नई व्यवस्था के तहत हर दिव्यांग अभ्यर्थी को वही परीक्षा केंद्र दिया जाएगा, जिसे उसने आवेदन के समय चुना होगा। पहले कई बार ऐसा होता था कि बड़े शहरों के केंद्र जल्दी भर जाने के कारण दिव्यांग उम्मीदवारों को दूर-दराज के परीक्षा केंद्रों पर जाना पड़ता था। इससे उन्हें शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानी होती थी। अब इस नियम में बदलाव कर दिया गया है ताकि उन्हें यात्रा की अतिरिक्त दिक्कत न झेलनी पड़े।
UPSC ने साफ किया है कि दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए परीक्षा केंद्रों पर सीटों की कोई तय सीमा नहीं होगी। शुरुआत में हर केंद्र की क्षमता का उपयोग सामान्य और दिव्यांग दोनों उम्मीदवारों के लिए किया जाएगा। लेकिन अगर किसी केंद्र की सीटें पूरी भर भी जाती हैं, तब भी दिव्यांग उम्मीदवार उस केंद्र को चुन सकेंगे। जरूरत पड़ने पर वहां अतिरिक्त सीटों की व्यवस्था की जाएगी, ताकि किसी भी दिव्यांग अभ्यर्थी को पसंद के केंद्र से वंचित न किया जाए।
UPSC अध्यक्ष अजय कुमार ने बताया कि पिछले पांच साल के आंकड़ों के विश्लेषण से यह सामने आया है कि दिल्ली, पटना, लखनऊ और कटक जैसे शहरों में परीक्षा केंद्र बहुत जल्दी भर जाते हैं। इसका सबसे ज्यादा असर दिव्यांग उम्मीदवारों पर पड़ता था। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए यह नया फैसला लिया गया है, जिससे उन्हें बराबरी का मौका मिल सके और परीक्षा में भाग लेने में कोई रुकावट न आए।
आयोग ने आवेदन प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए नया ऑनलाइन आवेदन पोर्टल भी शुरू किया है। इसके जरिए उम्मीदवार आसानी से फॉर्म भर सकेंगे और परीक्षा से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 24 मई को आयोजित होगी। इस परीक्षा के माध्यम से कुल 933 पदों पर भर्ती की जाएगी, जिनमें 33 पद दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हैं। कुल मिलाकर, UPSC का यह फैसला दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है और इससे परीक्षा व्यवस्था ज्यादा संवेदनशील और समावेशी बनेगी।
इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारत पर लगाए जाने वाले टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमति दी है। इससे भारतीय कंपनियों को अमेरिकी बाजार में अपने उत्पाद बेचने में आसानी होगी। खास तौर पर छोटे उद्योगों, किसानों और मछुआरों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
किन सेक्टरों को होगा फायदा
इस ट्रेड डील से टेक्सटाइल, कपड़ा, चमड़ा, फुटवियर, प्लास्टिक और रबर उत्पाद, ऑर्गेनिक केमिकल्स, होम डेकोर और हस्तशिल्प जैसे सेक्टरों को बड़ा बाजार मिलेगा। इन क्षेत्रों में निर्यात बढ़ने से लाखों युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। सबसे बड़ी राहत यह है कि जेनेरिक दवाएं, रत्न और हीरे तथा एयरक्राफ्ट पार्ट्स जैसे कई उत्पादों पर टैरिफ पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा। इससे इन सेक्टरों में कारोबार तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। ऑटो पार्ट्स और फार्मा सेक्टर को भी इस डील से खास फायदा मिलेगा। भारत ने साफ किया है कि मक्का, गेहूं, चावल, दूध, पनीर और दूसरे संवेदनशील कृषि व डेयरी उत्पादों को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा। यानी इन पर विदेशी दबाव नहीं डाला जाएगा और किसानों के हितों से समझौता नहीं होगा।
दोनों देशों को मिलेगा तरजीही बाजार
इस समझौते के तहत भारत और अमेरिका एक-दूसरे को पसंदीदा सेक्टरों में आसान बाजार पहुंच देंगे। साथ ही यह भी तय किया जाएगा कि डील का लाभ मुख्य रूप से दोनों देशों को ही मिले। भारत अगले पांच साल में अमेरिका से बड़ी मात्रा में ऊर्जा उत्पाद, विमान और टेक्नोलॉजी से जुड़े सामान खरीदेगा। दोनों देश टेक्नोलॉजी और डेटा सेंटर से जुड़े प्रोजेक्ट्स में भी मिलकर काम करेंगे।
सरकार का मानना है कि इस ट्रेड डील से भारत का निर्यात बढ़ेगा, विदेशी निवेश आएगा और रोजगार के नए मौके बनेंगे। कुल मिलाकर यह समझौता भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को नई ऊंचाई देने वाला माना जा रहा है।
यह हड़ताल तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) ने राष्ट्रीय मजदूर संगठनों के साथ मिलकर बुलाई है। इसे ‘ऑल इंडिया ब्रेकडाउन’ नाम दिया गया है। यूनियन ने सोशल मीडिया पर कहा कि ऐप आधारित ड्राइवरों के लिए न तो कोई तय न्यूनतम किराया है और न ही कोई ठोस नियम-कानून, जिससे उनका लगातार शोषण हो रहा है।
ड्राइवर क्यों कर रहे हैं विरोध?
ड्राइवरों का कहना है कि कंपनियां अपनी मर्जी से किराया तय करती हैं और भारी कमीशन काट लेती हैं। इससे उनकी कमाई अस्थिर हो गई है। यूनियन ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर मांग की है कि सरकार न्यूनतम किराया और स्पष्ट नियम बनाए, ताकि ड्राइवरों को आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
उनका आरोप है कि लाखों ऐप आधारित ड्राइवर गरीबी की ओर धकेले जा रहे हैं, जबकि बड़ी एग्रीगेटर कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं।
पैनिक बटन बना नई परेशानी
महाराष्ट्र कामगार सभा ने भी हड़ताल का समर्थन किया है। संगठन का कहना है कि सरकार की ओर से अनिवार्य पैनिक बटन डिवाइस लगाने के आदेश से ड्राइवरों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। कई जगह पहले से लगे डिवाइस हटाकर नए लगाने को कहा जा रहा है, जिससे ड्राइवरों को करीब 12 हजार रुपये तक खर्च करना पड़ रहा है।
ड्राइवर संगठनों ने ओपन परमिट पॉलिसी के तहत ऑटो रिक्शा की संख्या बढ़ने और अवैध बाइक टैक्सियों के संचालन पर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि इससे उनकी आमदनी पर सीधा असर पड़ रहा है। साथ ही दुर्घटना की स्थिति में कई बाइक टैक्सी चालकों को बीमा का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
इस हड़ताल का असर आम लोगों पर भी पड़ सकता है। कई शहरों में कैब और बाइक टैक्सी सेवाएं सीमित हो गई हैं। ड्राइवर संगठनों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार और कंपनियां ध्यान नहीं देंगी, तब तक वे ऐसे आंदोलन जारी रखेंगे। कुल मिलाकर, यह हड़ताल ड्राइवरों की कमाई, सुरक्षा और अधिकारों को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।
वह संख्या नोटिस बोर्ड पर किसी क्रूर टाइपो की तरह घूर रही थी।
करीब 5,100 अभ्यर्थियों में से केवल 39 ही हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) द्वारा आयोजित पीजीटी (कंप्यूटर साइंस) की लिखित परीक्षा में सफल हो पाए।
इस आंकड़े के पीछे एक और गहरी चोट छिपी थी—1,711 विज्ञापित पदों में से 1,672 पद खाली रह गए।
अभ्यर्थियों ने बार-बार गिनती की, सिर्फ यह सुनिश्चित करने के लिए कि वे गलत नहीं देख रहे। वे हाल के वर्षों में यही करते आए हैं—अंक गिनना, प्रयास गिनना, और उम्र के साल गिनना। सभी अभ्यर्थी HTET-योग्य थे, यानी कागज़ों पर वे पढ़ाने के लिए पूरी तरह पात्र थे। वे उसी हरियाणा से थे जो UPSC टॉपर्स, NET क्वालिफाइड अभ्यर्थियों और IIT व केंद्रीय विश्वविद्यालयों में कार्यरत शोधकर्ताओं पर गर्व करता है।
लेकिन अपने ही राज्य की इस भर्ती परीक्षा में 35 प्रतिशत अंक हासिल करना भी असंभव हो गया।
आयोग का कहना था कि परीक्षा “कठिन” थी। अभ्यर्थियों का कहना था कि परीक्षा “फेल करने के लिए बनाई गई” थी।
यह कोई एकमात्र घटना नहीं थी।
सहायक प्राध्यापक (कॉलेज कैडर) भर्ती में भी यही पैटर्न पहले ही सामने आ चुका था—एक ऐसी चेतावनी, जिस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।
15 दिसंबर 2025 को अर्थशास्त्र विषय के परिणाम घोषित हुए:
43 पद विज्ञापित
24 अभ्यर्थी योग्य घोषित
अंततः 21 की सिफारिश
दर्शनशास्त्र में:
3 पद
2 अभ्यर्थी सफल
मास कम्युनिकेशन में:
8 पद
7 अभ्यर्थी सफल
डिफेंस स्टडीज़ में:
23 पद
सिर्फ 5 अभ्यर्थी सफल
और फिर आया अंग्रेज़ी विषय, जिसमें सबसे अधिक पद थे:
613 पद विज्ञापित
केवल 145 अभ्यर्थी सफल
आरक्षित वर्गों के अभ्यर्थी भी, जिनके लिए संवैधानिक संरक्षण मौजूद है, वही 35 प्रतिशत कट-ऑफ पार नहीं कर सके। यह परीक्षा भेदभाव नहीं करती—यह सिर्फ बाहर कर देती है।
विपक्षी दलों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल उठाए। अभ्यर्थियों ने कोचिंग संस्थानों, व्हाट्सऐप ग्रुप्स, चाय की दुकानों और धरना स्थलों पर। सवाल एक ही था—जब हरियाणा के युवा UPSC, NET और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं पास कर सकते हैं, तो अपनी ही राज्य सेवा आयोग की परीक्षा में इतनी बड़ी संख्या में क्यों फेल हो रहे हैं?
आयोग के जवाब तकनीकी थे। अभ्यर्थियों की हकीकत भावनात्मक थी।
तैयारी के साल। कर्ज़। टाले गए रोजगार। परिवारों को दिलासा—“बस एक और परीक्षा।”
और फिर आया वह परिणाम, जो मूल्यांकन से ज़्यादा मिटा दिए जाने जैसा लगा।
आंकड़ों के लिहाज़ से, 99.2 प्रतिशत अभ्यर्थियों ने वही किया जो अधिकांश ने किया—असफल हुए। लेकिन वे जानते थे कि यह असफलता व्यक्तिगत नहीं थी।
यह संरचनात्मक थी। यह गणितीय थी। और यह बार-बार दोहराई जा रही थी—हर नई भर्ती के साथ।
हरियाणा में पद खाली हैं। कक्षाएं इंतज़ार कर रही हैं। और योग्य, तैयार, थके हुए युवा बाहर खड़े हैं—यह सोचते हुए कि 35 प्रतिशत कैसे एक असंभव सपना बन गया।
HPSC के इतिहास में पहली बार, आयोग ने चल रही भर्ती प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही पीजीटी कंप्यूटर साइंस के पदों को दोबारा विज्ञापित कर दिया।
HPSC के सचिव मुकेश आहूजा, IAS ने कहा: “पीजीटी कंप्यूटर साइंस का परिणाम 5 फरवरी को घोषित किया गया, जिसमें केवल 39 अभ्यर्थी 35 प्रतिशत से अधिक अंक ला सके। विचार-विमर्श के बाद आयोग ने 1,672 पदों को दोबारा विज्ञापित करने का निर्णय लिया, ताकि मूल रूप से विज्ञापित 1,711 पदों के लिए संस्तुति दी जा सके।”
देश में टैक्सी सेवाओं के क्षेत्र में एक नई पहल की शुरुआत हो गई है। गुरुवार को सरकार ने सहकारिता आधारित राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म ‘भारत टैक्सी’ को आधिकारिक रूप से लॉन्च किया। इस मौके पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने इसे टैक्सी चालकों के लिए आत्मनिर्भरता और सम्मान की दिशा में बड़ा कदम बताया।
कार्यक्रम से पहले अमित शाह ने सोशल मीडिया पर कहा कि यह योजना सहकारिता की ताकत को दिखाती है। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे संसाधनों को जोड़कर बड़ी व्यवस्था खड़ी की जा सकती है और ‘भारत टैक्सी’ इसका उदाहरण है। इस प्लेटफॉर्म से चालक न केवल बेहतर कमाई कर सकेंगे, बल्कि वे इसके मालिक भी होंगे, जिससे उन्हें सम्मान और सुरक्षा दोनों मिलेगी।
सहकारिता मॉडल पर आधारित प्लेटफॉर्म
सहकारिता मंत्रालय के अनुसार, ‘भारत टैक्सी’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सहकार से समृद्धि” विजन का हिस्सा है। यह प्लेटफॉर्म पूरी तरह ड्राइवर-केंद्रित होगा, जिसमें कोई भारी कमीशन नहीं लिया जाएगा। इसका उद्देश्य निजी और विदेशी एग्रीगेटर कंपनियों के विकल्प के रूप में एक स्वदेशी व्यवस्था तैयार करना है।
लॉन्च कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले छह सारथियों को सम्मानित किया गया। उन्हें शेयर प्रमाणपत्र दिए गए और साथ ही 5 लाख रुपये का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा तथा 5 लाख रुपये का पारिवारिक स्वास्थ्य बीमा प्रदान किया गया। यह कदम ड्राइवरों की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उठाया गया है।
सरकारी जानकारी के अनुसार ‘भारत टैक्सी’ में डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए बुकिंग, सुरक्षा और सेवा की निगरानी की जाएगी। दिल्ली में सात प्रमुख स्थानों पर सहायता केंद्र शुरू किए गए हैं, जहां ड्राइवरों को तकनीकी और प्रशासनिक मदद मिलेगी। महिला सशक्तिकरण के लिए ‘बाइक दीदी’ योजना के तहत बड़ी संख्या में महिलाएं भी इस सेवा से जुड़ चुकी हैं।
अब तक करीब चार लाख ड्राइवर इस प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं और दस लाख से अधिक यूजर रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। लगभग 10 करोड़ रुपये की राशि सीधे ड्राइवरों को वितरित की जा चुकी है।
स्वदेशी विकल्प की ओर बड़ा कदम
‘भारत टैक्सी’ को देश का पहला और सबसे बड़ा सहकारिता आधारित राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म बताया जा रहा है। सरकार का मानना है कि यह पहल टैक्सी सेवाओं में पारदर्शिता लाएगी और ड्राइवरों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाएगी।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से चंडीगढ़ स्थित उनके आवास ‘संत कबीर कुटीर’ पर कनाडा के अल्बर्टा प्रांत की स्वदेशी संबंध मंत्री राजन साहनी के नेतृत्व में आए उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल से भेंट की। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच निवेश, नवाचार, शिक्षा, कौशल विकास और आर्थिक सहयोग को मजबूत बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि हरियाणा वैश्विक सहयोगों के लिए हमेशा तैयार है, जिससे प्रदेश में कौशल वृद्धि, नवाचार और आर्थिक विकास को गति मिले। उन्होंने बताया कि हरियाणा के बड़ी संख्या में छात्र कनाडा में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जिससे शैक्षणिक सहयोग दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र बन गया है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि हरियाणा सरकार द्विपक्षीय सहयोग, शैक्षणिक आदान-प्रदान और आर्थिक साझेदारी को बढ़ावा देने वाले सभी विषयों को अपना पूरा समर्थन प्रदान करेगी। हरियाणा का विदेश सहयोग विभाग अंतरराष्ट्रीय संबंधों, नवाचार और विदेशी निवेश जैसे क्षेत्रों पर लगातार कार्य कर रहा है।
बैठक के दौरान उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विशेष चर्चा हुई। इस दौरान हरियाणा में कनाडा विश्वविद्यालय के परिसर बनाने पर विचार—विमर्श किया गया।
कनाडा के अल्बर्टा प्रांत की स्वदेशी संबंध मंत्री राजन साहनी ने हरियाणा के औद्योगिक विकास, नवाचार और मानव संसाधन विकास से जुड़ी नीतियों की सराहना की।
बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने अल्बर्टा के उन्नत कौशल विकास तंत्र और शिक्षा एवं रोजगार के संबंध में चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी, जिसमें मुख्य रूप से कौशल प्रशिक्षण, व्यावसायिक शिक्षा और उद्योग आधारित कार्यक्रमों में साझेदारी पर भी मंथन हुआ ताकि हरियाणा के युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सके।
इसके साथ—साथ प्रतिनिधिमंडल ने ऊर्जा, फूड प्रोसेसिंग, कृषि, लॉजिस्टिक्स और मुक्त व्यापार जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार सांझा किए। मुख्यमंत्री ने हरियाणा की नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि आधारित उद्योगों और आपूर्ति श्रृंखला अवसंरचना में बढ़ती क्षमताओं के मद्देनजर तकनीकी आदान-प्रदान, निवेश जैसे मुद्दों पर विशेष जोर दिया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर, विदेश सहयोग विभाग की प्रधान सचिव अमनीत पी. कुमार, सूचना, जनसंपर्क, भाषा एवं संस्कृति विभाग के महानिदेशक के. मकरंद पांडुरंग, विदेश सहयोग विभाग के सलाहकार पवन चौधरी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
कैंसर को प्रायः ऐसे रोग के रूप में देखा गया है जो आमतौर से अधिक उम्र के लोगों को अपना शिकार बनाता है। लेकिन अब यह ऐसा दुश्मन बन चुका है जिसके लिए उम्र का कोई बंधन नहीं रह गया है। JAMA नेटवर्क ओपन द्वारा प्रकाशित एक अध्ययन से इस चिंताजनक तथ्य का खुलासा हुआ है कि कैंसर अब युवा वयस्कों (यंग एडल्ट्स) में भी बढ़ रहा है। उल्लेखनीय है कि कैंसर रोग की मौजूदा दर 50 वर्ष से कम उम्र के लोगों में अब तक सर्वाधिक पायी गई है।
इस चिंताजनक रुझान के बारे में जागरुकता बढ़ाने और शीघ्र निदान के महत्व को रेखांकित करने के लिए, फोर्टिस हॉस्पीटल ग्रेटर नोएडा ने आज एक संवाददाता सम्मेलन का आयोजन किया, जिसमें डॉक्टरों ने युवाओं में बढ़ रहे कैंसर के मामलों की ओर ध्यान खींचा। साथ ही, उन्होंने दुर्लभकिस्म के, जीवनघाती कैंसर रोगों से ग्रस्त ऐसे दो युवा मरीजों के बारे में भी जानकारी दी जिनका अस्पताल में सफल उपचार किया गया।
मीडिया को संबोधित करते हुए, डॉक्टरों ने समय पर डायग्नॉसिस, और साक्ष्य-आधारित उपचार पर जोर देते हुए कहा कि ऐसा करने से परिणामों पर काफी सकारात्मक असर पड़ता है, यहां तक की एडवांस स्टेज के कैंसर होने पर भी अच्छे नतीजे मिल सकते हैं, और युवा मरीजों को एक बार फिर अपने हेल्थी, प्रोडक्टिव जीवन में वापसी करने का अवसर मिलता है।
दुर्लभ किस्म के कैंसर रोगों से पीड़ित दो युवा कैंसर मरीजों का फोर्टिस ग्रेटर नोएडा में सफल उपचार
*20-वर्षीय राहुल को जब फोर्टिस येटर नोएडा लाया गया तो वह लगातार गर्दन में सूजन, बुखार और उल्टी की परेशानी से जूझ रहे थे। विस्तृत जांच, जिसमें इमेजिंग और बायोप्सी शामिल है, में स्टेज 3 के हॉज़किन लिंफोमा (लिंफेटिक सिस्टम का कैंसर) की पुष्टि हुई। मरीज को जब अस्पताल में भर्ती किया गया था तो उनके जीवित रहने की संभावना 30% से भी कम थी। मरीज को एक्सपर्ट सुपरविजन में कीमोथेरेपी दी गई। फॉलो-अप पैट-सीटी स्कैन्स से पता चला कि वह पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं, जो इसका बात का इशारा था कि उपचार को लेकर उनके शरीर ने अच्छा रिस्पॉन्स दिया। मरीज को अभी भी प्लान्ड कीमोथेरेपी दी जाती है और फिलहाल उनकी हालत स्थिर है। यदि समय पर उनका डायग्नोसिस नहीं होता या उपचार शुरू नहीं किया जाता, तो वह एक वर्ष से अधिक जीवित नहीं रहते।
*एक अन्य मामला 24-वर्षीय सुमित कुमार का है जिन्हें लगातार बुखार और पेट में बेचैनी की शिकायत थी। फोर्टिस ग्रेटर नोएडा में भर्ती के बाद उनकी जांच में ब्लड काउंट काफी बढ़ा हुआ पाया गया। बोन मैरो एस्पीरेशन और बायोप्सी में क्रोनिक माइलॉयड ल्यूकीमिया (बोन मैरो का कैंसर) की पुष्टि हुई और अस्पताल में भर्ती के समय उनके जीवित रहने की संभावना 30% से कम थी। मरीज को तत्काल टारगेटेड ओरल थेरेपी दी गई, जिसके बाद उनके ब्लड काउंट सामान्य हो गए, और उन्हें गहन चिकित्सा की आवश्यकता नहीं पड़ी। धीरे-धीरे उनकी कंडीशन में सुधार होने लगा और स्थिर होने पर उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। यदि समय पर मरीज का इलाज नहीं किया जाता, तो वह छह महीने से अधिक जीवित नहीं रह पाते।
डॉ प्रभात रंजन, कंसल्टेंट मेडिकल ऑकोलॉजी, फोर्टिस हॉस्पीटल ग्रेटर नोएडा ने कहा, “पिछले कुछ वर्षों में, यह देखने में आया है कि युवाओं में कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। ब्लड कैंसर की स्थिति में अक्सर कुछ अस्पष्ट लक्षण जैसे बुखार, सूजन, या थकान की शिकायत होती है, जिसे आसानी से नज़रंदाज किया जा सकता है। इन मामलों ने एक बार फिर जल्द से जल्द जांच और साक्ष्य-आधारित उपचारा शुरू करने के महत्व पर जोर दिया है जो बेहतरीन परिणाम दिला सकते हैं, और यहां तक कि एडवांस स्टेज में भी ऐसा मुमकिन हो सकता है।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि स्पेशल ओलंपिक में शामिल होने वाले खिलाड़ी चुनौतियों को पार करते हुए यह संदेश दे रहे है कि यदि अवसर, प्रशिक्षण और विश्वास मिले, तो हर व्यक्ति असाधारण बन सकता है।
मुख्यमंत्री मंगलवार को रोहतक के महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में स्पेशल ओलंपिक भारत राष्ट्रीय एथलेटिक्स चैम्पियनशिप के शुभारंभ पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस चैम्पियनशिप में 26 राज्यों से 500 से अधिक खिलाड़ी, उनके कोच और सहयोगी भाग ले रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने इस दौरान घोषणा की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुगम्य भारत की सोच का अनुसरण करते हुए दिव्यांग खिलाड़ियों की सुविधा के लिए प्रदेश में एक दिव्यांग स्टेडियम बनाया जाएगा। इस स्टेडियम में दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए आवासीय सुविधा भी होगी। वहीं, मुख्यमंत्री ने स्पेशल ओलंपिक भारत को 31 लाख रुपये तथा खेल राज्य मंत्री श्री गौरव गौतम ने 21 लाख रुपये अनुदान देने की घोषणा भी की।
इससे पहले मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू), रोहतक के अभिलाषा कन्या छात्रावास परिसर में गर्ल्स स्पोर्ट्स हॉस्टल के निर्माण का शिलान्यास भी किया। इस गर्ल्स स्पोर्ट्स हॉस्टल की क्षमता 150 छात्राओं की होगी। इस बहुमंजिला (ग्राउंड प्लस तीन) संरचना का कुल कवर एरिया लगभग 2374 वर्ग मीटर निर्धारित किया गया है, जिस पर करीब पांच करोड़ रुपये की लागत आएगी।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि स्पेशल ओलंपिक की विशेषता यही है कि यह हमें खेल को केवल पदक और प्रतिस्पर्धा की दृष्टि से नहीं, बल्कि मानव आत्मा की शक्ति और संभावनाओं के रूप में देखने की दृष्टि देता है। इस ओलंपिक में मैदान पर दौड़ते, कूदते और जीत के लिए संघर्ष करते खिलाड़ी हमें यह सिखाते हैं कि सीमाएं शरीर की नहीं होती है, बल्कि सोच में होती है। इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता के साथ-साथ स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिविर, यूथ एक्टिवेशन कार्यक्रम और एथलीट लीडरशिप ट्रेनिंग जैसी पहलें की जा रही हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से खिलाड़ियों के शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक सशक्तिकरण और नेतृत्व क्षमता का भी विकास किया जाता है। यही सच्चा समावेशन है, जहां खिलाड़ी केवल पदक विजेता नहीं, बल्कि समाज के सक्रिय नागरिक, प्रेरणास्रोत और रोल मॉडल बनते हैं।
उन्होंने कहा कि अक्सर देखने में आता है कि समाज में पैरालंपिक और स्पेशल ओलंपिक को एक-दूसरे का पर्याय मान लिया जाता है। वास्तव में दोनों अलग-अलग हैं, लेकिन समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। पैरालंपिक शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ियों के लिए आयोजित किए जाते हैं। जबकि,स्पेशल ओलंपिक बौद्धिक एवं विकासात्मक दिव्यांगता वाले व्यक्तियों के लिए एक वैश्विक आंदोलन है। स्पेशल ओलंपिक केवल प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें प्रशिक्षण, सहभागिता, आत्मविश्वास और आजीवन विकास को समान महत्व दिया जाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘स्पेशल ओलंपिक भारत’ केंद्र सरकार के युवा मामले और खेल मंत्रालय से मान्यता प्राप्त है। यह हमारे देश की उस समावेशी खेल नीति का सशक्त प्रमाण है, जो हर नागरिक को उसकी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने का अवसर देने में विश्वास रखती है। इटली में आयोजित स्पेशल ओलंपिक्स वर्ल्ड विंटर गेम्स में भारत के 49 सदस्यों के दल ने भाग लिया, इसमें 28 खिलाड़ियों ने 33 पदक जीतकर पूरे देश को गौरवान्वित किया। ये पदक खिलाड़ियों के संघर्ष, अनुशासन और आत्मविश्वास की कहानी हैं।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा खेलों का पावर हाउस है। यह गर्व की बात है कि इस भूमि ने देश को अनेक ओलंपियन और विश्व-विजेता चैंपियन दिए हैं। उन्होंने इस दौरान कार्यक्रम में मौजूद हरियाणा के स्पेशल ओलंपिक खिलाड़ी केशव का जिक्र करते हुए उनकी उपलब्धियों की तारीफ की।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में हम विकसित भारत और समावेशी भारत की ओर गति से बढ़ रहे हैं। ऐसे समय में स्पेशल ओलंपिक जैसे आयोजन हमें याद दिलाते हैं कि विकास का असली मापदंड यही है कि समाज का सबसे कमजोर व्यक्ति कितना सशक्त महसूस करता है।
हरियाणा में दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण, खेलों के विकास और समावेशी नीतियों के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहे हैं। खेल इन्फ्रास्ट्रक्चर का विस्तार, खिलाड़ियों के लिए वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण सुविधाएं और समान अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने पूरे राज्य में खेल सुविधाएं विकसित करने पर पिछले 11 सालों में 989 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। खेल विभाग का बजट भी बढ़ाकर दोगुणे से ज्यादा कर दिया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014-15 में यह 275 करोड़ रुपये था। बीजेपी सरकार ने इसे बढ़ाकर चालू वित्त वर्ष में 602 करोड़ 18 लाख रुपये का प्रावधान किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ओलंपिक, पैरालंपिक व अन्य अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ियों को 6 करोड़ रुपये तक के नकद पुरस्कार दे रही हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने राई जिला सोनीपत में खेल विश्वविद्यालय की स्थापना की है। वर्तमान में राज्य में 3 राज्य स्तरीय खेल परिसर, 21 जिला स्तरीय खेल स्टेडियम, 25 उपमंडल स्टेडियम, 163 राजीव गांधी ग्रामीण खेल परिसर, 245 ग्रामीण स्टेडियम तथा गांवों में 382 इनडोर जिम उपलब्ध हैं। इनके अलावा, 10 स्विमिंग पूल, 11 सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक, 14 हॉकी एस्ट्रोटर्फ, 2 फुटबॉल सिंथेटिक सतह और 9 बहुउद्देशीय हॉल भी बनाए गए हैं। साथ ही प्रदेश के 16 जिलों में जिला खेल एवं युवा कार्यक्रम अधिकारी के कार्यालय में सुविधा केन्द्रों का निर्माण 3 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार खिलाड़ियों को खेल उपकरण भी उपलब्ध करवा रही हैं। इसके लिए हरियाणा खेल उपकरण प्रावधान योजना बनाई है। इसके तहत 15 हजार 634 खिलाड़ियों को उपकरण प्रदान किये जा चुके हैं। प्रदेश में वर्तमान में 1 हजार 472 खेल नर्सरियां संचालित हैं। इनमें 37 हजार से अधिक बच्चे नियमित प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इन नर्सरियों में 8 से 14 वर्ष के खिलाड़ियों को 1500 रुपये तथा 15 से 19 वर्ष के खिलाड़ियों को 2 हजार रुपये प्रतिमाह की वित्तीय सहायता दी जाती है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों के सुरक्षित भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने ‘हरियाणा उत्कृष्ट खिलाड़ी सेवा नियम 2021’ लागू किए हैं। इनके तहत खेल विभाग में 550 नए पद सृजित किए गए हैं और 231 खिलाड़ियों को सरकारी नौकरियां दी गई हैं। साथ ही खिलाड़ियों के लिए ताऊ देवी लाल खेल परिसर पंचकुला में रिहैबिलिटेशन सेंटर शुरू किया गया है।
प्रदेश के खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम ने कहा कि गुरूग्राम के दौलताबाद में दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए खेल सुविधाएं विकसित की जा रही है। इसके साथ ही प्रदेश में उत्तर भारत का मॉडल खेल केन्द्र भी बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह चैम्पियनशिप समावेशी भारत व मानवीय मूल्यों का उत्सव है। इससे इन विशेष खिलाडिय़ों में आत्मविश्वास उत्पन्न होगा तथा वे आत्मनिर्भर बनकर देश की मुख्यधारा में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केन्द्रीय वित्त मंत्री ने खेलों के बजट में 33 प्रतिशत की वृद्धि की है।
राज्य मंत्री गौरव गौतम ने कहा कि प्रदेश के खिलाड़ियों में राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक तिहाई पदक प्राप्त कर प्रदेश व देश का नाम रोशन किया है। प्रदेश सरकार द्वारा ओलंपिक खेलों में पदक प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों को 6 करोड़ रुपए स्वर्ण पदक, 4 करोड़ रुपए रजत पदक तथा 2.5 करोड़ रुपए कांस्य पदक विजेताओं को नकद प्रदान किए जाते हैं। सरकार द्वारा खिलाड़ियों के भविष्य को उज्जवल बनाने के लिए ग्रुप ए से डी तक खिलाड़ियों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण का प्रावधान किया गया है। स्थानीय महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में तीन उत्कृष्ट खेल केंद्र खोले गए हैं।
स्पेशल ओलंपिक भारत की अध्यक्षा डॉ.मल्लिका नड्डा ने कहा कि खेलों के क्षेत्र में हरियाणा प्रदेश अग्रणी भूमिका निभा रहा है। हरियाणा के खिलाड़ी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश व देश का नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खेल केन्द्र विकसित किए जा रहे हैं। सरकार द्वारा खिलाडिय़ों को नकद पुरस्कार व सरकारी नौकरी दी जा रही है। डॉ. मल्लिका नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्रीय वित्त मंत्री द्वारा पेश किए गए बजट में खेलों के बजट को बढ़ाया गया है। यह प्रधानमंत्री की दिव्यांगों के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है। केन्द्र सरकार द्वारा विशेष खिलाड़ियों को पदक प्राप्त करने पर नकद राशि से पुरस्कृत किया जाता है। उन्होंने कहा कि इन खेलों का मुख्य उद्देश्य खिलाड़ियों को मुख्यधारा में जोड़ना है ताकि वे विकसित भारत में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सके। उन्होंने कहा कि समग्र शिक्षा के माध्यम से दिव्यांग खिलाडिय़ों को अवसर देने के लिए सरकार कार्य कर रही है। इस प्रतियोगिता का स्लोगन “क्रांति,खेलों से है” ताकि खेलों के माध्यम से इन विशेष खिलाडिय़ों को मुख्यधारा के साथ जोड़ा जा सके।
इस अवसर पर भाजपा के राष्ट्रीय सचिव व पूर्व मंत्री ओमप्रकाश धनखड़, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल कौशिक, पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर, मेयर रामअवतार वाल्मीकि, महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो राजबीर सिंह, डीएलसी सुपवा के कुलगुरू डॉ. अमित आर्य, एसजीटी यूनिवर्सिटी के कुलगुरू डॉ. हेमंत वर्मा सहित गणमान्य मौजूद रहे।
देश के अनेक शहरों में स्थापित वहां के नगर निगमों में व्याप्त भ्रष्टाचार की शिकायतों के बारे में हम अक्सर सुनते रहते हैं। तहलका को आगरा नगर निगम में हो रहे भ्रष्टाचार की पड़ताल करने को तहलका एसआईटी ने आगरा नगर निगम का रुख किया और वहां व्याप्त भ्रष्टाचार की गोपनीय जानकारी इकट्ठी की। तहलका एसआईटी के पत्रकार ने अपनी पड़ताल के दौरान आगरा नगर निगम में मृत्यु प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र और अनुपलब्ध जन्म प्रमाण पत्र (एनएबीसी) जारी करने के एवज में दलालों और आउटसोर्स कर्मचारियों को खुलेआम रिश्वत मांगते हुए अपने खुफिया कैमरे में कैद किया। तहलकाएसआईटी की रिपोर्ट :-
2020 में स्मार्ट सिटी परियोजना से जुड़े आगरा नगर निगम के अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों वाला एक गुमनाम पत्र शहर में सनसनी मचा गया था। यह पत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित करके लिखा गया था। 2024 में एक ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी, जिसमें कथित तौर पर एक निगम अधिकारी को दो लाख रुपये की रिश्वत मांगते हुए सुना जा सकता है। इससे पहले 2020 में निगम के कचरा संग्रहण कार्य में 2.82 करोड़ रुपए का भ्रष्टाचार सामने आया था, जिसमें काम आवंटित एजेंसी ने मकान मालिकों से रुपए तो एकत्र किए, लेकिन ये रुपए निगम के खाते में जमा नहीं किए। साल 2023 में एक आरोप लगा था कि एक निगम कर्मचारी ने एक व्यक्ति से उसकी मां की मृत्यु के बाद उसके नाम पर घर का स्वामित्व हस्तांतरित करने के लिए 25,000 रुपए की रिश्वत की मांग की थी। 2025 में शहर के मेयर ने निगम के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए, जिसमें आरोप लगाया गया कि निविदा प्रक्रिया का पालन किए बिना एक फर्म को अनुबंध आवंटित किया गया था। साल 2022 में निगम के एक आउटसोर्स कर्मचारी को भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद बर्खास्त कर दिया गया था, क्योंकि यह पाया गया था कि उसने आठ साल की सेवा के दौरान करोड़ों रुपए की संपत्ति अर्जित कर ली थी, जबकि उसे प्रति माह केवल 5,000 रुपए वेतन मिलता था। भ्रष्टाचार के मामलों की सूची लंबी है, ये उत्तर प्रदेश के आगरा नगर निगम से जुड़े कुछ उदाहरण मात्र हैं। कई मामले सामने आने और उनमें से कुछ में कार्रवाई होने के बावजूद आगरा नगर निगम में भ्रष्टाचार कथित तौर पर बेरोकटोक जारी है। आगरा नगर निगम में भ्रष्टाचार का पैमाना इस बात से समझा जा सकता है कि महात्मा गांधी रोड (एम.जी. रोड), आगरा स्थित निगम परिसर में कोई भी व्यक्ति किसी भी काम से प्रवेश करते ही दलालों द्वारा उसका स्वागत किया जाता है, जो पैसे के बदले काम करवाने के लिए तरह-तरह के प्रस्ताव पेश करते हैं। ये दलाल आगरा नगर निगम में संविदात्मक या आउटसोर्स कर्मचारी के रूप में काम करते हैं। सूत्रों के अनुसार, निगम की मुख्य इमारत में दो कमरे हैं- कमरा नंबर-101 और कमरा नंबर-103, जो कथित भ्रष्ट आचरण के लिए कुख्यात हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार, सभी दलाल, जिनमें कुछ ऐसे भी हैं, जो अपनी निजी क्षमता में काम करते हैं; इन कमरों में बैठकर उन ग्राहकों का इंतजार करते हैं, जो विभिन्न कार्यों के लिए निगम से संपर्क करते हैं। ऐसी खबरें हैं कि निगम के कुछ सेवानिवृत्त कर्मचारी भी अब दलाल बन गए हैं। वे प्रतिदिन निगम कार्यालय आते हैं और कमरा नंबर-101 या कमरा नंबर-103 में बैठते हैं। ये सब उन लोगों का इंतजार करते हैं, जो अपने महत्वपूर्ण दस्तावेज बनवाने के लिए नगर निगम में आते हैं। हालांकि ये दलाल तब इन कमरों से गायब हो जाते हैं, जब वरिष्ठ अधिकारी निरीक्षण के लिए आते हैं। सूत्रों के अनुसार, ऐसे उदाहरण सामने आए हैं, जहां दलालों ने ग्राहकों से पैसे लेकर काम करने के वादे किए, लेकिन काम कभी पूरा नहीं किया। ‘मुझे उम्मीद है कि आप मेरा स्टिंग ऑपरेशन नहीं कर रहे हैं, न ही मेरी रिकॉर्डिंग कर रहे हैं। मुझे इन सब चीजों से डर लगता है। यदि आप अमेरिका या लंदन जा रहे हैं, तो आपको अनुपलब्ध जन्म प्रमाण पत्र यानी नॉन-अवेलेबिलिटी बर्थ सर्टिफिकेट (एनएबीसी) की आवश्यकता होगी। यह प्रमाण पत्र तब आवश्यक होता है, जब आपके पास आपका मूल जन्म प्रमाण पत्र न हो। मैं आगरा नगर निगम से आपका एनएबीसी एक सप्ताह में या एक-दो दिन में या यहाँ तक कि एक घंटे में भी बनवा दूंगा। आमतौर पर कंपनी को एनएबीसी तैयार करने में एक महीना लगता है, लेकिन मैं पैसे के बदले इसे तुरंत तैयार कर दूंगा। यह एनएबीसी आपके जन्म प्रमाण पत्र के विकल्प के रूप में काम करेगा।’ -आगरा नगर निगम के आउटसोर्स कर्मचारी राम चौबे उर्फ ऋषभ शर्मा ने उससे ग्राहक बनकर मिले तहलका के खुफिया रिपोर्टर से कहा। ‘मैं इस बात से सहमत हूं कि आपके माता-पिता के मृत्यु प्रमाण पत्रों को दोबारा जारी करना आपका वास्तविक कार्य है, जिसके लिए कोई रिश्वत नहीं ली जानी चाहिए थी। लेकिन अगर आप रिश्वत नहीं देंगे, तो आपके काम में समय लगेगा। इसके अलावा दो मृत्यु प्रमाण पत्रों को दोबारा जारी करने के लिए सभी रिकॉर्ड की जांच करना एक कष्टदायक काम है, इसलिए मैंने आपसे इसी के लिए पैसे लिए हैं।’ -ऋषभ ने आगे कहा। ‘मैं किसी जाति या धर्म में विश्वास नहीं करता, लेकिन इस सरकारी व्यवस्था में मुसलमानों के लिए हालात खराब हैं। यदि आप अपने लिए नया जन्म प्रमाण पत्र बनवाने जाते हैं, तो आपकी फाइल उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) के पास जाएगी, जो आपको बुलाकर कई सवाल पूछेंगे। हालांकि नए जन्म प्रमाण पत्र बनवाने वाले हिंदुओं के मामले में ऐसा नहीं है; उनसे केवल कुछ ही प्रश्न पूछे जाते हैं।’ -ऋषभ ने तहलका रिपोर्टर से कहा। ‘मैं पिछले एक साल से रिश्वत के जरिए पैसे कमा रहा हूं। पहले मैं केवल 5,000-6,000 रुपए के वेतन पर ही गुजारा कर रहा था। अब रिश्वत के जरिए मैं हर महीने करीब 30,000 से 40,000 रुपए कमा रहा हूं। मेरे पास बहुत सारे ग्राहक हैं, जो काम करवाने के लिए मेरे पास आते हैं। कई लोगों के पास मेरा फोन नंबर है।’ -ऋषभ ने कहा। ‘मैं आपका एनएबीसी 15 दिनों में बनवा दूंगा। आम तौर पर निगम एक महीने में एक एनएबीसी जारी करता है, लेकिन मैं आपसे रिश्वत केवल आपके काम में तेजी लाने के लिए ही ले रहा हूं।’ -आगरा नगर निगम के एक अन्य आउटसोर्स कर्मचारी बॉबी ने तहलका रिपोर्टर से कहा। ‘मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए मुझे रिश्वत के तौर पर 8,000 रुपए चाहिए, क्योंकि मुझे निगम में दूसरों को भी यह रकम देनी पड़ती है। एनएबीसी के लिए मैं आपसे 5,000 रुपए लूंगा और बनवा दूंगा।’ -बॉबी ने कहा। ‘जाकर आगरा नगर निगम के किसी भी कर्मचारी से मिलो। वह तुम्हारा काम मुझसे रिश्वत के तौर पर ली जा रही रकम से कम में नहीं करेगा। इसमें से सिर्फ 400-500 रुपए ही मेरी जेब में जाएंगे। आपको आश्वस्त करने के लिए मैं बताना चाहूंगा कि मैंने तीन या चार महीने पहले एक एनएबीसी करवाया था।’ -आगरा नगर निगम के एक अन्य दलाल श्याम ने तहलका रिपोर्टर से कहा। तहलका रिपोर्टर ने आगरा नगर निगम के कर्मचारियों के खिलाफ लोगों द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों की पड़ताल करने के लिए जनहित में आगरा की यात्रा की। निगम में तहलका रिपोर्टर की मुलाकात आउटसोर्स कर्मचारी राम चौबे से हुई, जो ऋषभ शर्मा के नाम से वहां जाने जाते हैं। पत्रकार और ऋषभ शर्मा की यह बैठक आगरा के संजय प्लेस स्थित एक चाय की दुकान पर आयोजित हुई। ऋषभ ने तहलका रिपोर्टर के माता-पिता के दो मृत्यु प्रमाण पत्र दोबारा जारी किए, जो एक वास्तविक कार्य है, जिसके लिए किसी प्रकार के धन की आवश्यकता नहीं होती है। हालांकि ऋषभ ने पत्रकार से 5,000 रुपए रिश्वत के तौर पर लिए और कहा कि रिश्वत के बिना काम में बहुत समय लग जाता। ऋषभ ने यह भी कहा कि चूंकि उन्होंने माता-पिता के रिकॉर्ड का पता लगाने के लिए काफी प्रयास किए हैं, इसलिए उन्हें इनाम भी मिलना चाहिए।
रिपोर्टर : जो मैंने पैसे भेजे थे, तीन हजार मैंने भेज दिए, दो हजार रह गए थे। टोटल 5,000 का खर्चा था डेथ सर्टिफिकेट के लिए मम्मी-पापा का। तो डेथ सर्टिफिकेट वैसे नहीं मिलते?
ऋषभ : मतलब?
रिपोर्टर : मतलब, नॉर्मल तरीके से, बिना खर्चा किए नहीं बनता?
ऋषभ : बनता है, पर उसमें टाइम लगता है।
ऋषभ (आगे) : बन जाता है, लेकिन सारे डॉक्यूमेंट्स आपके पास हों, मैं बताऊं पहले जो चलते थे हाथ के बने हुए, मतलब पेन से बने होते थे। उसमें सारी डिटेल होती थी। मेहनत नहीं करनी पड़ती है, रजिस्टर नहीं खोलने पड़ते, उसमें साफ लिखा होता है कितने नंबर का कितना, इस वाले वार्ड में ये है, तुरंत निकाल के हाल की हाल हो जाता था। फिर उसमें एक महीना लगता है। अब जिसका कोई एंट्री नहीं है, उसे खोजने में तो मेहनत लगती है।
पैसे लेकर रिपोर्टर के माता-पिता के मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के बाद ऋषभ ने तहलका रिपोर्टर को सलाह दी कि वह (रिपोर्टर) आगरा में अपना जन्म प्रमाण पत्र कैसे बनवा सकते हैं। हालांकि ऋषभ ने कहा कि यह एक कठिन काम है। ऋषभ ने जन्म प्रमाण पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया और इसके लिए भी पत्रकार से रिश्वत के रूप में पैसे की मांग की। रिपोर्टर : अच्छा अब बताओ मेरा बर्थ सर्टिफिकेट कैसे बनेगा?
ऋषभ : आपके बर्थ सर्टिफिकेट की कोई एंट्री नहीं है। रिपोर्टर : देख लिया आपने? ऋषभ : हां, मैंने बहुत देखा, सारे रजिस्टर छान मारे एक महीने से तुम्हारे माता जी-पिता जी के सर्टिफिकेट के बाद मैंने तुम्हारा ही काम किया है।
रिपोर्टर : उस वक्त हो सकता है एंट्री न की हो।
ऋषभ : मुझे ये ही लग रहा है, और कोई तरीका नहीं। अगर होता, तो जरूर मैं आपको बताता। रिपोर्टर : अब कैसे बनेगा? ऋषभ : अब आपके मम्मी-पापा के प्रमाण पत्र हो गए हैं, तो अब आप सरकार को ये दिखा सकते हो कि हां मेरे माता-पिता यहीं पर एक्सपायर हुए हैं और ये हैं उनके दस्तावेज। दो मम्मी-पापा के प्रमाण पत्र लग जाएगा। दो पड़ोसियों के गवाहों में और फिर आधार कार्ड लगेंगे, जो आपसे उम्र में 20 साल बड़े हों। रिपोर्टर : पड़ोसी होने चाहिए? ऋषभ : हां, जब आप वहां पैदा हुए, तो सब दे देंगे। रिपोर्टर : दो के आधार चाहिए? ऋषभ : हां, और एक किसी बुजुर्ग महिला का आधार, जो ये कह सके कि हां मैंने इस बच्चे का घर में प्रसव कराया।
रिपोर्टर : मतलब दाई है? ऋषभ : दाई नहीं भी हो, कोई महिला भी हो, चलेगी। रिपोर्टर : वो कैसे कह देगी मैंने प्रसव कराया इसका? ऋषभ : वो नहीं कहेगी, उसका आधार चाहिए और एक एफिडेविट बनेगा। रिपोर्टर : एफिडेविट बनेगा? ऋषभ : एफिडेविट में लिखा होगा मैंने इस बच्चे का घर में ही प्रसव कराया। इस दौरान इस सन् (ईयर) में ये घर पर ही हुआ। ऋषभ (आगे) : ये फाइल… बालूगंज में रहते हो ना आप? ताजगंज मुगल की पुलिया पर ऑफिस है नगर निगम का, वहां पर जमा होगी। वहां से विष्णु बाबू इसको सुपरवाइजर को भेजेंगे। सुपरवाइजर वो आपकी फाइल को लेकर आएगा दोनों पड़ोसियों के साइन लेगा, चला जाएगा। फिर वो फाइल सीएमओ के पास जाएगी। विष्णु बाबू ले जाएंगे ताजगंज से सीएमओ कार्यालय, वहां साइन करा के लाएंगे। एक तारीख दे देंगे आपको, उस फाइल को आप लाकर मुझे दे देंगे। रिपोर्टर : कितना टाइम लग जाएगा पूरा प्रोसीजर के लिए? ऋषभ : कम से कम अगर एसडीएम साहिब के पास आप जाएंगे, तो गारंटी है, वो जल्दी कर देंगे। मगर अगर कोई अनपढ़ व्यक्ति जाएगा, उसे तो पागल कर देंगे घुमा देंगे। रिपोर्टर : खर्चा कितना आएगा इसमें? ऋषभ : खर्चा तो मतलब इसमें एफिडेविट बनेंगे अब माता-पिता तो हैं नहीं, तो दो एफिडेविट बनेंगे। एक आपके नाम का बन जाएगा… एसडीएम की मंगाओ, तो उसके यहां तो कुछ लगता नहीं है, वहां तो 100-50 रुपए फॉर्म के होंगे, तो यही ऊपर की इसी खर्चों में हो जाएगा कुछ।
रिपोर्टर : कितना? ऋषभ : अच्छा भागा-दौड़ी आपकी तरफ से कौन करेगा? रिपोर्टर : तुम ही करोगे। ऋषभ : अच्छा, देख लेंगे करवा देंगे। जो इस में दिया, वही दे देना। रिपोर्टर : 5000 रुपए? ऋषभ : कम ही दे देना। रिपोर्टर : तुम क्या करोगे ये बताओ? ऋषभ : ये घर वाली जो फाइल होती हैं, हम इन्हें कम करते हैं, कोई खास व्यक्ति होता है, उसी की करवाते हैं। रिपोर्टर : तुम्हारा क्या रोल है 5000 में? ऋषभ : सीएमओ से क्लियर कराऊंगा, सुपरवाइजर को देख लूंगा, बस एसडीएम के लिए तुम्हें बुलाऊंगा।
रिपोर्टर : एक महीने में बना दोगे? ऋषभ : हां। रिपोर्टर : गारंटी है? ऋषभ : अरे एक महीना नहीं, तो 15 दिन ज्यादा लग जाएगा। रिपोर्टर : बर्थ सर्टिफिकेट मेरा बनने की तो गारंटी है? ऋषभ : क्यों नहीं बनेगा, …दुनिया की कोई ताकत नहीं रुकवा सकती।
ऋषभ ने तहलका रिपोर्टर को बताया कि वह बॉबी से भी बड़ा दलाल है, जो आगरा नगर निगम का एक अन्य दलाल है, जिससे रिपोर्टर ने बाद में मुलाकात की। ऋषभ ने अनुपलब्ध जन्म प्रमाण पत्र यानी नॉन-अवेलेबिलिटी बर्थ सर्टिफिकेट (एनएबीसी) बनवाने का सुझाव दिया, जो उनके अनुसार जन्म प्रमाण पत्र के विकल्प के रूप में काम करता है। उसने कहा कि वह एनएबीसी को एक सप्ताह में, एक दिन में, दो दिन में या यहां तक कि एक घंटे में भी बनवा सकता है। रिपोर्टर से बात करते समय ऋषभ ने मेज पर पड़े मोबाइल फोन की ओर इशारा करते हुए कहा कि उसे स्टिंग ऑपरेशन का डर है और साथ ही उसने यह भी कहा कि उसे उम्मीद है कि हम उसकी रिकॉर्डिंग नहीं कर रहे होंगे।
रिपोर्टर : अगर बर्थ सर्टिफिकेट नहीं होता, तो एनएबीसी भी बनता है कोई? ऋषभ : एनएबीसी.…ये फोन तो चालू न है, .. हेहे…? रिपोर्टर : अरे इसकी फिकर न करो। ऋषभ : हमें डर लगता है। हे हे……। एनएबीसी एक ऐसा सर्टिफिकेट होता है, नॉन अवेलेबिलिटी सर्टिफिकेट। उसमें ये रहता है… एक इस व्यक्ति का बर्थ आगरा में तो हुआ है, परन्तु इसकी कोई दस्तावेज, कोई सबूत नहीं है। रिकॉर्ड नहीं है। तो वो सर्टिफिकेट जब काम में आता है, जैसे मान लीजिए आप अमेरिका जा रहे हैं, लंदन जा रहे हैं या हिंदुस्तान से बाहर पासपोर्ट के लिए, उससे एक लाभ नहीं मिल पाएगा, जो कि आप आधार कार्ड में छेड़छाड़ नहीं कर पाएंगे उससे, बाकी की दुनिया के सारे काम हो जाएंगे। रिपोर्टर : मतलब एनएबीसी इंडिया में भी चलेगा, बाहर भी? ऋषभ : हां। रिपोर्टर : उसको बनवाने का कितना खर्चा? ऋषभ : पूछकर बताना पड़ेगा। रिपोर्टर : कितने दिन में? ऋषभ : जब कहोगे, तब बनवा देंगे। रिपोर्टर : बर्थ सर्टिफिकेट आसान है या एनएबीसी? ऋषभ : एनएबीसी। रिपोर्टर : दोनों में से क्या बनवाना चाहिए? ऋषभ : अगर आपको देखा जाए तो एनएबीसी। रिपोर्टर : क्यूं? ऋषभ : आप रॉयल आदमी हो। रिपोर्टर : मैं रॉयल आदमी लग रहा हूं आपको? ऋषभ : हां, हा.हा… एनएबीसी बनवा लोगे, तो ठीक रहेगा। इतना दौड़ना-भागना नहीं पड़ेगा। रिपोर्टर : अच्छा, ठीक है, मैं सोचकर बताता हूं। कितने दिन में बनवा दोगे? ऋषभ : एक सप्ताह में। रिपोर्टर : वो तो कह रहा था, एक महीना में एक बनता है? ऋषभ : बॉबी नया मुर्गा है अभी, यमुना में उतरा है। रिपोर्टर : तू उसको बताना मत मैंने बोला है।. ऋषभ : वो यमुना में अभी तैर रहा है। हम तैरकर के बाहर आ चुके हैं। एनएबीसी मैं चाहूं, तो दो दिन में बनवा दूं। एक दिन में बनवा दूं, एक घंटे में बनवा दूं। लेकिन अभी बड़ा बाबू आया नहीं है। इसलिए मैं बोल रहा हूं।
इसके बाद ऋषभ ने खुलासा किया कि उसे हमारा (रिपोर्टर का) नंबर कैसे मिला और उसने रिश्वत के तौर पर 5,000 रुपए लेकर रिपोर्टर के माता-पिता के मृत्यु प्रमाण पत्र कैसे बनवाए। ऋषभ ने बताया कि आपने सबसे पहले आगरा नगर निगम के एक अन्य दलाल श्याम से इस काम के लिए संपर्क किया था, जिसने बदले में मदद के लिए मुझसे (ऋषभ से) संपर्क किया। ऋषभ ने कहा कि उसने हमारे (रिपोर्टर के) दस्तावेजों से उनका नंबर लिया और श्याम को दरकिनार करते हुए मुझे सीधे फोन किया। इससे पता चलता है कि आगरा नगर निगम में दलाल ग्राहकों और पैसों की होड़ में एक-दूसरे को भी धोखा देते हैं और बेईमानी करते हैं। रिपोर्टर : मुझे तो तूने मना कर दिया था श्याम के साथ आया था, नहीं होगा? ऋषभ : अरे तब भीड़ लग रही होगी मेरे पास, वा दिन बहुत भीड़ थी। रिपोर्टर : फिर तूने फोन कैसे किया मुझे? ऋषभ : ऐसा था, श्याम आया पड़ा था, कह रहा था तू मेरे साथ है, मैं तेरे साथ हूं। मैंने सोचा ये पीछे पड़ा हुआ है जरूर कोई माल बनाना है। ये इसका रिकॉर्ड मिल क्यूं नहीं रहा है और बार-बार ये जिद कर रहा है, कभी मेरे पास आ रहा, कभी किसी के पास। फिर मैंने कहा- “श्याम बाबू तू पहले डिसाइड कर ले कौन की तरफ है।” फिर उसने कहा- ”तुम तो करा नहीं पाओगे, हम उससे ही करा लेंगे।” मैंने कहा- “ठीक है करा लो, मेरे पास टाइम नहीं है।” रिपोर्टर : श्याम बोला? ऋषभ : फिर मैंने देख ली तुम्हारी फाइल निकाली मैंने। ये रजिस्टर निकालो बाबा,…बाबा ने पोल खोल दी। बाबा ने कहा, मैं भरने गयो, वा मैं पहले से भरे भराए निकले। रिपोर्टर : नंबर मेरा कहां से मिला तुम्हें? ऋषभ : वही में से… मैंने कही साले इसकी कॉपी करो। फिर मैंने इसकी कॉपी करी।
नीचे दिए गए संवाद में ऋषभ इस बारे में बात करता है कि उसे ग्राहक कैसे मिलते हैं और उसकी कमाई कितनी है। वह बताते हैं कि उनका संपर्क नंबर व्यापक रूप से जाना जाता है और पिछले एक साल में उन्होंने अपने आधिकारिक वेतन से कहीं अधिक कमाया है। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल से वह रिश्वत के जरिए प्रति माह 30,000 से 40,000 रुपए कमा रहे हैं, जबकि पहले वह मात्र 5,000-6,000 रुपए के वेतन पर गुजारा कर रहे थे। रिपोर्टर : तुमको क्लाइंट मिलते कैसे हैं? ऋषभ : मेरे नंबर बट गए हैं दुनिया में।
रिपोर्टर : लाख रुपए महीना कमा रहे हो, घर क्यूं नहीं बनाते अपना आगरा में? ऋषभ : पैसे तो अब कमाना स्टार्ट हुआ है। पहले 5-6 हजार ही मिलते थे। रिपोर्टर : कब से कमा रहे हो? ऋषभ : एक साल से। रिपोर्टर : लाख रुपए महीना कमा लेते हो? ऋषभ : लाख तो नहीं, …30-40 (हजार) है जाए आराम से, ऊपर भी मिल जाते हैं, कम भी।
इसके बाद ऋषभ ने आगरा नगर निगम में भ्रष्टाचार की एक घटना का खुलासा किया, जहां कुछ दलालों ने एक ऐसे व्यक्ति के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार किया था जो वास्तव में जीवित था। उन्होंने बताया कि उन सभी को जेल भेज दिया गया था और अब उन पर मुकदमा चल रहा है। इससे पता चलता है कि यह रैकेट कितनी व्यापक हो सकता है। रिपोर्टर : बॉबी तो ये कह रहा था आदमी अगर जिंदा भी है, तब भी डेथ सर्टिफिकेट बनवा दूंगा? ऋषभ : बॉबी फिर जेल काटेगा, जेल काट साले। रिपोर्टर : ऐसा भी हो जाता है जिंदा आदमी का? ऋषभ : नहीं होता यार। एक बार बन गया था, एक लड़के ने बनवा लिया, पिता उसका बाहर गया था। अभी तक केस चल रहा है उसका। रिपोर्टर : नगर निगम का अधिकारी था? ऋषभ : हां, ये बॉबी.. समझ लो ये सारे ब्लैकलिस्ट चल रहे हैं। रिपोर्टर : बॉबी ने बनवाया था? ऋषभ : बॉबी समझ लो, और भी हैं, अभी तक जाते हैं तारीख पर ये लोग। सरदार हैं, …कह रहा है जान ले लूंगा मगर छोड़ूंगा नहीं। रिपोर्टर : सरदार है बाप? ऋषभ : हां.. कह रहा है छोड़ूंगा नहीं साले को।
रिपोर्टर द्वारा नया जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के सवाल पर ऋषभ ने कहा कि इस सरकार के अधीन प्रशासनिक व्यवस्था में मुसलमानों के लिए हालात मुश्किल हैं। उन्होंने बताया कि हमारी जन्म प्रमाण पत्र की फाइल उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) के पास जाएगी, जो हमें बुलाकर कई सवाल पूछेंगे। उन्होंने आगे कहा कि जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदन करने वाले हिंदुओं के मामले में ऐसा नहीं है, उनसे तुलनात्मक रूप से कम प्रश्न पूछे जाते हैं। इस बीच ऋषभ ने 5,000 रुपए की रिश्वत लेकर पत्रकार के माता-पिता के दो मृत्यु प्रमाण पत्र दोबारा जारी करवा दिए थे। उन्होंने पैसे के बदले पत्रकार के लिए जन्म प्रमाण पत्र और एनएबीसी बनवाने का भी वादा किया। इसके बाद तहलका के रिपोर्टर की मुलाकात बॉबी (जो अपने इसी नाम से वहां जाना जाता है) से हुई। बॉबी एक दूसरा दलाल है और आगरा नगर निगम के एक आउटसोर्स कर्मचारी था। यह बैठक आगरा के फतेहाबाद रोड स्थित एक रेस्तरां में हुई। हमने बॉबी को मृत्यु प्रमाण पत्र और एनएबीसी के बदले एक फर्जी सौदा पेश किया। बॉबी ने मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए 8,000 रुपए और एनएबीसी के लिए 5,000 रुपए मांगे। चूंकि हमें ऋषभ से मृत्यु प्रमाण पत्र पहले ही मिल चुके थे, इसलिए हमने केवल एनएबीसी की मांग की। बॉबी ने हमें बताया कि वह एनएबीसी को 15 दिनों में बनवा सकता है, न कि एक महीने में जैसा कि लोग कहते हैं। बॉबी ने कहा- ‘हम आपका एनएबीसी 15 दिनों में प्राप्त करने के लिए पैसे दे रहे हैं और मुझे निगम में अन्य लोगों को भी भुगतान करना है।’ आगे की बातचीत में बॉबी ने कहा है कि एनएबीसी कैसे प्राप्त किया जा सकता है। बॉबी ने स्पष्ट करते हुए कहा कि यह स्थानीय और विदेशी दोनों उद्देश्यों के लिए काम करता है। बॉबी : आपका एनएबीसी लग जाएगा ना तब आपका झंझट खतम हो जाएगा। रिपोर्टर : नॉन अवेलेबिलिटी बर्थ स्रर्टिफिकेट। लेकिन वो तो विदेश जाने के लिए इस्तेमाल होता है, लोकल थोड़ी चलेगा? बॉबी : हां चलेगा, चलेगा क्यूं नहीं। रिपोर्टर : मुझे बताया है विदेश जाते हैं उनको चाहिए होता है। बॉबी : जिनका रिकॉर्ड नहीं होता, उनके लिए लगता है। रिपोर्टर : अच्छा, जिसका बर्थ रिकॉर्ड नहीं है इंडिया में, उसके लिए चल जाएगा? रिपोर्टर (आगे)- कितने दिन में एनएबीसी बनवा दोगे? बॉबी : एनएबीसी.. 15 दिन में। रिपोर्टर : हाथ में मिल जाएगा? बॉबी : हाथ में, आप कहोगे, तो मैं स्पीड पोस्ट कर दूंगा। रिपोर्टर : मुझे कोई कह रहा था एक महीने में एक ही देते हैं? बॉबी : होता है.. पैसे किसलिए जा रहे हैं।
रिपोर्टर : टोटल खर्चा कितना? बॉबी : आठ। रिपोर्टर : आठ हजार? बॉबी : हां। रिपोर्टर : कम कितना हो सकता है? बॉबी : आप बताइए? रिपोर्टर : पांच कर लो? बॉबी : नहीं, इतना नहीं हो सकता। 100-200-5000 मैं कर सकता हूं। क्यूंकि मुझे भी दो-चार लोगों को देना पड़ेगा। रिपोर्टर : अच्छा, नगर निगम में देना पड़ेगा? बॉबी : देना पड़ेगा… सीधी सी बात है। रिपोर्टर : आप फाइनल एनएबीसी का बता दो। बॉबी : पांच। रिपोर्टर : एनएबीसी की 5000, ज्यादा नहीं हो रहा है ये? बॉबी : कैसे भी कर लो, वो तो देना पड़ेगा। डेथ सर्टिफिकेट आपको चाहिए ही चाहिए। रिपोर्टर : मैं तो कह रहा हूं, दोनों पांच हजार में कर लो? बॉबी : इतना नहीं हो पाएगा।
इसके बाद बॉबी ने एनएबीसी के लिए रिश्वत के तौर पर 5,000 रुपये की मांग की। रिपोर्टर ने बॉबी को 3,000 रुपए ऑनलाइन भेज दिए और एनएबीसी प्राप्त होने के बाद शेष 2,000 रुपए देने पर सहमति जताई। आगे की चर्चा से यह भी पता चलता है कि मृत्यु प्रमाण पत्र दिखाए बिना एनएबीसी जारी नहीं किया जा सकता है। रिपोर्टर : अब आकेले एनएबीसी करा दो अभी उसका मैं बता दूंगा, कितना भेज दूं आपको अभी? बॉबी : भाई, आए हो, तो कैश दे दो। रिपोर्टर : पता नहीं होगा भी कि नहीं, …इतना आजकल कैश कौन लेकर चलता है। रिपोर्टर (आगे) : कैश है नहीं ज्यादा, 100 रुपए हैं। एनएबीसी के देख लो आप? बॉबी (अपने फोन में रुपए मिलने का मैसेज देखते हुए)- 1000? रिपोर्टर : अभी मैं टोटल दे रहा हूं आपको, …अरे पूरे थोड़े ही हैं ये। बॉबी : ऑनलाइन आप भैया को काउंटर पर दे दो, उनसे पैसे ले लो। रिपोर्टर : नहीं, वो नहीं करते। पहले मैं कर चुका हूं। ये आप बनाओ, मैं ऑनलाइन भेज दूंगा आपको। कैश तो नहीं होगा। रिपोर्टर : मैं ऑनलाइन भेज दूंगा आपको। …1000 रुपए तो हो गए आपके पास एनएबीसी के। बॉबी : लो आप ऑनलाइन भेज दो। रिपोर्टर : 2000 और भेज देता हूं, 3000 हो जाएंगे, फिर ठीक है?
रिपोर्टर (आगे) : टोटल 5000 की बात हुई है एनएबीसी में, 3000 दे दिए, 2000 रह गए। बॉबी : ठीक है, डेथ सर्टिफिकेट आपको पुराना निकालना पड़ेगा।
रिपोर्टर : अच्छा। बॉबी : क्यूंकि जहां भी आप एनबीसी लगाओगे ना, वहां डेथ सर्टिफिकेट मांगेंगे।
बॉबी के बाद हमारे रिपोर्टर ने श्याम (जो अपने इसी पहले नाम से जाना जाता है) से मुलाकात की, जो आगरा नगर निगम के एक अन्य दलाल है। हमने उसे एनएबीसी प्राप्त करने के लिए एक फर्जी सौदा पेश किया। श्याम ने पत्रकार को एनएबीसी जाने की सलाह दी, क्योंकि निगम के रिकॉर्ड से जन्म प्रमाण पत्र प्राप्त करना बहुत मुश्किल है। श्याम ने कहा कि एनएबीसी के लिए रिश्वत की आवश्यकता होगी, जिसमें से केवल 400-500 रुपए ही उनकी अपनी जेब में जाएंगे। रिपोर्टर : मैं ये कह रहा था अगर मेरा बर्थ सर्टिफिकेट मिल गया, फिर तो एनएबीसी की जरूरत नहीं पड़ेगी? श्याम : नहीं पड़ेगी? रिपोर्टर : तो आप मुझे सजेशन दो, पहले मैं बर्थ सर्टिफिकेट ढूंढू आप के थ्रू? श्याम : परसों आपको क्लीयर कर दूंगा। रिपोर्टर : या एनएबीसी बनवाऊं? श्याम : देखो मैं अभी कुछ नहीं कह सकता, मेरी जेब में 400-500 से ज्यादा नहीं जाएगा।
रिपोर्टर : नहीं, आप मुझे ये बताओ मेरा बर्थ सर्टिफिकेट मिलने की कितनी संभावना है? श्याम : 99 परसेंट नहीं है, एक परसेंट है कि मिल जाएगा। रिपोर्टर : मिल जाएगा एक परसेंट, …ऐसा क्यूं? श्याम : क्यूंकि ये तो बहुत पुराना मैटर हो गया है। दूसरे कुछ आपके पास प्रूफ होता, एंट्री-वेंट्री का, तो हम खोजवा देते। रिपोर्टर : तो आप एक काम करो, अब खोजवाओ मत, आप इसी के बेस पर एनएबीसी बनवा लो, वो बर्थ सर्टिफिकेट की तरह ही है ना?
इसके बाद श्याम ने एनएबीसी बनवाने के लिए तहलका के रिपोर्टर से रिश्वत के तौर पर 3,500 रुपये की मांग की। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने तीन से चार महीने पहले किसी के लिए एक एनएबीसी बनवाया था। श्याम ने हमें आगरा नगर निगम कार्यालय जाने के लिए कहा और बताया कि वहां कोई भी उससे कम रकम में काम नहीं करेगा जितनी रकम वह हमसे ले रहा है। रिपोर्टर : जो सर्टिफिकेट आपसे बनवाया है एनएबीसी वाला, उसको मुझे व्हाट्सएप कर दो। श्याम : ठीक है..आप पढ़ना चाहो पढ़ लो, क्यूंकि किसी और का कागज है। आप एनएबीसी में किसी और से राय भी ले लो, ….देख लिया आपने। जहां-जहां उसका नाम है, वहां आपका आ जाएगा। रिपोर्टर : ये तो अभी बनवाया है आपने? श्याम : हां, 3-4 महीने हो गए। रिपोर्टर : कस्तूर चंद गोयल…अरुण कुमार गोयल सन ऑफ कस्तूर कुमार गोयल…इनके बच्चे हैं, विदेश में। कितने दिन में बनवा दिया आपने? श्याम : बनवा दिया मैंने 15 दिन, हफ्ते में बनवा दिया. अब तो पहले, जैसे चाहो बनवा लो, अब इसकी ज्यादा डिमांड बढ़ गई है। …मैं अंदर गया, अब कह रहे हैं महीने में दो जारी कर रहा हूं। रिपोर्टर : मतलब? श्याम : मतलब दो ही एनएबीसी जारी कर रहे हैं। रिपोर्टर : तो मैं दे दूं आपको, …3500 रुपए दे दूं? श्याम : लेकिन ये कागज पहुंच के। रिपोर्टर : दो ही तो भेजे हैं मुझे। …टेंथ का सर्टिफिकेट और पासपोर्ट बस? श्याम : हां पीडीएफ बनाकर भेजना मुझे ताकि प्रिंट साफ निकल आए। रिपोर्टर : ये लो गिन लो 3500 रुपए हैं, …ये दे दिया मैंने एनएबीसी का। श्याम : हां। रिपोर्टर : ज्यादा तो नहीं लगेगा? श्याम : अब आप ऊपर का हिसाब तो देख ही आए हो, जिन-जिन से मिलवाया मैंने देख ही लिया, वो सामने बैठे थे। आप कभी चले जाना आंख मूंद के। कमरा देख लिए, लोगों को पहचान लिया, अगर जो मैंने बताया उससे कम में बना दे कोई। रिपोर्टर : कागज देने के बाद? श्याम : हां…तो मैं आपको सारे दे दूंगा। 1000 रुपए और दे दूंगा।
आगरा नगर निगम में नॉन-अवेलेबिलिटी बर्थ सर्टिफिकेट (एनएबीसी) की खूब मांग है। दलाल एनएबीसी जल्दी जारी करने के लिए 5,000 रुपए रिश्वत के तौर पर मांग रहे हैं। एनएबीसी भारत में जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम-1969 के तहत अधिकारियों द्वारा जारी किया गया एक आधिकारिक दस्तावेज है, जो प्रमाणित करता है कि किसी व्यक्ति का कोई जन्म रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। यह पासपोर्ट, वीजा और आव्रजन के लिए महत्वपूर्ण है, खासकर उन लोगों के लिए जिनका जन्म 1970 से पहले हुआ हो या जो ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हों, क्योंकि यह औपचारिक जन्म प्रमाण पत्र के वैध विकल्प के रूप में कार्य करता है।
जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “न खाऊंगा न खाने दूंगा” का नारा लगाया, तो लोगों में यह उम्मीद जगी कि भारत में भ्रष्टाचार में काफी कमी आएगी। लेकिन आगरा नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार को देखने के बाद जहां पैसे के बिना कोई काम नहीं होता। यह स्पष्ट है कि सत्ता में बैठे लोगों ने प्रधानमंत्री की अपील को काफी हद तक नजरअंदाज कर दिया है। आगरा नगर निगम में भ्रष्टाचार तो बस भ्रष्टाचार के पहाड़ का एक छोटा सा हिस्सा मात्र है, जो दर्शाता है कि किस प्रकार व्यवस्थित रिश्वतखोरी स्थानीय प्रशासन में अपनी जड़ें जमा चुकी है, जिससे पारदर्शिता और सार्वजनिक विश्वास दोनों कमजोर हो रहे हैं।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने दावा किया है कि भाजपा पंजाब में अगली सरकार बनाएगी। उन्होंने कहा कि पंजाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनेगी।
वहां के लोगों ने मन बना लिया है कि पंजाब को यदि आगे बढ़ाना है तो भाजपा की सरकार बनानी पड़ेगी। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की सरकार ने लोगों को सिर्फ सब्ज-बाग दिखाए। पंजाब में पिछले दिनों बाढ़ आई, किसानों की फसल खराब हुई। वहां के मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने किसानों को 20 हजार रुपये एकड़ मुआवजा दिया और उनकी पार्टी के मुखिया गुजरात जाकर कह रहे हैं कि हमने किसानों को 50 हजार रुपये मुआवजा दिया। वह सिर्फ लोगों को बेवकूफ बनाने का काम कर रहे हैं। किसानों का नुकसान हो गया और वह सिर्फ राजनीतिक रोटियां सेकने का काम कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंजाब के किसानों की समस्या को समझा और 16 हजार करोड़ रुपये देने का काम किया। हरियाणा के मुख्यमंत्री ने पंजाब के आदमपुर एयरपोर्ट का नामकरण संत शिरोमणि गुरू रविदास जी के नाम से किए जाने पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह ऐतिहासिक फैसला लिया है। मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी सोमवार को हरियाणा भवन में मीडिया से बातचीत कर रहे थे।
इस दौरान उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए बड़े गर्व का विषय है कि संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की जयंती के पावन अवसर पर भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने आदमपुर एयरपोर्ट को श्री गुरु रविदास महाराज जी एयरपोर्ट का नाम दिया। यह नामकरण श्री गुरु रविदास महाराज जी के अमर आदर्शों को सच्ची श्रद्धांजलि है। उनके द्वारा दिए गए समता, करुणा और सेवा के मूल्य आज भी समाज को प्रेरित करते हैं और हमें एक समरस, न्यायपूर्ण तथा मानवीय समाज के निर्माण की दिशा में मार्गदर्शन देते हैं। यह पहल उनके महान विचारों को सम्मान देने के साथ-साथ भावी पीढ़ियों को भी उनके संदेश से प्रेरणा लेने का अवसर प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि यह पहल यह भी दर्शाती है कि हमारा राष्ट्र उन महापुरुषों को निरंतर स्मरण करता है जिन्होंने समाज को दिशा देने का कार्य किया।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी निरंतर देश के बड़े संस्थानों का नाम संत-महापुरुषों के नाम से कर रहे हैं, जो संत-महापुरुषों को सच्ची श्रद्धांजलि है। पिछले दिनों अयोध्या एयरपोर्ट का नाम भी महर्षि वाल्मीकि के नाम से रखा गया था। इसी तरह से हिसार एयरपोर्ट का नाम महाराजा अग्रसेन के नाम से रखा गया है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि इस बार का आम बजट समाज के हर वर्ग को ध्यान में रखकर पेश किया गया है। इस बजट में हरियाणा को विशेष स्थान दिया गया है। बजट में सेम की समस्या से ग्रसित जमीन की बात की गई, एमएसएमई, इंडस्ट्री और एआई को विशेष स्थान दिया गया, जिसका लाभ सीधे हरियाणा को मिलेगा। उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार 55 साल सत्ता में रही लेकिन ऐसा बजट पेश नहीं कर पाई। यह बजट महिलाओं को सशक्त करने वाला है। यह युवाओं को रोजगार देने वाला है। यह किसानों को मजबूत करने वाला बजट है। किसान, युवा, महिला और गरीब सहित 140 करोड़ देशवासियों की आकांक्षाओं को पूरा करने वाला है।