Home Blog Page 90

महाराष्ट्र में बने लाखों बांग्लादेशियों के फ़र्ज़ी प्रमाण-पत्र

के.रवि (दादा)

 महाराष्ट्र में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों की कमी नहीं है। सूत्र ऐसा बताते हैं कि मुंबई में तो ख़ासतौर पर अवैध रूप से रहने वालों की आबादी बहुत ज़्यादा है। इसके साथ ही मुंबई में अनगिनत लोग बिना पहचान प्रमाण-पत्रों के रह रहे हैं। ऐसे लोगों की ज़्यादातर आबादी घनी आबादी वाले इलाक़ों में है। एशिया के सबसे बड़े स्लम एरिया धारावी में सबसे ज़्यादा बांग्लादेशी होने का अंदेशा है। पिछले साल चुनी गयी महायुति सरकार में देवेंद्र फडणवीस के कमान सँभालने के बाद पिछले दिनों विधानसभा में बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर आवाज़ उठी। इसके बाद सरकार ने बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान करने का हुक्म दे दिया। महायुति सरकार में गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने हाल ही में कहा है कि बांग्लादेशियों को लेकर सरकार के रुख़ में कोई नरमी नहीं आयी है। अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशियों को सरकार किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं करेगी।

हाल ही में भाजपा नेता किरीट सोमैया ने आरोप लगाया था कि महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं के फ़र्ज़ी जन्म प्रमाण-पत्र जारी किये जा रहे हैं। जैसे ही इसके बाद नासिक ज़िले की मालेगाँव तहसील में जन्म प्रमाण-पत्र बनाने में हो रही धाँधली की ख़बर मिलते ही राजस्व विभाग के दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया। लेकिन इस मामले के बाद अवैध रूप से घुसपैठ कर चुके बांग्लादेशियों के मामले ने तूल पकड़ लिया। पर भाजपा नेता किरीट सोमैया ने सोशल मीडिया पर एक चौंकाने वाली पोस्ट लिखी, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि इस तहसील में फ़र्ज़ी प्रमाण-पत्रों के आधार पर 3,977 बांग्लादेशी रोहिंग्याओं के जन्म प्रमाण-पत्र जारी किये गये हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के फ़ैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह बहुत ही गंभीर मुद्दा है।

भाजपा सूत्रों और ख़बरों की मानें, तो महाराष्ट्र में बीते साल मे ही 2.14 लाख से ज़्यादा बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं ने जन्म प्रमाण-पत्र के लिए आवेदन किया था और अभी यह आवेदन का सिलसिला जारी है। किरीट सोमैया ने यहाँ तक कहा है कि संदिग्ध तरीक़े से क़रीब 1.13 लाख से ज़्यादा जन्म प्रमाण-पत्र इन बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं के जारी हो चुके हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रोहिंग्याओं के फ़र्ज़ी प्रमाण-पत्रों को जारी करने वाले अधिकारियों के ख़िलाफ़ख़्त कार्रवाई के आदेश दिये हैं। सोमैया ने दावा किया कि है कि सिर्फ़ जालना ज़िले में 7,957 फ़र्ज़ी जन्म प्रमाण-पत्र जारी किये गये हैं और इस ज़िले के भोकरदन तहसील में फ़र्ज़ी जन्म प्रमाण-पत्र बनवाने के सबसे ज़्यादा आवेदन मिले हैं।

महायुति सरकार ने महाराष्ट्र में अवैध बंगलादेशियों और रोहिंग्याओं के साथ-साथ फ़र्ज़ी प्रमाण-पत्र बनाने वाले रैकेट को पकड़ने के लिए दो ज़िलों में दो एसआईटी दल बनाये हैं। हालाँकि हर ज़िले में एसआईटी के गठन की ज़रूरत है। ऐसी जानकारी निकलकर सामने आ रही है कि मुंबई में फ़र्ज़ी प्रमाण-पत्र बनने का काम महायुति सरकार में भी एकनाथ शिंदे के मुख्यमंत्री रहते ख़ूब हुआ है। सालोंसाल से मुंबई में रहने वाले बांग्लादेशियों के पास फ़र्ज़ी आधार कार्ड, फ़र्ज़ी वोटर कार्ड, फ़र्ज़ी इंडियन पासपोर्ट, फ़र्ज़ी राशन कार्ड, फ़र्ज़ी पेन कार्ड, फ़र्ज़ी मेरिज सर्टिफिकेट बने हुए हैं। ये लोग अपनी असली पहचान छुपाकर महाराष्ट्र, ख़ासतौर पर मुंबई में रहकर काम करते हैं और इनके पास बैंक अकाउंट, घर-मकान और डोमिसाइल सर्टिफिकेट भी हैं। अभी तक महाराष्ट्र सरकार ने सैकड़ों की संख्या में फ़र्ज़ी प्रमाण-पत्र बरामद किये हैं।

बांग्लादेशियों और दूसरे अवैध लोगों के प्रमाण-पत्र बनाने का काम चाहे किसी भी सरकार में हुआ हो, पर अब ऐसे लोगों की पहचान करके उन्हें देश निकाला दिया जाना चाहिए, जिससे मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र से अवैध भीड़ को निकाला जा सके। पिछली सरकारों ने बिहार और यूपी के लोगों को लेकर तो सख़्ती दिखायी है, पर बांग्लादेशियों की अवैध घुसपैठ लेकर कोई ख़याल किसी के मन में नहीं रहा, जिसका नतीजा यह हुआ कि इनकी आबादी पूरे महाराष्ट्र में लाखों में हो गयी। यह अच्छी बात है कि महायुति सरकार इनकी पहचान करके इनके फ़र्ज़ी प्रमाण-पत्र बनाने वालों की भी पहचान कर रही है। पर ख़ाली इतने से काम नहीं चलने वाला, इन अवैध घुसपैठियों को महाराष्ट्र सरकार के अलावा केंद्र सरकार को भी भारत से ही खदेड़ने का काम करना होगा। वैसे तो आये दिन पुलिस वाले बांग्लादेशियों को पकड़कर उनकी हद तक छोड़कर आने के प्रयास वर्षों से कर रहे हैं। पर मुंबई हो या महाराष्ट्र का कोई भी कोना हो, वहाँ से पुलिस जब बांग्लादेश की सीमा तक छोड़ने जाती है, तब पुलिस वालों को काफ़ी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। राज्य के मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस कोई ऐसा मार्ग निकालें, जिससे पुलिस आसानी से बांग्लादेशियों को राज्य से खदेड़ सके और महाराष्ट्र की जनता के साथ-साथ पुलिस को भी राहत मिल सके।

कांग्रेस दिल्ली में विधायकों की गिनती करें, पंजाब में आप विधायकों की फिक्र छोड़ें: भगवंत मान

नई दिल्ली :दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में हार के बाद आज आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल के आह्वान पर दिल्ली में पंजाब के विधायकों की बैठक हुई। बैठक में शामिल होने के लिए पंजाब के विधायक कपूरथला हाउस पहुंचे थे। बैठक के एजेंडे को लेकर अबतक कुछ भी स्पष्ट नहीं हो सका। बैठक में हिस्सा लेने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान भी पहुंचे। बैठक के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बताया कि दिल्ली चुनाव में पंजाब की टीम की मेहनत पर अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने टीम की पीठ थपथपाई। 

पंजाब के मुख्ममंत्री ने कहा कि दिल्ली का जनादेश सिर माथे है। हार-जीत तो चलती रहती है। देश में पंजाब को मिसाल बनाएंगे। पहले भी काम करते थे और अब भी काम करेंगे। पंजाब को हर स्तर पर पहचान दिलाएंगे। पंजाब को विकास का नया मॉडल बनाएंगे। हमारे कार्यकर्ता किसी लालच में नहीं आते। कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा के इस दावे की आम आदमी पार्टी के 30 विधायक कांग्रेस के संपर्क में हैं, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा, वह पिछले तीन साल से यही दावा कर उन्हें आप विधायकों को छोडक़र पहले दिल्ली में कांग्रेस के विधायकों की संख्या गिननी चाहिए। 

भगवंत मान ने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली चुनाव में विधायकों को मेहनत करने पर धन्यवाद कहा है। पंजाब सरकार लोगों के लिए काम करती रहेगी। जो काम 75 सालों में नहीं हो पाया। वो काम आप ने 10 साल में करके दिखाए। हम दिल्ली जैसा मॉडल पंजाब में करके दिखाएंगे। हम साथ काम करेंगे। हमारी पार्टी काम करने के लिए जानी जाती है।

महाकुंभ से लौट रही श्रद्धालुओं की बस जबलपुर में भीषण हादसे की शिकार

मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में आज सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे में सात लोगों की जान चली गई। हादसा सिहोरा के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-30 (NH-30) पर मोहला बरगी के निकट हुआ, जहां प्रयागराज महाकुंभ से लौट रहे श्रद्धालुओं से भरी एक मिनी बस और एक ट्रक की टक्कर हो गई।

पुलिस के अनुसार, दुर्घटना मंगलवार सुबह हुई। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि मिनी बस में सवार सभी श्रद्धालु आंध्र प्रदेश के रहने वाले थे और हाल ही में प्रयागराज महाकुंभ में स्नान करके अपने घर लौट रहे थे।

हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम घटनास्थल पर पहुंची। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया है, जबकि मृतकों के परिजनों को घटना की जानकारी दे दी गई है। जबलपुर के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक भी घटनास्थल के लिए रवाना हो गए हैं।

पुलिस ने बताया कि दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है। फिलहाल, स्थिति नियंत्रण में है और आगे की कार्रवाई जारी है।

अब ब्रिटेन भी ट्रंप की राह पर, 19 हजार अवैध प्रवासी किए बाहर

लंदन: अमेरिका ने हाल ही में कई देशों के अवैध प्रवासियों को बाहर निकाला है। अब ट्रंप जैसा ही ऐक्शन ब्रिटेन में भी शुरू हुआ है। ब्रिटेन में लेबर पार्टी के सत्ता में आने के बाद से करीब 19000 अवैध प्रवासियों और अपराधियों को देश से बाहर कर गया है। इन लोगों को डिपोर्ट करने का एक वीडियो भी ब्रिटिश सरकार की ओर से जारी किया गया है। पूरे देश में ही अवैध प्रवासियों के खिलाफ यह अभियान चलाया गया है। इसके लिए छापेमारी की गई है, जिसमें बड़ी संख्या में अवैध प्रवासी पाए गए।

इस अभियान के तहत भारतीय रेस्तरां, नेल बार, स्टोर और कार वॉश में छापेमारी की गई है। इनमें बड़ी संख्या में अवैध प्रवासियों को काम पर रखे जाने की शिकायतें मिली थीं। ब्रिटिश होम मिनिस्टर ने कहा कि उनके विभाग ने जनवरी में बड़े पैमाने पर छापेमारी की है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार आने के बाद से कुल 19000 लोगों को डिपोर्ट किया गया है। जनवरी महीने में ही 828 परिसरों पर रेड मारी गई है और 609 लोगों को गिरफ्तार किया गया। बीते साल की जनवरी के मुकाबले यह 73 फीसदी ज्यादा नंबर था। 7 लोगों को तो अकेले हंबरसाइड स्थित भारतीय रेस्तरां में छापा मारकर अरेस्ट किया गया। इसके अलावा 4 को हिरासत में लिया गया है।

इसके अलावा ब्रिटिश संसद में नया बिल भी पेश किया गया है। इस विधेयक में सीमा सुरक्षा, शरण और अवैध प्रवासियों को बाहर करने का प्रस्ताव रखा गया है। ब्रिटिश सांसदों का कहना है कि इस विधेयक को लाने से बड़ी संख्या में आपराधिक गैंगों को खत्म करने में मदद मिलेगी। ब्रिटिश सरकार ने उन संस्थानों को भी फाइन लगाने का फैसला लिया है, जो अवैध प्रवासियों को नौकरी देंगे। ऐसे मामलों में प्रति व्यक्ति 60 हजार पाउंड का फाइन लगाने का फैसला लिया गया है।

आप विधायक अमानतुल्लाह खान की बढ़ी मुश्किलें, पुलिस कर सकती है गिरफ्तारी

नई दिल्ली: दिल्ली की ओखला सीट से आप विधायक अमानतुल्लाह खान की मुसीबतें बढ़ती दिखाई दे रही हैं। अमानतुल्लाह को पकड़ने के लिए दिल्ली पुलिस जॉइंट ऑपरेशन चला रही है। आप विधायक की गिरफ्तारी किसी भी वक्त हो सकती है। बता दें कि हत्या की कोशिश मामले में सोमवार को भगोड़े अपराधी को फरार करवाने और सरकारी काम में बाधा डालने के मामले में अमानतुल्लाह खान पर FIR दर्ज की गई थी।

अमानतुल्लाह खान पर पुलिस ने दंगे से जुड़ी बीएनएस की धारा भी लगाई है। क्योंकि अमानतुल्लाह पर भीड़ इकठ्ठा करने और माहौल बिगाड़ने की कोशिश का आरोप है। इसलिए पुलिस ने उन पर बीएनएस की धारा 191(2) लगाई है। आप विधायक पर बीएनएस की धारा 190 भी लगाई गई है। जिसका मतलब होता है कि अगर कोई व्यक्ति गैरकानूनी सभा का हिस्सा था और उस सभा के मकसद के तहत कोई अपराध हुआ, तो उस व्यक्ति को भी दोषी माना जाएगा। अमानतुल्लाह और उनके समर्थकों पर इन धाराओं में मामला दर्ज हुआ है, उनमें से कई धाराएं गैरजमानती हैं।

आप विधायक अमानतुल्लाह के खिलाफ सोमवार को जामिया में पुलिस कार्रवाई में बाधा डालने का मामला दर्ज किया गया था। जानकारी के मुताबिक दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने जामिया में शाहबाज खान को हिरासत में लेने के लिए अभियान चलाया था, उस पर हत्या की कोशिश का आरोप था। पुलिस ने जब आरोपी को हिरासत में लिया, तब अमानतुल्लाह खान के समर्थकों ने उसकी गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए वहां पर माहौल खराब कर दिया। वहां तनाव पैदा हो गया। पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच हुई झड़प और धक्का-मुक्की के दौरान आरोपी शाहबाज खान वहां से फरार हो गया। पुलिस ने अमानतुल्लाह खान और उनके समर्थकों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया था। अब उनकी तलाश की जा रही है।

महिलाओं की राजनीतिक हिस्सेदारी बढ़ाएँ पार्टियाँ

दिल्ली में 05 फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए मतदाताओं को लुभाने के लिए आम आदमी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी व कांग्रेस के बीच होड़ लगी हुई है। बीते कुछ दशकों में भारतीय राजनीति का परिदृश्य इस बात का गवाह है कि महिला मतदाता राजनीतिक दलों के लिए बहुत महत्त्व रखते हैं। विशेषतौर पर चुनाव से कुछ महीने पहले राजनीतिक दल महिला मतदाताओं को गेम चेंजर्स के रूप में आँकने लगते हैं और उनका वोट पाने के लिए कई ऐलान करने लगते हैं। ऐसा ही परिदृश्य साफ़ तौर पर देश की राजधानी दिल्ली में दिखायी दे रहा है।

दिल्ली में कुल 1.55 करोड़ मतदाताओं में 83.89 लाख पुरुष मतदाता व 71.74 लाख महिला मतदाता हैं। इन महिला मतदाताओं के सहारे राजनीतिक दल सत्ता पाने के लिए बेताब तो हैं; लेकिन उन्हें किसी भी चुनाव में उनकी आबादी के अनुपात में राजनीतिक हिस्सेदारी उनके साथ न्याय नहीं करते। यह मुद्दा बहुत-ही अहम है और इस पर विमर्श सिर्फ़ चुनावी मौसम तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। क्योंकि दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार ने उन्हें मुफ़्त बस यात्रा का तोहफ़ा तो पिछले पाँच साल में दिया; लेकिन दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में से सिर्फ़ नौ को टिकट दिया।

वहीं राजनीति में महिलाओं को 33 प्रतिशत हिस्सेदारी देने का बिल पास करने वाली ने भी 70 में सिर्फ़ नौ महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया है। कांग्रेस भी महिलाओं को आगे लेकर चलने की बात करती रही है; लेकिन उसने टिकट सिर्फ़ आठ महिलाओं को ही दिये हैं। यानी सभी पार्टियों ने कुल 26 महिला उम्मीदवार ही मैदान में उतारी हैं। चुनाव लड़ने वाले कुल उम्मीदवार 210 हैं। वर्ष 2020 चुनाव में भी आम आदमी पार्टी ने नौ, कांग्रेस ने आठ और भाजपा ने सिर्फ़ पाँच महिलाओं को ही टिकट दिये थे। इसमें आप की नौ में से आठ महिलाओं को सफलता मिली थी, जबकि भाजपा व कांग्रेस की एक भी महिला नहीं जीत सकी। बता दें कि वर्ष 2023 में संसद व विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण वाला क़ानून पारित हो चुका है; लेकिन यह लागू नहीं हुआ है।

दिल्ली में शीला दीक्षित, सुषमा स्वराज दिल्ली की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं और आतिशी सिंह मौज़ूदा मुख्यमंत्री हैं। कांग्रेस की शीला दीक्षित तो 15 साल तक यानी तीन बार लगातार दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं। भाजपा की सुषमा स्वराज भी महज़ 52 दिन की मुख्यमंत्री रहीं और अब आप की आतिशी सिंह 21 सितंबर, 2024 से मुख्यमंत्री हैं। तीनों राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी महिला मुख्यमंत्री तो बनायीं; लेकिन महिलाओं को टिकट देने में औसत 15 प्रतिशत के क़रीब ही रहता है। राजनीतिक दल बिना क़ानून के ही आगे बढ़कर टिकट बँटवारे में 30 प्रतिशत महिलाओं को भी अपना-अपना उम्मीदवार क्यों नहीं बनाते?

हर राजनीतिक दल टिकट बँटवारे के लिए स्वतंत्र है, फिर क्या कारण हैं कि महिलाओं को टिकट वितरण में पीछे रखा जाता है और उनका वोट पाने के लिए वादों और योजनाओं की झड़ी लगा देते हैं? दिल्ली में आप ने वादा किया है कि सत्ता में आने पर महिलाओं को हर महीने 2,100 रुपये देंगे तो कांग्रेस व भाजपा ने 2,500 रुपये देने का वादा किया है। भाजपा ने तो हर गर्भवती महिला को 21,000 रुपये देने का ऐलान भी अपने संकल्प-पत्र में किया है और साथ में यह भी कहा है कि विधवा पेंशन 2,500 से बढ़ाकर 3,000 रुपये कर देंगे। महिला सुरक्षा के मुद्दे पर गंभीर चुनावी चर्चा नहीं हो रही। महिलाएँ क्या नक़द रक़म या अप्रत्यक्ष रूप से उन्हें लाभ पहुँचाने वाली सरकारी योजनाओं से ही सशक्त होंगी? यह नज़रिया आधी दुनिया को पूरा सशक्त नहीं बनाता। उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी उन्हें मिलनी चाहिए।

दरअसल महिला मुद्दों पर काम करने वालों की सोच में महिलाओं को काम के समान अवसर देने की दिशा में सरकार को काम करने की दरकार है। आर्थिक गतिविधियों में महिलाओं की अधिक-से-अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ठोस प्रयास की ज़रूरत है पर चुनावी अभियानों में दूरगामी विजन का अभाव दिखता है और नक़द रक़म सरीख़े शॉर्ट टर्म समाधान पेश किये जाते हैं। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और इसकी सत्ता में महिलाओं का उच्च स्तर पर प्रतिनिधित्व आँकड़ों में अधिक झलकना चाहिए व निर्णायक स्तर पर भी उसकी छाप दिखनी चाहिए। दिल्ली में 1993 से 2020 तक सभी विधानसभा चुनावों में केवल 39 महिला विधायक ही विधानसभा पहुँची। 1998 में दिल्ली विधानसभा में सर्वाधिक नौ महिला उम्मीदवार विधायक बनी थीं। 2024 आम चुनाव में 74 महिला सदस्यों ने जीत हासिल की थी यानी 13.62 प्रतिशत। 2019 में यह संख्या 78 थी। कांग्रेस नेता प्रियंका गाँधी ने 2024 में ही वायनाड से लोकसभा उपचुनाव में जीत हासिल की और अब लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या 75 हो गयी है। दिल्ली में 2025 विधानसभा में कितनी महिलाएँ विधानसभा में पहुँचेगी, इसका पता तो 08 फरवरी को नतीजे वाले दिन ही पता चलेगा। क्या 1998 का रिकॉर्ड टूटेगा?

कौन बनेगा दिल्ली का नया मुख्यमंत्री, रेस में बीजेपी के ये 5 बड़े नेता

नई दिल्ली :  दिल्ली विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने बड़ी जीत हासिल की है। वहीं, आम आदमी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। नतीजे आने के बाद अब दिल्लीवालों के दिल में ये सवाल उठ रहा है कि आखिर दिल्ली का सीएम किसे बनाया जाएगा। हालांकि बीजेपी ने सीएम उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है, लेकिन सीएम पद की रेस में पार्टी के इन 5 नेताओं के नाम लिस्ट में आगे चल रहे है।

सूत्रों का कहना कि दिल्ली में मुख्यमंत्री पद की रेस में प्रवेश वर्मा, सतीश उपाध्याय, आशीष सूद, जितेंद्र महाजन और विजेंद्र गुप्ता आगे चल रहे हैं।

प्रवेश वर्मा
सीएम पद की दौड़ में शामिल होने वालों में सबसे पहला नाम प्रवेश वर्मा का बताया जा रहा है। पूर्व सांसद प्रवेश साहिब सिंह वर्मा नई दिल्ली सीट पर आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल को हराने के बाद भाजपा के लिए एक प्रमुख व्यक्ति बन गए। प्रवेश वर्मा जोकि दिल्ली के पूर्व सीएम साहिब सिंह वर्मा के बेटे व जाट है। उन्होंने बाहरी दिल्ली के होने के बावजूद नई दिल्ली में दम दिखाया है। जाट सीएम बनाने से ग्रामीण दिल्ली, पश्चिम यूपी, हरियाणा और राजस्थान के जाट वोटरों तक मैसेज जाएगा. जीत के बाद वह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मिले हैं।

विजेंद्र गुप्ता
सीएम पद की रेस में विजेंद्र गुप्ता भी शामिल माने जा रहे हैं। दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता और भाजपा उम्मीदवार विजेंद्र गुप्ता ने रोहिणी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीता है। भाजपा उम्मीदवार ने 37816 वोटों के अंतर से जीत हासिल की, उन्हें कुल 70365 वोट मिले। वह दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष रहे हैं। बीजेपी का वैश्य चेहरा हैं और आप की लहर की बावजूद पहले भी विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं।

सतीश उपाध्याय
मुख्यमंत्री पद की रेस में बीजेपी नेता सतीश उपाध्याय का नाम भी जोड़ा जा रहा हैं। व बीजेपी का ब्राह्मण चेहरा हैं। वह बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और दिल्ली युवा मोर्चा के अध्यक्ष भी रहे हैं। वह एनडीएमसी के वाइस चेयरमैन भी रह चुके हैं। इस लिहाज से उनके पास प्रशासनिक अनुभव भी हैं। उन्होंने संगठन में कई दायित्व संभाले थे। वह मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान मध्य प्रदेश के सह प्रभारी रह चुके हैं और आरएसएस के करीबी माने जाते हैं।

आशीष सूद
भाजपा नेता आशीष सूद जोकि बीजेपी का पंजाबी चेहरा हैं। वह भी सीएम की रेस में शामिल है। वह पार्षद और दिल्ली बीजेपी के महासचिव रह चुके हैं। अभी गोवा के प्रभारी और जम्मू कश्मीर के सह प्रभारी हैं। जम्मू कश्मी विधानसभा चुनाव में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। उनके केंद्रीय नेताओं के साथ करीबी संबंध है। वह डीयू के भी अध्यक्ष रह चुके हैं।

जितेंद्र महाजन
रोहतास नगर विधानसभा सीट से बीजेपी उम्मीदवार जितेंद्र महाजन की नाम भी सीएम पद की लिस्ट में माना जा रहा है। जीतेंद्र महाजन ने आप की सरिता सिंह को 27902 मतोंसे पराजित किया है। 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के जीतेंद्र महाजन ने 73,873 वोटों के साथ सीट जीती थी।

दिल्ली-एनसीआर के कई स्कूलों को मिली बम से उड़ाने की धमकी

दिल्ली-एनसीआर के कई स्कूलों को शुक्रवार को एक बार फिर बम से उड़ाने की धमकी मिली है। सबसे पहले पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार फेस 1 स्थित स्कूल को धमकी मिलने की सूचना मिली। पुलिस अलर्ट मोड में आ गई और जांच शुरू कर दी।

जानकारी के अनुसार, दिल्ली के मयूर विहार फेस 1 में स्थित अल्कोन पब्लिक स्कूल को शुक्रवार सुबह बम की धमकी मिली। बताया जा रहा है कि बम की धमकी मिलने के बाद छात्रों को वापस घर भेज दिया गया है। साथ ही अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं और दिल्ली और नोएडा के स्कूलों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

इसी महीने, दक्षिण दिल्ली में इंडियन पब्लिक स्कूल और उत्तर पश्चिम दिल्ली में क्रिसेंट पब्लिक स्कूल को भी बम की धमकियां मिली थी, जिससे दहशत फैल गई थी। पिछले साल 20 दिसंबर को द्वारका में दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) में बम की धमकी की सूचना मिली थी। 11 दिसंबर को, दिल्ली के 40 से अधिक स्कूलों को फिरौती की मांग करती धमकियां मिली, हालांकि किसी भी मामले में कोई विस्फोटक नहीं मिला।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बार-बार होने वाली इस तरह की धमकियों का संज्ञान लिया था। साथ ही दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को ऐसी आपात स्थितियों से निपटने के लिए एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने का निर्देश दिया था। बता दें कि एक छात्र ने कई स्कूलों को धमकी भरा ईमेल किया था। उसने 23 स्कूलों को धमकी भरा मेल भेज दिया था। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने छात्र को हिरासत में लिया था। छात्र ने दूसरे स्कूलों को मेल इसलिए किया था, ताकि उस पर कोई शक न कर सके।

हादसा नहीं साजिश थी महाकुंभ भगदड़, सुरक्षा एजेंसियां कर रही जांच

प्रयागराज में महाकुंभ भगदड़ की जांच अब साजिश की ओर मुड़ रही है। यूपी और केंद्र सरकार की एजेंसियां इसे हादसा नहीं, साजिश मानकर जांच कर रही हैं। यूपी में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), एंटी-टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS), स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (LIU) के रडार पर 10 हजार से ज्यादा लोग हैं। सबसे ज्यादा CAA और NRC के प्रदर्शनकारी हैं। महाकुंभ में इनमें से कई का मूवमेंट मिला है।

जांच में ऐसे गैर हिंदू हैं, जिनके सोशल मीडिया अकाउंट पर महाकुंभ को लेकर निगेटिव कमेंट किए गए या फिर उन्होंने गूगल और यूट्यूब पर महाकुंभ को बहुत ज्यादा सर्च किया। इनकी भूमिका की भी जांच ATS और STF कर रही हैं। 18 जेलों में कैद PFI सदस्यों से भी पूछताछ हो रही है।

STF के एक अफसर ने बताया कि महाकुंभ में 45 करोड़ लोगों को आना था। बड़ा आयोजन था, इसलिए महीनों पहले से खुफिया एजेंसियां एक्टिव थीं। इंटेलिजेंस ने क्रिमिनल हिस्ट्री व प्रदेश सरकार के खिलाफ बड़े प्रदर्शन करने वाले लोगों पर इनपुट दिए थे। इसके आधार पर यूपी के 1 लाख से ज्यादा लोगों का वेरिफिकेशन कराया गया।

उन्हें समझाया गया और मैसेज दिया गया कि महाकुंभ के दौरान प्रयागराज की तरफ मूवमेंट नहीं करें। इसके बावजूद भगदड़ होने के बाद जांच में पाया गया कि इनमें से कुछ का मूवमेंट महाकुंभ में हुआ। इसे ऐसे समझ सकते हैं कि सिर्फ वाराणसी और आसपास के 10 जिलों के 16 हजार लोगों को महाकुंभ से पहले ही काशी के बाहर मूवमेंट करने से मना किया गया।

लेकिन, 117 लोगों का मूवमेंट काशी के बाहर मिला। इनमें 50 से ज्यादा लोग प्रयागराज भी पहुंचे थे। ये सभी हिंदू धर्म से नहीं हैं। जब लोगों से पूछताछ हुई, तब उन्होंने अपने मूवमेंट के पीछे अलग-अलग कारण बताए। ऐसे ही दूसरे शहरों में संदिग्ध माने गए लोगों से एजेंसियों ने पूछताछ शुरू कर दी है कि मना करने के बाद अपने शहर से बाहर क्यों गए।

पंजाब मे कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत के घर IT का छापा

पंजाब के कपूरथला से बड़ी खबर सामने आ रही है जहां कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत सिंह के घर पर आयकर विभाग ने छापेमारी की है। जानकारी के मुताबिक गुरुवार सुबह चंडीगढ़ से आई आयकर विभाग की टीम ने विधायक के सर्कुलर रोड स्थित आवास पर छापेमारी की।

आयकर विभाग की टीम के साथ भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के जवान भी मौजूद हैं। छापेमारी के दौरान आवास के सभी गेट अंदर से बंद कर दिए गए हैं। पंजाब पुलिस को भी इसके बारे मेें कोई सूचना नहीं दी गई थी। जांच के दौरान विधायक कार्यालय के सभी कर्मचारियों के मोबाइल फोन स्विच ऑफ पाए गए। यह कार्रवाई किस मामले में की गई है,  इसके बारे में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।