बुन्देलखण्ड में सूखे की मार, किसान बेहाल | Tehelka Hindi

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बुन्देलखण्ड में सूखे की मार, किसान बेहाल

2017-10-15 , Issue 19 Volume 9

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देश को आज़ादी मिले आज सात दशक से ज़्यादा का समय बीत गया पर बुन्देलखण्ड का हाल-बेहाल है। केन्द्र और राज्य में, सरकारें आती-जाती रही पर बुन्देलखण्ड की जन समस्याओं और किसानों की मुसीबतें बरकरार रहीं। केन्द्र की सरकारों ने भारी -भरकम पैकेज करोड़ो रुपयों में दिये जो भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गये। जिससे न तो यहां किसानों का भला हो सका और न ही लोगों को कोई सुविधायें मिल सकीं।

बुन्देलखण्ड के सात -जिले उत्तरप्रदेश से और छह जिले मध्यप्रदेश के हिस्से में आते है। यहां पर पर्याप्त आर्थिक संसाधन और खनन हैं फिर भी ये अत्यंत पिछड़ा है इसकी मुख्य वजह राजनीतिक उदासीनता। मौजूदा हालात में यहां के किसान आर्थिक तंगी के कारण आत्महत्या करने को मजबूर हंै। यहां के लोग कई सालों से अलग बुन्देलखण्ड राज्य बनाए जाने की मांग भी कर रहे है। बुन्देलखण्ड के हिस्से वाले मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के लोगों व किसानों ने कई बार दिल्ली के जन्तर -मन्तर पर बुन्देलखण्ड राज्य की मांग को लेकर धरना- प्रदर्शन भी किए हैं।

दरअसल चुनाव के दौरान भाजपा और कांग्रेस अलग राज्य बनवाये जाने के लिए आश्वासन देती हैं और वोट बटोरती हंै पर सरकार बनने के बाद सब भूल जाती है। ऐसे में बुन्देलखण्डवासी अपने आप को ठगा सा महसूस करते हैं। अब केन्द्र सरकार ने बुन्देलखण्ड़ के विकास के लिये बुन्देलखण्ड के उत्तरप्रदेश वाले हिस्से झांसी -ललितपुर संसदीय क्षेत्र से उमा भारती को केन्द्रीय मंत्री बनाया है तो मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले से बीरेन्द्र सिंह को हाल ही में हुए मंत्रि मंडल विस्तार में मंत्री बनाया है।

अब बात करते हैं कि बुन्देलखण्ड के हिस्से वाले उत्तरप्रदेश के किसानों और लोग इस साल पडऩे वाले सूखे के कारण काफी परेशान हंै। आलम यह है कि किसानों की खरीफ की फसल तो खराब हो गई है।जिसके कारण उनके बुवाई की लागत तक नहीं निकल पा रही है। ऐसे में किसान बैकों और साहूकारों से कर्ज लेने को मजबूर है। झांसी जिले के धवाकर गांव के किसान सीपी सिंह ने बताया कि बारिश न होने और सरकार से सही समय पर मदद ना मिलने के कारण किसान बदहाल और भुखमरी की जिन्दगी जीने को मजबूर है। महोबा जिले के पडौरा गांव और ऐंचाना के किसान सीवेन्द्र और दिलीप कुमार ने बताया कि रबी की फसल इस बार सही हुई थी जिससे किसानों को काफी राहत मिली थी और उन्होंने अपना पुराना कर्जा भी उतारा था। लेकिन इस बार पूरा सावन का महीना सूखा चला गया जिससे किसानों की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गयी जिसके कारण किसानों फिर से कर्ज लेना ही पड़ेगा। भरूआ सुमेर हमीरपुर जिले के किसान अनुपम ने बताया कि इस बार जुलाई शुरूआत में बारिश ठीक – ठाक हुई तो किसानों को लगा कि बुबाई की जाए जैसे ही बुवाई की तो वर्षा बिल्कुल नहीं हुई जिसके कारण किसानों की फसल नष्ट हो गई।

ललितपुुर जिले के महरौनी और सोजना के किसानों लखन रामू सिंह का कहना है कि सरकार किसानों को वोट बैंक के तौर पर इस्तेमाल करती है। यहां का किसान कई सालों से सूखे की चपेट में है पर सरकार न तो उनके कर्जो को माफ करती है और न ही पानी की पर्याप्त मात्रा होने के बावजूद कोई ऐसे सुविधा देती है। ऐसे में छोटा किसान दिन व दिन गरीब होता जा रहा है। रहा सवाल बड़े किसान का तो उसके पास संसाधन और पैसा होता है वो अपनी खेती मजदूरों से करवा लेता है ऐसे में फिसता है तो बस गरीब व छोटा किसान।

बांदा जिले के नरैनी,करतल,गिरवां और अतर्रा के किसान अनूप, जोगेन्द्र, राजेश, राज पटेल का कहना है कि राज्य की योगी सरकार बुन्देलखण्ड के किसानो को हरित प्रदेश के किसानों की तरह देखती है जबकि सच्चाई ये है कि यहां की कुछ ज़मीन तो बंजर है पानी की सुविधायें नहीं है यहां का किसान एक ही फसल बड़ी मुश्किल से पैदा कर पाता है। इसलिए सरकार को बुन्देलखण्ड के किसानों के लिए अलग से कर्ज देना और माफ करना चाहिए तब जाकर यहां का किसान सुधर पाएगा। हरित प्रदेश की ज़मीन अच्छी है और तीन फसल भी पैदा करता है ऐसे में बुन्देलखण्ड और हरित प्रदेश के किसानों की तुलना ठीक नहीं है।

बुन्देलखण्ड के मूल निवासी 1994 बैच के मध्यप्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी राजाबाबू सिंह जो समय-समय पर किसानों और बुन्देलखण्ड के लोगों के लिये कार्य करते रहते है का कहना है कि किसानों को भारतीय खेती को आधुनिक तरीके से बढ़ावा देना चाहिए और संतरा,मौसम्मी और नीबू की पैदावार ज़्यादा करनी चाहिए जिससे उनको लाभ होगा।

बांदा सदर से विधायक श्री प्रकाश द्विवेदी ने बताया कि उत्तरप्रदेश सरकार किसानों के कर्ज माफी से लेकर जो भी उनकी समस्याएं हैं उनके समाधान के लिए प्रयास कर रही है। किसानों को खेेती का पानी उनके खेत तक कैसे पहुंच सकें उसके लिये सिंचाई के पानी की व्यवस्था की जा रही है। किसानों का अनाज बिना बिचौलिये कि निर्धारित मूल्य के तहत खरीदा जा रहा है जो अब तक की पिछली सरकारों ने नहीं किया है। किसानों के कर्ज माफ किये गये और किये जा रहे है।

यहीं हाल मध्यप्रदेश के किसानों का है जहां पर सरकार ने तो जो हाल जून-जुलाई महीने में किसानों का किया था उससे तो किसानों का गुस्सा पूरा देश ने देखा था। छत्तरपुर जिले के बड़ा मलहेरा, महाराजपुर, नौगांव और बमीठा के किसानों अनुज, रोहित और रतन विरज और बेनी चौरसिया ने बताया कि छत्तरपुर जिले का इतिहास रहा है कि पानी की किल्लत लोगों को पीने के लिए करीब चालीस साल से है, उस पर इस बार सावन सूखे होने के कारण खेती में बुवाई सही नहीं हो पायी है ऐसे में सरकार को चाहिए कि खासकर बुन्देखखण्ड के किसानों के लिए सरकार कोई किसान बोर्ड का गठन करें। इन हालात में बुन्देलखण्ड के किसान पलायन करने लगे है। क्योंकि सूखा जैसी स्थिति होने के कारण अब किसानों की नई पीढ़ी खेती करने से बचने लगी है।

सागर जिले के बंडा ,रहेली और शाहपुर के किसान राजेन्द्र सोंलंकी और भारत सिंह का कहना है कि सरकार ही नहीं चाहती कि बुन्देलखण्ड का किसान तरक्की करे तभी तो यहां के तलाबों का जीर्णोधार और मरम्मत नहीं कराई गई है क्योंकि सरकार चुनाव के दौरान ही किसानों के कर्ज माफी और सुहावने सपने दिखाकर वोट बटोरती है फिर कोई सुनवाई तक नहीं करती है। यहीं हाल दतिया, दमोह, पन्ना और टीकमगढ़ का है जहां पर चन्देलों के समय से 100 ज़्यादा तलाब है जिसमें लबालव पानी भरा रहता था पर अवैध कब्जों की चपेट में है अगर सरकार यहां के तलाबों को चिन्हित कर अवैध कब्जों से मुक्त कराती है तो पीने के पानी तक ही नहीं बल्कि खेती के सिचाई के लिए भरपूर पानी मिल सकता है।

बुन्देलखण्ड राज्य के निर्माण को लेकर संघर्षरत् बुन्देलखण्ड संयुक्त मोर्चा के भानु सहाय व अशोक सक्सेना का कहना है कि राज्य के निर्माण को लेकर संघर्ष जारी है और अब सड़कों पर उतरने की बारी है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पास बुन्देलखण्ड के निर्माण को लेकर एक नक्शा पहुंचा दिया गया है जिसमें मध्यप्रदेश के छह जिले और उत्तरप्रदेश के सात जिलों का पूरा विधिवत नक्शा जनसंख्या सहित पहुचांया है। उन्होंने बताया कि राज्य निर्माण के मामले में बुन्देलखण्ड को लोगो और किसानों का जागरूक किया जा रहा है समय- समय पर आंदोलन और धरना प्रदर्शन किये जाते हैं जिससे उनकी मांगों की आवाज सरकार तक पहुंचायी जा सके जिले स्तर पर राज्य निर्माण को लेकर कमेटियां गठित कर ली गई है जो गांव-गांव में जाकर किसानों को जागरूक कर रही हंै।

मध्यप्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री राजा पटैरिया का कहना है कि अब केन्द्र, उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकारें है ऐसे मेें किसानों की अगर दुर्दशा यहां हो रही है तो उसके लिये सीधे तौर पर भाजपा की सरकार जिम्मेदार है। वह अपनी नैतिक जिम्मेदारी से बच नहीं सकते है। उन्होंने कहा कि बुन्देलखण्ड का किसान और मजदूर आत्महत्यायें कर रहा है पर सरकारों इन सब घटनाओं को नजर अंदाज कर रही है। जिस प्रकार किसानों को गत जून -जुलाई के महीनों में सरकार के विरोध में जब अपनी आवाज उठाई तो सरकार ने जो तांडव किसानों पर किया वह पूरे देश को झंझकोर देने वाला रहा है। किसानों की हत्यायें तक की गई।

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(Published in Tehelkahindi Magazine, Volume 9 Issue 19, Dated 15 October 2017)

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