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नॉर्थ-ईस्ट हमारे लिए अष्टलक्ष्मी है”, गुवाहाटी में बोले पीएम मोदी

असम के गुवाहाटी में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नॉर्थ-ईस्ट को लेकर सरकार की सोच और योजनाओं पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि हाल ही में पेश हुए केंद्रीय बजट के बाद यह उनका पहला नॉर्थ-ईस्ट दौरा है और इस बजट में क्षेत्र के विकास को विशेष प्राथमिकता दी गई है। प्रधानमंत्री ने नॉर्थ-ईस्ट को “अष्टलक्ष्मी” बताते हुए कहा कि यह इलाका देश की प्रगति का अहम आधार बन रहा है।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि बीते वर्षों में नॉर्थ-ईस्ट को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने पर लगातार काम हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि पहले इस क्षेत्र को नजरअंदाज किया गया, लेकिन अब सरकार यहां आधारभूत ढांचे, कनेक्टिविटी और रोजगार से जुड़े कामों पर ध्यान दे रही है। उनके अनुसार, इस साल का बजट भी नॉर्थ-ईस्ट के लिए तय किए गए विकास के विजन को और मजबूत करता है।

अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने असम की भूमिका की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि असम की धरती ने देश की रक्षा, आज़ादी और संस्कृति को आगे बढ़ाने में अहम योगदान दिया है। इसी क्रम में उन्होंने समाज सेवा से जुड़े एक वरिष्ठ व्यक्ति कबीन्द्र पुरकायस्थ को याद करते हुए उनके योगदान की सराहना की और बताया कि उन्हें पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि वर्ष 2014 के बाद नॉर्थ-ईस्ट के 125 से ज्यादा लोगों को पद्म पुरस्कार दिए गए हैं। उनके अनुसार, यह इस बात का संकेत है कि इस क्षेत्र की प्रतिभा और योगदान को अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। उन्होंने कहा कि नॉर्थ-ईस्ट की यही ताकत विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में सहायक बनेगी।

कुल मिलाकर, गुवाहाटी के इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने नॉर्थ-ईस्ट के विकास, असम के योगदान और कार्यकर्ताओं की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में भी इस क्षेत्र के लिए योजनाओं और कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जाएगी।

बांग्लादेश में सत्ता पलटाव: BNP की बड़ी जीत, 17 साल बाद लौटे तारिक रहमान बनेंगे प्रधानमंत्री

नई दिल्ली/ढाका। बांग्लादेश में हुए 13वें संसदीय चुनाव के नतीजों ने देश की राजनीति की दिशा बदल दी है। शुरुआती रुझानों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने बहुमत हासिल कर लिया है। पार्टी प्रमुख तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। बताया जा रहा है कि BNP गठबंधन ने 300 सीटों वाली संसद में 212 सीटें जीत ली हैं।

यह चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। पहली बार ऐसा हुआ जब सत्ताधारी अवामी लीग चुनाव मैदान में नहीं उतरी। अवामी लीग प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना इस समय भारत में हैं और उन्होंने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए धांधली का आरोप लगाया है। उन्होंने इस चुनाव को रद करने की मांग भी की है।

तारिक रहमान की यह जीत इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि वे करीब 17 साल बाद देश लौटे हैं। उनकी मां और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के निधन के बाद पार्टी की कमान पूरी तरह उनके हाथ में आई थी। अवामी लीग के चुनाव से बाहर रहने के कारण BNP को सीधा फायदा मिला और पार्टी तेजी से सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी।

इस चुनाव में जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाला गठबंधन भी मजबूत स्थिति में दिखा और करीब 70 सीटों पर आगे रहा। कुछ सीटों पर अभी भी गिनती जारी है, लेकिन बहुमत का आंकड़ा पार कर लेने के कारण BNP की सरकार बनना तय माना जा रहा है।

अंतरिम सरकार के मुखिया और नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस ने चुनाव को “नए बांग्लादेश की शुरुआत” बताया है। उन्होंने कहा कि देश अब सुधारों और नई राजनीतिक व्यवस्था की ओर बढ़ेगा।

भारत भी इन नतीजों पर करीबी नजर बनाए हुए है। नई सरकार के गठन के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों पर इसका असर पड़ सकता है। खासकर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर दोनों देशों की भूमिका अहम मानी जा रही है।

कुल मिलाकर, यह चुनाव बांग्लादेश के इतिहास में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जहां सत्ता का केंद्र एक बार फिर BNP के हाथों में जाने जा रहा है।

‘सेवा तीर्थ’ से चलेगी सरकार: पीएम मोदी का नया दफ्तर हाईटेक, सुरक्षित,  सुविधाजनक

नई दिल्ली। देश की प्रशासनिक व्यवस्था में आज एक नया अध्याय जुड़ गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार, 13 फरवरी को अपने नए कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ में शिफ्ट हो गए। दारा शिकोह रोड पर बना यह नया परिसर आधुनिक तकनीक और सुरक्षा सुविधाओं से लैस है। करीब 2.26 लाख वर्ग फुट में फैला यह परिसर लगभग 1,189 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है।

सरकार का कहना है कि ‘सेवा तीर्थ’ का मकसद प्रधानमंत्री के कामकाज को और ज्यादा सुगम बनाना है। पहले प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय अलग-अलग जगहों पर थे। अब ये तीनों एक ही परिसर में होंगे, जिससे फैसले तेजी से लिए जा सकेंगे और बैठकों में समय की बचत होगी।

इस नए परिसर को पूरी तरह हाईटेक बनाया गया है। यहा हाई-स्पीड इंटरनेट, डिजिटल आर्काइव, पेपरलेस कामकाज की व्यवस्था और आधुनिक कॉन्फ्रेंस रूम मौजूद हैं। सुरक्षा के लिए स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल सिस्टम, मॉनिटरिंग नेटवर्क और एडवांस एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर लगाया गया है। इससे प्रधानमंत्री और अधिकारियों की आवाजाही आसान होगी और आम लोगों को भी ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी।

वहीं आज साउथ ब्लॉक स्थित पुराने प्रधानमंत्री कार्यालय में आखिरी कैबिनेट बैठक हुई। यह भवन पिछले करीब 80 सालों से देश की सत्ता का केंद्र रहा है। इसी इमारत में 15 अगस्त 1947 को पहली कैबिनेट बैठक हुई थी, जिसकी अध्यक्षता भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने की थी।

अब ऐतिहासिक साउथ ब्लॉक की जिम्मेदारी नए ‘सेवा तीर्थ’ परिसर ने संभाल ली है। सरकार का मानना है कि यह बदलाव प्रशासन को ज्यादा आधुनिक, सुरक्षित और प्रभावी बनाएगा। ‘सेवा तीर्थ’ न सिर्फ एक नई इमारत है, बल्कि देश के शासन तंत्र को भविष्य की जरूरतों के अनुसार ढालने की दिशा में एक बड़ा कदम भी है।

AIIMS दिल्ली में लॉन्च हुआ फेस ट्रांसप्लांट प्रोग्राम

Naveen Bansal

नई दिल्ली के All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) में आज आधिकारिक रूप से फेस ट्रांसप्लांट प्रोग्राम की शुरुआत कर दी गई। इस मौके पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉक्टरों और मेडिकल विशेषज्ञों ने इसे भारत के मेडिकल क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम बताया। यह कार्यक्रम उन मरीजों के लिए नई उम्मीद लेकर आया है, जिनका चेहरा किसी दुर्घटना, आग से झुलसने, जन्मजात बीमारी या किसी गंभीर रोग के कारण बुरी तरह खराब हो गया है।

AIIMS प्रशासन ने बताया कि इस फेस ट्रांसप्लांट प्रोग्राम के तहत मरीजों की पहले पूरी मेडिकल जांच की जाएगी और उसके बाद आधुनिक तकनीक से सर्जरी की जाएगी। यह एक बेहद जटिल प्रक्रिया है, जिसमें कई विभागों की टीम एक साथ काम करेगी। इसमें प्लास्टिक सर्जरी, एनेस्थीसिया, मानसिक स्वास्थ्य और नर्सिंग स्टाफ की अहम भूमिका होगी। अधिकारियों का कहना है कि इस इलाज का उद्देश्य सिर्फ चेहरे की बनावट सुधारना नहीं, बल्कि मरीज को दोबारा सामान्य जीवन जीने के लायक बनाना है।

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस की सबसे खास बात यह रही कि इसमें हार्वर्ड मेडिकल टीम से जुड़े वरिष्ठ डॉक्टर Dr Indranil Sinha भी शामिल हुए। उन्होंने फेस ट्रांसप्लांट सर्जरी से जुड़े अपने अनुभव साझा किए और बताया कि अमेरिका में अब तक कुल 30 फेस ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं, जिनमें से 10 सर्जरी उनकी टीम द्वारा की गई हैं। उन्होंने कहा कि यह सर्जरी मेडिकल साइंस की सबसे जटिल सर्जरी में से एक है और इसके लिए अनुभवी डॉक्टरों के साथ मजबूत मेडिकल सिस्टम की जरूरत होती है।

डॉ. इंद्रनील सिन्हा ने AIIMS के डॉक्टरों की तैयारी और सुविधाओं की सराहना करते हुए कहा कि भारत में इस तरह का कार्यक्रम शुरू होना एक बड़ा कदम है। इससे अब मरीजों को इलाज के लिए विदेश जाने की मजबूरी नहीं रहेगी और उन्हें देश में ही विश्वस्तरीय इलाज मिल सकेगा।

AIIMS अधिकारियों ने यह भी बताया कि फेस ट्रांसप्लांट के लिए अंगदान की तरह फेस डोनेशन की प्रक्रिया को लेकर लोगों को जागरूक किया जाएगा। समाज में इस विषय पर सही जानकारी फैलाना इस कार्यक्रम का एक अहम हिस्सा होगा।

कुल मिलाकर, AIIMS में आज लॉन्च हुआ फेस ट्रांसप्लांट प्रोग्राम भारत की मेडिकल दुनिया में एक नया अध्याय जोड़ने जा रहा है। यह पहल उन हजारों मरीजों के लिए उम्मीद की किरण बनेगी, जो अब तक अपने चेहरे की गंभीर समस्या के कारण सामाजिक और मानसिक परेशानियों का सामना कर रहे थे। अब उन्हें नई पहचान और नया आत्मविश्वास मिलने की राह खुल गई है।

राष्ट्रीय आम हड़ताल: जंतर-मंतर पर उमड़ा मजदूरों का सैलाब, देशभर में दिखा असर

Naveen Bansal
Naveen Bansal

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लेबर कोड, महंगाई, बेरोजगारी और निजीकरण जैसे मुद्दों को लेकर लंबे समय से चिंता बनी हुई है। जंतर-मंतर पर यूनियन नेताओं और मजदूर संगठनों ने शांतिपूर्ण तरीके से नारेबाजी की और अपनी बात रखी। मौके पर पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे और स्थिति पूरी तरह शांतिपूर्ण रही।

ट्रेड यूनियन संगठन सीटू (CITU) की ओर से जारी प्रेस बयान के अनुसार, इस आम हड़ताल में देशभर से करोड़ों मजदूरों और किसानों ने हिस्सा लिया। संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों के कर्मचारियों की भागीदारी देखने को मिली। कई जगहों पर रैलियां, प्रदर्शन और पिकेटिंग की गई।

प्रेस बयान के मुताबिक केरल, ओडिशा, त्रिपुरा और कुछ अन्य राज्यों में बंद जैसी स्थिति देखी गई। कोयला और खनन क्षेत्रों में उत्पादन और परिवहन प्रभावित हुआ। बिजली, पेट्रोलियम, बंदरगाह, परिवहन और औद्योगिक क्षेत्रों में भी कामकाज पर असर पड़ा।

बैंक और बीमा क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों की भागीदारी के कारण कई जगहों पर सेवाएं आंशिक रूप से प्रभावित रहीं। फैक्ट्रियों, ऑटोमोबाइल कंपनियों, सीमेंट प्लांट और टेक्सटाइल उद्योगों में भी काम ठप होने की खबरें सामने आईं।

आंगनवाड़ी, आशा वर्कर, मिड-डे मील कर्मचारी और निर्माण मजदूरों की बड़ी भागीदारी इस हड़ताल की खास बात रही। ग्रामीण इलाकों में किसानों और खेत मजदूरों ने भी समर्थन रैलियां निकालीं।

जंतर-मंतर पर मौजूद यूनियन नेताओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाएगा, आंदोलन जारी रहेगा। वहीं प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी गई और किसी तरह की बड़ी अव्यवस्था की सूचना नहीं मिली।

इस आम हड़ताल ने यह साफ कर दिया कि मजदूर और किसान अपने मुद्दों को लेकर संगठित होकर आवाज उठा रहे हैं। अब सभी की नजर सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है कि इस आंदोलन पर क्या रुख अपनाया जाता है।

महिला सुरक्षा पर सख्त रुख

पुलिस महानिदेशक हरियाणा अजय सिंघल की अध्यक्षता में आज पुलिस मुख्यालय, पंचकूला में महिला विरुद्ध अपराधों की रोकथाम एवं लंबित मामलों की समीक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण राज्य स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य दुष्कर्म एवं पोक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामलों की समयबद्ध जांच सुनिश्चित करना तथा गृह मंत्रालय के आईटीएसएसओ पोर्टल पर लंबित शिकायतों के त्वरित निस्तारण की रणनीति तैयार करना था। बैठक में 13 जिलों के नोडल अधिकारियों एवं महिला थानों की एसएचओ ने भाग लिया। इस अवसर पर एडीजीपी एचआर लिटिगेशन सी. एस. राव तथा एसपी नूपुर  बिश्नोई भी उपस्थित रहे।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए डीजीपी ने स्पष्ट रूप से कहा कि महिला सुरक्षा हरियाणा पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और महिला विरुद्ध अपराधों के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि दुष्कर्म तथा पोक्सो एक्ट के अंतर्गत दर्ज सभी मामलों की जांच 60 दिनों के भीतर पूर्ण की जाए, ताकि पीड़ितों को समयबद्ध न्याय मिल सके और न्याय व्यवस्था में उनका विश्वास सुदृढ़ हो।

बैठक के दौरान जिलावार डिस्पोजल रेट की विस्तृत समीक्षा की गई। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिलों की सराहना करते हुए उन्हें अपनी कार्यशैली में निरंतरता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया गया, वहीं कम प्रदर्शन करने वाले जिलों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए कि वे लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण हेतु विशेष रूप से प्रयास करे। डीजीपी ने कहा कि पुलिस मुख्यालय स्तर पर आईटीएसएसओ पोर्टल की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है तथा किसी भी प्रकार की ढिलाई पाए जाने पर संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने एडीजीपी सी. एस. राव एवं एसपी नूपुर  बिश्नोई को निर्देश दिए कि वे प्रत्येक 15 दिन में मामलों की प्रगति की समीक्षा करें और आवश्यक सुधारात्मक कदम सुनिश्चित करें। 

बैठक के दौरान एसपी नूपुर  बिश्नोई ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन  के माध्यम से जिलों में आईटीएसएसओ पोर्टल पर लंबित शिकायतों की स्थिति, प्रगति तथा चुनौतियों पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। बताया गया कि हाल के दिनों में कई जिलों ने उल्लेखनीय सुधार किया है। इस पर डीजीपी ने निर्देश दिए कि बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों की *बेस्ट प्रैक्टिसेज* को अन्य जिलों में भी अपनाया जाए, ताकि राज्य स्तर पर समग्र प्रदर्शन में सुधार हो सके।

 इससे पूर्व एडीजीपी एचआर लिटिगेशन सी. एस. राव ने उपस्थित अधिकारियों से संवाद कर कार्य के दौरान आ रही व्यावहारिक चुनौतियों पर चर्चा की। अधिकारियों ने पोर्टल संचालन से संबंधित अपने संशयों  को दूर किया तथा आश्वासन दिया कि वे अपनी रैंकिंग में सुधार हेतु निरंतर प्रयास करेंगे और महिला सुरक्षा के प्रति अपनी जिम्मेदारी का पूर्ण निर्वहन करेंगे।

 आईटीएसएसओ (ITSSO) पोर्टल गृह मंत्रालय द्वारा संचालित एक डिजिटल मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से दुष्कर्म, पोक्सो एक्ट तथा महिला एवं बाल अपराधों से संबंधित मामलों की प्रगति की ऑनलाइन निगरानी की जाती है। इस पोर्टल पर दर्ज मामलों की जांच, गिरफ्तारी,चार्जशीट, ट्रायल एवं निस्तारण की स्थिति का रीयल-टाइम डेटा उपलब्ध रहता है। इससे पारदर्शिता बढ़ती है, जवाबदेही सुनिश्चित होती है तथा लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे में सहायता मिलती है। राज्य एवं जिला स्तर पर नियमित समीक्षा के माध्यम से यह पोर्टल महिला सुरक्षा के मामलों में प्रभावी मॉनिटरिंग का सशक्त उपकरण सिद्ध हो रहा है।

भारत-अमेरिका कोयला डील पर ट्रंप का बड़ा दावा बोले, दुनिया का सबसे बेहतरीन ‘काला हीरा’ देंगे

trade deal
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अपने भाषण में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अब सिर्फ अपनी घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं है, बल्कि तेजी से एक बड़ा ऊर्जा निर्यातक बन रहा है। उन्होंने बताया कि हाल के महीनों में भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के साथ अहम व्यापार समझौते किए गए हैं, जिनका मकसद अमेरिकी कोयले को अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत जगह दिलाना है।

ट्रंप ने अमेरिकी कोयले की गुणवत्ता की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, “हमारा कोयला दुनिया में सबसे बेहतरीन माना जाता है, इसलिए इसे कई देश खरीदना चाहते हैं।” उन्होंने इस कोयले को ‘ब्लैक डायमंड’ यानी काला हीरा बताया और कहा कि इसकी मांग आने वाले समय में और बढ़ेगी। ट्रंप के मुताबिक, भारत के साथ यह समझौता सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिका की पूरी ऊर्जा रणनीति का हिस्सा है।

इस डील को लेकर ट्रंप ने यह भी दावा किया कि इससे अमेरिका के खनन उद्योग को फायदा होगा और नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि कोयला उद्योग से जुड़े हजारों लोगों को इससे काम मिलेगा और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि भारत को कितनी मात्रा में कोयला भेजा जाएगा या समझौते की शर्तें क्या होंगी, लेकिन इसे उन्होंने “बड़ा ब्रेकथ्रू” जरूर बताया।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत अमेरिका से ज्यादा कोयला आयात करता है, तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ेगा। खास बात यह है कि यह सब ऐसे समय में हो रहा है, जब दुनिया के कई देश स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में कोयले को लेकर यह नई रणनीति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस को भी जन्म दे सकती है।

ट्रंप के बयान से साफ है कि उनकी सरकार अमेरिकी ऊर्जा संसाधनों को, खासकर कोयले को, अंतरराष्ट्रीय बाजार में आक्रामक तरीके से आगे बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है। भारत के साथ यह समझौता दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों में एक नया अध्याय जोड़ सकता है और आने वाले दिनों में इस पर दुनिया की नजर बनी रहेगी।

बांग्लादेश चुनाव में हिंसा, पत्रकारों पर हमला, मोहम्मद यूनुस ने डाला वोट

election 2026
election 2026

इस चुनाव के साथ 84 बिंदुओं वाले सुधार पैकेज पर जनमत संग्रह भी कराया जा रहा है। इसमें प्रधानमंत्री के कार्यकाल की सीमा तय करने, केयरटेकर सरकार प्रणाली की वापसी और संसद में ऊपरी सदन बनाने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। मतदाताओं को दो बैलेट पेपर दिए जा रहे हैं—सफेद बैलेट सांसद चुनने के लिए और गुलाबी बैलेट जनमत संग्रह के लिए।

इस बार चुनाव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग मैदान में नहीं है। उसका पंजीकरण निलंबित होने के कारण मुकाबला मुख्य रूप से बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच है। बीएनपी प्रमुख तारीक रहमान ने 17 साल बाद देश लौटकर चुनाव में भाग लिया है और रोजगार, कानून-व्यवस्था और अभिव्यक्ति की आज़ादी को बड़ा मुद्दा बनाया है।

चुनाव के दौरान नोआखली इलाके से हिंसा की खबर सामने आई है। यहां चुनाव कवर कर रहे बांग्लादेश टेलीविजन के पत्रकार मिराज उद्दीन पर हमला किया गया, जिसमें उन्हें गंभीर चोटें आईं। आरोप है कि हमले में कुछ राजनीतिक कार्यकर्ता शामिल थे। इस घटना ने चुनावी सुरक्षा और प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

ढाका-9 सीट से निर्दलीय उम्मीदवार तसनीम जारा ने आरोप लगाया है कि उनके पोलिंग एजेंटों को कई केंद्रों पर अंदर जाने से रोका गया। उन्होंने कहा कि कुछ जगहों पर बिना वजह एजेंटों को बाहर कर दिया गया, जिससे मतदान प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।

अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने गुलशन मॉडल हाई स्कूल एंड कॉलेज में अपना वोट डाला। इसके बाद उन्होंने कहा कि आज का दिन “नए बांग्लादेश का जन्मदिन” है। उन्होंने लोगों से शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान की अपील की और कहा कि यह दिन उम्मीद और बदलाव का प्रतीक बनेगा।

इस चुनाव को “पहला Gen Z चुनाव” भी कहा जा रहा है। करीब 50 लाख युवा पहली बार वोट डाल रहे हैं। 2024 के आंदोलन से निकली नेशनल सिटिजन पार्टी भी इस बार मैदान में है, जिससे युवाओं की भागीदारी और प्रभाव साफ नजर आ रहा है।

देशभर में 42 हजार से ज्यादा मतदान केंद्र बनाए गए हैं और करीब 9 लाख सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। साथ ही 500 विदेशी पर्यवेक्षक भी चुनाव प्रक्रिया पर नजर रख रहे हैं। प्रशासन का दावा है कि चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से कराने की पूरी कोशिश की जा रही है।

बांग्लादेश का यह चुनाव न सिर्फ सत्ता परिवर्तन का फैसला करेगा, बल्कि यह तय करेगा कि देश भविष्य में किस दिशा में आगे बढ़ेगा। हिंसा और विवादों के बीच जनता की भागीदारी यह दिखा रही है कि लोग एक नए और बेहतर बांग्लादेश की उम्मीद के साथ वोट डाल रहे हैं।

JEE Main छात्रों के लिए बड़ी खबर, रिजल्ट की नई तारीख घोषित

jee mains result
jee mains result

रिजल्ट ऑनलाइन माध्यम से एनटीए की आधिकारिक वेबसाइट jeemain.nta.nic.in पर जारी किया जाएगा। छात्र अपने आवेदन नंबर और पासवर्ड की मदद से लॉग इन करके अपना स्कोरकार्ड देख सकेंगे और डाउनलोड भी कर पाएंगे।

इस बार करीब 13 लाख से ज्यादा छात्रों ने जेईई मेन सेशन-1 परीक्षा में हिस्सा लिया था। यह परीक्षा 21, 22, 23, 24, 28 और 29 जनवरी को आयोजित की गई थी। परीक्षा खत्म होने के बाद से ही छात्र अपने नतीजों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

रिजल्ट के साथ ही एनटीए टॉपर्स की लिस्ट और 100 पर्सेंटाइल हासिल करने वाले छात्रों की सूची भी जारी करेगा। इसके अलावा फाइनल आंसर की (Final Answer Key) भी रिजल्ट के साथ ही वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी। इससे छात्र अपने अंकों का मिलान कर सकेंगे और यह जान पाएंगे कि उन्हें कितने नंबर मिले हैं।

रिजल्ट देखने के लिए छात्रों को सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। वहां “JEE Main Session-1 Result 2026” से जुड़ा लिंक मिलेगा। उस पर क्लिक करने के बाद आवेदन संख्या, पासवर्ड और कैप्चा कोड भरना होगा। लॉग इन करते ही स्क्रीन पर रिजल्ट दिखाई देगा, जिसे छात्र डाउनलोड और प्रिंट भी कर सकते हैं।

एनटीए ने यह भी साफ किया है कि सेशन-2 परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। इच्छुक छात्र 25 फरवरी 2026 तक सेशन-2 के लिए आवेदन कर सकते हैं। सेशन-1 और सेशन-2 दोनों परीक्षाओं के अंकों के आधार पर फाइनल मेरिट तैयार की जाएगी।

जेईई मेन के जरिए टॉप 2.5 लाख रैंक हासिल करने वाले छात्र जेईई एडवांस परीक्षा के लिए योग्य माने जाएंगे। इसके बाद उन्हें देश के प्रतिष्ठित आईआईटी संस्थानों में दाखिले का मौका मिलेगा।

छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और सिर्फ एनटीए की आधिकारिक वेबसाइट और नोटिस पर ही भरोसा करें। अब सभी की नजरें 16 फरवरी पर टिकी हैं, जब जेईई मेन सेशन-1 का रिजल्ट जारी किया जाएगा।

अब पहले ‘वंदे मातरम’, फिर ‘जन गण मन’, नए नियम जारी

vande mataram
vande mataram

नई व्यवस्था के अनुसार, अगर किसी कार्यक्रम में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों गाए जाते हैं, तो सबसे पहले वंदे मातरम प्रस्तुत किया जाएगा। खास बात यह है कि अब वंदे मातरम के सभी 6 अंतरे गाए जाएंगे, जिनकी कुल अवधि करीब 3 मिनट 10 सेकेंड होगी। अभी तक ज्यादातर जगहों पर इसके सिर्फ पहले दो अंतरे ही गाए जाते थे।

सरकार ने यह भी तय किया है कि स्कूलों में पढ़ाई की शुरुआत राष्ट्रगीत के साथ होगी। यानी हर दिन की शुरुआत वंदे मातरम से होगी। इसके अलावा राष्ट्रपति और राज्यपाल के आगमन, झंडारोहण, राष्ट्रीय कार्यक्रमों और आधिकारिक समारोहों में वंदे मातरम बजाना अनिवार्य होगा।

मंत्रालय ने साफ किया है कि वंदे मातरम का केवल आधिकारिक संस्करण ही बजाया जाएगा और इसे सामूहिक रूप से गाया जाएगा। मंत्रियों या अन्य महत्वपूर्ण लोगों की मौजूदगी वाले जरूरी लेकिन गैर-औपचारिक कार्यक्रमों में भी इसे पूरे सम्मान के साथ गाया जा सकता है।

हालांकि, सिनेमा हॉल को इन नियमों से छूट दी गई है। यानी फिल्म शुरू होने से पहले वंदे मातरम बजाना जरूरी नहीं होगा। अगर किसी डॉक्यूमेंट्री या न्यूजरील के हिस्से के रूप में यह गीत आता है, तो दर्शकों के लिए खड़ा होना अनिवार्य नहीं होगा, ताकि अव्यवस्था न हो।

सरकार इस समय वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में कार्यक्रम मना रही है। इसी कड़ी में गणतंत्र दिवस परेड में भी वंदे मातरम थीम पर झांकी निकाली गई थी, जिसे बेस्ट झांकी का पुरस्कार मिला।

इतिहास की बात करें तो वंदे मातरम को बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1875 में लिखा था। यह गीत आजादी की लड़ाई के दौरान देशभक्ति का प्रतीक बना और स्वतंत्रता सेनानियों का नारा रहा।

नई गाइडलाइन को लेकर देशभर में चर्चा तेज है। सरकार का कहना है कि इसका मकसद राष्ट्रगीत को उचित सम्मान देना और लोगों में देशभक्ति की भावना को मजबूत करना है। अब आने वाले दिनों में स्कूलों और सरकारी कार्यक्रमों में इस नए नियम का असर साफ नजर आएगा।