चुनाव आयोग के मामले विचाराधीन इसलिए सीजेआई ने विपक्ष से मुलाकात टाली

INDI गठबंधन को चीफ जस्टिस का जवाब- विचाराधीन मामलों पर प्रशासनिक बैठक उचित नहीं; कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले, शिकायतें कानून के मुताबिक याचिका के जरिए रखें, सुप्रीम कोर्ट तक विपक्ष के मार्च को लेकर दिल्ली में सुरक्षा कड़ी, वोट चोरी के आरोपों, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर के खिलाफ विपक्ष का आंदोलन तेज

Supreme court of India building in New Delhi, India.

एम. रियाज़ हाशमी। नई दिल्ली
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के नेताओं को मुलाकात का समय देने से इनकार कर दिया है। विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), कथित चुनावी अनियमितताओं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपनी शिकायतें रखने के लिए सीजेआई से मिलने का समय मांगा था। सीजेआई ने स्पष्ट किया कि जिन मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट में मामले विचाराधीन हैं, उन पर प्रशासनिक स्तर पर मुलाकात करना न्यायिक औचित्य के लिहाज से उचित नहीं होगा।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे प्रत्येक नागरिक और निर्वाचित प्रतिनिधि के लिए खुले हैं। कोई भी व्यक्ति कानून के मुताबिक याचिका दाखिल कर अपनी शिकायत अदालत के सामने रख सकता है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब कांग्रेस और उसके गठबंधन के सहयोगी दलों ने आज सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च करने की घोषणा की है। सिलसिलेवार तरीके से समझिए इस पूरे घटनाक्रम को लेकर उठ रहे कुछ सवालों के जवाब।

1. सीजेआई ने मुलाकात से क्यों किया इनकार?

सीजेआई सूर्यकांत ने सोमवार को मीडिया से बातचीत में बताया कि उन्हें विपक्षी नेताओं की ओर से मुलाकात का अनुरोध मिला था। उन्होंने पत्र पर विचार करने के बाद रविवार रात में ही जवाब दे दिया था। उनके मुताबिक, संबंधित मुद्दे पहले से ही अदालत के विचाराधीन हैं। ऐसे में न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े विषयों पर प्रशासनिक स्तर पर चर्चा करना उचित नहीं होगा। इस आकलन में वरिष्ठ न्यायाधीशों से विचार-विमर्श भी किया गया। विपक्षी नेताओं की मांगों में चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतें, मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण पर सवाल और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग शामिल हैं। सीजेआई का रुख स्पष्ट है कि ऐसे मामलों में राहत या हस्तक्षेप के लिए उचित न्यायिक प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। प्रशासनिक मुलाकात के माध्यम से अदालत से किसी विवाद पर निर्देश प्राप्त नहीं किए जा सकते।

2. ‘सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सबके लिए खुले’

मुलाकात से इनकार के बावजूद सीजेआई ने न्याय तक पहुंच के अधिकार पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कोई भी आम नागरिक या निर्वाचित निकाय का सदस्य याचिका दाखिल कर सकता है। प्रत्येक भारतीय नागरिक को अदालत का दरवाजा खटखटाने का अधिकार है और कानून के तहत जो राहत बनती है, उस पर सुनवाई की जाएगी। इस बयान का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सीजेआई ने विपक्ष की शिकायतों को अदालत के सामने रखने का रास्ता बंद नहीं किया है। उन्होंने केवल प्रशासनिक स्तर पर मुलाकात के बजाय न्यायिक प्रक्रिया अपनाने की बात कही है। सीजेआई ने राजनीतिक विवादों पर टिप्पणी करने से भी परहेज किया। प्रदर्शन और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े सवालों को उन्होंने कानून-व्यवस्था के दायरे का विषय बताया।

3. राहुल गांधी और खड़गे की क्या मांग थी?

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सीजेआई से मुलाकात का समय मांगा था। विपक्षी नेताओं का उद्देश्य मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण और कथित चुनावी अनियमितताओं से संबंधित अपनी चिंताओं को सामने रखना था। वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, एसआईआर की प्रक्रिया रोकने और मतदान के लिए फिर से मतपत्र व्यवस्था अपनाने जैसी मांगें भी उठा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूचियों में बदलाव की प्रक्रिया निष्पक्षता और पारदर्शिता से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करती है। निर्वाचन आयोग और भाजपा इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं। सीजेआई के इनकार के बाद अब विपक्ष के सामने अपनी मांगों को न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से आगे बढ़ाने का विकल्प है।

4. सुप्रीम कोर्ट मार्च: फिलहाल क्या है स्थिति?

सीजेआई से मुलाकात का अनुरोध स्वीकार नहीं किए जाने के बावजूद विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट मार्च की योजना वापस लेने की घोषणा नहीं की है। कांग्रेस ने ‘चलो दिल्ली-मार्च फॉर डेमोक्रेसी’ के नाम से मार्च का आह्वान किया है। नेताओं और समर्थकों को दोपहर 1:30 बजे कनॉट प्लेस और बाराखंभा रोड के जंक्शन पर एकत्र होने की योजना है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लोगों से इस मार्च में शामिल होने की अपील की। उन्होंने इसे राजनीतिक दलों, जाति, समुदाय और राज्यों की सीमाओं से परे लोकतंत्र और संविधान के समर्थन में उठाया जाने वाला कदम बताया। हालांकि, अभी तक मार्च के वास्तव में शुरू होने, उसके सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने या पुलिस द्वारा उसे रोकने की अंतिम स्थिति को लेकर असमंजस है। इसलिए सीजेआई के जवाब के बाद मार्च को स्थगित घोषित करने जैसी बात भी सामने नहीं आई है।

5. दिल्ली में सुरक्षा और मेट्रो संचालन की स्थिति?

प्रस्तावित मार्च को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने मध्य दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की है। प्रमुख मार्गों पर बैरिकेड लगाए गए हैं और यातायात को नियंत्रित करने के लिए कई स्थानों पर प्रतिबंध तथा मार्ग परिवर्तन लागू किए गए हैं। दिल्ली मेट्रो ने भी सुरक्षा कारणों से छह स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार अस्थायी रूप से बंद किए। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, यह व्यवस्था शाम 4 बजे तक निर्धारित थी। इन प्रतिबंधों के कारण मध्य दिल्ली में आने-जाने वाले यात्रियों को परेशानी होने की आशंका जताई गई। ये मेट्रो स्टेशन •पटेल चौक, •जनपथ, राजीव चौक, मंडी हाउस, केंद्रीय सचिवालय और बाराखंभा रोड हैं। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने अदालत परिसरों के आसपास न्याय तक पहुंच में बाधा डालने वाले निषेधात्मक प्रतिबंधों से संबंधित नोटिस हटाने का निर्देश दिया। अदालत की चिंता यह सुनिश्चित करना था कि सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर लोगों की न्यायिक पहुंच बाधित न हो।

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