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चीन की ‘विक्ट्री डे’ परेड में सबसे बड़ी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन

BEIJING, CHINA - SEPTEMBER 3: Chinese soldiers march during a military parade marking the 80th anniversary of victory over Japan and the end of World War II, in Tiananmen Square on September 3, 2025, in Beijing, China. China's Victory Day military parade serves as a powerful display of national pride and military power. This year's parade carries heightened geopolitical weight with the attendance of 26 world leaders, including Russian President Vladimir Putin, North Korean leader Kim Jong Un, and Iranian President Masoud Pezeshkian, underlining China's diplomatic alliances as it presents itself as an alternative global leader. (Photo by Kevin Frayer/Getty Images)

द्वितीय विश्व युद्ध में चीन ने जीत की 80वीं वर्षगांठ पर ‘विक्ट्री डे परेड’ के बहाने अपना सबसे बड़ा सैन्य शक्ति प्रदर्शन किया है। चीन ने हाइपरसोनिक मिसाइलों, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों और मानवरहित लड़ाकू प्लेटफार्मों समेत अपनी सबसे उन्नत सैन्य तकनीक को सार्वजनिक तौर पर दिखाते हुए सैन्य परेड निकाली। इसमें 10 हजार से अधिक सैन्यकर्मी, 100 से अधिक विमान के साथ ही सैकड़ों टैंक और बख्तरबंद वाहन थे।

चीन ने अपनी सबसे खतरनाक इंटर-बैलिस्टिक परमाणु मिसाइल का पहली बार बुधवार को आर्मी परेड में प्रदर्शन किया। डीएफ-5सी नई प्रकार की तरल-ईंधन वाली अंतरमहाद्वीपीय रणनीतिक परमाणु मिसाइल है। ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार इस मिसाइल की अनुमानित रेंज 20,000 किलोमीटर से अधिक है। यह रक्षा भेदन और सटीकता में बेहद परफेक्ट मानी जाती है। यह दुनिया के किसी भी हिस्से में पहुंच सकती है।

चीन के तियानमेन में आयोजित इस कार्यक्रम में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन ने हिस्सा लिया। इसके अलावा, ईरान, मलेशिया, पाकिस्तान, नेपाल, मालदीव, म्यांमार, इंडोनेशिया, मंगोलिया, जिम्बाब्वे और मध्य एशियाई देशों के राष्ट्राध्यक्ष भी मौजूद रहे। राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी में परेड हुई। वैश्विक तनाव के बीच ‘विक्ट्री डे परेड’ के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शांति और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का संदेश दिया। अपने मुख्य भाषण में शी जिनपिंग ने कहा कि यह विजय आधुनिक काल में विदेशी आक्रमण के खिलाफ चीन की पहली पूर्ण जीत थी। जिनपिंग ने कहा, “मानव सभ्यता के उद्धार और विश्व शांति की रक्षा में चीनी लोगों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है।” उन्होंने राष्ट्रों से ‘युद्ध के मूल कारणों को समाप्त करने’ और ऐतिहासिक त्रासदियों की पुनरावृत्ति को रोकने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) को चीन के कायाकल्प और आधुनिकीकरण के लिए रणनीतिक समर्थन देना चाहिए, ताकि देश 2035 तक एक पूरी तरह आधुनिक समाजवादी राष्ट्र बन सके।

यह 2015 के बाद सिर्फ दूसरी बार था, जब चीन ने इस पैमाने पर ‘विक्ट्री डे’ पर परेड आयोजित की। परेड स्थल पर ग्रेट वॉल जैसी विशाल संरचनाएं लगाई गई थीं, जो युद्धकाल के दौरान चीनी धैर्य और संघर्ष का प्रतीक थीं। हेलीकॉप्टरों से ‘न्याय की जीत’, ‘शांति की जीत’ और ‘जनता की जीत’ लिखे बैनर लहराए गए, जबकि सैनिकों ने सटीक मार्च पास्ट किया। दर्शकों और युद्ध के दिग्गजों ने युद्धकाल की ऐतिहासिक सैन्य इकाइयों को समर्पित 80 स्मृति ध्वजों को भी देखा। चीन का प्रतिरोध 1931 में शुरू हुआ था, जो मित्र राष्ट्रों में सबसे प्रारंभिक और लंबे समय तक चलने वाला था। चीन ने जापान की आधे से अधिक विदेशी सेना को घेर लिया और 3.5 करोड़ हताहत हुए, जो द्वितीय विश्व युद्ध में हुए कुल वैश्विक नुकसान का लगभग एक तिहाई था। कार्यक्रम में उन देशों के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया था, जिन्होंने युद्ध के दौरान चीन का समर्थन किया था, जिनमें अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और कनाडा शामिल हैं। इस परेड में पहली बार संयुक्त राष्ट्र के तहत सेवा देने वाले चीनी शांति सैनिकों को भी शामिल किया गया, जो चीन की वैश्विक रक्षा भूमिका में बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है। कांगो में सेवा दे चुके एक सैनिक ने कहा, “हम पूर्वजों के खून से हासिल की गई शांति की रक्षा करने की क्षमता रखते हैं।”

कांग्रेस के पवन खेड़ा की पत्नी कोटा नीलिमा पर दो वोटर आईडी रखने का आरोप

कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा के बाद उनकी पत्नी कोटा नीलिमा दो वोटर आईडी को लेकर विवादों में आ गई हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने दावा किया है कि तेलंगाना के खैरताबाद से चुनाव लड़ने वाली नीलिमा के पास दो सक्रिय मतदाता पहचान पत्र हैं। मालवीय ने चुनाव आयोग से इसकी जांच करने की मांग की है।

भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर मतदाता सूची शेयर करते हुए आरोप लगाया कि कोटा नीलिमा का नाम खैरताबाद और नई दिल्ली, दोनों जगहों की वोटर लिस्ट में दर्ज है। उनके मुताबिक, नीलिमा ने 2023 में दाखिल शपथपत्र में अपने खैरताबाद स्थित ऐपिक नंबर टीजीजेड2666014 का उल्लेख किया था, जो 2025 तक भी सक्रिय है। यह ऐपिक ‘गफ्फर खान कॉलोनी रोड नं. 10’ पते पर पंजीकृत था, जो अब ‘गौरी शंकर नगर वेलफेयर एसोसिएशन’ पते पर दर्ज है।

इसके साथ ही मालवीय ने यह भी दावा किया कि कोटा नीलिमा के पास एक और एपिक नंबर (एसजेई0755975) है, जिसमें नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के काका नगर इलाके का पता दर्ज है। इस एपिक में नाम ‘के. नीलिमा’ लिखा है और पति के नाम में पवन खेड़ा का उल्लेख है।

अमित मालवीय ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी के कई नेता ‘वोट चोरी’ में लिप्त हैं और खुद को ईमानदार दिखाते हुए आम नागरिकों पर सवाल खड़ा कर रहे हैं।

उन्होंने राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वे प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिना पर्याप्त जांच के आम वोटरों की पहचान उजागर कर उन्हें खतरे में डालते हैं, जबकि अपनी पार्टी के नेताओं की कथित गड़बड़ियों पर चुप्पी साधे रहते हैं।

कांग्रेस पर हमला बोलते हुए भाजपा नेता ने कहा, “राहुल गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और बिना किसी उचित जांच-पड़ताल के ईमानदार मतदाताओं को निशाना बनाया और उन्हें बदनाम किया, यहां तक कि बिना सहमति के उनकी पहचान उजागर करके उन्हें खतरे में डाल दिया। उन्होंने युवा, तरक्की की राह पर अग्रसर पेशेवरों और बेहतर अवसरों की तलाश में शहर बदलने वाले गरीब दिहाड़ी मजदूरों की पहचान उजागर की। फिर भी उन्होंने इस चौंकाने वाले खुलासे पर चुप्पी साधे रखी है कि उनके करीबी सहयोगी के पास दो एपिक नंबर हैं।”

पवन खेड़ा और उनकी पत्नी कोटा नीलिमा का उदाहरण देते हुए अमित मालवीय ने कहा कि यह बिल्कुल स्पष्ट है कि कांग्रेस नेताओं के पास कई एपिक नंबर हैं और वे एक से ज्यादा जगहों पर पंजीकृत मतदाता हैं। यह कोई संयोग नहीं है। ‘वोट चोरी’ में लिप्त लोग ही आम नागरिकों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करने और हमारी संस्थाओं को कमजोर करने के लिए बदनाम कर रहे हैं।

भाजपा नेता ने अपनी पोस्ट में लिखा, “यह मामला सिर्फ पवन खेड़ा और उनके परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व तक फैला हुआ है।” सोनिया गांधी का नाम लेते हुए उन्होंने दावा किया कि 1980 में उन्होंने इटली की नागरिक होने के बावजूद भारत की वोटर लिस्ट में अपना नाम जुड़वाया था।

मालवीय ने आरोप लगाए, “कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन अवैध प्रवासियों और गैर-भारतीयों का बचाव करने के लिए हमारे अपने लोगों पर ही आरोप लगा रहे हैं।”

मालवीय ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर सीधा हमला करते हुए कहा कि वे अपने ही दल के भीतर, खासकर सार्वजनिक पद के इच्छुक लोगों और अपने करीबी लोगों के साथ, इन आपराधिक कृत्यों से खुद को मुक्त नहीं कर सकते। उन्हें बोलना चाहिए।

छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में ईडी की बड़ी कार्रवाई

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को छत्तीसगढ़ में जिला खनिज निधि (डीएमएफ) ट्रस्ट के फंड में कथित हेराफेरी के मामले में 18 स्थानों पर छापा मारा है। यह कार्रवाई राज्य के विभिन्न वेंडरों, ठेकेदारों और बिचौलियों के परिसरों पर की जा रही है।  आरोप है कि जिला खनिज निधि फंड की बड़ी राशि का छत्तीसगढ़ बीज निगम के माध्यम से हेराफेरी और दुरुपयोग किया गया। जानकारी के अनुसार, जिला खनिज निधि (डीएमएफ) एक गैर-लाभकारी ट्रस्ट है, जो छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में खनन प्रभावित क्षेत्रों और लोगों के हितों में काम करता है।

इसके अलावा, ईडी ने दुर्ग जिले के भिलाई-3 में भी कार्रवाई की। बताया जा रहा है कि ईडी ने अन्ना भूमि ग्रीनटेक प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक शिवकुमार मोदी के घर छापा मारा है। इस कार्रवाई में छह से अधिक ईडी अधिकारी शामिल हैं और सीआरपीएफ ने सुरक्षा का मोर्चा संभाला है।

अन्ना भूमि ग्रीनटेक प्राइवेट लिमिटेड कृषि और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में काम करती है, जिसमें ड्रिप सिंचाई प्रणाली, कांटेदार तार, चेन लिंक, आरसीसी बाड़ के खंभे, सौर जल पंप और कृषि उपकरण शामिल हैं। ईडी की यह कार्रवाई वित्तीय अनियमितताओं की जांच के सिलसिले में की जा रही है।

साथ ही, ईडी ने मध्य प्रदेश के मंदसौर में पूर्व जिला आबकारी अधिकारी बीएल. डांगी के यश नगर स्थित निजी आवास पर छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान सुरक्षा-व्यवस्था को कड़ी किया गया है। बता दें कि डांगी के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं की जांच चल रही है और ईडी की यह कार्रवाई उसी सिलसिले में मानी जा रही है। ईडी की यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ और मंदसौर में वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ चल रही व्यापक जांच का हिस्सा है। जांच के परिणामस्वरूप और खुलासे होने की उम्मीद है।

जीएसटी सुधार में छोटे व्यवसायों को फायदा देने की तैयारी में सरकार-वित्त मंत्री

The Union Minister for Finance and Corporate Affairs, Smt. Nirmala Sitharaman virtually addressing at the launch of the UN Principles for Responsible Digital Payments at Global Fintech Fest 2021, in New Delhi on September 28, 2021.

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार एक खुली और पारदर्शी अर्थव्यवस्था का निर्माण करेंगे, अनुपालन बोझ को कम करेंगे और छोटे व्यवसायों को फायदा पहुंचाएंगे।

तमिलनाडु में सिटी यूनियन बैंक के 120वें स्थापना दिवस समारोह में बोलते हुए, वित्त मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगली पीढ़ी के सुधारों के लिए एक टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य नियमों को सरल बनाना, अनुपालन लागत कम करना और स्टार्टअप्स तथा एमएसएमई के लिए एक अधिक सक्षम इकोसिस्टम का निर्माण करना है। वस्तु एंव सेवा कर की दरों को कम करने के लिए जीएसटी परिषद की बैठक 3-4 सितंबर को होनी है।

वित्त मंत्री ने सभी बैंकों से अपील की कि वे विकास को गति प्रदान करें और विश्वास का निर्माण करें। साथ ही कहा कि बैंकों को अपने ढांचे में अच्छा प्रशासन सुनिश्चित करना चाहिए और प्रत्येक रुपए को राष्ट्र निर्माण में लगाना चाहिए। वित्त मंत्री सीतारमण ने आगे कहा कि अप्रैल-जून में हमारी वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही है और हमारी सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग 18 वर्षों में पहली बार अपग्रेड हुई है। पिछले 8 वर्षों में मुद्रास्फीति की दर में 1.15 प्रतिशत की गिरावट आई है। इस साल राजकोषीय घाटा 4.42 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। उन्होंने आगे कहा कि पीएम जन धन जैसी योजनाओं ने बड़े स्तर पर बदलाव लाया है और इसमें 56 करोड़ से ज्यादा बैंक खाते खोले गए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से दिए भाषण में जीएसटी व्यवस्था में व्यापक बदलावों का संकेत देते हुए कहा था, “इस दिवाली, मैं आपके लिए दोहरी दिवाली मनाने जा रहा हूं। देशवासियों को एक बड़ा तोहफा मिलने वाला है, आम घरेलू वस्तुओं पर जीएसटी में भारी कटौती होगी।” प्रधानमंत्री मोदी ने जीएसटी दरों की समीक्षा की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया और इसे “समय की मांग” बताया। उन्होंने घोषणा की, “जीएसटी दरों में भारी कमी की जाएगी। आम लोगों के लिए कर कम किया जाएगा।”

ग्रामीण राजमिस्त्री प्रशिक्षण को मिला नया लक्ष्य, 2025-26 में 3 लाख से अधिक कारीगरों को सिखाई जाएगी हुनर की बारीकियाँ

अंजलि भाटिया
नई दिल्ली,2 सितम्बर
प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण (PMAY-G) के तहत घरों के निर्माण को गति देने और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने ग्रामीण राजमिस्त्री प्रशिक्षण (Rural Mason Training–RMT) कार्यक्रम के लक्ष्य तय कर दिए हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए राज्यों से मिली मांग और सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के बाद अब कुल 3 लाख से अधिक ग्रामीण राजमिस्त्रियों को प्रशिक्षण देने का फैसला लिया गया है।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में कुशल राजमिस्त्रियों की उपलब्धता बढ़ाना है, ताकि प्रत्येक आवास का निर्माण समयबद्ध और तकनीकी मानकों के अनुरूप हो सके। सरकार का मानना है कि इस पहल से न केवल योजना के लाभार्थियों को मजबूत और टिकाऊ आवास मिलेंगे, बल्कि ग्रामीण युवाओं को रोजगार और आजीविका के अवसर भी प्राप्त होंगे। हर राज्य को कहा गया की जमीनी स्तर पर रोड मैप तैयार किये जाए। राज्यों के लिए आवंटित लक्ष्य अरुणाचल प्रदेश 2,000, असम 20,000, बिहार 25,000, छत्तीसगढ़ 50,000,गुजरात 15,000,हरियाणा 1,000 ,हिमाचल प्रदेश 5,000,जम्मू-कश्मीर 5,000 ,झारखंड 20,000,केरल 5,000,मध्य प्रदेश – 35,000 ,महाराष्ट्र 50,000,मणिपुर 1,000,मेघालय 5,000, मिजोरम 2,000 ,नागालैंड 1,000 ,ओडिशा 30,000 ,पंजाब 1,000 ,राजस्थान 15,000,तमिलनाडु 15,000 ,त्रिपुरा 5,000 और उत्तराखंड में 1,000 ग्रामीण राजमिस्त्रियों को प्रशिक्षण दिया जयेगा।
अधिकारी का कहना है कि प्रशिक्षण प्राप्त राजमिस्त्री तकनीकी रूप से सक्षम होंगे और पर्यावरण के अनुकूल तथा आपदा-रोधी आवासों के निर्माण में अहम योगदान देंगे। इससे न केवल आवास योजना की रफ्तार तेज होगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में कौशल विकास और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में सभी पात्र परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराए जाएं और देश में “सबके लिए आवास” का सपना साकार हो

नागपुर से कोलकाता जा रही इंडिगो फ्लाइट की आपातकालीन लैंडिंग

नागपुर से कोलकाता जा रही इंडिगो एयरलाइन की एक यात्री उड़ान की सोमवार को आपातकालीन लैंडिंग कराई गई। फ्लाइट संख्या 6E812 एक पक्षी से टकरा गई थी, जिसके बाद पायलट ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नागपुर एयरपोर्ट पर फ्लाइट को सुरक्षित उतार दिया। विमान में सवार सभी 272 यात्री पूरी तरह सुरक्षित हैं।

जानकारी के अनुसार, उड़ान भरने के थोड़ी देर बाद विमान का अगला हिस्सा हवा में एक पक्षी से टकरा गया, जिससे उसमें हल्का नुकसान हुआ। पक्षी से टकराने के तुरंत बाद विमान कुछ देर के लिए अस्थिर हो गया, जिससे यात्रियों में घबराहट फैल गई। हालांकि, पायलट और क्रू की सूझबूझ से कोई बड़ी दुर्घटना नहीं हुई और सभी यात्रियों को सुरक्षित उतार लिया गया।

नागपुर एयरपोर्ट के सीनियर डायरेक्टर आबिद रूही ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि फ्लाइट 6E812 के पक्षी से टकराने की आशंका है। इस घटना की जांच की जा रही है।बता दें कि इससे पहले 2 जून को रांची जा रही इंडिगो की एक फ्लाइट को भी पक्षी से टकराने के कारण आपातकालीन लैंडिंग करानी पड़ी थी। उस विमान में 175 यात्री सवार थे और वे सभी सुरक्षित रहे थे।

एविएशन इंडस्ट्री के विशेषज्ञों के अनुसार, टेक-ऑफ और लैंडिंग के समय बर्ड हिट की घटनाएं आम हैं और यह विमान के इंजन या अन्य हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। कई बार यह विमान की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

आयातित दवाओं पर अमेरिका में 200% तक टैरिफ की तैयारी

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आयातित दवाओं पर 200% या उससे भी अधिक का भारी-भरकम टैरिफ लगाने की एक महत्वाकांक्षी योजना का खुलासा किया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य दवा निर्माण की आउटसोर्सिंग को समाप्त कर उत्पादन को वापस अमेरिका में लाना है। हालांकि, दवा कंपनियों को इस बड़े बदलाव के लिए तैयार होने का समय देने के उद्देश्य से इन टैरिफों को लागू करने में लगभग एक से डेढ़ साल की देरी की जा सकती है।

एक प्रमुख वित्तीय समाचार पत्र की रिपोर्ट के अनुसार, इस नीतिगत बदलाव का सबसे ज्यादा असर भारत पर पड़ सकता है, जो दुनिया में जेनेरिक दवाओं का एक प्रमुख निर्यातक है। यदि अमेरिका में यह टैरिफ लागू होता है, तो भारतीय दवा निर्माताओं को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है और उनके निर्यात कारोबार पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। भारत अमेरिकी बाजार में सस्ती दवाओं का एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता है, और इस कदम से दोनों देशों के बीच दवा व्यापार की गतिशीलता बदल सकती है।

हालांकि, कुछ रिपोर्टों से यह भी संकेत मिलता है कि ट्रंप प्रशासन का तत्काल ध्यान चीन से आयातित दवाओं और उनके कच्चे माल (एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स – एपीआई) पर अधिक केंद्रित है। इसके बावजूद, भारतीय दवा उद्योग में चिंता का माहौल है क्योंकि अमेरिका उनके लिए सबसे बड़े बाजारों में से एक है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए भी दवाओं की कीमतें बढ़ सकती हैं।

भारतीय दवा उद्योग और सरकार इस पूरे घटनाक्रम पर करीब से नजर बनाए हुए हैं और इसके संभावित प्रभावों का आकलन कर रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह नीति किस रूप में लागू होती है और इसका भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ता है।

भारतीयों के साथ रूस में धोखा

रूस ने यूक्रेन के खिलाफ भारतीयों को जबरन युद्ध में झोंका!

इंट्रो- जब किसी देश में कोई आपदा आती है या दो देशों में युद्ध होता है, तो वहां हजारों-लाखों की संख्या में विदेशी नागरिक फंस जाते हैं। यूक्रेन-रूस युद्ध में ऐसे लाखों मामले सामने आए। लेकिन इन फंसे हुए विदेशियों, खासतौर पर भारतीयों को युद्ध में धकेलने का काम रूस ने बड़े पैमाने पर किया। वीजा और सुरक्षित नौकरियों के लालच में रुस पहुंचे ये भारतीय युवा खुद को रूस की ओर से यूक्रेन के खिलाफ अग्रिम मोर्चों पर लड़ने के लिए भेजे गये, और शायद अब भी भेजे जा रहे हैं। तहलका रिपोर्टर के संपर्क में आने वालों के अनुसार, भारतीय युवाओं को जबरन झूठे वादों में फंसाकर रूस की ओर से यूक्रेन से लड़ने के लिए युद्ध में धकेला गया। इस बार इसी को लेकर तहलका ने अपनी गहन पड़ताल वाली यह स्टोरी की है। तहलका एसआईटी की खास रिपोर्ट :-

‘एक विदेशी नागरिक, जो कि रूसी नहीं था, यूक्रेन-रूस युद्ध से भागने की कोशिश कर रहा था। पहले रूसी सेना के अधिकारियों ने उसके हाथ में गोली मारी, फिर पैर में गोली मार दी। जब वह दर्द से चिल्लाने लगा, तो उन्होंने उसके सिर में गोली मारकर उसकी हत्या कर दी। यह घटना मेरे अपार्टमेंट में घटी थी, जहां मैं रहता था और  मैं इस हत्या का प्रत्यक्षदर्शी था। चूंकि युद्ध क्षेत्र में बिजली नहीं थी, इसलिए मुझे रोशनी के लिए टॉर्च पकड़ने को कहा गया था। इस घटना के बाद मैं इतना भयभीत हो गया था कि कई रातों तक सो नहीं सका और मैंने कभी भी रूसी सेना के अधिकारियों के साथ बहस नहीं की जब वे नशे में थे।’ -उत्तर प्रदेश के एक शहर के सिराज (बदला हुआ नाम) ने कहा, जो यूक्रेन के साथ युद्ध में रूसी सेना के लिए लड़ने के लिए धोखा दिए जाने के बाद भारत लौट आया था।


‘भारत के गुरुग्राम से प्रिंस नामक एक प्रशिक्षक, जो रूसी सेना को प्रशिक्षण दे रहे थे: रूस में हमसे मिले। उन्होंने चेतावनी दी कि वहां आकर हमने वास्तव में अपनी मृत्यु के वारंट पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि कोई अपनी इच्छा से रूस आ सकता है, लेकिन देश छोड़ना उसके हाथ में नहीं है। यह सुनकर मैं घबरा गया और रूस स्थित भारतीय दूतावास को फोन करना शुरू कर दिया।’ -सिराज ने तहलका के रिपोर्टर से कहा।
‘पूरे एक महीने तक हमारा एकमात्र भोजन चावल का सूप था, जो दिन में एक बार दिया जाता था; और कुछ नहीं। पीने के पानी पर भी राशनिंग की गई। हमें रूस-नियंत्रित यूक्रेनी शहर में रखा गया था, जो निर्जन था। इसलिए हमें जो भी परित्यक्त घर मिला, हम वहीं रहे।’ -सिराज ने आगे कहा।
‘मुझे एजेंटों ने धोखा दिया। उन्होंने मुझे बताया कि मैं रूस में डिलीवरी ब्वॉय के रूप में काम करूंगा। उन्होंने कभी भी यूक्रेन-रूस युद्ध क्षेत्र में लड़ाई का उल्लेख नहीं किया। उन्होंने मुझे दो लाख रूबल प्रति माह वेतन देने का वादा किया था। उन्होंने मुझे दिल्ली के भीकाजी कामा प्लेस में कार्यालय वाले एक अन्य एजेंट सुमित दहिया से संपर्क करने को कहा। सुमित एक रूसी महिला के साथ मुझे और 16-17 अन्य लोगों को भारत से रूस ले गया। जब मैं भारत लौटने की तैयारी कर रहा था, तो मैंने रूस के एक रेस्तरां में जितेंद्र सहरावत को देखा और मुझे धोखा देने के लिए उससे पूछताछ की।’ -सिराज ने जोड़ा।


‘मेरे पास ‘तहलका’ के साथ साझा करने के लिए कई विशेष बातें हैं, जो भारत में कोई नहीं जानता। भारतीय मीडिया केवल उन एजेंटों पर ध्यान केंद्रित करने में रुचि रखता है, जिन्होंने हमें धोखा दिया। वे यूक्रेन-रूस युद्ध क्षेत्र में हमारे द्वारा झेली गई अमानवीय परिस्थितियों के प्रति कोई चिन्ता नहीं दिखाते। पानी की कमी के कारण मैं सप्ताह में केवल एक बार ही नहा पाता था। वहां शायद ही कोई भोजन था। हमें केवल दिन के समय ही शौच जाने की अनुमति थी और तब भी सख्त सावधानियों के साथ। शाम 6 बजे के बाद ड्रोन हमलों के डर से हमें अनुमति नहीं दी गई।’ -दिल्ली के एक अन्य भारतीय जतिन आहूजा ने कहा, जिन्हें एजेंटों द्वारा धोखा दिया गया था और अक्टूबर, 2024 में भारत लौटने से पहले यूक्रेन के युद्धक्षेत्र में लड़ने के लिए रूस भेज दिया गया था।
‘मैंने रूसी पक्ष की ओर से लड़ते हुए 10-12 यूक्रेनी सैनिकों को मार डाला। चाहे यह दुर्घटनावश हुआ हो या अन्यथा, मुझे नहीं पता। युद्ध क्षेत्र में रहने के दौरान एक ड्रोन हमले में मुझ पर हमला हुआ, जिसके छर्रे के दो टुकड़े मेरे बाएं और दाएं पैर में घुस गए। एक को रूस में हटा दिया गया था और दूसरे को दो महीने बाद जब मैं भारत लौटा तो हटा दिया गया। रूसी कानून के अनुसार, ड्रोन हमले में पैर में चोट लगने पर 30 लाख रूबल की बीमा राशि मिलती है; लेकिन आज तक मुझे कुछ नहीं मिला।’  -जतिन ने तहलका रिपोर्टर को बताया।
‘एजेंटों ने यूक्रेन के खिलाफ रूसी पक्ष की ओर से लड़ रहे प्रत्येक भारतीय के नाम पर धोखाधड़ी से दो एटीएम कार्ड बना लिए। उन्होंने हमें बिना बताए हमारे बैंक खातों से पैसे निकाल लिए। किसी को 20 लाख, किसी को 14, तो किसी को 13 लाख का नुकसान हुआ। मैं अपना कार्ड ब्लॉक कराने में कामयाब रहा, इसलिए वे मेरे पैसे लेने में असफल रहे। रूस में एक सामान्य गोदाम की नौकरी, आकर्षक प्रोत्साहन और स्थायी निवास का झूठा वादा करके इन एजेंटों ने हमें रूसियों को बेच दिया और युद्ध में लड़ने के लिए मजबूर किया।’ -जतिन ने आगे कहा।
‘यूक्रेन-रूस युद्ध क्षेत्र की स्थितियां इतनी भयावह थीं कि कुछ पाकिस्तानी और अफगान नागरिक, जिन्हें मैं जानता था; पानी उपलब्ध न होने पर पीने के लिए बोतलों में अपना मूत्र भरकर रखते थे। मैंने एक पाकिस्तानी नागरिक को भूख से इतना हताश देखा कि वह पेड़ के पत्ते खा रहा था।’ -जतिन ने जोड़ा।
सरकार को कम से कम 126 भारतीयों के बारे में जानकारी है, जो यूक्रेन में युद्ध लड़ने के लिए रूसी सेना में शामिल हुए थे। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास को जिन 126 लोगों के बारे में सूचित किया गया है, उनमें से 96 अब तक भारत लौट आए हैं। शेष में से 12 संघर्ष में मारे गए हैं, जबकि 16 लापता बताए जा रहे हैं।
सिराज और जतिन उन 126 भारतीयों में शामिल हैं, जिन्हें युद्ध में लड़ने के लिए मजबूर किया गया था। इनमें से अधिकांश लोग गरीब परिवारों से थे और एजेंटों द्वारा उन्हें धन और नौकरी का वादा करके फुसलाया गया था, कभी-कभी तो उन्हें रूसी सेना में सहायक के रूप में भी नौकरी दी जाती थी। इसके बजाय उन्हें सीधे युद्ध क्षेत्र में भेज दिया गया। कई लोगों ने बताया कि वे यूक्रेन के रूसी नियंत्रण वाले भागों में तैनात थे, जहां उन्हें बारूदी सुरंगों, ड्रोनों, मिसाइलों और स्नाइपर फायरिंग से निपटना पड़ता था, जबकि उन्हें कोई सैन्य प्रशिक्षण नहीं मिलता था। भारतीय अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने मानव तस्करी के आरोप में कई लोगों को गिरफ्तार किया है। जुलाई, 2024 में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मास्को यात्रा के बाद, रूस ने अपनी सेना में लड़ रहे सभी भारतीयों की शीघ्र रिहाई का वादा किया था, जिसके दौरान उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के समक्ष यह मुद्दा उठाया था। दोनों देशों के बीच पारंपरिक रूप से मधुर संबंध रहे हैं। तब से 96 लोगों को छुट्टी दे दी गई है और वे सुरक्षित भारत लौट आए हैं, जबकि लापता लोगों का पता लगाने के प्रयास जारी हैं। तहलका की एसआईटी ने कुछ ऐसे लोगों से उनके संघर्षों के बारे में बात की, जो वापस लौटने में कामयाब रहे।
तहलका रिपोर्टर ने सबसे पहले सिराज से बात की, जिन्होंने बताया कि रूस से लौटने के एक साल बाद भी उन्होंने अपने माता-पिता को यह नहीं बताया है कि एजेंटों ने उनके साथ धोखा किया है। उन्होंने कहा कि वह उन्हें तनाव में नहीं डालना चाहते। इस कारण से उन्होंने हमसे इस रिपोर्ट में अपना वास्तविक नाम उजागर न करने का अनुरोध किया।
तहलका रिपोर्टर से हुई बातचीत में सिराज ने बताया है कि रूसी कमांडरों ने भगोड़ों को बिना किसी हिचकिचाहट के उन्हें गोली मार दी। सिराज एक भयावह घटना का वर्णन करते हैं, जब रूसी सेना में लड़ रहे एक विदेशी को युद्ध क्षेत्र से भागने के असफल प्रयास के बाद रूसी सैनिकों ने गोली मार दी थी। सिराज ने कहा कि वह प्रत्यक्षदर्शी हैं, क्योंकि हत्या उनके अपार्टमेंट में हुई थी। चूंकि युद्ध क्षेत्र में बिजली नहीं थी, इसलिए उन्हें रोशनी के लिए मशाल पकड़ने को कहा गया था। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद उनमें इतना भय व्याप्त हो गया कि वे रातों को सो नहीं सके और तबसे जब भी रूसी सैनिक नशे में होते थे, वे उनसे बात करने से कतराने लगे।

सिराज : हेडक्वाटर्स में बताता हूं क्या-क्या होता था…उनका दिमाग खराब होते ही वो सीधे सर पर गोली मारते थे।
रिपोर्टर : किनका दिमाग खराब होते ही?
सिराज : जो रशियन आर्मी के बड़े लोग होते थे।
रिपोर्टर : किसको गोली मारते थे?
सिराज : जो भागते थे जंग छोड़ के, ..चाहे वो किसी भी देश का हो…उसके लिए मौत है।
रिपोर्टर : आपके सामने मारा किसी को?
सिराज : भाई मुझसे ही टॉर्च पकड़वाई थी एक बार तो।
रिपोर्टर : टॉर्च मतलब?
सिराज : लाइट के लिए, …क्योंकि बिजली तो वहां है नहीं। मुझे टॉर्च थमा दी, पिटाई चल रही थी किसी की। एक था कोई, …भागकर आया था पीछे से।
रिपोर्टर : बहार का था या रशियन?
सिराज : इंडियन नहीं था पर बहार का ही था…पहले उसके पैर में मारी गोली, …फिर हाथ में; …जब वो चिल्लाने लगा, तो उसके सर में मार दी। …भागते हुए पकड़ा गया था वो। आगे भी मौत है, तेरे पीछे भी मौत है; …कहाँ भागेगा बता! गोली तो वहां रोज़ चलती थी, लेकिन उस दिन उसके सर में सीधं गोली मार दी।
रिपोर्टर : आपसे कहा टॉर्च पकड़ लो
सिराज : मेरे फ्लैट में ही तो गोली मारी है।
रिपोर्टर : आप डर गए होंगे?
सिराज : भाई उस दिन के बाद मुझे नींद नहीं आई ठीक से..जब वो नशे में होते थे..मैं उनसे बात नहीं करता था। भाई पूरी पूरी बेल्ट होती थी गोलियाँ की, वो खाली कर देते थे।
रिपोर्टर : तो क्या आपने घर वालों को बताया होगा मेरे साथ धोखा हो गया?
सिराज : नहीं भाई, घर वालों को आज तक नहीं बताया।
रिपोर्टर : आज तक नहीं बताया कि आपके साथ धोखा हुआ?
सिराज : नहीं।
रिपोर्टर : क्यूं?
सिराज- मेरे घर वाले क्या करते? टेंशन में मारे जाते।
रिपोर्टर- उनको आज तक नहीं बताया आपके साथ धोखा हुआ?
सिराज : नहीं।
रिपोर्टर : फिर उन्होंने पूछा नहीं, वापस क्यों आ गए पांच महीने के बाद?
सिराज : इतना ध्यान नहीं देता कोई, …बता दिया कि कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो गया।

अब सिराज उस पल को याद करते हैं, जब उन्हें एहसास हुआ कि उनके साथ धोखा हुआ है। रूस-यूक्रेन सीमा पर, जहां सैन्य प्रशिक्षण शुरू हुआ, यह स्पष्ट हो गया कि अब वापसी संभव नहीं है। गुड़गांव का प्रिंस नाम का एक व्यक्ति रूसी सेना में प्रशिक्षक के रूप में काम कर रहा था। उसने तब एक बड़ा खुलासा करते हुए सिराज को बताया कि तुम अपने मृत्यु वारंट पर हस्ताक्षर करने के बाद यहां आए हो। सिराज ने बताया कि उसी क्षण से उन्होंने मास्को स्थित भारतीय दूतावास को फोन करके बचाव की मांग करनी शुरू कर दी।
रिपोर्टर : आपको कब पता चला आपके साथ धोखा हो गया?
सिराज : जब हम रूस-यूक्रेन बॉर्डर पर पहुंचे और आर्मी ट्रेनिंग हुई…वहां जा तो सकते हो अपनी मर्जी से, मगर आ नहीं सकते। वहां एक गुड़गांव का ट्रेनर था प्रिंस, जो रशियन आर्मी में ट्रेनिंग देता था। उसने कहा था, तुम अपना डेथ वारंट साइन करके आये हो। मैंने तो वहीं से कॉल लगाना शुरू कर दी थी भाई इंडियन एंबेसी को रशिया में; …यहां से निकल लो हमें भाई! हमें फंसा दिया गया है।

इसके बाद सिराज ने बताया कि धोखाधड़ी कैसे शुरू हुई। एजेंट ने उन्हें आश्वासन दिया था कि वह किसी भी तरह से युद्ध में शामिल नहीं होंगे। सिराज से केवल साधारण वितरण कार्य, जैसे कि एक स्थान से दूसरे स्थान तक भोजन पहुंचाने का वादा किया। दो लाख रूबल प्रति माह का आकर्षक वेतन देने का वादा किया गया था और सब कुछ वास्तविक प्रतीत हुआ।
रिपोर्टर : ये एजेंट आपको ले गया था..उसने बताया था आपको यूक्रेन से लड़ना होगा?
सिराज : उसने बोला था, बस डिलीवरी का काम करना है; …जंग-वंग में नहीं जाना।
रिपोर्टर : किस टाइप की डिलीवरी?
सिराज : खाना देकर आना है बस।
रिपोर्टर : उसने पैसे कितने बताए थे, तनख्वा?
सिराज : तनख्वा बोला था 2 लाख मिलेगी, रशियन करेंसी में, …पर मंथ।

अब सिराज ने भोजन के लिए दैनिक संघर्ष के बारे में बताया। पूरे एक महीने तक उनका एकमात्र भोजन दिन में एक बार मिलने वाला चावल का पानीदार सूप था, यहां तक कि पीने का पानी भी सीमित था। राष्ट्रीयता चाहे जो भी हो – रूसी, अफगानी या अन्य सभी देशों के नागरिकों को समान अभाव का सामना करना पड़ा।
रिपोर्टर- खाना-पीना सब बढ़िया था?
सिराज- ये मान लो भाई महीने भर तो वो एक टाइम देते थे सूप; मतलब वो भी पानी होता था।
रिपोर्टर ; चिकन सूप?
सिराज : नहीं भाई, चावल का सूप।
रिपोर्टर : बाकी कुछ नहीं, सिर्फ सूप?
सिराज : बाकी कुछ नहीं। …पानी भी लिमिट में मिलेगा सबको।
रिपोर्टर : ऐसा क्यूं?
सिराज- रशियन हो या अफगानी हो.. क्योंकि भाई वॉर चल रही है…इतना खाना कहां से लाएंगे।

इस बातचीत में सिराज बताते हैं कि रूस की उनकी यात्रा कैसे शुरू हुई। इसकी शुरुआत एक लॉजिस्टिक्स नौकरी के वादे और एक ट्रैवल एजेंट के जरिए संपर्क के साथ हुई। उनके अनुसार, रूस में रहने वाले भारतीय मूल के एजेंट जितेंद्र सहरावत ने उन्हें फोन किया और एक अन्य एजेंट सुमित दहिया से मिलने के लिए कहा, जिसका दिल्ली के भीकाजी कामा प्लेस में कार्यालय है। सिराज ने कहा कि उन्होंने सुमित से मुलाकात की और अपना पासपोर्ट सौंप दिया। इसके तुरंत बाद उन्हें रूसी वीजा मिल गया और वे 16-17 अन्य भारतीयों के साथ रूस की यात्रा पर निकल पड़े। सिराज के अनुसार, सुमित और एक रूसी महिला उन सभी को भारत से सेंट पीटर्सबर्ग ले गए। दिल्ली हवाई अड्डे पर सिराज से कहा गया कि यदि कोई उनके बारे में पूछे तो उन्हें बताना होगा कि वह रूसी महिला उनकी बॉस है और वे रूस जा रहे हैं।

रिपोर्टर : आप कैसे रशिया पहुंचे?

सिराज : पता लगा था कि लॉजिस्टिक्स में जॉब है। …XXXX होलीडे करके एक ट्रेवल एजेंट का फोन आया।

रिपोर्टर : आप ट्रेवल एजेंट के संपर्क में कैसे आए?

सिराज : एक दलाल था, रशिया में रहता था, …इंडियन था।

रिपोर्टर : आपके कॉन्टेक्ट में मेरठ में आया होगा?

सिराज : पता लग ही जाता है, जब आदमी परेशान होता है। …उसने बोला, भीकाजी कामा प्लेस चले जाना, पासपोर्ट दे आना। पासपोर्ट दे आए हम, …वीजा लग गया…ऑफिस वाला हमें लेकर गया, उसके साथ एक रशियन लेडी भी थी।

रिपोर्टर : XXXX वाला आपको कहां तक लेकर गया?

सिराज : रशिया तक लेकर गया, …सेंट पीटर्सबर्ग।

रिपोर्टर : आप अकेले गए या कोई और भी था?

सिराज : भाई मुझे तो पता लगा कि मैं अकेला जाऊंगा, पर वहां देल्ही एयरपोर्ट पहुंचा तो देखा 16-17 लोग हैं। …मुंबई से, पंजाब से भी थे, …पंजाब से ज्यादा थे। देल्ही से भी थे।

 रिपोर्टर : वो सब इसी ट्रेवल एजेसी के थे या अलग-अलग?

सिराज : भाई ये नहीं पता, मगर मेन आदमी वही था, जो लेकर जा रहा था।

सिराज (आगे) : उसका नाम था सुमित दहिया।

रिपोर्टर : देल्ही का रहने वाला?

सिराज : शायद सोनीपत का।

रिपोर्टर : रशियन आदमी कहां चला गया आपको इससे मिलाकर?

सिराज : नहीं, उसने नंबर दिया था सुमित दहिया का। उसका नाम था जितेंदर सहरावत, जो रशिया में रहता था।

रिपोर्टर : फिर सुमित दहिया और रशियन लेडी आपको देल्ही एयरपोर्ट लेकर गए?

सिराज : हां, उन लोगों ने हमारे पेपर कर रखे थे और बोला था कि कोई पूछे तो बोल देना कि ये रशियन लेडी हमारी बॉस है। …हम इनके साथ जा रहे हैं।

रिपोर्टर : तो आप सेंट पीटर्सबर्ग कितने दिन में पहुँचे?

सिराज : राजस्थान में रुके 16 आवर्स, फिर 1-1.5 दिन में सेंट पीटर्सबर्ग पहुंच गए थे।

रिपोर्टर : वहां सेंट पीटर्सबर्ग में क्या हुआ?

सिराज : वहां वो हमको पिकअप करने आया था, जिसने हमें नंबर दिया था- जितेंद्र सहरावत।  वो पिकअप करने आया।

रिपोर्टर : आप भाषा तो समझ नहीं पाते होंगे, उनकी लेंग्वेज है रशियन?

सिराज : नहीं भाई। 

रिपोर्टर : कैसे कम्युनिकेशन करते थे?

सिराज : हम उनसे बातचीत ही कहां करते थे। …वही करते थे, एक होता था ट्रांसलेटर उनके साथ। 

रिपोर्टर : वो रशियन लेडी भी नहीं मिली आपको?

सिराज : नहीं, उसका काम सिर्फ एयरपोर्ट तक का था, …सेंट पीटर्सबर्ग एयरपोर्ट। वो वहाँ से ही वापस चली गई थी।

सिराज ने आगे बताया कि किस प्रकार वह यूक्रेन सीमा के निकट रूसी प्रशिक्षण केंद्र में पहुंचा। उन्होंने बताया कि उन्हें दस्तावेज प्राप्त हुए, फिर उन्हें रोस्तोव ले जाया गया, जहां दस दिनों तक सैन्य प्रशिक्षण दिया गया। अभ्यास में गोली चलाना, घरों पर हमला करना और हथियार चलाना शामिल था। उन्होंने उन बंदूकों के नाम बताए, जिनसे उन्हें प्रशिक्षण दिया गया था। सिराज ने बताया कि उन्हें पहले से इस बात का कोई अंदाजा नहीं था कि उन्हें इस तरह के अभ्यास के लिए मजबूर किया जाएगा।

रिपोर्टर : तो आपने जंग लड़ी यूक्रेन में?

सिराज : हां जी लड़ी। हम वहां रहे पांच महीने।

रिपोर्टर : सात दिन वहां रहे, फिर क्या हुआ? डाक्यूमेंट्स बन गए आपके?

सिराज : डाक्यूमेंट बन गए, फिर बोला आपको आगे जाना पड़ेगा। तब तक नहीं मालूम था हम कहां जा रहे हैं। …रशियन-यूक्रेन बॉर्डर पर एक जगह है रोस्तोव, वहां हमारी 10 दिन ट्रेनिंग हुई, …आर्मी की।

रिपोर्टर : उन्होंने क्या-क्या सिखाया?

सिराज : गोली चलाना, घरों पर कब्जा करना, वो एक स्केच बना देते थे कि घरों पर कब्जा कैसे करना है, …फायरिंग करना, …ये सब सिखाया।

रिपोर्टर : ये रशियन आर्मी आपको ट्रेनिंग देती थी?

सिराज : वहीं पर उनका सेंटर था। सब वहीं जाते थे।

रिपोर्टर : हथियार कौन सा था, जिससे ट्रेनिंग मिली आपको?

सिराज : एके12, एके 72, एक और थी, …उसको खोलना, बंद करना, सफाई करना, सब सिखा दिया था हमको।

अब रिपोर्टर ने सिराज से रूस में उनकी कमाई के बारे में पूछा। सिराज ने बताया कि इस बात पर कोई स्पष्टता नहीं थी कि प्रत्येक भर्ती को वास्तव में कितना मिला, क्योंकि प्रणाली में पारदर्शिता का अभाव था। जब उनसे सीधे पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि उन्हें 16 लाख रूबल मिले हैं, जो मोटे तौर पर 15 लाख रुपये के आसपास है।

रिपोर्टर : पांच महीने में कितना कितना पैसा कमा लिया?

सिराज : असल में वहां किसी को ज्यादा मिला, किसी को कम। …हमें ये ही नहीं पता क्या हिसाब था।

रिपोर्टर : आपको कितना मिला?

सिराज : 16 लाख रूबल, ऐसे कुछ थे।

रिपोर्टर : मोटा-मोटा 15 लाख इंडियन करेंसी में?

सिराज : हां।

निम्नलिखित बातचीत में सिराज ने उसी एजेंट के साथ हुई तीखी झड़प को याद किया, जिसने उसे झूठे आश्वासन देकर रूस ले जाने का प्रलोभन दिया था। सेंट पीटर्सबर्ग के एक रेस्तरां में हुई यह झड़प गहरे गुस्से और विश्वासघात से उपजी थी, जो बाद में हिंसक हो गई। सिराज ने एजेंट पर आरोप लगाया कि उसने रूस में उसके इंतजार में मौजूद चीजों के बारे में उसे धोखा दिया है।
रिपोर्टर : एजेंट से दोबारा कॉन्टेक्ट नहीं किया आपने?

सिराज : भाई एजेंट से हाथापाई हुई दोबारा। वही रशिया में, …सेंट पीटर्सबर्ग में।

रिपोर्टर : क्या बोला वो?

सिराज : भाई उसको देखते ही गुस्सा आया, उसने हमें क्या बोला था और कहां भेज दिया। इसलिए हाथापाई हुई। एक रेस्टोरेंट में बैठा हुआ मिल गया था…।

निम्नलिखित बातचीत में सिराज ने बताया कि किस प्रकार एजेंटों ने रूस भेजने के बाद भी रंगरूटों का शोषण जारी रखा। उनका कहना है कि एजेंटों ने दो एटीएम कार्ड बनाकर उसमें से एक कार्ड पैसे निकालने के लिए अपने पास रख लिया था। उनके अनुसार, उनके अपने समेत कई लोगों के खातों से धोखाधड़ी करके बड़ी रकम निकाली गई। सिराज ने युद्ध में घायल या मारे गए लोगों के लिए मुआवजे की संरचना का भी उल्लेख किया है, तथा इस बात का चित्रण किया है कि किस प्रकार मानव जीवन को एक ठंडे लेन-देन में बदल दिया गया है।

रिपोर्टर : एजेंट का क्या फायदा अगर इन्होंने आपसे पैसे नहीं लिए तो?

सिराज : इन्होंने एटीएम कार्ड्स से पैसे निकाल लिए। इन लोगों ने 2 एटीएम कार्ड बनवाए, …एक हमें दे दिया, …एक अपने पास रख लिया। फिर इन्होंने लोगों के पैसे चोरी किए, …मेरे 50 हजार निकाले, किसी के 13 लाख, किसी के 14 लाख….।

सिराज (आगे) : रशिया में अगर किसी के पैर में गोली लगी है ना भाई, …या अगर वो जख्मी भी हो गया, तो उसको 30 लाख रूबल मिलते हैं। सेलरी से अलग। अगर शहीद हुआ तो 2 करोड़ रूबल्स देते हैं। भाई उन लोगों ने लोगों के सारे पैसे निकाल लिए। 

रिपोर्टर : ये एटीएम कार्ड दो बनवाते थे, …आपको नहीं पता होता था?

सिराज : भाई उस वक्त दिमाग काम नहीं करता।

इस आदान-प्रदान से पता चलता है कि किस प्रकार भारतीय लोग रूसी अनुबंधों में फंस गए थे, जिन्हें वे समझ नहीं पा रहे थे, क्योंकि वे विदेशी भाषा में थे। सिराज बताते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हस्तक्षेप के बाद ही रिहाई सुनिश्चित हुई, अन्यथा उन्हें रिहा नहीं किया जाता। उन्होंने पूरी तरह से एजेंट के शब्दों पर भरोसा करके एक साल तक का कॉन्टेक्ट पूरी तरह से रूसी भाषा में लिखे गए दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करके किया था।

रिपोर्टर : घर कैसे आए, उन्होंने छोड़ा कैसे?

सिराज : यहां से मोदी जी गए थे, वहां कॉन्टेक्ट हुआ था कि इनको रिलीज करो।

रिपोर्टर : नहीं, तो वो छोड़े नहीं?

सिराज : वो नहीं छोड़ते, वो बिलकुल नहीं छोड़ते।

रिपोर्टर  म: कितने महीने का कॉन्टेक्ट था आपका?

सिराज : भाई वहां कॉन्टेक्ट हुआ था साल भर का, जो बताया गया था। सारे डाक्यूमेंट्स रशियन में थे। …हमको नहीं पता उसमें क्या लिखा है या नहीं। जो एजेंट था, उसने कहा यहां साइन कर दो, यहां कर दो।

सिराज के बाद तहलका रिपोर्टर ने दिल्ली के एक अन्य भारतीय जतिन आहुजा से बात की, जो यूक्रेन-रूस युद्ध में भाग लेने के बाद रूस से लौटे थे। जतिन के अनुसार, उसने 10-12 यूक्रेनी सैनिकों को मार डाला। हालांकि उसने कहा कि उसे नहीं पता कि यह दुर्घटनावश हुआ या गोली लगने से। उन्होंने तहलका को बताया कि ड्रोन हमले में उनके पैर में चोट लग गई थी, जिसका इलाज उन्होंने भारत में कराया। जतिन ने बताया कि कुल मिलाकर उन्होंने 23 अक्टूबर 2024 को भारत लौटने से पहले यूक्रेन-रूस युद्ध क्षेत्र और रूस में छह महीने से अधिक समय बिताया। उन्होंने दावा किया कि वह रूसी सरकार से बीमा राशि के रूप में 30 लाख रूबल पाने के हकदार हैं, क्योंकि रूसी कानून के अनुसार यह राशि ड्रोन के कारण पैर में चोट लगने पर किसी भी व्यक्ति को दी जाती है।

इस बातचीत में जतिन ने यूक्रेन में प्रत्यक्ष युद्ध में मजबूर किये जाने की बात कही है, जहां उसने दस से अधिक लोगों की हत्या करने की बात स्वीकार की है। उन्होंने बताया कि ड्रोन हमले में वे घायल हो गए थे, जिससे उनका पैर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और महीनों तक उसका इलाज नहीं हो सका। यहां तक कि वादा किया गया बीमा भुगतान भी कभी नहीं मिला। युद्ध की स्थिति में लगभग छह महीने बिताने के बाद वह अंततः दूतावास की मदद से भारत लौट आए।
रिपोर्टर : आपने कितने यूक्रेन के लोगों को मारा?

जतिन : मेरे हाथ से कम से कम 10-12, ….पहले दिन तो 4-5 ही गए थे। …उसके बाद उन्होंने मुझे 1 मंथ ड्यूटी नहीं दी, मुझे टांग पर लगी थी।

रिपोर्टर : मतलब 10-12 यूक्रेन के लोगों को आपने मार दिया, ….मतलब गोली चलाकर मारा?

जतिन : हां जी, वो भी फ्रंट पर नहीं, …फ्रंट पर तो पहले ही दिन हुई थी..12 ठीक को…., वो तुक्के से मरे हैं या कैसे, मुझे नहीं पता।

रिपोर्टर : अच्छा आपके पैर में भी लगा ड्रोन?

जतिन : वो मुझे बाद में लगा, …उसके बाद 2 महीने हम कमरे से ही नहीं निकले…।

रिपोर्टर : उसका इलाज आपने इंडिया में आकर कराया?

जतिन : हां, मेरे पैर की हालत खराब हो गई थी, खाल निकल गई थी, जिसमें मेरे ड्रोन का मैटल निकला है..।
जतिन (आगे) : मेरे पैर में, हाथ में ड्रोन लगा हुआ है। …इंश्योरेंस वाले मेरे पैसे भी नहीं दे रहे हैं, जो 30 लाख रूबल बनता है।

रिपोर्टर : टोटल कितने महीने रहे आप वहां पर?

जतिन : मेरे हिसाब से अगर वॉर जोन में लगा लोगे तो 4-5 मंथ्स रहा हूं मैं, … उसके बाद 1-1.5 मंथ्स रशिया में।

रिपोर्टर : 6 महीना मानकर चलो?

जतिन : 6 महीना प्लस लगाकर चलो।

रिपोर्टर : आप इंडिया कब आए?

जतिन : इंडिया में आया 23 अक्टूबर 2024 को, जो फ्लाइट मेरी इंडियन एंबेसी ने कराई।

जतिन के अनुसार, वो तहलका को जो कुछ भी बता रहे हैं, वह विशेष जानकारी है, जो भारत में किसी के पास नहीं है। उन्होंने कहा कि भारतीय मीडिया को केवल इस बात में रुचि है कि भारतीय एजेंटों ने उन्हें कैसे धोखा दिया, न कि इस बात में कि यूक्रेन-रूस युद्ध क्षेत्र में उन्हें किन अमानवीय परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। जतिन ने बताया कि एक पाकिस्तानी और एक अफगान नागरिक ने अपना मूत्र एक बोतल में भरकर रख लिया था, ताकि अगर उन्हें पानी न मिले तो वे उसे पी सकें। उन्होंने आगे बताया कि एक पाकिस्तानी ने भोजन के अभाव में भूख से व्याकुल होकर पेड़ के पत्ते खाए। 

‘रात में ड्रोन हमलों के कारण हमें शाम 6 बजे के बाद शौचालय जाने की अनुमति नहीं थी। चूंकि पानी नहीं था, इसलिए मैं सप्ताह में केवल एक बार ही नहाता था।’ -जतिन ने कहा।

जतिन : मेरे पास बहुत चीजें हैं जो किसी को पता ही नहीं है।

रिपोर्टर : हां मुझे ऐसी ही चीजें चाहिए।

जतिन : जो रशियन आर्मी के अंदर के हाल हैं…, मतलब बहुत चीजें हैं आप सुनकर दंग रह जाओगे। अफगानिस्तान, पाकिस्तान सब जगह के बंदे हैं। एक अफगानी मुसलमान था, वो कह रहा था चार दिन मैंने खाना नहीं खाया, बाथरूम होता है वो मैंने अपनी बोतल में रखा था…कि पानी न मिले तो मैं ये पी जाऊंगा। वो खुलासा है जो किसी के पास न हो। रशियन आर्मी ने हमको बताया था कि आर्मी में काम नहीं करना लेकिन वेयरहाउस में करना है। …होल्डर का काम है रशियन आर्मी के वेयरहाउस में…, मेरे पास बहुत किस्से हैं।

रिपोर्टर : मीडिया वालों को इंटरव्यू नहीं दिया आपने?

जतिन : मीडिया वाले बोलते हैं कि बोलो हमको एजेंटों ने फंसा दिया। भाई मैं तो पूरी बात बताऊंगा….।

जतिन : एक जगह तो इंडियन नहीं लिए थे बाकी पाकिस्तान, अफगानिस्तान वाले की बात कर रहा था। …एक पाकिस्तान का था उसको खाना नहीं मिला था, वो पत्ते खा रहा था। उसने अपना बाथरूम भी पिया, …कई बंदों ने तो मक्खी वाला पानी पिया था अपने हाथों से उठाकर, …इंडियंस ने।

रिपोर्टर : पानी की दिक्कत है वहां?

जतिन : पानी की दिक्कत है। खाने की दिक्कत है…।

रिपोर्टर : खाना ठीक मिलता था?

जतिन : शुरू के दो महीने तो दोनों टाइम मिलता था, उसके बाद जैसे हाफ प्लेट राजमा चावल नहीं मिलता, बाजार में बस उतना ही मिलता था, …2 टाइम और वो भी एक हफ्ते बाद जाने के, …शुरू में 2-3 दिन तो खाना मिला ही नहीं, सिर्फ पानी या जूस या टमाटर खाते थे।

रिपोर्टर : इसका मतलब आपको झूठ बोलकर ले गए?

जतिन : हां, उसके बाद एक-डेढ़ महीने तो ठीक रहा, जैसे ही…समझ लो तीन महीने तो मैं नहाया ही नहीं, ….पोटी छुप-छुपकर करते थे।

रिपोर्टर : क्यूं?

जतिन : छुपकर करते थे कोई ड्रोन मार जाए, …रात में पोटी कर नहीं सकते थे, …6 बजे के बाद पोटी जाना अलाउड नहीं था।

रिपोर्टर : किसी का पेट खराब हो जाए तो?

जतिन : पहले ही कह देते थे सिस्टम बनाओ अपना…, खाओ मत। …रात में क्या होता था- हमारा कमांडर थोड़ा समझदार था। ढाई महीने मैं उसकी वजह से ही बचा हूं। …वो तो मर गया बेचारा।

जतिन ने खुलासा किया कि एजेंट जितेंद्र सहरावत उर्फ जीतू ने उन्हें रूस में जान से मारने की धमकी दी थी। उन्होंने कहा कि एजेंटों ने धोखाधड़ी से प्रत्येक भारतीय भर्ती के नाम पर दो एटीएम कार्ड बनाए और उनके बैंक खातों से पैसे निकाल लिए। जतिन ने बताया कि चूंकि वह अपना कार्ड ब्लॉक कराने में कामयाब रहे, इसलिए वे उनके खाते से पैसे निकालने में असफल रहे। उनके अनुसार, एजेंटों ने रूसी गोदाम में नियमित नौकरी के साथ-साथ जनसंपर्क, आवास और अन्य प्रोत्साहनों का वादा किया था, जो प्रस्ताव बाद में फर्जी साबित हुए। संक्षेप में जतिन ने कहा कि एजेंटों ने प्रभावी रूप से भारतीयों को रूसी सेना को बेच दिया था।

 रिपोर्टर : आपके अकाउंट में पैसे आ रहे थे?

जतिन : पैसे आ रहे थे पर मैंने अपना अकाउंट ब्लॉक कर दिया था। मेरी घर में ही तीन महीने बाद बात हुई है। …मेरे घर वालों को तो पता ही नहीं था।

रिपोर्टर : तो कितने टोटल पैसे आपके अकाउंट में आ गए 5-6 महीने में?

जतिन : सर, मेरे अकाउंट में 14 लाख आए हैं टोटल.., 14 लाख रूबल थे तो उस टाइम इंडिया का रेट था 12.5 लाख, जिसमें से मेरा एजेंट निकालनहीं पाया, …क्यूंकि मेरा अकाउंट ब्लॉक था। कार्ड ब्लॉक किया था, …मैंने देव (फालो विक्टिम) से कहा ब्लॉक कर दे, बोला दिक्कत हो जाएगी। जो बंदा यहां ला सकता है, वो मरवा भी सकता है। …उस एजेंट ने हमें रास्ते में धमकी भी दी थी।
रिपोर्टर : कौन से एजेंट ने धमकी दी थी आपको?

जतिन : जीतू ने कहा था कि मैं सबको मरवा दूंगा।

रिपोर्टर : कहां? रशिया में?

जतिन : हां, रशिया में। जब हम जा रहे थे तो एक फोन मिला था, ..हम कैंप में जा रहे थे, एक बंदे का नेटवर्क था तो उसको फोन किया। जीतू ने फोन किया चाचा को कि मैं सबको मरवा दूंगा। …कोई जिंदा नहीं बचेगा, और यहां तक कि हमारा कोई लोन भी नहीं बनाया इंश्योरेंस का। मान लो हम मर जाते तो हमारा पैसा ये खुद खा जाते। …कार्ड मैंने ब्लॉक कर दिए। जीतू ने भारत के निकाले 13 लाख रूबल, देव भूषण के निकाले हैं…7 लाख रूबल निकाले हैं, ….राहुल के, जिसकी उंगलियां कट गईं, उसके निकाले हैं और श्रीकांत के सारे निकाल लिए, जो मर गया बेचारा। (हेयर, जतिन नेम्ड सम ऑफ हिज फालो इंडियंस- चाचा, भारत, देव भूषण एंड श्रीकांत- हू, लाइक हिम, हेड बीन टैकेन टू रशिया। श्रीकांत, ही सैड, हैड डैड इन वॉर।) यहां, जतिन ने अपने कुछ भारतीय साथियों- चाचा, भार, देव भूषण,  राहुल और श्रीकांत के नाम बताए, जिन्हें भी उनकी तरह रूस ले जाया गया था। जतिनने बताया कि श्रीकांतयुद्धमें मारे गएथे।)

रिपोर्टर : एजेंट ने आपको रशियन आर्मी के हाथों बेच दिया। रशियन आर्मी ने आपको वॉर फ्रंट पर भेज दिया?

जतिन : हां जी, वॉर फ्रंट पर भेजने के बाद भी इन्होंने हमको नहीं छोड़ा, कई बंदों के कार्ड देकर पैसे भी निकलवाए हैं।

रिपोर्टर : अच्छा, एजेंट्स ने बहुत पैसा निकाल लिया होगा आपका?

जतिन : भाई एजेंट्स ने बहुत पैसा निकाला है। एक बंदे के 20 लाख रुपीज, …मैं वीडियो भेजूंगा कोई यादव था, …एक दिन मैं गया था रशियन एंबेसी में। वो कह रहे थे, तुम निकल रहे हो वही बहुत है, …तुम्हें पैसे कि पड़ी है।
रिपोर्टर : अच्छा आपने जो कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था, उसमें ये था कि आप अपने देश जा सकते हैं?

जतिन : हमें पता ही नहीं, …हमने पढ़ा ही नहीं। उसमें कहा था तुमको पीआर मिल जाएगी देश तो तुम अपने जा सकते हो। प्लस आपको रशिया में क्वार्टर मिलेगा और आपने सिर्फ हेल्प करनी है। आपने लड़ने के लिए नहीं जाना। …अगर जिस हिसाब से लड़ने के लिए बुलाया था ना, उस हिसाब से 50 लाख सेलरी भी खम थी।

सिराज, जतिन और अन्य भारतीयों को रूस ले जाने में शामिल दो एजेंट जितेंद्र सहरावत और सुमित दहिया लापता हैं और उनके फोन नंबर भी बंद हैं। सिराज और जतिन के अनुसार, दोनों एजेंटों ने उन्हें रूसी सेना को बेच दिया और उनके खातों से बड़ी रकम भी निकाल ली। सिराज ने आगे आरोप लगाया है कि एक रूसी महिला, जो उन्हें दिल्ली से सेंट पीटर्सबर्ग ले गई थी, भी इस रैकेट का हिस्सा थी। तहलका रिपोर्टर ने सिराज और जतिन से बात की, जो 13 अन्य भारतीयों के साथ यूक्रेन-रूस युद्ध में लड़े थे और रूस द्वारा नियंत्रित डोनेट्स्क क्षेत्र के क्रास्नोहोरिवका शहर में तैनात थे।

रूस में इस तरह के वॉर जाल में फंसे अन्य लोगों ने भी तहलका रिपोर्टर से बात करने का वादा किया था, लेकिन रिपोर्ट लिखनै के समय तक उन्होंने हमारे रिपोर्टर से संपर्क नहीं किया। सिराज और जतिन के अनुसार, जब वे रूस छोड़कर भारत आने की तैयारी कर रहे थे, तो एक रूसी अधिकारी ने उनमें से सिराज और जतिन समेत चार को रूसी सरकार की ओर से स्वीकृति के रूप में कार्ड दिए, जो भविष्य में नागरिकता के लिए संभावित पात्रता का संकेत था। इतनी मुसीबतों से गुजरने के बाद भी दोनों व्यक्तियों का कहना है कि वे अभी भी रूसी पासपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। इस बीच जतिन, जो ड्रोन हमले में घायल होने का दावा करते हैं, रूस से 30 लाख रूबल की बीमा राशि की उम्मीद कर रहा है।
वे इस बात पर भी जोर देते हैं कि यूक्रेन-रूस युद्ध क्षेत्र विदेशियों से भरा हुआ है। उनका कहना है कि श्रीलंका, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका और अन्य स्थानों के नागरिकों को एजेंटों द्वारा रूसी सेना को बेचा जा रहा है, जो उन्हें सहायक, डिलीवरी बॉय या गोदाम कर्मचारी के रूप में काम दिलाने का झूठा वादा करते हैं। इसकी जगह उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध एक क्रूर युद्ध में धकेल दिया गया। कुछ लौट आए हैं, कुछ मर गए हैं और कुछ का कोई पता नहीं चल पाया है। लापता लोगों की तलाश जारी है और हर गुजरते दिन के साथ इस मानवीय त्रासदी का पैमाना और भी गहरा होता जा रहा है।

एससीओ शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने फोटो सेशन में हिस्सा लिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन के फोटो सेशन में विश्व नेताओं के साथ हिस्सा लिया, जो क्षेत्रीय शिखर सम्मेलन से पहले एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक क्षण रहा। इस तस्वीर में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य सदस्य देशों के नेता शामिल थे। पीएम मोदी ने फोटो सेशन से जुड़ी तस्वीर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किया। उन्होंने लिखा, “तियानजिन में एससीओ शिखर सम्मेलन में।”

एससीओ शिखर सम्मेलन की मेजबानी इस साल चीन कर रहा है। इस समूह में आठ सदस्य देश शामिल हैं। इसका फोकस यूरेशियाई क्षेत्र में राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा सहयोग पर केंद्रित है। यह पहला मौका है, जब प्रधानमंत्री मोदी सात साल बाद चीन पहुंचे हैं, जो भारत और चीन के बीच 2020 के सीमा विवाद के बाद जटिल द्विपक्षीय संबंधों के बीच विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी, राष्ट्रपति शी और पुतिन के साथ बातचीत करते नजर आए, जो सक्रिय कूटनीति की वापसी का संकेत देता है। खासकर, पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच गर्मजोशी भरी मुलाकात ध्यान आकर्षित करने वाली थी, जिसमें दोनों ने गले लगकर और हाथ पकड़कर आपसी मित्रता का प्रदर्शन किया। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर इस मुलाकात की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, “राष्ट्रपति पुतिन से मिलना हमेशा खुशी की बात है।”

राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनकी पत्नी फंग लियुआन ने रविवार को तियानजिन में एक भोज का आयोजन किया, जिसमें शिखर सम्मेलन के 25वें संस्करण से पहले अंतरराष्ट्रीय मेहमानों का स्वागत किया गया।

इससे पहले रविवार को प्रधानमंत्री मोदी ने दस महीने बाद पहली बार चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने संबंधों को स्थिर करने और विशेष रूप से वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के आसपास के लंबित मुद्दों को हल करने की प्रतिबद्धता जताई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि संबंध ‘सार्थक दिशा’ में आगे बढ़ रहे हैं और ‘विसंघर्ष’ के बाद सीमाओं पर शांति का माहौल है।”

चीनी सरकारी प्रसारक सीसीटीवी के अनुसार, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उम्मीद जताई कि तियानजिन में हुई यह बैठक ‘द्विपक्षीय संबंधों को और ऊंचाई पर ले जाएगी’ और ‘इनके सतत, स्वस्थ और स्थिर विकास’ को बढ़ावा देगी।

जम्मू-कश्मीर के पुंछ में घुसपैठ की कोशिश, सेना और आतंकियों के बीच भीषण मुठभेड़ जारी

जम्मू-कश्मीर के राजौरी से सटे पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा पर आज सुबह से ही भारतीय सेना और घुसपैठियों के बीच भीषण गोलीबारी जारी है। सेना ने सोमवार सुबह पुंछ के बालाकोट सेक्टर में नियंत्रण रेखा पर एक बड़ी घुसपैठ की कोशिश को नाकाम कर दिया, जिसके बाद यह मुठभेड़ शुरू हो गई।

रक्षा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सेना के सतर्क जवानों ने आज सुबह बालाकोट सेक्टर के डब्बी इलाके में बाड़ के आगे जीरो लाइन के पास कुछ संदिग्ध हलचल देखी। जब जवानों ने संदिग्ध घुसपैठियों को ललकारा तो उन्होंने गोलीबारी शुरू कर दी। भारतीय सेना ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की, जिसके बाद दोनों ओर से भीषण गोलीबारी होने लगी।

सूत्रों ने बताया कि इलाके में अभी भी सेना का ऑपरेशन जारी है। घुसपैठ की कोशिश को पूरी तरह से नाकाम करने और आतंकियों के किसी भी मंसूबे को विफल करने के लिए अतिरिक्त सैन्य बल को मौके पर भेजा गया है। पूरे इलाके की घेराबंदी कर सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।