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Galgotias University को किया AI समिट से बाहर, रोबोट विवाद के बाद बड़ा एक्शन

Unitree Go2
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नई दिल्ली: भारत की राजधानी दिल्ली में चल रहे इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 से गलगोटिया यूनिवर्सिटी को बाहर कर दिया गया है। समिट में एक रोबोटिक डॉग को अपनी तकनीक बताकर प्रदर्शित करने के आरोपों के बाद यह कार्रवाई की गई। सूत्रों के मुताबिक, विवाद बढ़ने के बाद आईटी मंत्रालय की ओर से यूनिवर्सिटी को अपना स्टॉल खाली करने का निर्देश दिया गया और वहां लगाए गए सभी उपकरण हटा दिए गए। यह कदम समिट की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए उठाया गया है।

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद समिट आयोजकों और मंत्रालय के अधिकारियों ने जांच की। जांच के बाद यूनिवर्सिटी को अपने काउंटर से हटने के निर्देश दिए गए। स्टॉल से सभी मशीनें और डिस्प्ले हटवा दिए गए और संबंधित रोबोटिक डिवाइस को भी वहां से निकाल लिया गया। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संस्थान को गलत जानकारी देकर इनोवेशन के नाम पर भ्रम फैलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

वहीं, इस विवाद पर गलगोटिया यूनिवर्सिटी की ओर से भी सफाई सामने आई है। यूनिवर्सिटी की प्रतिनिधि डॉ. ऐश्वर्या श्रीवास्तव ने कहा कि संस्थान ने कभी यह दावा नहीं किया कि रोबोटिक डॉग पूरी तरह से उन्होंने ही विकसित किया है। उन्होंने बताया कि यह डिवाइस चीन की कंपनी से खरीदी गई थी और इसे छात्रों के लिए एक लर्निंग टूल के रूप में रखा गया था, ताकि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स को समझ सकें।

यूनिवर्सिटी का कहना है कि सोशल मीडिया पर जो वीडियो वायरल हुए, उनमें गलत तरीके से यह दिखाया गया कि यह पूरी तरह उनका खुद का इनोवेशन है। हालांकि, आयोजकों का मानना है कि प्रस्तुति के तरीके से लोगों को भ्रम हुआ और इसी कारण यह सख्त कदम उठाया गया।

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर टेक और शिक्षा जगत में चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के आयोजनों में पारदर्शिता बेहद जरूरी है, ताकि भारतीय नवाचार की साख बनी रहे। AI समिट से गलगोटिया यूनिवर्सिटी को हटाया जाना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि गलत दावों पर अब सख्त कार्रवाई होगी।

कूनो में फिर गूंजी किलकारियां, भारत में चीता परिवार 38 हुआ

इस नई सफलता के साथ भारत में पैदा हुए जिंदा चीता शावकों की संख्या बढ़कर 27 हो गई है, जबकि देश में कुल चीतों की आबादी अब 38 तक पहुंच गई है। यह नौवीं बार है जब भारतीय जमीन पर चीतों का सफल प्रजनन दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह आंकड़ा प्रोजेक्ट चीता की मजबूती को दिखाता है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हर सफल जन्म इस बात का सबूत है कि वन विभाग की टीम और पशु चिकित्सक लगातार मेहनत कर रहे हैं। उन्होंने इसे कूनो और पूरे देश के लिए गर्व का पल बताया और उम्मीद जताई कि गामिनी और उसके तीनों शावक स्वस्थ और मजबूत बनेंगे।

गौरतलब है कि 2022-23 में नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से कुल 20 चीतों को भारत लाया गया था। इसे दुनिया का पहला ऐसा बड़ा प्रयास माना गया, जिसमें एक बड़े शिकारी जानवर को एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप में बसाया गया। इस ऐतिहासिक पहल की शुरुआत 17 सितंबर 2022 को हुई थी, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले आठ चीतों को कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा था।

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार हो रहे जन्म यह संकेत देते हैं कि चीतों ने भारतीय पर्यावरण के साथ खुद को ढालना शुरू कर दिया है। आने वाले समय में इनकी संख्या और बढ़ने की उम्मीद है।

कूनो नेशनल पार्क अब सिर्फ पर्यटन का केंद्र नहीं, बल्कि चीता संरक्षण की नई पहचान बन चुका है। तीन नए शावकों के जन्म के साथ देश में चीता पुनर्वास की कहानी को एक नई रफ्तार मिली है, जिसे आने वाली पीढ़ियां याद रखेंगी।

आलू बेचने का स्मार्ट तरीका: ABC ग्रेड अपनाएं, मुनाफा 20% तक बढ़ाएं

potato farming profit
potato farming profit

उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में इन दिनों आलू की खुदाई का काम तेजी से चल रहा है। खेतों से आलू निकल चुके हैं, लेकिन अब किसानों के सामने सबसे बड़ी चिंता सही दाम पाने की है। कई बार मेहनत से उगाई गई फसल मंडी में उम्मीद से कम भाव पर बिक जाती है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार किसानों के मुनाफे की असली चाबी “ग्रेडिंग” यानी आलू की सही छंटाई में छिपी है।

अक्सर किसान पूरी फसल को बिना छांटे सीधे मंडी ले जाते हैं। इसमें अच्छे और खराब आलू एक साथ मिल जाते हैं, जिससे व्यापारी पूरे माल का दाम कम लगा देते हैं। जानकारों के अनुसार, अगर किसान आलू को A, B और C ग्रेड में बांट लें, तो उन्हें 15 से 20 प्रतिशत तक ज्यादा मुनाफा मिल सकता है।

ग्रेडिंग करने का तरीका बहुत आसान है। खुदाई के बाद आलू को कुछ समय हवादार जगह पर फैलाकर सुखा लेना चाहिए, ताकि मिट्टी साफ हो जाए। इसके बाद आलू को आकार और गुणवत्ता के आधार पर अलग करें। बड़े और एक जैसे आकार वाले आलू को A ग्रेड में रखें, क्योंकि होटल, चिप्स बनाने वाली कंपनियां और बड़े व्यापारी इन्हीं को पसंद करते हैं। मध्यम आकार के आलू को B ग्रेड में रखें, जो घरों में इस्तेमाल के लिए ज्यादा बिकते हैं। कटे-फटे, छोटे या रोग लगे आलू को C ग्रेड में अलग कर देना चाहिए।

विशेषज्ञ बताते हैं कि व्यापारी सबसे पहले फसल की एकरूपता और सफाई देखते हैं। साफ, सूखे और बराबर आकार के आलू की मांग ज्यादा होती है और ग्राहक इसके लिए प्रीमियम दाम देने को तैयार रहते हैं। सही ग्रेडिंग से आलू की शेल्फ लाइफ भी बढ़ती है और भंडारण में नुकसान कम होता है।

एक और जरूरी बात यह है कि खराब आलू को अच्छी फसल के साथ कभी न रखें, क्योंकि एक सड़ा आलू पूरी बोरी खराब कर सकता है। साफ पैकिंग और अलग-अलग लॉट बनाकर बेचने से किसान की सौदेबाजी की ताकत भी बढ़ती है।

AI Summit 2026 में गेमिंग का धमाका, भारतीय स्टार्टअप्स दिखाएंगे भविष्य के गेम्स

ai impact summit 2026
ai impact summit 2026

सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, इन स्टार्टअप्स की मौजूदगी यह साबित करती है कि भारत अब सिर्फ गेम खेलने वाला देश नहीं रहा, बल्कि गेम बनाने और नई तकनीक विकसित करने में भी आगे बढ़ रहा है। AI, वर्चुअल रियलिटी और इंटरैक्टिव मीडिया के जरिए गेमिंग का अनुभव पूरी तरह बदलने की तैयारी है।

इस समिट में तीन खास स्टार्टअप्स अपने प्रोजेक्ट्स दिखा रहे हैं। पहला स्टार्टअप ऐसा AI प्लेटफॉर्म लेकर आया है जो गेम के लिए कैरेक्टर डिजाइन, बैकग्राउंड, स्टोरीबोर्ड और एनिमेशन कुछ ही मिनटों में तैयार कर सकता है। इससे गेम डेवलपर्स का समय और खर्च दोनों कम होगा और नए गेम तेजी से बनाए जा सकेंगे।

दूसरा स्टार्टअप अपने मल्टीप्लेयर क्रिकेट गेम को पेश कर रहा है, जिसे दुनिया भर में करोड़ों लोग खेलते हैं। खास बात यह है कि इसमें जनरेटिव AI से बनी रियल-टाइम कमेंट्री जोड़ी गई है, जिससे खिलाड़ी को लाइव मैच जैसा अनुभव मिलता है।

तीसरा स्टार्टअप एक अनोखा मोबाइल हैंडहेल्ड गेमिंग सिस्टम लेकर आया है। यह सिस्टम किसी भी आम स्मार्टफोन को गेमिंग कंसोल में बदल देता है। यानी अब बिना महंगे कंसोल के भी हाई-लेवल गेमिंग का मजा लिया जा सकेगा।

समिट के दौरान एक खास पैनल चर्चा भी रखी गई है, जिसमें निवेशक और टेक एक्सपर्ट यह बताएंगे कि AI आधारित गेमिंग में भारत के लिए कितने बड़े मौके हैं। इस चर्चा में यह भी बताया जाएगा कि आने वाले समय में गेम डेवलपमेंट कैसे बदलेगा और युवाओं को किन नई स्किल्स की जरूरत होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि AI Summit 2026 भारतीय गेमिंग इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। इससे न सिर्फ स्टार्टअप्स को पहचान मिलेगी, बल्कि भारत को ग्लोबल गेमिंग मैप पर मजबूत जगह भी मिलेगी। गेमिंग लवर्स के लिए यह समिट भविष्य की झलक है, जहां गेम सिर्फ खेल नहीं, बल्कि एक नया डिजिटल अनुभव बन जाएगा।

‘पहले खुद पूरा वंदे मातरम गाइए’, योगी के बयान पर प्रियंका चतुर्वेदी का तीखा जवाब

प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि यह बयान पूरी तरह राजनीतिक दिखावा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पहले योगी आदित्यनाथ खुद वंदे मातरम के सभी छह अंतरे पूरे गाकर सुनाएं, उसके बाद यह तय करें कि कौन देशभक्त है और कौन राष्ट्र विरोधी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गीत को राजनीति से जोड़ना समाज को बांटने वाली सोच को बढ़ावा देता है।

प्रियंका ने आगे कहा कि वंदे मातरम सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि आज़ादी के आंदोलन से जुड़ा भावनात्मक प्रतीक है। इसे राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल करना सही नहीं है। उनका कहना था कि देशभक्ति का प्रमाण भाषणों से नहीं, बल्कि काम और व्यवहार से होता है।

दरअसल, उत्तर प्रदेश विधानसभा में बजट सत्र के दौरान राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा हो रही थी। इसी दौरान योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समाजवादी पार्टी राष्ट्रगीत वंदे मातरम का विरोध करती है। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि राष्ट्रीय प्रतीकों के खिलाफ अपमानजनक बयान देना देशद्रोह से कम नहीं है।

इस बयान के बाद विपक्षी दलों की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों पर आरोप लगाए जा रहे हैं, उनके साथियों ने खुद कब वंदे मातरम गाया था, यह भी देखा जाना चाहिए।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधानसभा सत्र के दौरान ऐसे मुद्दे अक्सर राजनीतिक बहस का रूप ले लेते हैं। वंदे मातरम जैसे भावनात्मक विषय पर बयान देना जनता का ध्यान खींचने का आसान तरीका बन जाता है।

फिलहाल यह विवाद बयानबाजी तक ही सीमित है, लेकिन इससे साफ है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाएगा। एक तरफ सरकार इसे राष्ट्र भावना से जोड़ रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश बता रहा है। वंदे मातरम को लेकर शुरू हुई यह बहस अब प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ लेती नजर आ रही है।

यूनुस का विदाई बयान बना विवाद की वजह, ‘सेवन सिस्टर्स’ पर फिर उठी नई बहस

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख रहे मोहम्मद यूनुस ने इस्तीफा देने से पहले एक बार फिर ऐसा बयान दिया, जिसने भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में नई चर्चा छेड़ दी है। अपने विदाई भाषण में उन्होंने ‘सेवन सिस्टर्स’ यानी भारत के पूर्वोत्तर राज्यों का ज़िक्र करते हुए समुद्र तक पहुंच और क्षेत्रीय आर्थिक संभावनाओं की बात कही, लेकिन भारत का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया।

यूनुस ने कहा कि बांग्लादेश का समुद्री क्षेत्र सिर्फ उसके लिए नहीं, बल्कि पूरे इलाके की अर्थव्यवस्था से जुड़ा हुआ है और इसमें नेपाल, भूटान और ‘सेवन सिस्टर्स’ की बड़ी भूमिका हो सकती है। उनके इस बयान को लेकर भारत में यह माना जा रहा है कि उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों को भारत से अलग संदर्भ में पेश करने की कोशिश की है। यह पहली बार नहीं है, जब यूनुस ने ऐसा बयान दिया हो। इससे पहले चीन दौरे के दौरान भी उन्होंने ‘सेवन सिस्टर्स’ को समुद्र से कटा हुआ क्षेत्र बताया था।

इस बयान पर पहले भी भारत में तीखी प्रतिक्रिया आई थी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने इसे आपत्तिजनक और भड़काऊ बताया था। उनका कहना था कि ऐसे बयान पूर्वोत्तर भारत की संवेदनशील स्थिति को लेकर गलत संदेश देते हैं।

दरअसल, भारत के ये सात राज्य सिलीगुड़ी कॉरिडोर के जरिए देश के बाकी हिस्सों से जुड़े हैं। यह इलाका रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जाता है। चीन पहले से ही अरुणाचल प्रदेश पर दावा करता रहा है, जिससे यह मुद्दा और भी संवेदनशील हो जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यूनुस का बयान सिर्फ भौगोलिक नहीं, बल्कि राजनीतिक संकेत भी देता है। बांग्लादेश के कुछ छात्र नेताओं और पूर्व सैन्य अधिकारियों ने भी पहले ऐसे बयान दिए हैं, जिनमें पूर्वोत्तर भारत को लेकर विवादित बातें कही गई थीं।

हालांकि दूसरी सच्चाई यह भी है कि बांग्लादेश की 90 प्रतिशत से ज्यादा सीमा भारत से लगती है और वह व्यापार व सुरक्षा के मामलों में भारत पर काफी हद तक निर्भर है। वहीं, भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के लिए भी बांग्लादेश के रास्ते संपर्क आसान होता है।

CBSE का बड़ा फैसला: 10वीं की पहली बोर्ड परीक्षा देना अब जरूरी

new rule
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सीबीएसई के अनुसार, जो छात्र पहली बोर्ड परीक्षा में तीन या उससे अधिक विषयों में परीक्षा नहीं देता है, उसे दूसरी परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ऐसे छात्रों को “एसेंशियल रिपीट” श्रेणी में रखा जाएगा। इसका मतलब यह है कि वे छात्र अगली बार सीधे अगले साल फरवरी में होने वाली मुख्य बोर्ड परीक्षा में ही शामिल हो सकेंगे।

हालांकि, जो छात्र पहली परीक्षा में शामिल होकर पास होते हैं, उन्हें अपनी परफॉर्मेंस सुधारने का मौका मिलेगा। ऐसे छात्र विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान और भाषा विषयों में से किसी भी तीन विषयों में सुधार परीक्षा (इम्प्रूवमेंट) दे सकते हैं। यह सुविधा केवल उन्हीं छात्रों को मिलेगी जिन्होंने पहली परीक्षा दी हो और पास होने के योग्य हों।

अगर किसी छात्र का पहली बोर्ड परीक्षा में परिणाम “कम्पार्टमेंट” आता है, तो उसे दूसरी बोर्ड परीक्षा में कम्पार्टमेंट श्रेणी के तहत बैठने की अनुमति दी जाएगी। यानी जिन छात्रों का एक या दो विषयों में कम्पार्टमेंट आया है, वे दूसरी परीक्षा देकर अपनी स्थिति सुधार सकते हैं।

सीबीएसई ने यह भी स्पष्ट किया है कि कक्षा 10वीं पास करने के बाद छात्र किसी भी तरह का अतिरिक्त या स्टैंड-अलोन विषय नहीं ले सकेंगे। बोर्ड का मानना है कि इससे परीक्षा प्रणाली में अनुशासन बना रहेगा और छात्र गंभीरता से पहली बोर्ड परीक्षा में शामिल होंगे।

बोर्ड अधिकारियों के मुताबिक, इस नई नीति का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी छात्र पहली बोर्ड परीक्षा को हल्के में न लें और नियमित रूप से परीक्षा प्रक्रिया में भाग लें। इससे फर्जी या अधूरी उपस्थिति पर रोक लगेगी और परिणाम अधिक पारदर्शी होंगे।

सीबीएसई की यह नई व्यवस्था छात्रों के लिए एक सख्त लेकिन जरूरी कदम मानी जा रही है। अब छात्रों को पहली बोर्ड परीक्षा को बेहद गंभीरता से लेना होगा, क्योंकि आगे का रास्ता उसी पर निर्भर करेगा। यह फैसला आने वाले वर्षों में परीक्षा व्यवस्था को ज्यादा व्यवस्थित और अनुशासित बनाने में मदद करेगा।

बीजेपी नेता की अकाली दल में वापसी: राजनीतिक पुनर्संरचना या चुनावी संकेत?

अरविंद खन्ना की शिरोमणि अकाली दल में वापसी को केवल सामान्य दल-बदल के रूप में नहीं देखा जा सकता। पंजाब की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों में ऐसे घटनाक्रम अक्सर गहरे संकेत देते हैं—संगठनात्मक असंतोष, नई राजनीतिक संभावनाएँ और आगामी चुनावों की तैयारी।

धूरी से पूर्व विधायक रहे खन्ना ने अपने राजनीतिक जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। कांग्रेस से दूरी बनाने के बाद वे भारतीय जनता पार्टी से जुड़े और प्रदेश इकाई में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी संभाली। हालांकि हालिया चुनावों में उन्हें सफलता नहीं मिली। ऐसे में अकाली दल में उनकी वापसी को एक रणनीतिक पुनर्विचार के रूप में देखा जा रहा है। स्वयं खन्ना ने इसे “घर वापसी” बताया है।


संगरूर मुख्यमंत्री भगवंत मान का गृह जिला है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी बड़े नेता का दल परिवर्तन प्रतीकात्मक और व्यावहारिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण हो जाता है। खन्ना का स्थानीय प्रभाव और लंबे समय से जनता के बीच सक्रिय रहना अकाली दल के लिए संगठनात्मक मजबूती का आधार बन सकता है।


अकाली दल से अलग होने के बाद भारतीय जनता पार्टी पंजाब में स्वतंत्र आधार बनाने का प्रयास कर रही है, परंतु ग्रामीण क्षेत्रों में उसे अपेक्षित सफलता नहीं मिली है। राज्य स्तर के पदाधिकारी रहे खन्ना का प्रस्थान इस बात का संकेत माना जा सकता है कि पार्टी को अभी भी जमीनी ढांचे को सुदृढ़ करने की आवश्यकता है।


सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व में अकाली दल अपनी राजनीतिक जमीन फिर से मजबूत करने की दिशा में प्रयासरत है। अनुभवी नेताओं को साथ जोड़कर पार्टी अपने परंपरागत आधार को पुनर्जीवित करना चाहती है। खन्ना का अपने समर्थकों सहित शामिल होना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

विचारधारा से अधिक चुनावी गणित?

पंजाब की राजनीति में दल परिवर्तन प्रायः वैचारिक मतभेदों से अधिक चुनावी समीकरणों पर आधारित होते हैं। खन्ना का निर्णय भी राजनीतिक व्यवहारिकता से प्रेरित प्रतीत होता है। लगातार चुनावी असफलताओं ने उनके लिए नई दिशा चुनने की आवश्यकता उत्पन्न की होगी।

दूसरी ओर, अकाली दल इसे क्षेत्रीय अस्मिता के रूप में प्रस्तुत कर रहा है—ऐसा संदेश देते हुए कि राज्य की राजनीति का नेतृत्व स्थानीय दलों के हाथ में होना चाहिए।

अरविंद खन्ना की वापसी तात्कालिक रूप से समीकरण न बदले, परंतु यह स्पष्ट है कि पंजाब की राजनीति में हलचल तेज हो चुकी है और आने वाले समय में इसके व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।

SIR में गड़बड़ी पर चुनाव आयोग सख्त, बंगाल के 7 अफसर निलंबित

पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची को दुरुस्त करने के लिए चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (SIR) में लापरवाही सामने आने पर चुनाव आयोग ने कड़ा कदम उठाया है। आयोग ने राज्य के 7 अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इन पर गंभीर कर्तव्यहीनता और अधिकारों के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है।

चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची चुनाव की सबसे अहम प्रक्रिया होती है। इसमें यह तय किया जाता है कि योग्य मतदाताओं के नाम सही तरीके से जोड़े जाएं और अपात्र नाम हटाए जाएं। अगर इस काम में गड़बड़ी होती है तो चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो सकते हैं। इसी वजह से आयोग ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है।

निलंबित किए गए अधिकारियों में अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों के सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (AERO) शामिल हैं। ये अधिकारी मुर्शिदाबाद, फरक्का, सूती, मयनागुड़ी, कैनिंग पूर्व और देबरा जैसे क्षेत्रों से जुड़े हैं। आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि राज्य सरकार इन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करे और इसकी रिपोर्ट जल्द से जल्द भेजे।

आयोग ने साफ कहा है कि चुनावी काम में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि हर योग्य नागरिक का नाम वोटर लिस्ट में हो और कोई भी फर्जी नाम शामिल न रहे।

इस कार्रवाई को प्रशासनिक स्तर पर एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि इससे यह स्पष्ट होता है कि चुनाव आयोग आगामी चुनावों को लेकर पूरी तरह सतर्क है और किसी भी तरह की गड़बड़ी पर तुरंत कार्रवाई करेगा।

हालांकि अभी तक राज्य सरकार या मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से इस फैसले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन मुख्य सचिव को दिए गए निर्देशों के बाद सरकारी महकमे में हलचल तेज हो गई है।

इस बीच चुनाव आयोग चुनावी तैयारियों की समीक्षा के लिए अन्य राज्यों का भी दौरा कर रहा है। आयोग का कहना है कि उसका लक्ष्य देशभर में स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराना है।

होली से पहले किसानों के खाते में पैसा, धान पर मिलेगा एमएसपी का अंतर

यह निर्णय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया। सरकार के मुताबिक इस योजना से राज्य के करीब 25 लाख से ज्यादा किसानों को फायदा मिलेगा। कुल मिलाकर लगभग 10 हजार करोड़ रुपये किसानों के खातों में भेजे जाएंगे।

कैबिनेट बैठक के बाद उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने प्रेस को जानकारी दी कि सरकार किसानों के हितों को सबसे ऊपर रखकर फैसले ले रही है। उन्होंने कहा कि होली से पहले भुगतान इसलिए किया जा रहा है ताकि किसानों को त्योहार के समय किसी तरह की आर्थिक परेशानी न हो और वे अपने परिवार के साथ खुशी से पर्व मना सकें।

सरकार ने बताया कि खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में राज्य के लगभग 25 लाख किसानों से 141 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की खरीदी की गई है। यह भुगतान ‘कृषक उन्नति योजना’ के तहत किया जा रहा है, जिसमें एमएसपी और तय दर के बीच का अंतर किसानों को दिया जाता है। बीते दो वर्षों में इसी योजना के तहत किसानों को 25 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि दी जा चुकी है। अब इस नई किस्त के बाद यह आंकड़ा और बढ़ जाएगा।

इस योजना का फायदा उन्हीं किसानों को मिलेगा जिन्होंने सरकारी खरीदी केंद्रों पर पंजीयन कराकर धान बेचा है। पैसा सीधे बैंक खाते में आने से बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और किसानों को पूरा लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और सरकार का उद्देश्य उन्हें उनके परिश्रम का पूरा मूल्य दिलाना है। होली से पहले यह राशि मिलने से ग्रामीण इलाकों में बाजार में रौनक बढ़ेगी और किसानों को आर्थिक सहारा मिलेगा। सरकार के इस फैसले से लाखों धान किसानों के चेहरों पर त्योहार से पहले मुस्कान आने की उम्मीद है।