
तहलका डेस्क।
नई दिल्ली। तमिलनाडु की सियासत में छह दशकों से चला आ रहा द्रविड़ दलों का वर्चस्व एक ऐतिहासिक मोड़ पर आकर ठहर गया है। तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के प्रमुख विजय ने राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से राजभवन में तीसरी बार मुलाकात कर सरकार बनाने का औपचारिक दावा पेश कर दिया है। 234 सदस्यीय विधानसभा के हालिया चुनावी नतीजों में टीवीके 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है।
ताजा जानकारी के अनुसार, राज्यपाल द्वारा दावे को हरी झंडी मिलने के बाद अब 9 मई को सुबह 11 बजे जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां युद्धस्तर पर जारी हैं, जो राज्य में एक नए राजनीतिक युग का आधिकारिक आरंभ होगा।
मालूम हो कि विजय ने दो सीटों, पेरम्बूर और तिरुचिरापल्ली ईस्ट से जीत दर्ज की है, जिसके चलते उन्हें नियमानुसार एक सीट से इस्तीफा देना होगा। इस इस्तीफे के बाद सदन की प्रभावी संख्या 233 रह जाएगी और बहुमत के लिए जादुई आंकड़ा 117 पर टिक जाएगा।
वर्तमान समीकरणों में टीवीके के 107 विधायकों के साथ कांग्रेस (5), सीपीआई (2) और सीपीएम (2) के बिना शर्त समर्थन ने विजय की ताकत को 116 तक पहुंचा दिया है। अब सारा दारोमदार वीसीके (VCK) के दो विधायकों पर है, जिनसे समर्थन मिलने की प्रबल संभावनाओं के बीच टीवीके बहुमत के पार जाती दिख रही है।

तमिलनाडु में ‘विजय’ पथ: अकेले लड़े थे विजय लेकिन अब एक-एक कर साथ आईं पांच पार्टियां और कारवां बनता चला गया…Pic Credit : TOI
इस राजनीतिक पुनर्गठन में वामपंथी दलों की भूमिका ‘धुरी’ के समान रही है। सीपीआई नेता डी. राजा और सीपीएम के के. बालाकृष्णन ने राज्य में राष्ट्रपति शासन की किसी भी आशंका को खारिज करते हुए एक धर्मनिरपेक्ष और चुनी हुई सरकार की आवश्यकता पर जोर दिया है।
कांग्रेस का डीएमके से नाता तोड़कर टीवीके के पक्ष में खड़ा होना राज्य की पारंपरिक चुनावी इंजीनियरिंग के पूरी तरह ध्वस्त होने का प्रमाण है। वामपंथी नेताओं का तर्क है कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते टीवीके के पास जनादेश का नैतिक अधिकार है।
इस बीच, विजय की सक्रियता और गठबंधन सहयोगियों के दफ्तरों में उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति यह संकेत देती है कि वे एक समावेशी शासन की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। हालांकि वामपंथी दलों ने सरकार का हिस्सा बनने के बजाय बाहर से समर्थन देने का फैसला किया है।



