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क्या 1 अप्रैल से टोल प्लाजा पर कैश पूरी तरह बंद हो जाएगा? जानिए अब कैसे होगा भुगतान…

सरकार का कहना है कि यह कदम टोल कलेक्शन सिस्टम को पूरी तरह डिजिटल बनाने के लिए उठाया जा रहा है। अभी कई टोल प्लाजा पर कैश भुगतान की वजह से लंबी कतारें लग जाती हैं और लोगों का काफी समय बर्बाद होता है। डिजिटल भुगतान से न सिर्फ ट्रैफिक जाम कम होगा, बल्कि टोल वसूली में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, देशभर में FASTag की पहुंच अब 98 प्रतिशत से ज्यादा हो चुकी है। RFID तकनीक से लैस FASTag की वजह से वाहन बिना रुके आसानी से टोल पार कर रहे हैं। इसके साथ ही NHAI ने सभी टोल प्लाजा पर UPI पेमेंट की सुविधा भी शुरू कर दी है, ताकि लोगों को डिजिटल भुगतान के कई विकल्प मिल सकें।

फिलहाल जिन वाहनों के पास वैध FASTag नहीं होता, उनसे कैश पेमेंट करने पर दोगुना टोल शुल्क लिया जाता है। वहीं UPI से भुगतान करने पर यात्रियों को केवल 1.25 गुना शुल्क देना पड़ता है। सरकार का मानना है कि जब कैश पूरी तरह हट जाएगा, तो लोग खुद-ब-खुद डिजिटल मोड अपनाएंगे और टोल प्लाजा पर अव्यवस्था कम होगी।

इसके अलावा FASTag का सालाना पास भी लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है। इस पास के तहत 3,000 रुपये का एकमुश्त भुगतान करने पर एक साल तक या 200 बार टोल बूथ पार करने की सुविधा मिलती है। इससे बार-बार रिचार्ज कराने की झंझट खत्म हो जाती है। बताया जा रहा है कि अब तक 50 लाख से ज्यादा लोग इस सालाना पास का लाभ उठा चुके हैं।

सरकार का उद्देश्य है कि देश के करीब 1,150 टोल प्लाजा पर सफर को तेज, आसान और पूरी तरह डिजिटल बनाया जाए। अगर 1 अप्रैल से कैश भुगतान बंद करने का फैसला लागू होता है, तो यात्रियों को पहले से FASTag या UPI की व्यवस्था कर लेनी होगी। यह बदलाव आने वाले समय में हाईवे यात्रा को ज्यादा सुगम और आधुनिक बना सकता है।

AI समिट में प्रदर्शन पर बीजेपी का हमला, राहुल गांधी पर साजिश रचने का आरोप

बीजेपी नेता संबित पात्रा ने कहा कि यह कोई अचानक हुआ प्रदर्शन नहीं था, बल्कि इसकी पूरी योजना पहले से बनाई गई थी। उन्होंने दावा किया कि कुछ प्रदर्शनकारी बारकोड और पास के जरिए अंदर घुसे थे और उन्होंने जानबूझकर टी-शर्ट उल्टी पहनकर विरोध जताया। पात्रा के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम की रणनीति राहुल गांधी के आवास पर बनाई गई थी, जहां सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी भी मौजूद थीं।

संबित पात्रा ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह कदम देश की छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए उठाया गया। उन्होंने कहा कि जब भारत तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में दुनिया के सामने अपनी पहचान बना रहा है, तब ऐसे प्रदर्शन देश को बदनाम करने की कोशिश हैं।

Source: ANI

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भी विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब देश आगे बढ़ता है, तो कुछ लोगों को तकलीफ होती है। उनके मुताबिक, ऐसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में हंगामा करना भारत की प्रगति को रोकने जैसा है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पूरी दुनिया नई दिल्ली में हो रहे एआई समिट को देख रही थी और भारत के बढ़ते वैश्विक कद की सराहना कर रही थी। ऐसे समय में आयोजन स्थल पर हंगामा करना दुर्भाग्यपूर्ण है और इससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की छवि को नुकसान पहुंचा है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एआई समिट में 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल हैं और इस तरह की घटनाएं देश को बदनाम करने की कोशिश हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस देश की छवि खराब कर अराजकता फैलाना चाहती है।

Source: ANI

वहीं केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस प्रदर्शन से देश शर्मिंदा हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या राजनीति देश की गरिमा से ऊपर हो गई है।

इस पूरे मामले पर दिल्ली पुलिस ने भी कार्रवाई की बात कही है और हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ जारी है। एआई समिट के दौरान हुए इस विरोध प्रदर्शन ने तकनीकी सम्मेलन के बजाय राजनीतिक विवाद को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

अब दिल्ली से मेरठ सिर्फ 1 घंटे में, पीएम मोदी करेंगे नमो भारत ट्रेन का उद्घाटन

Namo Bharat rapid rail
Namo Bharat rapid rail

अब तक दिल्ली से मेरठ जाने में लोगों को भारी ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ता था। मोदीनगर और मुरादनगर जैसे इलाकों में जाम के कारण सफर में 2 से 3 घंटे तक लग जाते थे। लेकिन नमो भारत ट्रेन के शुरू होने से यह परेशानी अब बीते दिनों की बात हो जाएगी। हाई-स्पीड तकनीक से लैस यह ट्रेन यात्रियों को आरामदायक और तेज सफर का अनुभव देगी।

इस रूट की कुल लंबाई करीब 82 किलोमीटर है। पहले कुछ हिस्सों में ट्रेन का संचालन शुरू किया गया था, लेकिन अब पूरे रूट पर सेवा शुरू होने जा रही है। इसका मतलब है कि सराय काले खां से लेकर मोदीपुरम तक लगातार ट्रेन चलेगी और लोगों को बीच में वाहन बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

22 फरवरी को इसी दिन मेरठ में लोकल मेट्रो सेवा का भी उद्घाटन किया जाएगा। यह मेट्रो करीब 21 किलोमीटर तक चलेगी और शहर के अंदर यात्रा को आसान बनाएगी। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 30 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत आई है।

नमो भारत ट्रेन के शुरू होने से न सिर्फ यात्रियों का समय बचेगा, बल्कि दिल्ली और मेरठ के बीच रोजाना आने-जाने वाले ऑफिस कर्मचारियों, छात्रों और व्यापारियों को भी बड़ी सुविधा मिलेगी। इसके अलावा सड़क पर वाहनों की संख्या कम होगी, जिससे प्रदूषण और ट्रैफिक दोनों में राहत मिलेगी।

यह परियोजना एनसीआर क्षेत्र को आधुनिक और तेज परिवहन से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। आने वाले समय में इस तरह की हाई-स्पीड ट्रेनें अन्य शहरों तक भी पहुंचाई जाएंगी।

दिल्ली से मेरठ का सफर अब थकाने वाला नहीं बल्कि तेज, सुरक्षित और आरामदायक होने जा रहा है। नमो भारत ट्रेन के शुरू होते ही दोनों शहरों के बीच दूरी समय के लिहाज से काफी कम हो जाएगी और लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी आसान बनेगी।

AI समिट के दौरान भारत मंडपम में यूथ कांग्रेस का प्रदर्शन, शर्ट उतारकर जताया विरोध

नई दिल्ली: दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे एआई इंपैक्ट समिट के दौरान इंडियन यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने अचानक विरोध प्रदर्शन कर दिया। कार्यकर्ताओं ने शर्ट उतारकर नारेबाजी की और भारत-अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया। इस प्रदर्शन से कुछ देर के लिए कार्यक्रम स्थल पर अफरा-तफरी मच गई, जिसके बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सभी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता टी-शर्ट पहनकर अंदर पहुंचे थे, जिन पर प्रधानमंत्री की तस्वीर बनी हुई थी। कुछ ही देर बाद उन्होंने शर्ट उतारकर नारे लगाने शुरू कर दिए। प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारे लगाए गए और सरकार की विदेश नीति पर सवाल खड़े किए गए।

दूसरी ओर, बीजेपी ने इस पूरे घटनाक्रम को शर्मनाक बताया है। पार्टी नेताओं ने कहा कि कांग्रेस और उसके युवा संगठन इस तरह के प्रदर्शन से देश की छवि खराब कर रहे हैं। बीजेपी का आरोप है कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस केवल नाटक और हंगामे की राजनीति कर रही है।

दिल्ली पुलिस ने बताया कि इस मामले में पांच लोगों को हिरासत में लिया गया है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि ये कार्यकर्ता कार्यक्रम स्थल में पास के जरिए घुसे थे या क्यूआर कोड स्कैन कर अंदर आए थे। सुरक्षा व्यवस्था में किसी तरह की चूक हुई या नहीं, इसकी भी पड़ताल की जा रही है।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और आयोजकों से भी पूछताछ की जा रही है। भारत मंडपम जैसे संवेदनशील और अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम स्थल पर इस तरह का प्रदर्शन सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना होगा कि इस मामले में आगे क्या कानूनी कदम उठाए जाते हैं और राजनीतिक बयानबाजी किस दिशा में जाती है।

Unity Utsav 2.0: मानेकशॉ सेंटर में खेल और संस्कृति से जुड़ा पूर्वोत्तर, दिखी ‘One Nation, One Dream’ की झलक

Naveen Bansal
Naveen Bansal

Unity Utsav को एक ऐसे मंच के रूप में तैयार किया गया, जहां पूर्वोत्तर राज्यों के युवा अपनी प्रतिभा, पहचान और सांस्कृतिक विरासत को पूरे देश के सामने प्रस्तुत कर सकें। इस आयोजन ने युवाओं को न केवल अपनी कला दिखाने का मौका दिया, बल्कि आपसी समझ और भावनात्मक जुड़ाव को भी बढ़ाया।

इस उत्सव का पहला चरण 9 से 12 फरवरी 2026 तक खेल प्रतियोगिताओं के रूप में आयोजित किया गया था। इसमें फुटबॉल, वॉलीबॉल, बैडमिंटन सहित कई खेल शामिल थे। पूर्वोत्तर के अलग-अलग राज्यों से आए युवाओं ने शानदार प्रदर्शन किया और यह साबित किया कि खेल टीमवर्क, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता को मजबूत करने का सबसे अच्छा माध्यम है। इन प्रतियोगिताओं ने युवाओं में आत्मविश्वास और भाईचारे की भावना पैदा की।

दूसरा और अंतिम चरण 19 फरवरी को दिल्ली में सांस्कृतिक कार्यक्रम के रूप में आयोजित हुआ। इसमें अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम की लोकनृत्य और संगीत प्रस्तुतियां हुईं। रंग-बिरंगे परिधानों और पारंपरिक धुनों ने दर्शकों को पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध संस्कृति से रूबरू कराया। पूरा कार्यक्रम भारत की “एकता में विविधता” की मिसाल बन गया।

इस अवसर पर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उन्होंने असम राइफल्स के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम युवाओं को जोड़ने और देश में राष्ट्रीय एकता की भावना को और मजबूत करते हैं। खेल प्रतियोगिताओं में विजेता टीमों को ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया, जिससे युवाओं में उत्साह और बढ़ गया।

गौरतलब है कि Unity Utsav की शुरुआत वर्ष 2025 में हुई थी, जिसे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का मार्गदर्शन मिला था।

“Friends of the Hill People” के नाम से पहचानी जाने वाली Assam Rifles सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं को सशक्त बनाने, सामाजिक सौहार्द बढ़ाने और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभा रही है। Unity Utsav 2.0 ने यह साफ संदेश दिया कि खेल और संस्कृति के जरिए देश को एक सूत्र में पिरोया जा सकता है।

9-वर्षीय बच्चे ने जीती जिंदगी की बाजी कूल्हे के गंभीर इंफेक्शन को दी पटखनी

ग्रेटर नोएडा : फोर्टिस हॉस्पीटल ग्रेटर नोएडा के डॉक्टरों ने क्लीनिकल निर्णय और मल्टीडिसीप्लीनरी तालमेल का शानदार परिचय देते हुए, गंभीर किस्म के बोन इंफेक्शन से पीड़ित 9-वर्षीय बच्चे का सफलतापूर्वक उपचार कर उसे नया जीवनदान दिया है। इस बच्चे का इंफेक्शन इतना बिगड़ चुका था कि मरीज सेप्टिक शॉक में चला गया था और ऐसे में उसे बचाने के लिए अगले 10 दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट और इंटेंसिव केयर में रखा गया। इस बच्चे को जब अस्पताल लाया गया तो वह लगातार बुखार, और करीब एक हफ्ते से चलने-फिरने में परेशानी महसूस होने तथा दांए पैर के निचले हिस्से तथा कूल्हे में सूजन और दर्द से जूझ रहा था। इससे पहले, 4-5 दिनों तक अलग-अलग अस्पतालों में इलाज करवाने (ओपीडी और आईपीडी) के बावजूद, मरीज की हालत में कोई सुधार होने की बजाय उसकी हालत लगातार बिगड़ रही थी।


फोर्टिस हॉस्पीटल ग्रेटर नोएडा में भर्ती के बाद, इस बच्चे की हालत लगातार बिगड़ती गई, जबकि उसे दवाएं दी जा रही थीं। उसकी सांस तेज चलने लगी, और हृदय गति भी बढ़ गई जबकि पल्स कमजोर पड़ रही थी और पेशाब की मात्रा कम हो गई थी तथा ब्लड प्रेशर बॉर्डरलाइन पर था। जांच से पता चला कि उसका इंफेक्शन काफी बढ़ चुका था। विस्तृत जांच में उसके दाएं कूल्हे में ऑस्टियोमायलिटिस (बोन इंफेक्शन) की पुष्टि हुई और जोड़ में मवाद भर चुका था। मरीज को तत्काल पिडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) में शिफ्ट किया गया जहां डॉ कुशाग्र गुप्ता, कंसल्टेंट – पिडियाट्रिक्स, की देखरेख में इलाज शुरू हुआ।

मामले की गंभीरता को भांपते ही, डॉ भरत गोस्वामी, कंसल्टेंट ऑर्थोपिडिक्स, ने एनेस्थीसिया टीम, जिसमें डॉ भूप सिंह, एडिशनल डायरेक्टर एनेस्थीसियोलॉजी, फोर्टिस ग्रेटर नोएडा और डॉ स्वयंभू शुभम, अटेंडिंग कंसल्टेंट, इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी, फोर्टिस ग्रेटर नोएडा शामिल थे, के साथ मिलकर तत्काल इमरजेंसी सर्जरी शुरू की। मरीज के दांए कूल्हे के जोड़ से करीब 200 मिली मवाद निकाला गया। लेकिन जंग में जीत अभी दूर थी। इस सर्जरी के बाद, मरीज को पीआईसीयू में गहन चिकित्सा के लिए ले जाया गया। मरीज को अगले पांच दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया और ब्लड प्रेशर तथा उनके फेफड़ों और सांस को स्थिर करने के लिए कई प्रकार की दवाएं दी गईं। पिडियाट्रिक और क्रिटिकल केयर टीमों ने गंभीर सेप्सिस और इंफेक्शन को दूर करने के लिए चौबीसों घंटे कड़ी मेहनत की। आखिरकार 10 दिनों तक गहन निगरानी और उपचार के बाद, इस बच्चे की हालत धीरे-धीरे स्थिर होने लगी। उसे वेंटिलेटर से हटाने के बाद क्लीनिकल सुधार भी होने लगा। स्वास्थ्य लाभ और हालत स्थिर होने के बाद मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और एंटी-ट्यूबरक्युलर थेरेपी (एटीटी) के साथ-साथ एंटीबायोटिक एवं सपोर्टिव केयर की सलाह दी गई है।


इस मामले की और जानकारी देते हुए, डॉ कुशाग्र गुप्ता, कंसल्टेंट – पिडियाट्रिक्स, फोर्टिस हॉस्पीटल ग्रेटर नोएडा ने कहा, “बच्चों में बोन इंफेक्शन तेजी से बढ़ सकता है और यदि समय पर उपचार न किया जाए तो यह जीवनघाती भी होता है। शुरूआत में ही पहचान करने, तत्काल सर्जिकल सहायता मिलने और इंटेंसिव केयर मैनेजमेंट में तालमेल के चलते इस बच्चे का जीवन बचाने में सफलता मिली। इस मामले ने एक बार फिर जटिल किस्म की पिडियाट्रिक इमरजेंसी से निपटने में मल्टीडिसीप्लीनरी टीमों के बीच आपसी तालमेल के महत्व को उजागर किया है।”


डॉ भरत गोस्वामी, कंसल्टेंट ऑर्थोपिडिक्स, ने कहा, ”हमें सर्जरी के दौरान जिस मात्रा में मवाद और इंफेक्शन दिखायी दिया उससे हमें अंदाजा हुआ कि मरीज का रोग किस हद तक आक्रामक हो चुका था। तत्काल मवाद निकालने और इंटेंसिव पोस्ट-ऑपरेटिव केयर ने इस बच्चे के जोड़ का स्थायी क्षरण होने और इंफेक्शन को घातक होने से रोक दिया।

इस मामले ने बच्चों में बोन इंफेक्शन का समय पर उपचार न करने के चलते उत्पन्न होने वाले खतरों की ओर इशारा किया है। बोन इंफेक्शन के चलते सेप्टिक आर्थराइटिस, ऑस्टियोमायलिटिस, सेप्टिक शॉक तथा कई बार दीर्घकालिक विकलांगता भी पैदा हो सकती है। इलाज के बाद यह मरीज सुरक्षित तरीके से अपने घर लौट चुका है, धीरे-धीरे स्वास्थ्यलाभ कर रहा है – जो कि इस बात का प्रमाण है कि समय पर मेडिकल सहायता, एडवांस क्रिटिकल केयर और फोर्टिस हॉस्पीटल ग्रेटर नोएडा में टीमों के बीच तालमेल ने उसकी रिकवरी में योगदान दिया।”


सिद्धार्थ निगम, फेसिलिटी डायरेक्टर, “इस मामले ने फोर्टिस हॉस्पीटल ग्रेटर नोएडा के इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम्स और विभिन्न स्पेश्यलिटीज़ के बीच तालमेल को दर्शाया है। जब कोई बच्चा तेजी से बिगड़ती कंडीशन के साथ आता है, तो हमारी टीमें तत्काल, सटीकता और एक साझा उद्देश्य को ध्यान में रखकर काम में जुट जाती हैं। इस कम उम्र के मरीज के गंभीर सेप्सिस के उपचार के लिए न सिर्फ क्लीनिकल विशेषज्ञता की आवश्यकता थी बल्कि एडवांस क्रिटिकल केयर इंफ्रास्ट्रक्चर और समन्वित टीमवर्क भी जरूरी था। हमें गर्व है कि समय पर हस्तक्षेप और चौबीसों घंटे समर्पण भाव से उपचार कर हम इस बच्चे को स्वस्थ जीवन जीने का एक नया अवसर देने में सक्षम हुए हैं।

Indore Murder Case: तंत्र-मंत्र के नाम पर प्रेमिका की हत्या, जो हुआ सो हो गया… बोला आरोपी

पुलिस के अनुसार पीयूष और मृतक युवती की दोस्ती कॉलेज में हुई थी। दोनों के बीच प्रेम संबंध थे और शादी को लेकर बात चल रही थी, लेकिन परिवार की मंजूरी नहीं मिलने से विवाद बढ़ता गया। जांच में सामने आया है कि आरोपी युवती पर शक करता था और इसी बात को लेकर उनके बीच अक्सर झगड़ा होता था।

घटना वाले दिन युवती घर से यह कहकर निकली थी कि उसे जरूरी काम से बाहर जाना है। बाद में उसने परिवार को बताया कि वह दोस्त के साथ जन्मदिन पार्टी में जा रही है। उसी दिन आरोपी ने उसे अपने कमरे पर बुलाया। वहां किसी बात को लेकर विवाद हुआ और गुस्से में उसने युवती की जान ले ली।

हत्या के बाद आरोपी मुंबई भाग गया। पुलिस ने वहां से उसे गिरफ्तार किया और इंदौर लाकर पूछताछ शुरू की। पूछताछ में उसने यह भी स्वीकार किया कि वह जंगल में जाकर तंत्र-मंत्र और जादू-टोना कर मृतक की आत्मा को बुलाने की कोशिश कर रहा था। पुलिस का कहना है कि आरोपी मानसिक रूप से अस्थिर व्यवहार कर रहा है और बार-बार अपने बयान बदल रहा है।

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने युवती के निजी वीडियो और तस्वीरों का गलत इस्तेमाल किया और उन्हें सोशल मीडिया पर फैलाया। पुलिस अब डिजिटल सबूत, सीसीटीवी फुटेज और फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर पूरे मामले की कड़ी जोड़ रही है।

डीसीपी ने बताया कि आरोपी को तीन दिन की पुलिस रिमांड पर रखा गया है और उससे गहन पूछताछ जारी है। पुलिस का मानना है कि उसके बयान जांच को भटकाने की कोशिश हो सकते हैं। फिलहाल इंदौर पुलिस इस जघन्य अपराध से जुड़े हर पहलू की जांच कर रही है ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।

दिल्ली से अलवर तक दौड़ेगी नमो भारत रैपिड रेल, 22 स्टेशनों से बदलेगी NCR की तस्वीर

Namo Bharat Rapid Rail
Namo Bharat Rapid Rail

नई दिल्ली: दिल्ली से राजस्थान के अलवर तक अब सफर और तेज होने वाला है। दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल के बाद अब सरकार दिल्ली से गुरुग्राम, रेवाड़ी होते हुए अलवर तक नमो भारत रैपिड रेल कॉरिडोर शुरू करने की तैयारी कर रही है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से एनसीआर के लोगों को सुपरफास्ट और आरामदायक यात्रा की सुविधा मिलेगी।

यह नया रूट करीब 199 किलोमीटर लंबा होगा और इसमें कुल 22 स्टेशन बनाए जाएंगे। रैपिड रेल की अधिकतम रफ्तार 160 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। यह कॉरिडोर दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान को सीधे जोड़ देगा, जिससे रोजमर्रा के यात्रियों का समय बचेगा और ट्रैफिक का दबाव भी कम होगा।

परियोजना को तीन चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में दिल्ली से धारूहेड़ा तक करीब 70 किलोमीटर लंबी लाइन बनेगी, जिसमें 13 स्टेशन होंगे। दूसरे चरण में शाहजहांपुर-नीमराना-बेहरोड़ (एसएनबी) से सोतानाला तक चार स्टेशन बनाए जाएंगे। तीसरे चरण में एसएनबी से अलवर तक दो स्टेशन प्रस्तावित हैं। इस तरह पूरा रूट दिल्ली से अलवर तक जुड़ जाएगा।

दिल्ली से गुरुग्राम के बीच यह रैपिड रेल एनएच-48 के समानांतर चलेगी। इस हिस्से में साइबर सिटी, इफ्को चौक, राजीव चौक और हीरो होंडा चौक जैसे बड़े इलाकों पर स्टेशन बनने की योजना है। इससे ऑफिस जाने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।

इस प्रोजेक्ट से दिल्ली एयरपोर्ट को भी रैपिड रेल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि 2028 तक इस कॉरिडोर का काम पूरा हो जाए। अनुमान है कि 2030 तक रोजाना करीब 8.5 लाख यात्री इस रूट से सफर करेंगे। परियोजना की लागत लगभग 37 हजार करोड़ रुपये बताई जा रही है।

उस मां के सामने जाने की हिम्मत नहीं… हिट एंड रन केस में आरोपी नाबालिग के पिता का पछतावा

hit and run
hit and run

दिल्ली के द्वारका इलाके में हुए दर्दनाक हिट एंड रन मामले ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे में साहिल धनेश्रा नाम के युवक की जान चली गई। अब इस केस में स्कॉर्पियो चला रहे नाबालिग आरोपी के पिता का बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने गहरा अफसोस जताया और पीड़ित मां इन्ना माकन से माफी मांगी है।

उन्होंने साफ किया कि वे कानून और अदालत की प्रक्रिया का पूरा सम्मान करेंगे। जो भी आदेश न्यायालय देगा, उसका पालन करेंगे। उन्होंने भावुक होकर कहा कि वे पूरी जिंदगी पीड़ित परिवार के प्रति खुद को जिम्मेदार महसूस करेंगे और यह घटना उनके परिवार के लिए भी एक बड़ा सबक है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में उनके घर से ऐसी लापरवाही दोबारा नहीं होगी।

दूसरी तरफ, साहिल की मां इन्ना माकन ने माफी के सवाल पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि “किस बात की माफी? मेरी पूरी जिंदगी उजाड़ देने की?” उनका कहना है कि माफी इसलिए मांगी जा रही है क्योंकि मामला मीडिया में आ गया है। उन्होंने साफ कहा कि वे यह माफी स्वीकार नहीं कर सकतीं।

भावुक होते हुए इन्ना माकन ने सवाल उठाया कि अगर यही हादसा आरोपी के बेटे के साथ होता, तो क्या वे भी माफी स्वीकार कर पाते? उन्होंने कहा कि इस लापरवाही ने उनसे उनका सब कुछ छीन लिया है। अब न सुबह का मतलब रह गया है, न शाम का, न काम पर जाने की वजह और न ही जीने की चाह।

उन्होंने यह भी कहा कि पूरी चार्जशीट आने तक वे ज्यादा कुछ नहीं बोलेंगी, लेकिन उनका दर्द किसी माफी से कम नहीं हो सकता। यह मामला अब सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि तेज रफ्तार और लापरवाही की कीमत का बड़ा उदाहरण बन गया है।

Galgotias University को किया AI समिट से बाहर, रोबोट विवाद के बाद बड़ा एक्शन

Unitree Go2
Unitree Go2

नई दिल्ली: भारत की राजधानी दिल्ली में चल रहे इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 से गलगोटिया यूनिवर्सिटी को बाहर कर दिया गया है। समिट में एक रोबोटिक डॉग को अपनी तकनीक बताकर प्रदर्शित करने के आरोपों के बाद यह कार्रवाई की गई। सूत्रों के मुताबिक, विवाद बढ़ने के बाद आईटी मंत्रालय की ओर से यूनिवर्सिटी को अपना स्टॉल खाली करने का निर्देश दिया गया और वहां लगाए गए सभी उपकरण हटा दिए गए। यह कदम समिट की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए उठाया गया है।

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद समिट आयोजकों और मंत्रालय के अधिकारियों ने जांच की। जांच के बाद यूनिवर्सिटी को अपने काउंटर से हटने के निर्देश दिए गए। स्टॉल से सभी मशीनें और डिस्प्ले हटवा दिए गए और संबंधित रोबोटिक डिवाइस को भी वहां से निकाल लिया गया। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संस्थान को गलत जानकारी देकर इनोवेशन के नाम पर भ्रम फैलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

वहीं, इस विवाद पर गलगोटिया यूनिवर्सिटी की ओर से भी सफाई सामने आई है। यूनिवर्सिटी की प्रतिनिधि डॉ. ऐश्वर्या श्रीवास्तव ने कहा कि संस्थान ने कभी यह दावा नहीं किया कि रोबोटिक डॉग पूरी तरह से उन्होंने ही विकसित किया है। उन्होंने बताया कि यह डिवाइस चीन की कंपनी से खरीदी गई थी और इसे छात्रों के लिए एक लर्निंग टूल के रूप में रखा गया था, ताकि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स को समझ सकें।

यूनिवर्सिटी का कहना है कि सोशल मीडिया पर जो वीडियो वायरल हुए, उनमें गलत तरीके से यह दिखाया गया कि यह पूरी तरह उनका खुद का इनोवेशन है। हालांकि, आयोजकों का मानना है कि प्रस्तुति के तरीके से लोगों को भ्रम हुआ और इसी कारण यह सख्त कदम उठाया गया।

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर टेक और शिक्षा जगत में चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के आयोजनों में पारदर्शिता बेहद जरूरी है, ताकि भारतीय नवाचार की साख बनी रहे। AI समिट से गलगोटिया यूनिवर्सिटी को हटाया जाना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि गलत दावों पर अब सख्त कार्रवाई होगी।