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भारतीय एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला 14 जुलाई को धरती पर लौटेंगे

भारतीय एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला 14 जुलाई को धरती पर लौटेंगे। अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA ने इसके बारे में अपडेट दी है। एक्सियम-4 मिशन के तहत शुभांशु सहित चार क्रू सदस्य इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पहुंचे थे।

एक्सियम मिशन को 25 जून को फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च किया गया था। ड्रैगन अंतरिक्ष यान 28 घंटे की यात्रा के बाद 26 जून को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर डॉक किया गया था। हालांकि यह मिशन 14 दिनों का था। अब एस्ट्रोनॉट की वापसी चार दिन देरी से होगी।

इससे पहले 6 जुलाई को शुभांशु के ISS स्टेशन से कुछ तस्वीरें सामने आईं थीं। जिसमें शुभांशु कपोला मॉड्यूल के विंडो से पृथ्वी देखते नजर आ रहे थे। कपोला मॉड्यूल एक गुंबदनुमा ऑब्जर्वेशन विंडो है, जिसमें 7 खिड़कियां होती हैं।

अच्छा काम करने वालों को मिलेगा मौका, लापरवाही पर लगेगी रोक

अंजलि भाटिया
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने अब राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) बनाने वाली कंसल्टेंट कंपनियों की रेटिंग कराने का फैसला किया है। इसका मकसद है,जो कंपनियां बेहतर काम करें, उन्हें आगे बढ़ाया जाए, और जिनका काम कमजोर हो, उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाए।
सरकार को अक्सर ये शिकायत मिलती रही है कि डीपीआर में गलतियां होती हैं, जिससे हाईवे प्रोजेक्ट्स पर्यावरण मंजूरी, वन विभाग की अनुमति और भूमि अधिग्रहण जैसे मामलों में फंस जाते हैं। इससे प्रोजेक्ट की लागत भी बढ़ जाती है और समय भी खराब होता है।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 7 जुलाई को इस रेटिंग सिस्टम का ड्राफ्ट तैयार कर हितधारकों से सुझाव मांगे हैं। सुझाव मिलने के बाद इस व्यवस्था को लागू कर दिया जाएगा। डीपीआर तैयार करने वाली कंपनियों को 1 से 5 तक की रेटिंग दी जाएगी। ये रेटिंग कई बातों को ध्यान में रखकर तय की जाएगी, हाईवे का सही एलाइनमेंट, समय पर पर्यावरण और वन मंजूरी और जमीन अधिग्रहण की स्थिति और बिजली के पोल, तार, ट्रांसफॉर्मर जैसी जनसुविधाएं। अगर कंपनी की बनाई डीपीआर में प्रोजेक्ट की लागत टेंडर के मुकाबले 0.5% के भीतर रहती है, तो उसे पूरे अंक मिलेंगे। लेकिन अगर लागत का अंतर ज्यादा हुआ, या मंजूरी में देर लगी, तो कंपनी की रेटिंग घटती जाएगी।
जिन कंपनियों की रेटिंग लगातार खराब रहेगी, उन्हें भविष्य में नए डीपीआर प्रोजेक्ट्स मिलने में दिक्कत आएगी। वहीं, अच्छा काम करने वाली कंपनियों को प्राथमिकता दी जाएगी।
रेटिंग की प्रक्रिया हर साल दो बार 30 मार्च और 30 सितंबर तक की जाएगी।
डीपीआर किसी भी राजमार्ग प्रोजेक्ट की रीढ़ होती है। इसमें छोटी-छोटी चूक से पूरा प्रोजेक्ट अटक सकता है। सरकार की यह पहल प्रोजेक्ट्स को समय पर और तय बजट में पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

किसानों पर बढ़ता कर्ज का बोझ, 12.19 लाख करोड़ रुपये सबसे ज़्यादा कर्ज महाराष्ट्र के किसानों पर

नई दिल्ली:  म्यूचुअल फंड सिस्टेमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के तहत जून महीने में निवेश 27,269 करोड़ रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो मई के 26,688 करोड़ रुपए से 2 प्रतिशत अधिक है। यह जानकारी बुधवार को जारी एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एएमएफआई) के आंकड़ों से मिली।

यह पहली बार है जब एसआईपी निवेश 27,000 करोड़ रुपए के आंकड़े को पार कर गया है।

एएमएफआई के आंकड़ों के अनुसार, म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) बढ़कर 74.41 लाख करोड़ रुपए के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई, जबकि मई में यह 72.20 लाख करोड़ रुपए और अप्रैल में 69.99 लाख करोड़ रुपए थी।

मई में 29,572 करोड़ रुपए के निवेश की तुलना में जून में कुल म्यूचुअल फंड निवेश मासिक आधार पर 67 प्रतिशत बढ़कर 49,301 करोड़ रुपए हो गया।

जून में इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश 24 प्रतिशत बढ़कर 23,587 करोड़ रुपए हो गया। ईएलएसएस फंड को छोड़कर सभी इक्विटी कैटेगरी में निवेश हुआ।

इक्विटी कैटेगरी में, लार्ज कैप फंड ने जून में 1,694 करोड़ रुपए के निवेश के साथ बढ़त हासिल की, जो पिछले महीने के 1,250.5 करोड़ रुपए से 35 प्रतिशत अधिक है।

स्मॉल कैप फंड में 4,024.5 करोड़ रुपए का निवेश हुआ, जो मई के 3,214 करोड़ रुपए से 25 प्रतिशत अधिक है।

मिड कैप फंडों में भी 3,754 करोड़ रुपए का निवेश हुआ, जो मासिक आधार पर 2,808.7 करोड़ रुपए से 34 प्रतिशत अधिक है।

गोल्ड ईटीएफ में निवेश मई के 292 करोड़ रुपए से छह गुना बढ़कर 2,080.9 करोड़ रुपए हो गया, जो 613 प्रतिशत की वृद्धि है।

हाइब्रिड फंड में निवेश मई के 20,765 करोड़ रुपए से बढ़कर जून में 23,223 करोड़ रुपए हो गया।

एएमएफआई के आंकड़ों के अनुसार, मल्टी एसेट एलोकेशन में 3,209 करोड़ रुपए का निवेश हुआ, इसके बाद डायनेमिक एसेट एलोकेशन/बैलेंस्ड एडवांटेज फंड में 1,885 करोड़ रुपए का निवेश हुआ।

यह वृद्धि काफी हद तक बाजार के प्रदर्शन के कारण है, क्योंकि निफ्टी और सेंसेक्स ने जून में मजबूत रिटर्न दिया है।

भारत बंद- 25 करोड़ से अधिक कामगार करेंगे राष्ट्रव्यापी हड़ताल

बैंकिंग से लेकर बिजली सेवाएं प्रभावित होंगी

देशभर की 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने आज, 9 जुलाई 2025 को ‘भारत बंद’ का आह्वान किया है। इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल में 25 करोड़ से अधिक कामगारों के शामिल होने का अनुमान है। आंदोलन में बैंकिंग, बीमा, डाक, कोयला खनन, बिजली और निर्माण क्षेत्र के कर्मचारियों के साथ-साथ किसान और ग्रामीण मजदूर भी हिस्सा ले रहे हैं।

ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) की महासचिव अमरजीत कौर ने बताया कि यह हड़ताल केंद्र सरकार की श्रम-विरोधी और किसान-विरोधी नीतियों के खिलाफ है। यूनियन का आरोप है कि सरकार की आर्थिक और नीतिगत दिशा मजदूरों और किसानों के अधिकारों को लगातार खत्म कर रही है।

कंपन से परेशान मरीजों को अब सर्जरी की ज़रूरत नहीं, बिना चीरे होगा इलाज

अंजलि भाटिया
नई दिल्ली: कंपन (ट्रेमर) से जूझ रहे मरीजों के लिए राहत भरी खबर है।
दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में एक नई और अत्याधुनिक तकनीक एमआर-गाइडेड फोकस्ड अल्ट्रासाउंड (MRgFUS) की शुरुआत की गई है, जिससे बिना सर्जरी के ही कंपन का इलाज संभव हो गया है।
यह तकनीक अब तक देश में सिर्फ तीन स्थानों पर उपलब्ध है, जिनमें से दो दक्षिण भारत में हैं। उत्तरी भारत में यह सुविधा देने वाला पहला अस्पताल सर गंगा राम बना है। यह एक बिल्कुल गैर-सर्जिकल तकनीक है, जिसमें मरीज के सिर में कोई चीरा नहीं लगाया जाता। एमआरआई (MRI} की मदद से मस्तिष्क के उस हिस्से को पहचान लिया जाता है, जो कंपन का कारण बनता है, और फिर अल्ट्रासाउंड तरंगों से उसे गर्म कर निष्क्रिय कर दिया जाता है। इससे हाथों की अनियंत्रित कंपन में तुरंत राहत मिलती है।
फिलहाल यह तकनीक दो बीमारियों के लिए मंजूर की गई है —
एसेंशियल ट्रेमर (ET) जिसमें मुख्य रूप से हाथों में लगातार कंपन होता है। दूसरा
ट्रेमर-डॉमिनेंट पार्किंसन डिज़ीज़ (TD-PD) पार्किंसन का वह रूप जिसमें कंपन प्रमुख लक्षण होता है। इन बीमारियों से पीड़ित लोग लिखने, खाना खाने या पानी का गिलास पकड़ने जैसे आसान काम भी नहीं कर पाते।
अब तक इन रोगों में दवाएँ दी जाती थीं, लेकिन उनका असर सीमित रहता था और लंबे समय में साइड इफेक्ट्स हो जाते थे। इसके बाद एकमात्र विकल्प होता था डीप ब्रेन स्टिमुलेशन (DBS) जिसमें मस्तिष्क में सर्जरी करके इलेक्ट्रोड लगाए जाते हैं।
एमआरजीएफयूएस (MRgFUS) इन दोनों के मुकाबले कहीं अधिक सुरक्षित, सरल और कारगर विकल्प बनकर सामने आया है। बिना किसी डिवाइस या बैटरी के सिर्फ एक सत्र में इलाज
और महज 1या 2 दिन में मरीज फिर से सामान्य जीवन जी सकता है।
सर गंगा राम अस्पताल के वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सीएस अग्रवाल ने बताया, “यह तकनीक उन मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है, जिन पर दवाओं का असर नहीं हो रहा था और जो सर्जरी से डरते थे। एमआरजीएफयूएस के ज़रिए हम बिना चीरफाड़ के इलाज कर पा रहे हैं।

“एक भी ट्रेन नहीं चलेगी”: बीसी आरक्षण बिल पर केंद्र को के. कविता की चेतावनी

अंजलि भाटिया 

नई दिल्ली: तेलंगाना जागृति की अध्यक्ष, पूर्व सांसद और बीआरएस एमएलसी के. कविता ने मंगलवार को केंद्र सरकार को कड़ी चेतावनी दी कि अगर तेलंगाना विधानसभा से पारित 42% पिछड़ा वर्ग (BC) आरक्षण बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं दी गई, तो “एक भी ट्रेन चलने नहीं दी जाएगी”। उन्होंने 17 जुलाई को “रेल रोको आंदोलन” की घोषणा की है, जिसके माध्यम से बिल को तत्काल स्वीकृति देने की मांग की जाएगी।

के. कविता ने तेलंगाना सरकार से यह मांग की कि जब तक राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिलती, तब तक संविधान के अनुच्छेद 243(D) के तहत आरक्षण लागू करने के लिए तत्काल एक सरकारी आदेश (GO) जारी किया जाए। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि जो व्यक्ति संविधान की प्रति लेकर देशभर में घूमते हैं, वे रेवंत रेड्डी को इस संबंध में कोई सलाह क्यों नहीं दे रहे?

दिल्ली में  कॉन्स्टिट्यूशन  क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान के. कविता ने कहा, “हम एक भी ट्रेन चलने नहीं देंगे। हैदराबाद से दिल्ली जाने वाली सभी ट्रेनों को रोका जाएगा। यह तो सिर्फ ट्रेलर है। अगर बिल को मंजूरी नहीं मिली तो हम अनिश्चितकालीन रेल रोको आंदोलन करेंगे। तेलंगाना के 2.5 करोड़ बीसी लोग भाजपा को सबक सिखाएंगे।”

उन्होंने भाजपा और कांग्रेस दोनों पर बीसी समुदाय के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया। साथ ही बताया कि वह सभी राजनीतिक दलों को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर समर्थन मांगेंगी।

कविता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो स्वयं ओबीसी वर्ग से आते हैं, से अपील की कि वे बीसी आरक्षण बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी दिलाएं और इसे संविधान की नवम अनुसूची (Ninth Schedule) में शामिल किया जाए, जैसा कि तमिलनाडु के 69% आरक्षण मॉडल में किया गया है।

तेलंगाना के भाजपा सांसदों पर भी साधा निशाना

उन्होंने तेलंगाना से चुने गए आठ भाजपा सांसदों की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे इस मुद्दे पर पूरी तरह से मौन हैं। कविता ने यह भी कहा कि EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) आरक्षण लागू होने के बाद कई राज्यों में आरक्षण सीमा 50% से ऊपर जा चुकी है, और 16 राज्यों में यह पहले से लागू है, इसलिए तेलंगाना में 42% बीसी आरक्षण पर कोई कानूनी अड़चन नहीं होनी चाहिए।

क्षेत्रीय दलों को बताया जनता का सच्चा हितैषी

कविता ने कहा कि क्षेत्रीय दल ही जनता की असली चिंता करते हैं। उन्होंने अखिलेश यादव (उत्तर प्रदेश), नवीन पटनायक (ओडिशा), और दिवंगत जयललिता (तमिलनाडु) जैसे नेताओं को उदाहरण के तौर पर प्रस्तुत किया, जिन्होंने जनकल्याण और सामाजिक न्याय की दिशा में प्रभावी कार्य किए।

DRDO की बड़ी उपलब्धि, 45 किमी तक सटीक वार; सिर्फ 85 सेकंड में फायरिंग को तैयार

अंजलि भाटिया
नई दिल्ली: भारत की रक्षा तैयारी में एक और बड़ी छलांग लगाते हुए डीआरडीओ {DRDO} ने पूरी तरह स्वदेशी ‘Mounted Gun System’ एमजीएस(MGS) तैयार कर ली है। यह गन सिस्टम अब सेना के ट्रायल के लिए तैयार है और इसे देश के अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों जैसे रेगिस्तान, ऊंचे पहाड़ और मैदान में परखा जाएगा। रक्षा विश्लेषकों के अनुसार, यह तोप प्रणाली आने वाले समय में युद्ध की दिशा बदल सकती है।
यह गन सिस्टम एक हाई मोबिलिटी वाहन पर 155 मिमी / 52 कैलिबर की एडवांस्ड तोप एटीएजीएस(ATAGS) को माउंट कर तैयार किया गया है। इस परियोजना को डीआरडी के वाहन अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान वीआरडीई(VRDE) ने सिर्फ ढाई साल में तैयार किया है। इसकी खासियत यह है कि
एमजीएस की सबसे बड़ी ताकत इसकी ‘शूट एंड स्कूट’ तकनीक है। यानी यह दुश्मन पर फायर करने के तुरंत बाद अपनी स्थिति बदल सकती है, जिससे दुश्मन की जवाबी गोलीबारी बेअसर हो जाती है। इसे कहीं भी तेजी से तैनात किया जा सकता है और फायरिंग के बाद तत्काल स्थान बदला जा सकता है।
इस तोप की अधिकतम रेंज 45 किलोमीटर है और यह महज 85 सेकंड में फायरिंग के लिए तैयार हो जाती है। एक मिनट में 6 राउंड फायर कर सकती है और लगभग 50 वर्गमीटर क्षेत्र को पूरी तरह कवर कर सकती है। इसकी सटीकता और निरंतरता इसे दुश्मन के ठिकानों पर घातक बनाती है।
कहीं भी ले जाने में यह सक्षम है चाहे सियाचिन की बर्फीली ऊंचाइयां हों या पूर्वोत्तर के घने पहाड़ी जंगल, यह सिस्टम हर इलाके में प्रभावी ढंग से काम कर सकता है। 30 टन वजनी इस सिस्टम को रेल या C-17 विमान से भी कहीं भी आसानी से ले जाया जा सकता है।
यह गन सिस्टम कठिन इलाकों में 60 किमी प्रति घंटे और समतल क्षेत्रों में 90 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकता है। इसका कुल वजन लगभग 30 टन है। जिसमें वाहन और गन दोनों का वजन शामिल है (15-15 टन)। इसमें सात सदस्यीय चालक दल के लिए बुलेटप्रूफ केबिन की व्यवस्था की गई है, जिससे युद्ध के हालात में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
इस गन सिस्टम में प्रयुक्त 80 प्रतिशत उपकरण पूरी तरह भारत में बने हैं। यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक और ठोस कदम है। सात सदस्यीय चालक दल के लिए बुलेटप्रूफ केबिन की व्यवस्था की गई है, जिससे युद्ध के हालात में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
एमजीएस सिस्टम, एटीएजीएस पर आधारित है। मार्च में ही सरकार ने टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और भारत फोर्ज से ₹6,900 करोड़ की डील की है, जिसमें 307 एटीएजीएस और उनके ट्रांसपोर्ट व्हीकल्स खरीदे जाएंगे। भारत अब उन गिने-चुने देशों की सूची में आ गया है जो माउंटेड गन सिस्टम बनाते हैं।
रूस-यूक्रेन संघर्ष में माउंटेड गन सिस्टम की अहम भूमिका देखी गई है। भारत न केवल इनसे सबक ले रहा है, बल्कि भविष्य की लड़ाइयों के लिए खुद को तैयार भी कर रहा है। यह गन सिस्टम इसी तैयारी का अहम हिस्सा है।
सेना सूत्रों के अनुसार, ट्रायल सफल रहने पर आने वाले महीनों में इस सिस्टम को बड़े पैमाने पर सेना में शामिल किया जा सकता है। यह भारत की युद्ध क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला कदम होगा।

बिहार में वोटर लिस्ट संशोधन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई गुरुवार को

बंगाल में भी प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी

अंजलि भाटिया
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के लिए 10 जुलाई की तारीख तय की है। यह मामला चुनाव आयोग द्वारा 24 जून को जारी उस निर्देश से जुड़ा है, जिसके तहत बिहार में व्यापक स्तर पर मतदाता सूची की छंटनी और सत्यापन किया जा रहा है। इस प्रक्रिया को बंगाल में भी लागू करने की तैयारी चल रही है, जहां SIR का कार्य अगस्त से शुरू होने की संभावना है।
वरिष्ठ अधिवक्ताओं कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने इस मामले को न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ के समक्ष उठाया और तत्काल सुनवाई की मांग की।
अब तक इस मुद्दे पर चार याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं। ये याचिकाएं ADR(एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स) सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा, और राजद सांसद मनोज झा ने दायर की हैं। उनका तर्क है कि चुनाव आयोग का यह कदम संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21, 325 और 326 का उल्लंघन करता है, साथ ही जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और वोटर पंजीकरण नियम, 1960 के नियम 21A के भी खिलाफ है।
इन याचिकाओं में आशंका जताई गई है यदि यह आदेश रद्द नहीं हुआ,तो बड़ी संख्या में मतदाता सूची से नाम हटाए जा सकते हैं,करोड़ों मतदाता अपने अधिकार से वंचित हो सकते हैं.
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत को बताया कि बिहार में करीब 8 करोड़ मतदाता हैं, और इतने बड़े स्तर पर 25 जुलाई तक संशोधन करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर कोई मतदाता तय समय में फॉर्म नहीं भरता, तो उसका नाम सूची से हट सकता है।
अभिषेक मनु सिंघवी ने याचिका में कहा है कि बिहार से प्राप्त हालिया रिपोर्टें बताती हैं कि लाखों ग्रामीण व वंचित समुदायों के पास वे दस्तावेज़ नहीं हैं, जो SIR के तहत मांगे जा रहे हैं।
इस पर जस्टिस धूलिया ने कहा कि चूंकि चुनाव की अधिसूचना अभी नहीं आई है, इसलिए समयसीमा की वैधता पर विचार किया जा सकता है।

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सन्मार्ग को बताया यदि 24 जून को एसआईआर का आदेश रद्द नहीं किया गया, तो करोड़ो वोटर उचित प्रक्रिया के बिना अपने जनप्रतिनिधियों को चुनने के अधिकार से वंचित हो जाएंगे। यह संविधान के बुनियादी ढांचे और लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है।

बॉक्स– चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि बिहार में एसआईआर प्रक्रिया 24 जून से लागू है और यह नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य अयोग्य नाम हटाना और योग्य नागरिकों को जोड़ना है। आयोग ने कहा कि 1 अगस्त को जो प्रारंभिक सूची जारी होगी, उसमें उन्हीं के नाम होंगे जिनके फॉर्म प्राप्त हुए हैं।
हालांकि आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि जो लोग 25 जुलाई तक फॉर्म नहीं भर पाएंगे, उन्हें ‘दावे और आपत्ति’ की अवधि में भी मौका मिलेगा।
इस मुद्दे पर बिहार की राजनीति गर्म है। विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं कि वोटर लिस्ट का विशेष पुनरीक्षण सिर्फ बिहार में क्यों किया जा रहा है, जबकि इस साल वहां चुनाव है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे दलितों और वंचितों के वोटिंग अधिकार छीनने की साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला बीजेपी और आरएसएस की मिलीभगत से लिया गया है।
वहीं, एनडीए गठबंधन ने आरोपों को नकारते हुए कहा कि विपक्ष पहले से ही संभावित हार को देखते हुए सवाल उठा रहा है।

ऑपरेशन सिंदूर: चीन से मिल रही थी पाकिस्तान को लाइव खुफिया जानकारी

सेना का बड़ा खुलासा लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने कहा – एक सीमा पर दो नहीं, तीन दुश्मनों से निपटना पड़ा

अंजलि भाटिया
नई दिल्ली- भारत के ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान को चीन की ओर से रियल-टाइम खुफिया जानकारी दी जा रही थी। भारतीय सेना के डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर. सिंह ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा है कि हालिया सीमा संघर्ष में भारत को सिर्फ पाकिस्तान से नहीं, बल्कि चीन और तुर्की से भी एक साथ जूझना पड़ा।ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने पाकिस्तान की हर संभव मदद की थी.
नई दिल्ली में फिक्की द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से जुड़ी अहम जानकारियाँ साझा कीं।
लेफ्टिनेंट जनरल सिंह के अनुसार, “सीमा पर हमारे सामने दो नहीं, तीन शत्रु थे। पाकिस्तान मोर्चे पर था, लेकिन चीन ने उसे हरसंभव सैन्य और खुफिया सहयोग दिया। इतना ही नहीं, चीन ने इस संघर्ष को अपने हथियारों की लाइव परीक्षण प्रयोगशाला बना दिया। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के पास मौजूद 81 प्रतिशत हथियार चीन निर्मित हैं, और चीन ने इन्हीं हथियारों के ज़रिए अपनी मारक क्षमताओं की परख की।
जनरल सिंह ने कहा कि संघर्ष के दौरान जब भारत और पाकिस्तान के बीच डीजीएमओ स्तर की बातचीत चल रही थी, तब चीन ने पाकिस्तान को भारत की सैन्य तैनाती, हथियारों की स्थिति और सैटेलाइट तस्वीरों तक की जानकारी मुहैया कराई। उन्होंने कहा चीन की तरफ से दी गई यह खुफिया जानकारी दर्शाती है कि वह इस संघर्ष में एक सक्रिय साझेदार था।
उन्होंने चेताया कि इस प्रकार की सूचनात्मक सेंध भारत की रणनीतिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है और इस पर भारत को सख्त कदम उठाने की ज़रूरत है। सिर्फ चीन ही नहीं, तुर्की ने भी इस संघर्ष में पाकिस्तान को सहयोग दिया। जनरल सिंह के अनुसार, तुर्की ने न केवल ड्रोन दिए, बल्कि प्रशिक्षित लड़ाके भी भेजे, जिससे मोर्चे पर भारत को बहुस्तरीय चुनौती का सामना करना पड़ा।
लेफ्टिनेंट जनरल ने भारत की वायु रक्षा क्षमताओं को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा, “हमारे पास इजरायल जैसे आयरन डोम सिस्टम जैसी कोई भव्य व्यवस्था नहीं है। हमारा देश बहुत बड़ा है, और ऐसी प्रणालियाँ बेहद महंगी होती हैं। हमें अपनी ज़रूरतों और भूगोल के अनुसार व्यावहारिक समाधान विकसित करने होंगे।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कुछ स्वदेशी हथियारों ने बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि कुछ हथियार अपेक्षा के अनुरूप नहीं उतरे। साथ ही उन्होंने कहा कि इस बार नागरिक क्षेत्रों की सुरक्षा पर उतना ध्यान नहीं दिया जा सका, जितना दिया जाना चाहिए था। अगली बार यह प्राथमिकता होगी।

रेलवे रिजर्वेशन चार्ट व्यवस्था में बड़ा बदलाव: दोपहर 2 बजे तक की ट्रेनों का चार्ट अब एक दिन पहले बनेगा

अंजलि भाटिया 

नई दिल्ली- भारतीय रेलवे ने लंबी दूरी की ट्रेनों के रिवर्जेशन चार्ट तैयार करने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। रेलवे बोर्ड की ओर से जारी नए निर्देशों के तहत अब तड़के 5 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच प्रस्थान करने वाली ट्रेनों का चार्ट एक दिन पहले रात 9 बजे तक तैयार कर लिया जाएगा।

रेलवे बोर्ड ने बुधवार को इस संबंध में सभी जोनल रेलवे को परिपत्र जारी कर निर्देश दिए हैं कि चरणबद्ध तरीके से नई प्रणाली लागू की जाए। इसके तहत:

सुबह 5 बजे से दोपहर 2 बजे तक चलने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों का चार्ट एक दिन पहले रात 9 बजे तक बनेगा।

दोपहर 2 बजे से रात 12 बजे तक, और इसके बाद सुबह 5 बजे तक चलने वाली ट्रेनों का चार्ट ट्रेन के प्रस्थान से 8 घंटे पहले तैयार किया जाएगा।

उदाहरण के तौर पर, यदि कोई ट्रेन दोपहर 2:05 बजे रवाना होती है, तो उसका चार्ट उसी दिन सुबह 6 बजे बनेगा। वहीं, शाम 4 बजे रवाना होने वाली ट्रेन का चार्ट सुबह 8 बजे जारी होगा।

रेलवे सूत्रों के अनुसार, ट्रेन के प्रस्थान से आधा घंटा पहले दूसरा चार्ट भी तैयार किया जाएगा, जिसमें तत्काल या कनफर्म टिकट रद्द होने की स्थिति में प्रतीक्षा सूची वाले यात्रियों को स्थान मिल सकता है।

रेलवे के इस नए चार्टिंग सिस्टम से वीआईपी कोटा और रिवर्जेशन चार्ट तैयार करने वाले कर्मचारियों पर अतिरिक्त भार पड़ेगा। पहले जहां सुबह 8 बजे से रात 12 बजे के बीच चार्ट बनाए जाते थे, अब दोपहर 2 बजे के बाद चलने वाली ट्रेनों के लिए हर ट्रेन के समय से 8 घंटे पहले चार्ट बनाना होगा, जिससे कर्मचारियों को सुबह 6 बजे से ही ड्यूटी करनी पड़ेगी। कुछ डिविजनों में यह व्यवस्था लागू हो चुकी है, बाकी जगहों पर इसे जल्द ही चरणबद्ध तरीके से लागू किया