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महबूबा मुफ्ती : सत्ता ने बदले सुर

कश्मीर घाटी की मुख्यधारा के नेता, जिन्हें कई बार अलगाववादियों से अलग करने के लिए प्रो-इंडिया यानी भारत समर्थक नेताओं के नाम से जाना जाता है, उनके बीच मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने अपनी एक अलग छवि बनाई है. उन्हें एक ऐसी नेता के तौर पर जाना जाता रहा है जो  

गणतंत्र का गुड़गोबर

भोलेपन के पर्याय के रूप में मशहूर बेचारी गाय को पता भी नहीं होगा कि देश की सड़कों पर उसकी सुरक्षा के बहाने उपद्रव हो रहे हैं, तो भारतीय संसद में बहस में भी हुई. गाय को यह भी नहीं पता होगा कि उसका नाम अब सियासी गलियारे में मोटे-मोटे  

अखंड भारत : भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के एकीकरण के विचार में कितना दम है?

आजादी के बाद से ही ऐसी आवाजें उठती रहीं कि भारत और पाकिस्तान का बंटवारा सही नहीं था और दोनों देशों का एकीकरण होना चाहिए. भारत-पाकिस्तान का एकीकरण तो नहीं हुआ, पाकिस्तान का विभाजन जरूर हो गया, जिसके बाद बांग्लादेश बना. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तरफ से समय-समय पर इन  

पहले वीजा देना शुरू करें, एकीकरण बाद की बात है

भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के एकीकरण से पहले हमें आज के हालात को देखना होगा. हमने दक्षिण एशियाई देशों का एक संगठन दक्षेस बनाया है. पहले हमें उसे ठीक ढंग से काम करने देना होगा. आज की तारीख में तो यही संगठन ठीक ढंग से काम नहीं कर पा रहा  

अखंड भारत के लिए आवश्यक है अखंड उदारता

अच्छे सपने देखना अच्छी बात है. मानव समाज सपनों से खाली नहीं हो सकता. सपने हमें जीने का हौसला देते हैं. लेकिन रात और दिन में देखे गए सपनों में बड़ा अंतर होता है. रात के सपने सिर्फ कल्पनालोक को आलोकित करते रहते हैं जबकि दिन में देखे गए सपने  

कसाई की दुकान पर बकरा नहीं पाला जा सकता : मुनव्वर राना

भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश- तीनों मुल्कों के एकीकरण की बात बार-बार उठती है. एकीकरण पर आपका क्या नजरिया है? देखिए, मुल्क भी घर की तरह होते हैं. जब घर में एक बार दीवारें उठ जाती हैं तो टूटती नहीं हैं. इसलिए ये नामुमकिन है कि तीनों मुल्क एक हो जाएंगे.  

एकीकरण यूटोपिया है, जो संभव नहीं

हिंदुस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश को एक कर देने का विचार एक यूटोपिया है जो कि संभव नहीं है. यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का अपना एजेंडा है जो आजादी के बहुत पहले से चल रहा है. वे मिथ और इतिहास को मिला देते हैं. इसकी वजह से ही वे इतिहास को  

दोनों मुल्क शुरुआत करें, निभ जाए तो अच्छा…

किसी भी तरह हिंदुस्तान और पाकिस्तान के जोड़ने का सिलसिला शुरू करना होगा. मैं यह मानकर नहीं चलता कि जब हिंदुस्तान-पाकिस्तान का बंटवारा एक बार हो चुका है तो वह हमेशा के लिए हुआ है. किसी भी भले आदमी को यह बात माननी नहीं चाहिए. हिंदुस्तान और पाकिस्तान की सरकारों  

अखंड भारत का नहीं, महासंघ का सपना देखें

बीते साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पाकिस्तान की आकस्मिक यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच जो सद्भावना का वातावरण बना, उस पर संभवतः राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व प्रवक्ता एवं वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव द्वारा दिए वक्तव्य से प्रतिकूल प्रभाव पड़ा. राम माधव  

पाक की संप्रभुता स्वीकार नहीं कर पाए हैं दक्षिणपंथी

पहली बात तो जिस एकीकरण के विचार की बात की जा रही है मैं उस पर ज्यादा जानकारी नहीं रखती. पहली बार मार्च 2006 में वर्ल्ड सोशल फोरम के आयोजन के दौरान कुछ भारतीय, पाकिस्तानी और बांग्लादेशी मित्रों ने बांग्लादेश-भारत-पाकिस्तान पीपुल फोरम (बीबीपीपीएफ) के विचार पर चर्चा की. फोरम में