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क्या आगरा एक शहर है या वाइल्ड लाइफ फॉरेस्ट?

आवारा जानवरों का बढ़ता संकट: गायों, कुत्तों और बंदरों की बढ़ती संख्या ने मचाया हाहाकार

ब्रज क्षेत्र में सड़कें बनीं मैदान-ए-जंग, सरकारी कोशिशें नाकाफी 

सड़कों पर अब सिर्फ गाड़ियाँ नहीं दौड़तीं, मौत के साए भी बेखौफ मंडराते हैं!! जानलेवा कुत्तों के झुंड, उग्र सांड, आक्रामक बंदर और आवारा गायें शहरों की शांति को निगल चुके हैं। कहीं स्कूल से लौटता बच्चा कुत्ते के हमले में घायल होता है, तो कहीं बाइक सवार सांड की टक्कर से सड़क पर गिरकर जान गंवा बैठता है। छतों पर उछलते बंदर न सिर्फ लोगों को घायल करते हैं, बल्कि घरों और फसलों को भी तबाह कर रहे हैं। हर मोड़ पर खतरा घात लगाए बैठा है, लेकिन प्रशासन अब भी आंख मूंदे बैठा है।

बृज खंडेलवाल

बाकी शहर तो छोड़िए, ताज महल क्षेत्र  तक  में आवारा कुत्तों, बंदरों और कई बार लड़ते झगड़ते साँड़ और गायों  ने पर्यटकों को आतंकित कर रखा है।

ब्रज मंडल  में आवारा जानवरों—गायों, कुत्तों और बंदरों—का सैलाब सड़कों और खेतों को मैदान-ए-जंग में तब्दील कर रहा है।

गोवंश, कुत्तों और बंदरों की बढ़ती संख्या ने योगी आदित्यनाथ सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, जिससे जान-माल का नुकसान और सार्वजनिक सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। 

मथुरा और वृंदावन में आवारा गायों के झुंड सड़कों पर कब्जा जमाए हुए हैं, जहाँ आक्रामक सांड वाहनों और पैदल चलने वालों पर हमला कर रहे हैं। पिछले हफ्ते, वृंदावन के एक मंदिर के पास एक आवारा सांड ने एक 62 वर्षीय महिला को जख्मी कर दिया। वहीं, राज्यभर में अनुमानित 8.5 लाख आवारा कुत्तों ने काटने की घटनाओं में बढ़ोतरी की है—सिर्फ आगरा में ही अस्पताल रोजाना 200 मामले दर्ज कर रहे हैं। शहरी इलाकों में बंदरों का आतंक भी बढ़ा है; हाल ही में गोवर्धन में एक बंदरों के झुंड ने किराना दुकान का सारा सामान तबाह कर दिया।  

मथुरा के गाँवों में किसान आवारा गायों के हमलों से परेशान हैं, जो खेतों को रौंदकर प्रति एकड़ 75,000 रुपये तक का नुकसान पहुँचा रही हैं। बंदरों के झुंड बागों को उजाड़ रहे हैं। “काँटेदार तार लगाने से खर्चा बढ़ रहा है,” कुत्तों के हमलों ने भी पशुओं को निशाना बनाया है—पिछले महीने बरसाना के पास एक गाँव में 15 बकरियों को कुत्तों ने मार डाला। 

2025-26 के बजट में आवारा जानवरों के प्रबंधन के लिए 2,500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जिसमें 200 करोड़ नए गौशालाओं, 150 करोड़ कुत्तों की नसबंदी और 50 करोड़ बंदरों को हटाने के लिए हैं। मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना के तहत अब गोद ली गई गाय के लिए 60 रुपये प्रतिदिन दिए जाते हैं, लेकिन संकट इन कोशिशों पर भारी पड़ रहा है। 

8,000 से ज्यादा गौशालाओं में 14 लाख गायें हैं, मगर जगह और दवाइयों की कमी से जूझ रही हैं। “हमारे पास न जगह बची है, न दवाइयाँ—कई जानवर बीमार पड़े हैं,” मथुरा की एक गौशाला के प्रबंधक ने बताया। कुत्तों की नसबंदी का लक्ष्य (सालाना 2 लाख) भी पिछड़ रहा है, जबकि बंदरों को जंगलों में भेजने की योजना पर वन्यजीव संगठनों ने सवाल उठाए हैं। 

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के मुताबिक, 2025 में यूपी की सड़कों पर गायों से जुड़े 120 हादसे हुए। कुत्तों के काटने से स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है—10 जिलों में एंटी-रेबीज वैक्सीन की कमी बताई गई है। बंदरों के हमलों ने तीर्थयात्रियों को पर्यटन स्थलों से दूर कर दिया है, वृंदावन के होटल व्यवसाय को आमदनी में गिरावट का सामना करना पड़ा है। 

मंदिरों के आसपास जानवरों को खिलाने की आदत ने शहरी इलाकों में इनकी तादाद बढ़ा दी है। “प्रसाद चढ़ाने के बाद जानवर बाजारों में घुस आते हैं,” एक पुजारी ने कहा।

गोबर और गोमूत्र आधारित उत्पादों को बढ़ावा देने की कोशिशें भी बाजार की मांग के अभाव में धीमी पड़ गई हैं। कुत्तों को गोद लेने और बंदरों को जंगलों में भेजने की मुहिम को जनसमर्थन नहीं मिल रहा। 

विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ बजट बढ़ाने से काम नहीं चलेगा। नसबंदी अभियानों को तेज करने, जानवरों को खिलाने पर नियंत्रण और बेहतर आश्रयों के निर्माण पर जोर देना होगा। बिना सख्त और नवाचारी कदमों के, उत्तर प्रदेश में यह संकट और गहरा सकता है।

भारी बारिश के कारण अमरनाथ यात्रा स्थगित

भारी बारिश के कारण अमरनाथ यात्रा स्थगित होने के कारण गुरुवार को यात्रियों का कोई काफिला जम्मू से कश्मीर के लिए रवाना नहीं होगा। अधिकारियों ने बताया कि खराब मौसम को देखते हुए, सावधानी के तौर पर, तीर्थयात्रियों का काफिला भगवती नगर, जम्मू से आगे नहीं बढ़ेगा।

जम्मू के संभागीय आयुक्त रमेश कुमार ने कहा, “यात्रा क्षेत्र में भारी बारिश के कारण बेस कैंप से तीर्थयात्रियों की आवाजाही प्रभावित हुई है। इसलिए, यह निर्णय लिया गया है कि 31 जुलाई को भगवती नगर, जम्मू से बेस कैंप बालटाल और नुनवान की ओर किसी भी काफिले की आवाजाही की अनुमति नहीं दी जाएगी। तीर्थयात्रियों को समय-समय पर स्थिति से अवगत कराया जाएगा।” अमरनाथ यात्रा 2025 के दौरान अब तक 3.93 लाख से अधिक तीर्थयात्री पवित्र गुफा मंदिर में दर्शन कर चुके हैं। कश्मीर के संभागीय आयुक्त विजय कुमार बिधूड़ी ने कहा, “हाल ही में हुई भारी बारिश के कारण श्री अमरनाथ जी यात्रा मार्ग के पहलगाम मार्ग पर तत्काल मरम्मत और रखरखाव कार्य किए जाने की आवश्यकता है। यात्रा 1 अगस्त से बालटाल मार्ग से जारी रहेगी।”

उल्लेखनीय है कि 30 जुलाई को भारी बारिश के कारण दोनों आधार शिविरों (बालटाल और चंदनवाड़ी/नुनवान) से यात्रा स्थगित कर दी गई थी। इस वर्ष अब तक 3.93 लाख से अधिक यात्री श्री अमरनाथजी की पवित्र गुफा में दर्शन कर चुके हैं। इस वर्ष की यात्रा 3 जुलाई को शुरू हुई और 9 अगस्त को समाप्त होगी। पहलगाम मार्ग का उपयोग करने वाले लोग चंदनवाड़ी, शेषनाग और पंचतरणी से होकर गुफा मंदिर तक पहुंचते हैं और 46 किलोमीटर की पैदल दूरी तय करते हैं। तीर्थयात्रियों को गुफा मंदिर तक पहुंचने में चार दिन लगते हैं। वहीं, छोटे बालटाल मार्ग का उपयोग करने वालों को गुफा मंदिर तक पहुंचने के लिए 14 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ती है और यात्रा पूरी करने के बाद उसी दिन आधार शिविर लौटना पड़ता है। सुरक्षा कारणों से इस वर्ष यात्रियों के लिए कोई हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध नहीं है। श्री अमरनाथ जी यात्रा भक्तों के लिए सबसे पवित्र धार्मिक तीर्थयात्राओं में से एक है, क्योंकि किंवदंती है कि भगवान शिव ने इस गुफा के अंदर माता पार्वती को शाश्वत जीवन और अमरता के रहस्य बताए थे।

मानसून सत्र में विपक्ष का आक्रामक रुख, सरकार को चारों तरफ से घेरा

अंजलि भाटिया
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र में बुधवार का दिन विपक्ष की एकजुटता और आक्रामक तेवरों का गवाह बना। कांग्रेस समेत विभिन्न विपक्षी दलों ने संसद के भीतर और बाहर, दोनों मोर्चों पर सरकार को घेरने की रणनीति अपनाई। मुद्दे चाहे डोनाल्ड ट्रंप के विवादित दावे हों, ननों की गिरफ्तारी, बिहार का एसआईआर विवाद या फिर नेहरू पर बार-बार हो रहे राजनीतिक हमले विपक्ष ने हर मोर्चे पर तीखा हमला बोला।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत-पाकिस्तान के बीच युद्धविराम में भूमिका निभाने के दावे पर विपक्ष ने प्रधानमंत्री मोदी को घेरा। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि पीएम मोदी ट्रंप का नाम तक नहीं ले पा रहे, क्योंकि उन्हें डर है कि ट्रंप सच्चाई उजागर कर देंगे। प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी सरकार की विदेश नीति को निशाने पर लेते हुए कहा कि विदेश मंत्री और प्रधानमंत्री गोलमोल जवाब दे रहे हैं, जबकि उन्हें साफ तौर पर कहना चाहिए कि ट्रंप गलत बोल रहे हैं।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार कुछ छिपा रही है और जवाब देने से बच रही है। वहीं गुरजीत सिंह औजला ने सवाल उठाया कि अगर ट्रंप 29 बार ‘सीजफायर’ का दावा कर चुके हैं, तो प्रधानमंत्री खुलकर इसका खंडन क्यों नहीं कर रहे?
छत्तीसगढ़ में दो कैथोलिक ननों की गिरफ्तारी के मुद्दे पर कांग्रेस ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। प्रियंका गांधी के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में कांग्रेस सांसदों ने बीजेपी सरकार पर अल्पसंख्यकों को टारगेट करने का आरोप लगाया। प्रियंका ने कहा कि ये महिलाएं निर्दोष हैं और उन्हें जबरन झूठे मामलों में फंसाया गया है। उन्होंने इनकी तत्काल रिहाई की मांग की।
बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर भी विपक्ष ने सरकार पर हमला बोला। सोनिया गांधी सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने इसे गरीबों, प्रवासी मजदूरों और महिलाओं के खिलाफ साजिश करार दिया। विपक्ष का आरोप है कि केंद्र सरकार चुनाव आयोग के जरिए मतदाता सूची में छेड़छाड़ कर रही है। हालांकि बीजेपी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि एसआईआर एक नियमित प्रक्रिया है और चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संस्था है। जयराम रमेश ने कहा, “सरकार के पास आज की समस्याओं का हल नहीं है, इसलिए वह नेहरू को दोष देने की रणनीति अपना रही है। यह ‘नेहरू फोबिया’ का प्रमाण है।
वही आज लोकसभा में प्र्शनकल और शून्यकाल में सभी सांसदों ने अपने अपने राज्यों से जुड़े मुद्दे को रखा। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंहने प्रश्नकाल के दौरान कहा, “डिजिटल इंडिया, स्मार्ट सिटी मिशन, अटल कायाकल्प और शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत), अंतरिक्ष का उपयोग करके कृषि उत्पादन का पूर्वानुमान, कृषि मौसम विज्ञान और भूमि आधारित अवलोकन (फसल) (फसल क्षेत्रफल आकलन और उत्पादन पूर्वानुमान) सहित सरकार की कई प्रमुख पहलों के समर्थन में अंतरिक्ष-आधारित इनपुट का उपयोग किया जा रहा है।
शून्यकाल में कांग्रेस महासचिव और वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी वाद्रा ने केंद्र सरकार से अपील की है कि वह वायनाड के भूस्खलन पीड़ितों के ऋण माफ करे। इस प्राकृतिक आपदा ने सैकड़ों लोगों की जान ले ली, सैकड़ों परिवार उजड़ गए और अब भी प्रभावित लोग पुनर्वास की राह देख रहे हैं।
उन्होंने केंद्र से अपील की कि वह वायनाड के लिए विशेष पैकेज जारी करे और पीड़ितों पर लादे गए ऋण को तत्काल माफ किया जाए, ताकि वे एक नई शुरुआत कर सकें।जालौर-सिरोही से लोकसभा सांसद लुंबाराम चौधरी ने अपने संसदीय क्षेत्र की जल संकट की गंभीर समस्या को उठाते हुए नर्मदा का पानी जालौर और सिरोही जिलों तक पहुंचाने की मांग की। उन्होंने कहा कि दोनों जिले डार्क जोन घोषित हैं, जहां पीने के पानी और सिंचाई के लिए आवश्यक जल संसाधन मौजूद नहीं हैं

अमेरिका के टैरिफ फैसले से भारतीय शेयर बाजार हिला, सेंसेक्स 800 अंक लुढ़का

अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा का सीधा असर गुरुवार सुबह भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिला। कारोबारी सप्ताह के चौथे दिन बाजार की शुरुआत से ही बिकवाली का दबाव हावी रहा, जिससे सेंसेक्स करीब 800 अंकों की गिरावट के साथ नीचे आ गया, जबकि निफ्टी 50 भी 24,650 के नीचे फिसल गया।

बीएसई सेंसेक्स ने दिन की शुरुआत 80,695.50 अंकों पर की, जो इसके पिछले बंद स्तर 81,481.86 से 786 अंक नीचे था। शुरुआती मिनटों में ही यह और लुढ़ककर 80,695.15 के स्तर तक पहुंच गया। उधर, निफ्टी 50 ने भी 213 अंकों की गिरावट के साथ 24,642.25 पर शुरुआत की और कुछ ही देर में 24,635.00 तक गिर गया।

बाजार में आई इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार की ओर से भारतीय उत्पादों पर 1 अगस्त से 25% टैरिफ लगाने की घोषणा रही। इस फैसले ने निवेशकों की भावनाओं पर सीधा असर डाला है और भारत-अमेरिका के व्यापारिक रिश्तों में तनाव के संकेत दिए हैं। बड़ी कंपनियों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी जोरदार बिकवाली देखी गई। बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में 2% तक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह साफ हो गया कि बाजार में गिरावट व्यापक स्तर पर फैली है।

कारोबार शुरू होते ही निवेशकों को बड़ा झटका लगा। महज 10 मिनट के भीतर बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 452 लाख करोड़ से घटकर 449 लाख करोड़ तक आ गया। यानी सिर्फ कुछ मिनटों में ही करीब 3 लाख करोड़ की पूंजी डूब गई। फिलहाल निवेशक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि क्या आने वाले दिनों में यह व्यापारिक तनाव और गहराएगा, या भारत और अमेरिका के बीच किसी बातचीत के जरिए समाधान निकल पाएगा।

लालू यादव को झटका, लैंड फॉर जॉब स्कैम केस में कार्यवाही पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

नौकरी के बदले जमीन (लैंड फॉर जॉब) घोटाले में फंसे राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें एक और बड़ा झटका देते हुए निचली अदालत में चल रही मुकदमे की कार्यवाही पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है।

शीर्ष अदालत ने लालू यादव की याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि इस मामले से जुड़ी एक याचिका पहले से ही दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित है। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने टिप्पणी की कि निचली अदालत द्वारा आरोप तय किया जाना, दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित याचिका पर आने वाले फैसले पर निर्भर करेगा।

यह मामला साल 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र में रेल मंत्री थे। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) का आरोप है कि इस दौरान रेलवे के ग्रुप ‘डी’ पदों पर भर्ती के लिए नियमों को ताक पर रखकर कई लोगों को नौकरी दी गई। इसके बदले में आवेदकों से उनकी जमीनें लालू यादव के परिवार के सदस्यों और करीबियों के नाम पर लिखवाई गईं।

लालू यादव की ओर से उनके वकील मुदित गुप्ता ने अर्जी दाखिल कर 12 अगस्त तक ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही स्थगित करने की मांग की थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने राहत देने से इनकार कर दिया। बता दें कि इससे पहले 18 जुलाई को भी शीर्ष अदालत ने लालू की ऐसी ही एक याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी।

सीबीआई इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच कर रही है और दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में लालू यादव, उनके परिवार के सदस्यों समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल कर चुकी है। सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद अब निचली अदालत में उन पर आरोप तय होने का रास्ता साफ हो गया है।

जम्मू-कश्मीर के गांदरबल में सिंध नदी में गिरी ITBP की बस, सर्च ऑपरेशन जारी

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिले में बुधवार सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के जवानों को ले जाने वाली एक बस अनियंत्रित होकर सीधे सिंध नदी में जा गिरी। घटना के बाद बस में रखे कुछ हथियारों के गायब होने की खबर से सुरक्षा महकमे में खलबली मच गई है, जिसके बाद पुलिस, SDRF और सेना ने नदी में एक बड़ा तलाशी अभियान छेड़ दिया है।

मिली जानकारी के अनुसार, यह हादसा गांदरबल के कुल्लन पुल के पास हुआ। एक खाली बस, जो आईटीबीपी के जवानों को ले जाने के लिए निर्धारित थी, एक तीखे मोड़ पर ड्राइवर के नियंत्रण से बाहर हो गई और फिसलकर सीधे सिंध नदी के तेज बहाव में समा गई। गांदरबल के एसएसपी ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि हादसे में बस का ड्राइवर बाल-बाल बच गया और उसे मामूली चोटें आई हैं। फिलहाल, उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

हादसे की खबर मिलते ही स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के आला अधिकारी मौके पर पहुंच गए। सबसे बड़ी चिंता का विषय बस में रखे गए आईटीबीपी के जवानों के हथियारों का नदी में बह जाना है। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) गांदरबल और एसडीआरएफ सब कंपोनेंट गुंड की टीमों ने तुरंत संयुक्त रूप से खोज एवं बचाव अभियान शुरू किया।

अधिकारियों ने बताया है कि अब तक चलाए गए सघन तलाशी अभियान में तीन हथियार बरामद कर लिए गए हैं। हालांकि, अभी भी कुछ और हथियारों के नदी में होने की आशंका है, जिनकी तलाश के लिए ऑपरेशन जारी है। गोताखोरों की टीमें नदी के चप्पे-चप्पे को खंगाल रही हैं।

फिलहाल, इस घटना के बारे में विस्तृत जानकारी का इंतजार किया जा रहा है और सुरक्षाबल पूरी मुस्तैदी के साथ तलाशी अभियान में जुटे हुए हैं ताकि गायब हुए सभी हथियारों को जल्द से जल्द बरामद किया जा सके।

उदासीनता और भ्रष्टाचार से आगरा के हरियाली के ख्वाब बेमानी हुए

सुप्रीम कोर्ट की दखल के बाद तीस वर्षों में, 1995 से 2025 तक जितने पौधे, या  वृक्ष सरकारी स्तर पर लगे हैं, उसके हिसाब से तो ताज ट्रिपेजियम जोन अब तक अमेजन फॉरेस्ट बन जाना चाहिए था!!

बृज खंडेलवाल

उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित वृक्षारोपण मुहिमें, जिन्हें अक्सर पर्यावरणीय मील का पत्थर बताया जाता है, ज़मीनी हकीकत में बार-बार नाकाम हो रही हैं। इसका कारण है — सरकारी लापरवाही, जवाबदेही की कमी और भ्रष्टाचार का धुंधलका। 2019 में घोषित 22 करोड़ पौधारोपण लक्ष्य की तरह कई घोषणाएं सिर्फ़ काग़ज़ों पर रह गईं। रिपोर्ट्स से पता चलता है कि पौधे तो लगाए जाते हैं, लेकिन देखरेख न होने से बड़ी संख्या में सूख जाते हैं, और फंड नौकरशाही की भूलभुलैया में गुम हो जाते हैं।

हरित कार्यकर्ता उंगली उठाते हैं: योजना की कमी: पौधों के लिए पॉलिथीन बैग और गुणवत्तापूर्ण नर्सरी पौधे समय से पहले ही अनुपलब्ध थे, जिससे किसानों को घटिया बीज इस्तेमाल करने पड़े जिनकी जीवन संभावना नगण्य थी।

रखरखाव भी नदारद: 2018 के महाअभियान में एक दिन में 9 करोड़ पौधे लगाए गए, लेकिन थर्ड पार्टी निगरानी के अभाव में ज़्यादातर नष्ट हो गए — “ना रहेगा बाँस, ना बजेगी बाँसुरी”।

भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं: नर्सरी और देखभाल के लिए तय बजट का ग़लत इस्तेमाल हुआ। “कागज़ी पेड़ों” ने सरकारी फाइलों में खूब हरियाली फैलाई, मगर धरातल पर सूखा ही सूखा।

यह सिलसिला जारी है — “सियासी तमाशा हावी है, पर्यावरणीय असर बेअसर।” और भ्रष्टाचार सिर्फ फाइलों में हरियाली उगाता है, धरती पर नहीं। जब तक पारदर्शिता और जन-सहभागिता को प्राथमिकता नहीं मिलेगी, यूपी की हरियाली सिर्फ़ “मृग-मरीचिका” बनी रहेगी।

ताज ट्रेपेजियम ज़ोन (TTZ) — 10,400 वर्ग किलोमीटर में फैले इस अति-संवेदनशील क्षेत्र में, जहां ताजमहल और अन्य मुग़ल धरोहरें स्थित हैं, वहां हरियाली घटती जा रही है। लाखों पौधे हर साल लगाए जाने के दावों के बावजूद ज़मीन पर जंगल कटते जा रहे हैं। वजह — अंधाधुंध निर्माण, प्रशासनिक उदासीनता, भ्रष्टाचार, और ज़मीन की भारी किल्लत।

रिवर कनेक्ट कैंपेन सदस्य कहते हैं कि ये असफलताएं केवल पर्यावरण के लिए ख़तरा नहीं हैं, बल्कि आगरा की ऐतिहासिक धरोहरों को रेगिस्तानी हवाओं और प्रदूषण से बचाने के संतुलन को भी बिगाड़ रही हैं। बड़ी-बड़ी परियोजनाएं — जैसे एक्सप्रेसवे, फ्लाईओवर, 29.6 किमी लंबा आगरा मेट्रो रेल मार्ग और चौड़े नेशनल हाइवे — ने हरे क्षेत्रों को निगल लिया है। “यमुना और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे” के विस्तार ने जंगलों को छीन लिया है, जिससे ताजमहल अब राजस्थान की धूलभरी हवाओं के निशाने पर है। अवैध बस्तियाँ, यमुना के डूब क्षेत्र में कॉलोनियां, रेलवे ज़मीन की नीलामी — इन सबने शहर की हरियाली को कंक्रीट में बदल डाला है। कभी अग्रवन (वन क्षेत्र) कहलाने वाला शहर अब मात्र 9% से भी कम हरित आवरण के साथ खड़ा है — जो राष्ट्रीय लक्ष्य 33% से बहुत कम है।

वृक्षारोपण अभियानों का नाटक देखिए: 2023 में 45 लाख, 2024 में 50 लाख और 2025 में 60 लाख पौधे लगाए जाने का दावा किया गया — लेकिन ये आंकड़े सिर्फ़ “काग़ज़ी पेड़” हैं। कोई देखरेख नहीं, कोई सुरक्षा नहीं — तो पौधे सूख ही जाते हैं। 2021 में यमुना किनारे, नदी की तलहटी में  12,000 पौधे लगाए गए थे, जो पहली बारिश में ही बह गए — फिर भी ठेकेदार को पूरा भुगतान हुआ। “इससे बड़ा सबूत क्या चाहिए कि व्यवस्था गड़बड़ है?”

उदासीनता का आलम ये है कि सुप्रीम कोर्ट का 1996 का निर्देश कि TTZ में हरित बफर जोन बने — आज भी अनसुना है।  चारों तरफ, वृंदावन से लेकर फिरोजाबाद तक पेड़ काटने की खबरें आ रही हैं।  बिल्डर्स पेड़ कटवा रहे हैं, अवैध कटाई धड़ल्ले से जारी है।

सूर सरोवर बर्ड सेंक्चुरी और कीठम झील, जो अति महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी क्षेत्र हैं, वो भी अब कॉलोनाइज़रों की गिरफ्त में हैं, बताते हैं डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य।

भूमि की कमी एक बड़ी चुनौती:

फिल्म सिटी, एयरपोर्ट, मॉल — सबने ज़मीन खा ली। 60 लाख पौधों के लिए 5 मीटर की दूरी पर 1.5 लाख हेक्टेयर ज़मीन चाहिए — कहाँ से आएगी? सरकारें 1990 से हर साल करोड़ों पौधे लगाने का दावा करती हैं, पर हरियाली वहीं की वहीं — “नंबरों का घोटाला है ये!”

ग्रीन एक्टिविस्ट्स कहते हैं कि पौधे गलत मौसम और गलत जगहों पर लगाए जाते हैं, देखभाल के अभाव में सूख जाते हैं। आगरा में बंदरों की आबादी एक लाख से ज़्यादा है — प्रशासन इन्हें दोष देता है। लेकिन कार्यकर्ता कहते हैं — बंदर तो बहाना हैं, असली गुनहगार है जवाबदेही की कमी और लालच।

परिणाम भयावह हैं: बढ़ता प्रदूषण, घटती बारिश, जल-स्तर का गिरना, और ताजमहल की संगमरमर पर काले दाग। सिर्फ दयालबाग क्षेत्र में ग्रीन एरिया बढ़ा है, बाकी इलाकों में बढ़ती बसावट ने हरियाली नीली है।

पर्यावरण और हरियाली की मुहिम से जुड़े एक्टिविस्ट्स, TTZ में किए गए सभी वृक्षारोपण अभियानों की स्वतंत्र ऑडिट की मांग कर रहे हैं, ताकि गड़बड़ियाँ उजागर हो सकें और दोषियों को जवाबदेह ठहराया जा सके।

ऑपरेशन शिवशक्ति के दौरान जम्मू-कश्मीर के पुंछ में नियंत्रण रेखा पर मुठभेड़ में दो आतंकवादी मारे गए

जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले के देगवार सेक्टर में सुबह सुरक्षाबलों ने एक संयुक्त अभियान में 2 आतंकियों को मार गिराया। सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा चलाए गए इस संयुक्त ऑपरेशन में आतंकियों की घुसपैठ की कोशिश को नाकाम किया गया।

नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलने के बाद इलाके को घेरकर तलाशी अभियान शुरू किया गया था। इसी दौरान आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके जवाब में की गई कार्रवाई में दोनों आतंकी मारे गए। सूत्रों के अनुसार, मारे गए आतंकी पाकिस्तान से भारत में घुसपैठ की कोशिश कर रहे थे। मुठभेड़ के बाद पूरे क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई अन्य आतंकी इलाके में छिपा न हो।

इससे पहले सोमवार को श्रीनगर के लिडवास इलाके में सेना ने ऑपरेशन ‘महादेव’ के तहत पहलगाम हमले में शामिल तीन आतंकियों को ढेर कर दिया था। यह कार्रवाई घने दाचीगांव जंगलों में की गई थी, जहां से भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और कई दिनों का राशन बरामद हुआ था। सेना के अनुसार, मारे गए तीनों आतंकी ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (टीआरएफ) से जुड़े थे। इनमें लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी मूसा भी शामिल था। ऑपरेशन के बाद ड्रोन फोटोग्राफी से तीनों आतंकियों के मारे जाने की पुष्टि की गई।

दुनिया के किसी भी नेता ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नहीं रुकवाया-प्रधानमंत्री मोदी

संसद के मानसून सत्र में मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर हुई चर्चा का जवाब दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “दुनिया के किसी भी नेता ने ऑपरेशन सिंदूर रोकने को नहीं कहा। अमेरिका के उपराष्ट्रपति ने मुझे फोन पर बताया कि पाकिस्तान बहुत बड़ा हमला करने वाला है और मेरा जवाब था कि अगर पाकिस्तान का ये ईरादा है, तो उनको बहुत महंगा पड़ेगा।

पीएम मोदी ने कहा कि हम बड़ा हमला करके जवाब देंगे। आगे मैंने कहा था कि हम गोली का जवाब गोले से देंगे। ये 9 तारीख की बात है और 9 तारीख रात और 10 तारीख सुबह हमने पाकिस्तान की सैन्य शक्ति को तहस-नहस कर दिया था। यही हमारा जवाब था और यही हमारा जज्बा था।” पीएम मोदी ने कहा, “जब पाकिस्तान पर कड़ा प्रहार हुआ, तो पाकिस्तान ने फोन करके डीजीएमओ के सामने फोन करके गुहार लगाई कि बस करो बहुत मारे गए, अब ज्यादा मार झेलने की ताकत नहीं है। प्लीज हमला रोक दो। भारत ने तो पहले दिन ही कह दिया था कि हमने हमारा लक्ष्य पूरा कर दिया है। अगर अब कुछ करोगे, तो महंगा पड़ेगा। भारत की स्पष्ट नीति थी, सेना के साथ मिलकर तय की गई नीति थी कि उनके आकाओं का ठिकाना हमारा लक्ष्य है।”

मोदी ने कहा, “आज पाकिस्तान भी भली-भांति जान गया है कि भारत का हर जवाब पहले से ज्यादा तगड़ा होता है। उसे ये भी पता है कि अगर भविष्य में नौबत आई, तो भारत आगे कुछ भी कर सकता है। इसलिए मैं फिर से लोकतंत्र के इस मंदिर में दोहराना चाहता हूं कि ऑपरेशन सिंदूर जारी है।” उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान ने दुस्साहस की अगर कल्पना की, तो उसे करारा जवाब दिया जाएगा। आज का भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान जिस तरह से लोगों ने मेरा साथ दिया, आशीर्वाद दिया, मुझ पर देशवासियों का कर्ज है। मैं देशवासियों का अभिनंदन करता हूं।  

मल्लिकार्जुन खरगे और जेपी नड्डा के बीच तूतू मैंमैं, फिर केंद्रीय मंत्री ने मांगी माफी

राज्यसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा चल रही है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राज्यसभा नेता मल्लिकार्जुन खड़गे पर निशाना साधा। इसे लेकर संसद में विपक्ष ने जमकर हंगामा किया।

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान कहा कि वह (राज्यसभा नेता मल्लिकार्जुन खड़गे) बहुत वरिष्ठ नेता हैं, लेकिन जिस तरह से उन्होंने प्रधानमंत्री पर टिप्पणी की, मैं उनका दर्द समझ सकता हूं। वह (प्रधानमंत्री मोदी) 11 साल से वहां हैं। वह दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता हैं। पार्टी को गर्व भी है और गौरव भी। पार्टी के साथ देश के लिए भी गौरव का विषय है। उन्होंने खड़गे पर तंज कसते हुए कहा कि आप अपनी पार्टी से इतने जुड़ गए हैं कि आपके लिए देश का विषय गौण हो जाता है। इस दौरान विपक्ष ने हंगामा करते हुए नड्डा के बयान पर आपत्ति जताई। इसके बाद जेपी नड्डा ने कहा कि मैं अपने शब्दों को वापस लेता हूं। मानसिक संतुलन नहीं, भावावेश कर दीजिए। वे भावावेश में जो शब्द बोले हैं, वह उनकी पार्टी और उनके व्यक्तित्व से मेल नहीं खाते हैं।

मल्लिकार्जुन खड़गे ने जेपी नड्डा के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस सदन में कुछ नेता हैं, जिनका मैं बहुत सम्मान करता हूं। नड्डा उनमें से एक हैं। राजनाथ सिंह, वे ऐसे मंत्री हैं, जो अपना बैलेंस खोए बिना बोलते हैं। वह आज मुझे बोल रहे हैं। यह शर्म की बात है। उन्हें माफी मांगनी चाहिए, मैं इसे ऐसे ही नहीं छोड़ने वाला हूं।