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एपस्टीन फ़ाइल्स पर संसद में घमासान, हरदीप पुरी का राहुल गांधी को जवाब

Naveen Bansal
Naveen Bansal

राहुल गांधी के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना पक्ष साफ किया। उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही के दौरान राहुल गांधी ने उनका नाम एपस्टीन फ़ाइल्स के संदर्भ में लिया, जो पूरी तरह गलत और भ्रामक है। हरदीप पुरी ने कहा कि एपस्टीन से जुड़ी करीब 30 लाख फाइलें सार्वजनिक हुई हैं और उनमें उनके नाम से जुड़ी जो भी जानकारी है, वह सीमित और सामान्य मुलाकातों तक ही है।

हरदीप पुरी ने बताया कि वे करीब आठ साल तक न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत रहे। इस दौरान उनकी एपस्टीन से सिर्फ तीन या चार बार औपचारिक मुलाकात हुई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन बैठकों का कोई निजी या गलत उद्देश्य नहीं था। ये मुलाकातें अंतरराष्ट्रीय मंचों और संस्थागत कार्यक्रमों के दौरान हुई थीं।

पुरी ने यह भी बताया कि पिछले साल नवंबर में एक कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने उनसे बातचीत में कहा था कि एपस्टीन फ़ाइल्स में कुछ नाम सामने आए हैं। इसके बाद उन्होंने राहुल गांधी को एक नोट भेजा था, जिसमें उन्होंने पूरी पृष्ठभूमि समझाई थी। इस नोट में उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र से रिटायर होने के बाद उन्हें इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (IPI) में आमंत्रित किया गया था। उस संस्था के अध्यक्ष ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री थे और वही एपस्टीन को जानते थे। इसी माध्यम से उनका परिचय हुआ था.

केंद्रीय मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि एपस्टीन से जुड़े किसी भी आपराधिक या संदिग्ध गतिविधि से उनका कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि ईमेल के जरिए हुई जो भी बातचीत है, वह सार्वजनिक है और उसमें कुछ भी छिपाने जैसा नहीं है।

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। एक तरफ राहुल गांधी अपने दावे पर कायम हैं, वहीं दूसरी तरफ हरदीप पुरी ने इसे बेबुनियाद आरोप बताया है।

अब सबकी नजर इस बात पर है कि एपस्टीन फ़ाइल्स को लेकर आगे और कौन-कौन से नाम सामने आते हैं और संसद में यह मुद्दा कितना और गरमाता है। फिलहाल यह मामला देश की राजनीति में एक नया विवाद बनकर उभरा है।

राजपाल यादव को मिली बड़ी मदद, 1.11 करोड़ का सहारा

check bounce case
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अभिनेता सोनू सूद ने राजपाल यादव की मदद का भरोसा दिलाया था। इसके बाद अब म्यूजिक कंपनी जैम ट्यून्स (Gem Tunes) के प्रोड्यूसर राव इंद्रजीत यादव ने बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने राजपाल यादव की आर्थिक मदद के लिए 1 करोड़ 11 लाख रुपये देने की घोषणा की है। इस खबर के सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोग इस फैसले की जमकर तारीफ कर रहे हैं।

राव इंद्रजीत यादव ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि उन्हें राजपाल यादव की पीड़ा और हालत के बारे में जानकारी मिली, जिसे देखकर उनका मन बेहद दुखी हुआ। उन्होंने कहा कि राजपाल यादव सिर्फ एक शानदार कलाकार ही नहीं, बल्कि एक अच्छे इंसान भी हैं। ऐसे समय में उनका साथ देना मानवता का फर्ज है।

उन्होंने यह भी बताया कि जैम ट्यून्स फैमिली की ओर से राजपाल यादव को 1 करोड़ 11 लाख रुपये की सहायता दी जा रही है। इसके साथ ही उनकी लीगल टीम भी इस मामले में मदद कर रही है, ताकि कानूनी प्रक्रिया को सही तरीके से आगे बढ़ाया जा सके। राव इंद्रजीत यादव ने आम लोगों से भी अपील की कि वे इस मुश्किल समय में राजपाल यादव और उनके परिवार का साथ दें।

राजपाल यादव हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के जाने-माने कॉमेडियन हैं और उन्होंने कई सुपरहिट फिल्मों में अपनी एक्टिंग से लोगों को खूब हंसाया है। लेकिन हाल के दिनों में कानूनी परेशानियों के चलते उनका जीवन तनाव में आ गया था। उनकी स्थिति सामने आने के बाद फैंस और कई नामी लोग उनके समर्थन में खड़े हो गए हैं।

बताया जा रहा है कि अभी भी इस मामले में पूरी रकम चुकाने के लिए कुछ और राशि की जरूरत है. ऐसे में यह मदद राजपाल यादव के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है। सोशल मीडिया पर लोग उम्मीद जता रहे हैं कि बाकी रकम भी जल्द जुट जाएगी और राजपाल यादव इस संकट से बाहर निकल पाएंगे।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर दिखा दिया कि मुश्किल समय में इंसानियत और सहयोग कितनी बड़ी ताकत बन सकता है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि आगे राजपाल यादव का मामला किस तरह सुलझता है और उन्हें इस परेशानी से कब राहत मिलती है।

12 फरवरी बैंक अपडेट, ग्राहकों के लिए जरूरी जानकारी

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बैंक यूनियनों का कहना है कि वे सरकार के नए लेबर कोड के खिलाफ प्रदर्शन कर रही हैं। कर्मचारियों को डर है कि नए नियम उनके अधिकारों और नौकरी की सुरक्षा को कमजोर करेंगे। इसके अलावा, बैंक कर्मचारी लंबे समय से 5 दिन का वर्क वीक और बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस की मांग भी कर रहे हैं। इन्हीं मुद्दों को लेकर देश की बड़ी बैंक यूनियनें इस हड़ताल में शामिल हो रही हैं।

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और कुछ अन्य सरकारी बैंकों ने पहले ही संकेत दे दिया है कि हड़ताल के कारण बैंक के कामकाज पर असर पड़ सकता है। हालांकि बैंकों की कोशिश रहेगी कि सेवाएं सामान्य रहें, लेकिन स्टाफ की कमी की वजह से काम में देरी होना तय माना जा रहा है। खास तौर पर कैश जमा करना, चेक क्लीयरेंस, ड्राफ्ट बनवाना और लोन से जुड़े काम प्रभावित हो सकते हैं।

अगर आपको किसी जरूरी दस्तावेज पर बैंक की मुहर लगवानी है या कैश निकालना है, तो बेहतर होगा कि आज ही अपना काम निपटा लें। कई जगहों पर बैंक काउंटरों पर लंबी लाइनें लग सकती हैं और कुछ शाखाओं में सीमित कर्मचारी ही मौजूद रहेंगे।

राहत की बात यह है कि डिजिटल बैंकिंग सेवाएं सामान्य रूप से चलती रहेंगी। नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और UPI ट्रांजैक्शन पर कोई रोक नहीं होगी। एटीएम से पैसे निकालने की सुविधा भी जारी रहेगी, हालांकि कुछ इलाकों में कैश रीफिल में देरी हो सकती है।

बैंक अधिकारियों का कहना है कि हड़ताल का असर हर शहर और हर ब्रांच में अलग-अलग हो सकता है। कहीं सेवाएं लगभग सामान्य रहेंगी तो कहीं पूरी तरह से काम ठप भी हो सकता है। इसलिए अगर आपको कल बैंक जाना जरूरी है, तो पहले अपनी नजदीकी शाखा में फोन करके जानकारी जरूर ले लें।

कुल मिलाकर, 12 फरवरी को बैंक पूरी तरह बंद नहीं होंगे, लेकिन हड़ताल के चलते ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में समझदारी इसी में है कि जरूरी बैंकिंग काम पहले ही पूरे कर लिए जाएं और डिजिटल सेवाओं का ज्यादा इस्तेमाल किया जाए।

“ये ट्रेड डील नहीं, सरेंडर है”, लोकसभा में राहुल गांधी का सरकार पर तीखा हमला

राहुल गांधी ने कहा कि सरकार ने बजट में आज की बड़ी चुनौतियों पर कोई ठोस बात नहीं की। उन्होंने खास तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि आज के दौर में AI और डेटा किसी भी देश की ताकत बन चुके हैं, लेकिन बजट में इन पर गंभीर चर्चा नहीं की गई। राहुल ने कहा कि भारतीय डेटा अमेरिका के लिए बहुत अहम है और सरकार को इस पर सख्त रुख अपनाना चाहिए था।

उन्होंने दुनिया की मौजूदा स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि हम युद्ध के दौर में जी रहे हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व के हालात और चीन-अमेरिका की टक्कर पूरी दुनिया को प्रभावित कर रही है। ऐसे समय में भारत को अपनी ऊर्जा और आर्थिक नीति को मजबूत करना चाहिए था, लेकिन सरकार ने इस दिशा में कोई साफ रणनीति नहीं दिखाई।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने कहा कि इससे गरीब किसानों पर सीधा असर पड़ेगा। उनके मुताबिक, इस समझौते के बाद अमेरिका से आयात बढ़कर काफी ज्यादा हो जाएगा, जबकि भारत पर टैरिफ बढ़ा दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे भारतीय किसानों और छोटे व्यापारियों को नुकसान होगा और विदेशी कंपनियों को फायदा मिलेगा।

राहुल गांधी ने सरकार पर भावनात्मक हमला करते हुए कहा कि देश की संपत्ति और हितों को गिरवी रख दिया गया है। उन्होंने कहा, “क्या आपको भारत को बेचने में शर्म नहीं आई?” उनके इस बयान पर सदन में राजनीतिक माहौल गरमा गया और सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।

अपने भाषण के अंत में राहुल गांधी ने कहा कि भारत की असली ताकत उसकी आबादी है। 140 करोड़ लोग देश की सबसे बड़ी पूंजी हैं और अगर सरकार सही नीति बनाए तो भारत दुनिया को चुनौती दे सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर AI और डेटा जैसे मुद्दों को नजरअंदाज किया गया, तो आने वाले समय में देश को बड़ा नुकसान हो सकता है।

राहुल गांधी के इस बयान के बाद भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर सियासी बहस और तेज हो गई है। अब सभी की नजर सरकार के जवाब और आगे की रणनीति पर टिकी है।

पटना में सुबह-सुबह एनकाउंटर, STF ने बदमाश को पैर में मारी गोली

encounter
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पुलिस के मुताबिक, घायल अपराधी की पहचान राजीव कुमार उर्फ सूर्या के रूप में हुई है। उस पर लूट, डकैती, अवैध हथियार रखने और धोखाधड़ी जैसे कई गंभीर मामले दर्ज हैं। राजीव पटना के ही खाजेकला इलाके का रहने वाला बताया जा रहा है। पुलिस को उसके इलाके में छिपे होने की सूचना मिली थी, जिसके बाद STF और स्थानीय थाना पुलिस की टीम ने घेराबंदी की।

जैसे ही पुलिस ने उसे पकड़ने की कोशिश की, उसने खुद को घिरा देख पुलिस पर गोली चला दी। इसके बाद पुलिस ने भी मोर्चा संभाला और जवाबी फायरिंग की। इस दौरान अपराधी के पैर में गोली लगी और वह जमीन पर गिर पड़ा। मौके से पुलिस ने एक देसी कट्टा और कुछ कारतूस भी बरामद किए हैं।

घायल बदमाश को तुरंत इलाज के लिए एनएमसीएच (नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल) में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज चल रहा है। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के बाद यह साफ होगा कि वह पटना क्यों आया था और उसका अगला प्लान क्या था।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि राजीव कुमार कई मामलों में फरार चल रहा था और लंबे समय से उसकी तलाश की जा रही थी। सूचना मिलने के बाद STF ने तुरंत कार्रवाई की। मुठभेड़ के बाद पूरे इलाके में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल रहा, लेकिन पुलिस ने स्थिति पर जल्दी काबू पा लिया।

घटना की जानकारी मिलते ही फॉरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया। टीम ने घटनास्थल से सबूत जुटाए और जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस अपराधी के साथ कोई और साथी तो नहीं था और क्या वह किसी बड़ी वारदात की तैयारी में आया था।

पटना पुलिस का कहना है कि अपराधियों के खिलाफ लगातार सख्त अभियान चलाया जा रहा है। हाल के दिनों में कई बदमाशों को गिरफ्तार किया गया है और यह एनकाउंटर उसी कड़ी का हिस्सा है। पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि अगर उन्हें किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।

फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और घायल अपराधी से पूछताछ के बाद कई और खुलासे होने की उम्मीद है।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील में राहत, दाल और 500 अरब डॉलर की शर्त बदली

Changes in Trade Deal
Changes in Trade Deal

सबसे बड़ा बदलाव दाल को लेकर हुआ है। पहले कहा गया था कि भारत अमेरिकी कृषि और औद्योगिक उत्पादों पर टैरिफ कम करेगा, जिसमें दाल भी शामिल थी। लेकिन अब नए दस्तावेज में दाल का जिक्र पूरी तरह हटा दिया गया है। इससे साफ है कि भारत को इस मुद्दे पर राहत मिल गई है।


इसी तरह 500 अरब डॉलर की खरीद को लेकर भी भाषा बदली गई है। पहले अमेरिका ने लिखा था कि भारत उससे 500 अरब डॉलर का सामान खरीदने के लिए “कमिटेड” है। अब इसे बदलकर “इरादा रखता है” कर दिया गया है। यानी यह अब बाध्यकारी शर्त नहीं रही।


डिजिटल सर्विस टैक्स पर भी अमेरिका का रुख नरम हुआ है। पहले कहा गया था कि भारत यह टैक्स हटाएगा, लेकिन अब सिर्फ इतना कहा गया है कि भारत डिजिटल ट्रेड के नियमों पर बातचीत के लिए तैयार है।


इसके अलावा रूस से तेल आयात के कारण भारत पर लगाए गए 25% अतिरिक्त टैरिफ को भी अमेरिका ने वापस लेने का फैसला किया है। इससे भारतीय कारोबारियों को करीब 40 हजार करोड़ रुपये की राहत मिलने की उम्मीद है। यह रिफंड अमेरिका के कस्टम्स नियमों के तहत दिया जाएगा। हालांकि रिफंड की राशि पहले अमेरिकी इम्पोर्टर को मिलेगी, फिर वे भारतीय निर्यातकों के साथ इसका बंटवारा करेंगे।


अमेरिका ने भारत पर नजर रखने के लिए एक टास्क फोर्स भी बनाई है, जिसमें वाणिज्य मंत्री, विदेश मंत्री और वित्त मंत्री शामिल होंगे। अगर यह समिति मानेगी कि भारत ने रूस से तेल का आयात फिर शुरू किया है, तो राष्ट्रपति को दोबारा 25% पेनल्टी लगाने की सिफारिश की जा सकती है।


इस समझौते से भारत को कई फायदे होंगे। भारतीय सामानों पर अमेरिकी टैरिफ घटकर 18% तक आ गया है। जेनेरिक दवाएं, हीरे-रत्न और विमान पार्ट्स पर जीरो टैरिफ मिलेगा। इससे भारतीय MSME, किसान, मछुआरे और छोटे उद्योगों को अमेरिका के बड़े बाजार में बेहतर मौका मिलेगा।


कुल मिलाकर, इस बदली हुई फैक्ट शीट से साफ है कि भारत को ट्रेड डील में पहले से ज्यादा राहत मिली है और आने वाले समय में भारतीय निर्यात को मजबूती मिल सकती है।

अजित पवार विमान हादसा: रोहित पवार ने जताई साज़िश की आशंका

investigation
investigation

रोहित पवार का कहना है कि इस हादसे की जांच बहुत धीमी गति से चल रही है, इसलिए उन्हें खुद तथ्यों को खंगालना पड़ा। उन्होंने विमान कंपनी वीएसआर, बुकिंग संभालने वाली कंपनी एरो और पायलट पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि उन्होंने साफ किया कि उनका आरोप डीजीसीए या सरकार पर नहीं है, बल्कि जांच प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने की मांग है।


उन्होंने दावा किया कि वीएसआर कंपनी के विमानों से पहले भी हादसे हो चुके हैं, लेकिन उनकी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई। रोहित पवार का कहना है कि अगर पहले की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई होती, तो इस दुर्घटना को रोका जा सकता था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विमान के रखरखाव में लापरवाही बरती गई और कई सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया गया।


रोहित पवार ने यह भी सवाल उठाया कि उड़ान के समय में बदलाव क्यों किया गया और आखिरी समय पर पायलट क्यों बदले गए। उनके मुताबिक, उड़ान तय समय से देर से रवाना हुई, जिससे कई तकनीकी और सुरक्षा सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने रनवे चयन को लेकर भी संदेह जताया और पूछा कि सुरक्षित रनवे होने के बावजूद दूसरे रनवे पर उतरने की कोशिश क्यों की गई।


एक और गंभीर आरोप यह लगाया गया कि विमान में अतिरिक्त ईंधन डिब्बों में रखा गया था, जो हादसे के वक्त ‘ईंधन बम’ जैसा बन सकता है। उन्होंने स्थानीय लोगों के हवाले से कहा कि दुर्घटना के समय कई धमाकों जैसी आवाजें सुनी गई थीं।


रोहित पवार ने मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र और अंतरराष्ट्रीय एजेंसी से कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। उनका कहना है कि यह मामला सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा है और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए सख्त कदम उठाना जरूरी है।


फिलहाल, इस मामले में विमान कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जैसे ही कंपनी या जांच एजेंसियों की ओर से जवाब मिलेगा, तस्वीर और साफ हो सकेगी।

स्पीकर ओम बिरला पर अविश्वास प्रस्ताव, 9 मार्च को होगी चर्चा

No-Confidence Motion
No-Confidence Motion

ओम बिरला ने इस पूरे मामले पर खुद बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने कहा है कि जब तक अविश्वास प्रस्ताव पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक वह लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी पर नहीं बैठेंगे और कार्यवाही का संचालन नहीं करेंगे। उन्होंने लोकसभा महासचिव को निर्देश दिया है कि विपक्ष की ओर से दिए गए नोटिस की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
हालांकि संसदीय नियमों में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है कि अविश्वास प्रस्ताव आने के बाद अध्यक्ष को तुरंत अपनी कुर्सी छोड़नी पड़े, लेकिन ओम बिरला ने खुद नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए यह कदम उठाया है। उनका कहना है कि इस मामले का निष्पक्ष और पारदर्शी समाधान जरूरी है, ताकि संसद की गरिमा बनी रहे।


विपक्ष का आरोप है कि लोकसभा अध्यक्ष ने उन्हें सदन में अपनी बात रखने का पूरा मौका नहीं दिया। उनका कहना है कि कई बार जनहित से जुड़े अहम मुद्दों को उठाने से उन्हें रोका गया और कार्यवाही को एकतरफा तरीके से चलाया गया। इसी कारण उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला किया।


इस घटनाक्रम के बाद संसद का माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया है। सत्ता पक्ष इसे विपक्ष की राजनीतिक रणनीति बता रहा है, जबकि विपक्ष का कहना है कि यह लोकतांत्रिक अधिकार का हिस्सा है। दोनों पक्षों के बीच टकराव अब खुलकर सामने आ गया है।


अब सभी की निगाहें 9 मार्च पर टिकी हैं, जब बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत होगी। उसी दिन यह तय हो सकता है कि अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा कैसे आगे बढ़ेगी और उसका नतीजा क्या होगा। यह भी देखा जाएगा कि संसद में इस मुद्दे पर किस तरह की बहस होती है और क्या विपक्ष अपने आरोपों को साबित कर पाता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला सिर्फ एक पद का नहीं, बल्कि संसद की कार्यशैली और लोकतांत्रिक मर्यादाओं से जुड़ा है। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि ओम बिरला दोबारा अध्यक्ष की कुर्सी संभालेंगे या इस अविश्वास प्रस्ताव से कोई नया राजनीतिक मोड़ आएगा।

यूपी बजट 2026-27 आज होगा पेश, चुनावी साल में बड़े ऐलानों की उम्मीद

UP Budget 2026
UP Budget 2026

सरकार की ओर से संकेत दिए गए हैं कि इस बार का बजट समाज के हर वर्ग को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा है कि यह बजट जनता की जरूरतों और अपेक्षाओं के अनुरूप होगा। माना जा रहा है कि इसमें युवाओं, किसानों, महिलाओं और गरीब वर्ग के लिए कई नई योजनाओं और घोषणाओं का खाका पेश किया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार यह अब तक का सबसे बड़ा बजट हो सकता है, जिसमें विकास परियोजनाओं के लिए भारी धनराशि का प्रावधान किया जाएगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी बजट को लेकर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि यह बजट गरीब के सम्मान, युवा के स्वाभिमान, मातृ शक्ति और किसान की समृद्धि को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है। सीएम योगी ने इसे प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखने वाला बजट बताया। उनका कहना है कि यह बजट प्रदेश के करीब 25 करोड़ लोगों की उम्मीदों और आकांक्षाओं का प्रतिबिंब होगा।

हालांकि बजट पेश होने से पहले विधानसभा का माहौल पूरी तरह शांत नहीं रहा। समाजवादी पार्टी के विधायकों ने विधानसभा परिसर में प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि सरकार सिर्फ बड़े-बड़े वादे करती है और जनता की असली समस्याओं पर ध्यान नहीं देती। विपक्ष का कहना है कि यह बजट जमीनी हकीकत से दूर होगा और सिर्फ चुनाव को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, इस बजट में बुनियादी ढांचे, रोजगार, स्वास्थ्य और शिक्षा पर विशेष जोर दिया जा सकता है। साथ ही ग्रामीण विकास और किसानों के लिए नई योजनाओं की घोषणा भी संभव है। चुनावी साल होने के कारण सरकार यह संदेश देना चाहती है कि उसने अपने कार्यकाल में विकास को प्राथमिकता दी है और आगे भी इसी दिशा में काम करेगी।

अब सभी की नजरें बजट भाषण पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार जनता को कौन-कौन से नए तोहफे देती है और विपक्ष इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है। यूपी बजट 2026-27 प्रदेश की राजनीति और भविष्य की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

यूपी में धार्मिक और पर्यटन स्थलों का होगा कायाकल्प, केंद्र ने दी करोड़ों की मंजूरी

religious tourism
religious tourism

पर्यटन मंत्रालय ने साफ किया है कि इन योजनाओं के तहत परियोजनाओं को लागू करने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों की होती है। हालांकि, केंद्र सरकार इन प्रोजेक्ट्स की नियमित निगरानी करती है ताकि काम समय पर पूरा हो सके। उत्तर प्रदेश और एनसीआर क्षेत्र में कई अहम पर्यटन स्थलों को इन योजनाओं में शामिल किया गया है।

प्रसाद योजना के तहत वाराणसी, मथुरा-वृंदावन और गोवर्धन जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों को विकसित किया जा रहा है। वाराणसी में गंगा क्रूज पर्यटन को बढ़ावा देने और वृंदावन में टूरिस्ट फैसिलिटी सेंटर बनाने जैसी परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इसके अलावा गोवर्धन में आधारभूत ढांचे को मजबूत किया जा रहा है ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

स्वदेश दर्शन योजना के तहत रामायण सर्किट, बौद्ध सर्किट, आध्यात्मिक सर्किट और हेरिटेज सर्किट को विकसित किया जा रहा है। अयोध्या, श्रावस्ती, कुशीनगर, चित्रकूट, प्रयागराज और गोरखपुर जैसे धार्मिक और ऐतिहासिक शहरों को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है। इससे न सिर्फ श्रद्धालुओं को सुविधा होगी बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे।

स्वदेश दर्शन 2.0 के तहत नैमिषारण्य और प्रयागराज में विशेष अनुभव आधारित पर्यटन परियोजनाएं शुरू की गई हैं। वहीं चैलेंज बेस्ड डेस्टिनेशन डेवलपमेंट योजना के तहत महोबा में संस्कृति और विरासत को बढ़ावा देने वाली परियोजना को मंजूरी दी गई है।

पर्यटन मंत्रालय ने यह भी बताया कि गाजियाबाद के दूधेश्वरनाथ मंदिर के विकास से जुड़ा फिलहाल कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है, लेकिन भविष्य में राज्य सरकार यदि प्रस्ताव भेजती है तो उस पर नियमों के अनुसार विचार किया जाएगा।

सरकार का कहना है कि इन योजनाओं से उत्तर प्रदेश धार्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र बनेगा। साथ ही देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। आने वाले समय में यूपी को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के नक्शे पर और मजबूत पहचान मिलने की उम्मीद है।