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‘माओवादियों को हर तरह के अतिवाद से बचना होगा’

रामशरण जोशी पत्रकार, संपादक, समाजविज्ञानी और मीडिया के अध्यापक रहे हैं. वे माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल में पांच सालों तक पूर्णकालिक प्रोफेसर रहे. भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली और महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में विजिटिंग प्रोफेसर रहे. प्रो. जोशी राष्ट्रीय बाल भवन के अध्यक्ष और केंद्रीय हिंदी संस्थान के उपाध्यक्ष भी रहे . इनकी महत्वपूर्ण कृतियां में आदमी, बैल और सपने, आदिवासी समाज और विमर्श, 21वीं सदी के संकट, मीडिया विमर्श आदि हैं. हाल...  

सेंसर बोर्ड का कॉन्सेप्ट ही गलत

  आपकी फिल्म किस बारे में है?  फिल्म में दो अलग-अलग कहानियां हैं. दो अलग-अलग मुद्दे हैं. ये दोनों कहानियां कैसे एक-दूसरे से जुड़ती है ये दर्शक देखेंगे तो समझ जाएंगे. कोई भी फिल्मकार जब कुछ बनाता है तो ऐसे ही नहीं बनाता. जब आप फिल्म देखेंगे तो पाएंगे कि  

‘कश्मीर में अत्याचार के लिए उमर अब्दुल्ला जिम्मेदार हैं, मैं नहीं’

अलगाववादी नेता मसर्रत आलम की जेल से रिहाई ने राजनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया है. भाजपा का कहना है कि प्रदेश सरकार का यह कदम ‘कॉमन मिनिमम प्रोग्राम’ का उल्लंघन है. उन्हें 2010 में हिरासत में लिया गया था. जेल में बंद दिनों के साथ भविष्य की योजनाओं पर आलम ने रियाज वानी के साथ खुलकर चर्चा की.  

‘मोदी के नेतृत्व में भाजपा इंदिरा की कांग्रेस जैसी हो जाएगी’

नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बने छह महीने बीत गए हैं. आप उनके प्रदर्शन को कैसे देखते हैं? जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के बाद नरेंद्र मोदी ने खुद को सबसे मेहनती प्रधानमंत्री साबित किया है. वह सर्वाधिक सक्रिय भी हैं. उन्होंने ये दो गुण दिखाए हैं. हालांकि उन्हें केंद्र में  

‘ग्रीन पीस का हर अभियान देशहित में है’

बातचीत की शुरुआत आईबी की उस बहुचर्चित रिपोर्ट से करते हैं जिसमें ग्रीनपीस को राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में लिप्त बताया गया है. क्या आप उस विवाद को निपटाने के लिए यहां आए हैं? इस यात्रा का एक मकसद सरकार और सविल सोसाइटी के साथ अपने संबंधों को परखना और उसे नए  

‘महाभारत से बेहतर संभवत: दुनिया में कुछ नहीं लिखा गया’

युवा कविता के क्षेत्र में देश का सबसे प्रतिष्ठित भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार इस वर्ष भोपाल के युवा कवि आस्तीक वाजपेयी को देने की घोषणा की गई है. उन्हें यह पुरस्कार उनकी कविता ‘विध्वंस की शताब्दी’ के लिए दिया जा रहा है. पूजा सिंह की उनसे बातचीत  

‘आलोचक बेपेंदी के लोटे की तरह होते हैं’
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हाल ही में कतर में उर्दू अदब का प्रतिष्ठित ‘फरोग-ए-उर्दू’ सम्मान पाने वाले हिंदी-उर्दू के चर्चित कथाकार शमोएल अहमद से निराला की बातचीत.