नई दिल्ली: Chhattisgarh की राजनीति में महिला आरक्षण को लेकर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने विधानसभा में एक शासकीय संकल्प पेश किया, जिसमें लोकसभा और सभी विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की मांग की गई। उन्होंने कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होते ही इस आरक्षण को तुरंत लागू किया जाना चाहिए, ताकि महिलाओं को राजनीति में बराबरी का मौका मिल सके।
इस मुद्दे पर चर्चा के लिए विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र बुलाया गया, जहां करीब चार घंटे की बहस तय की गई। विधानसभा अध्यक्ष Raman Singh ने सभी सदस्यों को अपनी बात रखने का समय देने की बात कही।
हालांकि, इस संकल्प को लेकर विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया। नेता प्रतिपक्ष Charan Das Mahant ने कहा कि उन्होंने पहले ही इसी तरह का प्रस्ताव रखा था, जिसमें मौजूदा सीटों के भीतर ही महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग की गई थी, लेकिन उसे नजरअंदाज कर दिया गया। उनका आरोप था कि सरकार का यह कदम जल्दबाजी में लिया गया है और इसका पहले से तय एजेंडे से कोई सीधा संबंध नहीं है।
विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच इसी मुद्दे पर तीखी नोकझोंक देखने को मिली। कुछ समय के लिए सदन का माहौल गरमा गया और हंगामे की स्थिति बन गई। विपक्ष का कहना था कि सरकार इस मुद्दे को राजनीतिक फायदा उठाने के लिए इस्तेमाल कर रही है, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे महिलाओं के सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया।
बीजेपी के वरिष्ठ विधायक Ajay Chandrakar ने कहा कि सदन के भीतर किन विषयों पर चर्चा होगी, यह तय करना सदन का अधिकार है और बाहर दिए गए बयानों को अंदर नहीं लाया जा सकता।
आखिरकार अध्यक्ष को बीच में हस्तक्षेप करना पड़ा और उन्होंने सदन को शांत करते हुए कहा कि हर सदस्य को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलेगा।
कुल मिलाकर, महिला आरक्षण को लेकर छत्तीसगढ़ विधानसभा में बहस तो शुरू हो गई है, लेकिन इस मुद्दे पर राजनीतिक सहमति बनती नजर नहीं आ रही। अब देखना होगा कि यह संकल्प आगे क्या रूप लेता है और महिलाओं को इसका वास्तविक लाभ कब तक मिल पाता है।




