
तहलका डेस्क।
नई दिल्ली/गुवाहाटी। असम की राजनीतिक दिशा को एक बार फिर अनुभवी नेतृत्व के हाथों में सौंपते हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद का दायित्व संभाल लिया। गुवाहाटी के खानापारा स्थित वेटरनरी ग्राउंड में आयोजित एक गरिमामय और विशाल समारोह के दौरान राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने सरमा को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। यह क्षण न केवल सरमा के व्यक्तिगत राजनीतिक सफर के लिए मील का पत्थर साबित हुआ, बल्कि इसने राज्य में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी पर भी मुहर लगा दी।
इस सत्ता हस्तांतरण के साथ ही मंत्रिमंडल के गठन की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है, जिसमें क्षेत्रीय संतुलन और अनुभव का तालमेल देखने को मिला। मुख्यमंत्री के साथ चार प्रमुख विधायकों ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। इनमें भारतीय जनता पार्टी से रामेश्वर तेली और अजंता नेओग शामिल हैं, जबकि गठबंधन के सहयोगी दलों से असोम गण परिषद (अगप) के अतुल बोरा और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) के चरण बोरो ने मंत्री पद की शपथ लेकर सरकार में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की।
समारोह की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित देश के शीर्ष नेतृत्व ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। केंद्रीय मंत्री अमित शाह, राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी जैसे कद्दावर नेताओं के साथ-साथ भाजपा शासित विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री भी इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने। चुनावी आंकड़ों पर गौर करें तो 126 सीटों वाली असम विधानसभा में एनडीए ने रिकॉर्ड 102 सीटों पर विजय पताका फहराकर विपक्ष को हाशिए पर धकेल दिया है। इसमें भाजपा की अपनी 82 सीटों के साथ-साथ एजीपी और बीपीएफ की 10-10 सीटों के योगदान ने इस जीत को असम के इतिहास की सबसे बड़ी जीतों में से एक बना दिया है। यह जनादेश स्पष्ट रूप से राज्य में विकास और स्थिरता के पक्ष में जाता दिख रहा है।



