलाई 2024 को उत्तर प्रदेश के हाथरस में सत्संग के बाद मची भगदड़ ने देश को झकझोर दिया। सरकारी आंकड़े के अनुसार 121 लोगों की मौत हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रत्येक मृतक परिवार को दो लाख रुपये और प्रधानमंत्री ने दो लाख रुपये की सहायता घोषित की। यानी मृत्यु के मामले में प्रति परिवार चार लाख रुपये की घोषित सहायता थी।
29 जनवरी 2025 को प्रयागराज के महाकुंभ में मौनी अमावस्या के अमृत स्नान के दौरान भगदड़ हुई। उत्तर प्रदेश सरकार ने 30 मौतों की पुष्टि करते हुए प्रत्येक मृतक परिवार को 25 लाख रुपये देने की घोषणा की थी। इसके अलावा केंद्र की ओर से प्रधानमंत्री राहत कोष से दो लाख रुपये की सहायता भी घोषित की गई। इस तरह प्रति मृतक परिवार घोषित सहायता 27 लाख रुपये रही।
महाकुंभ से कुछ ही सप्ताह पहले 8 जनवरी 2025 को तिरुपति में वैकुंठ द्वार दर्शन के टोकन लेने के दौरान भगदड़ में छह श्रद्धालुओं की मौत हुई। तिरुमला तिरुपति देवस्थानम बोर्ड ने प्रत्येक मृतक परिवार को 25 लाख रुपये देने का फैसला किया। केंद्र की ओर से दो लाख रुपये की सहायता भी घोषित हुई थी।
29 जून 2025 को ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के दौरान गुंडिचा मंदिर के बाहर भगदड़ में तीन श्रद्धालुओं की मौत हुई। ओडिशा सरकार ने प्रत्येक मृतक परिवार के लिए 25 लाख रुपये की सहायता घोषित की।
1 नवंबर 2025 को आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के कासिबुग्गा स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में भगदड़ में नौ श्रद्धालुओं की मौत हुई। आंध्र प्रदेश सरकार ने प्रत्येक मृतक परिवार को 15 लाख रुपये और केंद्र ने दो लाख रुपये की सहायता घोषित की।
17 अगस्त 2026 को बिहार के लखीसराय स्थित अशोक धाम मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ में भगदड़ जैसी स्थिति बनी। सात महिलाओं की मौत हुई। बिहार सरकार ने प्रत्येक मृतक परिवार को चार लाख और केंद्र ने दो लाख रुपये की सहायता घोषित की थी।
इन घटनाओं का सबसे बड़ा सवाल केवल मुआवजे का नहीं, बल्कि भीड़ प्रबंधन का है। इन घटनाओं में मंदिर परिसर, प्रवेश-निकास मार्ग, बैरिकेडिंग, अचानक भीड़ बढ़ना और प्रशासनिक समन्वय में खामी जैसे मुद्दे बार-बार सामने आए हैं। यानी सरकारें हादसे के बाद आर्थिक मदद जरूर देती हैं, लेकिन असली चुनौती ऐसी व्यवस्था बनाने की है जिसमें श्रद्धालुओं को मुआवजे की जरूरत ही न पड़े। कोलकाता के चोरबागन में शनिवार शाम हुए हादसे के बाद यही यक्ष प्रश्न खड़ा है कि व्यवस्था में चूक से रोकने के लिए हम उचित तैयारी की जगह मुआवजा देने और घटना की जांच तक सिमित हैं।




