
रिपोर्ट: एम. रियाज़ हाशमी
रक्षा मंत्रालय की ‘वार्षिक रिपोर्ट 2025-26’ में बड़ा खुलासा: 2024 में सिर्फ 2, 2025 में 163 सीजफायर उल्लंघन; 863 ड्रोन घुसे, 237 मार गिराए; पंजाब आईबी सेक्टर में ड्रोन से हथियार और नशे की तस्करी बढ़ी
नई दिल्ली । 14 सितंबर, 2026 — पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव और ऑपरेशन सिंदूर के बावजूद पाकिस्तान की तरफ से सीमा पर खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। वर्ष 2025 में जम्मू-कश्मीर की लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) पर कुल 163 सीजफायर उल्लंघन दर्ज किए गए। इनमें से 124 उल्लंघन ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुए। इसके अलावा आतंकवादियों ने एलओसी के जरिए घुसपैठ की छह कोशिशें कीं, जिनमें 12 पाकिस्तानी आतंकवादी मारे गए।
यह जानकारी रक्षा मंत्रालय की ‘वार्षिक रिपोर्ट 2025-26’ में सामने आई है, जो ‘तहलका’ के हाथ लगी है। रिपोर्ट के मुताबिक, एलओसी पर घुसपैठ की आवृत्ति पिछले वर्षों के मुकाबले कम हुई है, लेकिन आतंकियों ने अब इंटरनेशनल बॉर्डर के रास्ते गतिविधियां बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया है। इसमें नशीले पदार्थों और युद्ध जैसी सामग्री की तस्करी शामिल है।
2024 में सिर्फ 2, 2025 में 163 सीजफायर उल्लंघन
रिपोर्ट में पिछले वर्षों के आंकड़ों की तुलना करते हुए बताया गया है कि 2024 में एलओसी पर सिर्फ दो सीजफायर उल्लंघन दर्ज किए गए थे। इसके मुकाबले 2025 में यह संख्या बढ़कर 163 हो गई। इनमें से 124 उल्लंघन ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुए। यानी पूरे साल दर्ज सीजफायर उल्लंघनों का बड़ा हिस्सा उसी सैन्य अभियान के दौरान सामने आया। रिपोर्ट में ऑपरेशन सिंदूर को पहलगाम हमले के बाद भारत की आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक सैन्य कार्रवाई के तौर पर पेश किया गया है।
ऑपरेशन सिंदूर आतंक के खिलाफ दृढ़ इच्छा शक्ति बना
रिपोर्ट के मुताबिक, 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसरन वैली में पाकिस्तान आधारित आतंकवादियों ने पर्यटकों की हत्या की थी। इसके बाद भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत कार्रवाई की। सेना की रिपोर्ट में ऑपरेशन सिंदूर को भारत की आतंकवाद के खिलाफ दृढ़ इच्छाशक्ति, निर्णायक नेतृत्व और संयुक्त सैन्य क्षमता का प्रदर्शन बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस अभियान में भारतीय सेना ने पाकिस्तान के आतंकवादी ढांचे के खिलाफ गहराई तक कार्रवाई की और इसे केवल ऑपरेशनल सफलता ही नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संदेश के रूप में भी देखा गया।
घुसपैठ घटी, लेकिन 12 पाकिस्तानी आतंकवादी मारे गए
रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में आतंकवादियों ने घुसपैठ की छह कोशिशें कीं। एलओसी पर घुसपैठ का प्रयास करते हुए 12 पाकिस्तानी आतंकवादियों को मार गिराया गया। हालांकि रिपोर्ट यह भी कहती है कि एलओसी पर घुसपैठ की आवृत्ति पिछले वर्षों की तुलना में कम हुई है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि घुसपैठ का खतरा समाप्त हो गया। सेना के आकलन के मुताबिक, आतंकियों की गतिविधियां अब इंटरनेशनल बॉर्डर सेक्टर की ओर ज्यादा केंद्रित होती दिख रही हैं।
इंटरनेशनल बॉर्डर की ओर बदला आतंकियों का फोकस
रिपोर्ट में बताया गया है कि इंटरनेशनल बॉर्डर के रास्ते अब नशीले पदार्थों और युद्ध जैसी सामग्री की तस्करी की कोशिशों पर ज्यादा जोर दिखाई दे रहा है। इस बदलाव के साथ ड्रोन का इस्तेमाल भी एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आया है। भारतीय सेना के मुताबिक, विरोधी ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी और हथियार, गोला-बारूद तथा नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए कर रहा है, खासकर पंजाब के आईबी सेक्टर में।
एक साल में 863 ड्रोन घुसे, सेना ने 237 मार गिराए
पश्चिमी सीमा पर ड्रोन गतिविधियों का आंकड़ा भी रिपोर्ट में दिया गया है। वर्ष 2025 में कुल 863 ड्रोन घुसपैठ की घटनाएं दर्ज हुईं। इनमें जम्मू-कश्मीर के आईबी सेक्टर में 9 और पंजाब तथा राजस्थान के आईबी सेक्टर में 854 घटनाएं हुईं। भारतीय सुरक्षा बलों ने इस दौरान 237 ड्रोन मार गिराए। इनमें पांच ड्रोन युद्ध जैसी सामग्री लेकर आए थे, 72 ड्रोन में नशीले पदार्थ थे, जबकि 161 ड्रोन बिना किसी पेलोड के थे। इंटरनेशनल बॉर्डर के पास 281.41 किलोग्राम संदिग्ध सामग्री भी बरामद हुई, जिसे संभवतः ड्रोन के जरिए पहुंचाया गया था। सेना ने इसे सीमा पार से ड्रोन के जरिए निगरानी और हथियार, गोला-बारूद तथा नशीले पदार्थों की तस्करी की बढ़ती कोशिशों से जोड़ा है।
जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान के ‘प्रॉक्सी वॉर’ का भी जिक्र
रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर के भीतरी इलाकों में आतंकवाद विरोधी अभियानों का भी उल्लेख है। इसके मुताबिक, 2025 में इन अभियानों में 19 आतंकवादी मारे गए, जिनमें 8 पाकिस्तानी आतंकवादी थे। रक्षा मंत्रालय ने इन आंकड़ों के आधार पर कहा है कि यह जम्मू-कश्मीर में प्रॉक्सी वॉर चलाने में पाकिस्तान की भूमिका को स्पष्ट रूप से दिखाता है।
स्थानीय युवाओं की आतंकी भर्ती में भी बड़ी गिरावट
रिपोर्ट पाकिस्तान के उस नैरेटिव का भी उल्लेख करती है जिसमें जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को स्थानीय स्तर का आंदोलन बताया जाता है। सेना के मुताबिक, स्थानीय युवाओं ने हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है और सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में सिर्फ एक स्थानीय युवक आतंकवादी संगठनों में शामिल हुआ। सेना ने इसे पाकिस्तान के ‘होम-ग्रोन टेररिज्म’ के नैरेटिव के लिए झटका बताया है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना ने कमियों की समीक्षा की
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सेना ने सिर्फ ऑपरेशन की समीक्षा तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि अपनी सैन्य क्षमताओं में मौजूद कमियों की भी व्यापक समीक्षा की। रिपोर्ट के मुताबिक, इसके तहत फोर्स रिस्ट्रक्चरिंग, जॉइंटनेस और इमर्जिंग टेक्नोलॉजी को शामिल करने पर विशेष ध्यान दिया गया। ऑपरेशन से मिले अनुभवों के आधार पर सेना ने जरूरी सैन्य क्षमताओं को तेजी से मजबूत करने के लिए घरेलू और विदेशी रक्षा कंपनियों, अकादमिक संस्थानों तथा रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों से संपर्क किया।
यूएएस से इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर तक इमरजेंसी खरीद
9 मई 2025 को विशेष डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (डीएसी) की बैठक में इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट-2025 के तहत जरूरी पूंजीगत खरीद को मंजूरी दी गई। रिपोर्ट के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के पहले चरण से मिले सबक के आधार पर भारतीय सेना ने अपनी क्षमताओं में मौजूद महत्वपूर्ण कमियों को दूर करने के लिए खास तौर पर यूएएस (अनमैन्ड एरियल सिस्टम), सी-यूएएस (काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम), लॉइटर म्यूनिशन, एयर डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षेत्रों पर जोर दिया। रिपोर्ट इसे भारतीय सेना की क्षमता बढ़ाने के लिए तत्काल उठाया गया कदम बताती है।
ऑपरेशन सिंदूर में मिले विदेशी ड्रोन और मिसाइलें
रिपोर्ट में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बरामद और नष्ट किए गए कुछ हथियारों और ड्रोन का भी उल्लेख है। सेना ने नॉर्दर्न कमांड क्षेत्र में 220 यूएक्सओ (अनएक्सप्लोडेड ऑर्डनेंस) और वेस्टर्न कमांड क्षेत्र में 13 यूएक्सओ नष्ट किए। तीन ड्रोन के मलबे को आगे की जांच के लिए सुरक्षित किया गया। इनमें से एक की पहचान तुर्किये मूल के बायकर वाईआईएचए-III के रूप में हुई। वेस्टर्न कमांड ने तुर्किये के बायराक्तर टीबी-2 से गिराए गए एमएएम म्यूनिशन और दो पीएल-15 मिसाइलों को भी सैनिटाइज किया।
सीजफायर के बाद स्थिति स्थिर, लेकिन खतरा खत्म नहीं
रिपोर्ट के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जम्मू-कश्मीर और एलओसी की स्थिति में महत्वपूर्ण बदलाव आया था। इसके बाद 10 और 12 मई 2025 को डायरेक्टर जनरल्स ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (डीजीएमओ) स्तर की बातचीत हुई। रिपोर्ट कहती है कि इसके बाद स्थिति काफी हद तक स्थिर हुई, हालांकि अनिश्चितता बनी हुई है। इस तरह रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट पाकिस्तान मोर्चे की एक ऐसी तस्वीर पेश करती है जिसमें एक तरफ ऑपरेशन सिंदूर के बाद सैन्य कार्रवाई और सीजफायर के चलते स्थिति में स्थिरता आई, वहीं दूसरी तरफ एलओसी पर सीजफायर उल्लंघन, घुसपैठ के प्रयास और आईबी पर ड्रोन के जरिए हथियार व नशीले पदार्थ पहुंचाने की कोशिशें जारी रहीं। इसी बदलती चुनौती के जवाब में भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों से अपनी युद्धक क्षमताओं को और मजबूत करने की प्रक्रिया शुरू की।
