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एशिया कप से पहले बीसीसीआई ने इस दिग्गज की कर दी छुट्टी

बीसीसीआई ने भारतीय टीम के खिलाड़ियों की मालिश करने वाले दिग्गज राजीव कुमार से नाता तोड़ लिया है। राजीव कुमार एक दशक से भी ज्यादा समय से टीम इंडिया का हिस्सा थे। वह हाल ही में इंग्लैंड दौरे पर टीम के साथ भी गए थे, लेकिन अब उन्हें नया कॉन्ट्रैक्ट नहीं दिया गया। इसकी जानकारी खुद राजीव ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर स्टोरी शेयर करते हुए दी।

दरअसल, एशिया कप 2025 से पहले टीम इंडिया को लेकर बड़ी खबर सामने आई। टीम इंडिया के साथ 15 साल से जुड़े सपोर्ट स्टाफ राजीव कुमार को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। एशिया कप के दौरान अब राजीव टीम के साथ नजर नहीं आएंगे।

बता दें कि जब भारतीय खिलाड़ी मैच खेलने के बाद थके होते थे तो राजीव अपनी मालिश के जरिए खिलाड़ियों की थकान को दूर करते थे। वह 15 खिलाड़ियों की टीम में एक जाना पहचाना चेहरा थे। राजीव ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर स्टोरी शेयर करते हुए बीसीसीआई के साथ कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने की जानकारी देते हुए लिखा, “भारतीय क्रिकेट टीम की एक दशक (2006-2015) तक सेवा करना मेरे लिए सम्मान और सौभाग्य की बात रही। इस अवसर के लिए भगवान का धन्यवाद, मैं दिल से आभारी हूं और आगे की राह को लेकर उत्साहित हूं।”

भारत पर कल से लागू होगा 50% टैरिफ, अमेरिका ने नोटिफिकेशन जारी किया

अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले सामान पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने की योजना का ऐलान कर दिया है। यह वही कदम है जिसकी घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले कर चुके हैं। अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने एक ड्राफ्ट नोटिस जारी कर इसकी रूपरेखा पेश की है।

नोटिस के अनुसार, यह बढ़ा हुआ टैरिफ भारत के उन उत्पादों पर लागू होगा, जो 27 अगस्त, 2025 की रात 12:01 बजे (ईस्टर्न डेलाइट टाइम) के बाद खपत के लिए आयात किए जाएंगे या गोदाम से निकाले जाएंगे। ट्रंप ने इस महीने की शुरुआत में भारत से आने वाले सामान पर टैरिफ को 25 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी करने की घोषणा की थी। अमेरिका का कहना है कि यह कदम रूस से भारत की तेल खरीद के जवाब में उठाया जा रहा है।

अमेरिकी रणनीति का मकसद रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर दबाव बनाना है, ताकि वे यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के लिए बातचीत की मेज पर आएं। अमेरिका रूस के तेल व्यापार को रोकने की कोशिश में है और भारत पर यह “सेकेंडरी टैरिफ” उसी रणनीति का हिस्सा है।

भारत ने इन टैरिफों को अन्यायपूर्ण करार देते हुए अपने हितों की रक्षा का ऐलान किया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को स्पष्ट कहा कि भारत अपने ऊर्जा विकल्पों से कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि रूस से तेल खरीदने के लिए भारत को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि चीन और यूरोप के कई बड़े देश भी ऐसा कर रहे हैं लेकिन उन पर कोई सवाल नहीं उठाया जा रहा। जयशंकर ने इसे “तेल विवाद” को गलत तरीके से पेश करने की कोशिश बताया और भारत की रणनीतिक स्वायत्तता पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोमवार को अहमदाबाद में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि किसानों, पशुपालकों और छोटे कारोबारियों के हित सर्वोपरि हैं। उन्होंने कहा, “हम पर दबाव बढ़ सकता है, लेकिन भारत हर मुश्किल का सामना करेगा। मोदी के लिए किसानों और छोटे उद्योगों का हित सबसे ऊपर है।” पीएम मोदी ने अपने संबोधन में भगवान श्रीकृष्ण और महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ‘चक्रधारी श्रीकृष्ण’ और ‘चर्खाधारी गांधी’ की शक्ति से सशक्त है और अपने हितों की रक्षा के लिए किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगा।

चीन पर मेहर बान हुए ट्रंप, 6 लाख चीनी छात्रों को देंगे अमेरिकी वीजा

एक ओर भारत जैसे देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की बात करने वाले पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब चीन पर मेहरबान नजर आ रहे हैं। उन्होंने चीन के प्रति एक बड़ा नीतिगत बदलाव दिखाते हुए 6 लाख चीनी छात्रों को अमेरिकी वीजा उपलब्ध कराने का ऐलान किया है। ट्रंप का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच व्यापार को लेकर अहम बातचीत चल रही है।

सोमवार को व्हाइट हाउस में एक पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और चीन के बीच ‘बहुत महत्वपूर्ण संबंध’ हैं। उन्होंने कहा, “हम उनके (चीन के) छात्रों को आने की अनुमति देने जा रहे हैं। यह बहुत महत्वपूर्ण है, 600,000 छात्र। हम चीन के साथ मिलकर काम करेंगे।” इस घोषणा के साथ ही ट्रंप ने 6 लाख चीनी छात्रों के लिए अमेरिकी कॉलेजों में पढ़ाई का रास्ता खोल दिया है।

यह फैसला ट्रंप प्रशासन द्वारा पहले अपनाए गए आक्रामक रुख से एक बड़ा यू-टर्न है, जिसमें चीनी नागरिकों, खासकर कम्युनिस्ट पार्टी या संवेदनशील शोध क्षेत्रों से जुड़े लोगों के वीजा को रद्द करने की बात कही गई थी। ट्रंप के इस नए ऐलान से उनके कट्टर समर्थक भी अब उनकी आलोचना करने लगे हैं।

यह कदम दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच चल रही उच्च-स्तरीय व्यापार वार्ता के बीच उठाया गया है। दोनों देश टैरिफ, अमेरिकी उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण रेयर अर्थ मैग्नेट की सप्लाई और अमेरिका में बने उन्नत एआई चिप्स तक चीन की पहुंच जैसे मुद्दों पर समझौता करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, इस नरमी के बीच ट्रंप ने चीन को चेतावनी देते हुए यह भी कहा कि बीजिंग को रेयर अर्थ मैग्नेट तक वॉशिंगटन की पहुंच सुनिश्चित करनी होगी, अन्यथा उसे 200 फीसदी टैरिफ का सामना करना पड़ेगा।

जगदीप धनखड़ जी ने अपनी व्यक्तिगत और स्वास्थ्य समस्या के कारण इस्तीफा दिया- अमित शाह

पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे को लेकर बढ़ती अटकलों के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को विपक्ष के सभी दावों को खारिज कर दिया। न्यूज एजेंसी के साथ बातचीत करते हुए अमित शाह ने विपक्ष पर खूब निशाने साधे।

पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे पर जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा, “धनखड़ जी एक संवैधानिक पद पर आसीन थे और अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने संविधान के अनुरूप अच्छा काम किया। उन्होंने अपनी व्यक्तिगत स्वास्थ्य समस्या के कारण इस्तीफा दिया है। किसी को भी इसे ज्यादा खींचकर कुछ खोजने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।”

विपक्ष ने लगाए थे गंभीर आरोप– इस दौरान 130वें संविधान संशोधन विधेयक के खिलाफ विपक्ष के रुख पर उन्होंने कहा कि आज भी विपक्ष के लोग कोशिश कर रहे हैं कि अगर कभी जेल गए तो जेल से ही आसानी से सरकार बना लेंगे। जेल को ही सीएम हाउस, पीएम हाउस बना देंगे और डीजीपी, मुख्य सचिव, कैबिनेट सचिव या गृह सचिव जेल से ही आदेश लेंगे। ऐसा नहीं हो सकता। उन्होंने भरोसा जताया कि कांग्रेस पार्टी के कई लोग इस बिल का समर्थन करेंगे और यह बिल आसानी से पास होगा। विपक्ष पर निशाना साधते हुए गृहमंत्री ने कहा “लालू यादव को बचाने के लिए मनमोहन सिंह द्वारा लाए गए अध्यादेश को फाड़ने का राहुल गांधी का क्या औचित्य था? अगर उस दिन नैतिकता थी, तो क्या आज नहीं है क्योंकि आप लगातार तीन चुनाव हार चुके हैं? मुझे पूरा विश्वास है कि यह पारित हो जाएगा। कांग्रेस पार्टी और विपक्ष में ऐसे कई लोग होंगे जो नैतिकता का समर्थन करेंगे और नैतिकता के आधार को बनाए रखेंगे।”

नया कानून होता तो केजरीवाल को इस्तीफा देना पड़ता– अमित शाह ने कहा कि विपक्ष के नेता जिस कानून का विरोध कर रहे हैं। अगर वह पहले से बना होता तो जब केजरीवाल को जेल हुई थी, तब उन्हें इस्तीफा देना पड़ता। अरविंद केजरीवाल को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट के कहने पर उन्होंने इस्तीफा दिया था। उन्होंने कहा कि नए कानून के लिए जेपीसी बनाई गई है, लेकिन विपक्ष उसमें शामिल नहीं होना चाहता। यह जनता देख रही है। अगर विपक्ष नहीं शामिल होता है, तो भी जेपीसी अपना काम करेगी।

ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई ने अमेरिका के साथ सीधी बातचीत को किया खारिज

ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई ने कहा कि अमेरिका इसलिए ईरान का विरोध करता है क्योंकि वह चाहता है कि ईरान उसकी बात माने। उन्होंने इस मांग को अपमानजनक बताया और कहा कि ईरान कभी झुकेगा नहीं।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने आधिकारिक समाचार एजेंसी इरना के हवाले से बताया कि तेहरान में रविवार को दिए भाषण में खामनेई ने साफ कहा कि अमेरिका से सीधी बातचीत की कोई जरूरत नहीं है। उनके अनुसार 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से अमेरिका की शत्रुता लगातार बनी हुई है।

उन्होंने 13 जून को ईरान पर हुए हमले का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका से जुड़े समूह अगले दिन एक यूरोपीय राजधानी में “इस्लामी गणराज्य के बाद” व्यवस्था पर चर्चा करने के लिए मिले थे, यहां तक कि राजशाही का सुझाव भी दिया गया। खामेनेई के अनुसार, ईरानी जनता और संस्थाओं की मजबूती ने इन कोशिशों को नाकाम कर दिया।

खामेनेई ने जून में इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों पर किए गए हमलों का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि इन हमलों का मकसद ईरान को अस्थिर करना था, लेकिन ईरान ने इसका जवाब दिया। खामेनेई ने घरेलू एकता और राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के लिए समर्थन का आग्रह किया और चेतावनी दी कि ईरान के विरोधी अब घरेलू स्तर पर विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने गाजा में इजरायल की कार्रवाई की निंदा की, पश्चिमी देशों से उसकी मदद रोकने की अपील की और यमन के हूती समूह द्वारा इजरायल के खिलाफ किए गए कदमों को जायज बताया। ज्ञात हो कि, 1979 की इस्लामी क्रांति और उसके परिणामस्वरूप अमेरिकी दूतावास में हुए बंधक संकट के बाद तेहरान और वाशिंगटन के बीच संबंध टूट गए थे। तब से, वाशिंगटन ने तेहरान पर कई प्रतिबंध लगाए हैं, जिनमें से सबसे हालिया प्रतिबंध उसके परमाणु कार्यक्रम के कारण लगाए गए हैं।

‘दिव्यांगों का मजाक बर्दाश्त नहीं’, सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना समेत 5 कॉमेडियन पर की कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और मशहूर कॉमेडियन समय रैना समेत पांच लोगों को दिव्यांगों का मजाक उड़ाने के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने का सख्त आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में बाद में उचित जुर्माना या सजा भी लगाई जा सकती है।

यह कार्रवाई ‘SMA Cure Foundation’ द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान हुई, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कई कॉमेडियन अपने कार्यक्रमों और पॉडकास्ट में दिव्यांग व्यक्तियों के खिलाफ असंवेदनशील और अपमानजनक टिप्पणियां करते हैं। याचिका में समय रैना के अलावा विपुल गोयल, बलराज परमजीत सिंह घई, सोनाली ठक्कर और निशांत जगदीश तनवार का भी नाम शामिल है। जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है।

अदालत में कॉमेडियंस के वकील ने स्वीकार किया कि वे सभी अपने यूट्यूब चैनलों और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर माफीनामा पोस्ट करेंगे। इस पर कोर्ट ने आदेश दिया कि माफी पोस्ट करने के साथ-साथ इन सभी को एक हलफनामा भी दाखिल करना होगा। अदालत ने कहा कि यदि वे अपने वादे का पालन करते हैं, तो उन्हें फिलहाल व्यक्तिगत पेशी से छूट दी जाएगी, लेकिन उन पर लगने वाले जुर्माने के सवाल पर बाद में विचार किया जाएगा।

इस मामले को व्यापक रूप देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को भी पक्षकार बनाया है। कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल को निर्देश दिया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक विस्तृत गाइडलाइन तैयार की जाए। इस गाइडलाइन को बनाने में याचिकाकर्ता ‘SMA Cure Foundation’ और अन्य हितधारकों से भी सुझाव लिए जाएंगे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि किसी भी व्यक्ति की गरिमा और सम्मान को ठेस न पहुंचे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मामला रणवीर अल्लाहबादिया और आशीष चंचलानी से जुड़े ‘India’s Got Latent’ विवाद के साथ भी जोड़ा गया है।

एसबीआई के बाद बीओआई ने भी अनिल अंबानी समेत रिलायंस कम्युनिकेशन के लोन अकाउंट को फ्रॉड घोषित किया

भारतीय स्टेट बैंक की ओर से रिलायंस कम्युनिकेशन के अकाउंट्स को फ्रॉड घोषित करने के बाद बैंक ऑफ इंडिया (बीओआई) ने भी रिलायंस कम्युनिकेशन, रिलायंस टेलीकॉम समेत प्रमोटर अनिल अंबानी के अकाउंट को फ्रॉड घोषित कर दिया है। बैंक ने आरोप लगाया है कि इन लोन से फंड का उपयोग निर्धारित उद्देश्य से अलग कार्यों के लिए किया गया। इस नोटिस में कंपनी से जुड़े हुए कई अन्य लोगों के नाम भी शामिल हैं।

कंपनी ने फाइलिंग में कहा कि रिलायंस कम्युनिकेशन को 8 अगस्त की तारीख का एक पत्र बैंक ऑफ इंडिया से 22 अगस्त, 2025 को मिला है। रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड को भेजे नोटिस में बीओआई ने कहा है कि अनिल धीरजलाल अंबानी और मंजरी आशिक कक्कड़ के लोन अकाउंट को 724.78 करोड़ रुपए के बकाया लोन के लिए ‘फ्रॉड’ के रूप में चिह्नित किया गया है। कंपनी द्वारा साझा किए गए पत्र में, बैंक ऑफ इंडिया ने कहा, “उधारकर्ता का खाता 30 जून 2017 को 724.78 करोड़ रुपए के बकाया के साथ एनपीए हो गया। बैंक, बकाया राशि के भुगतान के लिए उधारकर्ताओं और गारंटरों से संपर्क कर रहा है, लेकिन वे बकाया राशि का भुगतान करने में विफल रहे हैं और लापरवाही बरत रहे हैं।” रिलायंस टेलीकॉम को भेजे गए नोटिस में, बैंक ऑफ इंडिया ने 51.77 करोड़ रुपए के लोन चूक के लिए कंपनी के खाते के साथ-साथ निदेशकों ग्रेस थॉमस और सतीश सेठ के खातों को भी ‘फ्रॉड’ करार दिया है। इस मामले में अन्य लोगों में गौतम भाईलाल दोषी, दगदुलाल कस्तूरीचंद जैन और प्रकाश शेनॉय शामिल हैं।

शनिवार को अनिल अंबानी के आवास पर सीबीआई द्वारा छापेमारी की गई थी। इस पर कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि अनिल अंबानी सभी आरोपों को सख्ती से नकारते हैं और पूरे सम्मान के साथ कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से अपना पक्ष रखेंगे। बयान में कहा गया कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया द्वारा दर्ज की गई शिकायत एक दस साल पुराना मामला है। उस समय अनिल अंबानी केवल नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (गैर-कार्यकारी निदेशक) की भूमिका में थे और कंपनी के दैनिक संचालन से उनका कोई लेना-देना नहीं था। प्रवक्ता ने इस बात पर जोर दिया कि एसबीआई ने इसी मामले में पांच अन्य गैर-कार्यकारी निदेशकों के खिलाफ कार्रवाई वापस ले ली थी, लेकिन अनिल अंबानी को विशेष रूप से निशाना बनाया गया है। यह एकपक्षीय रवैया समझ से परे है। बयान में आगे कहा गया कि वर्तमान में रिलायंस कम्युनिकेशंस की जिम्मेदारी क्रेडिटर्स की एक कमेटी के पास है, जिसका नेतृत्व एसबीआई कर रही है और इसे एक रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (आरपी) की निगरानी में चलाया जा रहा है। यह मामला पिछले छह वर्षों से नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) और अन्य न्यायिक मंचों, जिसमें सुप्रीम कोर्ट भी शामिल है, के सामने लंबित है।

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन गिरफ्तार

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज नेता चंपई सोरेन को रविवार को रांची में उनके आवास पर गिरफ्तार किया गया। उनके बेटे बाबूलाल सोरेन को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। यह कार्रवाई चंपई सोरेन द्वारा रिम्स-2 के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण के खिलाफ एक बड़े विरोध प्रदर्शन के ऐलान के बाद की गई, जिसमें वह हजारों समर्थकों के साथ हल चलाने वाले थे।

पुलिस प्रशासन ने कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की आशंका के चलते यह कदम उठाया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री नगड़ी में रिम्स-2 के लिए अधिग्रहित की जा रही जमीन पर किसानों के समर्थन में हल चलाकर अपना विरोध दर्ज कराने वाले थे। इस कार्यक्रम में भारी भीड़ जुटने की संभावना को देखते हुए पुलिस ने सुबह ही उनके आवास पर पहुंचकर उन्हें घर से बाहर न निकलने के निर्देश दिए।

अपनी नजरबंदी पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने इसे अलोकतांत्रिक करार दिया है। उन्होंने कहा, “जब डीएसपी साहब ने आकर मुझे आज कहीं भी आने-जाने से मना किया, तो मैं समझ गया कि सरकार ने मुझे रोकने का फैसला कर लिया है। हम प्रशासन के फैसले का उल्लंघन नहीं करेंगे, लेकिन यह सरकार का तानाशाही रवैया है। मैं आदिवासियों और उनके हक की लड़ाई का समर्थन कर रहा हूं, इसीलिए मुझे नजरबंद किया गया है।”

पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई पूरी तरह से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि खुफिया सूचनाओं के आधार पर विरोध प्रदर्शन के दौरान शांति भंग होने की आशंका थी। उन्होंने बताया कि चंपई सोरेन के बेटे बाबूलाल सोरेन और रांची की ओर जा रहे उनके कई समर्थकों को भी ऐहतियातन एक थाने में हिरासत में रखा गया है। शहर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और कई जगहों पर बैरिकेडिंग की गई है।

गौरतलब है कि चंपई सोरेन का आरोप है कि रिम्स-2 के निर्माण के लिए नगड़ी में जिस जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है, उसमें नियमों की अनदेखी की गई है। वह लंबे समय से इस अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं और किसानों के अधिकारों की आवाज उठाते रहे हैं।

उत्तराखंड के चमोली में बादल फटने से भारी तबाही, कई गाड़ियां और घर मलबे में दबे

उत्तराखंड के चमोली में बादल फटने की घटना सामने आई है। बताया जा रहा है कि चमोली के थराली विकासखंड में देर रात बादल फटा है, जिससे भारी नुकसान हुआ है।

जानकारी के अनुसार, चमोली जिले के थराली विकासखंड में शुक्रवार देर शाम से मूसलाधार बारिश हो रही है। इसी कारण देर रात अचानक बादल फट गया। इस प्राकृतिक आपदा से थराली के कोटडीप, राड़ीबगड़, अपर बाजार, कुलसारी, चेपडो, सगवाड़ा समेत कई इलाकों में व्यापक नुकसान हुआ है। स्थिति यह है कि दुकानों और मकानों में मलबा घुस गया है तथा कई वाहन मलबे में दब गए हैं।

बताया जा रहा है कि चेपडो में बादल फटने से सबसे ज्यादा तबाही देखने को मिली, जहां एक बुजुर्ग व्यक्ति के लापता होने की सूचना है। इसके अलावा, सगवाड़ा गांव में 20 वर्षीय युवती के मलबे में दबने की खबर मिली है। वहीं, नगर पंचायत थराली के कोटडीप में दुकानों और मकानों को भारी नुकसान हुआ है।

राड़ीबगड़ में उपजिलाधिकारी (एसडीएम) के आवास और नगर पंचायत अध्यक्ष के घर में भी मलबा घुस गया है, जिससे दीवारें टूट गईं और भारी क्षति हुई। कई बाइक और अन्य वाहन भी मलबे की चपेट में आ गए हैं।

चमोली के एडीएम विवेक प्रकाश ने बताया कि थराली में बादल फटने की घटना के कारण काफी नुकसान हुआ है। मलबे की चपेट में आने से कविता नाम की महिला के दबने का पता चला है, जबकि एक व्यक्ति के लापता होने की जानकारी मिली है। घटना की जानकारी मिलते ही हमारी टीमें प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है और नुकसान का आकलन किया जा रहा है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस घटना पर दुख जताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “जनपद चमोली के थराली क्षेत्र में देर रात बादल फटने की दुखद सूचना प्राप्त हुई। जिला प्रशासन, एसडीआरएफ, पुलिस मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं। इस संबंध में निरंतर स्थानीय प्रशासन के संपर्क में हूं और स्वयं स्थिति की गहन निगरानी कर रहा हूं। ईश्वर से सभी के सकुशल होने की प्रार्थना करता हूं।”

किसी भी भाषा को थोपे जाने की जबरदस्ती बर्दाश्त नहीं- उद्धव ठाकरे

शिवसेना-यूबीटी के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने हिंदी भाषा को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है। शनिवार को एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि उन्हें किसी भाषा या देश के प्रति कोई विरोध नहीं है, लेकिन किसी भाषा को जबरन थोपे जाने का विरोध है।
शिवसेना-यूबीटी के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा, “जब मैं दिल्ली गया था, वहां मुझसे पूछा गया कि आप हिंदी का विरोध क्यों करते हैं? मैंने कहा, अगर आप प्यार से बात करेंगे तो कोई दिक्कत नहीं, लेकिन जबरदस्ती नहीं चलेगी।” उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा, “एक हिंदी पत्रकार ने मुझसे सवाल पूछा और मैंने उसी की भाषा (हिंदी) में जवाब दिया। मैंने कहा, ‘तुम्हें मेरी हिंदी समझ में आ रही है ना?’ मुझे भी हिंदी आती है, और मैं उतनी हिंदी बोल लेता हूं जितनी जरूरी हो।”

उद्धव ठाकरे ने केंद्र सरकार और भाजपा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए निशाना साधा। उन्होंने कहा, “आज जो ‘महाविकास गाड़ी’ और ‘इंडिया गाड़ी’ को भ्रष्टाचार से जोड़कर दिखाया जा रहा है, उसी भ्रष्टाचार को आज ये लोग खुद बढ़ावा दे रहे हैं। जब प्रधानमंत्री महाराष्ट्र आते हैं, तो उनके आसपास जो लोग होते हैं, वो कोई ‘कुंभ मेला’ नहीं, बल्कि ‘दंभ मेला’ होता है।”

शिवसेना-यूबीटी के प्रमुख उद्धव यहीं नहीं रुके, उन्होंने आगे कहा, “आदर्श घोटाले से लेकर 70 हजार करोड़ के घोटाले तक के आरोप पहले खुद प्रधानमंत्री ने लगाए थे, तो अब वही लोग मंत्री कैसे बन गए? भ्रष्टाचारियों को आप खुद बढ़ावा दे रहे हैं।” उपमुख्यमंत्री और मंत्रियों की बात करते हुए उन्होंने कहा कि जिन लोगों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं, उन्हें ही भाजपा सरकार में पद दिया जा रहा है।

इस दौरान, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के भारत दौरे पर भी ठाकरे ने केंद्र सरकार की नीति पर सवाल उठाए और कहा, “आप शेख हसीना को भारत बुलाते हैं, जबकि बांग्लादेश का विरोध करते हैं। ये दोहरी नीति क्यों?”