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सैटेलाइट-आधारित इंटरनेट सर्विस स्टारलिंक का सर्वर दुनिया भर में ठप

एलन मस्क की महत्वाकांक्षी सैटेलाइट-आधारित इंटरनेट सर्विस स्टारलिंक (Starlink) को आज तड़के एक बड़े वैश्विक आउटेज का सामना करना पड़ा। एक तकनीकी खामी के चलते स्टारलिंक का सर्वर डाउन हो गया, जिससे अमेरिका और यूरोप समेत दुनिया के 140 देशों में इंटरनेट सेवाएं ठप हो गईं। सैटेलाइट इंटरनेट के लिए यह एक दुर्लभ ग्लोबल आउटेज माना जा रहा है, क्योंकि यह सर्विस अपनी भरोसेमंद कनेक्टिविटी के लिए जानी जाती है।

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह समस्या स्टारलिंक के इंटरनल सॉफ्टवेयर में आई एक तकनीकी खामी की वजह से हुई। सॉफ्टवेयर फेल होने के कारण दुनिया भर में हजारों यूजर्स के डिवाइस राउटर अचानक ऑफलाइन हो गए और उनकी कनेक्टिविटी टूट गई। इंटरनेट सेवाओं को ट्रैक करने वाली वेबसाइट ‘डाउनडिटेक्टर’ के अनुसार, 61,000 से अधिक यूजर्स ने स्टारलिंक की सर्विस में आई इस दिक्कत को रिपोर्ट किया। भारतीय समय के अनुसार, यूजर्स ने शुक्रवार रात करीब 12:30 बजे से समस्याओं की शिकायत करना शुरू कर दिया था।

इस दुर्लभ ग्लोबल आउटेज के कारण स्टारलिंक के 60 लाख से ज्यादा यूजर्स को परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि, कंपनी की टीमों ने तेजी से काम करते हुए करीब ढाई घंटे की मशक्कत के बाद सेवाओं को फिर से बहाल कर दिया।

यह वैश्विक घटना ऐसे समय में हुई है जब स्टारलिंक भारत में अपनी सेवाएं शुरू करने की तैयारी के अंतिम चरण में है। एलन मस्क की कंपनी को भारत सरकार की ओर से फाइनल अप्रूवल मिल चुका है। अब केवल स्पेक्ट्रम आवंटन का इंतजार है, जिसके पूरा होते ही स्टारलिंक भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू कर देगी। इस आउटेज ने भारत में लॉन्च से पहले सर्विस की विश्वसनीयता को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।

योगी का उत्तर प्रदेश बनाम सिद्धारमैया का कर्नाटक”

गंगा बनाम कावेरी– जब मुल्क की सियासत में एक तरफ़ भगवा गंगा बह रही हो और दूसरी ओर कावेरी में लुभावनी ‘गारंटियों’ की बारिश हो रही हो, तब विकास की असली तस्वीर आंकड़ों की खामोश ज़ुबान में छुप जाती है।

उत्तर प्रदेश और कर्नाटक—दो राज्य, दो नज़ारे, दो मॉडल। एक तरफ़ योगी आदित्यनाथ की फौलादी छवि, जो यूपी को ‘नया भारत’ का इंजन बनाने पर आमादा है, और दूसरी ओर सिद्धारमैया की नरम, लोक-लुभावन सियासत, जो हर गरीब की थाली और जेब में कुछ न कुछ देने का वादा करती है।

यह महज़ विकास की नहीं, विकास की परिभाषा की लड़ाई है। क्या रफ़्तार ही तरक्की है, या सहूलियत भी ज़रूरी है?क्या आईटी हब का ग्लैमर ही जीत है, या खेत-खलिहानों से उठा पसीना भी कोई मायने रखता है?

कहती हैं आंटी ग्यानबूटी, “सियासत का खेल चालों से चल सकता है, मगर इतिहास हमेशा नतीजों से ही लिखा जाता है।”

बृज खंडेलवाल द्वारा

भारतीय राजनीति के इस रंगमंच पर उत्तर प्रदेश और कर्नाटक की दो अलग-अलग तसवीरें उभरती हैं—एक जहां हिंदुत्व की लहर है, सख्त और जवाबदेह प्रशाशन है तो दूसरी ओर कल्याणकारी नीतियों की स्याही से तरक्की की इबारत लिखी जा रही है।

हाल ही में जब केंद्रीय वित्त मंत्रालय की ताज़ा रिपोर्ट संसद में पेश हुई तो ज़ुबानों पर एक ही बात थी: “कर्नाटक नंबर वन!”

जी हाँ, देश में सबसे अधिक प्रति व्यक्ति आय वाला राज्य अब कर्नाटक बन चुका है—₹2,04,605 प्रति व्यक्ति! और यह कमाल हुआ है पिछले दस सालों में 93.6% की छलांग के साथ।

दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश—देश का सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य—जहां प्रति व्यक्ति आय अभी भी एक लाख के आसपास है, और विकास की गाड़ी पूरी ताक़त से खींची जा रही है, पर पटरी पर पूरी तरह नहीं दौड़ पा रही, कारण जो भी हों।

बेंगलुरु—कर्नाटक की अर्थव्यवस्था की धड़कन—राज्य की जीएसडीपी (₹28.83 लाख करोड़) का 36% अकेले कंट्रीब्यूट करता है। यही नहीं, टेक्नोलॉजी, फिनटेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस—ये सब मिलकर इसे भारत का सिलिकॉन वैली बना चुके हैं।

मैसूर के एक उद्योगपति बताते हैं, “40% शहरीकरण, सिर्फ 3.2% बेरोजगारी (2021–22), और 4.43 मिलियन कुशल कामगारों का पलायन इस राज्य को न केवल आकर्षक बनाता है, बल्कि इसे देश के सबसे तेज़ी से बढ़ते राज्यों में शामिल करता है। यानी, जहां ज्ञान हो, वहां पूंजी खुद चलकर आती है—और कर्नाटक इसका सजीव उदाहरण है।”

उधर यूपी के बारे में, पब्लिक कॉमेंटेटर प्रोफेसर पारस नाथ चौधरी कहते हैं, “भीड़ में खो जाना आसान होता है, मगर पहचान बनानी पड़े तो कुछ अलग करना पड़ता है। यूपी आज इसी दुविधा से जूझ रहा है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यूपी में जबर्दस्त रफ़्तार से औद्योगिकीकरण की कोशिशें हो रही हैं। पूर्वांचल में कारखानों की लाइन लगाई जा रही है, इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज़ोर है, और FDI को लुभाने के लिए ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनीज़ हो रही हैं। एक्सप्रेसवेज पर फौजी हवाई जहाज उतर रहे हैं, डिफेंस कॉरिडोर बन रही है, चौंकाने वाला जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट लगभग तैयार है। ऑपरेशन लंगड़ा ने कानून को सतर और सख्त कर दिया है। मगर, जनसंख्या का बोझ, कम शहरीकरण (22.3%), और 22% से अधिक गरीबी जैसे आंकड़े हर कदम पर चुनौतियां पेश करते हैं।”

बैंगलोर के रिटायर्ड समाजशास्त्री बाबू गोपालकृष्णन बताते हैं, “योगी सरकार जहां सशक्त उत्तर प्रदेश का नारा देती है, वहीं सिद्धारमैया की कांग्रेस “गारंटी कार्ड” थमा रही है। कर्नाटक की पाँच गारंटी योजनाएं—गृह ज्योति, गृह लक्ष्मी, शक्ति, युवा निधि, अन्न भाग्य—ने गांव-गांव में उपभोग की शक्ति बढ़ाई है, जिससे जीएसडीपी को बूस्ट मिला है। ग्रामीण ग़रीबी घटकर 24.53% (राष्ट्रीय औसत से नीचे), शहरी ग़रीबी 15.25%, और ₹1.2 लाख करोड़ GST संग्रहण (2023–24)।”

इसके मुकाबले यूपी का GST संग्रह मात्र ₹80,000 करोड़ और प्रत्यक्ष कर में हिस्सेदारी 3-4% के बीच है।

कर्नाटक के पास न सिर्फ़ IT है, बल्कि खनिज संपदा, मत्स्य पालन, और भारी वर्षा (3,638.5 मिमी) से जल विद्युत भी है।

वहीं, यूपी की खेती गंगा के मैदानों पर आधारित है—गन्ना, गेहूं, आलू—मगर जलवायु संकट, वनों की कटाई और यमुना-गंगा की गंदगी राज्य की सेहत बिगाड़ रहे हैं।

उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरू, चुनाव आयोग ने शुरू की तैयारियां

नई दिल्ली- जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद अब उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मंगलवार को जारी अपने राजपत्र (गजट) के माध्यम से धनखड़ के इस्तीफे को अधिसूचित किया।

संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) को उपराष्ट्रपति पद के चुनाव आयोजित कराने का अधिकार प्राप्त है। यह चुनाव “राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव अधिनियम, 1952” तथा “राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव नियम, 1974” के अंतर्गत संपन्न कराया जाता है। निर्वाचन आयोग ने नए उपराष्ट्रपति के चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। प्रारंभिक तैयारियां पूर्ण होते ही चुनाव कार्यक्रम की घोषणा जल्द ही की जाएगी। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से पूर्व मुख्य गतिविधियां इस प्रकार होती हैं। निर्वाचक मंडल की तैयारी, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा के निर्वाचित व मनोनीत सदस्य शामिल होते हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी एवं सहायक निर्वाचन अधिकारियों की नियुक्ति होती है। अब तक हुए सभी उपराष्ट्रपति चुनावों की पृष्ठभूमि संबंधी जानकारी का संकलन व प्रचार-प्रसार होता है। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि उपराष्ट्रपति पद के लिए निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने हेतु सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

उपराष्ट्रपति के लिए इनका नाम चल रहा आगे- बिहार चुनावों को ध्यान में रखते हुए देखा जाए तो राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायन सिंह और स्वर्गीय कर्पूरी ठाकुर के पुत्र राम नारायण ठाकुर के नाम की चर्चा चल रही है। इसके अलावा बहुत से लोग नीतीश कुमार का भी नाम ले रहे हैं पर नीतीश कुमार शायद ही उपराष्ट्रपति के लिए तैयार हों। दूसरे उनका स्वास्थ्य राज्यसभा के सभापति के लिए ठीक नहीं समझा जा सकता। इनमें राजनाथ सिंह का नाम सबसे ऊपर चल रहा है। यद्यपि सिंह को उपराष्ट्रपति बनाए जाने के पीछे कोई आधार नहीं दिख रहा है। क्योंकि वो बीजेपी के बहुत से रास्ते साफ करते रहते हैं। उन्होंने केंद्र में अपनी महत्ता बनाए रखी है। केंद्रीय सड़क परिवहन नितिन गडकरी का भी नाम उपराष्ट्रपति पद के दावेदारों में लिया जा रहा है।

बता दें कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को उपराष्ट्रपति पद से जगदीप धनखड़ का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धनखड़ के लिए अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “जगदीप धनखड़ जी को भारत के उपराष्ट्रपति सहित कई भूमिकाओं में देश की सेवा करने का अवसर मिला है। मैं उनके उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूं।” भारत के 14वें उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखे एक पत्र में उन्होंने कहा कि वह स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए तत्काल प्रभाव से पद छोड़ रहे हैं। 16 जुलाई 2022 को भाजपा ने एनडीए की ओर से धनखड़ को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया था। 6 अगस्त 2022 को हुए चुनाव में उन्होंने विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को बड़े अंतर से हराया था।

नेशनल हाईवे पर सड़क हादसों के डराने वाले आंकड़े, पिछले छह महीने में करीब 27,000 लोगों की गई जान

नई दिल्ली: देश के राष्ट्रीय राजमार्गों पर होने वाले सड़क हादसों को लेकर सरकार ने डरावने आंकड़े पेश किए हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को संसद को बताया कि साल 2025 के पहले छह महीनों (जनवरी से जून) में ही राष्ट्रीय राजमार्गों पर हुए सड़क हादसों में 26,770 लोगों की जान चली गई है।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इससे पहले, पूरे साल 2024 के दौरान राष्ट्रीय राजमार्गों पर कुल 52,609 जानलेवा दुर्घटनाएं हुई थीं। ये आंकड़े देश में सड़क सुरक्षा को लेकर एक गंभीर चिंता पैदा करते हैं।

सड़क हादसों को रोकने के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों की जानकारी देते हुए गडकरी ने सदन को बताया कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने अधिक यातायात घनत्व वाले राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) स्थापित किया है।

उन्होंने बताया कि यह आधुनिक प्रणाली दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, ट्रांस-हरियाणा एक्सप्रेसवे, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे जैसे प्रमुख मार्गों पर लगाई गई है, ताकि यातायात का बेहतर प्रबंधन किया जा सके और हादसों को कम किया जा सके।

केरल से दोहा जा रही फ्लाइट में हवा मेंआई खराबी, 188 यात्रियों संग वापस लौटा विमान

केरल के कोझिकोड से कतर की राजधानी दोहा के लिए उड़ान भरने वाले एअर इंडिया एक्सप्रेस के एक विमान में बुधवार सुबह तकनीकी खराबी आ गई। उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद पायलट ने विमान में आई गड़बड़ी की सूचना हवाई यातायात नियंत्रण (ATC) को दी, जिसके बाद विमान को 188 यात्रियों के साथ वापस कोझिकोड हवाई अड्डे पर सुरक्षित उतार लिया गया।

हवाई अड्डे के अधिकारियों ने बताया कि उड़ान संख्या IX 375 ने सुबह 9:17 बजे कोझिकोड से दोहा के लिए उड़ान भरी थी। उड़ान भरने के थोड़ी देर बाद ही पायलट को विमान के केबिन एयर कंडीशनिंग (AC) सिस्टम में कुछ तकनीकी समस्या का पता चला। जिसके बाद पायलट ने सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए विमान को वापस कोझिकोड लाने का फैसला किया। विमान करीब दो घंटे बाद सुबह 11:12 बजे हवाई अड्डे पर सुरक्षित लैंड हुआ। विमान में चालक दल समेत कुल 188 लोग सवार थे। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह आपातकालीन लैंडिंग नहीं थी, बल्कि एक एहतियाती लैंडिंग थी।

इस घटना पर एअर इंडिया एक्सप्रेस के एक प्रवक्ता ने बताया, “हमारी एक उड़ान तकनीकी खराबी के कारण उड़ान भरने के बाद कोझिकोड लौट आई। हमने प्राथमिकता के आधार पर यात्रियों के लिए एक वैकल्पिक विमान की व्यवस्था की। देरी के दौरान सभी मेहमानों को जलपान उपलब्ध कराया गया, जिसके बाद उड़ान दोहा के लिए रवाना हो गई।”

पहलगाम हमले और बिहार वोटर लिस्ट पर भी विपक्ष ने उठाए सवाल, काली पट्टी बांधकर किया विरोध

अंजलि भाटिया
नई दिल्ली , 23 जुलाई
संसद के दोनों सदनों में लगातार तीसरे दिन भी गतिरोध और हंगामा देखने को मिला।
बिहार वोटर वेरिफिकेशन (एसआईआर) पहलगाम और ऑपरेशन सिंदूर मुद्दे को लेकर विपक्षी सदस्यों द्वारा लगातार नारेबाजी के बाद लोकसभा और राज्य सभा दोनों सदनों की कार्यवाही गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।
अब दोनों सदनों में ऑपरेशन सिंदूर पर 28 और 29 जुलाई को चर्चा होगी।
दोनों सदनों में चर्चा के लिए 16-16 घंटे का समय निर्धारित किया गया है।समय आवंटित करने का निर्णय आज सुबह हुई कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) की बैठक के दौरान लिया गया।
बीते तीन दिनों से विपक्ष ऑपरेशन सिंदूर और बिहार वोटर वेरिफिकेशन जैसे मुद्दों पर लगातार हो रहे हंगामे के चलते अब तक कोई गंभीर चर्चा नहीं हो सकी है।
लोकसभा में आज विपक्षी सांसद नारेबाजी करते हुए वेल में चले आए। उन्होंने काले कपड़े लहराए। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने उन्हें शांत रहने की अपील की।
स्पीकर ने विपक्षी सांसदों को नारेबाजी से मना किया और कहा आप सड़क का व्यवहार संसद में न करें। देश के नागरिक आपको देख रहे हैं। लोकसभा की कार्यवाही 20 मिनट तक चली, पहले दोपहर 12 बजे, फिर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार को सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा सरकार कहती है कि ऑपरेशन सिंदूर जारी है, जबकि डोनाल्ड ट्रंप पहले ही इसे बंद कराने का दावा कर चुके हैं। ट्रंप 25 बार कह चुके हैं कि उन्होंने सीजफायर कराया। ऐसे में सरकार किस आधार पर इसे अभी भी सक्रिय बता रही है? इससे साफ लगता है कि दाल में कुछ काला है।
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संसद परिसर के बाहर बिहार में मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेसिव रिविजन (SIR) मुद्दे पर संसद के मकर द्वार पर विपक्ष ने प्रदर्शन किया। विपक्षी सांसदों ने काली पट्टी बाँधकर और काले कपड़े पहन कर प्रदर्शन किया। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव काले जैकेट ओर गले में काली पट्टी डालकर विरोध में हिस्सा लिया। उनके साथ कांग्रेस महासचिव एवं सांसद प्रियंका गांधी, डिंपल यादव समेत कई नेता भी थे।

किसी भी प्रकार की असुविधा या पेनल्टी से बचने के लिए समय पर भुगतान करना अनिवार्य होगा

अंजलि भाटिया 

नई दिल्ली ,23 जुलाई 

टोल टैक्स चोरी पर शिकंजा कसने के लिए केंद्र सरकार अब बड़ा कदम उठाने जा रही है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने प्रस्तावित व्यवस्था के तहत टोल बकाया रहने पर वाहन मालिकों को इलेक्ट्रॉनिक चालान भेजने और भुगतान न करने की स्थिति में आरसी नवीनीकरण, बीमा और वाहन ट्रांसफर जैसी सेवाओं पर रोक लगाने की तैयारी कर ली है।

मंत्रालय ने 11 जुलाई को इस संबंध में अधिसूचना जारी करते हुए 30 दिन के भीतर हितधारकों से सुझाव और आपत्तियाँ मांगी हैं। इसके बाद यह व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।

मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नई प्रणाली के तहत टोल प्लाजा पर वैध और कार्यशील फास्टैग न होने पर वाहन की यात्रा का संपूर्ण विवरण जैसे तिथि, समय और स्थान के साथ वाहन मालिक को भेजा जाएगा। इसके बाद बकाया टोल का भुगतान करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक नोटिस जारी किया जाएगा।

भुगतान न करने पर वाहन मालिक आरसी नवीनीकरण, वार्षिक कर जमा, बीमा नवीनीकरण, स्वामित्व हस्तांतरण या एनओसी जैसी सेवाओं से वंचित रहेंगे।

अधिकारी ने बताया कि बड़ी संख्या में वाहन चालक अब भी फास्टैग को वाहन की विंडस्क्रीन पर नहीं लगाते या उसे सक्रिय नहीं करते, जिससे टोल का स्वतः भुगतान नहीं हो पाता। एनएचएआई की इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (ETC) प्रणाली के माध्यम से अब ऐसे वाहनों की पहचान की जा रही है।

अब बीमा कंपनियों के लिए भी एक नई जिम्मेदारी तय की जाएगी। मोटर वाहन अधिनियम की धारा 137 के तहत, बीमा जारी करने से पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि वाहन पर कोई टोल बकाया न हो। यह पुष्टि राष्ट्रीय मोटर वाहन रजिस्टर के माध्यम से ऑनलाइन की जाएगी।

नई व्यवस्था के लागू होने के बाद वाहन मालिकों को अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता होगी। उन्हें नियमित रूप से अपने फास्टैग को सक्रिय और रिचार्ज रखना होगा। बकाया टोल शुल्क की समय-समय पर जांच करनी होगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने सहित कई मंत्रियों ने चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर दी श्रद्धांजलि

नई दिल्ली:  स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर आज देश के प्रमुख नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने आजाद के साहस, बलिदान और देशभक्ति की भावना को याद करते हुए उनके योगदान को सराहा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद वीरता और साहस के प्रतीक थे। उन्होंने भारत की स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और युवाओं को न्याय के लिए डटकर मुकाबला करने की प्रेरणा दी।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आजाद को सच्चा देशभक्त बताते हुए कहा कि उन्होंने अपनी क्रांतिकारी भावना से अंग्रेजी शासन की नींव हिला दी।

उन्होंने कहा, “आजाद ने अंतिम सांस तक स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया और राष्ट्रसेवा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।”

भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने चंद्रशेखर आजाद को मां भारती का सच्चा सपूत बताया और कहा कि आजाद ने स्वदेशी, स्वराज और भारतीय संस्कृति के प्रति जन जागृति पैदा की और स्वतंत्रता आंदोलन को जन-आंदोलन में बदला।

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने आजाद के समर्पण को प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि उनका जीवन देशभक्ति का प्रतीक है।

उन्होंने कहा, “मातृभूमि को परतंत्रता की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए अपना सर्वस्व अर्पण करने वाले महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद जी की जयंती पर उन्हें शत्-शत् नमन। राष्ट्र के प्रति उनका समर्पण सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।”

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चंद्रशेखर आजाद को साहस और दृढ़ता का पर्याय बताया और कहा कि आजाद की बलिदान गाथा युगों-युगों तक प्रेरित करती रहेगी।

उन्होंने कहा, “मां भारती के अनन्य उपासक, दृढ़ता, साहस और आत्मविश्वास के पर्याय, महान क्रांतिकारी, वीर हुतात्मा चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर कोटिश: नमन करता हूं! मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए आपने त्याग, संघर्ष और बलिदान की जो गाथा लिखी है, वह युगों-युगों तक राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करती रहेगी। वीर सपूत के चरणों में बारंबार प्रणाम!”

केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने आजाद को वीरता का अद्वितीय प्रतीक बताते हुए उनके जीवन को माँ भारती की सेवा में समर्पित बताया।

उन्होंने कहा, “मां भारती की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व जीवन खपा देने वाले, साहस व वीरता के अद्वितीय प्रतीक, महान क्रांतिकारी, अमर बलिदानी चंद्रशेखर आजाद जी की जयंती पर कोटिश: नमन करता हूं!”

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आजाद के क्रांतिकारी योगदान को याद करते हुए कहा कि उनका प्रसिद्ध कथन, “दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगे, आजाद ही रहे हैं और आजाद ही रहेंगे।”

उन्होंने कहा, “स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिवीर, अमर शहीद चन्द्रशेखर आजाद जी की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं। चन्द्रशेखर आजाद जी ने अपनी अद्वितीय देशभक्ति से अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिलाने का काम किया और समस्त राष्ट्र को स्वतंत्रता के प्रति जागरूक किया। उन्होंने अपने जीवन के सर्वोत्तम क्षणों को देश की आज़ादी के लिए समर्पित कर दिया। उनका जीवन भारतीय स्वाधीनता संग्राम की एक अनमोल धरोहर है। “दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगे, आजाद ही रहे हैं और आजाद ही रहेंगे”—उनका यह वाक्य आज भी हम सभी के हृदय में गूंजता है तथा राष्ट्रसेवा हेतु हर भारतीय को प्रेरित करता है।”

झारखंड हाईकोर्ट के 17वें चीफ जस्टिस बने तरलोक सिंह चौहान

रांची: झारखंड हाईकोर्ट के नवनियुक्त चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान ने बुधवार को पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। रांची के राजभवन में आयोजित समारोह में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके साथ ही वे झारखंड के 17वें चीफ जस्टिस बन गए।

मुख्य सचिव अलका तिवारी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा जारी चीफ जस्टिस की नियुक्ति संबंधी वारंट को हिंदी और अंग्रेजी में पढ़कर सुनाया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, झारखंड हाई कोर्ट के सभी न्यायाधीश, झारखंड सरकार के कई मंत्री, महाधिवक्ता राजीव रंजन, जस्टिस तरलोक सिंह चौहान के परिजन और राज्य सरकार के अधिकारी उपस्थित रहे।

9 जनवरी 1964 को हिमाचल प्रदेश के रोहड़ू में जन्मे जस्टिस तरलोक सिंह चौहान ने शिमला के बिशप कॉटन से स्कूली शिक्षा प्राप्त करने के बाद पंजाब यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री ली। उन्होंने 1989 में हिमाचल प्रदेश बार काउंसिल में वकील के रूप में नामांकन के बाद सभी विधायी शाखाओं में गहरा अनुभव अर्जित किया। वह 2014 में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश और फिर स्थायी न्यायाधीश बने।

जस्टिस चौहान ने पर्यावरण कानून, बाल कल्याण और न्यायिक सुधारों में उल्लेखनीय कार्य किया। वे किशोर न्याय समिति, विधिक सेवा प्राधिकरण और हाईकोर्ट की कंप्यूटर एवं ई-कोर्ट समिति का नेतृत्व कर न्यायपालिका में डिजिटल परिवर्तन में अहम भूमिका निभा चुके हैं।

वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भारतीय न्यायपालिका का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। उनके नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश न्यायपालिका ने ई-फाइलिंग, ऑनलाइन सेवाओं और डिजिटल न्यायिक प्रक्रियाओं में नए कीर्तिमान स्थापित किए।

झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में जस्टिस चौहान की नियुक्ति की अधिसूचना भारत के राष्ट्रपति कार्यालय से 15 जुलाई को जारी की गई थी।

जस्टिस चौहान से पहले झारखंड के चीफ जस्टिस के रूप में कार्यरत रहे जस्टिस एम.एस. रामचंद्र राव का तबादला त्रिपुरा हाईकोर्ट कर दिया गया है।

जस्टिस रामचंद्र राव ने 25 सितंबर 2024 को झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में शपथ ली थी, और उनके कार्यकाल में अदालत में कई अहम जनहित याचिकाओं और संवैधानिक मामलों की सुनवाई हुई।

संसद का दूसरा दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ा, तीन बार स्थगित हुई लोकसभा की कार्यवाही विपक्ष ने उठाए SIR

ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम हमले जैसे मुद्दे, सरकार पर दोहरे रवैये का आरोप


 अंजलि भाटिया,
नई दिल्ली : मॉनसून सत्र के दूसरे दिन विपक्ष के हंगामे के कारण दोनों सदन नहीं चल पाए और आखिर में दिन भर के लिए स्थगित कर दिए गए।राज्यसभा में विपक्षी दलों के सांसदों ने ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा की मांग की और नियम 267 के तहत 12 नोटिस उप सभापति को दिए गए थे। इनमें से एक नोटिस केरल से माकपा सांसद पी संतोष ने उपराष्ट्रपति के अचानक इस्तीफे पर चर्चा कराए जाने पर दिया था। उपसभापति हरिवंश नारायण ने सभी नोटिस अस्वीकार कर दिए। शून्यकाल में हरिवंश नारायण ने समुद्री मार्ग से माल परिवहन विधेयक 2025 पर विचार के लिए प्रस्ताव पेश करने के लिए जहाजरानी मंत्री सर्बानंद सोनोवाल को बुलाया लेकिन कांग्रेसी सांसदों ने मांग की कि नेता प्रतिपक्ष को बोलने का मौका दिया जाए बाकी विपक्षी दलों के सांसदों ने भी बहुत हंगामा किया जिसके चलते 10 मिनट के भीतर ही सदन की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित कर दी गयी। बाद में जैसे ही 12 बजे प्रश्नकाल शुरू हुआ घनश्याम तिवारी ने कर घोषणा की कि उपराष्ट्रपति का इस्तीफा तुरंत प्रभाव से राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया है। विपक्षी सांसदों के जोरदार हंगामे के चलते  पांच मिनट के भीतर सदन 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। दो बजे भी मुश्किल से तीन मिनट भी सदन नहीं चल पाया और बुधवार 11 बजे तक के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गयी। जबकि सोमवार को राज्यसभा में केवल 15 मिनट का व्यवधान हुआ था और शाम साढ़े चार बजे तक सदन सुचारू रूप से चला था ।
लोकसभा
संसद के मानसून सत्र का दूसरा दिन लोकसभा में  भारी हंगामे के बीच गया। विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के चलते लोकसभा की कार्यवाही तीन बार स्थगित करनी पड़ी।
विपक्ष के हंगामे और विरोध-प्रदर्शन के कारण हर बार कुछ मिनटों में ही कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। सत्र के दौरान जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसद तख्तियां लेकर वेल में पहुंच गए और नारेबाजी शुरू कर दी। स्थिति को देखते हुए कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे तक, फिर 2 बजे तक, और अंततः पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। अब लोकसभा की कार्यवाही बुधवार सुबह 11 बजे से शुरू होगी।
दूसरे दिन विपक्षी सांसदों ने बिहार में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के खिलाफ संसद के अंदर और बाहर जोरदार विरोध दर्ज कराया। इसके साथ ही उन्होंने पहलगाम आतंकी हमला, ऑपरेशन सिंदूर और अन्य राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर प्रधानमंत्री से जवाब और संसद में विस्तृत चर्चा की मांग की।
सदन स्थगित होने से पहले केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, बीएसी (बिजनेस एडवाइजरी कमेटी) में तय हुआ था कि सबसे पहले ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर चर्चा होगी। चर्चा के लिए सरकार तैयार है, लेकिन विपक्ष हंगामे पर आमादा है। रिजिजू ने कहा कि चर्चा किस नियम के तहत होगी, यह तय होना बाकी है। सभी मुद्दों को एकसाथ उठाना संभव नहीं। बीएसी में यह भी सहमति बनी थी कि कोई सांसद प्लेकार्ड लेकर नहीं आएगा, फिर भी नियमों का उल्लंघन किया गया। उन्होंने आगे कहा कि संसद की कार्यवाही बाधित कर विपक्ष करोड़ों रुपये के टैक्सपेयर्स के पैसे की बर्बादी कर रहा है और इसे जनता को जवाब देना होगा। हम चर्चा के लिए तैयार हैं. फिर  भी ये सदन चलने नहीं देते हैं. यह दोहरा चरित्र ठीक नहीं है।

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लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी सांसदों ने संसद भवन के मकर द्वार पर सीढ़ियों पर खड़े होकर विरोध प्रदर्शन किया। सांसदों ने तख्तियां लेकर SIR वापस लेने की मांग की और सरकार पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने का आरोप लगाया।