Tehelka Exclusive: जेल में लॉरेंस, तिहाड़ में अनमोल, अमेरिका में अनिल पंडित तो फिर गोली कौन चलवा रहा?

तहलका इन्वेस्टिगेशनः हरियाणा से दिल्ली और मुंबई तक सात महीने में फायरिंग की चार घटनाएं; टाइगर श्रॉफ केस में कोटा पुलिस का खुलासा- मुख्य आरोपी रेहान के संपर्क में था अनिल पंडित, सिग्नल-टेलीग्राम पर बातचीत और लोकेशन साझा करने की जानकारी; 45 मिनट इंतजार के बाद सात राउंड फायरिंग, फिर नेपाल भागने की योजना; क्या खुलने लगी है विदेश में बैठे हैंडलरों, स्थानीय शूटरों और अवैध हथियारों की कमांड चेन?

एम. रियाज़ हाशमी। मुंबई/ नई दिल्ली
लॉरेंस बिश्नोई गुजरात की साबरमती जेल में बंद है। उसका भाई अनमोल बिश्नोई अमेरिका से निर्वासित किए जाने के बाद दिल्ली की तिहाड़ जेल में है। बिश्नोई नेटवर्क के करीबी सहयोगी करमवीर सिंह को सितंबर 2026 में कनाडा से भारत लाकर गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके बावजूद 18 अक्टूबर को मुंबई के जुहू इलाके में अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर गोलियां चलीं। कुछ ही समय बाद अनिल पंडित और हरमन संधू के नाम से जिम्मेदारी लेने वाले संदेश और ऑडियो चर्चा में आ गए। अगले दिन राजस्थान पुलिस ने तीन आरोपियों को कोटा रेलवे स्टेशन पर पकड़ लिया।

इस मामले में अब तक का सबसे अहम सुराग कोटा पुलिस की शुरुआती पूछताछ से सामने आया है। मुख्य आरोपी रेहान उर्फ सुक्का है, जो अनिल पंडित के संपर्क में था। इस संपर्क के लिए सिग्नल और टेलीग्राम ऐप के इस्तेमाल तथा लोकेशन साझा किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस के उक्त बयान ने जांच को एक नई दिशा दी है। लेकिन अभी यह साबित होना बाकी है कि बातचीत में क्या निर्देश दिए गए, फायरिंग की योजना किसने बनाई और हमले के लिए पैसे तथा हथियार किसने मुहैया कराए?

सबसे बड़ा सवाल अब यह नहीं कि गोली किसने चलाई, बल्कि यह है कि जेलों में बंद बड़े नामों, विदेश में मौजूद संपर्कों और भारत में सक्रिय शूटरों के बीच आदेश की कड़ी कौन जोड़ रहा है? क्या अनिल पंडित इस नेटवर्क का सक्रिय संचालक है, या उसके नाम का इस्तेमाल करके गिरोह का दबदबा बढ़ाया जा रहा है? और क्या अलग-अलग शहरों में हुई फायरिंग के पीछे वास्तव में एक साझा कमांड चेन है? ‘तहलका’ की शुरूआती पड़ताल में पढ़िए कुछ सवालों के जवाब-

सात महीने, चार शहर- एक पैटर्न: पहले गोलियां, फिर जिम्मेदारी का दावा

मार्च 2026 में हरियाणा के पानीपत में हास्त फ़ॉरेक्स कार्यालय पर फायरिंग हुई। जून में दिल्ली के पश्चिम विहार में गायक गुरु रंधावा से जुड़े जिम के बाहर गोलियां चलीं। सितंबर में हरियाणवी गायक दिलेर खरकिया की रेंज रोवर पर फायरिंग हुई। अक्टूबर में मुंबई के जुहू इलाके में टाइगर श्रॉफ की कार निशाने पर आ गई।

इन घटनाओं के बाद अनिल पंडित का नाम अलग-अलग सोशल मीडिया संदेशों और मीडिया रिपोर्टों में सामने आया। पानीपत की घटना के बाद उसके और रंदीप मलिक के नाम से जिम्मेदारी लेने वाला संदेश प्रसारित हुआ। गुरु रंधावा के जिम पर फायरिंग के बाद भी पंडित के नाम से पोस्ट सामने आई। मुंबई में फायरिंग के बाद अनिल पंडित और हरमन संधू के नाम से संदेश और ऑडियो प्रसारित होने की खबरें आईं।

लेकिन चार घटनाओं में एक नाम या एक जैसी सोशल मीडिया कार्यप्रणाली दिखाई देना अपने-आप यह साबित नहीं करता कि सभी वारदातें एक ही कमांड चेन से संचालित हुईं। जांच में यह स्थापित करने की चुनौती बरकरार है कि क्या आरोपियों के संपर्क, हथियारों के स्रोत, भुगतान और हमलों के बाद संदेश जारी करने वाले लोगों के बीच कोई साझा कड़ी है?

टाइगर श्रॉफ केस: कोटा में गिरफ्तारी से खुली संपर्क की कड़ी

18 अक्टूबर को मुंबई के जुहू इलाके में पुष्पा नरसी पार्क के पास टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग हुई। अभिनेता सुरक्षित रहे। घटना के दौरान उनके ड्राइवर फिरदौस और वहां मौजूद राहगीर उमेश चरण के घायल होने की खबर सामने आई। 19 अक्टूबर को मुंबई पुलिस और राजस्थान पुलिस के समन्वय से तीन आरोपियों को कोटा रेलवे स्टेशन पर पकड़ा गया। रिपोर्टों में रेहान उर्फ सुक्का, ऋतिक कुमार उर्फ रोशन फाइटर और एक नाबालिग का नाम सामने आया। पुलिस के अनुसार, आरोपी मुंबई से निकलकर ट्रेन के जरिए आगे जाने की योजना बना रहे थे।

कोटा पुलिस की प्रेस कॉन्फ़्रेंस ने गिरफ्तारी के बाद की कहानी को अधिक महत्वपूर्ण बना दिया। एसपी सिटी कोटा तेजस्विनी गौतम के मुताबिक, शुरुआती पूछताछ में पता चला कि अनिल पंडित मुख्य आरोपी रेहान के संपर्क में था। रेहान ने अपने साथ एक नाबालिग को जोड़ा और फिर मुंबई जाकर फायरिंग की वारदात को अंजाम दिया।

यह पहला महत्वपूर्ण सिरा है: विदेश में मौजूद बताए जा रहे व्यक्ति और भारत में पकड़े गए मुख्य आरोपी के बीच संपर्क की पुलिस की शुरुआती जानकारी। हालांकि, संपर्क की प्रकृति और उसमें दिए गए निर्देशों की पुष्टि अभी जांच के अगले चरण पर निर्भर करेगी।

सिग्नल, टेलीग्राम और लोकेशन: डिजिटल संपर्क ही था माध्यम?

कोटा पुलिस ने शुरुआती पूछताछ के हवाले से कहा है कि रेहान और अनिल पंडित के बीच सिग्नल तथा टेलीग्राम ऐप के जरिए बातचीत होती थी और रेहान इन ऐप पर लोकेशन भी साझा करता था। यह जानकारी जांच के लिए अहम है। यदि डिजिटल साक्ष्यों से इसकी पुष्टि होती है, तो पुलिस के सामने बातचीत की समय-रेखा तैयार करने, लोकेशन साझा करने के समय को घटनास्थल की गतिविधियों से मिलाने और यह जानने का अवसर होगा कि संपर्क सामान्य बातचीत तक सीमित था या उसमें हमले की योजना से जुड़े निर्देश भी शामिल थे।

लेकिन यहां तीन सवालों को अलग-अलग रखना जरूरी है। पहला, क्या दोनों के बीच संपर्क हुआ? कोटा पुलिस की शुरुआती जानकारी इसका संकेत देती है।

दूसरा, क्या इस संपर्क में फायरिंग का निर्देश दिया गया? इसके लिए चैट, ऑडियो, लोकेशन डेटा और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण कराया जाएगा।

तीसरा, क्या निर्देश देने वाला व्यक्ति किसी बड़े गिरोह के नेतृत्व की ओर से काम कर रहा था? इसके लिए वित्तीय लेन-देन, अन्य आरोपियों से संपर्क और संबंधित मामलों के रिकॉर्ड का मिलान होगा।

इसलिए अनिल पंडित और रेहान के संपर्क की जानकारी महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे पूरे बिश्नोई नेटवर्क की कमांड चेन का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।

45 मिनट इंतजार, सात राउंड फायरिंग और पिस्टल जाम होने की जानकारी

फायरिंग के तरीके से भी जांच को कुछ महत्वपूर्ण सुराग मिल रहे हैं। पुलिस के हवाले से बताया गया कि हमलावरों ने घटनास्थल के पास करीब 45 मिनट इंतजार किया। टाइगर श्रॉफ की कार निकलने के बाद सात राउंड फायर किए गए। पांच गोलियां कार पर लगीं और दो निशाने से चूक गईं। यह भी बताया गया कि एक शूटर की पिस्टल जाम हो गई थी।

यदि घटनास्थल से मिले कारतूस, गोलियों के निशान और बरामद अन्य साक्ष्य इन विवरणों की पुष्टि करते हैं, तो उनसे इस्तेमाल किए गए हथियार और हमले की प्रकृति के बारे में जानकारी मिलेगी। लेकिन हथियार की तकनीकी जांच के बिना पिस्टल जाम होने के विवरण को अंतिम तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

हमले के बाद आरोपी बाइक को अंधेरी रेलवे स्टेशन के पास छोड़कर विरार की दिशा में भागे। इसके बाद उनके कोटा पहुंचने और वहां से आगे निकलने की योजना की जांच हुई। पुलिस के मुताबिक, तीनों आरोपी बचने के लिए नेपाल भागना चाहते थे। उनकी योजना पहले दिल्ली पहुंचने और उसके बाद नेपाल जाने की थी। वे ट्रेन से यात्रा कर रहे थे, तभी कोटा में उन्हें पकड़ लिया गया।

यहां एक और सवाल उठता है: फायरिंग में इस्तेमाल की गई देसी पिस्टल कहां गई? कोटा पुलिस ने गिरफ्तारी के समय आरोपियों के पास हथियार नहीं मिलने की जानकारी दी थी। यदि हथियार बरामद नहीं हुआ है, तो उसकी आपूर्ति करने वाले व्यक्ति, उसे छिपाने वाले सहयोगी और फायरिंग के बाद उसे ठिकाने लगाने की कड़ी जांच के लिए महत्वपूर्ण होगी।

पानीपत में प्रांजल की भूमिका: क्या वहां भी विदेश से आए थे निर्देश?

टाइगर श्रॉफ मामले में रेहान और अनिल पंडित के संपर्क की जानकारी सामने आने के बाद मार्च की पानीपत फायरिंग की जांच से तुलना जरूरी हो जाती है। 14 मार्च 2026 को पानीपत के हास्त फ़ॉरेक्स कार्यालय पर मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने फायरिंग की थी। इसके बाद सामने आए संदेशों में अनिल पंडित और रंदीप मलिक के नाम चर्चा में आए। मामले की जांच से जुड़े विवरणों के अनुसार, आरोपी प्रांजल ने विदेश में बैठे लोगों से संपर्क स्थापित कराने में भूमिका निभाई थी। पुलिस के मुताबिक, संदीप के बैंक खाते में 65,000 रुपये भी ट्रांसफर किए गए थे।

यहां टाइगर श्रॉफ मामले से एक महत्वपूर्ण अंतर सामने आता है। पानीपत में स्थानीय मध्यस्थ की भूमिका और बैंक खाते में रकम पहुंचने की जानकारी रिपोर्ट हुई थी। मुंबई मामले में कोटा पुलिस ने रेहान और अनिल पंडित के संपर्क की बात कही है, लेकिन किसी अलग स्थानीय मध्यस्थ की भूमिका अभी सार्वजनिक रूप से पुष्ट नहीं हुई है।

दोनों मामलों में संपर्क और पैसे की कड़ी का मिलान किया जाए, तो पता चल सकता है कि क्या एक ही नेटवर्क अलग-अलग स्थानीय लोगों के जरिए काम कर रहा था? इसके लिए बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल संवाद, आरोपियों के बयान और हथियारों के स्रोत की तुलना करनी होगी।

सबसे अहम सुराग: पोस्ट डालो, स्क्रीनशॉट भेजो और अकाउंट मिटा दो

टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग के बाद जिम्मेदारी लेने वाले संदेशों का डिजिटल स्वरूप इस पूरे मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू है। मुंबई पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि गिरोह से जुड़े जिम्मेदारी लेने वाले संदेशों की कार्यप्रणाली में बदलाव आया है। एक तरीका यह बताया गया कि सोशल मीडिया पर अकाउंट बनाकर संदेश पोस्ट किया जाए, उसका स्क्रीनशॉट लिया जाए, फिर अकाउंट हटा दिया जाए और बाद में अज्ञात नंबरों से मीडिया को स्क्रीनशॉट भेज दिया जाए।

इस तरीके का महत्व केवल तकनीकी नहीं, बल्कि जांच से जुड़ा है। स्क्रीनशॉट यह दिखा सकता है कि कोई संदेश प्रसारित हुआ था, लेकिन अकेले स्क्रीनशॉट से यह साबित करना मुश्किल हो सकता है कि संदेश किस व्यक्ति ने पोस्ट किया, अकाउंट किसके नियंत्रण में था और गोलीबारी का आदेश उसी व्यक्ति ने दिया था।

पुलिस को मूल डिजिटल सामग्री, अकाउंट संबंधी रिकॉर्ड, उपलब्ध लॉग, संदेश भेजने वाले नंबरों और आरोपियों के उपकरणों से मिले साक्ष्यों का मिलान करना होगा। ऑडियो की आवाज की पहचान, संदेश के प्रसार की समय-रेखा और संबंधित व्यक्तियों के बीच संपर्क भी जांच के दायरे में आने चाहिए।

इस पूरे मामले में जिम्मेदारी लेने वाला संदेश दो अलग संभावनाएं सामने रखता है: संदेश देने वाला व्यक्ति वास्तव में हमले के नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, या किसी दूसरे व्यक्ति ने उसका नाम इस्तेमाल किया हो सकता है। इन दोनों स्थितियों के बीच फर्क स्थापित करना जांच की बुनियादी जरूरत है।

अनिल पंडित कौन है: नाम से आगे भूमिका साबित करने की चुनौती

अनिल पंडित हरियाणा के पानीपत का निवासी और अमेरिका में सक्रिय बताया जाता है। अमेरिका पहुंचने के लिए 2024 में डंकी रूट इस्तेमाल करने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इस पृष्ठभूमि और बिश्नोई नेटवर्क से उसके संबंधों की पुष्टि के लिए पुलिस रिकॉर्ड और अन्य स्वतंत्र साक्ष्य जरूरी हैं। लेकिन, अब तक उसका नाम तीन तरह के संदर्भों में सामने आया है।

पहला, हमलों के बाद जिम्मेदारी लेने वाले संदेश। पानीपत, गुरु रंधावा के जिम और टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के बाद उसके नाम से जुड़े संदेशों की रिपोर्टें आईं।

दूसरा, स्थानीय शूटरों से संपर्क। गुरु रंधावा के जिम पर फायरिंग के मामले में गिरफ्तार लोगों के संबंधों की जांच हुई थी। आरोपियों को अनिल पंडित और हैरी बॉक्सर से जुड़ा माना जा रहा है।

तीसरा, हथियारों और रंगदारी के मामलों की कड़ी। जुलाई में दिल्ली पुलिस की एक कार्रवाई से जुड़ी रिपोर्टों में कारोबारी से रंगदारी, संभावित लक्ष्यों की रेकी और हथियारों की आपूर्ति के संदर्भ में पंडित का नाम आया था।

टाइगर श्रॉफ मामले में कोटा पुलिस की शुरुआती जानकारी इस पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां केवल किसी सोशल मीडिया पोस्ट में नाम आने की बात नहीं, बल्कि गिरफ्तार आरोपी रेहान से संपर्क का पुलिस का बयान सामने आया है।

फिर भी, यह तय करने के लिए कि पंडित ने हमले की योजना बनाई, आदेश दिए, पैसे भेजे या केवल संपर्क में था, जांच एजेंसियों को साक्ष्य पेश करने होंगे। किसी व्यक्ति का नाम कई मामलों में आना और प्रत्येक मामले में उसकी भूमिका साबित होना अलग-अलग बातें हैं।

लॉरेंस जेल में, अनमोल तिहाड़ में: क्या नेटवर्क स्थानीय मॉड्यूल से चल रहा है?

लॉरेंस बिश्नोई गुजरात की साबरमती सेंट्रल जेल में बंद है। उसका भाई अनमोल बिश्नोई नवंबर 2025 में अमेरिका से निर्वासित किए जाने के बाद दिल्ली की तिहाड़ जेल में है। अनमोल का नाम बाबा सिद्दीकी की हत्या के मामले में भी आया है और वह अन्य मामलों में जांच का सामना कर रहा है।

सितंबर 2026 में पंजाब पुलिस ने लॉरेंस के करीबी सहयोगी करमवीर सिंह को कनाडा से भारत लौटने पर दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, करमवीर ने अमेरिका में अनमोल को रहने की जगह और लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराई थी।

इससे पहले कनाडा की सीमा सेवा एजेंसी की खुफिया रिपोर्ट पर आधारित अगस्त 2026 की एक पड़ताल में बिश्नोई गिरोह से जुड़ी रंगदारी और कनाडा में उसकी गतिविधियों को लेकर चिंता जताई गई थी। रिपोर्ट में कुछ मामलों में छात्र या वर्क परमिट पर पहुंचे भारतीय नागरिकों की भूमिका का भी जिक्र था।

इन घटनाओं से एक अहम सवाल उठता है: जब गिरोह के बड़े नाम जेल में हैं और विदेश में मौजूद कुछ सहयोगियों पर भी कार्रवाई हो रही है, तो क्या नेटवर्क स्थानीय मॉड्यूल, डिजिटल संपर्कों और अलग-अलग सहयोगियों के जरिए अपनी गतिविधियां जारी रख सकता है? टाइगर श्रॉफ मामले में अनिल पंडित और रेहान के संपर्क की जानकारी इस सवाल की जांच का नया सिरा है। लेकिन लॉरेंस या अनमोल की प्रत्यक्ष भूमिका का निष्कर्ष निकालने के लिए उनके और इस मामले के आरोपियों के बीच संपर्क, निर्देश या वित्तीय लेन-देन का प्रमाण जरूरी होगा।

अब जांच की असली परीक्षा: शूटर से आगे कौन पहुंचेगा?

टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में तीन लोगों की गिरफ्तारी महत्वपूर्ण पड़ाव है। कोटा पुलिस की शुरुआती पूछताछ से अनिल पंडित और मुख्य आरोपी रेहान के बीच संपर्क की जानकारी सामने आई है। सिग्नल और टेलीग्राम पर संवाद तथा लोकेशन साझा करने के विवरण की डिजिटल साक्ष्यों से पुष्टि हो जाती है, तो जांच को हमले से पहले की गतिविधियों की समय-रेखा बनाने में मदद मिल सकती है।

लेकिन इसके बाद भी कई कड़ियां जोड़नी बाकी हैं। क्या रेहान को फायरिंग का आदेश मिला था? क्या पैसे सीधे या किसी मध्यस्थ के जरिए आए? हथियार किसने उपलब्ध कराया? क्या हरमन संधू का आरोपियों से प्रत्यक्ष संपर्क था? और क्या पानीपत, दिल्ली तथा मुंबई के मामलों में कोई साझा डिजिटल, वित्तीय या हथियारों का नेटवर्क मिलता है?

इन सवालों का जवाब धमकी भरे ऑडियो, सोशल मीडिया पोस्ट या किसी एक आरोपी के शुरुआती बयान से नहीं मिलेगा। इसके लिए डिजिटल फॉरेंसिक, बैंक रिकॉर्ड, हथियारों की जांच, सीसीटीवी फुटेज और आरोपियों के बीच संपर्क के स्वतंत्र प्रमाणों को जोड़ना होगा।

गोलियां चलाने वाले पकड़े जा सकते हैं। असली चुनौती उन लोगों तक पहुंचने की है जो कथित तौर पर हजारों किलोमीटर दूर बैठकर भारत में हमलों की योजना बनाने या उनके नाम पर डर का कारोबार चलाने का दावा करते हैं। कोटा की गिरफ्तारी ने एक महत्वपूर्ण संपर्क-कड़ी सामने रखी है। अब देखना यह है कि जांच एजेंसियां इस कड़ी को आदेश, पैसे और हथियारों के स्रोत तक पहुंचा पाती हैं या नहीं।