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जम्मू-कश्मीर के पुंछ में घुसपैठ की कोशिश, सेना और आतंकियों के बीच भीषण मुठभेड़ जारी

जम्मू-कश्मीर के राजौरी से सटे पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा पर आज सुबह से ही भारतीय सेना और घुसपैठियों के बीच भीषण गोलीबारी जारी है। सेना ने सोमवार सुबह पुंछ के बालाकोट सेक्टर में नियंत्रण रेखा पर एक बड़ी घुसपैठ की कोशिश को नाकाम कर दिया, जिसके बाद यह मुठभेड़ शुरू हो गई।

रक्षा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सेना के सतर्क जवानों ने आज सुबह बालाकोट सेक्टर के डब्बी इलाके में बाड़ के आगे जीरो लाइन के पास कुछ संदिग्ध हलचल देखी। जब जवानों ने संदिग्ध घुसपैठियों को ललकारा तो उन्होंने गोलीबारी शुरू कर दी। भारतीय सेना ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की, जिसके बाद दोनों ओर से भीषण गोलीबारी होने लगी।

सूत्रों ने बताया कि इलाके में अभी भी सेना का ऑपरेशन जारी है। घुसपैठ की कोशिश को पूरी तरह से नाकाम करने और आतंकियों के किसी भी मंसूबे को विफल करने के लिए अतिरिक्त सैन्य बल को मौके पर भेजा गया है। पूरे इलाके की घेराबंदी कर सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।

अफगानिस्तान में भूकंप से मची भीषण तबाही, 500 से ज्यादा की मौत

अफगानिस्तान में पाकिस्तान सीमा के पास रविवार देर रात आए 6.0 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। इस आपदा में अब तक 500 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1000 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। भूकंप के झटके इतने तेज थे कि इन्हें पाकिस्तान के अलावा भारत के दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में भी महसूस किया गया।

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान के नंगरहार प्रांत के जलालाबाद के पास जमीन से मात्र 8 किलोमीटर की गहराई में था। कम गहराई होने की वजह से नुकसान कहीं ज्यादा हुआ। प्रांत के स्वास्थ्य विभाग के प्रवक्ता अजमल दरवेश ने पुष्टि की है कि अकेले नांगहार प्रांत में 509 लोगों की मौत हुई है और हजारों घर तबाह हो गए हैं। मलबे में अभी भी कई लोगों के दबे होने की आशंका है, जिससे मृतकों का आंकड़ा और बढ़ सकता है।

मुख्य भूकंप के करीब 20 मिनट बाद ही उसी इलाके में 4.5 तीव्रता का एक और झटका महसूस किया गया, जिसकी गहराई 10 किलोमीटर थी। इस दूसरे झटके ने पहले से ही डरे-सहमे लोगों में और दहशत भर दी।

बता दें कि अफगानिस्तान भूकंप के लिहाज से एक बेहद संवेदनशील क्षेत्र में आता है, जहां अक्सर भूकंप आते रहते हैं। पिछले एक महीने में ही यह इस देश में आया पांचवां भूकंप है। इससे पहले 7 अक्टूबर, 2023 को आए 6.3 तीव्रता के भूकंप ने यहां भीषण तबाही मचाई थी, जिसमें संयुक्त राष्ट्र के अनुसार लगभग 1,500 लोग मारे गए थे, जबकि तालिबान सरकार ने यह आंकड़ा 4,000 बताया था।

भारी बारिश के कारण 1988 के बाद अब पंजाब में आई सबसे भीषण बाढ़

हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में हो रही भारी बारिश के कारण आई बाढ़ से अब तक पंजाबभर में 1,018 गांव प्रभावित हुए हैं। इनमें पठानकोट के 81, फाजिल्का के 52, तरनतारन के 45, श्री मुक्तसर साहिब के 64, संगरूर के 22, फिरोजपुर के 101, कपूरथला के 107, गुरदासपुर के 323, होशियारपुर के 85 और मोगा के 35 गांव शामिल हैं। फसल और पशुधन की हानि के कारण राज्य को भारी वित्तीय नुकसान भी हुआ है। जिला मुख्यालयों से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, फाजिल्का में 16,632 हेक्टेयर (41,099 एकड़), फिरोजपुर में 10,806 हेक्टेयर, कपूरथला में 11,620 हेक्टेयर, पठानकोट में 7,000 हेक्टेयर, तरनतारन में 9,928 हेक्टेयर और होशियारपुर में 5,287 हेक्टेयर भूमि प्रभावित हुई है। पंजाब सरकार की त्वरित और सक्रिय प्रतिक्रिया से, पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य में 4,711 बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। इनमें फिरोजपुर के 812, गुरदासपुर के 2,571, मोगा के चार, तरनतारन के 60, बरनाला के 25 और फाजिल्का के 1,239 निवासी शामिल हैं।

विभिन्न जिलों से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, नौ बाढ़ प्रभावित जिलों से अब तक कुल 11,330 लोगों को बचाया गया है। इनमें फिरोजपुर से 2,819, होशियारपुर से 1,052, कपूरथला से 240, गुरदासपुर से 4,771, मोगा से 24, पठानकोट से 1,100, तरनतारन से 60, बरनाला से 25 और फाजिल्का से 1,239 लोग शामिल हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्थापित 87 राहत शिविरों में से 77 वर्तमान में पूरी तरह से कार्यरत हैं, जिनमें 4,729 लोग आश्रय प्राप्त कर रहे हैं। पंजाब में बाढ़ की चपेट में आने वाले जिलों की संख्या बढ़कर 8 हो गई है। इससे अमृतसर, गुरदासपुर, पठानकोट, तरनतारन, कपूरथला, होशियारपुर, फिरोजपुर और फाजिल्का अब तक सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। अब पटियाला और मानसा में भी पानी का असर दिखने लगा है। घग्गर नदी के ओवरफ्लो से कई गांवों के खेत जलमग्न हो गए हैं, जबकि सतलुज और रावी में जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। पंजाब में 1988 से ज्यादा बड़ी बाढ़ आई है। 1000 गांव प्रभावित हो चुके हैं। पड़ोसी पहाड़ी राज्यों (हिमाचल प्रदेश और जम्मू) में ज्यादा बारिश से सारा पानी पंजाब में इकट्‌ठा हो गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 1988 में प्रदेश में 11 लाख 20 हजार क्यूसिक पानी आया था, इस बार अभी तक 14 लाख 11 हजार क्यूसिक पानी आ चुका है। कपूरथला में चार शिविरों में 110 लोग रह रहे हैं, फिरोजपुर में आठ शिविरों में 3,450 लोग रह रहे हैं, होशियारपुर में 20 शिविरों में 478 लोग रह रहे हैं, गुरदासपुर में 12 सक्रिय शिविरों में 255 लोग रह रहे हैं, पठानकोट में 14 शिविरों में 411 लोग रह रहे हैं, बरनाला में एक शिविर में 25 लोग रह रहे हैं और फाजिल्का में 11, मोगा में पांच और अमृतसर में दो शिविर हैं।

सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि कपूरथला में 15, 27, 28 और 29 अगस्त को राहत सामग्री वितरित की गयी और आवश्यकतानुसार वितरण जारी रहेगा। इसी प्रकार, फिरोजपुर, गुरदासपुर, मोगा, पठानकोट, फाजिल्का और बरनाला में भी नियमित राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।

एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पंजाब पुलिस और सेना स्थानीय समुदायों के सक्रिय सहयोग से इन अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। एनडीआरएफ की सात टीमें गुरदासपुर में, एक-एक फाजिल्का और फिरोजपुर में और दो पठानकोट में तैनात हैं। एसडीआरएफ ने कपूरथला में दो टीमें तैनात की हैं। सेना, बीएसएफ और वायुसेना भी कपूरथला, गुरदासपुर, फिरोजपुर और पठानकोट में अभियानों में लगी हुई हैं। नागरिक प्रशासन के साथ-साथ पंजाब पुलिस भी प्रभावित लोगों को पूरा सहयोग दे रही है।

दिल्ली में भारी बारिश के बीच येलो लाइन मेट्रो ठप, स्टेशनों पर उमड़ी भीड़

राजधानी दिल्ली में शुक्रवार, 29 अगस्त की सुबह भारी बारिश के बीच दफ्तर और स्कूल-कॉलेज जाने वालों के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई। दिल्ली मेट्रो की सबसे व्यस्त लाइनों में से एक, येलो लाइन पर तकनीकी खराबी आ गई, जिसके कारण सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। पीक आवर के दौरान हुई इस गड़बड़ी से हजारों यात्री विभिन्न स्टेशनों पर फंस गए हैं, और प्लेटफॉर्मों पर भारी भीड़ जमा हो गई है।

दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर जानकारी देते हुए बताया कि केंद्रीय सचिवालय (Central Secretariat) और विश्वविद्यालय (Vishwavidyalaya) मेट्रो स्टेशनों के बीच तकनीकी खराबी आई है। इस वजह से इस खंड पर मेट्रो ट्रेनें काफी देरी से चल रही हैं। DMRC ने हालांकि नेटवर्क की अन्य लाइनों पर सेवाओं को सामान्य बताया है।

एक तरफ जहां दिल्ली-एनसीआर में सुबह से हो रही भारी बारिश के कारण सड़कों पर जलभराव और ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी हुई है, वहीं अब ‘दिल्ली की लाइफलाइन’ कही जाने वाली मेट्रो के थम जाने से लोगों की मुश्किलें दोगुनी हो गई हैं। येलो लाइन में आई खराबी का असर अब ब्लू लाइन जैसे अन्य इंटरचेंज रूटों पर भी दिखने लगा है।

ऑफिस और स्कूल के समय पर हुई इस घटना के कारण येलो लाइन के लगभग सभी स्टेशनों पर यात्रियों का हुजूम उमड़ पड़ा है। खासकर हौज खास, राजीव चौक और कश्मीरी गेट जैसे इंटरचेंज स्टेशनों पर भारी भीड़ देखी जा रही है, जहां यात्री दूसरी लाइनों पर जाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि येलो लाइन पर सेवाएं कब तक पूरी तरह से सामान्य हो पाएंगी।

हिमाचल में भूस्खलन से भारी तबाही, चंडीगढ़-मनाली हाईवे फिर से बंद

हिमाचल प्रदेश के मंडी में भूस्खलन से चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे क्षतिग्रस्त हो गया है। पंडोह डैम के पास कैंची मोड़ के निकट हाईवे का एक बड़ा हिस्सा भारी बारिश के कारण धंस गया है। रात भर हुई तेज बारिश ने हाईवे को पूरी तरह तबाह कर दिया, जिससे न तो वाहन और न ही पैदल चलने का रास्ता बचा है।

मंडी की सांसद कंगना रनौत ने दुख जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “मंडी-बनाला के पास हुआ यह भीषण हादसा बेहद दुखद है। पहाड़ धंसने से कई लोग और वाहन मलबे में दबे हो सकते हैं। मैं प्रभावित परिवारों के साथ हूं और प्रशासन से लगातार संपर्क में हूं। राहत कार्य तेजी से चल रहा है। ईश्वर सभी को सुरक्षित रखें और घायलों के जल्द ठीक होने की प्रार्थना करती हूं।” इससे पहले, हाईवे बनाला के पास भूस्खलन से बंद था, जहां भारी वाहनों को 9 मील के पास रोक दिया गया था। हाईवे को आज बनाला में पत्थर हटाकर बहाल करने की योजना थी, लेकिन कैंची मोड़ पर हुए इस नए धंसाव ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बनाला में पत्थर हटाने का काम पूरा हो गया है, लेकिन कैंची मोड़ की मरम्मत या वैकल्पिक मार्ग बनाने में वक्त लगेगा। इससे पहले, हाईवे दवाड़ा के पास तीन दिन बाद बहाल हुआ था, लेकिन इस हादसे ने परेशानियां और बढ़ा दी हैं।

वर्ष 2023 में भी इसी इलाके में ऐसी आपदा देखी गई थी, जब हाईवे का एक बड़ा हिस्सा धंसकर पंडोह डैम में समा गया था। उस वक्त हाईवे को फिर से बनाने में 8 महीने लगे थे। पुराने मार्ग को दुरुस्त करके आवागमन शुरू किया गया था। लेकिन, अब कैंची मोड़ पर ऐसा कोई विकल्प नजर नहीं आ रहा। मौजूदा हालात में मंडी से कुल्लू-मनाली के लिए कटौला मार्ग को वैकल्पिक रास्ता बनाया गया है। यहां हर एक घंटे में छोटे वाहनों को जाने की अनुमति दी जा रही है, जो फिलहाल एकमात्र सहारा है। स्थानीय प्रशासन और एनएचएआई की टीमें मौके पर राहत और मरम्मत कार्य में जुटी हैं, लेकिन भारी बारिश और भू-स्खलन के खतरे ने काम को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। यात्रियों से अपील की गई है कि वे जरूरत होने पर ही यात्रा करें और वैकल्पिक मार्ग का इस्तेमाल करें।

आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत का बड़ा बयान, ‘हर परिवार में 3 बच्चे होना जरूरी’

नई दिल्ली के विज्ञान भवन में तीन दिवसीय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के व्याख्यानमाला कार्यक्रम ‘100 वर्ष की संघ यात्रा नए क्षितिज’ का गुरुवार को अंतिम दिन रहा। इस दौरान आरएसएस के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने बताया कि नई शिक्षा नीति क्यों जरूरी है?

मोहन भागवत ने कहा, “नई शिक्षा नीति इसलिए शुरू की गई, क्योंकि अतीत में विदेशी आक्रमणकारियों ने हम पर शासन किया था। हम उनके अधीन थे और उनके शासन में उनका उद्देश्य इस देश पर प्रभुत्व स्थापित करना था, न कि इसका विकास करना। उन्होंने राष्ट्र पर नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए प्रणालियां तैयार कीं, लेकिन अब जब हम स्वतंत्र हैं, तो हमारा लक्ष्य सिर्फ शासन करना नहीं, बल्कि अपने लोगों की सेवा और देखभाल करना है।” उन्होंने कहा, “तकनीक और आधुनिकता का कोई विरोध नहीं है। जैसे-जैसे मानव ज्ञान बढ़ता है, नई तकनीकें उभरती हैं और उन्हें कोई नहीं रोक सकता। वे मनुष्यों के लाभ के लिए आती हैं और यह मनुष्यों पर निर्भर करता है कि वे उनका उपयोग कैसे करते हैं। जब भी कोई तकनीक उभरती है, उसका उपयोग मानवता के लाभ के लिए किया जाना चाहिए। अगर कोई हानिकारक परिणाम हैं, तो हमें उनसे बचना चाहिए और उन्हें रोकना चाहिए।”

भाजपा और संघ में कोई विवाद नहीं– राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा- भाजपा और संघ में कोई विवाद नहीं है। हमारे भाजपा सरकार ही नहीं सभी सरकारों के साथ अच्छे संबंध रहे हैं। सरकार में फैसले लेने के सवाल पर भागवत ने कहा कि यह कहना गलत है कि सरकार में सब कुछ संघ तय करता है। हम सलाह दे सकते हैं, लेकिन निर्णय वे ही लेते हैं। हम तय करते तो इतना समय नहीं लगता।

तीन बच्चे पैदा करना जरूरी– राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को कहा कि सभी परिवारों को तीन बच्चे पैदा करने चाहिए। उन्होंने कहा कि भविष्य में परिवार व्यवस्था बनी रहे और देश की सुरक्षा भी सुनिश्चित रहे, इसके लिए जरूरी है कि तीन बच्चे सभी परिवारों में रहें।

मोहन भागवत ने कहा, “हम अंग्रेज नहीं हैं और हमें अंग्रेज बनने की जरूरत नहीं है, लेकिन अंग्रेजी एक भाषा है और भाषा सीखने में क्या बुराई है? जब मैं आठवीं कक्षा में था, तब मेरे पिता ने मुझे ‘ओलिवर ट्विस्ट’ और ‘द प्रिजनर ऑफ जेंडा’ पढ़ने को कहा था। मैंने कई अंग्रेजी उपन्यास पढ़े हैं, फिर भी इससे हिंदुत्व के प्रति मेरे प्रेम पर जरा भी असर नहीं पड़ा। इंग्लिश नॉवेल पढ़ें और प्रेमचंद जैसे भारतीय कहानीकारों को छोड़ दें, ये ठीक नहीं है।”उन्होंने कहा कि एक श्रमिक संगठन, एक लघु उद्योग संगठन, सरकार और पार्टी, इन चारों को एकमत होना होगा, जो बहुत दुर्लभ है। संघर्ष हो सकता है, लेकिन झगड़ा नहीं होना चाहिए। लक्ष्य एक ही है, हमारे देश की भलाई, हमारे लोगों की भलाई। अगर यह समझ है, तो हमेशा समन्वय होता है, और हमारे स्वयंसेवकों में यह समझ है। हर जगह हमें अपनी परंपराओं, अपने मूल्यों और अपने मूल्य-आधारित आचरण की शिक्षा देनी चाहिए, जरूरी नहीं कि धार्मिक शिक्षा ही हो। यह सामाजिक है। हमारे धर्म अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन समाज के सदस्य के रूप में हम एक हैं। समझें कि ये सामान्य सिद्धांत हैं, माता-पिता का सम्मान करना, बड़ों के सामने विनम्रता दिखाना, अहंकार से नियंत्रित न होना आदि। ये हमारी संस्कृति के विशेष और विशिष्ट पहलू हैं।

थॉमस कॉरिएट: आगरा की तवायफ़ों और बुर्ज़ों के दरमियान एक आवारा मुसाफ़िर वो अंग्रेज जो पांच हजार किलोमीटर पैदल सफर कर आगरा पहुंचा था

बृज खंडेलवाल द्वारा 

भला हो अंग्रेजी कवि डोम मोरेस का, (इनके पिताश्री फ्रैंक मोरिस भारत में पत्रकारिता जगत के एक महान स्तंभ थे, जिनकी एडिटोरियल्स सत्ता के गलियारों में भूचाल ला देती थीं)), जिन्होंने 2003 के जाड़ों की एक शाम मुझे एक भूले हुए अंग्रेज शख़्श के बारे में बताया, जिसने आगरा को अपनाया और शायद यहीं से दुनिया से बिदा ले गया। लौंग वॉकर के नाम से मशहूर ये अजीब कैरेक्टर टूरिज्म लिटरेचर का पहला राइटर रहा होगा।

ताजमहल के पोस्टकार्ड पर छाने से बहुत पहले, एक अजीबोगरीब अंग्रेज़ आगरा की गलियों में दाख़िल हुआ था—हाथ में एक लाठी, एक नोटबुक और अजीबो-ग़रीब सनक। उसका नाम था थॉमस कॉरिएट—वही शख़्स जिसने इंग्लैंड को खाने की मेज़ पर कांटे (fork) से रूबरू कराया।

कॉरिएट की बेचैन रूह उसे ईरान से होते हुए सूरत और फिर उत्तर की तरफ़ आगरा खींच लाई—जहाँ बादशाह जहाँगीर की सल्तनत का दरबार था। सन 1616 का आगरा संग-ए-मरमर के महलों, फैले हुए बाग़ों और रौनक़ से भरे कारवां सरायों से जगमगाता था, जहाँ काबुल, समरकंद और इस्फ़हान के सौदागर आपस में टकराते रहते थे। व्यापार से उलट, कॉरिएट मुनाफ़ा नहीं, बल्कि क़िस्से तलाश रहा था। जहाँगीर ने अपनी तुज़ुक़-ए-जहाँगीरी में इस अजनबी अंग्रेज़ का ज़िक्र किया—उसकी बातों की भूख और आराम को नकारने वाली फ़ितरत देखकर हैरान भी हुए, खुश भी।

आगरा से कॉरिएट ने अपने ख़त लंदन रवाना किए, जिनमें उसने शहर की ज़िंदगी और मुग़ल तामझाम का डिटेल्ड जिक्र किया। यही कुछ शुरुआती अंग्रेज़ी दस्तावेज़ हैं जिनसे यूरोप को हिंदुस्तान की झलक मिली—उस ज़माने से बहुत पहले जब ईस्ट इंडिया कंपनी ट्रेड से राजनीति की तरफ़ बढ़ी।

लेकिन आगरा ही उसकी आख़िरी मंज़िल भी साबित हुआ। बीमारी ने उसे घेर लिया और 1617 में वहीं उसका इंतक़ाल हो गया। उसकी क़ब्र वक्त की गर्द में कहीं गुम हो गई। उसे कम ही लोग याद करते हैं, मगर उसकी सैर ने दो दुनियाएं जोड़ दीं—इंग्लैंड की दावत की मेज़ और जहाँगीर का आगरा—एक सनकी मुसाफ़िर के ज़रिए।

थॉमस के विवरणों से पता चलता है कि सन 1615 का आगरा—मुग़ल सल्तनत का धड़कता दिल—शानो-शौकत, तामीरी हुस्न और अदबी नफ़ासत का शहर था। लाल क़िले की सरख़-गुलाबी दीवारें और ख़ुशबूदार बाग़ात इस आलमी तामीर का नक़्शा थीं। इन्हीं नक़्शों के दरमियान एक फ़क़ीरी हाल में भटकता हुआ दाख़िल हुआ थॉमस कॉरिएट—सॉमरसेट के गाँव ओडकॉम्ब का एक सनकी अंग्रेज़, जो साउथैम्प्टन से पाँच हज़ार मील पैदल चलकर जहाँगीर से मिलने पहुँचा। उसे लोग “ओडकॉम्बियन लेग- स्ट्रेचर” कहते थे—यानी टाँगें फैलाकर चलने वाला मुसाफ़िर।

कॉरिएट को शायद पहला “टूरिज़्म-राइटर” भी कहा जा सकता है। उसकी चिट्ठियाँ आगरा की रौनक़, उसके महलों और ख़ासकर तवायफ़ों के जलवे बयान करती हैं—वो तवायफ़ें जिनकी अदाएँ और अदब मुग़ल दरबार को मोहती थीं। डॉम मॉरिस ने अपनी किताब The Long Strider में लिखा है कि आगरा में कॉरिएट की मौजूदगी हमें उस शहर की तस्वीर देती है जहाँ रक़्स और रियाज़, तवायफ़ों की महफ़िलें और मुग़ल तामीर दोनों एक साथ उसे हैरान और मोहित (enchanted) करते रहे।

जहाँगीर का आगरा हिन्द-इस्लामी तामीर का शाहकार था। यमुना किनारे लाल पत्थर का क़िला—उसका अमर सिंह दरवाज़ा फ़नकारी नक़्शों और चमकीली टाइलों से सजता, दीवान-ए-आम में संग-ए-मरमर के स्तंभ लाजवर्द और अग़ी़क से जड़े हुए, शीश महल की दीवारें सितारों की तरह झिलमिलातीं। राम बाग़ के चहार-बाग़ नक़्शे, कमल-आकार फ़व्वारे और गुलाबों की पगडंडियाँ फ़ारसी जन्नत की याद दिलाते। किनारी बाज़ार और जोहरी मंडी में रौनक़ थी, जहाँ हवेलियों के झरोखे और मेहराबदार दरवाज़े ढलती धूप में चमकते। कॉरिएट ने आगरा को “शानो-शौकत के महलों और ख़ूबसूरत सड़कों का शहर” कहा—जो इंग्लैंड की तामीर को मात देता था।

उसकी नज़र ख़ासकर तवायफ़ों पर ठहरती। ये सिर्फ़ रक़्स और गीत की ख़ातून न थीं, बल्कि अदब और तहज़ीब की अलमबरदार थीं। बचपन से कथक, हिंदुस्तानी संगीत, उर्दू शायरी और आचार-संहिता में माहिर, उनकी कोठों से ग़ज़लों की सरगोशियाँ और पायल की छनक गूंजती। आम रंडियों से अलग, तवायफ़ें उमरा और दरबारी तबक़े की दिलनशीं थीं। कॉरिएट उनके हुनर से हैरान तो हुआ मगर अपनी ईसाई नज़रों से झिझका भी। एक ख़त में उसने लिखा—“मैंने ख़ूबसूरत ख़वातीन को ऐसा रक़्स करते देखा कि उनके पाँव ज़मीन को चूमते से लगते थे, और उनके नग़मे दिल में ऐसे ख़याल जगाते जिन्हें बयान करने की हिम्मत न थी।”

मगर आगरा की यही रंगीनियाँ कॉरिएट का फक्कड़पन के साथ मिलकर उसकी दास्तान बना गईं। फटेहाल कपड़ों में वह हाथी-गाड़ियों और बैलगाड़ियों के दरमियान घूमता, अंग्रेज़ सौदागरों से उधार माँगता और दावा करता—“मैं अजनबियों की रहमदिली पर ज़िंदा हूँ, लेकिन उन जगहों पर चलता हूँ जहाँ बादशाह बसते हैं।” उसने दीवान-ए-आम में फ़ारसी में जहाँगीर के सामने ख़िताब भी किया—उम्मीद में कि कुछ इनाम मिलेगा, मगर जहाँगीर की मुस्कराहट ही नसीब हुई।

1617 में बीमारी ने उसका काम तमाम कर दिया। उसकी क़ब्र का कोई निशान अब बाक़ी नहीं। मगर ओडकॉम्ब के चर्च में एक पट्टिका अब भी याद दिलाती है—”ग्रेट वॉकर” जिसने आगरा की तवायफ़ों और बुर्ज़ों की दास्तानें यूरोप तक पहुँचाईं।

वैष्णो देवी लैंडस्लाइड में 32 लोगों की मौत, बढ़ सकता है आंकड़ा

माता वैष्णो देवी यात्रा मार्ग के अर्धकुंवारी क्षेत्र मंगलवार को हुए भूस्खलन में मरने वालों का आंकड़ा 32 तक पहुंच गया है। जानकारी के मुताबिक कई स्थानों पर यात्री अभी भी फंसे हुए हैं और बचाव कर्मी बचाव कार्य में लगे हुए हैं। श्री माता देवा श्राइन बोर्ड की ओर से कहा गया है कि हाल ही में हुई लगातार बारिश और खराब मौसम को देखते हुए, सभी यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे मौसम में सुधार होने पर अपनी यात्रा की योजना फिर से बनाए।

रियासी के एसएसपी परमवीर सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के कटड़ा में वैष्णो देवी मंदिर के पास भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन में 32 लोगों की मौत हो गई है। इसके अतिरिक्त, जम्मू के चनैनी नाला में एक कार गिरने से 3 श्रद्धालु बह गए। लापता तीन में से दो श्रद्धालु राजस्थान के धौलपुर और एक आगरा का रहने वाला है। रविवार से जारी वर्षा के कारण जम्मू की सड़कें व पुल झेल नहीं पाए और शहर में बाढ़ जैसे हालात बन गए।

इसके साथ ही जम्मू का देश से सड़क व रेल संपर्क पूरी तरह कट गया। मंगलवार रात भारी बारिश की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने रात नौ बजे के बाद अकारण घरों से बाहर निकलने पर भी रोक लगा दी थी। तवी, चिनाब, उज्ज सहित सभी नदियां खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं।

जम्मू में तवी नदी पर बना भगवतीनगर पुल की एक लेन धंस गई, जबकि इस नदी पर बने दो अन्य पुलों पर एहतियातन आवाजाही बंद कर दी गई है। कठुआ के पास पुल धंसने से जम्मू-पठानकोट राष्ट्रीय पर यातायात पहले से प्रभावित था।

अब इस राजमार्ग पर विजयपुर में एम्स के निकट स्थित देविका पुल भी क्षतिग्रस्त हुआ है। इसके बाद सड़क यातायात पूरी तरह बंद कर दिया गया। सांबा में सेना के जवानों ने खानाबदोश गुज्जर समुदाय के सात लोगों को नदी से सुरक्षित बाहर निकाला है। जम्मू संभाग के सभी स्कूलों और कालेजों में 27 अगस्त को अवकाश घोषित किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट का केंद्र सरकार को निर्देश, सोशल मीडिया कंटेंट नियंत्रण के लिए NBSA से परामर्श करें

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली सामग्री को नियंत्रित करने के लिए प्रस्तावित दिशानिर्देश तैयार कर रिकॉर्ड में पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि ये दिशानिर्देश समाचार प्रसारण मानक प्राधिकरण (NBSA) और डिजिटल एसोसिएशन के परामर्श से बनाए जाएं। इस मामले की अगली सुनवाई नवंबर में होगी।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का व्यवसायीकरण
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रभावशाली लोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का व्यवसायीकरण करते हैं और उनकी टिप्पणियों से समाज के विभिन्न वर्गों—दिव्यांग, महिलाएं, बच्चे, वरिष्ठ नागरिक और अल्पसंख्यक—की भावनाएं आहत होने की आशंका रहती है।

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने केंद्र सरकार से कहा कि पॉडकास्ट जैसे ऑनलाइन कार्यक्रमों सहित सोशल मीडिया पर आचरण को विनियमित करने के लिए ठोस दिशा-निर्देश तैयार किए जाएं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन दिशा-निर्देशों से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अधिकार के बीच संतुलन कायम होना चाहिए।

यह टिप्पणी कोर्ट ने उस समय की, जब वह हास्य कलाकार समय रैना और अन्य के खिलाफ दिव्यांग व्यक्तियों पर असंवेदनशील चुटकुले बनाने के मामले की सुनवाई कर रही थी। जस्टिस बागची ने कहा कि हास्य जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन हल्केपन के नाम पर संवेदनशीलता को ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए। वहीं, जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि असंवेदनशील चुटकुले बनाकर दिव्यांगों को मुख्यधारा में लाने का संवैधानिक उद्देश्य ध्वस्त किया जा रहा है।

पीठ ने कहा कि जब तक उल्लंघन पर निश्चित और ठोस परिणाम तय नहीं किए जाते, लोग जिम्मेदारी से बचते रहेंगे। परिणाम औपचारिकता भर न होकर नुकसान के अनुपात में होने चाहिए। कोर्ट ने साफ किया कि उसका उद्देश्य अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाना नहीं, बल्कि आहत करने वाले भाषण और स्वतंत्र अभिव्यक्ति के बीच एक स्पष्ट रेखा खींचना है।

अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने केंद्र की ओर से पेश होकर कहा कि प्रस्तावित दिशानिर्देशों का मुख्य उद्देश्य सोशल मीडिया यूजर्स को संवेदनशील बनाना होगा। हालांकि, यदि कोई उल्लंघन करता है तो उसे अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी होगी।

जम्मू-कश्मीर के डोडा और किश्तवाड़ में बादल फटा, 4 लोगों की मौत

जम्मू-कश्मीर के जम्मू संभाग में भारी बारिश और बादल फटने की घटनाओं ने भारी तबाही मचाई है। डोडा और किश्तवाड़ जिलों में बादल फटने से चार लोगों की मौत हो गई है, जबकि उधमपुर में 8 लोग बाढ़ के पानी में फंस गए हैं। लगातार हो रही बारिश के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग 244 (NH 244) का एक बड़ा हिस्सा बह गया है, जिससे कई इलाकों का संपर्क टूट गया है और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।

डोडा जिले में बादल फटने के बाद आए मलबे और तेज बहाव की चपेट में आने से चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। वहीं, किश्तवाड़ के डिप्टी कमिश्नर हरविंदर सिंह ने बताया कि जिले में पिछले तीन दिनों से लगातार बारिश हो रही है। चिनाब नदी के किनारे बसे इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। उन्होंने बताया कि बारिश के कारण एनएच 244 पूरी तरह से बह गया है और एक निजी स्वास्थ्य केंद्र को भी नुकसान पहुंचा है। भलेसा के चरवा इलाके में भी बाढ़ की सूचना है, हालांकि वहां किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

उधमपुर जिले के बसंतगढ़ के ललोन गला इलाके में भी बादल फटने की सूचना है। इसके कारण बग्गन नाले में अचानक बाढ़ आ गई, जिसमें मवेशी चराने गए 8 लोग बीच में ही फंस गए। एसएचओ बसंतगढ़, राबिन चलोत्रा ने पुष्टि करते हुए बताया कि सभी 8 लोग नाले के बीच एक सुरक्षित ऊंचे स्थान पर फंसे हुए हैं और बचाव के लिए लोदरा पुलिस चौकी से एक टीम को मौके पर रवाना कर दिया गया है।

वहीं, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा है कि उनका कार्यालय लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और प्रशासन से अपडेट ले रहा है।