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‘भूले-भटके’ तिवारी : जिन्होंने कुंभ में बिछड़े लाखों लोगों को उनके अपनों से मिलवाया

कुंभ के मेले में लोगों के मिलने और बिछड़ने की घटनाओं ने बॉलीवुड को बहुत-सी कहानियों से नवाजा है. इन कहानियों पर आधारित तमाम फिल्में जहां एक तरफ सुपरहिट हुईं वहीं दूसरी ओर कई सुपरस्टारों ने जन्म लिया. लेकिन हम आपको किसी फिल्मी कहानी या फिल्मी नायक के बारे में  

महाश्वेता का महासमर

कोलकाता के दो रहस्य कभी नहीं खुलेंगे. एक बाॅटनिकल गार्डन के वट वृक्ष का और दूसरा महाश्वेता देवी का. वट वृक्ष का हर एक तना मूल होने का अहसास देता है. लेकिन कहा जाता है कि उसका मूल (जड़) तो बहुत पहले आंधी-तूफान में गिर गया पर खासियत यह है  

तरुण सहरावत : एक साथी और भी था…

पत्रकारिता करने की एकमात्र प्रेरणा आपको इस काम के प्रति अपने जज्बे से मिलती है. तहलका के फोटो जर्नलिस्ट तरुण सहरावत की जिंदगी इसी जज्बे की बानगी है. महज 23 साल की उम्र में यह नौजवान अपने तीन साल के करिअर में इतना काम कर गया जो बड़े-बड़े लोग अपने  

मुद्राराक्षस : एक योद्धा लेखक का चले जाना…

प्रख्यात नाटककार, कथाकार, जाने-माने संस्कृतिकर्मी और चिंतक मुद्राराक्षस का बीते 13 जून को लखनऊ में देहावसान आज के इस आक्रांता समय में हिंदी समाज के एक बुलंद प्रतिरोधी स्वर का मौन हो जाना है. दरअसल मुद्राराक्षस मात्र एक लेखक न होकर एक ऐसे सार्वजनिक बुद्धिजीवी थे जो हाशिये के समाज  

‘डोमिसाइल नीति ने बाहरी आबादी को उनकी मुंहमांगी सौगात देने के साथ आदिवासियों के नैसर्गिक अधिकारों में कटौती कर दी है’

  झारखंड में रघुबर दास की भाजपा सरकार ने स्थानीय नीति लागू कर दी है. इस नीति के अनुसार 1985 को कट ऑफ डेट माना गया है.  जबकि झारखंडी जनता 1932 के खतियान को स्थानीयता का आधार बनाने की मांग करती रही है. राज्य बनने के 15 साल बाद आई  

भगत सिंह वही न जो भारतीय फिल्मों में एक्टिंग करता है !

अगर आप पाकिस्तान में किसी से शहीद भगत सिंह के बारे में पूछेंगे तो बड़े अजीबोगरीब जवाब मिलेंगे. शायद आटे में नमक के बराबर लोग भगत सिंह को जानते हैं या यह कि वे क्यों, कब और कैसे शहीद हुए. भगत सिंह को न जानने की सबसे बड़ी वजह यह  

‘राम आडवाणी का जाना लखनऊ देखने के आईने का बिखरना है’

चार साल पहले की बात है. लखनऊ का दिल कहे जाने वाले हजरतगंज में किताबों की एक दुकान पर एक शोधार्थी पहुंचा. उसने चार हजार रुपये से अधिक की किताबें निकालीं पर जब पैसे देने की बारी आई तो उसकी जेब से मुश्किल से दो हजार रुपये ही निकले. उसने  

वे कौन हैं जो मुस्लिम महिलाओं को लूट व अंधविश्वास के केंद्र- मजार और दरगाह में प्रवेश की लड़ाई को सशक्तिकरण का नाम दे रहे हैं?

भारत की मुस्लिम बेटियां समाज का सबसे अशिक्षित वर्ग हैं, सम्मानित रोजगार में उनकी तादाद सबसे कम है, अपने ही समाज में दहेज के कारण ठुकराई जा रही हैं, गरीबी-बेरोजगारी और असंगठित क्षेत्र की शोषणकारी व्यवस्था की मजदूरी में पिस रही हैं. मुजफ्फरनगर, अहमदाबाद और सूरत दंगों में सामूहिक बलात्कार की शिकार महिलाएं  

‘मैं लेखक बनना चाहता था, लेकिन सिर्फ यह खत लिख सका’

गुड मॉर्निंग जब आप यह खत पढ़ रहे होंगे, तब मैं आपके पास नहीं होऊंगा. मुझसे नाराज मत होइएगा. मैं जानता हूं, आप में से कई लोग मुझे दिल से चाहते हैं, प्यार करते हैं और मेरा ख्याल रखते रहे हैं. मुझे किसी से शिकायत नहीं है. मुझे हमेशा खुद  

‘रोहित ने आत्महत्या नहीं की, हमारी व्यवस्‍था ने उसे मार डाला’

हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के छात्र रोहित वेमुला ने आत्महत्या करने से पहले जो पत्र लिखा उसमें उन्होंने खालीपन के अहसास को आत्महत्या जैसा कदम उठाने का कारण माना है. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ब्राह्मणवादी करतूतों का विरोध करते हुए खालीपन के अहसास से भर जाना बहुत बड़ी त्रासदी है.